Excellencies,

मेरे मित्र राष्ट्रपति इरफान अली और प्रधानमंत्री डिकॉन मिचेल के साथ दूसरी भारत-कैरीकॉम समिट की मेजबानी करते हुए मुझे हार्दिक खुशी हो रही है।मैं कैरीकॉम परिवार के सभी सदस्यों का हार्दिक स्वागत करता हूँ, और राष्ट्रपति इरफान अली को इस समिट के शानदार आयोजन के लिए विशेष रूप से धन्यवाद देता हूँ।

कुछ महीनों पहले "हरीकेन बेरिल” से प्रभावित देशों में हुई जान-माल की हानि के लिए मैं सभी भारतवासियों की ओर से गहरी संवेदनाएं प्रकट करता हूँ।

Excellencies,

आज की हमारी बैठक पाँच साल के अंतराल के बाद हो रही है। इन पाँच वर्षों में विश्व में अनेक बदलाव आए हैं, मानवता को अनेक तनावों और संकटों का सामना करना पड़ा है।

इनका सबसे बड़ा और नकारात्मक प्रभाव हम जैसे ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ा है। इसलिए भारत ने सदैव कैरीकॉम के साथ मिलकर साझा चुनौतियों से निपटने का प्रयास किया है।

कोविड हो या natural disasters, capacity building हो या विकास के कार्य, भारत एक विश्वसनीय पार्टनर के रूप में आप सभी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ा है।

Excellencies,

पिछली बैठक में हमने कई नए और सकारात्मक initiatives की पहचान की थी। मुझे खुशी है कि उन सभी पर प्रगति हो रही है। भविष्य में हमारे सहयोग को मजबूत करने के लिए मैं कुछ प्रस्ताव रखना चाहूँगा।

यह प्रस्ताव सात मुख्य स्तंभों पर आधारित हैं। और ये स्तम्भ हैं: C, A, R, I, C, O, M यानि कैरीकॉम।पहला, ‘C’ यानि Capacity Building भारत scholarships, ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता के माध्यम से कैरीकॉम देशों की capacity building में अपना योगदान देता रहा है। आज मैं भारत द्वारा दी जा रहीI TEC (आई-टेक) scholarships में अगले पाँच वर्ष के लिए 1000 slots की वृद्धि का प्रस्ताव रखता हूँ।

युवाओं की technical training और skill development को बढ़ावा देने के लिए हमने बेलीज़ में Technical Development Centre बनाया है। सभी कैरीकॉम देशों द्वारा इसके इस्तेमाल के लिए हम इसके scale और size का विस्तार करेंगे।

हम कैरीकॉम क्षेत्र के लिए Forensic Centre बनाने पर भी काम करेंगे। भारत में civil servants की निरंतर capacity building के लिए हमने "i-GOT कर्मयोगी पोर्टल” बनाया है।

इस पोर्टल पर टेक्नोलॉजी, administration, कानून, शिक्षा जैसे क्षेत्रों में online courses उपलब्ध हैं। कैरीकॉम देशों के लिए एक ऐसा ही पोर्टल तैयार किया जा सकता है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, भारत अपने कैरीकॉम साथियों के साथ पार्लियामेंटरी ट्रेनिंग पर भी काम करने के लिए तैयार है।

दूसरा, ‘A’ यानि Agriculture and Food Securityकृषि क्षेत्र में, Drones, Digital Farming, Farm Mechanisation, Soil testing जैसी तकनीकों से भारत में कृषि का स्वरूप बदला है। Nano Fertilizers के साथ-साथ हमnatural farming पर भी बल दे रहे हैं। Food security को बढ़ावा देने के लिए हम millets को promote कर रहे हैं। भारत की पहल पर UN ने वर्ष 2023 को अन्तर्राष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किया था।

Millets एक ऐसा superfood है, जो किसी भी climate में grow कर सकता है। कैरीकॉम देशों के लिए भी यह climate change का सामना करने के साथ साथ food security बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। आपके यहाँ "सरगासम seaweed (सी-वीड)” एक बड़ी समस्या है। इसका प्रभाव होटल और tourism industry पर भी पड़ रहा है।भारत में हमने इस seaweed (सी-वीड) से fertiliser बनाने की technology विकसित की है।

इस टेक्नॉलजी से इस समस्या का हल भी हो सकता है, साथ ही crop yield भी बढ़ सकती है। इन सभी अनुभवों को भारत कैरीकॉम देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।

तीसरा, "R” यानि Renewable Energy and Climate Change पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ हम सभी के लिए प्राथमिकता का विषय हैं। इस विषय में वैश्विक समन्वय बढ़ाने के लिए हमने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, Mission LiFE, यानि Lifestyle for Environment, Global Biofuel Alliance जैसी पहलों की शुरुआत की है।

मुझे खुशी है कि आप International Solar Alliance से जुड़े हैं। मैं बाकी initiatives से भी जुड़ने का आग्रह करना चाहूँगा। Renewable energy के क्षेत्र में हम बड़े पैमाने पर निवेश कर रहे हैं। हमारा प्रस्ताव है कि हम कैरीकॉम के सभी देशों में कम से कम एक government building को solar powered बनाने में मदद करेंगे। चौथा, ‘I’ (आई) यानि Innovation, Technology and Trade ।

आज भारत की पहचान टेक्नॉलॉजी और startup हब के रूप में हो रही है। भारत की विशिष्टता ये है कि भारत में विकसित technology solutions हमारे विविधता से भरे समाज और समय की कसौटी से निकल कर आते हैं। इसलिए इनकी सफलता विश्व के किसी भी देश में guaranteed है। भारत के Digital Public Infrastructure यानि India Stack से हम अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को revolutionise कर रहे हैं।

आज भारत में एक क्लिक में करोड़ों लोगों को direct benefits transfers किए जाते हैं। भारत द्वारा बनाए गए UPI यानि Unified Payments Interface से UAE, सिंगापुर, फ्रांस, श्रीलंका, नेपाल, मॉरीशस जैसे देश जुड़ चुके हैं।

मेरा प्रस्ताव है कि कैरीकॉम देशों में भी इसकी adoption के लिए हम मिलकर काम कर सकते हैं। सामान्य जन द्वारा अपने सभी दस्तावेज़ों को सुरक्षित तरीके से store करने के लिए हमने cloud-based Digi Locker प्लेटफॉर्म बनाया है।

हम कैरीकॉम देशों में इसे pilot project के रूप में लॉन्च कर सकते हैं। भारत में public procurement और सुगम, और transparent बनाने के लिए हमने Government e-Marketplace यानि GeM पोर्टल बनाया है।

इस पोर्टल पर मेडिकल equipment और कंप्यूटर से लेकर, फर्नीचर और kids toys तक हर चीज़ उपलब्ध है। हमें यह पोर्टल कैरीकॉम देशों के साझा करने में ख़ुशी होगी। 5Ts यानि Trade, Technology, Tourism, Talent और Tradition को बढ़ावा देने के लिए हम सभी देशों के प्राइवेट सेक्टर तथा stakeholders को आपस में जोड़ने के लिए एक online portal बना सकते हैं।

SME सेक्टर में भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। पिछले वर्ष India-CARICOM बैठक के दौरान हमने SME projects के लिए 1 मिलियन डॉलर की ग्रांट की घोषणा की थी। हमें इसके implementation को गति देनी चाहिए। Space Technology में भारत विश्व के अग्रणी देशों में से हैं। Space technology का इस्तेमाल करते हुए हम कैरीकॉम देशों में resource mapping, climate studies, agriculture जैसे क्षेत्रों के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।

पिछले वर्ष, सितम्बर में G-20 समिट के दौरान हमने G-20 Satellite for Environment and Climate Observation की घोषणा की थी। 2027 तक इसे लॉन्च किया जाएगा। हम इस मिशन से आने वाले डाटा को विश्व के सभी देशों, खास तौर पर ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझा करेंगे।

पांचवां, ‘C’ यानि Cricket and Cultureक्रिकेट हमारे देशों के बीच एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण connecting link है।बात 1983 के क्रिकेट विश्व कप फाइनल की हो, या IPL की, भारत के लोगों में West Indies के cricketers के लिए विशेष लगाव रहा है।

इस वर्ष आपके यहाँ हुए T-20 World Cup से भारतीय क्रिकेट fans का कैरीबियन की ओर आकर्षण और बढ़ा है। और यह मैं सिर्फ इसलिए नहीं कह रहा हूँ क्योंकि भारत ने ये विश्व कप जीता था! मेरा प्रस्ताव है कि क्रिकेट संबंधों के साथ साथ महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए हम कैरीकॉम के हर देश से ग्यारह युवा महिला cricketers की भारत में training कर सकते हैं।

हमारी साझा सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर रखने के लिए हम अगले वर्ष कैरीकॉम देशों में Days of Indian Culture का आयोजन कर सकते हैं। बॉलीवुड की लोकप्रियता को देखते हुए, कैरीकॉम देशों के साथ मिलकर फिल्म फेस्टिवल organise किये जा सकते हैं।छठा, ‘O’ (ओ) यानि Ocean Economy and Maritime Securityभारत के लिए आप Small Island States नहीं, lekin Large Ocean Countries हैं।

मेरा प्रस्ताव है कि इस क्षेत्र में connectivity बढ़ाने के लिए हम पैसेंजर और कार्गो ferries की आपूर्ति करेंगे। हम मिलकर maritime domain mapping और hydrography पर काम कर सकते हैं। पिछले वर्ष कैरीकॉम द्वारा maritime security strategy जारी की गई।

इसमें drug trafficking, piracy, illegal fishing, human trafficking के साथ-साथ आर्थिक सहयोग के untapped potential को भी रेखांकित किया गया है। भारत को इन सभी विषयों पर आपके साथ सहयोग बढ़ाने में खुशी होगी।सातवाँ, ‘M’ यानि Medicine and Healthcare कैरीकॉम देशों की स्वास्थ्य सुरक्षा भारत के लिए उच्च प्राथमिकता का विषय रहा है।

भारत ne सामान्य मानवी को quality and affordable healthcare प्रदान करने के लिए जन औषधि केंद्र खोले हैं। मेरा प्रस्ताव है कि हम इस model पर कैरीकॉम के सभी देशों में जन औषधि केंद्र खोल सकते हैं। भारत और सभी देशों के बीच फार्माकोपिया को मान्यता देने के लिए समझौता संपन्न किया जाये तो इस प्रयास में गति ला सकते हैं।

हम कैरीकॉम देशों में Drug Testing Labs बनाने पर भी विचार कर सकते हैं। कैरीकॉम देशों में कैंसर और दूसरे non-communicable diseases एक बहुत बड़ी चुनौती है। इससे लड़ने के लिए हम भारत में बनी कैंसर therapy मशीन, सिद्धार्थ Two, उपलब्ध कराएंगे।

Remote locations पर लोगों के सुगम और on the spot इलाज के लिए हमने भारत में "भीष्म” mobile hospital बनाए हैं। इन्हें कुछ मिनटों में ही set up किया जा सकता है, और बिना समय गँवाए सभी प्रकार के trauma का इलाज किया जा सकता है। हमें यह mobile hospitals कैरीकॉम के मित्रों को उपलब्ध करने में खुशी होगी।

दिव्यांग लोगों को artificial foot की मानवीय सहायता देने के लिए हम हर वर्ष किसी न किसी कैरीकॉम देश में Jaipur Foot camps लगाने का प्रस्ताव रखते हैं। हम Dialysis Units तथा sea ambulance भी प्रदान करने का प्रस्ताव रखते है। डायबिटीज, hypertension जैसी lifestyle diseases से बचने के लिए योग बहुत ही असरदार है। मन और शरीर के बीच सामंजस्य लाने पर केंद्रित यह साधना पूरी मानवता के लिए भारतीय सभ्यता का उपहार है।

इसे 2015 में UN द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में recognise किया गया था। इसे लोगों द्वारा छोटी उम्र से ही अपनाने के लिए हम इसे स्कूलों में करीक्यूलम का हिस्सा बना सकते हैं। हम सभी कैरीकॉम देशों में भारत सेयोग teachers और trainers भी भेजने का प्रस्ताव रखते हैं। हम कैरीकॉम देशों में योग थेरेपी और भारतीय traditional medicines के इस्तेमाल पर भी काम करेंगे।

Excellencies,

"कैरीकॉम” के हमारे इन सातों स्तंभों में एक बात समान है - यह सभी आपकी प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर आधारित हैं। यह हमारे सहयोग का मूलभूत सिद्धांत है।मैं इन विषयों पर आप सभी के विचार सुनना चाहूँगा।

बहुत बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
With HPV vaccine rollout, AIIMS oncologist says it’s the beginning of the end for cervical cancer in India

Media Coverage

With HPV vaccine rollout, AIIMS oncologist says it’s the beginning of the end for cervical cancer in India
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है: राइजिंग भारत समिट में पीएम मोदी
February 27, 2026
Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।