पीएम ने अंतरराज्यीय राज्य परिषद की मीटिंग के दौरान कहा कि यह संस्था को-ऑपरेटिव फेडरलिज़्म के लिए आदर्श स्थापित करने वाली है जहां पर कि लोगों के साथ विचार-विमर्श कर जनहित के कार्य किए जा सकेंगे।
हमारे लोकतंत्र को मज़बूती प्रदान करने के लिए अंतरराज्यीय परिषद फोरम का प्रभावी साधन के रूप में अधिक से अधिक प्रयोग करने के लिए आग्रह करता हूं: पीएम
केन्द्र-राज्यों के लिए व अंतरराज्यीय सम्बन्धों के लिए अंतरराज्यीय परिषद निश्चित रूप से अति महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म की भूमिका अदा करेगीः पीएम
एक राष्ट्र केवल तब ही विकास के पथ पर आगे बढ़ सकता है कि जबकि राज्य व केन्द्र सरकारें कंधे से कंधा मिलाकर एक साथ चलेः पीएम
साल 2015-16 में राज्यों के केन्द्र से मिलने वाली धनराशि साल 2014-15 में प्राप्त धनराशि से 21 फीसदी अधिक हैः पीएम
सीएएमपीए अधिनियम के माध्यम से हम बैंकों में खराब पड़ी लगभग ₹40,000 करोड की धनराशि को राज्यों के बीच वितरित करने के लिए विचार कर रहे हैः पीएम
आधार कार्ड सश्कितकरण का एक प्रतीक बन गया हैः पीएम मोदी
भारत की सबसे बड़ी सम्पत्ति इसके युवा हैं। केन्द्र और राज्यों को मिलकर एक साथ काम करना चाहिए ताकि बच्चों को उनके कौशल विकास के लिए उपयुक्त माहौल प्राप्त हो सके।
केवल विद्यालय जाना ही शिक्षा ग्रहण करना नहीं होता है। शिक्षा के प्रति बच्चों के भीतर जिज्ञासा भी होनी चाहिएः पीएम
हमें हमारी आंतरिक सुरक्षा की दक्षता और क्षमता को निरन्तर बढ़ाने की आवश्यकता है। हमें लगातार सतर्क और अपडेट रहना चाहिएः पीएम

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री गण व उप-राज्यपाल और कैबिनेट के मेरे सहयोगी,

इंटर स्टेट काउंसिल की इस अहम बैठक में सम्मिलित होने के लिए आप सभी का मैं एक बार फिर स्वागत करता हूं।

ऐसे मौके कम ही आते हैं जब केंद्र और राज्यों का नेतृत्व एक साथ एक जगह पर मौजूद हो। आम जनता के हितों पर बात करने के लिए, उनकी मुश्किलों के निपटारे के लिए, एक साथ मिलकर ठोस फैसला लेने के लिए Cooperative Federalism का यह मंच, बेहतरीन उदाहरण है। यह हमारे संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि को भी दर्शाता है।

मैं, करीब 16 साल पहले इसी मंच से कही गई पूर्व प्रधानमंत्री और हमारे श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की बात से शुरु करूंगा, वाजपेयी जी ने कहा था कि-

“भारत जैसे बड़े और विविधता से भरे हुए लोकतंत्र में Debate यानि वाद-विवाद, Deliberation यानि विवेचना और Discussion यानि विचार-विमर्श से ही ऐसी नीतियां बन सकती हैं जो जमीनी सच्चाई का ध्यान रखती हों। ये तीनों बातें, नीतियों को प्रभावी तरीके से अमल में लाने में भी मदद करती हैं। इंटर स्टेट काउंसिल एक ऐसा मंच है जिसका इस्तेमाल नीतियों को बनाने और उन्हें लागू करने में किया जा सकता है। इसलिए लोकतंत्र, समाज और हमारी राज्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, इस मंच का प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए” ।

देश का विकास तभी संभव है जब केंद्र और राज्य सरकारें कंधे से कंधा मिलाकर चलें। किसी भी सरकार के लिए मुश्किल होगा कि वो सिर्फ अपने दम पर कोई योजना को कामयाब कर सके। इसलिए जिम्मेदारियों के साथ ही वित्तीय संसाधनों की भी अपनी अहमियत है। 14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं की स्वीकृति के साथ केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दी गई है। यानि अब राज्यों के पास ज्यादा राशि आ रही है जिसका उपयोग वो अपनी जरूरत के हिसाब से कर रहे हैं। मुझे आपको ये बताते हुए खुशी है कि पिछले वर्ष 2015-16 में राज्यों को केंद्र से जो रकम मिली है, वो वर्ष 2014-15 की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह पंचायतों और स्थानीय निकायों को 14वें वित्त आयोग की अवधि में 2 लाख 87 हजार करोड़ रुपए की रकम मिलेगी जो पिछली बार से काफी अधिक है।

प्राकृतिक संसाधनों से होने वाली कमाई में भी राज्यों के अधिकारों का ध्यान रखा जा रहा है। कोयला खदानों की नीलामी से राज्यों को आने वाले सालों में 3 लाख 35 हजार करोड़ रुपए की रकम मिलेगी। कोयले के अलावा भी दूसरे खनन से राज्यों को 18 हजार करोड़ रुपए की रकम मिलेगी। इसी तरह CAMPA कानून में बदलाव के जरिए बैंक में रखे हुए करीब 40 हजार करोड़ रुपए को भी राज्यों को देने का प्रयास किया जा रहा है।

सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने की वजह से जो रकम बच रही है, उसे भी केंद्र सरकार आपके साथ साझा करना चाहती है। एक उदाहरण केरोसिन का ही है। गावों में बिजली कनेक्शन बढ़ रहे हैं। आने वाले तीन साल में सरकार 5 करोड़ नए गैस कनेक्शन देने जा रही है। LPG की सप्लाई भी और बढ़ेगी। इन प्रयासों का सीधा असर केरोसिन की खपत पर पड़ा है। हाल ही में चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने शहर को केरोसिन फ्री क्षेत्र घोषित किया है। अब केंद्र सरकार ने एक योजना शुरू की है जिसके तहत केरोसिन की खपत में कमी करने पर, केंद्र सब्सिडी के तौर पर जो पैसा खर्च करता था, उसका 75 प्रतिशत राज्यों को अनुदान के तौर पर देगा। कर्नाटक सरकार ने इस पहल पर तेजी दिखाते हुए अपना प्रस्ताव पेट्रोलियम मंत्रालय को भेज दिया था, जिसे स्वीकार करने के बाद राज्य सरकार को अनुदान का भुगतान कर दिया गया है। अगर सभी राज्य केरोसिन की खपत को 25 फीसदी कम करने का फैसला लेते हैं और इस पर अमल करके दिखाते हैं, तो इस साल उन्हें करीब 1600 करोड़ रुपए के अनुदान का लाभ मिल सकता है।

इंटर स्टेट काउंसिल Centre-State Relations के साथ ही उन विषयों पर भी चर्चा का मंच है जो देश की बड़ी आबादी से जुड़े हुए हैं। कैसे नीति-निर्धारण के स्तर पर इन मुद्दों को सुलझाने के लिए एक राय बनाई जा सकती है, कैसे एक दूसरे से परस्पर जुड़े विषयों को सुलझाया जा सकता है।

इसलिए इस बार इंटर स्टेट काउंसिल में पुंछी कमीशन की रिपोर्ट के साथ ही तीन और अहम विषयों को एजेंडे में रखा गया है।

पहला है- ‘आधार’ । संसद से ‘आधार’ एक्ट 2016 पास हो चुका है। इस एक्ट के पास होने के बाद अब हमें चाहे सब्सिडी हो या फिर तमाम दूसरी सुविधाएं, ‘डायरेक्ट कैश ट्रांसफर’ के लिए आधार के प्रयोग की सुविधा मिल गई है। 128 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश में अब तक 102 करोड़ लोगों को आधार कार्ड बांटे जा चुके हैं। यानि अब देश की 79 प्रतिशत जनसंख्या के पास आधार कार्ड है। अगर वयस्कों की बात करें तो देश के 96 प्रतिशत नागरिकों के पास आधार कार्ड है। आप सभी के समर्थन से इस साल के अंत तक हम देश के हर नागरिक को आधार कार्ड से जोड़ लेंगे।

आज की तारीख में साधारण सा आधार कार्ड, लोगों के सशक्तिकरण का प्रतीक बन गया है। सरकारी मदद या सब्सिडी पर जिस व्यक्ति का अधिकार है, अब उसे ही इसका फायदा मिल रहा है, पैसा सीधे उसी के खाते में जा रहा है। इससे पारदर्शिता तो आई ही है, हजारों करोड़ रुपए की बचत हो रही है जिसे विकास के काम पर खर्च किया जा रहा है।

मित्रों, बाबा साहेब अम्बेडकर ने लिखा था कि- “भारत जैसे देश में सामाजिक सुधार का मार्ग उतना ही मुश्किल है, उतनी ही अड़चनों से भरा हुआ है जितना स्वर्ग जाने का मार्ग। जब आप सामाजिक सुधार की सोचते हैं तो आपको दोस्त कम, आलोचक ज्यादा मिलते हैं” ।

आज भी उनकी लिखी बातें, उतनी ही प्रासंगिक है। इसलिए आलोचनाओं से बचते हुए, हमें एक दूसरे के साथ सहयोग करते हुए, सामाजिक सुधार की योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देना होगा। इनमें से बहुत सी योजनाओं की रूप-रेखा, नीति आयोग में मुख्यमंत्रियों के ही सब-ग्रुप ने तैयार की है।

इंटर स्टेट काउंसिल में जिस एक और अहम विषय पर चर्चा होनी है, वह है शिक्षा । भारत की सबसे बड़ी ताकत हमारे नौजवान ही हैं। 30 करोड़ से ज्यादा बच्चे अभी स्कूल जाने वाली उम्र में हैं। इसलिए हमारे देश में आने वाले कई सालों तक दुनिया को Skilled Manpower देने की क्षमता है। केंद्र और राज्यों को मिलकर बच्चों को शिक्षा का ऐसा माहौल देना होगा जिसमें वे आज की जरूरत के हिसाब से खुद को तैयार कर सकें, अपने हुनर का विकास कर सकें।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के शब्दों में कहें तो- शिक्षा एक निवेश है। हम पेड़-पौधों को लगाते समय उनसे कोई फीस नहीं लेते। हमें पता होता है कि यही पेड़-पौधे आगे जाकर हमें ऑक्सीजन देंगे, पर्यावरण की मदद करेंगे। उसी तरह शिक्षा भी एक निवेश है जिसका लाभ समाज को होता है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने ये बातें 1965 में कहीं थीं। तब से लेकर आज तक हम शिक्षा की दृष्टि से बहुत लंबा सफर तय कर चुके हैं। लेकिन अब भी शिक्षा के स्तर को लेकर बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हमारी शिक्षा व्यवस्था से बच्चे वास्तव में कितना शिक्षित हो रहे हैं, इसे भी हमें अपनी चर्चा में लाना होगा।

इसलिए बच्चों में शिक्षा का स्तर सुधारने का सबसे बड़ा तरीका है कि उन्हें शिक्षा का उद्देश्य भी समझाया जाए। सिर्फ स्कूल जाना ही पढ़ाई नहीं है। पढ़ाई ऐसी होनी चाहिए, जो बच्चों को सवाल पूछना सिखाए, उन्हें ज्ञान हासिल करना और ज्ञान बढ़ाना सिखाए, जो जीवन के हर मोड़ पर उन्हें कुछ ना कुछ सीखते रहने के लिए प्रेरित करे।

स्वामी विवेकानंद भी कहते थे कि शिक्षा का अर्थ सिर्फ किताबी ज्ञान पाना नहीं है। शिक्षा का मकसद है चरित्र का निर्माण, शिक्षा का मतलब है मस्तिष्क को मजबूत करना, अपनी बौद्धिक शक्ति को बढ़ाना, ताकि खुद के पैरों पर खड़ा हुआ जा सके।

21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में, जिस तरह की कुशलता और योग्यता की आवश्यकता है, उसमें हम सभी का दायित्व है कि नौजवानों के पास कोई न कोई Skill जरूर हो। हमें नौजवानों को ऐसा बनाना होगा कि वे Logic के साथ सोचें, Out of the box सोचें और अपने काम में Creative दिखें।

आज के एजेंडा में जिस एक और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होनी है, वह है आंतरिक सुरक्षा। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं, इन चुनौतियों से कैसे निपट सकते हैं, कैसे एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं, इस पर चर्चा होनी है। देश की आंतरिक सुरक्षा को तब तक मजबूत नहीं किया जा सकता, जब तक Intelligence Sharing पर फोकस ना हो, एजेंसियों में अधिक तालमेल ना हो, हमारी पुलिस आधुनिक सोच और तकनीक से लैस ना हो। हमने इस मोर्चे पर काफी लंबा रास्ता तय किया है लेकिन हमें लगातार अपनी कार्य-कुशलता और क्षमता को बढ़ाते चलना है। हमें हर समय Alert और Updated रहना है।

इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक बहुत ही खुले हुए माहौल में, बहुत ही स्पष्ट होकर एक दूसरे के विचार सुनने और साझा करने का मौका देती है। मुझे उम्मीद है कि आप एजेंडा के सभी विषयों पर खुलकर अपनी राय देंगे, अपने सुझाव देंगे। आपके सुझाव बहुत मूल्यवान होंगे।

जितना ही हम इन अहम विषयों पर एक राय बनाने में कामयाब होंगे, उतना ही मुश्किलों को पार करना आसान होगा। इस प्रक्रिया में हम न सिर्फ Cooperative Federalism की spirit और केंद्र-राज्य रिश्तों को मजबूत करेंगे बल्कि देश के नागरिकों के बेहतर भविष्य को भी सुनिश्चित करेंगे।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Why PM Modi Visited The Afsluitdijk: The Dutch Water Model India Is Studying

Media Coverage

Why PM Modi Visited The Afsluitdijk: The Dutch Water Model India Is Studying
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत- यूरोप की पार्टनरशिप वर्ल्ड-क्लास आउटकम्स दे सकती है: यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन में पीएम मोदी
May 18, 2026

Your Excellency, Prime Minister क्रिस्टर्सन,
Your Excellency उर्सुला जी,
Your Royal Highness,
वॉल्वो ग्रुप के President and CEO,
European Round Table के अध्यक्ष,
यहाँ उपस्थित Europe के प्रमुख business leaders,
देवियों और सज्जनों,

नमस्कार!

सबसे पहले मैं Prime Minister क्रिस्टर्सन का इस Round Table में मुझे आमंत्रित करने के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मुझे खुशी है कि यह बैठक "गोथनबर्ग” में आयोजित की जा रही है। एक ऐसा शहर जो innovation के साथ-साथ यूरोप की manufacturing spirit का एक जीवंत प्रतीक है।

Friends,

European Round Table for Industry जैसे प्रतिष्ठित मंच को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात है।

आप में से कुछ मित्रों से मेरी पहले मुलाकात हुई है। कुछ से आज पहली बार मिल रहा हूँ। लेकिन एक बात निश्चित है, आप सभी किसी न किसी रूप में भारत से जुड़े हुए हैं।

किसी की manufacturing भारत में है। किसी का R&D भारत में है। किसी का talent base भारत में है। किसी की supply chain भारत से जुड़ी है। और कोई भारत में बड़ा इन्वेस्टमेंट कर रहा है। आज की यह बैठक इस साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर है।

Friends,

आज भारत और यूरोप के संबंध एक नए turning point पर हैं। सरकारों के स्तर पर हमने एक ambitious और strategic agenda तय किया है।

India-EU Free Trade Agreement पर सहमति बन चुकी है। जैसे उर्सुला जी ने कहा था, यह वाकई "Mother of all Deals” है। हमारा प्रयास है कि इसे जल्द से जल्द implement किया जाए।

Security and Defence Partnership तथा Mobility Agreement ने भी हमारे सहयोग को नई दिशा दी है। India-EU Trade and Technology Council ने हमारी साझेदारी को नई institutional strength दी है। Digital technologies, supply chains और innovation, इन सभी क्षेत्रों में भारत और यूरोप साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

India-Middle East-Europe Economic Corridor जैसे ऐतिहासिक initiatives connectivity और economic integration को नई गति दे रहे हैं। Green transition और sustainable growth को लेकर भी हमारी सोच और प्राथमिकताएँ समान हैं।

यानि, Big Picture देखें तो हमारे बीच गहरा political, economic और strategic कन्वर्जन्स है। India and Europe are strategic partners for a balanced, secure and sustainable world.

लेकिन friends,

सरकारें केवल framework, framework support और policy direction दे सकती हैं। ज़मीनी स्तर पर असली बदलाव आप सभी के प्रयासों से ही संभव रहेगा। इसलिए आज मैं आपको भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए आमंत्रित करने आया हूँ।

Fastest-growing major economy के रूप में भारत आज एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं का देश है। हमारी young population, expanding middle class और infrastructure expansion भारत की growth को नई गति दे रहे हैं।

पिछले बारह वर्ष में भारत reform, perform और transform के मूलमंत्र पर चला है। और सरकार की पोलिटिकल विल से यह रिफॉर्म एक्स्प्रेस full speed पर आगे बढ़ रही है।

Goods and Services Tax ने भारत को one nation, one tax, one market की दिशा में आगे बढ़ाया। Insolvency and Bankruptcy Code से business culture में accountability आई। Corporate tax reforms ने manufacturing को competitive बनाया। Labour codes ने compliance को सरल और transparent बनाने की दिशा दी।

FDI reforms ने अनेक sectors को global capital के लिए खोला। PLI schemes ने electronics, pharma, auto components, solar modules, telecom, textiles जैसे कई sectors में manufacturing momentum बनाया।

हमने compliances का बोझ कम किया है। हजारों outdated regulations समाप्त किए हैं। Ease of Doing Business को governance का हिस्सा बनाया है। Digital India ने public services को अधिक transparent, efficient और accessible बनाया है।

भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा startup ecosystem है। हमारे startups AI, fintech, space, drones, biotech, climate tech, और mobility में global solutions बना रहे हैं।

आज भारत में talent है, scale है, demand है, stability है, और सबसे बड़ी बात, भारत में 140 करोड़ भारतीयों की इच्छा-शक्ति है। इसीलिए अब समय है कि हम intent से investment की ओर बढ़ें।

इस विषय में मैं आपके सामने पाँच सुझाव रखना चाहता हूँ।

पहला: Telecom और digital इन्फ्रास्ट्रक्चर। Vodafone, Ericsson, Nokia, Orange, जैसी कंपनियों का भारत में विशाल अनुभव है। भारत 5G से 6G ट्रैन्ज़िशन, AI-enabled networks, secure connectivity, और digital inclusion में बड़ा partner बन सकता है। आप सभी भारत को global R&D hub बनाने में योगदान दे सकते हैं।

दूसरा: AI, semiconductors, electronics और deep-tech manufacturing. ASML, NXP, SAP, Capgemini जैसे leaders आज यहाँ मौजूद हैं। मैं आपको भारत के तेजी से विकसित हो रहे end-to-end technology ecosystem का भागीदार बनने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

भारत का विज़न स्पष्ट है: technology innovation की अगली wave भारत में co-create होनी चाहिए।

तीसरा: green transition और क्लीन एनर्जी। अनिश्चित global environment में भारत energy security और clean energy capacity को मजबूत करने पर focus कर रहा है। ENGIE, Total Energies, Shell, Umicore जैसी कंपनियां clean energy, हाइड्रोजन, energy storage, EV और decarbonisation में लीडर्स हैं। आप भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर सकते हैं।

चौथा: infrastructure, mobility और urban transformation. Volvo, Maersk, Airbus, Saab, ArcelorMittal, और Heidelberg। इन सबकी expertise भारत के transformation से सीधे जुड़ती है। Sustainable cement, green steel, mobility, logistics, aerospace, defence, इन क्षेत्रों में भारत और यूरोप की पार्ट्नर्शिप world-class outcomes दे सकती है।

पाँचवां: healthcare और life-sciences। AstraZeneca, Roche, Merck, Philips, Nestlé और Unilever जैसी कंपनियों का भारत से पुराना संबंध रहा हैं। अब हमें इस पार्ट्नर्शिप को next level पर ले जाना चाहिए।

Vaccines, cancer care, digital health, nutrition और medical devices में बहुत बड़ा scope है। आप design for India, make in India, and export from India के मॉडल पर आगे बढ़ सकते हैं।

समय की सीमा के कारण मैं यहाँ उपस्थित सभी कंपनियों का नाम नहीं ले सका, लेकिन भारत के अवसर सभी के लिए हैं, और मेरा निमंत्रण भी आप सभी के लिए है।

Friends,

इन सुझावों के बाद मैं आपके सामने एक challenge भी रखना चाहता हूँ। क्या यहाँ मौजूद हर company भारत के लिए एक नया बड़ा commitment कर सकती है? क्या हम अगले पाँच वर्षों में भारत में शुरू किए जाने वाले flagship projects की पहचान कर सकते हैं?

भारत सरकार इन सभी प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके पूरा करने में आपकी पूरी मदद करेगी। हम इन सभी प्रोजेक्ट्स की नियमित समीक्षा करने की एक institutional व्यवस्था भी बना सकते है।

Friends,

हम साल में एक बार भारत-यूरोप CEO Roundtable का आयोजन कर सकते हैं। इसमें भारत और यूरोप की industry bodies को जोड़ा जा सकता है। Sector-specific working groups भी बनाए जा सकते हैं।

मैं यह भी सुझाव दूँगा कि ERT एक India Desk या India Action Group भी बनाए। इसका mandate simple हो: जो companies भारत में हैं, उनके expansion को support करना; जो नई कंपनियाँ भारत आना चाहती हैं, उनके entry को facilitate करना; और business concerns का proactive समाधान करना।

Friends,

भारत और यूरोप की partnership केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह साझा मूल्यों की partnership है। यह लोकतंत्र और विविधता की partnership है। यह trust और transparency की partnership है। यह innovation और inclusion की partnership है।

आज के विश्व में जहां अनिश्चितता है, Supply chains दबाव में हैं, टेक्नॉलजी में competition बढ़ रहा है, ऊर्जा सुरक्षा और climate action दोनों को चुनौती दी जा रही है, ऐसे समय में भारत और यूरोप मिलकर stability, sustainability और shared prosperity के मजबूत स्तंभ बन सकते हैं।

इसी भावना के साथ मैं आप सभी को भारत की विकास यात्रा से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता हूँ। मुझे विश्वास है कि आज "गोथनबर्ग” से जो संवाद शुरू हो रहा है, वह आने वाले वर्षों में भारत और यूरोप की industrial partnership का एक नया अध्याय लिखेगा।

आप इतनी बड़ी संख्या में आये। इस समिट में मुझे आपके बीच अपने बात रखने का अवसर दिया। इसके लिए में आप सब का विशेष रूप से बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।

बहुत-बहुत धन्यवाद।