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दीनदयाल उपाध्याय जी चाहते थे कि भारत केवल कृषि में ही नहीं, बल्कि डिफेंस में भी आत्मनिर्भर हो : प्रधानमंत्री मोदी
हम जैसे-जैसे दीनदयाल जी के बारे में सोचते हैं, बोलते हैं, सुनते हैं, उनके विचारों में हमें हर बार एक नवीनता का अनुभव होता है : प्रधानमंत्री मोदी
हम उसी विचारधारा में पले हैं, जो विचारधारा ‘राष्ट्र प्रथम’ की बात करती है : भाजपा कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री मोदी
हर महीने भारत डिजिटल रूप से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन कर रहा है और यह भारतीयों के जीवन का एक हिस्सा बन गया है: प्रधानमंत्री मोदी
मैं आपसे आग्रह करूंगा कि पार्टी की हर एक ईकाई आजादी के 75 साल निमित्त कम से कम 75 ऐसे कोई न कोई काम करेंगे जिससे देश के सामान्य मानवी से जुड़ सकें : पार्टी कार्यकर्ताओं से पीएम मोदी

“हमारे यहां कहा जाता है, ‘स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते।’ अर्थात, सत्ता की ताकत से आपको सीमित सम्मान ही मिल सकता है। जहां सत्ता की ताकत प्रभावी होगी, वहीं सम्मान मिलेगा, लेकिन विद्वान का सम्मान हर जगह होता है। दीनदयाल जी इस विचार के साक्षात उदाहरण रहे हैं। उनका एक-एक विचार, उनके एक-एक शब्द उन्हें पूरी दुनिया में एक विलक्षण व्यक्तित्व बना देते हैं। सामाजिक जीवन में एक नेता को कैसा होना चाहिए, भारत के लोकतंत्र और मूल्यों को कैसे जीना चाहिए, दीनदयाल जी इसके भी बहुत बड़े उदाहरण हैं। एक ओर वे भारतीय राजनीति में एक नए विचार को लेकर आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर, वे हर एक पार्टी, हर एक विचारधारा के नेताओं के साथ भी उतने ही सहज रहते थे। हर किसी से उनके आत्मीय संबंध थे।“

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के प्रेरणापुरुष पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की 53वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को दिल्ली स्थित डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये उद्गार व्यक्त किए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “हमारे शास्त्रों में कहा गया है- ‘स्वदेशो भुवनम् त्रयम्।’ अर्थात, अपना देश ही हमारे लिए सब कुछ है, तीनों लोकों के बराबर है। जब हमारा देश समर्थ होगा, तभी तो हम दुनिया की सेवा कर पाएंगे, एकात्म मानव दर्शन को सार्थक कर पाएंगे। दीनदयाल उपाध्याय जी भी यही कहते थे। उन्होंने लिखा था, ‘एक सबल राष्ट्र ही विश्व को योगदान दे सकता है’। यही संकल्प आज आत्मनिर्भर भारत की मूल अवधारणा है। इसी आदर्श को लेकर ही देश आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।”

कोरोना संकट के दौरान देश की एकजुटता और आत्मनिर्भर भारत के लिए किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में देश ने अंत्योदय की भावना को सामने रखा और अंतिम पायदान पर खड़े हर गरीब की चिंता की। आत्मनिर्भरता की शक्ति से देश ने एकात्म मानव दर्शन को भी सिद्ध किया, पूरी दुनिया को दवाएं पहुंचाईं, और आज वैक्सीन पहुंचा रहा है। देश की एकता-अखंडता के लिए भी आत्मनिर्भरता की जरूरत पर दीनदयाल जी ने विशेष जोर दिया था। दीनदयाल जी ने कहा था कि हमें सिर्फ अनाज में ही नहीं, बल्कि हथियार और विचार के क्षेत्र में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाना होगा। उनके इस विजन को पूरा करने के लिए भारत आगे बढ़ रहा है। आज भारत में डिफेंस कॉरिडोर बन रहे हैं, स्वदेशी हथियार बन रहे हैं, और तेजस जैसे फाइटर जेट्स भी बन रहे हैं। हथियार के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से अगर भारत की ताकत और भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, तो विचार की आत्मनिर्भरता से भारत आज दुनिया के कई क्षेत्रों में नेतृत्व दे रहा है। आज भारत की विदेश नीति दबाव और प्रभाव से मुक्त होकर ‘राष्ट्र प्रथम’ के नियम से चल रही है।

 

श्री मोदी ने कहा कि भाजपा ने अपनी सरकारों में ऐसी कितनी ही उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर आपको गर्व होगा, आने वाली पीढ़ियों को गर्व होगा। उन्होंने कहा, ‘’जो निर्णय देश में बहुत कठिन माने जाते थे, राजनीतिक रूप से मुश्किल माने जाते थे, हमने वो निर्णय लिए और सबको साथ लेकर लिए। उदाहरण के तौर पर, देश में नए जनजाति कार्य मंत्रालय का गठन भाजपा की ही सरकार में हुआ है। यह भाजपा सरकार की ही देन है कि पिछड़ा आयोग को देश में संवैधानिक दर्जा मिल सका है और यह भाजपा की सरकार है, जिसने सामान्य वर्ग के गरीब लोगों को भी आरक्षण देने का काम किया है।’’

राजनीति में विनम्रता, उदारता और सेवा के महत्त्व पर बल देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हम राजनीति में सर्वसम्मति को महत्त्व देते हैं। दीनदयाल जी कभी भी राजनीतिक अस्पृश्यता में विश्वास नहीं रखते थे। उन्होंने कहा, “अनेक राजनीतिक दल हो सकते हैं, हमारे विचार अलग हो सकते हैं, हम चुनाव में पूरी शक्ति से एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि हम अपने राजनीतिक विरोधी का सम्मान न करें। कोरोना जैसा इतना बड़ा संकट आया, दुनिया में हर कोई अपने जीवन के लिए डरा हुआ था, लेकिन हमारे करोड़ों कार्यकर्ताओं ने अपना दायित्व समझकर दिन-रात एक कर दिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान किया था कि सरकार के साथ-साथ वे भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। हर कार्यकर्ता ने सेवा के इस संकल्प को राष्ट्रव्यापी मिशन बना दिया। जो संकट में थे उनके भोजन-पानी की चिंता की, दवा-इलाज की जिम्मेदारी उठाई, कोरोना वॉरियर्स का मनोबल बढ़ाया। इस अभियान में किसी ने वोट बैंक की चिंता नहीं की, यह नहीं सोचा कि किसका वोट हमें मिलता है, किसका नहीं मिलता है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी पार्टी, हमारी सरकार आज महात्मा गांधी के उन सिद्धांतों पर चल रही है, जो हमें प्रेम और करुणा के पाठ पढ़ाते हैं। हमने बापू की 150वीं जन्मजयंती भी मनाई और उनके आदर्शों को अपनी राजनीति में, अपने जीवन में भी उतारा। हमारी सरकार ने हमारे महापुरुषों को भी राजनैतिक समीकरण के चश्मे से कभी नहीं देखा। जिन स्वाधीनता सेनानियों की उपेक्षा होती रही, उन्हें हमने सम्मान दिया। यह हमारी ही सरकार है, जिसने नेताजी को वह सम्मान दिया, जिसके वे हकदार थे, उनसे जुड़ी हुई फाइलों को खोला। सरदार पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा बनवाकर हमने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। बाबासाहेब अम्बेडकर को भी भारत रत्न तब मिला, जब बीजेपी के समर्थन से सरकार बनी थी। इन कार्यों का भाजपा को, हम सभी को बहुत गर्व है।“

भाजपा सांसदों से स्वाध्याय की अपील करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी अध्ययन के लिए जरूर समय निकालें। आप संसद के संसाधनों का प्रयोग करें और जैसी भी रुचि हो, उन विषयों से भी जुड़ें। दीनदयाल जी को पढ़ने-समझने के लिए भी आप समय निकालें। इसी तरह, आप बाबासाहेब अम्बेडकर को, श्यामा प्रसाद मुखर्जी को, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को, इन सबको जरूर पढ़ें। इससे आपके राजनैतिक जीवन में एक नई दिशा मिलेगी, आप एक अलग छाप छोड़ पाएंगे। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि हम सब दीनदयाल जी के इन आदर्शों पर चलकर आगे बढ़ेंगे। दीनदयाल जी का अंत्योदय का जो सपना था, वह 21वीं सदी में एक नए भारत के निर्माण के साथ पूरा होगा।”



 

 

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