आज हम उस युग में रहते हैं जिसमें कनेक्टिविटी काफी महत्वपूर्ण है: प्रधानमंत्री मोदी
सुशासन तब तक संभव नहीं जबतक लोगों की सोच है, 'मेरा क्या' और 'मुझे क्या': पीएम मोदी
अटल बिहारी वाजपेयी जी 'भारत मार्ग विधाता' हैं। उन्होंने हमें विकास का मार्ग दिखाया: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नोएडा और दिल्ली के बीच एक नए मेट्रो लिंक (संपर्क) का उद्घाटन किया। उन्होंने दिल्ली मेट्रो की मंजेटा लाइन के एक हिस्से के उद्घाटन के अवसर पर बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर एक पट्टिका का अनावरण किया। इस मेट्रो लाइन का यह हिस्‍सा नोएडा स्थित बॉटेनिकल गार्डन को दक्षिण दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर से जोड़ता है। उन्‍होंने एक सार्वजनिक सभा के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले मेट्रो ट्रेन से कुछ मिनटों तक सफर भी किया।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने ‘क्रिसमस’ के अवसर पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने यह भी कहा कि आज ही दो ‘भारत रत्नों’ पंडित मदन मोहन मालवीय और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता की बदौलत ही देश को एक मजबूत और स्थिर सरकार मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश के लोगों के स्‍नेह के लिए हमेशा उनके आभारी रहेंगे।

उन्‍होंने कहा कि हम वर्तमान में एक ऐसे युग में रह रहे हैं जिसमें कनेक्टिविटी अत्‍यंत मायने रखती है। उन्‍होंने यह भी क‍हा कि महज थोड़ी देर पहले जिस मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया गया है वह न सिर्फ वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ि‍यों को भी अपनी सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी यह परिकल्‍पना है कि वर्ष 2022, जब हम आजादी का 75वां साल मनाएंगे, तक हम एक ऐसे भारत में रहने लगेंगे जो पेट्रोल आयात पर अपेक्षाकृत कम निर्भर होगा। उन्‍होंने कहा कि इस सपने को साकार करने के लिए अत्याधुनिक जन परिवहन प्रणाली समय की मांग है। श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात का उल्‍लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दिसंबर 2002 में दिल्ली मेट्रो से सफर किया था और उस समय से लेकर अब तक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मेट्रो नेटवर्क का काफी विस्तार हो चु‍का है।

प्रधानमंत्री ने विशेष जोर देते हुए कहा कि जब तक ऐसी सोच दिलोंदिमाग पर हावी रहेगी कि ‘मेरा क्‍या‘ और ‘मुझे क्‍या’, तब तक प्रभावकारी गवर्नेंस संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह का नजरिया अब बदल रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित को ध्‍यान में रखकर निर्णय लेती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे पहले सरकारें नए कानून बनाने में गर्व महसूस करती थीं। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार दरअसल एक ऐसी सरकार बनने की कामना रखती है जो अप्रचलित कानूनों को जड़ से समाप्‍त कर दे। उन्‍होंने कहा कि पुराने पड़ चुके कानून निर्णय लेने में बाधक साबित हो रहे हैं इसलिए इन कानूनों के रहते सुशासन संभव नहीं है।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई दी और उन्‍होंने कहा कि सुशासन पर उनका विशेष ध्यान राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। प्रधानमंत्री ने नोएडा आकर इस शहर से जुड़े अंधविश्वास को समाप्‍त करने का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि कोई यह सोचता है कि किसी जगह पर न जाने से उसका मुख्यमंत्री कार्यकाल लंबा हो जाएगा और किसी जगह पर जाने से उसका कार्यकाल छोटा हो जाएगा, तो ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बनने का कतई हकदार नहीं है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे के बेहतर बुनियादी ढांचे के लिए किए जा रहे कार्यों, सड़क नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्‍लेख किया। उन्होंने श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को ‘भारत मार्ग विधाता’ के रूप में निरूपित या वर्णित किया और इसके साथ ही उन्‍होंने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें विकास की राह दिखाई है।

इससे पहले अपने भाषण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा कि प्रधानमंत्री ने इस देश की राजनीति को एक नया अर्थ या आशय दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा यही कहते हैं कि हमें विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना है।

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!