गुजरात की उत्तम सहकारिता के आन्दोलन का नेक्स्ट जनरेशन मॉडल विश्व को दें : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात स्टेट को ऑपरेटिव बैंक द्वारा नवनिर्मित सरदार वल्लभभाई पटेल सहकार बहवन का शुभारम्भ करते हुए गुजरात में उत्तम सहकारिता का आन्दोलन नेक्स्ट जनरेशन मॉडल उपलब्ध करवाए, इसका प्रेरक सुझाव दिया।
अहमदाबाद में 35 करोड़ के खर्च से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की शाखा के रूप में इस सहकारिता भवन का आधुनिकतम परिसर 2 लाख वर्गफिट क्षेत्र में तैयार हुआ है जिसमें देश में प्रथम बार 300 किसानों के लिए 58 जितने कमरों का निर्मान किया गया है।
सहकारिता बैंकिंग का नेक्स्ट जनरेशन सेक्टर कैसा हो और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्पर्धा में किस तरह सक्षम बने इसके लिए टास्कफोर्स सहकारी बैंकिंग का नया मॉडल तैयार करे, यह सुझाव मुख्यमंत्री ने दिया।

नागरिक सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंक मात्र फिक्स डिपोजिट की सीमित प्रवृत्ति में से बाहर आकर सामाजिक दायित्व का दायरा तैयार करे। इसकी हिमायत करते हुए श्री मोदी ने आह्वान किया कि प्रत्येक सहकारी बैंकों को कोई ना कोई सामाजिक श्रेय प्रवृत्ति के साथ अभियान के रूप में शामिल होना चाहिए।
महात्मा गांधीजी के 150 वें वर्ष के महोत्सव और 2022 में आजादी के अमृत महोत्सव के अवसरों को ध्यान में रखकर सहकारी बैंक और संस्थाएं समाज की सर्वांगीण मजबूती के लिए प्रतिबद्ध बनें।
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में ऑनलाइन फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन टेक्नॉलॉजी अपनाई जाए तो कैश ट्रांजेक्शन और काले धन की बुराई को दूर करने में काफी सफलता मिल सकती है।
सहकारी क्षेत्र में लोकतांत्रिक पद्धति से चुनाव करवाने के लिए सहकारिता का स्वायत्त चुनाव आयोग बनाने की हिमायत करते हुए श्री मोदी ने की। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्रों में राजनैतिक विचारों और बुराइयों के कारण कानूनी केस चलाये जाते है, जिसका निराकरण भी इस दिशा से उत्तम सहकारिता आन्दोलन में उपकारक बनेगा।
वैश्विक मन्दी के कारण अमेरिका जैसे देश की फेडरल कम्युनिटी बैंकिंग संस्थाएं भारी तादाद में बन्द हो गई मगर गुजरात की सहकारी बैंकें बच गई हैं। यह हमारी सहकारिता की ताकत को दर्शाता है।

सहकारिता के क्षेत्र में आज भी गुजरात की उज्जवल परम्परा की अनुभूति देश में हो रही है। इसकी नींव में सहकारिता की 2 व्यवस्थाएं, कानूनी व्यवस्था या सवैंधानिक ढांचा नहीं बल्कि निष्ठावान सहकारिता की भावना को समर्पित लोगों की निष्ठा और कर्तव्यपरायणता है।
सहकारिता की यह स्पिरिट जितनी बलवान होगी उतना ही सहकारिता का आन्दोलन मजबूत रहता है। इस देश में राष्ट्रवृत्ति के रूप में सहकारिता उभर नहीं सकी, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मगर एक राष्ट्रशक्ति के रूप में भी हम इसे विकसित नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि बैंकों के राष्ट्रियकरण के पीछे भले ही जो भी राजनैतिक लाभ हुए हों मगर यह सहकारिता के तत्व पर जानलेवा हमला था। सहकारी बैंकिंग के समक्ष टकराव पैदा हुआ है जिसका अभ्यास कब किया जाएगा?
देश में सभी राजनैतिक धाराएं कहीं ना कहीं सत्ता या प्रभुत्व में हैं और सहकारी क्षेत्र पर कब्जा करने की भावना की मानसिकता है मगर गुजरात ने इसमें संयम रखा है।
2001 में भूकम्प के बाद माधुपुरा बैंक घोटाले की आर्थिक मार गुजरात ने झेली थी और सहकारी बैंकें डूबी थी और अविश्वास का माहौल बना था ।
तब यह माना जाता था कि सहकारिता के क्षेत्र में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होता फिर भी वर्तमान सरकार सहकारी क्षेत्रों को आर्थिक रूप से डूबने से बचाया था।
उन्होंने कहा किस कोई भी गोत्र देखे बिना कई लोगों को जेल भेजा गया और सरकार के इस कठोर फैसले का सभी ने समर्थन किया। इसी वजह से सहकारी संस्थाएं टिकी हैं।
मुख्यमंत्री को इस अवसर पर बैंक द्वारा स्टेच्यु ऑफ युनिटी के निर्माण में सहयोग का अनुदान प्रदान किया गया। इस अवसर पर सहकारिता मंत्री बाबु भाई बोखिरिया, राज्यमंत्री गोविन्द भाई के साथ ही विभिन्न जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष, डायरेक्टर्स, सांसद प्रभातसिंह, विठ्ठल भाई रादडिया, राज्य योजना आयोग के अध्यक्ष नरहरी अमीन, सहकारी प्रतिनिधि, नाबार्ड, रिजर्व बैंक तथा कृषि- सहकारिता बैंकों के पदाधिकारी मौजूद थे।
प्रारम्भ में गुजरात स्टेट कॉ ऑपरेटिव बैंक के उपाध्यक्ष और विधायक शंकर भाई चौधरी ने सभी का स्वागत किया। अध्यक्ष अजयभाई ने बैंक के अत्याधुनिक नवनिर्मित संकुल की खूबियां बतलाई।





