प्रधानमंत्री मोदी की पाँच मध्य एशियाई देशों और रूस की यात्रा शुरू
ताशकंद पहुंचने पर प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया गया
श्री मोदी ने उजबेकिस्तान के प्रधानमंत्री शवकत मिरोमोनोविच और राष्ट्रपति करीमोव से मुलाकात की
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति करीमोव को 13वीं सदी के महान सूफी कवि अमीर खुसरो के खामसा-ए-खुसरो की एक विशेष प्रतिलिपि उपहारस्वरूप दी
उजबेकिस्तान के साथ नियमित रूप से उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने में भारत की गहरी रुचि: प्रधानमंत्री मोदी

 

6 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाँच मध्य एशियाई देशों और रूस की अपनी यात्रा के लिए रवाना हुए। अपनी यात्रा की शुरुआत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सबसे पहले उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे जहाँ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री श्री शवकत मिरोमोनोविच और उजबेकिस्तान के विदेश मंत्री एवं ताशकंद के मेयर ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

 

 

Hello Uzbekistan! I thank PM Shavkat Miromonovich Mirziyoyev for the warm welcome in Tashkent. Wonderful being here.

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

ताशकंद पहुँचने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उजबेकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

 

 

My first meeting in Uzbekistan was with PM Shavkat Miromonovich Mirziyoyev. We had a fruitful interaction.

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

इसके बाद प्रधानमंत्री श्री मोदी का आधिकारिक स्वागत किया गया।

श्री मोदी ने उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति श्री इस्लाम करीमोव से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच व्यापक वार्ता हुई। श्री मोदी ने वार्ता को ‘अत्यंत उपयोगी एवं फलदायी’ बताया।

 

My discussions with President Karimov were very productive, aimed towards further deepening India-Uzbekistan ties.

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति करीमोव को अमीर खुसरो के खामसा-ए-खुसरो की एक विशेष प्रतिलिपि उपहारस्वरूप दी। फारसी में लिखित इस कला को स्वर्ण एवं नीला सहित विभिन्न रंगों से सजाया गया है।

 

Delighted to gift President Islam Karimov a specially commissioned reproduction of Khamsa-i-Khusrau, by Amir Khusrau....

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

प्रधानमंत्री मोदी और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपति दोनों ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। उनकी उपस्थिति में भारत-उजबेकिस्तान भागीदारी को आगे और बढ़ाने के लिए मुख्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये गए। श्री मोदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच नियमित रूप से उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने में भारत की गहरी रुचि है। प्रधानमंत्री ने हिन्दी भाषा और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भी उजबेकिस्तान की प्रशंसा की।

 

Future is very bright for India-Uzbekistan ties…sharing my remarks at the joint press meet with President Karimov. https://nm4.in/1CkUcb5

Posted by Narendra Modi on Monday, July 6, 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक भोज का भी आयोजन किया गया था।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.