आइए हम सब मिलकर एक ऐसे नए भारत का निर्माण करें जिसपर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को गर्व हो: प्रधानमंत्री मोदी
केन्द्र सरकार सहकारी संघवाद के प्रति संकल्पबद्ध हैं। हमारा मंत्र है ‘सबका साथ, सबका विकास’: पीएम मोदी
कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए स्वयंसेवी संगठनों तथा निजी क्षेत्र सहित समाज के सभी वर्गों की सक्रियता की आवश्यकता है: प्रधानमंत्री
आयुष्मान भारत के तहत हम लोगों के घरों के निकट बीमारियों की रोकथाम और इलाज की सेवा प्राथमिक स्तर पर प्रदान करेंगे: प्रधानमंत्री मोदी

तमिलनाडु के राज्यपाल,

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री,

मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी,

तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री,

मंच पर विराजमान अन्य सम्मानित अतिथिगण,

देवियों और सज्जनों,

मैं 14 अप्रैल को मनाए जाने वाले विलाम्भी तमिल नव वर्ष पर विश्व में रहे रहे सभी तमिल लोगों को हार्दिक बधाई देता हूं। कैंसर संस्थान अडियार आकर मुझे प्रसन्नता हुई है। यह भारत में पुराने और सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यापक कैंसर देखभाल केन्द्रों में एक है।

बदलती जीवन शैली, गैर-संक्रमणकारी बीमारियों पर बोझ डाल रही है। कुछ अनुमान के अनुसार हमारे देश में कुल मृत्यु का 60 प्रतिशत कारण गैर-संक्रमणकारी बीमारियां हैं।

केन्द्र सरकार ने देश के विभिन्न भागों में 20 राज्य कैंसर संस्थानों तथा 50 तृतीयक कैंसर केन्द्र स्थापित करने की योजना बनाई है। तृतीयक कैंसर केन्द्र की स्थापना के लिए 45 करोड़ रुपये और राज्य कैंसर संस्थान की स्थापना के लिए 120 करोड़ रुपये लगाने वाले पात्र संस्थानों के प्रस्ताव मंजूर किए जा सकते हैं। मुझे यह बताने में प्रसन्नता है कि अब तक 15 राज्य कैंसर संस्थान और 20 तृतीयक कैंसर केन्द्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। 14 नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान कैंसर रोग विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर फोकस के साथ स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत वर्तमान संस्थान कैंसर रोग सेवाओं के प्रावधान के साथ उन्नत बनाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 बीमारियों के रोकथाम के महत्व को रेखांकित करती है।

आयुष्मान भारत के व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा के अंतर्गत हम लोगों के घरों के निकट बीमारियों की रोकथाम और इलाज की सेवा प्राथमिक स्तर पर प्रदान करेंगे।

हमने आबादी के आधार पर मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा सामान्य कैंसर जैसी गैर-संक्रमणकारी बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण, जांच और प्रबंधन का कार्य शुरू किया है।

आयुष्मान भारत में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन भी शामिल है।

यह 10 करोड़ से अधिक परिवारों को कवर करेगा। इस मिशन के जरिए लगभग 50 करोड़ लोग लाभान्वित होंगे। इस मिशन के अंतर्गत दूसरे और तीसरे चरण में अस्पताल में दाखिल होने के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का बीमा कवच प्रदान किया जाएगा।

यह सरकार द्वारा वित्त पोषित विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम होगा। इस योजना का लाभ पूरे देश को मिलेगा। लोग सरकारी और पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में लाभ प्राप्त कर सकेंगे। योजना का उद्देश्य स्वास्थ्य पर जेब से होने वाले खर्चों को कम करना है।

कैंसर जैसी बीमारियों की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए स्वयंसेवी संगठनों तथा निजी क्षेत्र सहित समाज के सभी वर्गों की सक्रियता की आवश्यकता है।

कैंसर संस्थान डब्ल्यूआईए, चेन्नई एक स्वैच्छिक धर्मादा संस्थान है, जिसकी स्थापना स्वर्गीय डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के प्रेरक नेतृत्व में स्वैच्छिक महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं के समूह द्वारा की गई थी।

इस संस्थान ने एक छोटे कॉटेज अस्पताल के रूप में अपनी शुरूआत की। यह दक्षिण भारत का पहला कैंसर विशेषज्ञता वाला अस्पताल था और देश का दूसरा कैंसर अस्पताल। आज संस्थान में 500 बिस्तरों का कैंसर अस्पताल है। मुझे बताया गया है कि इन बिस्तरों में 30 प्रतिशत बिस्तरों के लिए रोगियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है।

केन्द्र सरकार द्वारा 2007 में संस्थान के मोलेकुलर ऑन्कोलॉजी विभाग को “उत्कृष्टता केन्द्र” घोषित किया गया। यह 1984 में स्थापित भारत का पहला सुपर स्पेशलिटी कॉलेज है। इसकी उपलब्धियां पथप्रदर्शक और सराहनीय हैं।

डॉ शान्ता ने अपने प्रारंभिक भाषण में संस्थान के सामने आ रही कठिनाइयों की चर्चा की। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहूंगा कि हम उनकी बातों पर गौर करेंगे और मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह देखें कि क्या किया जा सकता है। मैं अंत में उस विषय पर जाना चाहूंगा जिसे कुछ दिनों से कुछ निहित स्वार्थों द्वारा उठाया गया है।

15वें वित्त आयोग के संदर्भों को लेकर एक निराधार आरोप लगाया जा रहा है कि आयोग कुछ राज्यों और एक क्षेत्र विशेष के साथ भेदभाव कर रहा है। मैं कुछ कहना चाहूंगा, जिसे हमारे आलोचकों ने भुला दिया है। केन्द्र सरकार ने वित्त आयोग को सुझाव दिया है कि ऐसे राज्यों को प्रोत्साहन देने पर विचार किया जाए, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर कार्य किए हैं। इस आधार पर जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रयास करने, ऊर्जा तथा संसाधन लगाने में तमिलनाडु जैसे राज्य को निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।

मित्रों,

केन्द्र सरकार सहकारी संघवाद के प्रति संकल्पबद्ध हैं। हमारा मंत्र है सबका साथ, सबका विकास। हम सब नया भारत बनाने के लिए मिलकर काम करें, जिससे हमारे स्वंतत्रता सेनानियों को गर्व हो।

धन्यवाद।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की
June 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता बताया, जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अटूट विश्वास, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी दृढता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित है।

डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के गहन विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत में रचित सुभाषितम भी साझा किया:

“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”

सुभाषितम् में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमरत्व कर्मों, धन-दौलत या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और महान आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। वे महान आत्माएं जो राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग कर देते हैं, समय की सीमाओं को पार करते हुए जनमानस में अमर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। हम उनके द्वारा संजोए गए और अपनी अंतिम सांस तक सेवा किए गए मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी दृढता की पुष्टि करते हैं।”

“निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”