डॉ. डालिया शिफर, श्री एस. महालिंगम, हमारे वरिष्ठ मंत्री श्री वजुभाई वाला, हमारे मुख्य सचिव श्री जोती, भाइयों और बहनों..!

हम यहां एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार विमर्श करने के लिए इक्कठे हुए हैं - 21वीं सदी में हमारे युवाओं को ज्ञान तथा कौशल के साथ समर्थ बनाना, मेरी नजर में, यह वास्तव में हमारे देश की विकास गाथा के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। मैं यहाँ आप सब के बीच होने पर बहुत खुश हूँ।

भारत की 50% से ज्यादा जनसंख्या 25 वर्ष से कम की है। हम आज औसतन 24 वर्ष की आयु का लाभ ले रहे हैं, जबकि दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा अधिक उम्र की समस्या से जूझ रहा है। मैं भारत के युवाओं को एक बहुत बड़ी ताकत और बेशकीमती संसाधन के रूप में देखता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि यदि भारत अपने टैलेंट पूल को मजबूत करने में सक्षम होता है, तो यहां के युवा एक दशक में, न सिर्फ भारत के लिए लेकिन पूरे विश्व के लिए, विकास का इंजन बन सकते हैं। यदि हम हमारे देश की युवा शक्ति को कुशल कार्यबल में परिवर्तित कर सकते हैं, तो हम पूरे विश्व की कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। युवा शक्ति पर इस दृढ़ विश्वास की तर्ज पर, गुजरात ने काफी समय और संसाधनों को उनके सर्वांगीण विकास को सुविधाजनक बनाने पर खर्च किया है। हमारा मानना है कि शिक्षा तथा कौशल विकास हमारे युवाओं को समर्थ बनाने के लिए सबसे प्रभावशाली साधन हैं। एक समग्र दृष्टिकोण के साथ हम शिक्षा और प्रशिक्षण की पहुंच को बढ़ा रहे हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम इसकी गुणवत्ता को भी बढ़ा रहे हैं। और यह सब नए प्रयोगों को बढ़ावा देने तथा मानव संसाधन को विकसित करने की नवीनतम अंतरराष्ट्रीय प्रवृतियों के अनुरूप किया गया है। तथा इसके परिणाम सभी को दिखाई दे रहे हैं। गुजरात रोजगार देने में बेहतरीन तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारत सरकार के हाल ही के एक सर्वे के अनुसार गुजरात में बेरोजगारी की दर सबसे कम है। गुजरात ने हार्ड स्किल तथा सॉफ्ट स्किल के विकास में भी बेहतरीन तस्वीर पेश करता है। हमारे बहुत से नवीन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन कार्यप्रणालियों के रूप में पहचाना जा रहा है।

इसके कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण हैं :

  • हमारे ‘आई-क्रियेट’ की पहल को इसकी नवीनता के कारण सबके द्वारा सराहा जा रहा है।
  • ‘स्कोप’ के माध्यम से, हम गुजरात के युवाओं में अंग्रेजी भाषा में दक्षता का विकास कर रहे हैं।
  • हाल ही में, हमने हमारे युवाओं की आई.टी. तथा इलैक्ट्रोनिक्स के कौशल को विकसित करने के लिए ‘एम्पावर’ का प्रारंभ किया है।
  • इसके अतिरिक्त, सर्वांगीण विकास के लिए अनेक पहल जैसे वांचे गुजरात - वाचन के लिए एक अभियान, खेल महाकुंभ - विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय अभियान, अभिनव आयोग, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली, इत्यादि।
विशेष तौर पर कौशल विकास के क्षेत्र में, गुजरात में हमारे युवाओं में आधुनिक तकनीकी तथा व्यवसायिक दक्षता विकसित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

गुजरात स्किल डेवलपमेंट मिशन तथा गुजरात काउन्सिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग का लक्ष्य ही हर एक युवा को रोजगार योग्य बनाना है। हमारे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.) इसमें केन्द्रीय भूमिका अदा कर रहे हैं। पिछले एक दशक में आई.टी.आई. की संख्या पाँच गुना बढ़ गई है। हमारे आई.टी.आई. को नई इमारतों, नई मशीनरी तथा अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाओं के साथ नवीनीकृत किया गया है। कोर्सेस में सुधार किया गया है तथा उनकी संख्या तथा विविधता को प्रभावशाली तरीके से बढ़ाया गया है। 20 बेहतरीन टेक्नोलॉजी सेन्टर (एस.टी.सी.) शुरू किए गए हैं - जो अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। यह सभी उद्योगों की जरूरत तथा भविष्य की मानव संसाधन की मांग को ध्यान में रख कर किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर ऑटोमोबाइल सर्विसिंग तथा सोलर टेक्नोलॉजी से संबंधित एस.टी.सी.। हमने आई.टी.आई. के छात्रों के लिए आई.टी.आई. कोर्सेस के बाद डिप्लोमा तथा इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए अवसरों के दरवाजे खोल दिये हैं, ताकि उनके कैरियर को एक नया क्षितिज मिल सके।

इस बात का एक सबसे अच्छा भाग यह है कि हमारे प्रयासों में उद्योगों की भी साझेदारी रही है। 50% से अधिक आई.टी.आई. विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तथा संस्थाओं की साझेदारी में पी.पी.पी. के आधार पर चल रहे हैं। नए कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना के लिए आज जो एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, इससे यह साझेदारी और अधिक मजबूत होने वाली है। गुजरात में मेरे अनुभवों ने मेरे विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत को अपने प्रमुख एजेन्डे में युवाओं को ज्ञान तथा कौशल से सशक्त करने के कार्य को सबसे ऊपर रखना चाहिए। हम गुजरात में पहले से ही इन सबके लिए बीज बो रहे हैं। हम गुजरात के हर युवा मन को प्रेरणा, मेहनत तथा नए प्रयोगों का स्त्रोत में बदलने के लिए संकल्पबद्घ हैं।

कुछ बातें आज जो बाहर से समूह आए थे उनके लिए कहनी थी वो मैंने कह दी, लेकिन और भी कुछ बातें हैं जो मैं बताना चाहता हूँ। 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है, यह हम बहुत लंबे अर्से से सुन रहे हैं, लेकिन वह कौन सी ताकत है जिसके भरोसे यह हम कह रहे हैं..? तो तुरंत जवाब मिलता है कि हमारी यूवा शक्ति। लेकिन सिर्फ हाथ पैर हैं, उस युवा शक्ति के भरोसे देश, विश्व की ताकत नहीं बन सकता। हमारे पास योग्य युवा शक्ति होनी चाहिए। और योग्य युवा शक्ति का आधार होता है, उसकी क्षमता, उसकी योग्यता। और उस क्षमता और योग्यता की ओर हमने ध्यान नहीं दिया तो हम विश्व के सबसे युवा देश होते हुए भी, ना हम विश्व को कुछ कोन्ट्रीब्यूट कर पाएंगे, इतना ही नहीं, हम ही कहीं शायद अपने आप बोझ ना बन जाएं। और इसलिए बहुत दीर्घदृष्टि से हमें स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए। और मेरा खुद का अनुभव यह है कि हम स्किल डेवलपमेंट पर थोड़ा सा भी ध्यान दें, तो हम बहुत बड़ी मात्रा में एम्पलोयमेंट का भी जनरेशन कर सकते हैं, सर्विस की क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट कर सकते हैं और अल्टीमेटली इकोनॉमी जनरेट होने से क्वालिटी ऑफ लाइफ में भी बहुत बड़ा चेंज ला सकते हैं। और इसलिए इन चीजों पर बल देने की आवश्यकता रहती है।

अब मैं जिस क्षेत्र से आता हूँ, राजनैतिक क्षेत्र, दुर्भाग्य ऐसा है कि उस क्षेत्र में ट्रेनिंग की जरूरत ही नहीं है। और एक कवि सम्मेलन में एक कवि हमेशा कविता सुनाया करते थे कि “एक मंत्री जी ने ड्राइवर से कहा आज कार मैं चलाऊंगा, तो ड्राइवर ने कहा कि सर, मैं उतर जाऊंगा, क्योंकि ये कार है, सरकार नहीं जो कोई भी चला ले..!” इसलिए मैं उस फील्ड से आ रहा हूँ लेकिन वहाँ भी कभी ना कभी तो वक्त आएगा, धीरे-धीरे वहाँ भी लीडरशिप को लेकर काफी कुछ बहस वहाँ भी हो रही है। लेकिन मेरे अनुभव बताऊं, मैं जब मुख्यमंत्री के नाते काम करने लगा तो हर बार जब नई मंत्री परिषद मेरी बनती है, तो मंत्रियों का जो स्टाफ होता है, उनकी मैं वन वीक ट्रेनिंग करवाता हूँ, प्रोफेशनल लोगों से और उसके कारण प्रोडक्टिविटी में, बिहेविरयर में, एटीटयूट में इतना परिवर्तन आता है कि हर नागरिक को फील होता है कि यार कुछ बदल सा गया है। अब उसमें मोटिवेशन लेवल से ज्यादा महत्वपूर्ण थी, ट्रेनिंग। सिर्फ मोटिवेशनल लेवल से काम चल जाता ऐसा होता नहीं है, ट्रेनिंग बहुत बड़ा रोल प्ले करती है।

अब हमारे यहाँ डांग जिला है। हमारे ट्राइबल वहाँ बाम्बू का काम करते थे। और पहले भी करते थे, कोई मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद करने लगे हैं ऐसा नहीं था, करते थे। लेकिन क्वालिटेटिव चेंज लाना जरूरी था। तो हमने वहाँ से टीमों को नार्थ ईस्ट भेज दिया, जहाँ बाम्बू पर इतना काम होता है। इन लोगों ने वहाँ ट्रेनिंग ली, सीखा..! आज वह इतना बढिय़ा गुड्स बनाते हैं। अब जब वह बनाने लगे तो उनको ध्यान में आया कि हमारा बाम्बू, उसकी क्वालिटी, इस काम के लिए अनुकूल नहीं है। यानि जो कल तक जिस बाम्बू से काम कर रहा था, उसकी खुद की ट्रेनिंग इतनी हो गई कि वह बाम्बू में ही परिवर्तन ढूंढने लगा। तो हमें एक जेनेटिक काम करने वाली कैमिकल इन्डस्ट्री को कहना पड़ा कि हमारे बाम्बू की दो गांठ जो होती है, उसका डिसटेन्स थोड़ा ज्यादा हो, इस प्रकार के जैनेटिकली मोडिफिकेशन की हमें जरूरत है तो आप रिसर्च करो। उन्होंने किया और हमने उस प्रकार के बाम्बू बनाना शुरू किया ताकि उनको जिस प्रकार के बाम्बू पर काम करना था, वह बाम्बू उनको लोकली उपलब्ध हो। अच्छा, अब जब बाम्बू वहाँ हैं, ट्रेनिंग हो चुकी है, वह गुडस तैयार कर रहा है तो मार्केट भी मिलने लग गया।

मुझे याद है कि पहले हमारे यहाँ एयरपोर्ट जो था वह बस स्टेशन के जैसा था। अहमदाबाद का एयरपोर्ट यानि एक बस स्टाप पर आप आए हो ऐसा लगता था। अब एयर-ट्रैफिक पिछले पन्द्रह साल में काफी बढ़ा है, तो हमारा एयरपोर्ट भी बढ़ा। अब उनको नौजवानों की जरूरत थी, तो हमने कहा कि भाई, ठीक है, हम लोग मिल कर के कुछ काम करते हैं। तो हमने एयरपोर्ट के सराउन्डिंग फाइव किलोमीटर रेंज में जितने नौजवान थे उनको इन्वाइट किया। और कोई चार सौ नौजवानों की दस दिन की ट्रेनिंग की तो उनको एयरपोर्ट पर ही... अब वह साइकल पर आते हैं, अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं और अपने घर चले जाते हैं। और इसलिए हम उसका मैपिंग करें, किस क्षेत्र में किस प्रकार के लोगों की रिक्वायरमेंट है। मैपिंग करने के बाद यदि ठीक से ट्रेनिंग करें तो आज जो होता है ना कि भाई, एक फैक्ट्री से लोग उठते हैं और दूसरी फैक्ट्री में चले जाते हैं, वह भी तकलीफ कम होती है।

दूसरा, क्लस्टर डेवलपमेंट का बहुत बड़ा फायदा होता है। सरकार ने भी डेवलपमेंट के समय क्लस्टर एप्रोच को मद्दे नजर रखना चाहिए। जैसे हमारा मोरबी है, मोरबी एक सिरेमिक का क्लस्टर बन गया है। तो हमने हमारी वहाँ की जो आई.टी.आई. हैं उसके सिलेबस, वहाँ टर्नर-फिटर की मुझे जरूरत नहीं है, वहाँ वायर मैन की जरूरत नहीं है, वहाँ मेरी आई.टी.आई. है वे प्रीडोमिनेंटली सिरेमिक का पढ़ाए। अगर वहाँ प्रीडोमिनेंटली सिरेमिक का पढ़ाते हैं तो मेरे नौजवानों को वहीं रोजगार मिल जाता है और इसलिए ना घर छोडऩा पड़ता है, ना गांव छोडऩा पड़ता है। और इसलिए अगर हमने 200 स्कूल चालू कर दिए, 200 आई.टी.आई. चालू कर दिए, 50 ये चालू कर दिये... इससे परिणाम नहीं मिलता है। आज जो भारत सरकार ने भी गर्व के साथ ये रिपोर्ट किया है कि पूरे हिन्दुस्तान में नौकरी पाने योग्य युवकों में 4% बेरोजगार हैं लेकिन उन्होंने ये भी गर्व से कहा है अकेला गुजरात ऐसा है कि जहाँ कम से कम बेरोजगार हैं, कम से कम बेरोजगार हैं..! और इसलिए, हमें एम्प्लॉइमेन्ट भी बढ़ानी है और एम्प्लॉइबिलिटी भी बढ़ानी है। क्योंकि अगर हम हमारा एक्सपेंशन नहीं करते इन्डस्ट्रीज बेस का, इवन इन एग्रीकल्चर, तो हम एम्प्लॉइमेन्ट के लिए स्कोप जनरेट नही कर पाएंगे। एम्प्लॉइमेन्ट का स्कोप जनरेट किया, लेकिन एम्प्लॉइबिलिटी के लिए व्यक्तियों का विकास नही कर पाते हैं, उसकी प्रोपर ट्रेनिंग नहीं करते हैं... तो इसलिए इन सबका इन्टीग्रेटेड एप्रोच होना चाहिए। और सबका जब इन्टीग्रेटेड एप्रोच होता है तो हम इच्छित परिणाम ला सकते हैं।

उसी प्रकार से, आज दुनिया में चर्चा है कि चीन के साथ हमारी स्पर्धा है, चीन से स्पर्धा है, 21वीं सदी हमारी है, तो किन बातों पर बल देने से हम चीन के साथ मुकाबला कर सकते हैं..? एक तो मेरा मत है कि हमारा स्कोप बहुत वाइड करना चाहिए। आज अगर हम 200 प्रकार की ट्रेनिंग देते हैं तो वो 2000 प्रकार की ट्रेनिंग देना कैसे शुरू करें, 20,000 प्रकार की ट्रेनिंग देना कैसे शुरू करें..? हमारे स्कोप को बहुत वाइड करना चहिए। दूसरा, हमारा स्केल बढ़ाना पड़ेगा। तीसरा, हमें स्किल बढ़ानी पड़ेगी और चौथा, हमें स्पीड बढ़ानी पड़ेगी। अगर इन चारों को मिला कर हम काम करते हैं - स्कोप, स्केल, स्किल एंड स्पीड - इन चारों पर अगर हम बल देतें हैं तब जा कर के हम हमारी पूरी युवा शक्ति को इस निर्माण कार्य से हम जोड़ सकते हैं और तब जा कर के हम परिवर्तन ला सकते हैं।

अब हमारे यहाँ होटल मैनेजमेंट के इंस्टिट्यूट्स होते हैं। होटल मैनेजमेंट सरकारें चलाती हैं, लेकिन कभी सरकार को विचार नहीं आता है कि इस होटल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट्स का हम भी कैसे फायदा उठाएं। हमने एक प्रयोग किया। हमारे जितने गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के स्टाफ हैं, क्लास फोर के जो एम्पलाई हैं, उन सबको मैंने सैटरडे-सन्डे गवर्नमेंट की जो हॉस्पिटालिटी कॉलेज है उसमें पढऩे के लिए भेजा। और मैंने कहा कि तुम गवर्नमेंट गैस्ट हाउस में चद्दर कैसे लगती है, पिलो कैसे लगते हैं, चाय कैसे देनी है... तुम सीख कर आओ ना..! उसको नौकरी कैसे मिली थी? कोई पहचान थी, किसी ने कह दिया कि बच्चा है, जरा रख देना, तो रख लिया गया था..! किसी ने ट्रेनिंग नहीं की। अब यह पूरे देश में स्थिति है। लेकिन अगर हमारे दृष्टिकोण में ट्रेनिंग है तो हम हर... अब मेरे दो फायदे हो गए। सैटरडे-सन्डे जो मेरी गवर्नमेंट कॉलेज है उसका भी उपयोग होने लग गया, ये नौजवान, दो दिन जा कर के आते हैं तो विश्वास उनका, कॉन्फिडेंस लेवल इतना बढ़ जाता है कि वे अपना सीखने लगते हैं..!

अब हमारे यहाँ गुजरात में एक समस्या रहती है, क्योंकि हमारे यहाँ ‘मगनभाई पांचवां’, ‘मगनभाई आठवां’, एक बहुत बड़ी चर्चा थी। दो लीडर थे, तो पांचवी से अंग्रेजी या आठवीं से अंग्रेजी, वही झगड़ा चला था हमारे यहाँ, कई वर्षों तक..! और उसके कारण बाय ऐन्ड लार्ज हम गुजराती भाषी गुजराती में ही बातचीत करते हैं तो अंग्रेजी भाषा का हमारा... अब धीरे-धीरे समय बदल गया तो हमने एक बहुत बड़ी मात्रा में गुजरात में मूवमेंट चलाया है, ‘स्कोप’ और उसके अंदर हमने उनको अंग्रेजी और सॉफ्ट स्किल सिखाने की बहुत कोशिश की। हमारा अनुभव ये आया कि 40-45-50 साल की गृहणी भी ये अंग्रेजी का ‘स्कोप’ सीखने गई। तो मेरे लिए ये सरप्राइज था, मैंने कहा भाई, ये झूठी बातें हो सकती हैं। ये फिगर बढ़ा रहे हो और पेमेंट लेने के लिए कुछ चल रहा है। क्योंकि कोई कारण नहीं, क्यों कोई 40-45 में जाएगा..! तो मैंने जांच करवाई। बड़ा सरप्राइज़िंग मुझे आन्सर मिला। उन माताओं ने कहा कि हमारे बच्चे मीडियम इंगिलश में पढ़ रहे हैं और घर आने के बाद हमारे और उनके कम्यूनिकेशन में गड़बड़ होती है। तो हमें ये जरूरी लगा कि हम भी थोडा बहुत बच्चों को खुश करने वाली दो-चार-दस बातें सीख लें और इसलिए हम हाउस वाइफ हैं लेकिन सीखना शुरू किया है।

कहने का तात्पर्य है कि अगर हम सुविधाएं उपलब्ध करवाएं तो सामान्य मानवी को भी सीखने की इच्छा होती है। वो अपने आप में परिवर्तन लाने को इच्छुक होता है। और इसलिए हमारे ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स के नेटवर्क को... और जरूरी नहीं है कि प्राइमरी ट्रेनिंग हो गई तो काम हो गया, ऊपर जरूरत नहीं है, ऐसा नहीं है। अब देखिए अस्पताल में, हम देखें तो एक अस्पताल के अंदर मोर दैन 600 टाइप की पैरा मेडिकल एक्टीविटी होती हैं, मोर दैन 600 टाइप्स..! अब आज क्या होता है? एक आदमी आता है, पाँच-छह दिन साथ रह कर के वो सिखता है कि इस मशीन को ऐसे ऊठाना, ऐसे रखना, फिर डॉक्टर को देना... लेकिन उसकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं होती है। आज कितना स्कोप है, सिर्फ हॉस्पिटल इन्डस्ट्री हम देख लें या हॉस्पिटल सर्विसेस हम देख लें...!

मैं मानता हूँ थाउज़न्ड्स ऑफ ट्रेनिंग कोर्सेस आर रिक्वायर्ड...! हमने एक बार, क्योंकि मैं काफी रूचि लेता हूँ इस विषय में, क्योंकि मैं मानता हूँ कि बदलाव इसी से आना है। तो मैंने एक बार हमारे अफसरों की मीटिंग की। तो वो सोच रहे थे कुछ् पचास कोर्स नए करेंगे, सत्तर कोर्स नए करेंगे... मैंने कहा ऐसा नहीं भाई, एक काम करो, जन्म से मृत्यु तक हर व्यक्ति को कितने प्रकार की सेवाओं की जरूरत पड़ती है, सूची बनाओ। जन्म से मृत्यु तक..! तो उन्होंने मोटी-मोटी सूची बनाई, ऐसे ही। करीब-करीब 976 प्रकार कि उन्होंने निकाली कि उसको झूला चाहिए, उसको खिलौना चाहिए, उसको गुलदस्ता चाहिए, उसको किताब चाहिए, उसको टेबल-कुर्सी चाहिए, उसको सोने के लिए खटिया चाहिए... करीब 976 प्रकार की चीजों की मनुष्य को जन्म से लेकर मृत्यु तक अनिवार्य रूप से जरूरत पड़ती है। अब ये तो उन्होंने सरसरी नजर से बनाया था, कोई अगर बैठेगा तो 9000 भी निकाल सकता है। मैंने कहा कि इसका मतलब ये हुआ कि 976 सर्विस प्रोवाइडर चाहिए। इसका मतलब हुआ कि उनकी ट्रेनिंग चाहिए। अब मान लिजीए, गुलदस्ते कि जरूरत है तो गुलदस्ता बनाने की ट्रेनिंग होनी चाहिए ना..! क्यों वो पिता के पास बेटा सीखा, बेटे के बाद उसका बेटा सीखा... तो क्वॉलिटेटिव चेंज नहीं आता है। और इसलिए अगर हम एक-एक चीज में बारीकी से देखें तो हमारे यहाँ क्वॉलिटी ऑफ लाइफ में अगर चेंज लाना है तो, हमारे प्रोडक्शन में चेंज लाना है तो, हमारे वर्क कल्चर में चेंज लाना है तो, हमें ग्लोबल मार्केट को कम्पीट करने के लिए हर प्रकार की सेवाओं में सुधार लाना है तो, हमारे नोलेज के साथ स्किल बहुत अनिवार्य है। और जहाँ स्किल डेवलपमेंट पर बल दिया जाएगा, हम बहुत...

अभी हमने हमारे यहाँ बिसेग, यहाँ गांधीनगर के पास इंस्टिट्यूट है। कभी आप लोगों को रूचि हो तो देखने जैसा है। सैटेलाइट के माध्यम से जो इंजीनियर्स हैं, उनको हम एम्प्लॉएबल बनाने के लिए छह महीने की ट्रेनिंग देते हैं, हर स्टूडेंट को देते हैं। वह अगर बाहर पढऩे जाता है तो उसकी फीस बीस हजार रुपया होती है। अब हर विद्यार्थी 20,000 रुपया खर्च करे यह संभव नहीं है। तो हमने लांग डिस्टेंस एज्यूकेशन शुरू किया और हमने कहा कि सिर्फ सौ रुपया, सिरीयसनेस आए तुम्हारी इसलिए तुम्हे भरना होगा। शाम के समय लांग डिस्टेंस से होता है। हमने माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप की और आज हमारे हजारों इंजीनियर्स, इंजीनियर की डिग्री प्राप्त करने के छह महीने पहले इन कंपनियों के लिए एम्प्लॉएबल हो सके उसकी ट्रेनिंग उनकी हो जाती है। यानि हम अगर इन चीजों पर बल दें, तो हम बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते है।

गुजरात ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को भी महत्व दिया है| और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के कारण हमारे यहाँ काफी बड़ी मात्रा में हम कुछ इनोवेशन भी कर रहे हैं। जैसे हमारे यहाँ परम्परागत रूप से कच्छ मांडवी यह जहाज बनाने का उद्यम करता था, आज से सौ साल पहले, दो सौ साल पहले, और बड़े जहाज बनाने का काम वह करते थे, लकड़ी के... अब धीरे-धीरे-धीरे कुछ ही परिवार बच गए हैं, तो हमने वहाँ स्पेश्यल आई.टी.आई. शुरू किया। उस आई.टी.आई. के सभी स्टूडेंट का यही काम है कि नाव बनाना, जहाज बनाना उसकी ही ट्रेनिंग हो। आज मांडवी का वह बंदर हमारा जो मरा पड़ा था, धीरे-धीरे-धीरे उनकी मांग बढऩे लगी, उनको काम मिलने लगा और वहीं के लोकल लोग जिनके पूर्वजों का वह व्यवसाय था और उनमें क्षमता थी, धीरे-धीरे वहाँ काम शुरू करने लगे और डेवलप होने लगा।

मेरे यहाँ उमरगांव से अंबाजी पूरा ट्राइबल बेल्ट है। ट्राइबल के वहाँ पर लोकल एम्प्लोयमेंट की वहाँ जरूरत... अब जैसे वहाँ केले में, केला पैदा करना तो परंपरागत रूप से किसान करता है, लेकिन केला पैदा होने के बाद वह जो वेस्ट रहता है उसको हटाने का पहले किसान को 15,000 रुपया खर्च होता था, एक एकर पर। आज उसमें हमने वैल्यू एडिशन किया है, ट्रेनिंग दी है किसानों को और उसमेंसे चीज़ें बनने लगी हैं तो आज वह एक एकडर में 20-25,000 रुपया कमाता है। तो ट्रेनिंग से हम इतना बदलाव ला सकते हैं और इकोनॉमी को इतना जनरेट कर सकते हैं और इसलिए स्किल डेवलपमेंट के मिशन को हम जितना बल दें, जितना साइंटिफिक बनाए उतना लाभ है। गुजरात ने अपने आप इस दिशा में काफी कुछ किया है। हम देश के लिए भी उपयोगी हो इस प्रकार के काम को कर रहे है।

मैं मानता हूँ कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेमिनार है, और जैसा आपने देखा कि करीब 26 डिस्ट्रिक्ट में एक-एक कंपनी टोकन, वैसे तो काफी हैं, अभी भी होने वाले हैं जैसा कि मुझे बताया और हम चाहते हैं कि हम जब वाइब्रेंट समिट करते हैं तो एक काम करते हैं। वाइब्रेंट समिट में जो एम.ओ.यू. करते हैं तो उनको हम उसी दिन कहते हैं कि भाई, तीन दिन के बाद एक सेमिनार होगा। आपको किस प्रकार का वर्कफोर्स चाहिए, उसका पूरा डिटेल लाओ। तुम्हारी इन्डस्ट्री को बनने में अगर दो साल, तीन साल कन्सट्रक्शन में लगते हैं तो जैसे ही तुम शुरू करोगे, उसके साथ तुम्हारे लिए जो रिक्वायर्ड वर्कफोर्स है, रिक्वायरमेंट है ह्यूमन रिसोर्स की, ट्रेनिंग की, हम अभी से करवा देते हैं। उसका बहुत बड़ा लाभ हो रहा है।

हमारे यहाँ एक ‘गिफ्ट सिटी’ बन रहा है। अब आज हमारे गुजरात में इतना टॉलेस्ट बिल्डिंग कोई है नहीं, उतने बड़े टॉलेस्ट बिल्डिंग बन रहे हैं। अब टॉलेस्ट बिल्डिंग बन रहे हैं तो पुरानी पद्घति से जो कन्सट्रक्शन का काम कर रहे हैं वह नहीं चलेगा। मुझे उसके लिए स्किल चाहिए, तो उस प्रकार का स्किल डेवलपमेंट इन्स्टीट्यूट चालू किया। और उसमें भी कोई ज्यादा खर्चा नहीं किया, हमने क्या किया..? हमारी अहमदाबाद में जो स्कूल है, उस स्कूल को हमने कहा कि तुम इवनिंग टाइम में स्किल डेवलपमेंट क्लासिस चलाओ, ताकि यह जो हमारे कन्सट्रक्शन वर्कर्स हैं उनको थोड़ी तीन-चार दिन की ट्रेनिंग हो जाती है तो उस काम को कर लेते है..! तो एक मूवमेंट के रूप में स्किल डेवलपमेंट को चलाना पड़ता है और उसका परिणाम सबको मिलता है।

अब हम नेक्सट लेवल पर जा रहे हैं। वी हैव क्रिएटेड एन इंस्टिट्यूट कॉल्ड ‘आई-क्रिएट’। ‘आई-क्रिएट’ हमारा गलोबल लेवल का इंस्टीट्यूशन बन रहा है, मिस्टर नारायण मूर्तिजी को मैंने रिक्वेस्ट किया था उसकी चेयरमैनशिप के लिए, उन्होंने उस बात को स्वीकार किया और आज उनके नेतृत्व में हम काम कर रहे हैं। जो भी इनोवेशन्स हैं, इतना स्पार्क कि एक आठवीं कक्षा के बच्चे में भी स्पार्क होता है। जिनके पास ऐसे इनोवेशन का स्कोप हैं उनके लिए ‘आई-क्रिएट’ में एक जगह है, जहाँ आप आएं, हम उसे पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर देंगे, उसके रहने-खाने की व्यवस्था देंगे। और जो भी उसके आइडियाज़ हैं, उस आइडियाज़ को धरती पर उतारें और कमर्शियल मॉडल कैसे तैयार हो उसके लिए जो भी उसको नो-हाऊ कि जरूरत है वह मिले, उसको फाइनेंशियल हैल्प मिले, वहाँ तक का काम करने वाली एक ‘आई-क्रिएट’ संस्था, वर्ल्ड क्लास इन्स्टीट्यूट हमारी, अन्डर प्रोसेस है, मिस्टर नारायण मूर्ति के नेतृत्व में काम चल रहा है, उसका भवन अभी बन रहा है। लेकिन अभी से हमने लोगों से कॉन्टेक्ट करना शुरू किया है, फैकल्टीज का, स्टूडेंटस का, और उसकी एक वैबसाइट भी है। उसके लिए काफी अच्छी मात्रा में नौजवान आगे आ रहे हैं और ग्लोबली शायद उसमें नौजवान मिलेंगे।

कहने का तात्पर्य है कि हर लेवल पर स्किल डेवलपमेंट के काम को बल देते हुए हम आगे बढऩा चाहते हैं, क्लस्टर अप्रोच के साथ चाहते हैं, स्कोप भी बढ़ाना चाहते हैं, स्किल भी बढ़ाना चाहते हैं, स्पीड भी बढ़ाना चाहते हैं और स्केल भी बढ़ाना चाहते हैं और हम और अधिक कैसे कर सकें उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आज के इस दिवस भर का समारोह, हमारे नौजवानों के लिए नई आशा कि किरण बनेगा। हमारा नौजवान बेरोजगार रहे, ये सबसे बड़ा देश का नुकसान है। उसकी शक्ति राष्ट्र के निर्माण में काम आए।

एग्रीकल्चर सेक्टर में भी परंपरागत एग्रीकल्चर में बदलाव करके ट्रेन्ड मैनपावर लगाया तो बहुत वेस्टेज बच सकता है। हमारा अनुभव है कि पानी बचाने में ट्रेन्ड मैनपावर का हमें बहुत बल मिला है और इसलिए उन चीजों की ओर हम ध्यान देंगे तो बहुत-बहुत लाभ होगा।

मेरी इस समारोह को, इस सेमीनार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं...!

धन्यवाद...!!

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दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल भाई पटेल, संसद में मेरी सहयोगी कलाबेन डेलकर, दमन Municipal Council की President दीपिका टंडेल जी, दमन जिला पंचायत के अध्यक्ष धर्म बाबू पटेल, सिलवासा Municipal Council के अध्यक्ष सोमनाथ देवरे जी, दादरा नगर हवेली जिला पंचायत के अध्यक्ष निशा भावसार जी, दीव Municipal Council के अध्यक्ष हरीश कपाड़िया जी, दीव जिला पंचायत के अध्यक्ष कोटिया रंजिताबेन और यहां इतनी विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाइयों-बहनों,

आप जैसे यहां इकट्ठे हुए हैं, वैसे ही लक्षद्वीप में भी बहुत बड़ी तादाद में लोग वीडियो के माध्यम से हमारे साथ जुड़े हुए हैं, क्योंकि आज लक्षद्वीप के विकास की भी एक नई शुरुआत, एक नए प्रकल्‍प, जो पूरे लक्षद्वीप के जीवन में एक क्रांतिकारी काम करने वाले हैं, उसके लिए भी कुछ योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

कुछ साल पहले, जब मैं आपके बीच आया था, तो मैंने कहा था यह हमारा दमन तेजी से मिनी इंडिया बन रहा है और आज मैं देख रहा हूं, बाईं तरफ पूरा बंगाल है और दाहिने तरफ पूरा असम है। दमन मिनी इंडिया का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। यहां की विविधता, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों का यहां निवास करना, पूरे भारत की सुंदर सी झलक आपके बीच आकर के मिल जाती है। आप सब इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

भाइयों-बहनों,

मुझे कई बार दमन और दीव आने का अवसर मिला है। दादरा और नगर हवेली भी आता रहता हूं और जब मैं मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं था, तब तो बहुत बार आता था। लेकिन अब जब मैं यहां आता हूं और यहां के सुशासन को देखकर, गवर्नेंस मॉडल को देखकर बहुत अच्छा लगता है। हर बार मुझे लगता है कि पिछली बार के मुकाबले यह क्षेत्र विकास की राह पर मीलों आगे बढ़ गया है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव ने दशकों से विकास के सपने देखे थे। जो सपने पहले देखे, वो पीढ़ियां तो चली गईं। लेकिन आज जो पीढ़ी है, वो अपनी आंखों के सामने देख रही है कि उनके मां-बाप, दादा-दादी जो सपने देखते थे, वो आज सपने पूरे होते हुए आप अपनी आंखों से देख रहे हैं। आज भी यहां कनेक्टिविटी, हेल्थ, एजूकेशन, टूरिज्‍म और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर इन से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास हुआ है। विकास के यह काम दमन और पूरी यूनियन टेरिटरी के लिए यहां के लोगों के जीवन को आसान बनाएंगे। इनसे युवाओं के लिए नए अवसर तैयार होंगे। इन कामों के पीछे प्रफुल्ल भाई पटेल की दृष्टि, उनकी और उनकी टीम की मेहनत साफ-साफ नजर आती है। मैं इसके लिए भी प्रफुल्ल भाई और उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं। मैं सभी को लक्षद्वीप के लोगों को, दादरा-नगर हवेली के लोगों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं, आप सबको बधाई देता हूं।

साथियों,

आज आपके बीच आया हूं, तो एक सुखद खबर आई है। मैं तो आज सुबह दिल्ली से निकल चुका था, लेकिन अभी जो आंकड़े सामने आए हैं, जो खबर आई है, वो सचमुच में प्रसन्नता करने वाली है और मैं भी चाहता हूं, यह खुशी आपके साथ भी बाटूं। आज जो आंकड़े आए हैं, उन आंकड़ों से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी मजबूत है। वर्ष 2025-26 में यानी जो फाइनेंशियल ईयर पिछला पूरा हुआ, वर्ष 2025-26 में भारत ने 7.7 परसेंट की ग्रोथ रेट हासिल की है, 7.7 और पिछला क्वार्टर जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ 7.8 परसेंट रही है, 7.8 और यह दुनिया में तेज गति से आगे बढ़ने वाली बडी इकोनॉमी है। हर भारतीय को गर्व हो, यह है उसकी गति। आज देश जिस रिफॉर्म एक्‍सप्रेस पर चल रहा है, आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर का जो इतना विकास हो रहा है, गरीब कल्‍याण को लेकर इतने बड़े स्‍तर जो काम चल रहा है, इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज देश बड़ी इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है और हम सब जानते हैं, दुनिया संकटों में घिरी हुई है, सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था सवालिया निशानों के नीचे दबी पड़ी है, वैश्विक संकट के इस बुरे से बुरे दौर में भी 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयासों से भारत खुद को संभाल तो पा ही रहा है, लेकिन साथ-साथ सबसे आगे रहने में भी उसके प्रयास सफल होते जा रहे हैं। मैं देशवासियों को आर्थिक क्षेत्र की इस नई ऊंचाई को प्राप्त करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं देश को फिर आश्‍वस्‍त करता हूं कि देश दुनिया भर में चल रहे इन संकटों का सामना करते हुए Reform, Perform और Transform के रास्ते पर ऐसे ही दृढ़ संकल्प के साथ, तेज गति से आगे बढ़ता ही रहेगा, यह मेरी देशवासियों को गारंटी है।

साथियों,

आज हमारे लिए विकास जितना जरूरी है, उतना ही अहम है हमारे विकास का मॉडल सस्टेनेबल हो। आज वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन हमारे यहां यूनियन टेरिटरी स्टेट इस संकल्प को साकार कर रहा है। आज एक ओर यहां हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। साथ ही यहां करीब एक लाख एक पेड़ मां के नाम, एक लाख पौधे भी लगाए जा रहे हैं। मुझे गर्व है कि एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिसने सरकारी इमारतों में शत प्रतिशत, 100 परसेंट सौर ऊर्जा के इस्तेमाल की उपलब्धि हासिल की है। आज दीव में दिन में जितनी बिजली की डिमांड होती है, वो सोलर पॉवर से ही पूरी हो रही है और हमें तो इसे और आगे लेकर के जाना है। घरों में भी सोलर ऊर्जा से बिजली मिले, यही नहीं अतिरिक्त बिजली से परिवार की आय भी हो, इसके लिए रूफटॉप सोलर प्लांट्स लगाने की पहल शुरू हुई है। मैं इन उपलब्धियों के लिए भी आप सबकी सराहना करता हूँ।

साथियों,

साथ-साथ मुझे यह भी बताया गया है, दमन के लोग इन दिनों यहाँ स्वच्छता अभियान भी चला रहे हैं। यह दिखाता है कि स्वच्छता किस तरह दमन के जनजीवन में संस्कार बन चुका है और यह संस्कार स्वच्छता में नजर आ रहे हैं। मैं इस जनभागीदारी के आपके प्रयासों के लिए दमन के लोगों का अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

दादरा नगर हवेली, दमन और दीव, यह संघ शासित प्रदेश होने के साथ ही भारत की पहचान और विरासत भी हैं। इसलिए, इसके विकास के लिए हमारे लक्ष्य भी साधारण नहीं हैं। मुझे याद है, जब मैं पिछले साल सिलवासा आया था, तब मैंने आपको सिंगापुर का उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि एक समय सिंगापुर मछुआरों का छोटा सा गांव था। लेकिन, सिंगापुर के लोगों ने एक सपना देखा, वहां के लोगों ने बड़ा लक्ष्य तय किया और आज वही सिंगापुर दुनिया का सबसे बड़ा बिज़नस हब बन चुका है। आज दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव भी वही सपना देख रहे हैं। ये नमो एयरपोर्ट, दमणगंगा नदी पर बनने वाला आइकॉनिक ब्रिज, ‘बीच फ्रंट’ उस पर बनने वाला कन्वेंशन सेंटर, ऐसे सभी इनफ्रास्ट्रक्चर के जरिए हम भविष्य के बड़े संकल्पों की नींव रख रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए आप लोगों की आवाजाही आसान होगी। यहाँ बिज़नेस के लिए नई संभावनाएं बनेंगी। दमन के दोनों किनारों पर विकास की गति और तेज होगी।

साथियों,

यहाँ hospitality economy से जुड़े अवसर बढ़ेंगे और साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर जैसी सुविधा से व्यापार, लॉजिस्टिक्स को भी नई गति मिलेगी।

साथियों,

इस क्षेत्र में ब्लू इकॉनमी के लिए हमने जो विज़न तैयार किया है, वो विज़न भी हाइटेक इनफ्रास्ट्रक्चर की ताकत से ही साकार होगा। इसीलिए, लक्षद्वीप के कलपेनी और कदमत द्वीपों में भी आज ही आधुनिक पोर्ट्स की आधारशिला रखी जा रही है। यह सभी प्रयास ब्लू इकॉनमी में देश की ताकत को बढ़ाएँगे और जैसा मैंने कहा यह लक्षद्वीप का भाग्‍य बदलने वाले initiative हैं।

साथियों,

भाजपा की सरकार में, एनडीए की हमारी सरकार में हमारे लिए विकास की पहली कसौटी है- गरीब, वंचित, आदिवासी और मिडिल क्लास के जीवन में बदलाव! इसके लिए, हेल्थ सेक्टर हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। बीते वर्षों में देश हेल्थ केयर के लिए होलिस्टिक विजन लेकर आगे बढ़ा। हमने इलाज से जुड़ी हर चिंता का समाधान किया है। आज गरीब से गरीब के पास भी आयुष्मान कार्ड की सुविधा है। उनके पास 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा है। बीमारी की समय से जांच हो सके, इसके लिए, प्रधानमंत्री आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था है। जन औषधि केन्द्रों के जरिए सस्ती दवाइयाँ भी मिल रही हैं। ये सुविधाएं और बेहतर हों, और आधुनिक हों, इसके लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के जरिए आज स्वास्थ्य सेवाओं को टेक्नॉलॉजी से जोड़ा जा रहा है।

साथियों,

आयुष्मान कार्ड और जन औषधि केंद्रों से ही गरीब और मध्यम वर्ग के करीब सवा दो लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं।

भाइयों-बहनों,

केंद्र सरकार की नीतियों का बहुत लाभ इस क्षेत्र के लोगों को भी हुआ है। एक समय यहां इलाज की अच्छी सुविधाओं का भी अभाव था। यहाँ मेडिकल कॉलेज तक नहीं था। लेकिन, अब मेडिकल कॉलेज भी है और उसमें post-graduation की पढ़ाई भी शुरू हो गई है। सिलवासा का नमो हॉस्पिटल पिछले साल से हजारों लोगों की सेवा कर रहा है। आज दमन में भी नमो हॉस्पिटल का लोकार्पण हुआ है। इस क्षेत्र के लोगों को भी अब और बेहतर हेल्थ केयर का लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमारी सरकार कैसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए चल रही है, इसका एक प्रमाण नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के नतीजों में भी मिलता है। एक समय भारत में ज़्यादातर बच्चों की डिलिवरी अस्पताल में नहीं होती थी। आज देश में 90 प्रतिशत से अधिक डिलिवरी अस्पतालों में हो रही है, जिसके कारण माता मृत्यु या नवजात की मृत्यु में बहुत बड़ी रुकावट आई है। मिशन इंद्रधनुष की वजह से बच्चों के टीकाकरण के क्षेत्र में भी भारत ने अच्छी प्रगति की है। 2014 से पहले केवल 60 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हो पाता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले 30 प्रतिशत से भी कम परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हुए थे। आज आयुष्मान भारत, उन आंकड़ों को भी बदल दिया है। अब 60 प्रतिशत से अधिक परिवारों को ये सुरक्षा मिल रही है।

साथियों,

स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार के इन प्रयासों का लाभ अगर किसी को सबसे ज्यादा मिला है, तो वो मेरे देश की नारी शक्ति है।

साथियों,

पहले इस क्षेत्र के युवाओं को हायर एजुकेशन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था। लेकिन, आज यहाँ नेशनल लेवल के, एक नहीं कई इंस्टीट्यूट बन चुके हैं। पिछले वर्षों में यहां स्कूलों की नई बिल्डिंग्स बनी हैं, स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी बने हैं। 40 हजार से अधिक विद्यार्थियों को इनका लाभ मिल रहा है। मुझे खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश धीरे-धीरे एजुकेशन के क्षेत्र में आगे आ रहा है। स्वामी विवेकानंद एजुकेशन हब जैसे कई निर्माण यहाँ हो रहे हैं।

भाइयों-बहनों,

इस शिक्षा क्रांति में हमारी बेटियाँ पीछे न रहें, ये भी हमारा संकल्प है। इसके लिए कई बड़े प्रयास किए जा रहे हैं। सरस्वती साइकिल स्कीम, सरस्वती विद्या योजना, यहां की बेटियों को बहुत मदद कर रही है।

साथियों,

आज भारत की कोशिश है कि देश के युवाओं को डिग्री के साथ ही सही दिशा भी मिले। उन्हें ऐसा एक्सपोजर मिले, जो लोकल टैलेंट को ग्लोबल अवसरों से जोड़े। डिजाइन, लॉ, इंजीनियरिंग, मेडिकल एजुकेशन, आईटी, ड्रोन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में हमारी आज की तैयारी भारत की वर्कफोर्स को मजबूत बनाएगी। इसलिए प्रोफेशनल संस्थानों का विस्तार बहुत महत्वपूर्ण है।

साथियों,

आज NIFT के अठारहवें campus की आधारशिला रखी गई है। ये संस्थान यहां के युवाओं को ग्लोबल एक्सपोजर से जोड़ेगा। आई.टी.आई. दमन में ड्रोन टेक्नीशियन जैसे नए कोर्सेस भी शुरू हुए हैं। पीएम विश्वकर्मा और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, इनसे जुड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का लाभ भी युवाओं को मिल रहा है।

साथियों,

देश में खेलों को भी नई सोच के साथ आगे बढ़ाया गया। हमारे खेल अब केवल बड़े शहरों या बड़े स्टेडियमों तक सीमित नहीं हैं। खेलो इंडिया जैसे प्रयासों ने युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का नया मंच दिया है। इससे छोटे-छोटे क्षेत्रों में नेशनल लेवल पर खेल के जगत में हमारे बच्चे आगे आ रहे हैं और इसका भी लाभ इस क्षेत्र को हुआ है। दीव आज beach sports का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। घोघला बीच पर हुए Beach Games ने भी देश का ध्यान इस क्षेत्र की ओर खींचा है। आज यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार काम हो रहा है। खानवेल में फुटबॉल सेंटर और दमन में वॉलीबॉल ट्रेनिंग सेंटर यहां खेल संस्कृति को मजबूत कर रहे हैं।

साथियों,

आज देश का बहुत बड़ा फोकस टूरिज्म पर भी है। हमारा प्रयास है कि टूरिज्म से स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा मिले। छोटे-छोटे स्थानों को भी बड़े-बड़े अवसरों से जोड़ा जा सके। ‘देखो अपना देश’ जैसे प्रयास ने लोगों को देश की विविधता के बारे में जानने के लिए प्रेरित किया है। आज भारत में हैरिटेज टूरिज्म, ‘बीच टूरिज्म’, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, इन सेक्टर्स को नई ऊर्जा मिल रही है।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में तो पर्यटन भी इतनी असीम संभावनाओं वाला एक क्षेत्र है। इस क्षेत्र को प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत वरदान मिला है। इसीलिए पर्यटन को लेकर देश ने जिन नीतियों पर काम किया है, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव को उसका बड़ा लाभ मिल रहा है। 2021 में यहां करीब 6 लाख टूरिस्ट आए थे। 2025 में ये संख्या बढ़कर लगभग 50 लाख तक पहुंच गई है। यानी कुछ ही वर्षों में टूरिज्म फुटफॉल में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। यह बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाओं, साफ-सुथरे ‘बीच’ की वजह से संभव हुआ है। दमन नाइट मार्केट, रामसेतु सी-फ्रंट, नमोपथ सी-फ्रंट, नानी दमन फोर्ट, गंगेश्वर टेंपल कॉम्प्लेक्स, ऐसे अनेक स्थान आज इस पूरे क्षेत्र की नई पहचान बना रहे हैं।

साथियों,

दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, इसके सपनों को पूरा करने के लिए हमें यहाँ की औद्योगिक ताकत को भी बढ़ाना है। यह भी गर्व की बात है कि इस यूनियन टेरिटरी ने man-made fibre के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। दादरा और नगर हवेली को National Man-Made Fibre Capital के रूप में पहचाना जाता है। प्लास्टिक एक्सपोर्ट में भी ये क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार ने यहां इंडस्ट्रीज और MSMEs को सपोर्ट देने के लिए भी लगातार प्रयास किए हैं। यहां MSMEs और अन्य इंडस्ट्रीज को करोड़ों रुपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लघु उद्योगों और कुटीर उद्योगों के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। मुझे विश्वास है, आने वाले समय में ये क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब बनेगा।

साथियों,

जब विकास के विजन के साथ संवेदनशील गवर्नेंस जुड़ता है, तो परिवर्तन तेज गति से जमीन पर उतरता है। दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में हमारे इन प्रयासों का प्रभाव देखकर संतोष होता है। मुझे इस धरती के लोगों पर पूरा विश्वास है। यहां के युवा, यहां की माताएं-बहनें, यहां के किसान, कारीगर, श्रमिक और उद्यमी, आने वाले वर्षों में इस विकास यात्रा को और आगे ले जाएंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ, आपके सपनों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इसी विश्वास के साथ, मैं एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।