प्रधानमंत्री ने सौभाग्य योजना का शुभारंभ कियाहर घर बिजली पहुंचाना इसका उद्देश्य
सौभाग्य योजना के तहत बिजली सुविधा से रहित अनुमानित 4 करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे
कोयला की कमी अब बीता हुआ कलबिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि लक्ष्य से ज्यादा: प्रधानमंत्री मोदी
भारत का 2022 तक 175 गीगावॉट और 2027 तक 275 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य: पीएम मोदी
उदय योजना से बिजली वितरण कंपनियों को होने वाला नुकसान हुआ कम: प्रधानमंत्री
‘नए भारत’ में एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था की जरूरत है जो सुगम हो, सतत बनी रहे और जो सबके लिए हो: प्रधानमंत्री मोदी
केंद्र सरकार में कार्य संस्कृति में हो रहे बदलाव से ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिल रही है: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना या ‘सौभाग्य’ का शुभारंभ किया। इस योजना का उद्देश्य सभी घरों को बिजली प्रदान करना है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने एक नई ओएनजीसी की इमारत - दीनदयाल उर्जा भवन भी समर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने देश को बेसीन गैस फील्ड में बूस्टर कंप्रेसर सुविधा भी समर्पित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने जन-धन योजना, बीमा योजना, मुद्रा योजना, उज्जवला योजना और उड़ान की सफलताओं का उदाहरण देकर बताया कि कैसे केंद्र सरकार योजनाओं को लागू कर रही है जिसका लाभ गरीब से भी गरीब तक पहुंच रहा है।

 

इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना का उल्लेख किया जो अनुमानित सभी चार करोड़ परिवारों को बिजली कनेक्शन प्रदान करेगा, जिनके पास वर्तमान में बिजली कनेक्शन नहीं है। इस योजना की लागत 16000 करोड़ रुपये से अधिक होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कनेक्शन गरीबों को मुफ्त में प्रदान किए जाएंगे।

इस अवसर पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे उन्होंने 1,000 दिनों के अंदर 18,000 से अधिक अविद्युतीकृत गांवों के विद्युतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था। उन्होंने कहा कि अब 3000 से भी कम गांवों का विद्युतीकरण होना बाकी है।

उन्होंने बताया कि कैसे कोयले की कमी अतीत की एक बात बन चुकी है, और बिजली उत्पादन में अतिरिक्त क्षमता के माध्यम से लक्ष्य से भी अधिक प्राप्त किया गया है।

प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में वृद्धि की बात की और 2022 तक 175 गीगावाट के लक्ष्य की बात की। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में पावर टैरिफ में भारी कमी आयी है। ट्रांसमिशन लाइनों में भी एक महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कैसे उदय योजना ने बिजली वितरण कंपनियों के नुकसान को कम किया है, इसे उन्होंने कॉपरेटिव, कम्पटिटिव फेडरलिज्म (सहकारी, प्रतिस्पर्धी संघवाद) का एक उदाहरण बताया।

उजाला योजना का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव को बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एलईडी बल्ब की लागत में काफी कमी आई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए भारत को एक ऊर्जा तंत्र (इनर्जी फ्रेमवर्क) की आवश्यकता होगी जो कि निष्पक्षता, दक्षता और स्थिरता के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कार्य संस्कृति में परिवर्तन से ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा, बदले में यह, पूरे देश के कार्य संस्कृति को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।

 

 

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