प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में कल नेपाल में आए भारी भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए आज एक अनुवर्ती बैठक की गई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री अरुण जेटली, श्रीमती सुषमा स्‍वराज, श्री राजनाथ सिंह और श्री मनोहर पर्रिकर तथा राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल, कैबिनेट सचिव श्री अजीत सेठ, अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव श्री पी. के. मिश्रा और सरकार, आईएमडी और एनडीआरएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल हुए।

inner nepal meet2

प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में कल इस मसले पर एक उच्‍च-स्‍तरीय बैठक हुई थी।

राहत एवं बचाव कार्य से जुड़ी विभिन्‍न एजेंसियों द्वारा भारत और नेपाल में किए गए कामों के बारे में बताया गया। आज आए भूकंप के प्रमुख झटके के बाद की परिस्थितियों के बारे में भी जानकारी दी गई।

inner nepal meet

प्रधानमंत्री ने तलाशी एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ नेपाल में फंसे लोगों को निकालने की बात पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि फंसे लोगों को जल्‍द से जल्‍द निकालने के लिए हवाई मार्ग के अलावा सड़क मार्ग का भी इस्‍तेमाल किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन और पानी की आपूर्ति, जिसमें दूध का पाउडर भी शामिल है, को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen

Media Coverage

India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।