भारत और स्विट्जरलैंड दोनों विश्व में शांति, ज्ञप्ति और मानवीय मूल्यों की पहचान रहे हैं: प्रधानमंत्री
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच आर्थिक संबंध मजबूत और जीवंत हैं: प्रधानमंत्री मोदी
व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कौशल विकास में सहयोग से दोनों देशों को लाभ मिल रहा है: प्रधानमंत्री
भारत अनेकों बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हम आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था हैं: प्रधानमंत्री मोदी
भारत के पास 500 मिलियन से अधिक कुशल युवाओं की फ़ौज है जो वैश्विक जन-बल की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हैं: प्रधानमंत्री मोदी
मैं भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बनने के महान अवसर का लाभ उठाने के लिए स्विस कंपनियों को आमंत्रित करता हूँ: प्रधानमंत्री
भारत-स्विट्जरलैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे के दावे का समर्थन करने के लिए सहमत
स्विट्जरलैंड ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता का समर्थन किया
“काले धन” और कर चोरी की समस्या को हल करना हमारी साझा प्राथमिकता: प्रधानमंत्री

महामहिम राष्ट्रपति जॉन श्नाइडर-अम्मान,

मित्रों

महामहिम गर्मजोशी भरी टिप्पणियों और शानदार स्वागत के लिए आपको धन्यवाद देता हूं। मैं इस अंतरराष्ट्रीय शहर में आपके साथ यहां खड़ा होकर इतिहास को महसूस करता हूं। और यह न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय, बल्कि मानवीय आत्मा वाला शहर है। कुल मिलाकर यह ‘रेड क्रॉस’ का घर है, और मानव की सेवा को समर्पित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों का मुख्यालय यहीं पर है।

मित्रों,

भारत और स्विट्जरलैंड दोनों ही दुनिया में शांति, समझौतावादी और मानवीय मूल्यों की बात करते रहे हैं। बीते सात दशकों से हमारी मित्रता लगातार मजबूत हुई है। आज राष्ट्रपति और मैंने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय करारों की समीक्षा की। हमने स्विट्जरैंड के कई सीईओ के साथ व्यापक चर्चा भी की।

मित्रों,

हमारे जैसे दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हैं और लगातार बढ़ रही हैं। कई स्विस कंपनियां भारत में जाना-माना नाम हैं। कारोबार, निवेश, विज्ञान एवं तकनीक और कौशल विकास में समझौतों से दोनों देशों के समाज को फायदा होता है। भारत ने कहा कि वह ईएफटीए के साथ एफटीए पर बात शुरू करने के लिए तैयार है। हम सभी स्विस अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में जानते हैं। लेकिन भारत भी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हम आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था हैं। लेकिन सिर्फ यही पर्याप्त नहीं है। मैं चाहता हूं कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्मार्ट और टिकाऊ शहरों, शानदार कृषि क्षेत्र, जीवंत विनिर्माण और गतिशील सेवा क्षेत्र के दम पर आगे बढ़े और इसे विश्व स्तरीय रेल नेटवर्क, सड़कों, हवाई अड्डों और डिजिटल कनेक्टिविटी से मजबूती मिले, जहां हर किसी के पास घर हो और हर घर को बिजली हकीकत बन सके। और उसके 50 करोड़ से ज्यादा युवा कुशल हों और वैश्विक कार्यबल की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हों। राष्ट्रपति और मैं भारत की जरूरतों के अनुकूल स्विस व्यावसायिक और शैक्षणिक प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करने पर सहमत हैं। हमने कल विश्व पर्यावरण दिवस पर इसका आकलन किया था। इसके उद्देश्यों और भारत के सभ्यतागत स्वभाव के क्रम में आर्थिक तौर पर संपन्न भारत इस ग्रह और हमारे पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। जीवाश्म ईंधन की बजाय अक्षय ऊर्जा पर निर्भरता से ही हम आगे बढ़ेंगे।

मित्रों,

हम हमारी विकास की जरूरतों और स्विट्जरलैंड की क्षमताओं के बीच एक पूर्ण जुड़ाव देखते हैं। इसलिए मैं भारत के आर्थिक विकास में मुख्य भागीदार बनने और अवसरों का लाभ उठाने के लिए स्विस कंपनियों को आमंत्रित करता हूं। कुल मिलाकर 1.25 अरब से ज्यादा लोगों की आर्थिक संपन्नता से पूरी दुनिया को लाभ होगा।

मित्रों,

भारत और स्विट्जरलैंड की मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के क्रम में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की एक साझा प्रतिबद्धता है। हम दोनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर स्थायी सदस्यता के लिए प्रयासों में एक-दूसरे को सहयोग देने पर सहमत हुए हैं। मैं स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति को परमाणु संबंधी आपूर्तिकर्ता समूह की भारत की सदस्यता के लिए स्विट्जरलैंड की समझ और सहयोग के लिए आभारी हूं। कालेधन और कर चोरी के खिलाफ लड़ाई हमारी साझा प्राथमिकता है। हमने कर अपराधियों से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान में तेजी से कदम बढ़ाने की जरूरत पर भी चर्चा की। इस संबंध में सूचनाओं के स्वचालित लेनदेन के समझौते पर जल्द बातचीत काफी अहम होगी।

मित्रों,

दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध हमारे आधार और जुड़ाव के लिहाज से काफी अहम हैं। मैं भारतीय फिल्म उद्योग को धन्यवाद देता हूं, जिसने हमें स्विस स्थलों की सुंदरता से रूबरू कराया। लेकिन हम भी ज्यादा से ज्यादा स्विट्जरलैंड के पर्यटकों का भारत में स्वागत करने को आतुर हैं। इसके लिए हमने स्विस नागरिकों के लिए इस साल की शुरुआत में ई-वीजा सुविधा शुरू की है।

मित्रों,

हमारे संबंधों की सफलता की कई कहानियां मौजूद हैं। उनमें से एक टेनिस की दुनिया के ग्रैंड स्लैम में खलबली मचा रही प्रसिद्ध स्विस खिलाड़ी मार्तिना हिंगिस के साथ भारत की सानिया मिर्जा और लिएंडर पेस के साथ जोड़ी शामिल हैं। मुझे भरोसा है कि हमारी समान प्रतिबद्धताएं और मूल्य, लोगों का लोगों से जुड़ाव और मजबूत व बढ़ती साझेदारी से हमारे संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे। मैं एक बार फिर जिनेवा में मेजबानी के लिए महामहिम को धन्यवाद देता हूं।

आपका धन्यवाद। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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प्रधानमंत्री 15 अप्रैल को कर्नाटक का दौरा करेंगे
April 14, 2026
PM to inaugurate Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya
Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math
PM to also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji

Prime Minister, Shri Narendra Modi will visit Karnataka on 15th April 2026. At around 11 AM, Prime Minister will inaugurate the Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya district. He will also address the gathering on the occasion.

During the visit, Prime Minister will also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji.

Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to the revered seer, Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math. Constructed in the traditional Dravidian architectural style, the Mandira stands as a tribute to the life and legacy of the late seer. The Mandira is envisioned not only as a place of reverence but also as a source of inspiration for future generations.

Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji was widely respected for his lifelong commitment to social service, having established numerous educational institutions and healthcare facilities. He firmly believed that service to society is the highest form of worship, and his teachings transcended barriers of caste, creed, and region, inspiring millions.