मेक्सिको पहला लैटिन अमेरिकी देश था जो भारत के साथ आया: प्रधानमंत्री मोदी
मेक्सिको भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार: प्रधानमंत्री मोदी
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को अपना समर्थन देने के लिए राष्ट्रपति पेना नीतो को धन्यवाद: प्रधानमंत्री मोदी
एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए मेक्सिको के सकारात्मक और रचनात्मक समर्थन के लिए राष्ट्रपति पेना नीतो को धन्यवाद: प्रधानमंत्री मोदी

महामहिम राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो

प्रिय मित्रों,

आपके उदार स्वागत के लिए धन्यवाद महामहिम राष्ट्रपति।

मैं विशेष रूप से आपकी गर्मजोशी और आतिथ्य सत्कार से अभिभूत हूं। वैसे तो यह प्रधानमंत्री के रूप में आपके महान देश की मेरी पहली यात्रा है,  लेकिन एक आम भारतीय के रूप में नब्बे के दशक के आरंभ में अपनी यात्रा के दौरान मुझे आपकी संस्कृति की समृद्धि का काफी अच्‍छा अनुभव हुआ था। हम पिछले दो वर्षों में तीसरी बार बैठक कर रहे हैं। मैंने आपके साथ अपनी बातचीत को सदा ही अत्‍यंत प्रेरणादायक पाया है। महामहिम राष्ट्रपति, मैं आपकी दोस्ती को सही अर्थों में काफी अहमियत देता हूं।

मित्रों, मेक्सिको ही भारत को सही मायनों में अहमियत प्रदान करने वाला पहला लैटिन अमेरिकी देश था। तभी से, हमारे चहुंमुखी द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर काफी मजबूती देखी जा रही है। वर्ष  2007 में हमने विशेषाधिकार प्राप्त भागीदारी की शुरुआत की। आज, अपनी बातचीत के दौरान राष्ट्रपति और मैंने द्विपक्षीय संबंधों की संपूर्ण रेंज के साथ-साथ आपसी हितों वाले वैश्विक मुद्दों पर सकारात्‍मक विचार-विमर्श किया। हम अपने संबंधों को नए मुकाम पर पहुंचा कर इसे रणनीतिक भागीदारी का स्‍वरूप प्रदान करने के लिए ठोस परिणामों की एक रूपरेखा विकसित करने पर सहमत हो गए हैं।

मित्रों,

व्यापार और निवेश से जुड़े संबंध हमारे आपसी रिश्‍तों को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं। मेक्सिको भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है। अब हम एक क्रेता-विक्रेता संबंध से परे जाकर एक दीर्घकालिक साझेदारी करने पर विचार कर रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और मोटर वाहन उद्योग हमारे वाणिज्यिक संबंधों के प्रमुख विकास क्षेत्रों में से एक हैं। हालांकि, हमारे आपसी कारोबार एवं निवेश और विज्ञान व प्रौद्योगिकी से जुड़ी साझेदारियों का नए क्षेत्रों में विस्तार करने की क्षमता है। इस संबंध में राष्ट्रपति और मैंने अंतरिक्ष  के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग को और गहरा करने के तरीके खोजने पर सहमति जताई है। हम कृषि अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी, कचरा प्रबंधन, आपदा चेतावनी एवं प्रबंधन और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ठोस परियोजनाओं को प्राथमिकता भी देंगे। मैं अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिए अपना समर्थन देने हेतु विशेष रूप से राष्ट्रपति पेना नीतो  का धन्यवाद कहना चाहूंगा। यह विशेष रूप से विकासशील और छोटे द्वीप वाले विकासशील देशों के लिए सौर प्रौद्योगिकी के वैश्विक परिदृश्‍य को बदल कर रख देगा।

मित्रों,

राष्ट्रपति के साथ-साथ मैं भी इस सदी के अवसरों और चुनौतियों को समझता हूं। हम दोनों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर हमारा बढ़ता आपसी तालमेल हमें रणनीतिक महत्व की  अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए अपनी क्षमताओं का संयुक्‍त रूप से इस्‍तेमाल करने के लिए प्रेरित कर रहा है। मैं एनएसजी में भारत की सदस्यता के लिए मेक्सिको के सकारात्मक और रचनात्मक समर्थन हेतु राष्ट्रपति पेना नीतो का  धन्यवाद करता हूं।

महामहिम,

मैं आपमें एक सुधारक और इस देश के भाग्य में विश्वास करने वाली हस्‍ती को देखता हूं। मैं भी भारत के आर्थिक और प्रशासनिक ढांचे में सुधार पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा हूं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां सर्वोत्तम तौर-तरीकों को हमारे द्वारा साझा करने पर हमारे दोनों ही देशों के समाज को लाभ हो सकता है। मित्रों, अपनी पुस्‍तक ‘इन लाइट ऑफ इंडिया’ में महान लेखक ओक्टेवियो पाज ने लिखा था, ‘मैं समझ सकता हूं कि भारतीय होने का यह क्‍या मतलब है, क्योंकि मैं मैक्सिकन हूं।’बेशक, यह अन्य तरह से भी सच है! मेरा मानना है कि हम इस आपसी समझ को और ज्‍यादा मजबूत करने में आज सफल रहे हैं। यह एक अद्भुत यात्रा रही है। महामहिम, मैं एक बार फिर आपके स्वागत, आपकी दोस्ती और भारत-मेक्सिको दोस्ती में विश्वास के लिए आपका धन्यवाद करता हूं। महामहिम राष्ट्रपति, मैं जल्द से जल्द भारत में आपका स्वागत करने को लेकर आशान्‍वि‍त हूं।

धन्यवाद, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”