प्रश्न 1: प्रधानमंत्री महोदय, एएनआई से बात करने के लिए धन्यवाद, सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर आपको बधाई। 1-10 के पैमाने में आप अपनी सरकार को कितने अंक देंगे?

उत्तर: यह अधिकार इस देश के लोगों का है और वे ही हमारा मूल्यांकन करेंगे। मैं उनके अधिकार कैसे छीन सकता हूँ? मैंने देश को अपना रिपोर्ट कार्ड दे दिया है। हाल ही में, मीडिया ने कुछ सर्वेक्षणों के निष्कर्ष प्रकाशित किये हैं। आपने पहले ही देख लिया होगा। मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि हमने एक ठोस नींव रखी है जिस पर लोग हमारा मूल्यांकन कर सकते हैं।

प्रश्न 2: आप “अच्छे दिन” लाने के वादे के साथ आये थे। क्या आपकी सरकार उन लक्ष्यों को पूरा करने में सक्षम हो पाई जो आपने अपने पहले साल में निर्धारित किये थे?

उत्तर: हां। हमने जितना काम किया है, उससे मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। सबसे संतोषजनक बात यह रही कि हमने जो वादे किये थे कि हम ईमानदारी से काम करेंगे, हमारे इरादे बिल्कुल स्पष्ट होंगे और हम जो भी कार्य करेंगे वो देश के हित में होगा और इससे देश को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा, हम इन वादों पर खड़े उतरे। एक साल पहले की स्थिति को याद कीजिये। सरकार में विभिन्न स्तरों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ था और रोज नए-नए घोटाले सामने आते थे। कुछ व्यक्ति-विशेष हमारे कीमती प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके विपरीत, मेरी सरकार पर न ही भ्रष्टाचार का आरोप लगा है और न ही कोई घोटाले की बात सामने आई है। भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या थी। हम एक साफ़-सुथरी, पारदर्शी और कुशल सरकार लेकर आए हैं। बुरे दिनों की विदाई हुई है। क्या यह देश के लिए “अच्छे दिन” नहीं है? 

प्रश्न 3: पिछले वर्ष आपकी सबसे बड़ी सफलता क्या रही?

उत्तर: मेरी सरकार की उपलब्धियां और सफलताएं अनेक हैं। हालांकि, मैं यह मानता हूँ कि एक सरकार की सफलता इस बात में निहित है कि दूरदराज के गाँव के लोगों तक उसकी पहुँच हो। इसलिए, हम गरीब और वंचितों के हितों के लिए प्रयास कर रहे हैं। हमने देश के दूरस्थ गांवों में रहने वाले लोगों पर विशेष ध्यान दिया है। हमारा उद्देश्य जीवन, बुनियादी ढांचे और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है। हमने सभी मोर्चों पर एक साथ काम किया है ताकि आम आदमी के चेहरे पर एक मुस्कान लाई जा सके। उदाहरण के तौर पर, कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करना; सड़क एवं रेलवे में सुधार; बिजली उत्पादन एवं इसकी 24x7 उपलब्धता; आईआईटी, आईआईएम और एम्स की स्थापना; स्कूलों में शौचालयों का निर्माण; हेरिटेज सिटी का निर्माण; बेघर के लिए घरों का निर्माण; साफ़-सफाई; सबको डिजिटल रूप से जोड़ना, विश्व स्तर के उत्पाद बनाने से लेकर कौशल विकास एवं रोजगार सृजन; जिनके पास फण्ड नहीं है, उन्हें फण्ड देना; बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाना; आम आदमी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने से लेकर श्रम कल्याण सुनिश्चित करना; खेतों की सिंचाई से लेकर नदियों की स्थिति में सुधार लाना; राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाने से लेकर विदेशी संबंधों को मजबूत बनाना; हमने एक नई सोच और तेज गति से अपने सारे कार्य किये हैं।

प्रश्न 4: चुनाव के समय आपने काले धन को वापस लाने का वादा किया था, लेकिन फिर आपकी पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने इसे ‘चुनावी जुमला’ कह दिया और अरुण शौरी ने भी वित्त मंत्रालय की प्रक्रियाओं की आलोचना की। काले धन को वापस लाने में आपकी सरकार कितनी प्रतिबद्ध है?

उत्तर: मेरी सरकार काले धन को वापस लाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। हमने कर चोरी और काले धन पर सख्त कदम उठाए हैं। मैंने जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में हमने एसआईटी का गठन किया। हमने संसद में एक नया एवं सख्त कानून पास कराया किया है। हम ऐसे उपाय करना चाहते हैं जिसके बाद कोई भी करों के भुगतान से बचने और विदेश में धन जमा करने की न सोचे। हम विदेशी बैंकों में अवैध रूप से धनराशि जमा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कारवाई कर रहे हैं। हाल ही में कुछ ऐसे व्यक्तियों के नामों का खुलासा भी हुआ है। हम नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। हम अपने कर ढांचे में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग करना चाहते हैं।

साथ-ही-साथ हम एकाधिकार को समाप्त करना चाहते हैं जो काला धन और भ्रष्टाचार का कारण है। इसलिए हम कोयला और खनन जैसे क्षेत्रों में अध्यादेश लेकर आए। यह एक अच्छा कदम साबित हुआ। कोयला खदानों की पारदर्शी नीलामी के माध्यम से अब तक 3.30 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। यही स्थिति स्पेक्ट्रम की नीलामी में भी है। मैं तो यही मानता हूँ कि अगर आपके इरादे नेक हैं, तो आप आवश्यक सहयोग और सफलता अवश्य मिलेगी।

प्रश्न 5: भूमि अधिग्रहण विधेयक जैसे महत्वपूर्ण बिलों का विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है। वे सरकार की मंशा के बारे में लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया है। इस पर आप को क्या कहना है?

उत्तर: हमारे भूमि अधिग्रहण विधेयक का विरोध पूरी तरह से अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण है। हमने निजी उद्योग के लिए कोई परिवर्तन नहीं किया है। इसके अलावा, अगर आपके पास पैसा है तो आपको जमीन खरीदने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून की जरूरत नहीं है। कुछ व्यक्तियों ने राजस्थान, हरियाणा, शिमला, दिल्ली आदि में ऐसा किया भी है। सरकार द्वारा संचालित सामरिक और विकास गतिविधियों, खासकर अविकसित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण आवश्यक हो जाता है। और यह भी ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। हमने केवल वो बदलाव किये हैं जिनकी मांग राज्यों ने की थी। गाँव के गरीबों को इन परिवर्तनों का लाभ सिंचाई, आवास, विद्युतीकरण के रूप में मिलेगा और गाँवों के समस्त बुनियादी ढांचे में भी विकास होगा।

इस देश में भूमि अधिग्रहण अधिनियम लगभग 120 साल पुराना था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें आजादी के बाद उसी पुराने कानून का प्रयोग करती रही। अचानक पिछले संसदीय चुनावों से पहले कांग्रेस ने आनन-फानन में एक ऐसा कानून बना दिया जो न ही किसानों के हित में है और न ही देश के विकास के हित में। अब वे इस पर बैठ कर चर्चा भी नहीं करना चाहते हैं। हम सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत में विश्वास करते हैं। मैंने व्यक्तिगत रूप से संसद में अपील की है कि हम राजनीतिक दलों के साथ बातचीत करने और उनके सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि विभिन्न पार्टियां राजनीतिक हित न देखते हुए देश के इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर हमारा सहयोग करेंगे।

प्रश्न 6: आप किसानों को कैसे आश्वस्त करेंगे कि आप उनके हित में कार्य कर रहे हैं?

उत्तर: प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के लाभ और राष्ट्र के दीर्घकालिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए तैयार किया गया है। दुनिया तेजी से बदल रही है। किसानों को सिंचाई के लिए नहरों और उत्पादों को खेतों से बाजार तक ले जाने के लिए सड़कों की जरूरत है। उन्हें अस्पतालों, स्कूलों और घरों की जरूरत है। किसान भी अपने क्षेत्र में आधुनिक सुविधाएं चाहते हैं और अपने बेटे-बेटियों के लिए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर चाहते हैं। मैं हमेशा यह मानता हूँ कि अगर हम समावेशी विकास चाहते हैं, तो हमें सुख-सुविधाओं की जरूरत है। हमें कृषि के विकास के साथ-साथ इन सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इस विधेयक में किसानों के हितों की रक्षा के साथ-साथ इन चीजों पर भी ध्यान दिया गया है। 2013 के कानून में जो नौकरशाही संबंधी बाधाएं हैं, हमने अपने संशोधन में उन्हें दूर करने का प्रयास किया है। मुझे विश्वास है कि हमारे देश के किसान यह समझ पाएंगे कि उनका वास्तविक कल्याण किसमें निहित है।

प्रश्न 7: देश में कृषि संकट है। बहुत हद तक यह समस्या स्थानिक है और दशकों से कुप्रबंधन इस वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार है लेकिन किसानों द्वारा की जाने वाली आत्महत्या को रोकने और खेती के तनाव को दूर करने के लिए आपकी सरकार की क्या योजनाएं हैं?

उत्तर: इस समस्या का मूल कारण आपके अपने प्रश्न में ही निहित है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार इसे लेकर चिंतित है। हमने हाल के कृषि संकट को देखते हुए तत्परता से कई कदम उठाए हैं। हमने कई सुधार किये हैं। केंद्र सरकार ने फसल में हुई हानि के लिए दिये जाने वाले मुआवजे की रकम में 50% की बढ़ोतरी की है। मुआवजे के लिए फसल के नुकसान की न्यूनतम सीमा को भी 50% से घटाकर 33% कर दिया गया है। ख़राब हुए खाद्यान्नों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दरों पर खरीद के लिए मानदंड आसान बना दिए गए हैं। हमारे लगातार दो बजट में कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाया गया है।

लेकिन जैसा कि आपने कहा, कृषि क्षेत्र में समस्या स्थानिक है। पिछले छह दशकों से कुछ खास किया नहीं गया। लेकिन हमने कृषि क्षेत्र के लिए ऐसे कदम उठाए हैं जिससे दीर्घकालीन लाभ मिलेगा। हर खेत के लिए सिंचाई की समस्या को हल करने और पानी के कुशल उपयोग के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की गई है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता में सुधार लाने के लिए नीली क्रांति भी एक महत्वपूर्ण कदम है। हमने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की है। खराब होने वाली वस्तुओं के लिए 500 करोड़ रुपये का मूल्य स्थिरीकरण कोष बनाया गया है। स्वदेशी पशु के नस्लों के संरक्षण और विकास के उद्देश्य से राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरूआत की गई है। हमने गांवों के विकास के लिए ईमानदारी से और गंभीरतापूर्वक प्रयास किये हैं। मैंने हाल ही में किसान चैनल का शुभारंभ किया है जिससे किसानों को कृषि संबंधी एवं बाजारों के बारे में समय पर जानकारी मिल सकेगी। आने वाले दिनों में, मैं कृषि उत्पादकता बढ़ाने, ग्रामीण औद्योगिकीकरण, ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास और कोल्ड चेन सहित ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से निवेश आदि पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता हूँ।

प्रश्न 8: विपक्ष आपकी सरकार को सूट-बूट की सरकार कहती है। इस आरोप पर आपको क्या कहना है?

उत्तर: सूट-बूट कम-से-कम सूटकेस से तो बेहतर है। साठ साल शासन करने के बाद अचानक कांग्रेस को गरीबों की याद आ गई। कांग्रेस की अल्पकालीन एवं अदूरदर्शी नीतियों के कारण इस देश के लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा और गरीब तो गरीब ही रह गए। दुनिया के कई देश गरीबी उन्मूलन सहित कई क्षेत्रों में हमसे आगे बढ़ गए। कांग्रेस ने सारे काम ऐसे किये जिससे कि अगले चुनाव तक प्रासंगिक मुद्दे वैसे के वैसे ही रहें। क्या कोयला और स्पेक्ट्रम घोटालों या सीडब्ल्यूजी की असफलता से गरीबों को लाभ मिला? हर कोई जानता है कि इसका लाभ किसे मिला - कुछ चुने हुए उद्योगपतियों और ठेकेदारों को। कांग्रेस की राजनीति और साठ साल के उनके शासन का परिणाम यह रहा कि गरीबी अभी भी हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। एक-चौथाई परिवार बिना घरों के रह रहे हैं। अभी भी इस देश के बहुत सारे लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, बिजली और सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। आपको उनसे पूछना चाहिए – “अगर आप गरीबों के समर्थक थे तो आज भी भारत में गरीबी क्यों है?”

प्रश्न 9: विपक्ष कहता है कि आपकी सरकार उद्योगपतियों के हित के लिए कार्य करती है?

उत्तर: जिन लोगों ने कोयला जैसे कीमती प्राकृतिक संसाधनों और स्पेक्ट्रम को अपने पसंदीदा उद्योगपतियों को दे दिया हो, उन्हें यह कहने का कोई अधिकार नहीं है। हम देश के आम आदमी के लिए काम कर रहे हैं।

हमारी सरकार ने अपने शुरूआती महीनों में ही सभी स्कूलों में शौचालय उपलब्ध कराने का कार्य शुरू किया। क्या गरीबों के बच्चे इन पब्लिक स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं क्या?

हमने जन-धन योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन के लिए 14 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले। पहले भी बैंक थे और लोगों के पास बैंक खाता भी नहीं था। उन्होंने इतने वर्षों से क्या किया?

तथाकथित गरीब समर्थक सिर्फ यह दोहराते रहे कि सब्सिडी संबंधी समस्याएं हैं। हमने प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया कि एलपीजी सब्सिडी सीधे संबंधित व्यक्ति के पास पहुंचे।

हमने मुद्रा बैंक की शुरुआत की ताकि 6 करोड़ छोटे दुकानदारों और व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान की जा सके जिनमें से 61% अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक हैं।

हमने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की जिसके बारे में कांग्रेस ने साठ साल में नहीं सोचा।

हमने 2022 तक सभी बेघर परिवारों को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों के खर्च को कम करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई। इसके फलस्वरूप उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

हम गरीबों और वंचितों, वृद्ध नागरिकों एवं कम आय वाले लोगों के लिए  व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना लेकर आए।

हमने स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की ताकि गरीब स्वस्थ रहें और उनके आस-पास का वातावरण स्वच्छ रहे जिससे गरीब और श्रमिक पूरी कार्य क्षमता से अपना कार्य कर सकें।

यात्रा के लिए आम जनों द्वारा प्रयोग की जाने वाली भारतीय रेल की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।

युवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल विकास मंत्रालय का गठन किया है ताकि ‘मेक इन इंडिया’ के माध्यम से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराये जा सकें। अतीत में, देश में ऐसी अर्थव्यवस्था थी जिसमें रोजगार नहीं था।

हमने केन्द्र शासित प्रदेशों के पुलिस बलों में महिलाओं को आरक्षण दिया है। और यह तब किया है जब फ़िलहाल कोई चुनाव नहीं हैं।

हमारे आने से पहले कोयले नीलामी की कितनी बदतर स्थिति थी, यह सबको पता है, हमने इसके बावजूद भारत के कम विकसित राज्यों से तीन लाख करोड़ रुपये जमा किये हैं। यह पैसा उन राज्यों के गरीबों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

ये तो सिर्फ़ कुछ उदाहरण भर हैं। पिछले साठ सालों में यह सब चीजें क्यों नहीं की गईं? किसने उन्हें रोका? उनकी चिंता यह नहीं है कि हम गरीब समर्थक नहीं हैं। उनकी चिंता यह है कि वे गरीब समर्थक नहीं हैं और अब यह बात सबको पता चल रही है। लोग उन्हें पूछ रहे हैं: “अगर मोदी सरकार ऐसा सोच सकती है और छह से नौ महीने में ये सब कर सकती है तो आप क्यों नहीं सोच सके और साठ साल में ऐसा क्यों नहीं कर सके।”

प्रश्न 10: आपने 12 महीनों में 17 देशों की यात्रा की...इसके बारे में किसी ने आपसे अपेक्षा नहीं की थी क्योंकि आपको विदेश नीति मामलों में एक नौसिखिये के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन ऐसा लग रहा है कि देश की विदेश नीति को आगे बढ़ाने में आपको काफी आनंद आ रहा है। कोई टिप्पणी?

उत्तर: प्रधानमंत्री का यह अंतरराष्ट्रीय दायित्व होता है कि वह विदेशी गतिविधियों से जुड़ा रहे। सभी प्रधानमंत्रियों को यह करना होता है। यह एक एकीकृत दुनिया है। हमें अंतरराष्ट्रीय, बहुपक्षीय और द्विपक्षीय सम्मेलनों में भाग लेना होता है और अपने पड़ोसियों और अन्य देशों के साथ संबंधों को बेहतर बनाना होता है। हमारी विदेश नीति परिपक्व है और इसे आगे बढ़ाने के लिए एक पूर्ण व्यवस्था है। मैं केवल इसमें गतिशीलता प्रदान की है। हम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हमारे आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़तापूर्वक प्रयासरत हैं। हम नए-नए आर्थिक भागीदारी बनाने और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से ऊर्जा, खनिज, प्रौद्योगिकी और वित्त से जुड़े सहयोग प्राप्त करने और इन क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत हैं।

प्रश्न 11: वास्तविक रूप में देखा जाए तो क्या आपको लगता है कि वित्तीय मामले में चीन ने जो वादा किया है, वो उसे पूरा करेगा, क्या अमेरिकी बाजार में भारत को जगह मिलेगी और क्या पाकिस्तान अपना भारत विरोधी रूख छोड़ेगा? क्या हमारे छोटे-छोटे पड़ोसी देश हमें एक ऐसे देश के रूप में देखेंगे जो उनके साथ खड़ा हो न कि उनका दमन करता हो?

उत्तर: हाँ, मुझे विश्वास है कि जो भी वादे और समझौते हुए हैं, वे पूरे होंगे। जापान सरकार ने अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक और निजी वित्त पोषण हेतु 3.5 ट्रिलियन येन अर्थात लगभग 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर का सहयोग देने का वादा किया है; दो औद्योगिक पार्कों और 20 बिलियन अमरीकी डॉलर के निवेश के लिए चीन के साथ हमारा समझौता हुआ है; अगले पांच वर्षों में अमेरिकी कंपनियों से लगभग 42 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की योजना है। रूस ने भारत में हेलीकॉप्टर का निर्माण करने का प्रस्ताव दिया है। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ असैन्य परमाणु सहयोग समझौते और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अन्य समझौते हुए हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हम असैन्य परमाणु समझौते के क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़े हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से ऊर्जा के विस्तार के लिए अक्षय ऊर्जा का उपयोग करने हेतु दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है। कोरिया, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से पेंशन फंड के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों ने अच्छी प्रतिक्रिया दी है। सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने हमारे ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम का जबर्दस्त समर्थन किया है।

पड़ोसी देशों की बात की जाए तो पिछले 25 साल से अटकी हुई नेपाल में 5600 मेगावाट की पंचेश्वर परियोजना आगे बढ़ी है। इसी तरह बांग्लादेश के साथ हमने भूमि सीमा विवाद सुलझाया है। हम आपसी लाभ की भावना के साथ काम कर रहे हैं। किसी का भी दमन करने का कोई सवाल ही नहीं है। हाल ही में नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के दौरान हमने वहां हरसंभव मदद पहुंचाई जो हमारे भाईचारे के दृष्टिकोण को दिखाता है। पाकिस्तान के साथ भी हम अपने दीर्घकालीन दृष्टिकोण को जारी रखेंगे। हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना सहयोग और कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।

प्रश्न 12: अगर हम घरेलू मुद्दों पर लौटें तो कईयों ने आपकी इस बात के लिए आलोचना की है कि आप अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले अपनी पार्टी के लोगों पर ही लगाम लगाने में सक्षम नहीं हैं। आपका क्या कहना है?

उत्तर: हमारे संविधान में हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है और उसमें कोई समझौता नहीं होगा। सभी धर्मों का स्वागत करने और उनका सम्मान करने की परंपरा यहाँ उतनी ही पुरानी है जितना पुराना हमारा देश है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था: हम न केवल सार्वभौमिक सहनशीलता में विश्वास करते हैं, लेकिन हम सभी धर्मों को दिल से स्वीकार करते हैं। सभी धर्मों के लिए समान सम्मान का सिद्धांत हजारों साल से भारत के लोकाचार का एक अंग रहा है। और इसी कारण यह भारत के संविधान का अभिन्न अंग है। हमारा संविधान यूँ ही नहीं बना है। यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। मैं उम्मीद करता हूँ कि हर कोई इसे समझेगा और इसका सम्मान करेगा।

प्रश्न 13: आपकी पार्टी में क्यों कुछ लोग ऐसी अपमानजनक बातें बोलने में गौरवान्वित महसूस करते हैं जबकि वे जानते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री अपने मंत्रिमंडल में किसी धर्मांध का समर्थन नहीं कर सकते हैं?

उत्तर: जैसा कि मैंने पहले भी कहा है और मैं इसे फिर से कहता हूँ: किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई भेदभाव या हिंसा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पर मेरी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट है: सबका साथ, सबका विकास। हम बिना किसी जातिगत या धार्मिक भेदभाव के 1.25 अरब भारतीयों के साथ खड़े हैं और हम उनमें से प्रत्येक की प्रगति के लिए काम करेंगे। हमारे देश में सभी धर्मों के पास समान अधिकार है; और सभी धर्म न सिर्फ़ कानून की नजर में बल्कि समाज की नजर में भी समान हैं।

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"भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक होना चाहिए": पीएम मोदी ने तय किया 2047 का विजन
February 17, 2026

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, देश की राजधानी में शुरू हो चुका है। यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतने बड़े लेवल पर कोई ग्लोबल मीटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ANI की टेक्स्ट सर्विस को दिए एक खास इंटरव्यू में "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की थीम के तहत होने वाले इस समिट की गाइडिंग स्पिरिट पर जोर दिया। इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, मंत्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। वे इस बात पर चर्चा करेंगे कि AI का इस्तेमाल कैसे समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंटरव्यू में इस नए युग के लिए भारत के विजन पर जोर दिया और कहा कि AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज करना चाहिए। इंटरव्यू का पूरा विवरण इस प्रकार है:

ANI: भारत ग्लोबल साउथ में पहली बार AI इम्पैक्ट समिट 2026 होस्ट कर रहा है। समिट का मोटो है "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय"। इस समिट का विजन क्या है, और यह मोटो क्यों है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आज, AI एक सिविलाइज़ेशनल बदलाव के पॉइंट पर है। यह इंसानी काबिलियत को ऐसे तरीकों से बढ़ा सकता है जो पहले कभी नहीं हुए, लेकिन अगर इसे बिना गाइडेंस के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सोशल बुनियाद को भी टेस्ट कर सकता है। इसीलिए हमने जानबूझकर इस समिट को इम्पैक्ट के आस-पास बनाया है जो सिर्फ़ इनोवेशन ही नहीं, बल्कि सार्थक और बराबरी वाले नतीजे भी पक्का करता है। गाइड करने वाली भावना, "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय", भारत की सिविलाइज़ेशनल सोच को दिखाती है। टेक्नोलॉजी का आखिरी मकसद 'सबका भला, सबकी खुशी' होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, उसे बदलने के लिए नहीं। यह समिट लोगों, धरती और तरक्की के आस-पास बना है। AI सिस्टम दुनिया भर के समाजों में पैदा हुए ज्ञान और डेटा पर आधारित हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि AI के फायदे सभी तक पहुँचें, न कि सिर्फ़ शुरुआती अपनाने वाले ही इसे जमा करें। ग्लोबल साउथ में हो रहे पहले ग्लोबल AI समिट के तौर पर, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम रिप्रेजेंटेशन वाली आवाज़ों और डेवलपमेंट की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देता है। AI गवर्नेंस, इनक्लूसिव डेटासेट, क्लाइमेट एप्लीकेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी, पब्लिक हेल्थ और कई भाषाओं तक पहुँच हमारे लिए बाहरी मुद्दे नहीं हैं। वे सेंट्रल हैं। हमारा विज़न साफ़ है: AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज़ करना चाहिए।

ANI: आपने हमेशा एम्पावरमेंट और डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात की है। आप विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI, भारत के विकसिट भारत 2047 के सफ़र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मौका है। AI का विवेकपूर्ण, स्ट्रेटेजिक नज़रिए से इस्तेमाल करने से, पूरी तरह से नए आर्थिक मौके बनाने, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने, शहर-गांव के बीच की खाई को पाटने और मौकों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ विकास से जुड़ी गहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। हेल्थकेयर में, AI पहले से ही असर डाल रहा है। हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स पर ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं। एजुकेशन में, भारतीय भाषाओं में AI-पावर्ड पर्सनलाइज़्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, गांव और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को कस्टमाइज़्ड एकेडमिक सपोर्ट पाने में मदद कर रहे हैं। एक बहुत ही अनोखी पहल में, अमूल हज़ारों गांवों में 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, मवेशियों की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पर गुजराती में रियल-टाइम गाइडेंस दे रहा है, और ज़मीनी स्तर की महिला प्रोड्यूसर्स को मज़बूत बना रहा है। खेती में, भारत विस्तार पहल का मकसद AI को फसल सलाह, मिट्टी के एनालिटिक्स और मौसम की जानकारी में जोड़ना है, जिससे किसानों को बेहतर, लोकल फैसले लेने में मदद मिलेगी। विरासत को बचाने में भी, AI पुरानी किताबों के डिजिटाइज़ेशन और मतलब को मुमकिन बना रहा है, जिससे भारत के सभ्यता से जुड़े ज्ञान के सिस्टम खुल रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया AI से बढ़ती दूरियों को लेकर परेशान है, भारत इसका इस्तेमाल दूरियों को मिटाने के लिए कर रहा है। हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक को हेल्थकेयर, शिक्षा और आर्थिक मौके देने के लिए एक अच्छा टूल बना रहे हैं।

ANI: पेरिस में AI एक्शन समिट 2025 में अपनी स्पीच में, आपने AI के बायस और लिमिटेशन पर ज़ोर दिया था। अब से, क्या सिनेरियो बदला है? आप भारत को इस मुद्दे को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI में बायस और लिमिटेशन को लेकर चिंताएं बहुत ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे AI को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। AI सिस्टम अनजाने में जेंडर, भाषा और सोशियो-इकोनॉमिक बैकग्राउंड से जुड़े बायस को बढ़ावा दे सकते हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ ला रहा है और AI के बायस और लिमिटेशन जैसे मामलों पर ग्लोबल अवेयरनेस पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए ग्लोबल कोऑपरेशन की ज़रूरत है। खास तौर पर भारत के लिए, हम यूनिक चैलेंज और मौकों का सामना कर रहे हैं। हमारी डायवर्सिटी - लिंग्विस्टिक, कल्चरल, रीजनल - का मतलब है कि AI बायस ऐसे तरीकों से दिख सकता है जो वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में साफ़ न हों। एक AI सिस्टम जो मुख्य रूप से इंग्लिश डेटा या शहरी कॉन्टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है, वह रूरल यूज़र्स या रीजनल भाषाएं बोलने वालों के लिए खराब परफॉर्म कर सकता है। पॉजिटिव डेवलपमेंट यह है कि भारत इसे ज़्यादा सिस्टमैटिक तरीके से एड्रेस करना शुरू कर रहा है। हम ऐसे डायवर्स डेटासेट बनाने पर ज़्यादा फोकस देख रहे हैं जो भारत की प्लूरलिटी को दिखाते हैं, रीजनल भाषाओं में AI डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है, और इंडियन एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और टेक कंपनियों में फेयरनेस और बायस पर रिसर्च बढ़ रही है।

ANI: आधार और UPI जैसे कम लागत वाले डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में भारत की सफलता शानदार है। DPI और AI का मेल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को काफी बेहतर बना सकता है। इस बारे में भारत क्या सीख रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ को मदद मिल सके?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यात्रा ग्लोबल साउथ के लिए ज़रूरी और प्रैक्टिकल सबक देती है। DPI और AI का मिलना इनक्लूसिव डेवलपमेंट का अगला फ्रंटियर है। आधार, UPI और दूसरी डिजिटल पब्लिक चीज़ों के साथ हमारी सफलता अचानक नहीं हुई। यह कुछ ऐसे सिद्धांतों से आई जिन्हें दोहराया जा सकता है। सबसे पहले, हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक गुड के तौर पर बनाया, न कि किसी प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म के तौर पर। इस ओपन और इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर ने इनोवेशन को एक कॉमन बेस लेयर के ऊपर फलने-फूलने दिया। दूसरा, हमने पहले दिन से ही स्केल और इनक्लूजन के लिए डिज़ाइन किया। हमारे सिस्टम 1.4 बिलियन लोगों के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी सोशियो-इकोनॉमिक स्थिति, लिटरेसी लेवल, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो। जब AI को इस फाउंडेशन पर लेयर किया जाता है, तो गवर्नेंस कहीं ज़्यादा रिस्पॉन्सिव और एफिशिएंट बन सकता है। AI वेलफेयर टारगेटिंग को बेहतर बना सकता है, फ्रॉड का पता लगाने को मज़बूत कर सकता है, इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को इनेबल कर सकता है, अर्बन प्लानिंग को सपोर्ट कर सकता है, और पब्लिक सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ा सकता है। साथ ही, हम पूरे समाज में मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत डेटा प्राइवेसी प्रोटेक्शन, सोच-समझकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और AI लिटरेसी के महत्व को समझते हैं। ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के अपने अनुभव के साथ, भारत यह पक्का करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है कि AI के फायदे आखिरी छोर तक, गांवों में किसानों, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर्स, इनफॉर्मल वर्कर्स और ग्रामीण और शहरी भारत के युवाओं तक पहुंचें, और यह सिर्फ शहरी अमीर लोगों तक ही सीमित न रहे। टेक्नोलॉजी को हर नागरिक की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी इलाके, जेंडर या इनकम का हो। मकसद सिर्फ अपने फायदे के लिए AI को अपनाना नहीं है। यह AI ही है जो सच में नागरिकों को मजबूत बनाता है और 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनने की राह में तेजी लाता है, और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।

ANI: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है। हम दुनिया को एक बड़ी टेक वर्कफोर्स देते हैं। AI के दौर में हम इसे और कैसे बढ़ा सकते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत में AI पावरहाउस बनने के लिए टैलेंट और एंटरप्रेन्योर एनर्जी है, सिर्फ़ एक कंज्यूमर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक क्रिएटर के तौर पर भी। हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI सॉल्यूशन बना सकते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, गवर्नेंस को बेहतर बनाएंगे और नई नौकरियां पैदा करेंगे। मुझे भरोसा है कि हमारे युवा भारतीय हकीकत के लिए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हम अपने टैलेंटेड युवाओं की हर कोशिश को मज़बूत करने के लिए कमिटेड हैं ताकि AI इनोवेशन और इनक्लूजन के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर बन सके। यूनियन बजट 2026-27 इस विज़न को और मज़बूत करता है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट बढ़ाता है, जिससे घरेलू कंप्यूट कैपेसिटी मज़बूत होती है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्स तक एक्सेस के साथ सपोर्ट दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग के लिए लगातार कोशिश हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मज़बूत करती है। शॉर्ट में, हम सिर्फ़ टैलेंट को ही नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर उसे आकार देने तक के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस बना रहे हैं।

ANI: भारत में एक वाइब्रेंट IT सेक्टर है जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट में अहम योगदान दे रहा है। आप AI को हमारे IT सेक्टर पर कैसे असर डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत का IT सेक्टर हमारे सर्विस एक्सपोर्ट की रीढ़ और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक मुख्य ड्राइवर रहा है। AI इस सेक्टर के लिए एक ज़बरदस्त मौका और चुनौती दोनों पेश करता है। AI मार्केट के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक $400 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो AI-इनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन-स्पेसिफिक ऑटोमेशन की नई लहरों से प्रेरित है। बुनियादी बदलाव यह है कि AI IT सेक्टर की जगह नहीं ले रहा है। यह इसे बदल रहा है। जबकि जनरल-पर्पस AI टूल्स आम हो गए हैं, एंटरप्राइज़-ग्रेड AI को अपनाना अभी भी खास सेक्टर्स में ही केंद्रित है, और मौजूदा IT फर्म मुश्किल बिज़नेस समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक मज़बूत भारतीय AI इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, सरकार ने IndiaAI मिशन पर केंद्रित एक व्यापक रणनीति के साथ जवाब दिया है। हम पहले ही GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर चुके हैं और हम स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए वर्ल्ड-क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक सस्ती पहुँच प्रदान करने के लिए और अधिक करने के लिए कमिटेड हैं। हमने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और सस्टेनेबल शहरों में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और स्किलिंग के लिए पाँच नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं ताकि हमारे कर्मचारियों को इंडस्ट्री-संबंधित AI विशेषज्ञता से लैस किया जा सके। हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न सिर्फ़ सर्विस डिलीवरी में, बल्कि भारत और दुनिया के लिए काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफ़ॉर्म और सॉल्यूशन बनाने में भी लीड करे।

ANI: हमने AI के गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण देखे हैं। हम AI टेक्नोलॉजी के संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: टेक्नोलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह इंसानी इरादे के लिए सिर्फ़ एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर है। यह पक्का करना हम पर है कि यह अच्छे के लिए एक फ़ोर्स बने। AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन फ़ैसले लेने की आखिरी ज़िम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए। दुनिया भर में, समाज इस बात पर बहस कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल और उसे कैसे कंट्रोल किया जाना चाहिए। भारत यह दिखाकर इस बातचीत को आकार देने में मदद कर रहा है कि मज़बूत सेफ़गार्ड लगातार इनोवेशन के साथ-साथ रह सकते हैं। इसके लिए, हमें AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट की ज़रूरत है, जो कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर बना हो। इनमें असरदार इंसानी निगरानी, ​​सेफ़्टी-बाय-डिज़ाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफ़ेक, क्राइम और आतंकवादी गतिविधियों के लिए AI के इस्तेमाल पर सख़्त रोक शामिल होनी चाहिए। भारत AI रेगुलेशन में ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अप्रोच की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इंडियाAI सेफ़्टी इंस्टीट्यूट के लॉन्च के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड मैकेनिज़्म बनाया। जैसे-जैसे AI और एडवांस्ड होता जाएगा, हमारी ज़िम्मेदारी की भावना और मज़बूत होनी चाहिए। भारत के अप्रोच को जो बात खास बनाती है, वह है लोकल रिस्क और सामाजिक असलियत पर इसका फ़ोकस। नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं के साथ-साथ कमज़ोर ग्रुप्स को होने वाले नुकसान पर भी विचार करता है, जिसमें महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा के जोखिम और बुज़ुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल हैं। डीपफेक वीडियो में बढ़ोतरी के कारण इन सुरक्षा उपायों की ज़रूरत सभी को साफ़ हो रही है। इसके जवाब में, भारत ने AI से बने कंटेंट की वॉटरमार्किंग और नुकसानदायक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम नोटिफ़ाई किए। कंटेंट सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूज़र अधिकारों को मज़बूत करता है। भारत का कमिटमेंट ग्लोबल लेवल पर भी है। जैसे एविएशन और शिपिंग में बॉर्डर पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नियम हैं, वैसे ही दुनिया को AI में भी आम सिद्धांतों और स्टैंडर्ड्स की दिशा में काम करना चाहिए। चाहे 2023 GPAI डिक्लेरेशन में अपनी भूमिका के ज़रिए, पेरिस AI चर्चाओं में, या मौजूदा समिट में, भारत ने हमेशा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले #AIForAll के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हुए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के संतुलित रास्ते की वकालत की है।

ANI: युवाओं के कुछ हिस्से में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना मुश्किल होगा। भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: मैं जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों को लेकर हमारे युवाओं की चिंता समझता हूँ। तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे अभी की ज़रूरत मान रहे हैं। मैं AI को एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर के तौर पर देखता हूँ जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो हमने मुमकिन समझी थीं। यह डॉक्टरों, टीचरों और वकीलों को ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में मदद करेगा। इतिहास ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी की वजह से काम गायब नहीं होता। इसका नेचर बदलता है और नई तरह की नौकरियाँ बनती हैं। जहाँ कुछ नौकरियाँ फिर से तय हो सकती हैं, वहीं डिजिटल बदलाव भारत की इकोनॉमी में नई टेक नौकरियाँ भी जोड़ेगा। सदियों से, यह डर रहा है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल क्रांतियाँ नौकरियाँ खत्म कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी इनोवेशन होता है, नए मौके सामने आते हैं। AI के ज़माने में भी यही सच होगा। भारत इस बदलाव के हिसाब से ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में, भारत तीसरे नंबर पर रहा, जो AI R&D, टैलेंट और इकोनॉमी में मज़बूत ग्रोथ को दिखाता है। इनोवेशन को इनक्लूजन के साथ मिलाकर, हमें भरोसा है कि AI भारत के वर्कफोर्स को मज़बूत करेगा। सही स्किल्स और तैयारी के साथ, हमारे युवा काम के भविष्य को लीड करेंगे।

ANI: आपके नेतृत्व में, भारत ने 4G और 5G जैसी स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। आत्मनिर्भर भारत के लिए AI पर आपका क्या विजन है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा सफ़र एक बुनियादी उसूल पर बना है: भारत को सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे बनाना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत में AI के लिए मेरा विज़न तीन पिलर पर टिका है: सॉवरेनिटी, इनक्लूसिविटी और इनोवेशन। मेरा विज़न है कि भारत दुनिया भर में टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक हो, सिर्फ़ AI के इस्तेमाल में ही नहीं, बल्कि बनाने में भी। हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाएँगे, जो अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सर्विस देंगे। हमारे AI स्टार्टअप की वैल्यू सैकड़ों अरबों में होगी, जिससे लाखों हाई-क्वालिटी जॉब्स बनेंगी। हमारी AI-पावर्ड पब्लिक सर्विसेज़ की दुनिया भर में कुशल, बराबर गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क के तौर पर स्टडी की जाएगी। और सबसे ज़रूरी बात, हर भारतीय AI को मौके देने वाला, काबिलियत बढ़ाने वाला और इंसानी गरिमा का सेवक समझेगा, न कि अपनी आजीविका के लिए खतरा या कंट्रोल का ज़रिया। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना कोड खुद लिखे, और IndiaAI मिशन के ज़रिए, हम यह पक्का कर रहे हैं कि वह कोड हमारी वैल्यूज को दिखाए, हमारे लोगों की सेवा करे, और भारत को दुनिया के लिए एक रेसपॉन्सिबल AI लीडर बनाए।

स्रोत: ANI News