पीपुल-पब्लिक निजी भागीदारी

Published By : Admin | May 14, 2014 | 15:36 IST

महात्मा गाँधी के स्वतंत्रता आन्दोलनों के दौरान उनकी सफलता का एक बड़ा कारण ये था कि वो एक बहुत भारी स्तर पर लोगों को सम्मिलित कर सके। उसी तरह किसी भी सरकार की सफलता के लिए नीतियों के निर्माण में और उसके क्रियान्वयन के लिए जनता का सहयोग आवश्यक है। जब तक सरकार जनता को अवसर नहीं देगी, बहुत सारे उद्देश्य केवल कागजों पर रह जायेंगे और इच्छित नतीजों तक नहीं पहुँच पाएंगे। शायदनरेन्द्र मोदी की सफलताओं के पीछे कुछ कम ज्ञात कारणों में से एक उनकी वह योग्यता है, जिसके माध्यम से वो सरकार के प्रयासों की सफलता के लिए लोगों को शक्ति प्रदान करके और उनकी क्षमताओं का उपयोग कर विकास को एक जन आंदोलन बना देते हैं।

जब आप लोगों को नीति निर्माण और उसके क्रियान्‍वयन में सहायक बनाते है, तो लोग उस योजना को अपना मानकर, उस योजना को सफल बनाने हेतु कोई कसर नहीं छोड़ते। नरेन्द्र मोदी हमेशा अपनी योजनाओं और उनके क्रियान्वयन कोसम्पूर्ण रूप से जन भागीदारी के साथ “जन आन्दोलन”बनाने के लिए वचनबद्ध रहे है।

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वाचे गुजरात, बेटी बचाओ, वेव गुजरात, समयदान जैसी कुछ पहल हालांकि सरकार द्वारा और सरकार के समर्थन से शुरू की गई, लेकिन ये सफलतापूर्वक संपन्न हुईं और यहां तक कि इसके एक बड़े हिस्से का वित्त पोषण स्थानीय स्तर पर लोगों ने स्वयं किया।

नरेन्द्र मोदी की कार्य पद्धति और जनोन्मुख प्रशासन इस बात पर आधारित है कि लोगों में गर्व का भाव फिर से स्थापित हो और उनकी ऊर्जा का उपयोग विकास तथा मानव जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हो।

जनता को सशक्त बनाने और एक सक्रिय तथा जनहितकारी प्रशासन देने के अलावा अधिकारी लोगों तक गए,फिर चाहे वो छात्राओं का नामांकन हो, कुशल कारीगरों को औजारों का वितरण हो या फिर विद्यालयों में संपूर्ण चिकित्सा शिविर हो।

वाचे गुजरात (अध्यनरत गुजरात) भारत में, और शायद दुनिया में अपनी तरह की पहली परियोजना है जो लोगों और खासतौर से बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देती है। व्यापक जनभागीदारी के कारण इस परियोजना को अद्भुत सफलता मिली। राज्य के इतिहास में पहली बार क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी किसी गैर सरकारी अधिकारी यानी आम नागरिकों ने निभाई। इतना ही नहीं, जिला और तालुका स्तर पर धन का इंतजान इन समितियों के जरिए लोगों ने ही किया। हालांकि, इस अनोखे और इनोवेटिव आन्दोलन के लिए एक समर्पित  अनुसंधान की जरूरत थी। जन आंदोलन का रूप लेने के कारण यह अभियान आठ महीनों में 25 लाख बच्चों को कुल मिलाकर एक करोड़ पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सका। सार्वजनिक स्थानों में 60 लाख लोगों ने एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से किताबें पढ़ीं, जो एक रिकॉर्ड है।

समयदान भी एक ऐसी ही पहल थी, जिसके अंतर्गत गुजरात की स्थापना के 50वर्ष पूरे होने के जश्न के दौरान लोगों ने अपनी इच्छा सेअपना समय सामाजिक कार्यों में लगाने की प्रतिज्ञा की। इस पर अमल करते हुए बड़ी संख्या में लोगों ने विभिन्न योजनाओं में अपना योगदान दिया। स्वर्ण जयंती उत्सव के दौरान उन्होंने प्रत्येक गुजराती से गुजरात/भारत की सेवा के लिए एक स्वर्णिम संकल्प लेने के लिए कहा और इस तरह लोगों ने शांति, प्रगति और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण योगदान किया।

यही कारण है कि वो अपने विभिन्न साक्षात्कारों के दौरान पत्रकारों से कहते हैं कि यदि प्रत्येक व्यक्ति एक कदम आगे बढ़ेगा तो देश 125 करोड़ कदम आगे बढ़ जाएगा। ये न तो मिथक है और न ही विश्वास, बल्कि एक वास्तविकता है, जो बीते 14 वर्षों के दौरान गुजरात के सक्रिय और जनहितकारी प्रशासन की देन है।

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बेटी बचाओ अभियान एक और चमत्कार है। लोगों को जाग्रत कर, संवेदनशील बनाकर और उनके दिलों को छूकर, उन्होंने बड़ी संख्या में सामाजिक संस्थाओं और गैर सामाजिक संस्थाओं को इस महान कार्य के लिए प्रेरित किया। प्रेरणा इतनी प्रभावशाली रही कि ये अभियान आज तक कुछ अति शक्तिशाली सामाजिक संस्थाओं की प्रमुख योजना है। इन उपायों से लिंग अनुपात में सुधार हुआ। स्पष्ट है कि कानून और धाराओं के होते हुए भी, सामाजिक सुधार केवल जन जागृति और जन आंदोलनों के जरिए ही लाए जा सकते हैं।

वावे गुजरात के अन्तर्गत एक दिन मेंअहमदाबाद में 10 लाख से अधिक पेड़ लगाकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। यह कार्य भी लोगों ने स्वयं किया और सरकार ने उन्हें जरूरी सहायता दी।

गुजरात में और खासतौर से कच्छ में भूकंप से हुई तबाही के बाद पुनर्वास कार्य

कई लिहाज से शोध का विषय हैं। जिस तरह कच्छ पुनर्जीवित हुआ और आगे बढ़ रहा है, वह एक ऐसी कहानी है जो ठीक प्रकार से सामने नहीं लाई गई। पर यह लोगों के सहयोग और भागीदारी की एक शानदार कहानी है, फिर चाहे वो घर, स्वास्थ्य, शिक्षा, अनाथ बच्चों को गोद लेना या फिर भौतिक मूलभूत सुविधाएं हो। जाहिर तौर परयह एक अति सक्रिय मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता और साहस ही था, जिन्होंने न सिर्फ अति सक्रिय और जनता के हित में नीतियां तैयार कीं, बल्कि लोगों की साझेदारी से प्रशासनिक मशीनरी में शक्तियों का विकेंद्रीकरण भी किया।

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15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों को प्रत्येक वर्ष अलग-अलग जिलों में मनाना भारतीय इतिहास में एक नया प्रयोग था। राष्ट्रीय पर्व, जो जनता की भागीदारी के बिना आम तौर पर सिर्फ सरकारी कार्यक्रम और औपचारिकता मात्र रह गए थे, को नये प्रयास कर देश भक्ति के जन आंदोलन में परिवर्तित कर दिया, जिसका परिणाम देश के प्रति समर्पण और प्रतिबद्धता के रूप में देखने को मिला। इसने न सिर्फ सरकारी तंत्र को फिर से जगाया बल्कि जिन लोगों ने सरकार को अपने दरवाजे पर कार्य करते देखा, उनके बीच सहभागिता को बढ़ावा दिया। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बच्चों, कलाकारों, और सांस्कृतिक संगठनों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने और उसे बढ़ाने का मौका मिला। इससे लोगों में गर्व का भाव जगा, एकजुटता हुई और दूर-दराज के इलाकों में भी विकास हुआ।

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इस प्रकार लोगों की शक्तियों को पहचान कर, जन-शक्ति की अद्भुत क्षमतागुजरात में शांति और संमृद्धि लाने के श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि के रूप में दिखाई दी।पिछले एक दशक में गुजरात में जो विकास का मॉडल विकसित हुआ वो कई लोगों के आकर्षण का केंद्र है। इसे न सिर्फ अन्य भारतीय राज्यों के लिए बल्कि संपूर्ण विकासशील संसार के लिएएक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने लोगों को महज आखिरी छोर पर खड़े प्राप्तकर्ताओं की जगह पूरी प्रक्रिया में भागीदार बनाया है।

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।