प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और इटली के प्रधानमंत्री ज्‍यूसेपे कोंते के बीच आज टेलीफोन पर बातचीत हुई।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के कारण इटली में हुई मौतों पर दुख प्रकट करते हुए अपनी संवेदनाएं व्‍यक्‍त की। उन्‍होंने संकट के समय इटली के नागरिकों द्वारा दिखाए गए धैर्य के लिए उनकी सराहना की।

दोनों नेताओं ने अपने-अपने देशों और वैश्विक स्‍तर पर महामारी के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी और आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए आवश्‍यक उपायों पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के प्रति एकजुटता व्‍यक्‍त की और एक दूसरे के देश में फंसे नागरिकों के प्रति दिखाए गए आपसी सहयोग की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने श्री कोंते को आश्‍वासन दिया कि भारत आवश्‍यक दवाओं और अन्‍य सामग्री की व्‍यवस्‍था करने में इटली को उदारता से सहयोग देता रहेगा।

दोनों नेता भारत और इटली के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए आपस में सक्रिय सलाह-मशविरा और सहयोग करने पर सहमत हुए।

इटली के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को उचित समय पर इटली आने का एक बार फिर निमंत्रण दिया।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए शुभ विचारों, वाणी और कर्मों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया
July 24, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया कि विचार, वाणी और कर्म में निरंतर अभ्यास किस प्रकार व्यक्ति के चरित्र और जीवन की दिशा को आकार देता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा:

"कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।

तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥"

मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से निरंतर जिसका अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में ले जाता है, इसलिए, व्यक्ति को अपने विचारों और संवाद में सदैव केवल कल्याणकारी विषयों को ही स्थान देना चाहिए।