देशवासियों को छठ पूजा की शुभकामनाएं: पीएम मोदी
छठ पूजा एक भारत- श्रेष्ठ भारत का उदाहरण है: पीएम मोदी
आज हम सबसे बड़े सौर ऊर्जा उत्पादक देशों में से एक हैं: पीएम मोदी
हमारा देश सौर के साथ-साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में भी चमत्कार कर रहा है। आज पूरी दुनिया भारत की उपलब्धियों को देखकर हैरान है: पीएम मोदी
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में पैदा हो रहे बड़े अवसरों का अधिक से अधिक स्टार्ट-अप्स और इनोवेटर्स लाभ उठाएं : पीएम मोदी
स्टूडेंट पावर ही भारत को मजबूत बनाने का आधार है। आज का युवा ही 2047 तक की यात्रा में भारत का नेतृत्व करेगा: पीएम मोदी
भारत में मिशन LiFE लॉन्च किया गया है। मिशन LiFE का सरल सिद्धांत है- ऐसी जीवन शैली को बढ़ावा देना जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज, देश के कई हिस्सों में सूर्य उपासना का महापर्व ‘छठ’ मनाया जा रहा है | ‘छठ’ पर्व का हिस्सा बनने के लिए लाखों श्रद्धालु अपने गाँव, अपने घर, अपने परिवार के बीच पहुँचे हैं | मेरी प्रार्थना है कि छठ मइया सबकी समृद्धि, सबके कल्याण का आशीर्वाद दें | 

साथियो, सूर्य उपासना की परंपरा इस बात का प्रमाण है कि हमारी संस्कृति, हमारी आस्था का, प्रकृति से कितना गहरा जुड़ाव है | इस पूजा के जरिये हमारे जीवन में सूर्य के प्रकाश का महत्व समझाया गया है | साथ ही ये सन्देश भी दिया गया है कि उतार-चढ़ाव, जीवन का अभिन्न हिस्सा है | इसलिए, हमें हर परिस्थिति में एक समान भाव रखना चाहिए | छठ मइया की पूजा में भांति-भांति के फलों और ठेकुआ का प्रसाद चढ़ाया जाता है | इसका व्रत भी किसी कठिन साधना से कम नहीं होता | छठ पूजा की एक और ख़ास बात होती है कि इसमें पूजा के लिए जिन वस्तुओं का इस्तेमाल होता है उसे समाज के विभिन्न लोग मिलकर तैयार करते हैं | इसमें बांस की बनी टोकरी या सुपली का उपयोग होता है | मिट्टी के दीयों का अपना महत्व होता है | इसके जरिये चने की पैदावार करने वाले किसान और बताशे बनाने वाले छोटे उद्यमियों का समाज में महत्व स्थापित किया गया है | इनके सहयोग के बिना छठ की पूजा संपन्न ही नहीं हो सकती | छठ का पर्व हमारे जीवन में स्वच्छता के महत्व पर भी जोर देता है | इस पर्व के आने पर सामुदायिक स्तर पर सड़क, नदी, घाट, पानी के विभिन्न स्त्रोत, सबकी सफाई की जाती है | छठ का पर्व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भी उदाहरण है | आज बिहार और पूर्वांचल के लोग देश के जिस भी कोने में हैं, वहाँ, धूमधाम से छठ का आयोजन हो रहा है | दिल्ली, मुंबई समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों और गुजरात के कई हिस्सों में छठ का बड़े पैमाने पर आयोजन होने लगा है | मुझे तो याद है, पहले गुजरात में उतनी छठ पूजा नहीं होती थी | लेकिन समय के साथ आज करीब-करीब पूरे गुजरात में छठ पूजा के रंग नज़र आने लगे हैं | ये देखकर मुझे भी बहुत ख़ुशी होती है | आजकल हम देखते हैं, विदेशों से भी छठ पूजा की कितनी भव्य तस्वीरें आती हैं | यानी भारत की समृद्ध विरासत, हमारी आस्था, दुनिया के कोने-कोने में अपनी पहचान बढ़ा रही है | इस महापर्व में शामिल होने वाले हर आस्थावान को मेरी तरफ़ से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, अभी हमने पवित्र छठ पूजा की बात की, भगवान सूर्य की उपासना की बात की | तो क्यों न सूर्य उपासना के साथ-साथ आज हम उनके वरदान की भी चर्चा करें | सूर्य देव का ये वरदान है – ‘सौर ऊर्जा’ | Solar Energy आज एक ऐसा विषय है, जिसमें पूरी दुनिया अपना भविष्य देख रही है और भारत के लिए तो सूर्य देव सदियों से उपासना ही नहीं, जीवन पद्धति के भी केंद्र में रह रहे हैं | भारत, आज अपने पारंपरिक अनुभवों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ रहा है, तभी, आज हम, सौर ऊर्जा से बिजली बनाने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गए हैं | सौर ऊर्जा से कैसे हमारे देश के गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन में बदलाव आ रहा है, वो भी अध्ययन का विषय है |

तमिलनाडु में, काँचीपुरम में एक किसान हैं, थिरु के. एझिलन | इन्होंने ‘पी.एम कुसुम योजना’ का लाभ लिया और अपने खेत में दस horsepower का solar pump set लगवाया | अब उन्हें अपने खेत के लिए बिजली पर कुछ खर्च नहीं करना होता है | खेत में सिंचाई के लिए अब वो सरकार की बिजली सप्लाई पर निर्भर भी नहीं हैं | वैसे ही राजस्थान के भरतपुर में ‘पी.एम. कुसुम योजना’ के एक और लाभार्थी किसान हैं - कमलजी मीणा | कमलजी ने खेत में solar pump लगाया, जिससे उनकी लागत कम हो गई है | लागत कम हुई तो आमदनी भी बढ़ गई | कमलजी सोलार बिजली से दूसरे कई छोटे उद्योगों को भी जोड़ रहे हैं | उनके इलाके में लकड़ी का काम है, गाय के गोबर से बनने वाले उत्पाद हैं, इनमें भी सोलर बिजली का इस्तेमाल हो रहा है, वो, 10-12 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं, यानी, कुसुम योजना से कमलजी ने जो शुरुआत की, उसकी महक कितने ही लोगों तक पहुँचने लगी है |

साथियो, क्या आप कभी कल्पना कर सकते हैं कि आप महीने भर बिजली का उपयोग करें और आपका बिजली बिल आने के बजाय, आपको बिजली के पैसे मिलें ? सौर ऊर्जा ने ये भी कर दिखाया है | आपने कुछ दिन पहले, देश के पहले सूर्य ग्राम - गुजरात के मोढेरा की खूब चर्चा सुनी होगी | मोढेरा सूर्य ग्राम के ज्यादातर घर, सोलर पावर से बिजली पैदा करने लगे हैं | अब वहां के कई घरों में महीने के आखिर में बिजली का बिल नहीं आ रहा, बल्कि, बिजली से कमाई का cheque आ रहा है | ये होता देख, अब देश के बहुत से गावों के लोग मुझे चिट्ठियां लिखकर कह रहे हैं कि उनके गांव को भी सूर्य ग्राम में बदला जाए, यानी वो दिन दूर नहीं जब भारत में सूर्यग्रामों का निर्माण बहुत बड़ा जनांदोलन बनेगा और इसकी शुरुआत मोढेरा गांव के लोग कर ही चुके हैं | 

आइये, ‘मन की बात’ के श्रोताओं को भी मोढेरा के लोगों से मिलवाते हैं | हमारे साथ इस समय phone line पर जुड़े हैं श्रीमान् विपिन भाई पटेल |

प्रधानमंत्री जी :- विपिन भाई नमस्ते !   देखिये, अब तो मोढेरा पूरे देश के लिए एक model के रूप में चर्चा में आ गया है | लेकिन जब आपको अपने रिश्तेदार, परिचित सब बातें पूछते होंगे तो आप उनको क्या-क्या बताते हैं, क्या फायदा हुआ ? 

विपिन जी :- सर, लोग हमारे को पूछते है तो हम कहते हैं कि हमें जो बिल आता था, लाइट बिल वो अभी जीरो आ रहा है और कभी 70 रूपए आता है पर लेकिन हमारे पूरे गाँव में जो आर्थिक परिस्थिति है वो सुधर रही है |

प्रधानमंत्री जी :- यानी एक प्रकार से पहले जो बिजली बिल की चिंता थी वो खत्म हो गई |

विपिन जी :- हाँ सर, वो तो बात सही है सर | अभी तो कोई tension नहीं है पूरे गाँव में | सब लोगों को लग रहा है कि सर ने जो किया तो वो तो बहुत अच्छा किया | वो खुश है सर | आनंदित हो रहे है सब | 

प्रधानमंत्री जी :- अब अपने घर में ही खुद ही बिजली का कारखाना के मालिक बन गए | खुद का अपना घर के छत पर बिजली बन रही है,

विपिन जी :- हाँ सर, सही है सर |

प्रधानमंत्री जी :- तो क्या ये बदलाव जो आया है उसकी गाँव के लोगों पे क्या असर है ?

विपिन जी :- सर वो पूरे गाँव के लोग, वो खेती कर रहे हैं, तो फिर हमारे को बिजली की जो झंझट थी तो उसमें मुक्ति हो गई है | बिजली का बिल तो भरना नहीं है, निश्चिन्त हो गए हैं सर | 

प्रधानमंत्री जी :- मतलब, बिजली का बिल भी गया और सुविधा बढ़ गई |

विपिन जी :- झंझट ही गया सर और सर जब आप यहाँ आये थे और वो 3D Show जो यहाँ उदघाटन किया तो इसके बाद तो मोढेरा गाँव में चार चाँद लग गए हैं सर | और वो जो secretary आये थे सर...

प्रधानमंत्री जी :- जी जी...

विपिन जी :- तो वो गाँव famous हो गया सर | 

प्रधानमंत्री जी :- जी हाँ, UN के Secretary General  उनकी खुद की इच्छा थी | उन्होंने मुझे बड़ा आग्रह किया कि भई इतना बड़ा काम किया है तो मैं वहां जाके देखना चाहता हूँ | चलिए विपिन भाई आपको और आपके गाँव के सब लोगों को मेरे तरफ़ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं और दुनिया आप में से प्रेरणा ले और ये solar energy का अभियान घर-घर चले   

विपिन जी :-  ठीक है सर | वो हम सब लोगों को बताएँगे सर कि भई सोलर लगवाओ, आपके पैसे से भी लगवाओ, तो बहुत फायदा है |    

प्रधानमंत्री जी :-  हाँ लोगों को समझाइये | चलिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं | धन्यवाद भैया |

विपिन जी :- Thank you sir, Thank you sir, मेरा जीवन धन्य हो गया आपसे बात करके |    

विपिन भाई का बहुत-बहुत धन्यवाद | 

आइये अब मोढेरा गाँव में वर्षा बहन से भी बात करेंगे |  

वर्षाबेन :-     हेलो नमस्ते सर ! 

प्रधानमंत्री जी :-    नमस्ते-नमस्ते वर्षाबेन | कैसी हैं आप ? 

वर्षाबेन :- हम बहुत अच्छे हैं सर | आप कैसे हैं ?

प्रधानमंत्री जी :- मैं बहुत ठीक हूँ | 

वर्षाबेन :- हम धन्य हो गए सर आपसे बात करके | 

प्रधानमंत्री जी :- अच्छा वर्षाबेन |

वर्षाबेन :- हाँ | 

प्रधानमंत्री जी :- आप मोढेरा में, आप तो एक तो फौजी परिवार से है|

वर्षाबेन :- मैं फौजी परिवार से हूँ मैं | Army Ex-man की wife बोल रही हूँ सर |

प्रधानमंत्री जी :- तो पहले हिंदुस्तान में कहां-कहां जाने का मौका मिला आपको ?

वर्षाबेन :- मुझे राजस्थान में मिला, गाँधी नगर में मिला, कचरा कांझोर जम्मू है वहां पर मिला मौका, साथ में रहने का | बहुत सुविधा वहां पर मिल रही थी सर |

प्रधानमंत्री जी :- हाँ | ये फौज में होने के कारण आप हिंदी भी बढ़िया बोल रही हो | 

वर्षाबेन :- हाँ-हाँ | सीखा है सर हाँ |

प्रधानमंत्री जी :- मुझे बताइये मोढेरा में जो इतना बड़ा परिवर्तन आया ये Solar Rooftop Plant आपने लगवा दिया | जो शुरू में लोग कह रहे होंगें, तब तो आपको मन में आया होगा, ये क्या मतलब है ? क्या कर रहे हैं ? क्या होगा ? ऐसे थोड़ी बिजली आती है ? ये सब बातें हैं कि आपके मन में आई होगी | अब क्या अनुभव आ रहा है ? इसका फायदा क्या हुआ है ? 

वर्षाबेन :-  बहुत सर फायदा तो फायदा ही फायदा हुआ है सर | सर हमारे गाँव में तो रोज दीवाली मनाई जाती है आपकी वजह से | 24  घंटे हमें बिजली मिल रही है, बिल तो आता ही नहीं है बिलकुल | हमारे घर में हमने electric सब चीज़ें घर में ला रखी हैं सर, सब चीज़ें use कर रहे हैं – आपकी वजह से सर | बिल आता ही नहीं है, तो हम free mind से, सब use कर सकते हैं न !   

प्रधानमंत्री जी :-  ये बात सही है, आपने बिजली का अधिकतम उपयोग करने के लिए भी मन बना लिया है |

वर्षाबेन :-  बना लिया सर, बना लिया | अभी हमें कोई दिक्कत ही नहीं है. हम free mind से, सब ये जो washing machine है, AC है सब चला सकते हैं सर |  

प्रधानमंत्री जी :-  और गाँव के बाकी लोग भी खुश हैं इसके कारण ? 

वर्षाबेन :-  बहुत-बहुत खुश हैं सर |

प्रधानमंत्री जी :–    अच्छा ये आपके पतिदेव तो वहाँ सूर्य मंदिर में काम करते हैं ? तो वहां जो वो light show हुआ इतना बड़ा event हुआ और अभी दुनियाभर के मेहमान आ रहे हैं | 

वर्षा बेन :–    दुनियाभर के foreigners आ सकते हैं पर आपने World में प्रसिद्ध कर दिया है हमारे गाँव को | 

प्रधानमंत्री जी :– तो आपके पति को अब काम बढ़ गया होगा इतने मेहमान वहाँ मंदिर में देखने के लिए आ रहे हैं | 

वर्षा बेन :-     अरे ! कोई बात नहीं जितना भी काम बढ़े, सर कोई बात नहीं, इसकी हमें कोई दिक्कत नहीं है हमारे पति को, बस आप विकास करते जाओ हमारे गाँव का | 

प्रधानमंत्री जी :– अब गाँव का विकास तो हम सबको मिलकर के करना है |

वर्षा बेन :-     हाँ, हाँ | सर हम आपके साथ हैं | 

प्रधानमंत्री जी :– और मैं तो मोढेरा के लोगों का अभिनन्दन करूँगा क्योंकि गाँव ने इस योजना को स्वीकार किया और उनको विश्वास हो गया कि हाँ हम अपने घर में बिजली बना सकते हैं | 

वर्षा बेन -:     24 घंटे सर ! हमारे घर में बिजली आती है और हम बहुत खुश हैं | 

प्रधानमंत्री जी :– चलिए ! मेरी आपको बहुत शुभकामनाएँ हैं | जो पैसे बचें हैं, इसका बच्चों की भलाई के लिए उपयोग कीजिये | उन पैसों का उपयोग अच्छा हो ताकि आपका जीवन को फायदा हो | मेरी आपको बहुत शुभकामनाएँ है | और सब मोढेरा वालों को मेरा नमस्कार ! 

साथियो, वर्षाबेन और बिपिन भाई ने जो बताया है, वो पूरे देश के लिए, गांवों-शहरों के लिए एक प्रेरणा है | मोढेरा का ये अनुभव पूरे देश में दोहराया जा सकता है | सूर्य की शक्ति, अब पैसे भी बचाएगी और आय भी बढ़ाएगी | जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से एक साथी हैं – मंजूर अहमद लर्हवाल | कश्मीर में सर्दियों के कारण बिजली का खर्च काफी होता है | इसी कारण, मंजूर जी का बिजली का बिल भी 4 हजार रूपए से ज्यादा आता था, लेकिन, जब से मंजूर जी ने अपने घर पर Solar Rooftop Plant लगवाया है, उनका खर्च आधे से भी कम हो गया है | ऐसे ही, ओडीशा की एक बेटी कुन्नी देउरी, सौर ऊर्जा को अपने साथ-साथ दूसरी महिलाओं के रोजगार का माध्यम बना रही हैं | कुन्नी, ओडीशा के केन्दुझर जिले के करदापाल गांव में रहती है | वो आदिवासी महिलाओं को solar से चलने वाली रीलिंग मशीन पर silk की कताई की training देती हैं | Solar Machine के कारण इन आदिवासी महिलाओं पर बिजली के बिल का बोझ नहीं पड़ता, और उनकी आमदनी हो रही है | यही तो सूर्य देव की सौर ऊर्जा का वरदान ही तो है | वरदान और प्रसाद तो जितना विस्तार हो, उतना ही अच्छा होता है | इसलिए, मेरी आप सबसे प्रार्थना है, आप भी, इसमें जुड़ें और दूसरों को भी जोड़ें | 

मेरे प्यारे देशवासियो, अभी मैं आपसे सूरज की बातें कर रहा था | अब मेरा ध्यान space की तरफ जा रहा है | वो इसलिए, क्योंकि हमारा देश, Solar Sector के साथ ही space sector में भी कमाल कर रहा है | पूरी दुनिया, आज, भारत की उपलब्धियाँ देखकर हैरान है | इसलिए मैंने सोचा, ‘मन की बात’ के श्रोताओं को ये बताकर मैं उनकी भी खुशी बढाऊँ | 

साथियो, अब से कुछ दिन पहले आपने देखा होगा भारत ने एक साथ 36 satellites को अंतरिक्ष में स्थापित किया है | दीवाली से ठीक एक दिन पहले मिली ये सफलता एक प्रकार से ये हमारे युवाओं की तरफ से देश को एक special Diwali gift है | इस launching से कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक, पूरे देश में, digital connectivity को और मजबूती मिलेगी | इसकी मदद से बेहद दूर-दराज के इलाके भी देश के बाकी हिस्सों से और आसानी से जुड़ जाएंगे | देश जब आत्मनिर्भर होता है, तो, कैसे, सफलता की नई ऊँचाई पर पहुँचता जाता है - ये इसका भी एक उदाहरण है | आपसे बात करते हुए मुझे वो पुराना समय भी याद आ रहा है, जब भारत को Cryogenic Rocket Technology देने से मना कर दिया गया था | लेकिन भारत के वैज्ञानिकों ने ना सिर्फ स्वदेशी technology विकसित की बल्कि आज इसकी मदद से एक साथ दर्जनों satellites अंतरिक्ष में भेज रहा है I इस launching के साथ भारत Global commercial market में एक मजबूत player बनकर उभरा है, इससे, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत के लिए अवसरों के नए द्वार भी खुले हैं |

साथियो, विकसित भारत का संकल्प लेकर चल रहा हमारा देश,सबका प्रयास से ही, अपने लक्ष्यों को, प्राप्त कर सकता है I भारत में पहले space sector, सरकारी व्यवस्थाओं के दायरे में ही सिमटा हुआ था I जब ये space sector भारत के युवाओं के लिए, भारत के private sector के लिए, खोल दिया गया तब से इसमें क्रांतिकारी परिवर्तन आने लगे हैं I भारतीय Industry और Start-ups इस क्षेत्र में नए-नए Innovations और नई-नई Technologies लाने में जुटे हैं| विशेषकर, IN-SPACe के सहयोग से इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है I

IN-SPACe के जरिए गैर–सरकारी कंपनियों को भी अपने Payloads और Satellite launch करने की सुविधा मिल रही है | मैं अधिक से अधिक Start-ups और Innovator से आग्रह करूँगा कि वे space sector में भारत में बन रहे इन बड़े अवसरों का पूरा लाभ उठाएँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, जब students की बात आए, युवा शक्ति की बात आए, नेतृत्व शक्ति की बात आए, तो, हमारे मन में घिसी-पिटी, पुरानी, बहुत सारी धारणाएं घर कर गयी है I कई बार हम देखते हैं कि जब Student power की बात होती है, तो इसको छात्रसंघ चुनावों से जोड़कर उसका दायरा सीमित कर दिया जाता है | लेकिन Student power का दायरा बहुत बड़ा है, बहुत विशाल है | Student power, भारत को powerful बनाने का आधार है | आखिर, आज जो युवा हैं, वही तो भारत को 2047 तक लेकर जाएंगे | जब भारत शताब्दी मनायेगा, युवाओं की ये शक्ति, उनकी मेहनत, उनका पसीना, उनकी प्रतिभा, भारत को उस ऊँचाई पर लेकर जाएगी, जिसका संकल्प, देश, आज ले रहा है | हमारे आज के युवा, जिस तरह देश के लिए काम कर रहे हैं, Nation building में जुट गए हैं, वो देखकर मैं बहुत भरोसे से भरा हुआ हूँ | जिस तरह हमारे युवा हैकॉथॉंन्स में problem solve करते हैं, रात-रात भर जागकर घंटों काम करते हैं, वो बहुत ही प्रेरणा देने वाला है | बीते वर्षों में हुई एक हैकॉथॉंन्स ने देश के लाखों युवाओं ने मिलकर, बहुत सारे challenges को निपटाया है, देश को नए solution दिए हैं |

साथियो, आपको याद होगा, मैंने लाल किले से ‘जय अनुसंधान’ का आह्वान किया था | मैनें इस दशक को भारत का Techade बनाने की बात भी कही थी | मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लगा, इसकी कमान हमारी IITs के students  ने भी संभाल ली है I इसी महीने 14-15 अक्टूबर को सभी 23 IITs अपने Innovations और Research project को प्रदर्शित करने के लिए पहली बार एक मंच पर आए | इस मेले में देशभर से चुनकर आए students और researchers उन्होंने 75 से अधिक बेहतरीन projects को प्रदर्शित किया | Healthcare, Agriculture, Robotics, Semiconductors, 5G Communications, ऐसी ढ़ेर सारी themes पर ये project बनाए गए थे I वैसे तो ये सारे ही Project एक से बढ़कर एक थे, लेकिन, मैं कुछ projects के बारे में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ | जैसे, IIT भुवनेश्वर की एक टीम ने नवजात शिशुओं के लिए Portable ventilator विकसित किया है | यह बैटरी से चलता है और इसका उपयोग दूरदराज के क्षेत्रों में आसानी से किया जा सकता है |ये उन बच्चों का जीवन बचाने में बहुत मददगार साबित हो सकता है जिनका जन्म तय समय से पहले हो जाता है | Electric mobility  हो, ड्रोन Technology हो, 5G हो, हमारे बहुत सारे छात्र, इनसे जुड़ी नई technology विकसित करने में जुटे हैं | कई सारी IITs मिलकर एक बहुभाषक project पर भी काम कर रही हैं जो स्थानीय भाषाओँ को सीखने के तरीक़े को आसान बनाता है | ये Project नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को, उन लक्ष्यों को प्राप्ति में भी, बहुत मदद करेगा | आपको ये जानकर भी अच्छा लगेगा कि IIT Madras और IIT Kanpur ने भारत के स्वदेशी 5G Test bed को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभाई है | निश्चित रूप से यह एक शानदार शुरुआत है I मुझे आशा है कि आने वाले समय में इस तरह के कई और प्रयास देखने को मिलेंगे I मुझे यह भी उम्मीद है कि IITs से प्रेरणा लेकर दूसरे institutions भी अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी अपनी activities में तेजी लाएंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, हमारे समाज के कण–कण में समाहित है और इसे हम अपने चारों ओर महसूस कर सकते हैं | देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जो पर्यावरण की रक्षा के लिए अपना जीवन खपा देते हैं |

कर्नाटका के बेंगलुरु में रहने वाले सुरेश कुमार जी से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं, उनमें, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए गजब का जुनून है | 20 साल पहले उन्होंने शहर के सहकारनगर के एक जंगल को फिर से हरा-भरा करने का बीड़ा उठाया था I ये काम मुश्किलों से भरा था, लेकिन, 20 साल पहले लगाए गए वो पौधे आज 40-40 फीट ऊँचे विशालकाय पेड़ बन चुके हैं I अब इनकी सुन्दरता हर किसी का मन मोह लेती है | इससे वहां रहने वाले लोगों को भी बड़े गर्व की अनुभूति होती है | सुरेश कुमार जी और एक अद्भुत काम भी करते हैं | उन्होंने कन्नड़ा भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सहकारनगर में एक Bus shelter भी बनाया है | वो सैकड़ों लोगों को कन्नड़ा में लिखी Brass plates भी भेंट कर चुके हैं | Ecology और Culture दोनों साथ-साथ आगे बढें और फलें-फूलें, सोचिए...यह कितनी बड़ी बात है |

साथियो, आज Eco-friendly Living और Eco-friendly Products को लेकर लोगों में पहले से कहीं अधिक जागरूकता दिख रही है | मुझे तमिलनाडु के एक ऐसे ही दिलचस्प प्रयास के बारे में भी जानने का मौका मिला | ये शानदार प्रयास कोयंबटूर के अनाईकट्टी में आदिवासी महिलाओं की एक टीम का है | इन महिलाओं ने निर्यात के लिए दस हजार Eco-friendly टेराकोटा Tea Cups का निर्माण किया | कमाल की बात तो ये है की टेराकोटा Tea Cups बनाने की पूरी जिम्मेदारी इन महिलाओं ने खुद ही उठाई | Clay Mixing से लेकर Final Packaging तक सारे काम स्वयं किए | इसके लिए इन्होंने प्रशिक्षण भी लिया था | इस अद्भुत प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए - कम है | 

साथियो, त्रिपुराके कुछ गाँवों ने भी बड़ी अच्छी सीख दी है | आप लोगों ने Bio-Village तो जरुर सुना होगा, लेकिन, त्रिपुरा के कुछ गाँव, Bio-Village 2 की सीढ़ी चढ़ गए हैं | Bio-Village 2 में इस बात पर ज़ोर होता है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कैसे कम से कम किया जाए | इसमें विभिन्न उपायों से लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर पूरा ध्यान दिया जाता है | Solar Energy, Biogas, Bee Keeping और Bio Fertilizers, इन सब पर पूरा focus रहता है | कुल मिलाकर अगर देखें, तो, जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अभियान को Bio-Village 2 बहुत मजबूती देने वाला है | मैं देश के अलग–अलग हिस्सों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ रहे उत्साह को देखकर बहुत ही खुश हूँ | कुछ दिन पहले ही, भारत में, पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित Mission Life को भी launch किया गया है | Mission Life का सीधा सिद्धांत है – ऐसी जीवनशैली, ऐसी Lifestyle को बढ़ावा, जो पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचाए | मेरा आग्रह है कि आप भी Mission Life  को जानिए, उसे अपनाने का प्रयास कीजिये  | 

साथियो, कल, 31 अक्टूबर को, राष्ट्रीय एकता दिवस है, सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जन्म-जयन्ती का पुण्य अवसर है | इस दिन देश के कोने-कोने में Run for Unity का आयोजन किया जाता है | ये दौड़, देश में एकता के सूत्र को मजबूत करती है, हमारे युवाओं को प्रेरित करती है | अब से कुछ दिन पहले, ऐसी ही भावना, हमारे राष्ट्रीय खेलों के दौरान भी देखी है | ‘जुड़ेगा इंडिया तो जीतेगा इंडिया’ इस Theme के साथ राष्ट्रीय खेलों ने जहाँ एकता का मजबूत सन्देश दिया, वहीं भारत की खेल संस्कृति को भी बढ़ावा देने का काम किया है | आपको यह जानकर खुशी होगी कि भारत में राष्ट्रीय खेलों का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था | इसमें 36 खेलों को शामिल किया गया, जिसमें, 7 नई और दो स्वदेशी स्पर्धा योगासन और मल्लखम्ब भी शामिल रही | Gold Medal जीतने में सबसे आगे जो तीन टीमें रहीं, वे हैं - सर्विसेस की टीम, महाराष्ट्र और हरियाणा की टीम | इन खेलों में छह National Records और करीब-करीब 60 National Games Records भी बने | मैं पदक जीतने वाले, नए Record बनाने वाले, इस खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले, सभी खिलाड़ियों को, बहुत-बहुत बधाई देता हूँ | मैं इन खिलाड़ियों के सुनहरे भविष्य की कामना भी करता हूँ |

साथियो, मैं उन सभी लोगों की भी ह्रदय से प्रशंसा करना चाहता हूँ, जिन्होंने गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन में अपना योगदान दिया | आपने देखा है कि गुजरात में तो राष्ट्रीय खेल नवरात्रि के दौरान हुए | इन खेलों के आयोजन से पहले एक बार तो मेरे मन में भी आया कि इस समय तो पूरा गुजरात इन उत्सवों में जुटा होता है, तो लोग इन खेलों का आनंद कैसे ले पाएँगे ? इतनी बड़ी व्यवस्था और दूसरी तरफ नवरात्रि के गरबा वगैरह का इंतजाम | ये सारे काम गुजरात एकसाथ कैसे कर लेगा ? लेकिन गुजरात के लोगों ने अपने आतिथ्य-सत्कार से सभी मेहमानों को खुश कर दिया | अहमदाबाद में National Games के दौरान जिस तरह कला, खेल और संस्कृति का संगम हुआ, वह उल्लास से भर देने वाला था | खिलाड़ी भी दिन में जहाँ खेल में हिस्सा लेते थे, वहीं शाम को वे गरबा और डांडिया के रंग में डूब जाते थे | उन्होंने गुजराती खाना और नवरात्रि की तस्वीरें भी Social Media पर खूब Share कीं | यह देखना हम सभी के लिए बहुत ही आनंददायक था | आखिरकार, इस तरह के खेलों से, भारत की विविध संस्कृतियों के बारे में भी पता चलता है | ये ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी उतना ही मजबूत करते हैं | 

मेरे प्यारे देशवासियो, नवम्बर महीने में 15 तारीख को हमारा देश जन-जातीय गौरव दिवस मनाएगा | आपको याद होगा, देश ने पिछले साल भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयन्ती के दिन आदिवासी विरासत और गौरव को Celebrate करने के लिए ये शुरुआत की थी | भगवान बिरसा मुंडा ने अपने छोटे से जीवन काल में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लाखों लोगों को एकजुट कर दिया था | उन्होंने भारत की आजादी और आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था | ऐसा कितना कुछ है, जो हम धरती आबा बिरसा मुंडा से सीख सकते हैं | साथियो, जब धरती आबा बिरसा मुंडा की बात आती है, छोटे से उनके जीवन काल की तरफ़ नज़र करते हैं, आज भी हम उसमें से बहुत कुछ सीख सकते हैं और धरती आबा ने तो कहा था- यह धरती हमारी है, हम इसके रक्षक हैं | उनके इस वाक्य में मातृभूमि के लिए कर्तव्य भावना भी है और पर्यावरण के लिए हमारे कर्तव्यों का अहसास भी है | उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया था कि हमें हमारी आदिवासी संस्कृति को भूलना नहीं है, उससे रत्ती-भर भी दूर नहीं जाना है | आज भी हम देश के आदिवासी समाजों से प्रकृति और पर्यावरण को लेकर बहुत कुछ सीख सकते हैं |

साथियो, पिछले साल भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर, मुझे रांची के भगवान बिरसा मुंडा म्यूजियम (Museum)के उद्घाटन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था | मैं युवाओं से आग्रह करना चाहूँगा कि उन्हें जब भी समय मिले, वे इसे देखने जरुर जाएँ | मैं आपको ये भी बताना चाहता हूँ कि एक नवम्बर यानी परसों, मैं गुजरात-राजस्थान के बॉर्डर पर मौजूदा मानगढ़ में रहूँगा | भारत के स्वतंत्रता संग्राम और हमारी समृद्ध आदिवासी विरासत में मानगढ़ का बहुत ही विशिष्ट स्थान रहा है | यहाँ पर नवम्बर 1913 में एक भयानक नरसंहार हुआ था, जिसमें अंग्रेजों ने स्थानीय आदिवासियों की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी थी | बताया जाता है कि इस नरसंहार में एक हजार से अधिक आदिवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी | इस जनजातीय आन्दोलन का नेतृत्व गोविन्द गुरु जी ने किया था, जिनका जीवन हर किसी को प्रेरित करने वाला है | आज मैं उन सभी आदिवासी शहीदों और गोविन्द गुरु जी के अदम्य साहस और शौर्य को नमन करता हूँ | हम इस अमृतकाल में भगवान बिरसा मुंडा, गोविन्द गुरु और अन्य स्वातंत्र सेनानियों के आदर्शों का जितनी निष्ठा से पालन करेंगे, हमारा देश उतनी ही ऊँचाइयों को छू लेगा | 

मेरे प्यारे देशवासियो, आने वाली 8 नवम्बर को गुरुपुरब है | गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व जितना हमारी आस्था के लिए महत्वपूर्ण है, उतना ही हमें इससे सीखने को भी मिलता है | गुरु नानकदेव जी ने अपने पूरे जीवन, मानवता के लिए प्रकाश फैलाया |  पिछले कुछ वर्षों में देश ने गुरुओं के प्रकाश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अनेकों प्रयास किए हैं | हमें गुरु नानकदेव जी का 550वाँ प्रकाश पर्व, देश और विदेश में व्यापक स्तर पर मनाने का सौभाग्य मिला था | दशकों के इंतजार के बाद करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण होना भी उतना ही सुखद है | कुछ दिन पहले ही मुझे हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे के शिलान्यास का भी सौभाग्य मिला है | हमें हमारे गुरुओं के विचारों से लगातार सीखना है, उनके लिए समर्पित रहना है | इसी दिन कार्तिक पूर्णिमा का भी है | इस दिन हम तीर्थों में, नदियों में, स्नान करते हैं - सेवा और दान करते हैं | मैं आप सभी को इन पर्वों की हार्दिक बधाई देता हूँ | आने वाले दिनों में कई राज्य, अपने राज्य दिवस भी मनाएंगे | आंध्र प्रदेश अपना स्थापना दिवस मनाएगा, केरला पिरावि मनाया जाएगा | कर्नाटका राज्योत्सव मनाया जाएगा | इसी तरह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा भी अपने राज्य दिवस मनाएंगे | मैं इन सभी राज्यों के लोगों को शुभकामनाएँ देता हूँ | हमारे सभी राज्यों में, एक दूसरे से सीखने की, सहयोग करने की, और मिलकर काम करने की spirit जितनी मजबूत होगी, देश उतना ही आगे जाएगा | मुझे विश्वास है, हम इसी भावना से आगे बढ़ेंगे | आप सब अपना ख्याल रखिए, स्वस्थ रहिए | ‘मन की बात’ की अगली मुलाक़ात तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिये | नमस्कार, धन्यवाद |

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भारत न केवल फास्ट- ग्रोइंग इकोनॉमी है, बल्कि एक क्रेडिबल इकोनॉमी भी है: पीएम मोदी
June 22, 2026
भारत न केवल तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था भी है: प्रधानमंत्री
एक उभरती हुई ताकत होने के साथ-साथ, भारत एक विश्वसनीय ताकत भी है: प्रधानमंत्री
भारत के लिए 'राष्ट्र प्रथम' ही सबसे बड़ा मार्गदर्शक सिद्धांत है: प्रधानमंत्री
भारत में माओवादी आतंक अब अपने अंतिम चरण में है: प्रधानमंत्री
"यह कभी नहीं हो सकता" वाली सोच से बदलकर "यह होकर रहेगा" वाली सोच अपनाना भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है: प्रधानमंत्री
सरकार गरीबों और मध्यम वर्ग को सशक्त बना रही है: प्रधानमंत्री
140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयासों से ही 'विकसित भारत' का सपना साकार होगा: प्रधानमंत्री

स्वर साधना, मनोकामना, आराधना। एक बहुत ही शुभ शुरुआत के बाद। अच्छा होता आप ही का कार्यक्रम चलता। आप सबको नमस्कार।

रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के सभी दर्शक और अब तो बहुत सारी भाषाओं में भी है, तो उन सबको भी मेरा प्रणाम! मैं इस समिट में हिस्सा लेने आए सभी साथियों का भी अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे चलने वाले चैनलों में ब्रेकिंग न्यूज इसका बहुत बड़ा महत्व होता है। और आजकल तो दुनिया में ही, पूरी दुनिया में कहीं पर भी नजर डालो, पूरी दुनिया ब्रेकिंग न्यूज के मोड पर ही है, और इतनी भागदौड़ में आप सभी, इस समिट को होस्ट कर रहे हैं, इसका हिस्सा बने हैं। और इसलिए आप विशेष बधाई के पात्र हैं। और इस बार आपकी चर्चा का विषय भी उतना ही अहम है...Great Power India: Nation First...

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है...यतो धर्मस्ततो जयः ! यानि जय का, शक्ति का, मूल धर्म है। और धर्म यानि ड्यूटी, धर्म यानि जस्टिस, धर्म यानि समभाव, धर्म यानि संवाद, धर्म यानि संवेदना और यही तो नेशन फर्स्ट की भावना में भी समाहित है। भारत, अपनी पावर को इसी लैंस से देखता है, इसी तराज़ू पर तौलता है।

साथियों,

भारत की एक और विशेषता है और अब तो दुनिया ने भी मान लिया है। हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं है, हम वो हैं जिसने विकास और विनाश, देखा भी झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमरी चिप लगी हुई है, हम युगों की मेमरी चिप वाले नेशन हैं। और इसलिए भारत आज जो कर रहा है, और ये मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ, भारत जो कर रहा है वो आने वाले एक हज़ार वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है। और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है। भारत, Fast-Growing Economy भी है। एक Credible Economy भी है। और भारत, rising power के साथ-साथ और अभी आप तो ढेर सारी डिक्शनरी लेकर बैठ गए थे, सुपर पावर तक ले गए। लेकिन मैं इतना जरूर कहूँगा कि भारत Reliable power है। मैं अभी दो-तीन दिन पहले G7 समिट से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता हर देश इस बात को भली-भांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। उसके लिए भी अर्नब ने आपको तालियाँ बजाने के लिए मजबूर कर दिया। पिछले बारह वर्षों की जो भी सिद्धियां देश की रही हैं, उनके मूल में अगर आप तराजू से तौलोगे, हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है। स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया खादी खरीदने पर जोर स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर ये सारे Initiative इसलिए सफल हुए क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया। देश के नागरिकों को मैं सलाम करता हूँ।

साथियों,

यहां हमारे साथी श्रीधर वेंबु जी बैठे हैं। जब हमारे उद्यमी नेशन फर्स्ट की भावना के साथ चलते हैं, जब वो देश की आवश्यकताओं को समझते हुए अपने लक्ष्य बनाते हैं तो संस्थाएं भी बनती हैं और देश भी समृद्ध होता है। श्रीधर वेंबु जी ने क्या काम किया है, शायद यहाँ बातों में कितना निकला होगा मुझे मालूम नहीं, लेकिन अभी मैं फ़्रांस में vivatech में गया था, करीब डेढ़ 2 लाख नौजवान वहाँ होंगे, चलने के लिए भी मैं और फ्रांस के राष्ट्रपति अलग अलग स्टॉल पर जा रहे थे, देखने के लिए भई नौजवानों ने क्या काम किया है। तो हम जोहो के स्टॉल पर गए, मैं हैरान था जी, और गर्व होता था कि जोहो के स्टाल पर यूरोप के नौजवानों की जो भीड़ लगी थी और वो समझना चाहते है कि क्या है ये दुनिया में नई चीज, भारत में शायद उतनी चर्चा नहीं होगी, जितनी मैंने वहाँ फ्रांस में देखी, बधाई हो आपको।

साथियों,

सरकार की नीति और निर्णयों में नेशन फर्स्ट का क्या प्रभाव होता है, इसका एक उदाहरण हमारा आदिवासी क्षेत्र है। मैं आज कोई फिलोस्फी झाड़ने वाला नहीं हूँ, कुछ बातें जो हुई है वो हल्की फुल्की बता दूंगा और उससे आप अंदाज लगा लेंगे कि काम कैसे होता है। मैं आदिवासी क्षेत्र की बात करता हूँ। भारत के 10 करोड़ से अधिक आबादी की चर्चा, मतलब कि आदिवासी समाज की चर्चा और हम सबको पता है कि दशकों से माओवादी आतंक वहाँ अपने डेरा तंबू डालकर बैठ हुआ था। जहां 21वीं सदी में भी इन आतंकियों ने एक भी सुविधा पहुंचने नहीं दी, सरकारी एक वेहिकल नहीं गुजर सकता था वहाँ से। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आई-गईं, कई पीढ़ियां आई-गईं, लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसे ही रहेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, 2004 से 2014 के बीच, मैं उस दस साल का हिसाब बताता हूँ, 2004 से 2014 के बीच माओवादी आंतक के कारण, 17 हज़ार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुईं थीं। और करीब-करीब 7 हज़ार से ज्यादा जानें गईं थी।

साथियों,

आज आपके लिए वन लाइन न्यूज होगा या टीवी पर आधे घंटे डिबेट होगी कि माओवाद आतंकवाद खत्म हो गया, चीजें ऐसी नहीं होती। उसके लिए खपना पड़ता है और इसलिए मैं बताना चाहता हूँ। और इसलिए मैं बताना चाहता हूं और आजकल जो लोग, कुछ लोग संविधान दिखाते रहते हैं, लेकिन जब ये लोग सरकार में थे और नक्सल प्रभावित इलाकों में संविधान का नाम लेने पर गोली मार दी जाती थी और तब ये लोग चुप बैठे थे, तब उनके हाथो में संविधान नहीं दिखता था, कांप रहे थे उनके हाथ। उस दर्दनाक स्थिति से कांग्रेस को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

साथियों,

2014 के बाद, हालात को बदलने के लिए हम राष्ट्र प्रथम के भाव से आगे बढ़े, हम निकल पड़े। बोलते नहीं थे, बताते भी नहीं थे, करते जरूर थे। हमने संकल्प लिया कि नक्सलवाद-माओवाद को जड़ से उखाड़ फेकेंगे और आज पूरा देश नतीजा देख रहा है, आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

और साथियों,

कई बार अंतिम परिणाम इतना बड़ा और व्यापक होता है कि उसके पीछे की मेहनत पर ध्यान नहीं जाता। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को मैं खासतौर पर इसके बारे में बताना चाहता हूं।

साथियों,

जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में दिन में जाने से भी, यानी सामान्य मानवी डरा रहता था, उसको लगता था कहीं अपहरण हो जाएगा तो, कभी वसूली का डर रहता था, कभी साथ में जो कुछ भी है वो लूट लेने का डर रहता था। और जहां पर विकास की बात बोल तक नहीं सकते थे आप, लेकर के जा नहीं सकते थे, सब नामुमकिन था, ऐसे क्षेत्रों में हम हम विकास का संकल्प लेकर आगे बढ़े। वहां बीते 12 वर्षों में हमारी सरकार ने 12 हज़ार किलोमीटर से अधिक की सड़कें बनाईं। और कई बार तो हमने देखा, कई बार तो हमने देखा कि सड़क बनाने के जो हमारा साजो सामान होता है उसको जला दिया जाता था। कांट्रेक्टर को भगा दिया जाता था। अगर 25 लोग रोड पर काम करते तो 200 लोग पुलिस सुरक्षा रखते थे ताकि काम चले। यह सब इसलिए करते थे- तय किया था।

साथियों,

साढ़े 9 हज़ार से अधिक मोबाइल टावर बनाए। एक टावर नहीं लगने और लगा हुआ टावर तोड़ देते थे। क्योंकि उनको हमेशा वहां आक्रोश पैदा करना था। करीब 45,000 गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाई। नक्सल प्रभावित जिलों में 1800 से अधिक बैंक ब्रांच खोली गई। करीब 75,000 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट और 6000 से अधिक नए पोस्ट ऑफिस बनाए गए। सिर्फ बम, बंदूक और गोली के सहारे काम नहीं किया है साथियों, हमने दिलों को जीतने के लिए, ईश्वर ने जो भी शक्ति दी थी उसको खपाया था।

साथियों,

हम बुलंद इरादों के साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में जनसामान्य की आशा, आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए जा रहे थे। आप हैरान हो जाएंगे एक मशहूर नक्सली, करोड़ों रुपए का इनाम थे उसके, उसकी मां के पास हम पहली बार राशन कार्ड लेकर गए। बेटा अपनी मां को राशन कार्ड लेने नहीं देता था, आतंकवाद अपना चलाने के लिए। इतनी घटनाएं हैं, मैं हैरान था। और सरकार चुप बैठी थी, उनको संविधान उस समय तो दिखता नहीं था। लेकिन इन सारे प्रयासों का परिणाम यह आया कि जन सामान्य में एक विश्वास का नया दौर आया। आज आप देखिए बस्तर जैसे इलाकों में बम बंदूक नहीं बस्तर ओलंपिक्स की धूम है। और अब तक इस ओलंपिक के दो एडिशन हो चुके हैं। पहली बार डेढ़ लाख से अधिक युवाओं ने और दूसरी बार करीब 4 लाख युवाओं ने बस्तर ओलंपिक्स में हिस्सा लिया। यानी जहां कभी टेरर था, वहां टैलेंट को अवसर मिल रहा है, वहां स्पोर्ट्स फल-फूल रहा है।

साथियों,

12 वर्षों के इस सेवाकाल की एक और बड़ी सिद्धि रही है, यह सिद्धि है, निराशा से निकलकर आशा-आकांक्षा सबसे भरे भारत का निर्माण।

साथियों,

नक्सल कहीं और होगा लेकिन घटनाओं की पीड़ा हिंदुस्तान के हर कोने में होती थी और जिस समय नक्सल खत्म होने की बातें आने लगी तो विश्वास सिर्फ नक्सली इलाके का नहीं, हिंदुस्तान के कोने-कोने में जगने लगा। 2014 से पहले के 10 वर्षों में जो कांग्रेस सरकार चली, उससे नाराजगी केवल गवर्नेंस की नहीं थी। तब देश की निराशा इससे कहीं अधिक थी, देश उम्मीद खो चुका था, लोगों को लगता था कि कुछ हो ही नहीं सकता, कुछ बदल ही नहीं सकता।

साथियों,

पिछले 12 वर्षों में भारत ने उसी निराशा को आशा में बदला है और मुझे इस बात का सबसे ज्यादा संतोष है। आज हर किसी को यह लगता है कि थोड़ी और मेहनत करेंगे, तो यह हो सकता है। वो दिन चले गए जब एक ही बात सुनाई देती थी, कतई नहीं हो सकता, कतई नहीं हो सकता, वो जमाना चला गया, आज ये होकर रहेगा। ये जो भाव आया है यही भारत की असली सिद्धि है, और यही रियल पावर है। चुनौतियां तो आज भी बहुत है और हमेशा रहेगी और चुनौतियां बहुरूपिया होती है, वो नए-नए अवतार में सामने आती रहती है, अरे आएगी, जिस रूप में आएगी, जंग उससे भी लड़ लेंगे जी और जीत भी लेंगे। लेकिन यह हो सकता है और हम यह करके रहेंगे, जब इस भाव से देश आगे बढ़ता है, तब सपने पूरे होते हैं।

साथियों,

मैं यहां भारत के 100 से ज्यादा जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉक्स की चर्चा करना चाहूंगा। यह विकास के हर पैरामीटर पर पीछे छूट गए थे और पहले की सरकार ने इन पर पिछड़ा होने का ठप्पा लगा दिया था, यह तो बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट है, ये तो बैकवर्ड इलाका है। हमने देश के इस बहुत बड़े क्षेत्र को पिछड़ेपन की निराशा से बाहर निकालकर डेवलपमेंट की एस्पिरेशन जगाई। सबसे पहले तो हमने पहचान ही बदल दी, हमने कहा ये एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट है, ये एस्पिरेशनल ब्लॉक है, हमने एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट का प्रोग्राम बनाया, एस्पिरेशनल ब्लॉक का प्रोग्राम बनाया और सरकार ने विकास के हर पैरामीटर पर बहुत बारीकी से काम शुरू किया। इस डिस्ट्रिक्ट में ये तीन पहलू है, पहले उसमें से बाहर निकलो। यहां छह पहलू है, पहले इसमें से बाहर निकलो। बड़ा फोकस वे में काम शुरू किया। आज यह एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट और ब्लॉक्स राज्य की ओवरऑल ग्रोथ को आगे बढ़ाने का काम करने लगे हैं। जो पहले ग्रोथ को पीछे खींचते थे, इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट में बहुत बड़ी आबादी गरीब थी, अभाव में थी। बीते वर्षों में 25 करोड़ गरीबों ने गरीबी को परास्त किया है। तो इसमें इन एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट की एक बहुत बड़ी भूमिका है।

साथियों,

हम देखते हैं कि जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो सिर्फ घर का वो व्यक्ति ठीक होता है ऐसा नहीं है। जब एक व्यक्ति बीमारी से मुक्त होता है, तो पूरा परिवार ठीक हो जाता है। ऐसे ही, जब घर का कोई एक बेटा-बेटी कुछ अचीव करता है, तो सिर्फ वो व्यक्ति अचीव करके नहीं आता, वो पूरा परिवार, पूरा परिवार अचीवमेंट से भर जाता है, विश्वास बदल जाता है। ऐसे ही, जब कोई गरीबी से बाहर आता है, तो सम्पूर्ण समाज का फायदा होता है, देश का फायदा होता है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, निओ मिडिल क्लास में आए हैं, तो इसका फायदा केवल उन परिवारों तक नहीं रहता, बल्कि मिडिल क्लास का भी इसमें फायदा होता है। क्योंकि यह नया कंज्यूमर है, जो इकोनॉमी को ड्राइव करता है, उससे अल्टीमेटली मिडिल क्लास के लिए अवसर बनते हैं। यानी गरीबी कम होना केवल वेलफेयर का ही विषय नहीं है, यह अवसरों के विस्तार की गाथा है, नई एस्पिरेशंस की प्रेरणा है।

साथियों,

पिछले 12 वर्ष में जो इतना विशाल मिडिल क्लास देश में तैयार हुआ है, वो सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता रहा है। मिडिल क्लास की Ease of Living के लिए सरकार ने हर स्तर पर काम किया है। अब जैसे अपने घर का सपना है। हर मिडिल क्लास परिवार की एक इच्छा रहती है कि भई खुद का घर हो, हर किसी को पूछोगे एक मन में रहता है मेरा अपना घर हो। 2014 में अगर किसी परिवार को अपना घर खरीदना होता था, तो होम लोन डबल डिजिट के इंटरेस्ट रेट पर मिलता था। लेकिन आज किसी भी बैंक से होम लोन 7-8 परसेंट के रेट पर मिल जाता है। पहले लोन लेना भी किसी युद्ध जीतने जैसा था, युद्ध जीतने में जितनी ताकत लगती थी, उतनी लोन लेने में लगती थी। आज यह घर बैठे ही संभव हो पा रहा है। मैं यहीं की बात बताता हूं, यह दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोग जानते हैं कि कैसे शहरी मिडिल क्लास के हजारों घर अधूरे अटके हुए थे। पैसे दे दिए थे, पूरे जिंदगी भर की कमाई बिल्डर को दे दी थी। उसने भी बढ़िया-बढ़िया पम्पलेट दिखाए, सपने दिखाए। अभी किराए पर घर में रहते हैं, तो किराया भी देना है, घर जल्दी मिलेगा। उधर किराया रहता है, घर मिल नहीं रहा, घर बन नहीं रहा, यह बहुत बुरा हाल था। इन अधूरे घरों को पूरा करने के लिए हमने 25 हजार करोड़ रुपए का स्पेशल फंड बनाया। और आपको जानकर खुशी होगी कि देश में बरसों से अटके करीब 60 हजार घरों को डिलीवरी किया जा चुका है।

साथियों,

एक और चीज है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। यह जरूरत है, कनेक्टिविटी की, ट्रांसपोर्ट की। आज आप सोशल मीडिया में देखिए, दुनियाभर से जो भी टूरिस्ट आता है, भारत आता है, वो हमारे मेट्रो सिस्टम को देखकर हैरान रह जाता है।

साथियों,

वर्ष 2014 में करीब 28 लाख लोग, हर रोज मेट्रो से सफर करते थे। आज करीब एक करोड़ अठाइस लाख लोग हर रोज मेट्रो से सफर कर रहे हैं। अब वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी हाई स्पीड ट्रेन्स देश को कनेक्ट कर रही हैं। अच्छी सड़कों, अच्छे हाईवे से, समय तो बच ही रहा है, गाड़ियों की मैंटेनेंस पर होने वाला खर्चा भी कम हुआ है। बीते वर्षों में एयरपोर्ट्स की संख्या डबल हुई है। इससे कई छोटे-छोटे शहरों में भी मिडिल क्लास को हवाई यात्रा की सुविधा पहली बार मिली है।

साथियों,

पिछले 12 साल, मिडिल क्लास के लिए कमाई के साथ-साथ बचत के भी रहे हैं। 2013-14 में, लगभग 2 लाख रुपए तक की आय होने पर टैक्स लगता था, आप सबको वो नसीब रहा होगा। और यह टैक्स मिडिल क्लास देता रहता था। आज 12 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। यानी टैक्स फ्री इनकम कई गुणा बढ़ गई है।

साथियों,

GST रिफॉर्म्स के कारण भी मिडिल क्लास को बहुत सुविधा हुई है। टैक्स फाइलिंग का समय और खर्चा भी बच गया है। क्योंकि यह बहुत ही आसान हो गया है। घर बैठे ही ITR फाइल हो रहे हैं, अगर कोई सेटलमेंट का इश्यू है, तो वो फेसलेस हो रहा है।

साथियों,

मिडिल क्लास परिवारों में एक बड़ा खर्चा डायबिटीज या ऐसी लाइफस्टाइल से जुड़े इलाज का भी रहता है। जन औषधि केंद्रों पर 80 परसेंट डिस्काउंट पर ऐसी दवाएं मिल रही हैं। अगर आपका पहले हजार रुपया खर्चा होता था, तो आज 200 रुपये में काम हो जाता है, 800 रुपये बच रहा है और इससे बीते वर्षों में करीब 40 हज़ार करोड़ रुपए की बचत देश के अनेक परिवारों की हुई है। मिडिल क्लास के बजट का एक बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के इलाज पर भी जाता है। आज 70 वर्ष से ऊपर के हर नागरिक के लिए 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध है।

साथियों,

एक सामान्य स्वभाव है कि जब कोई सुविधा लगातार मिलती है, तो इंसान पहले की परेशानी भूल जाता है। अब 2 लाख रुपये पर आप टैक्स देते थे, अब 12 लाख तक नहीं देना पड़ रहा, लेकिन जब मैं कहूं, तब ताली बजती है। और बस में, ट्रेन में थोड़ी देर भी अगर कुछ मुसीबत आ गई, तो ढेर सारी गालियां देना शुरू हो जाते हैं और यही क्‍लास सबसे ज्यादा बोलता है।

साथियों,

मैंने जैसा कहा ना कि भई पुरानी तकलीफे भूल जाता है आदमी। आप लोगों को आज ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट से जुड़ी परेशानियां बिल्कुल याद नहीं होंगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता था, तो कितनी दिक्कत होती थीं, पासपोर्ट लेना होता था, तो क्‍या-क्‍या कुछ नहीं करना पड़ता था, कितने पापड़ बेलने पड़ते थे। आज ड्राइविंग लाइसेंस लेना भी आसान हुआ है और तत्काल पासपोर्ट भी औसतन 3 दिन में ही मिल जाता है।

साथियों,

मैं जानता हूं, हमारी सरकार जिस तरह काम कर रही है, उसने देश के लोगों की एस्पिरेशन बहुत बढ़ा दी है। एक काम हुआ, तो लोगों की डिमांड वहीं खत्म नहीं हो जाती है। वो उससे भी बेहतर काम चाहते है, उससे भी अपग्रेड सुविधा चाहते हैं। अगर पहले डिमांड नई सड़क की थी, तो सड़क बनने के बाद लोग पूछते हैं, मेट्रो कब आएगी? पहले अपेक्षा होती थी कि ट्रेन समय पर पहुंच जाए, ट्रेन में बैठने की साफ-सुथरी जगह मिल जाए। आज डिमांड है कि हमारे रूट पर वंदे भारत क्यों नहीं चल रही है?

साथियों,

कुछ लोगों को ये असंतोष लगता है, यह एस्पिरेशन है, हमारे देश में एक फौज ऐसी है, उसको लगता है कि यह सब मामला कुछ गड़बड़ है। लेकिन लोग आखिरकार यह अपेक्षाएं किसके पास करेंगे भई, जो करता है, उससे ही करेंगे ना! सामान्‍य लोग हीनहीं, पूरी कांग्रेस पार्टी कहती है कि जरा मोदी जी, यह हो जाना चाहिए, यह होना चाहिए, कहते रहते हैं ना! उनको भरोसा है, करेगा तो ये ही करेगा!

साथियों,

एस्पिरेशंस वहीं होती है, जहां लोगों को लगता है कि सपने पूरे हो सकते हैं। और भारत के युवाओं की, भारत के गरीब और मिडिल क्लास की यही एस्पिरेशन है। आज भाजपा-एनडीए सरकारों की ऊर्जा बनी हुई है।

साथियों,

एक तरफ, देश का बहुत बड़ा वर्ग एस्पिरेशनल है, तो दूसरी तरफ, राजनीति की एक टोली है, जिसका जीवन मंत्र बन गया है- ऑलवेज अगेंस्ट! यह टोली, क्रॉनिक डिससैटिस्फैक्शन यानी स्थाई असंतोष से भरी हुई है। आज मैं रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जरा इस टोली के लक्षण बताने जा रहा हूं। Symptoms पता चलेगा, तो आपको समझ आ जाएगा कि मैं क्या कह रहा हूं। आप आसानी से पहचान लेंगे। जैसे मैं उदाहरण देता हूं, आप समझ जाएंगे। इनको आप अक्सर कहते सुनेंगे, अरे फलां जगह तो चौबीस घंटे बिजली आती है, यहां क्यों नहीं? और अगले ही दिन ये लोग डैम्स का, सोलर पार्क का, थर्मल का, न्यूक्लियर प्लांट का विरोध करने के लिए ढपली लेकर के आ जाएंगे। यानी पहले दिन बिजली क्‍यों नहीं और दूसरे दिन तुम हाइड्रो पावर का डैम क्यों बना रहे हो, यह जमात ऐसी है। यह वो लोग हैं, जो खनिजों के खनन का विरोध करते थे, लेकिन आज पूछते हैं कि भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स भंडार कहां है, सप्लाई चेन कहां है? और भारत में फलाने देश की तरह, इलेक्ट्रिक व्हीकल का इकोसिस्टम क्यों नहीं है? यह वही लोग हैं, जो कभी डेटा या आटा, इसकी डिबेट चलाते थे। पहले डाटा कि आटा, डाटा कि आटा, बड़ा मजा आता था। आज यही लोग पूछते हैं कि बताओ मोदी जी, AI में क्या काम हुआ? हद देखिए, एक सांस में कहते हैं, एक ही सांस में कहते हैं कि AI में यह होना चाहिए था, वो होना चाहिए था, हुआ क्यों नहीं? लेकिन दूसरी सांस में वही लोग कहते मिलेंगे, अरे यह डेटा सेंटर क्यों बना रहे हो? यह सेमीकंडक्टर प्लांट क्यों लगा रहे हो? और फिर यह लोग उसके 100 नुकसान गिनाने के लिए घंटे-घंटे भर सोशल मीडिया के स्‍क्रीन पर दिखेंगे, टीवी डिबेट पर दिखेंगे, अखबारों में भरे रहेंगे।

साथियों,

यह लोग करप्शन को लेकर दुनियाभर के इंडेक्स उठाकर लाते हैं, भारत को कटघरे में खड़ा करते हैं, इनके इकोसिस्टम का मीडिया भी 24-24 घंटे उछालता रहता है, लेकिन जब करप्शन के विरुद्ध एक्शन होता है, जब कार्रवाई होती है, तो यही लोग चिल्लाते हैं, सबसे पहले हल्ला मचाने का काम कौन करते हैं, यही गलत हो रहा है, फलाना गया ढीकना गया, रेड कर दी, जांच कर दी, harass कर दिया। सवाल उठाए जाते हैं, कार्रवाई ऐसे क्यों हो रही है, वैसे क्यों नहीं, अब क्यों हो रही है, तब क्यों नहीं, A पर क्यों हो रही है, B पर क्यों नहीं हो रही है, यही उनका खेल है।

साथियों,

इन लोगों का कैरेक्टर समझना देश के लिए बहुत जरूरी है। खासतौर पर मेरे देश के युवाओं को इनको पहचानने की जरूरत है और हमारी जेन जी को तो बहुत जल्दी समझना चाहिए, जल्दी समझो वरना अब सूर्यवंशी आया है, वो तेज गति से समझाता है।

साथियों,

यह लोग एक तरफ कहेंगे कि देश की सेनाओं को छूट नहीं है, हथियार नहीं मिल रहे हैं, लेकिन जब सरकार कोई डिफेंस डील करेगी, कोई आधुनिक हथियार खरीदती है, तो सबसे पहले आकर कहते हैं कि यह क्यों खरीदा? यह दुनिया भर में भारत की कूटनीति पर सवाल करेंगे, लेकिन जब भारत कूटनीति के लिए, सुरक्षा के लिए कहीं कोई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट बनाने लगेगा, तो यह लोग ढोल-ढपली लेकर हल्ला मचाना शुरू कर देते हैं।

साथियों,

आज भारत जिस अहम कालखंड में है, इसमें ऐसे लोगों को पहचानना होगा, उनके कुतर्क को समझना होगा और उनसे सतर्क रहना बहुत जरूरी होगा। और आज दुर्भाग्य से, आज देश के मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस पर, ऐसे ही लोगों का कब्जा हो गया है। कांग्रेस कभी नेशन फर्स्ट की बात करेगी, यह सोचना भी अब झूठे सपने जैसा हो गया है। कल्पना ही नहीं कर सकते क्या कभी कांग्रेस में यह फिर से आएगी बात, जो गांधी जी के जमाने में थी।

साथियों,

आज दुनिया पुरानी धाराओं को चैलेंज कर रही है, डिसरप्शन्स की स्केल बहुत बड़ी हो गई है, लेकिन इसका एक और पक्ष है। यह चुनौतियां, नए अवसर भी ला रही है। भारत के हर युवा, हर उद्यमी, हर इनोवेटर, हर स्टार्टअप को, इन्हीं अवसरों पर फोकस करना है और इसमें सरकार, नेशन फर्स्ट की भावना के साथ पूरी तरह देश के लोगों के साथ है। भारत आज रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार हो चुका है। यह गति आगे और तेज होगी, मैं रिपब्लिक टीवी के इस मंच से देशवासियों से फिर कहूंगा कि हमारा सपना जितना बड़ा है, हमारे प्रयास भी उतने ही विराट होंगे और 140 करोड़ देशवासियों का यही साझा प्रयास, विकसित भारत बनाकर रहेगा। और आप सब लोग, मैं विश्वास से कहता हूं, अपनी आंखों से विकसित भारत देखने वाले हैं। आने वाली पीढ़ियों तक इंतजार करना पड़े, इस प्रकार से मैं काम नहीं करता, आप खुद अपनी आंखों से देखकर के जाएंगे। इसी विश्वास के साथ, मैं फिर एक बार रिपब्लिक टीवी को, उसके दर्शकों को और आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं! बहुत-बहुत धन्यवाद!