प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जागरण फोरम को संबोधित किया
एक जीवंत लोकतंत्र में जन भागीदारी आवश्यक है: प्रधानमंत्री मोदी
महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया था: प्रधानमंत्री मोदी
स्वच्छ भारत  एक जन आंदोलन में बदल गया है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टार्ट-अप इंडिया – स्टैंड-अप इंडिया’ पहल से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में जागरण प्रकाशन समूह द्वारा आयोजित जागरण फोरम को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र में जागरूकता के महत्व पर जोर देने के लिए ‘सतत जागरूकता, स्वतंत्रता का मूल्य है’ को उद्धृत किया। उन्होंने कहा जीवंत लोकतंत्र के लिए जन भागीदारी की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कैसे स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन में बदल दिया। उन्होंने कहा कि ‘जन आंदोलन’ का यह मॉडल देश की विकास प्रक्रिया पर भी लागू किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी से पहले कानून इस आधार पर बनते थे कि लोगों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि अब यह दृष्टिकोण बदलना चाहिए।

इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने दस्तावेजों के स्व-प्रमाणन, स्वच्छ भारत अभियान में लोगों की भागीदारी और रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने के अभियान के उदाहरण दिए।

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कैसे प्रधानमंत्री जन-धन योजना और ‘स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया’ पहल सकारात्मक प्रभाव पैदा कर रही है।

प्रधानमंत्री ने ‘न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम सुशासन’ यानी मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के दृष्टिकोण की व्याख्या की और कहा कि पुराने कानून समाप्त किए जा रहे हैं।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।