परीक्षा पे चर्चा के दौरान असम की कृष्टि सैकिया को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत करने का मौका मिला। उसने पैरेंट्स और बच्चों के बीच जनरेशन गैप के बारे में एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया।
कृष्टि सैकिया ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा, "नई पीढ़ी के एक बच्चे के तौर पर हम अपने पैरेंट्स और अपने बीच के जनरेशन गैप को हमेशा कम करना चाहते हैं। हम ये किस प्रकार कर सकते हैं?"
उसके सवाल का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पैरेंट्स से खुद और बच्चों के बीच जनरेशन गैप को कम करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "अपने बच्चों के साथ जुड़ें, उनकी पसंद और नापसंद के बारे में जानें। उनकी दुनिया में खुद को शामिल करने से जनरेशन गैप कम हो जाएगा, वे आपकी बातों की सराहना करेंगे।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, " याद कीजिए, जब आपका बच्चा एक साल का था, तो आपने उससे कैसे बात की थी? आप उसे हंसाने के लिए किस तरह की आवाजें निकालते थे? आप कैसे उनसे चेहरे के भावों के जरिए बात करते थे। क्या आपने कभी सोचा कि अगर लोग आपको ऐसा करते हुए देखें, तो वे क्या कहेंगे? आपको उस समय मजा आया था, इसलिए आपने ऐसा किया। आपने किसी की परवाह नहीं की, यानि आप सब कुछ छोड़कर खुद बच्चे बन गए।"
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 21, 2026
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥ pic.twitter.com/wiaXL3jabi


