डॉ. डालिया शिफर, श्री एस. महालिंगम, हमारे वरिष्ठ मंत्री श्री वजुभाई वाला, हमारे मुख्य सचिव श्री जोती, भाइयों और बहनों..!

हम यहां एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार विमर्श करने के लिए इक्कठे हुए हैं - 21वीं सदी में हमारे युवाओं को ज्ञान तथा कौशल के साथ समर्थ बनाना, मेरी नजर में, यह वास्तव में हमारे देश की विकास गाथा के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। मैं यहाँ आप सब के बीच होने पर बहुत खुश हूँ।

भारत की 50% से ज्यादा जनसंख्या 25 वर्ष से कम की है। हम आज औसतन 24 वर्ष की आयु का लाभ ले रहे हैं, जबकि दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा अधिक उम्र की समस्या से जूझ रहा है। मैं भारत के युवाओं को एक बहुत बड़ी ताकत और बेशकीमती संसाधन के रूप में देखता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि यदि भारत अपने टैलेंट पूल को मजबूत करने में सक्षम होता है, तो यहां के युवा एक दशक में, न सिर्फ भारत के लिए लेकिन पूरे विश्व के लिए, विकास का इंजन बन सकते हैं। यदि हम हमारे देश की युवा शक्ति को कुशल कार्यबल में परिवर्तित कर सकते हैं, तो हम पूरे विश्व की कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। युवा शक्ति पर इस दृढ़ विश्वास की तर्ज पर, गुजरात ने काफी समय और संसाधनों को उनके सर्वांगीण विकास को सुविधाजनक बनाने पर खर्च किया है। हमारा मानना है कि शिक्षा तथा कौशल विकास हमारे युवाओं को समर्थ बनाने के लिए सबसे प्रभावशाली साधन हैं। एक समग्र दृष्टिकोण के साथ हम शिक्षा और प्रशिक्षण की पहुंच को बढ़ा रहे हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि हम इसकी गुणवत्ता को भी बढ़ा रहे हैं। और यह सब नए प्रयोगों को बढ़ावा देने तथा मानव संसाधन को विकसित करने की नवीनतम अंतरराष्ट्रीय प्रवृतियों के अनुरूप किया गया है। तथा इसके परिणाम सभी को दिखाई दे रहे हैं। गुजरात रोजगार देने में बेहतरीन तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारत सरकार के हाल ही के एक सर्वे के अनुसार गुजरात में बेरोजगारी की दर सबसे कम है। गुजरात ने हार्ड स्किल तथा सॉफ्ट स्किल के विकास में भी बेहतरीन तस्वीर पेश करता है। हमारे बहुत से नवीन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन कार्यप्रणालियों के रूप में पहचाना जा रहा है।

इसके कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण हैं :

  • हमारे ‘आई-क्रियेट’ की पहल को इसकी नवीनता के कारण सबके द्वारा सराहा जा रहा है।
  • ‘स्कोप’ के माध्यम से, हम गुजरात के युवाओं में अंग्रेजी भाषा में दक्षता का विकास कर रहे हैं।
  • हाल ही में, हमने हमारे युवाओं की आई.टी. तथा इलैक्ट्रोनिक्स के कौशल को विकसित करने के लिए ‘एम्पावर’ का प्रारंभ किया है।
  • इसके अतिरिक्त, सर्वांगीण विकास के लिए अनेक पहल जैसे वांचे गुजरात - वाचन के लिए एक अभियान, खेल महाकुंभ - विभिन्न खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय अभियान, अभिनव आयोग, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली, इत्यादि।
विशेष तौर पर कौशल विकास के क्षेत्र में, गुजरात में हमारे युवाओं में आधुनिक तकनीकी तथा व्यवसायिक दक्षता विकसित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

गुजरात स्किल डेवलपमेंट मिशन तथा गुजरात काउन्सिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिंग का लक्ष्य ही हर एक युवा को रोजगार योग्य बनाना है। हमारे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आई.टी.आई.) इसमें केन्द्रीय भूमिका अदा कर रहे हैं। पिछले एक दशक में आई.टी.आई. की संख्या पाँच गुना बढ़ गई है। हमारे आई.टी.आई. को नई इमारतों, नई मशीनरी तथा अत्याधुनिक बुनियादी सुविधाओं के साथ नवीनीकृत किया गया है। कोर्सेस में सुधार किया गया है तथा उनकी संख्या तथा विविधता को प्रभावशाली तरीके से बढ़ाया गया है। 20 बेहतरीन टेक्नोलॉजी सेन्टर (एस.टी.सी.) शुरू किए गए हैं - जो अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर विशेष प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। यह सभी उद्योगों की जरूरत तथा भविष्य की मानव संसाधन की मांग को ध्यान में रख कर किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर ऑटोमोबाइल सर्विसिंग तथा सोलर टेक्नोलॉजी से संबंधित एस.टी.सी.। हमने आई.टी.आई. के छात्रों के लिए आई.टी.आई. कोर्सेस के बाद डिप्लोमा तथा इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए अवसरों के दरवाजे खोल दिये हैं, ताकि उनके कैरियर को एक नया क्षितिज मिल सके।

इस बात का एक सबसे अच्छा भाग यह है कि हमारे प्रयासों में उद्योगों की भी साझेदारी रही है। 50% से अधिक आई.टी.आई. विभिन्न राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों तथा संस्थाओं की साझेदारी में पी.पी.पी. के आधार पर चल रहे हैं। नए कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना के लिए आज जो एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, इससे यह साझेदारी और अधिक मजबूत होने वाली है। गुजरात में मेरे अनुभवों ने मेरे विश्वास को और मजबूत किया है कि भारत को अपने प्रमुख एजेन्डे में युवाओं को ज्ञान तथा कौशल से सशक्त करने के कार्य को सबसे ऊपर रखना चाहिए। हम गुजरात में पहले से ही इन सबके लिए बीज बो रहे हैं। हम गुजरात के हर युवा मन को प्रेरणा, मेहनत तथा नए प्रयोगों का स्त्रोत में बदलने के लिए संकल्पबद्घ हैं।

कुछ बातें आज जो बाहर से समूह आए थे उनके लिए कहनी थी वो मैंने कह दी, लेकिन और भी कुछ बातें हैं जो मैं बताना चाहता हूँ। 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है, यह हम बहुत लंबे अर्से से सुन रहे हैं, लेकिन वह कौन सी ताकत है जिसके भरोसे यह हम कह रहे हैं..? तो तुरंत जवाब मिलता है कि हमारी यूवा शक्ति। लेकिन सिर्फ हाथ पैर हैं, उस युवा शक्ति के भरोसे देश, विश्व की ताकत नहीं बन सकता। हमारे पास योग्य युवा शक्ति होनी चाहिए। और योग्य युवा शक्ति का आधार होता है, उसकी क्षमता, उसकी योग्यता। और उस क्षमता और योग्यता की ओर हमने ध्यान नहीं दिया तो हम विश्व के सबसे युवा देश होते हुए भी, ना हम विश्व को कुछ कोन्ट्रीब्यूट कर पाएंगे, इतना ही नहीं, हम ही कहीं शायद अपने आप बोझ ना बन जाएं। और इसलिए बहुत दीर्घदृष्टि से हमें स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए। और मेरा खुद का अनुभव यह है कि हम स्किल डेवलपमेंट पर थोड़ा सा भी ध्यान दें, तो हम बहुत बड़ी मात्रा में एम्पलोयमेंट का भी जनरेशन कर सकते हैं, सर्विस की क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट कर सकते हैं और अल्टीमेटली इकोनॉमी जनरेट होने से क्वालिटी ऑफ लाइफ में भी बहुत बड़ा चेंज ला सकते हैं। और इसलिए इन चीजों पर बल देने की आवश्यकता रहती है।

अब मैं जिस क्षेत्र से आता हूँ, राजनैतिक क्षेत्र, दुर्भाग्य ऐसा है कि उस क्षेत्र में ट्रेनिंग की जरूरत ही नहीं है। और एक कवि सम्मेलन में एक कवि हमेशा कविता सुनाया करते थे कि “एक मंत्री जी ने ड्राइवर से कहा आज कार मैं चलाऊंगा, तो ड्राइवर ने कहा कि सर, मैं उतर जाऊंगा, क्योंकि ये कार है, सरकार नहीं जो कोई भी चला ले..!” इसलिए मैं उस फील्ड से आ रहा हूँ लेकिन वहाँ भी कभी ना कभी तो वक्त आएगा, धीरे-धीरे वहाँ भी लीडरशिप को लेकर काफी कुछ बहस वहाँ भी हो रही है। लेकिन मेरे अनुभव बताऊं, मैं जब मुख्यमंत्री के नाते काम करने लगा तो हर बार जब नई मंत्री परिषद मेरी बनती है, तो मंत्रियों का जो स्टाफ होता है, उनकी मैं वन वीक ट्रेनिंग करवाता हूँ, प्रोफेशनल लोगों से और उसके कारण प्रोडक्टिविटी में, बिहेविरयर में, एटीटयूट में इतना परिवर्तन आता है कि हर नागरिक को फील होता है कि यार कुछ बदल सा गया है। अब उसमें मोटिवेशन लेवल से ज्यादा महत्वपूर्ण थी, ट्रेनिंग। सिर्फ मोटिवेशनल लेवल से काम चल जाता ऐसा होता नहीं है, ट्रेनिंग बहुत बड़ा रोल प्ले करती है।

अब हमारे यहाँ डांग जिला है। हमारे ट्राइबल वहाँ बाम्बू का काम करते थे। और पहले भी करते थे, कोई मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद करने लगे हैं ऐसा नहीं था, करते थे। लेकिन क्वालिटेटिव चेंज लाना जरूरी था। तो हमने वहाँ से टीमों को नार्थ ईस्ट भेज दिया, जहाँ बाम्बू पर इतना काम होता है। इन लोगों ने वहाँ ट्रेनिंग ली, सीखा..! आज वह इतना बढिय़ा गुड्स बनाते हैं। अब जब वह बनाने लगे तो उनको ध्यान में आया कि हमारा बाम्बू, उसकी क्वालिटी, इस काम के लिए अनुकूल नहीं है। यानि जो कल तक जिस बाम्बू से काम कर रहा था, उसकी खुद की ट्रेनिंग इतनी हो गई कि वह बाम्बू में ही परिवर्तन ढूंढने लगा। तो हमें एक जेनेटिक काम करने वाली कैमिकल इन्डस्ट्री को कहना पड़ा कि हमारे बाम्बू की दो गांठ जो होती है, उसका डिसटेन्स थोड़ा ज्यादा हो, इस प्रकार के जैनेटिकली मोडिफिकेशन की हमें जरूरत है तो आप रिसर्च करो। उन्होंने किया और हमने उस प्रकार के बाम्बू बनाना शुरू किया ताकि उनको जिस प्रकार के बाम्बू पर काम करना था, वह बाम्बू उनको लोकली उपलब्ध हो। अच्छा, अब जब बाम्बू वहाँ हैं, ट्रेनिंग हो चुकी है, वह गुडस तैयार कर रहा है तो मार्केट भी मिलने लग गया।

मुझे याद है कि पहले हमारे यहाँ एयरपोर्ट जो था वह बस स्टेशन के जैसा था। अहमदाबाद का एयरपोर्ट यानि एक बस स्टाप पर आप आए हो ऐसा लगता था। अब एयर-ट्रैफिक पिछले पन्द्रह साल में काफी बढ़ा है, तो हमारा एयरपोर्ट भी बढ़ा। अब उनको नौजवानों की जरूरत थी, तो हमने कहा कि भाई, ठीक है, हम लोग मिल कर के कुछ काम करते हैं। तो हमने एयरपोर्ट के सराउन्डिंग फाइव किलोमीटर रेंज में जितने नौजवान थे उनको इन्वाइट किया। और कोई चार सौ नौजवानों की दस दिन की ट्रेनिंग की तो उनको एयरपोर्ट पर ही... अब वह साइकल पर आते हैं, अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं और अपने घर चले जाते हैं। और इसलिए हम उसका मैपिंग करें, किस क्षेत्र में किस प्रकार के लोगों की रिक्वायरमेंट है। मैपिंग करने के बाद यदि ठीक से ट्रेनिंग करें तो आज जो होता है ना कि भाई, एक फैक्ट्री से लोग उठते हैं और दूसरी फैक्ट्री में चले जाते हैं, वह भी तकलीफ कम होती है।

दूसरा, क्लस्टर डेवलपमेंट का बहुत बड़ा फायदा होता है। सरकार ने भी डेवलपमेंट के समय क्लस्टर एप्रोच को मद्दे नजर रखना चाहिए। जैसे हमारा मोरबी है, मोरबी एक सिरेमिक का क्लस्टर बन गया है। तो हमने हमारी वहाँ की जो आई.टी.आई. हैं उसके सिलेबस, वहाँ टर्नर-फिटर की मुझे जरूरत नहीं है, वहाँ वायर मैन की जरूरत नहीं है, वहाँ मेरी आई.टी.आई. है वे प्रीडोमिनेंटली सिरेमिक का पढ़ाए। अगर वहाँ प्रीडोमिनेंटली सिरेमिक का पढ़ाते हैं तो मेरे नौजवानों को वहीं रोजगार मिल जाता है और इसलिए ना घर छोडऩा पड़ता है, ना गांव छोडऩा पड़ता है। और इसलिए अगर हमने 200 स्कूल चालू कर दिए, 200 आई.टी.आई. चालू कर दिए, 50 ये चालू कर दिये... इससे परिणाम नहीं मिलता है। आज जो भारत सरकार ने भी गर्व के साथ ये रिपोर्ट किया है कि पूरे हिन्दुस्तान में नौकरी पाने योग्य युवकों में 4% बेरोजगार हैं लेकिन उन्होंने ये भी गर्व से कहा है अकेला गुजरात ऐसा है कि जहाँ कम से कम बेरोजगार हैं, कम से कम बेरोजगार हैं..! और इसलिए, हमें एम्प्लॉइमेन्ट भी बढ़ानी है और एम्प्लॉइबिलिटी भी बढ़ानी है। क्योंकि अगर हम हमारा एक्सपेंशन नहीं करते इन्डस्ट्रीज बेस का, इवन इन एग्रीकल्चर, तो हम एम्प्लॉइमेन्ट के लिए स्कोप जनरेट नही कर पाएंगे। एम्प्लॉइमेन्ट का स्कोप जनरेट किया, लेकिन एम्प्लॉइबिलिटी के लिए व्यक्तियों का विकास नही कर पाते हैं, उसकी प्रोपर ट्रेनिंग नहीं करते हैं... तो इसलिए इन सबका इन्टीग्रेटेड एप्रोच होना चाहिए। और सबका जब इन्टीग्रेटेड एप्रोच होता है तो हम इच्छित परिणाम ला सकते हैं।

उसी प्रकार से, आज दुनिया में चर्चा है कि चीन के साथ हमारी स्पर्धा है, चीन से स्पर्धा है, 21वीं सदी हमारी है, तो किन बातों पर बल देने से हम चीन के साथ मुकाबला कर सकते हैं..? एक तो मेरा मत है कि हमारा स्कोप बहुत वाइड करना चाहिए। आज अगर हम 200 प्रकार की ट्रेनिंग देते हैं तो वो 2000 प्रकार की ट्रेनिंग देना कैसे शुरू करें, 20,000 प्रकार की ट्रेनिंग देना कैसे शुरू करें..? हमारे स्कोप को बहुत वाइड करना चहिए। दूसरा, हमारा स्केल बढ़ाना पड़ेगा। तीसरा, हमें स्किल बढ़ानी पड़ेगी और चौथा, हमें स्पीड बढ़ानी पड़ेगी। अगर इन चारों को मिला कर हम काम करते हैं - स्कोप, स्केल, स्किल एंड स्पीड - इन चारों पर अगर हम बल देतें हैं तब जा कर के हम हमारी पूरी युवा शक्ति को इस निर्माण कार्य से हम जोड़ सकते हैं और तब जा कर के हम परिवर्तन ला सकते हैं।

अब हमारे यहाँ होटल मैनेजमेंट के इंस्टिट्यूट्स होते हैं। होटल मैनेजमेंट सरकारें चलाती हैं, लेकिन कभी सरकार को विचार नहीं आता है कि इस होटल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट्स का हम भी कैसे फायदा उठाएं। हमने एक प्रयोग किया। हमारे जितने गवर्नमेंट गेस्ट हाउस के स्टाफ हैं, क्लास फोर के जो एम्पलाई हैं, उन सबको मैंने सैटरडे-सन्डे गवर्नमेंट की जो हॉस्पिटालिटी कॉलेज है उसमें पढऩे के लिए भेजा। और मैंने कहा कि तुम गवर्नमेंट गैस्ट हाउस में चद्दर कैसे लगती है, पिलो कैसे लगते हैं, चाय कैसे देनी है... तुम सीख कर आओ ना..! उसको नौकरी कैसे मिली थी? कोई पहचान थी, किसी ने कह दिया कि बच्चा है, जरा रख देना, तो रख लिया गया था..! किसी ने ट्रेनिंग नहीं की। अब यह पूरे देश में स्थिति है। लेकिन अगर हमारे दृष्टिकोण में ट्रेनिंग है तो हम हर... अब मेरे दो फायदे हो गए। सैटरडे-सन्डे जो मेरी गवर्नमेंट कॉलेज है उसका भी उपयोग होने लग गया, ये नौजवान, दो दिन जा कर के आते हैं तो विश्वास उनका, कॉन्फिडेंस लेवल इतना बढ़ जाता है कि वे अपना सीखने लगते हैं..!

अब हमारे यहाँ गुजरात में एक समस्या रहती है, क्योंकि हमारे यहाँ ‘मगनभाई पांचवां’, ‘मगनभाई आठवां’, एक बहुत बड़ी चर्चा थी। दो लीडर थे, तो पांचवी से अंग्रेजी या आठवीं से अंग्रेजी, वही झगड़ा चला था हमारे यहाँ, कई वर्षों तक..! और उसके कारण बाय ऐन्ड लार्ज हम गुजराती भाषी गुजराती में ही बातचीत करते हैं तो अंग्रेजी भाषा का हमारा... अब धीरे-धीरे समय बदल गया तो हमने एक बहुत बड़ी मात्रा में गुजरात में मूवमेंट चलाया है, ‘स्कोप’ और उसके अंदर हमने उनको अंग्रेजी और सॉफ्ट स्किल सिखाने की बहुत कोशिश की। हमारा अनुभव ये आया कि 40-45-50 साल की गृहणी भी ये अंग्रेजी का ‘स्कोप’ सीखने गई। तो मेरे लिए ये सरप्राइज था, मैंने कहा भाई, ये झूठी बातें हो सकती हैं। ये फिगर बढ़ा रहे हो और पेमेंट लेने के लिए कुछ चल रहा है। क्योंकि कोई कारण नहीं, क्यों कोई 40-45 में जाएगा..! तो मैंने जांच करवाई। बड़ा सरप्राइज़िंग मुझे आन्सर मिला। उन माताओं ने कहा कि हमारे बच्चे मीडियम इंगिलश में पढ़ रहे हैं और घर आने के बाद हमारे और उनके कम्यूनिकेशन में गड़बड़ होती है। तो हमें ये जरूरी लगा कि हम भी थोडा बहुत बच्चों को खुश करने वाली दो-चार-दस बातें सीख लें और इसलिए हम हाउस वाइफ हैं लेकिन सीखना शुरू किया है।

कहने का तात्पर्य है कि अगर हम सुविधाएं उपलब्ध करवाएं तो सामान्य मानवी को भी सीखने की इच्छा होती है। वो अपने आप में परिवर्तन लाने को इच्छुक होता है। और इसलिए हमारे ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स के नेटवर्क को... और जरूरी नहीं है कि प्राइमरी ट्रेनिंग हो गई तो काम हो गया, ऊपर जरूरत नहीं है, ऐसा नहीं है। अब देखिए अस्पताल में, हम देखें तो एक अस्पताल के अंदर मोर दैन 600 टाइप की पैरा मेडिकल एक्टीविटी होती हैं, मोर दैन 600 टाइप्स..! अब आज क्या होता है? एक आदमी आता है, पाँच-छह दिन साथ रह कर के वो सिखता है कि इस मशीन को ऐसे ऊठाना, ऐसे रखना, फिर डॉक्टर को देना... लेकिन उसकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं होती है। आज कितना स्कोप है, सिर्फ हॉस्पिटल इन्डस्ट्री हम देख लें या हॉस्पिटल सर्विसेस हम देख लें...!

मैं मानता हूँ थाउज़न्ड्स ऑफ ट्रेनिंग कोर्सेस आर रिक्वायर्ड...! हमने एक बार, क्योंकि मैं काफी रूचि लेता हूँ इस विषय में, क्योंकि मैं मानता हूँ कि बदलाव इसी से आना है। तो मैंने एक बार हमारे अफसरों की मीटिंग की। तो वो सोच रहे थे कुछ् पचास कोर्स नए करेंगे, सत्तर कोर्स नए करेंगे... मैंने कहा ऐसा नहीं भाई, एक काम करो, जन्म से मृत्यु तक हर व्यक्ति को कितने प्रकार की सेवाओं की जरूरत पड़ती है, सूची बनाओ। जन्म से मृत्यु तक..! तो उन्होंने मोटी-मोटी सूची बनाई, ऐसे ही। करीब-करीब 976 प्रकार कि उन्होंने निकाली कि उसको झूला चाहिए, उसको खिलौना चाहिए, उसको गुलदस्ता चाहिए, उसको किताब चाहिए, उसको टेबल-कुर्सी चाहिए, उसको सोने के लिए खटिया चाहिए... करीब 976 प्रकार की चीजों की मनुष्य को जन्म से लेकर मृत्यु तक अनिवार्य रूप से जरूरत पड़ती है। अब ये तो उन्होंने सरसरी नजर से बनाया था, कोई अगर बैठेगा तो 9000 भी निकाल सकता है। मैंने कहा कि इसका मतलब ये हुआ कि 976 सर्विस प्रोवाइडर चाहिए। इसका मतलब हुआ कि उनकी ट्रेनिंग चाहिए। अब मान लिजीए, गुलदस्ते कि जरूरत है तो गुलदस्ता बनाने की ट्रेनिंग होनी चाहिए ना..! क्यों वो पिता के पास बेटा सीखा, बेटे के बाद उसका बेटा सीखा... तो क्वॉलिटेटिव चेंज नहीं आता है। और इसलिए अगर हम एक-एक चीज में बारीकी से देखें तो हमारे यहाँ क्वॉलिटी ऑफ लाइफ में अगर चेंज लाना है तो, हमारे प्रोडक्शन में चेंज लाना है तो, हमारे वर्क कल्चर में चेंज लाना है तो, हमें ग्लोबल मार्केट को कम्पीट करने के लिए हर प्रकार की सेवाओं में सुधार लाना है तो, हमारे नोलेज के साथ स्किल बहुत अनिवार्य है। और जहाँ स्किल डेवलपमेंट पर बल दिया जाएगा, हम बहुत...

अभी हमने हमारे यहाँ बिसेग, यहाँ गांधीनगर के पास इंस्टिट्यूट है। कभी आप लोगों को रूचि हो तो देखने जैसा है। सैटेलाइट के माध्यम से जो इंजीनियर्स हैं, उनको हम एम्प्लॉएबल बनाने के लिए छह महीने की ट्रेनिंग देते हैं, हर स्टूडेंट को देते हैं। वह अगर बाहर पढऩे जाता है तो उसकी फीस बीस हजार रुपया होती है। अब हर विद्यार्थी 20,000 रुपया खर्च करे यह संभव नहीं है। तो हमने लांग डिस्टेंस एज्यूकेशन शुरू किया और हमने कहा कि सिर्फ सौ रुपया, सिरीयसनेस आए तुम्हारी इसलिए तुम्हे भरना होगा। शाम के समय लांग डिस्टेंस से होता है। हमने माइक्रोसॉफ्ट के साथ पार्टनरशिप की और आज हमारे हजारों इंजीनियर्स, इंजीनियर की डिग्री प्राप्त करने के छह महीने पहले इन कंपनियों के लिए एम्प्लॉएबल हो सके उसकी ट्रेनिंग उनकी हो जाती है। यानि हम अगर इन चीजों पर बल दें, तो हम बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते है।

गुजरात ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को भी महत्व दिया है| और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के कारण हमारे यहाँ काफी बड़ी मात्रा में हम कुछ इनोवेशन भी कर रहे हैं। जैसे हमारे यहाँ परम्परागत रूप से कच्छ मांडवी यह जहाज बनाने का उद्यम करता था, आज से सौ साल पहले, दो सौ साल पहले, और बड़े जहाज बनाने का काम वह करते थे, लकड़ी के... अब धीरे-धीरे-धीरे कुछ ही परिवार बच गए हैं, तो हमने वहाँ स्पेश्यल आई.टी.आई. शुरू किया। उस आई.टी.आई. के सभी स्टूडेंट का यही काम है कि नाव बनाना, जहाज बनाना उसकी ही ट्रेनिंग हो। आज मांडवी का वह बंदर हमारा जो मरा पड़ा था, धीरे-धीरे-धीरे उनकी मांग बढऩे लगी, उनको काम मिलने लगा और वहीं के लोकल लोग जिनके पूर्वजों का वह व्यवसाय था और उनमें क्षमता थी, धीरे-धीरे वहाँ काम शुरू करने लगे और डेवलप होने लगा।

मेरे यहाँ उमरगांव से अंबाजी पूरा ट्राइबल बेल्ट है। ट्राइबल के वहाँ पर लोकल एम्प्लोयमेंट की वहाँ जरूरत... अब जैसे वहाँ केले में, केला पैदा करना तो परंपरागत रूप से किसान करता है, लेकिन केला पैदा होने के बाद वह जो वेस्ट रहता है उसको हटाने का पहले किसान को 15,000 रुपया खर्च होता था, एक एकर पर। आज उसमें हमने वैल्यू एडिशन किया है, ट्रेनिंग दी है किसानों को और उसमेंसे चीज़ें बनने लगी हैं तो आज वह एक एकडर में 20-25,000 रुपया कमाता है। तो ट्रेनिंग से हम इतना बदलाव ला सकते हैं और इकोनॉमी को इतना जनरेट कर सकते हैं और इसलिए स्किल डेवलपमेंट के मिशन को हम जितना बल दें, जितना साइंटिफिक बनाए उतना लाभ है। गुजरात ने अपने आप इस दिशा में काफी कुछ किया है। हम देश के लिए भी उपयोगी हो इस प्रकार के काम को कर रहे है।

मैं मानता हूँ कि यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सेमिनार है, और जैसा आपने देखा कि करीब 26 डिस्ट्रिक्ट में एक-एक कंपनी टोकन, वैसे तो काफी हैं, अभी भी होने वाले हैं जैसा कि मुझे बताया और हम चाहते हैं कि हम जब वाइब्रेंट समिट करते हैं तो एक काम करते हैं। वाइब्रेंट समिट में जो एम.ओ.यू. करते हैं तो उनको हम उसी दिन कहते हैं कि भाई, तीन दिन के बाद एक सेमिनार होगा। आपको किस प्रकार का वर्कफोर्स चाहिए, उसका पूरा डिटेल लाओ। तुम्हारी इन्डस्ट्री को बनने में अगर दो साल, तीन साल कन्सट्रक्शन में लगते हैं तो जैसे ही तुम शुरू करोगे, उसके साथ तुम्हारे लिए जो रिक्वायर्ड वर्कफोर्स है, रिक्वायरमेंट है ह्यूमन रिसोर्स की, ट्रेनिंग की, हम अभी से करवा देते हैं। उसका बहुत बड़ा लाभ हो रहा है।

हमारे यहाँ एक ‘गिफ्ट सिटी’ बन रहा है। अब आज हमारे गुजरात में इतना टॉलेस्ट बिल्डिंग कोई है नहीं, उतने बड़े टॉलेस्ट बिल्डिंग बन रहे हैं। अब टॉलेस्ट बिल्डिंग बन रहे हैं तो पुरानी पद्घति से जो कन्सट्रक्शन का काम कर रहे हैं वह नहीं चलेगा। मुझे उसके लिए स्किल चाहिए, तो उस प्रकार का स्किल डेवलपमेंट इन्स्टीट्यूट चालू किया। और उसमें भी कोई ज्यादा खर्चा नहीं किया, हमने क्या किया..? हमारी अहमदाबाद में जो स्कूल है, उस स्कूल को हमने कहा कि तुम इवनिंग टाइम में स्किल डेवलपमेंट क्लासिस चलाओ, ताकि यह जो हमारे कन्सट्रक्शन वर्कर्स हैं उनको थोड़ी तीन-चार दिन की ट्रेनिंग हो जाती है तो उस काम को कर लेते है..! तो एक मूवमेंट के रूप में स्किल डेवलपमेंट को चलाना पड़ता है और उसका परिणाम सबको मिलता है।

अब हम नेक्सट लेवल पर जा रहे हैं। वी हैव क्रिएटेड एन इंस्टिट्यूट कॉल्ड ‘आई-क्रिएट’। ‘आई-क्रिएट’ हमारा गलोबल लेवल का इंस्टीट्यूशन बन रहा है, मिस्टर नारायण मूर्तिजी को मैंने रिक्वेस्ट किया था उसकी चेयरमैनशिप के लिए, उन्होंने उस बात को स्वीकार किया और आज उनके नेतृत्व में हम काम कर रहे हैं। जो भी इनोवेशन्स हैं, इतना स्पार्क कि एक आठवीं कक्षा के बच्चे में भी स्पार्क होता है। जिनके पास ऐसे इनोवेशन का स्कोप हैं उनके लिए ‘आई-क्रिएट’ में एक जगह है, जहाँ आप आएं, हम उसे पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर देंगे, उसके रहने-खाने की व्यवस्था देंगे। और जो भी उसके आइडियाज़ हैं, उस आइडियाज़ को धरती पर उतारें और कमर्शियल मॉडल कैसे तैयार हो उसके लिए जो भी उसको नो-हाऊ कि जरूरत है वह मिले, उसको फाइनेंशियल हैल्प मिले, वहाँ तक का काम करने वाली एक ‘आई-क्रिएट’ संस्था, वर्ल्ड क्लास इन्स्टीट्यूट हमारी, अन्डर प्रोसेस है, मिस्टर नारायण मूर्ति के नेतृत्व में काम चल रहा है, उसका भवन अभी बन रहा है। लेकिन अभी से हमने लोगों से कॉन्टेक्ट करना शुरू किया है, फैकल्टीज का, स्टूडेंटस का, और उसकी एक वैबसाइट भी है। उसके लिए काफी अच्छी मात्रा में नौजवान आगे आ रहे हैं और ग्लोबली शायद उसमें नौजवान मिलेंगे।

कहने का तात्पर्य है कि हर लेवल पर स्किल डेवलपमेंट के काम को बल देते हुए हम आगे बढऩा चाहते हैं, क्लस्टर अप्रोच के साथ चाहते हैं, स्कोप भी बढ़ाना चाहते हैं, स्किल भी बढ़ाना चाहते हैं, स्पीड भी बढ़ाना चाहते हैं और स्केल भी बढ़ाना चाहते हैं और हम और अधिक कैसे कर सकें उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आज के इस दिवस भर का समारोह, हमारे नौजवानों के लिए नई आशा कि किरण बनेगा। हमारा नौजवान बेरोजगार रहे, ये सबसे बड़ा देश का नुकसान है। उसकी शक्ति राष्ट्र के निर्माण में काम आए।

एग्रीकल्चर सेक्टर में भी परंपरागत एग्रीकल्चर में बदलाव करके ट्रेन्ड मैनपावर लगाया तो बहुत वेस्टेज बच सकता है। हमारा अनुभव है कि पानी बचाने में ट्रेन्ड मैनपावर का हमें बहुत बल मिला है और इसलिए उन चीजों की ओर हम ध्यान देंगे तो बहुत-बहुत लाभ होगा।

मेरी इस समारोह को, इस सेमीनार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं...!

धन्यवाद...!!

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भाजपा परिवार के सभी वरिष्ठ जन और मेरे प्यारे कार्यकर्ता साथियो। भारतीय जनता पार्टी एक मात्र ऐसा राजनैतिक दल है, जहां हम पार्टी को अपनी मां मानते हैं। इसलिए, पार्टी का स्थापना दिवस हमारे लिए ये केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं होता। ये हम सब कार्यकर्ताओं के लिए एक भावुक अवसर होता है। ये दिन हमें पार्टी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका देता है कि पार्टी ने हमें राष्ट्र सेवा का सौभाग्य दिया। मैं आप सभी को, देश भर के कोटि-कोटि भाजपा कार्यकर्ताओं को भाजपा के विशाल समर्थन करने वाले, मेरे देश के सभी नागरिकों को भाजपा स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।


साथियों,

मैं इस अवसर पर पार्टी के संस्थापकों और वरिष्ठों को भी आदरपूर्वक याद करता हूं। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी..दीनदयाल उपाध्याय जी...नानाजी देशमुख, कुशाभाऊ ठाकरे जी, जेना कृष्णमूर्ति जी, राजमाता विजया राजे सिंधिया जी, सुंदर सिंह भंडारी जी, अटल जी...आडवाणी जी...मुरली मनोहर जोशी जी...पी परमेश्वरन जी, कबीन्द्र पुरकायस्थ जी...ऐसे अनगिनत उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम हिंदुस्तान के कोने-कोने में ऐसी सभी विभूतियों को मैं आज आदरपूर्वक नमन करता हूँ।

साथियों,

मैं हमारे युवा अध्यक्ष श्रीमान नितिन जी का भी इस आयोजन के लिए विशेष रूप से धन्यवाद करता हूँ। उनके अध्यक्ष बनने के बाद ये पार्टी की स्थापना दिवस का पहला अवसर है। आपकी लीडरशिप में पार्टी पूरी ऊर्जा से देशसेवा में लगी है। इस समय जिन पाँच राज्यों में चुनाव है। वहां भी पार्टी में...एक नई ऊर्जा देख रहा हूं...कार्यशैली में नयापन देख रहा हूं...ऐसा लग रहा है...नवीन जी ने पार्टी में नवीनता भर दी है।

साथियों,

आज बीजेपी जिस शिखर पर है, उसकी चमक सबको दिखती है। लेकिन, यहाँ तक पहुँचने के लिए लाखों कार्यकर्ताओं का जो श्रम है, उन्होंने जो तप, त्याग और तितिक्षा की पराकाष्ठा की है...उसे वही जान सकता है...जो इस पार्टी के संकल्पों के लिए समर्पित होकर स्वयं इस साधना का हिस्सा रहा है। एक वो भी दौर था...भाजपा के पास किसी कोने में दूर-दूर तक सत्ता का नामोनिशान नहीं था। न कोई संसाधन और न ही कोई सुविधा थी! उस समय भाजपा कार्यकर्ता के लिए कहा जाता था कि उसका एक पैर रेल में और दूसरा जेल में होता है। जनता के साथ जुड़ने के लिए भाजपा कार्यकर्ता रेल से एक शहर से दूसरे शहर भागता रहता था, दौड़ता रहता था...और जनता से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए जेल जाने में भी संकोच नहीं करता था। उस कठिन समय में भी भाजपा के कार्यकर्ताओं के पास...सबसे बड़ी चीज थी- आने वाले भविष्य पर भरोसा। उनका दृढ़ विश्वास था कि वो आज जो मेहनत कर रहे हैं...उससे आने वाले भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा। और इस भरोसे के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने क्या-क्या नहीं सहा! आपातकाल, इमर्जेंसी का घनघोर दमन...काँग्रेस के षड्यंत्र....राजनीतिक रूप से अछूत हमें बनाने की लगातार कोशिशें...इन सबसे लड़कर हमारे निःस्वार्थ कार्यकर्ता पार्टी को अपने परिश्रम से, अपनी साधना से, अपने संकल्प से यहाँ तक लेकर आए हैं। और इस यात्रा में हमारे कितने ही कार्यकर्ताओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है! हमने बंगाल और केरलम जैसे राज्यों में देखा है...वहाँ किस तरह हिंसा को पॉलिटिकल कल्चर बना दिया गया है। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता, ऐसे हालातों में भी डिगा नहीं...डरा नहीं। आज भी भाजपा का कार्यकर्ता देशसेवा के भाव के साथ निरंतर काम कर रहा है। आज भाजपा के स्थापना दिवस पर पार्टी के लिए अपना जीवन गंवाने वाले सभी कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देता हूं, नमन करता हूं।

साथियों,

आज लोकतन्त्र की कितनी ही उपलब्धियां बीजेपी के नाम पर हैं। देश में लंबे अंतराल के बाद किसी पार्टी को इतना स्पष्ट जनमत मिला है। लेकिन हम इस सफलता की विवेचना करें...तो हमें नीयत...नीति ...निष्ठा...की एक लंबी यात्रा हम भली-भांति देख सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के विशाल और पवित्र वटवृक्ष के नीचे...हमें साफ नीयत के साथ...शुचिता के साथ राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा मिली। फिर शुरुआत के कुछ दशकों में, चाहे वो जनसंघ का समय रहा हो या भाजपा का, हमने एक संगठन के लिए नीतियां निर्धारित करने में अपनी ऊर्जा लगाई। फिर उसके बाद जो समय आया… उसमें भाजपा ने पूरी निष्ठा से अपनी ताकत खुद को एक सशक्त काडर बेस्ड पार्टी बनाने में झोंक दी। हमने कार्यकर्ताओं का एक ऐसा विशाल काडर खड़ा किया...जिनमें सेवा भावना से कार्य करने का समर्पण था। जिन्होंने पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन का आदर्श बनाया...और, जिन्होंने…किसी भी परिस्थिति में अपने मूल्यों से समझौता स्वीकार नहीं किया।

साथियों,

हम एक ओर अपने मूल्यों पर अडिग रहे...वहीं साथ ही....लोक सेवा यानी जन कल्याण को अपनी प्राथमिकता बनाया। हमारे पास संसाधन सीमित थे...तब हम कहीं सरकार में भी नहीं थे...लेकिन हमारी पार्टी लोगों की सेवा के लिए समर्पित रही। चाहे आपदा हो, या समाज में कोई सकारात्मक बदलाव हो, हर जगह हमारे कार्यकर्ता सेवाभाव से जनता के बीच उपस्थित रहे। इसी सेवाभाव के कारण लोगों का बीजेपी पर विश्वास बढ़ता चला गया।

साथियों,

हम सभी सन उन्नीस सौ चौरासी का वो दौर भूल नहीं सकते, जब कांग्रेस ने रिकॉर्ड सीटें जीती थीं। लेकिन देश की जनता देख रही थी कि कैसे कांग्रेस सत्ता हासिल करके उसके साथ विश्वासघात कर रही है। ऐसे में देश के लोगों का भाजपा पर भरोसा दिनों-दिन बढ़ रहा। भाजपा धीरे-धीरे चुनाव जीतने लगी थी। और हमारे आने से, देश की राजनीति में दो धाराएं बहुत स्पष्ट हो गईं। एक धारा बनी, सत्ता आधारित राजनीति की। तो दूसरी धारा बनी, सेवा आधारित राजनीति की। सत्ता को प्राथमिकता देने वाली राजनीति का धीरे-धीरे पतन होने लगा! और, सेवाभाव वाली राजनीति को धीरे-धीरे लोगों का भारी समर्थन मिलने लगा। आज हमें इस बात पर गर्व है कि...हमने अपने आचरण से भारत की राजनीति में एक नया सिद्धान्त स्थापित किया है! ‘राष्ट्र प्रथम’ का सिद्धान्त! राष्ट्रीय एकता...राष्ट्रहित सर्वोपरि...ये हमारी पहचान बन गई है।

साथियों,

भारत की राजनीति में भाजपा ने गठबंधन की राजनीति का भी एक नया आदर्श स्थापित किया। हमारे देश में सत्ता के लिए गठबंधन के अनेक प्रयोग हुए। लेकिन राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए, राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, अगर कोई गठबंधन बना...तो वो भाजपा द्वारा बनाया गया गठबंधन था- NDA…अब तो NDA गठबंधन 25 वर्ष से भी ज्यादा का हो गया है। हमारे NDA परिवार का निरंतर बढ़ना ये दिखाता है...कि भाजपा कितनी सर्वसमावेशी है और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को सर्वोपरि रखते हुए काम करती है।

साथियों,
हमसे पहले देश ने परिवारवादी-वंशवादी राजनीति का बोलबाला देखा था। और आज भी अलग-अलग कोने में वो खेल चल ही रहा है। या तो फिर, लेफ्ट का गवर्नेंस मॉडल देखा था। लेकिन, हमारा गवर्नेंस मॉडल यूनीक रहा। हमारे गवर्नेंस मॉडल में पॉलिसी में स्थिरता थी... सरकार में स्थिरता थी। हमने जो कहा, वो करके दिखाया। आज भाजपा की पहचान के साथ, ये बात जुड़ गई है कि जो वो कहती है, वो जरूर करती है।

साथियों,
भाजपा ने वडोदरा में 1994 में महिला आरक्षण का प्रस्ताव पारित किया था। हमने ये भी तय किया था कि संगठन में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आगे बढ़ाएंगे। और सरकार में आने के बाद हमने महिला आरक्षण का अपना वायदा पूरा करके दिखाया। अब हम पूरी शक्ति से जुटे हैं कि साल 2029 में नारीशक्ति वंदन अधिनियम की भावना के अनुरूप ही चुनाव हो।

साथियों,
आज भाजपा गुड गवर्नेंस का सिंबल बन गई है...लास्ट माइल तक डिलीवरी का सिंबल बन गई है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने हमें अंत्योदय का सिद्धांत दिया था। हमने इसी विजन पर चलते हुए सैचुरेशन का मार्ग अपनाया...इसी का नतीजा था कि देश के 25 करोड़ गरीबों को...गरीबी से बाहर निकालने में हम कामयाब रहे।

साथियों,
डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के लिए अपना बलिदान तक दे दिया था। दशकों से जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370…देश की संवैधानिक एकता और अखंडता के लिए एक चुनौती बना हुआ था। एक दीवार खड़ी कर दी गई थी। उस समय कश्मीर से 370 को खत्म करना.... इसे पूरी तरह से असंभव माना जाता था, नामुमकिन माना जाता था। लेकिन, अपनी स्थापना के दिन से ही भाजपा का ये संकल्प था कि 370 का कलंक देश के माथे से हटकर रहेगा। और, हमने ये काम करके दिखाया।

साथियों,
राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद पर प्रहार...ये भाजपा के लिए ऐसे मुद्दे रहे हैं जिन पर हमारी पार्टी हमेशा अडिग रही है। आज हम डिफेंस में देश को आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बॉर्डर पर सुरक्षा के लिए नए-नए उपाय कर रहे हैं...सीमावर्ती गांवों को प्रथम मानकर वहां विकास कर रहे हैं ताकि भारत की सीमाएं हमेशा सुरक्षित रहें। इसी तरह देश में नक्सलवाद-माओवाद की कमर तोड़ने का काम भी अगर किसी ने किया है...तो वो भाजपा है।

साथियों,
भाजपा के शुरुआती दिनों से ही हम कहा करते थे- कच्छ हो या कोहिमा...अपना देश...अपनी माटी। भाजपा आज एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ देश की एकता के लिए काम कर रही है। GST लाकर हमने One Nation One Tax का संकल्प साकार किया। One Nation- One Ration Card....One Nation- One Grid ऐसे कितने की प्रयासों से देश को हम जोड़ रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से हम मातृभाषा पर... स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर भी जोर दे रहे हैं।

साथियों,
हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया है- वसुधैव कुटुंबकम...हम पूरे विश्व को एक परिवार मानते हैं। आज युद्ध के इस समय में भी भारत की इस भावना को हम प्रतिष्ठापित होते देख रहे हैं। एक समय था जब भारत सबसे समान दूरी बनाके रखने में गर्व करता था। आज का भारत...सबसे समान निकटता बनाकर चल रहा है।

साथियों,
हम विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं। कांग्रेस ने हमेशा सिर्फ एक परिवार को प्राथमिकता दी है..बाकी के साथ अन्याय किया। घोर अन्याय किया। जबकि भाजपा...मां भारती की हर महान संतान को उचित सम्मान दे रही है। नेताजी सुभाष बाबू के नाम पर पराक्रम दिवस...अंडमान में उनकी प्रेरणा से द्वीपों के नाम...26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज को सैल्यूट...ऐसे कितने ही काम हुए हैं जो कांग्रेस सरकार में सोचे तक नहीं गए। खादी को पुनर्जीवित करना हो...स्वदेशी के लिए लोगों को फिर से जागृत करना हो...भाजपा ने राष्ट्र की चेतना को नई ऊर्जा दी है, नई प्रेरणा दी है।

साथियों,

पूरे विश्व में एक अवधारण रही है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए विकास बहुत मुश्किल होता है। लेकिन भारत ने इस अवधारण को भी तोड़ा है। हमने पर्यावरण की रक्षा करते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को तेज गति दी है। 11 साल पहले भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। इतने कम वर्षों में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने हैं। और ये तेज विकास...पर्यावरण की रक्षा करते हुए हुआ है। भारत आज क्लाइमेट चेंज से जुड़े लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त कर रहा है। जब बात environment-friendly स्रोतों से 50 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के वैश्विक संकल्प की आती है...तो उसे हासिल करने वाले देशों में भारत सबसे अग्रणी रहा है। 2014 से पहले भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 3 गीगावाट से भी कम थी...लेकिन आज यह बढ़कर 140 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।

साथियों,
21वीं सदी के भारत में भाजपा के पास अपने लक्ष्य हैं...अपने संकल्प हैं। हम वर्तमान चुनौतियों से निपटने के साथ ही...देश को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। डेमोग्राफी में हो रहा बदलाव...घुसपैठियों का ज्वलंत मुद्दा...भ्रष्टाचार...परिवारवाद....गुलामी की मानसिकता...बहुत से विषय हैं जिन पर लगातार काम हो रहा है। और भाजपा को इन चुनौतियों से देश को मुक्त करना ही होगा। ये जिम्मेवारी भाजप ही पूरा कर सकता है। हमारी ईमानदार कोशिशों के नतीजे...भूतकाल गवाह है, परिणाम सकारात्मक रहे हैं। आगे भी रहेंगे। देश जानता है कि हर चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ईमानदारी से कोशिश करती है। आज भी करते हैं। आगे भी करते हैं। पहले भी सकारात्मक नतीजे मिले हैं। आगे भी सकारात्मक नतीजे मिलने वाले हैं।

साथियों,
अंग्रेजों के दौर के सैकड़ों काले क़ानूनों का अंत....लोकतन्त्र के लिए नए संसद भवन का निर्माण....सामान्य समाज के गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण…कानून बनाकर तीन तलाक पर रोक…CAA का कानून...अयोध्या में राममंदिर का निर्माण....ऐसे कितने ही काम हैं... जो भाजपा के ईमानदार प्रयासों का नतीजा हैं। और, हमारा मिशन अभी भी जारी है। Uniform Civil Code….One nation, one election……ऐसे सभी विषयों पर आज देश में एक गंभीर चर्चा भी हो रही है, और इस दिशा में सकारात्मक प्रगति भी हो रही है।

साथियों,
हमारा लक्ष्य है- विकसित भारत का निर्माण...आत्मनिर्भर भारत का निर्माण...और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम निःस्वार्थ भाव से लगे रहेंगे।

साथियों,
कुछ ही वर्षों में भाजपा अपने 50 वर्ष पूरे करने जा रही है। ये बहुत बड़ा पड़ाव है, बहुत बड़ी प्रेरणा है। हमें नए लक्ष्यों का मंथन भी करना है और बदलती टेक्नोलॉजी के इस जमाने में खुद को ढालना भी है। मैं एक बार फिर, अपने करोड़ों कार्यकर्ताओं को भाजपा स्थापना दिवस की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

वंदे मातरम।