सार्वजनिक जीवन में, कुछ मुलाकातें केवल क्षणों को जीवित नहीं रखती है, बल्कि वे आपकी दिशा ही बदल देती हैं। मेरी पहली मुलाकात श्री नरेन्द्र मोदी जी से 1996 में ऐसे ही एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हुई थी। तब में सीखने और योगदान करने की तीव्र इच्छा के साथ एक युवा कार्यकर्ता के रूप में संगठन में शामिल हुआ था। लेकिन जब मैं उनके नेतृत्व में कार्य करके बाहर निकला तो एक बदला हुआ व्यक्ति बनकर उभरा। मोदी जी ने मेरे जीवन में एक ऐसी रेखा खींची जिसने राजनीति को स्पष्टता, समयसीमा और अंतिम नागरिक तक जवाबदेही के साथ उद्देश्यपूर्ण कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

मोदी जी ने जो अनुशासन सिखाया,वह बहुत सरल था। उनका कहना है कि पूरी तरह सुनो, जल्दी फैसला लो, और लगातार काम करते रहो। मुझे एक बात जो उनकी बहुत अच्छी लगी वो ये है कि वे बहुत सहनशील हैं। वे हर बात ध्यान से सुनते हैं, कभी-कभी बोलने वाले से भी ज्यादा धैर्य रखते हैं। थोड़ी देर रुककर, वे जटिल बातों को बहुत सहजता से समझा देते हैं। उनके साथ बैठकें अधूरी उम्मीदों पर नहीं, बल्कि सही मापदंडों और समय सीमा के साथ खत्म होती हैं।

मोदी जी के साथ मेरी भूमिका स्पष्ट थी, तब से यही कार्यशैली रही कि ईमानदारी से काम करो, नियमित रूप से काम की रिपोर्ट दो एवं गलतियों को जल्द से जल्द सुधार करो और यही आदत मेरे कार्य का मूल सिद्धांत बन गई। इसका मतलब था दिखावे की जगह परिणामों को महत्व देना, बिना किसी नाटकीयता के कमियों को स्वीकार करना, और समस्याओं को तुरंत ठीक करना। ईमानदारी सिर्फ एक मूल्य नहीं थी, बल्कि सबसे प्रभावी और व्यावहारिक तरीका भी था काम करने का।

वे शुरुआती वर्ष मेरे लिए एक परीक्षा की तरह रहे। गुजरात में मुझे राजनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई, जिनमें कच्छ की आधी सीटें शामिल थीं — ऐसे इलाके जहाँ दूरियाँ बहुत ज़्यादा थीं, लक्ष्य बेहद अस्पष्ट थे और समयसीमा बिल्कुल कठोर। इसके बाद वाराणसी में, मैंने एक विधानसभा क्षेत्र संभाला, जहाँ हर बूथ अपने आप में एक अलग संसार था।

मोदी जी के विश्वास से प्रेरित होकर मैंने जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी नई जिम्मेदारियाँ स्वीकार कीं। उस पूरे अनुभव से एक बात साफ़ थी की शांत निरंतरता, ऊँची बातों से ज्यादा असरदार होती है और आँकड़े, शोर से अधिक स्पष्टता से बोलते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी जी के साथ जुड़ा मेरा लगभग तीन दशकों का सफर सिर्फ एक सार्वजनिक जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के कायापलट की यात्रा भी है। यह रिश्ता केवल साझा खिचड़ी पर नहीं बना, बल्कि उस निरंतर कर्मभूमि पर खड़ा हुआ जहाँ हर काम का मूल्यांकन उसके प्रभाव से होता है — और जहाँ यह सुनिश्चित किया जाता है कि विकास की यात्रा में कोई पीछे न रह जाए।

जब मुझे हरियाणा की बागडोर सौंपी गई, तो यह सिर्फ एक पद नहीं था, बल्कि मोदी जी के विश्वास, मार्गदर्शन और मूल्यों की एक अमूल्य विरासत थी। में इस विश्वास के लिए कृतज्ञ था, अपनी जिम्मेदारी के प्रति पूर्णतः सजग था, और सेवा को ही अपना धर्म मानते हुए मोदी जी के सान्निध्य में आगे बढ़ने का संकल्प मेरे भीतर गूंज रहा था।

2014 में जब मोदी जी ने देश का सर्वोच्च पद संभाला, तब पूरे देश में परिणामों की एक व्याकुल प्रतीक्षा साफ महसूस होती थी। लेकिन मोदी जी ने इसका उत्तर सिर्फ नारों से नहीं दिया — उन्होंने एक व्यवस्थित, दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ जवाब दिया।

जन धन योजना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने कल्याणकारी योजनाओं में हो रही लीपापोती को समाप्त कर दिया। डिजिटल इंडिया ने टेक्नोलॉजी को लक्जरी हाथों से निकालकर आम जनता के लिए सुलभ हो ऐसी व्यवस्था का निर्माण किया। यूपीआई ने लेनदेन को हर हाथ तक पहुंचा दिया। जीएसटी ने देश की अर्थव्यवस्था को एक सूत्र में बाँध दिया। उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाया जिसका उद्देश्य था कि संसाधन केवल कुछ लोगों के हाथ मे न रहें ये हर नागरिक के लिए सुलभ बनें।

आज शहरी विकास के क्षेत्र में मेरा कार्य इसी समग्र दृष्टिकोण को साकार होते हुए दर्शाता है। उदाहरण के लिए, आवास को ही लीजिए। प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी के अंतर्गत यह सुनिश्चित करने के लिए मिशन की अवधि दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई कि स्वीकृत घर, केवल कागज़ पर न रह जाएं, बल्कि पूर्ण रूप से तैयार होकर लोगों को वास्तव में मिलें।

अब तक शहरी क्षेत्रों में 1.19 करोड़ से अधिक घर स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 93 लाख से अधिक का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन हर तैयार घर केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं है—वह एक ऐसी चाबी है जो उस दरवाज़े को खोलती है, जो पहले कभी था ही नहीं।

यही है “अंतिम पंक्ति के व्यक्ति” को गरिमा देने का सजीव उदाहरण — ज़मीनी स्तर पर आत्मसम्मान को साकार करने वाली सोच।

शहरों की अर्थव्यवस्था की नाजुक रीढ़—फुटपाथ विक्रेता—को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से सशक्त किया गया। इस योजना में माइक्रो-क्रेडिट को जमानत नहीं, बल्कि डिजिटल लेनदेन से जोड़ा गया। इससे छोटे-छोटे उद्यम भी एक भरोसेमंद आजीविका का आधार बन सके।

जुलाई 2025 तक 68 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 13,800 करोड़ रुपये की राशि के 96 लाख से अधिक ऋण प्रदान किए जा चुके हैं। इनमें से लाखों ने डिजिटल भुगतान को अपनाया—यह एक जीवंत प्रमाण है कि जब व्यवस्था समावेशी होती है, तो गरिमा भी व्यापक स्तर पर पहुँचती है।

शहरों का परिवर्तन केवल बड़ी इमारतों या चमक-धमक वाली परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। यह उन इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में भी है जो दिखते कम हैं, पर ज़िंदगी के लिए बेहद ज़रूरी हैं—जैसे पाइपलाइन, नालियाँ और स्ट्रीट लाइटें।

AMRUT और AMRUT 2.0 योजनाओं के तहत पिछले एक दशक में दो करोड़ से अधिक घरों तक नल कनेक्शन और करीब डेढ़ करोड़ सीवर कनेक्शन पहुँचाए गए। अब लगभग एक करोड़ एलईडी स्ट्रीट लाइटें हमारे शहरों को रोशन कर रही हैं—जो न केवल ऊर्जा की बचत करती हैं, बल्कि नगर निकायों के खर्च को भी कम करती हैं।

शहरी स्थानीय निकाय अब म्यूनिसिपल बॉन्ड्स के ज़रिए अपने भविष्य को स्वयं फाइनेंस कर रहे हैं—ये वे अदृश्य लेकिन महत्वपूर्ण सफलताएँ हैं जो हमारे शहरों को वास्तव में रहने योग्य बनाती हैं।

स्मार्ट सिटीज मिशन अब ज़मीन पर दिखाई देने लगा हैं। मई 2025 तक, इस मिशन के तहत शुरू की गई 8,000 से अधिक परियोजनाओं में से 94 प्रतिशत पूरी हो चुकी थीं, और शेष भी अंतिम चरण में थीं। यह दर्शाता है कि यदि नागरिक दर्शक नहीं, बल्कि सहभागी बनें, तो संघीय योजनाएँ भी समयबद्ध रूप से सफल हो सकती हैं। शहरी प्रयासों को एकजुट करने के लिए नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन एक साझा डिजिटल आधार तैयार कर रहा है—ऐसे साझा प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम डैशबोर्ड और मॉड्यूलर सेवाएँ जो शहरों और नागरिकों के बीच की दूरी को कम कर रही हैं।

अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ हुए समझौतों के अंतर्गत हजारों शहरी निकाय इस प्रणाली से जुड़ चुके हैं। लाइसेंस, जन शिकायतों और स्वच्छता जैसे कार्यों के लिए तैयार किए गए डिजिटल मॉड्यूल एक साझा टेक्नोलॉजी स्टैक पर चल रहे हैं।

बिजली के क्षेत्र में भी इसी तरह की परिवर्तनकारी कहानी देखने को मिलती है। सौभाग्य योजना के तहत मार्च 2022 तक लगभग 2.86 करोड़ घरों में बिजली पहुँचाई गई, जिससे करोड़ों लोगों के जीवन से अंधकार मिट गया।

लेकिन केवल बिजली पहुँचाना पहला कदम नहीं था। इसके बाद विश्वसनीयता की बारी थी, जो पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत सुनिश्चित की गई हैं।

अब तक 20 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर स्वीकृत किए जा चुके हैं, और 2.4 करोड़ से अधिक इंस्टॉल हो चुके हैं। इससे बिजली वितरण प्रणाली पारदर्शी से उत्तरदायी बनी है। स्मार्ट मीटर अब केवल तकनीकी उपकरण नहीं हैं, बल्कि सशक्त शासन का साधन बन चुके हैं।

रिन्यूएबल-एनर्जी उत्पादन में निर्णायक प्रगति हुई। अगस्त 2025 तक, भारत ने लगभग 1.92 लाख मेगावाट रिन्यूएबल-एनर्जी (बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को छोड़कर) स्थापित की — जिसमें लगभग 1.23 लाख मेगावाट सौर ऊर्जा और 52,000 मेगावाट से अधिक पवन ऊर्जा शामिल हैं। बात केवल आंकड़ों की नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर इसे सामान्य बनाने की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से रूफटॉप सोलर घर-घर तक पहुंचा, और स्व-उत्पादन को मुख्यधारा में लाने के लिए स्पष्ट समयसीमाएं तय की गईं। गांव की चौपालों से लेकर शहरों की छतों तक, सोलर पैनल अब एक परिचित छवि बन चुके हैं।

इन सभी क्षेत्रों से एक स्पष्ट पैटर्न उभरकर सामने आता है—आस्था, जो आंकड़ों से जुड़ी हो और महत्वाकांक्षा, जो समयसीमाओं से अनुशासित हो। प्रधानमंत्री मोदी खुद को देश का प्रधान सेवक कहते हैं—ये कोई सजावट या दिखावा नहीं, बल्कि उनके कार्यशैली का मूल मंत्र है। यह उनके साथ कार्य करने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि विकास में ढिलाई को स्वीकार न करें, लोगों का सम्मान करें, पारदर्शिता से कार्य करें, और समय का सम्मान करें। यहाँ नेतृत्व का अर्थ श्रेय लेना नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व की संस्कृति को जीना है।

जब मोदी जी राष्ट्र सेवा के अपने 76वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, मैं करोड़ों लोगों के साथ उन्हें शक्ति और सफलता की शुभकामनाएँ देता हूँ। विश्व मंच पर वे एक अनुभवी राजनेता हैं, जो भारत के जहाज को वैश्विक अशांत समुद्रों में कुशलता से संचालित कर रहे हैं—साझेदारियाँ बना रहे हैं, हमारे हितों को आगे बढ़ा रहे हैं, ग्लोबल साउथ की आवाज उठा रहे हैं, और जब हालात कठिन होते हैं तब भी अपने सिद्धांतों पर अडिग बने हुए हैं।

आगे आने वाले वर्षों में वे स्पष्ट दृष्टि के साथ देश को ‘विकसित भारत’ के बड़े लक्ष्य की ओर ले जाएं। जहाँ सभी के लिए सामान अवसर हो और हमारे देश का क्षितिज व्यापक हो। जो लोग उनके मार्गदर्शन में सीखने का सौभाग्य प्राप्त कर चुके हैं। उनके लिए लक्ष्य निश्चित है। हम सभी को इसी उद्देश्य, गति और विश्वास को समाज के आखिरी व्यक्ति तक बनाए रखना है।

(मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। वे ट्विटर पर @mlkhattar के नाम से एक्टिव हैं।)

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s electronics exports up 11.62% to $5.09 billion in May

Media Coverage

India’s electronics exports up 11.62% to $5.09 billion in May
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत में नई चेतना का संचार करने वाले नेता: नरेन्द्र दामोदरदास मोदी
June 14, 2026

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया।

किसी राष्ट्र की नियति उसके नेताओं की नियति से गहराई से जुड़ी होती है। मजबूत और निर्णायक नेतृत्व में राष्ट्र आगे बढ़ते हैं और समृद्ध होते हैं, जबकि कमजोर, अनिर्णायक और भ्रष्ट नेतृत्व के दौर में उनका क्षरण होने लगता है। जनता किसी राष्ट्र की जीवन-ऊर्जा होती है, लेकिन नेता वही होते हैं जो इस सामूहिक ऊर्जा को सही और उत्पादक दिशा देते हैं। अपने संस्थापकों और नेताओं के बिना किसी राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। जब हम संयुक्त राज्य अमेरिका के बारे में सोचते हैं, तो थॉमस जेफरसन, जॉर्ज वॉशिंगटन, अब्राहम लिंकन, जॉन एफ. केनेडी और एफ.डी. रूजवेल्ट जैसे प्रमुख नेताओं के नाम हमारे मन में आते हैं। इसी तरह, भारतीय राष्ट्र का निर्माण भी महात्मा गांधी, बी.आर. आंबेडकर और वीर सावरकर जैसे महान संस्थापक पुरोधाओं के विजन पर हुआ है।

मजबूत नेतृत्व जनता के मनोबल को ऊंचा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि दूरदर्शी नेता राष्ट्र को समृद्धि और गौरव के मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं। नेतृत्व का महत्व किसी राष्ट्रीय संकट के समय सबसे अधिक होता है, ठीक वैसे ही जैसे भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार ने प्रलय के दौरान मनु महाराज के विशाल जहाज का मार्गदर्शन कर उसे सुरक्षित बचाया था। संकट की घड़ी में नेता ही राष्ट्र का मार्गदर्शन करते हैं और उसे कठिनाइयों से बाहर निकालते हैं। श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने भी भारतीय राजनीति में ऐसे ही एक संकटपूर्ण दौर के दौरान केंद्र में अपनी प्रमुख भूमिका स्थापित की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ऐसे समय राष्ट्रीय परिदृश्य पर उभरे, जब भारतीय राजनीति गहरे संकट के दौर से गुजर रही थी और देश पर एक नाममात्र के प्रधानमंत्री को थोपे जाने की स्थिति बन गई थी। सरकार पॉलिसी पैरालिसिस से जूझ रही थी। भ्रष्टाचार राष्ट्रीय राजनीतिक व्यवस्था में गहराई तक जड़ें जमा चुका था और कोलगेट, 2जी स्पेक्ट्रम तथा कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे घोटाले बार-बार सामने आने वाली घटनाएं बन गए थे। मीडिया, कारोबारी जगत और राजनेताओं के बीच एक अपवित्र गठजोड़ बन गया था, जो बिना किसी भय के सार्वजनिक धन की लूट में लगा हुआ था। उद्यमी, उद्योग जगत और अकादमिक क्षेत्र निराशा के माहौल में डूब चुके थे तथा भारतीय राज्य व्यवस्था पर उनका भरोसा कमजोर पड़ने लगा था। आम लोगों के मन में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को लेकर गर्व की भावना क्षीण होती जा रही थी।

उस निर्णायक मोड़ पर श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी एक स्पष्ट, सशक्त और दूरदर्शी विजन के साथ राष्ट्रीय मंच पर उभरे। उन्होंने युवाओं, महिलाओं और अनुभवी पीढ़ी सहित समाज के विभिन्न वर्गों को नई प्रेरणा दी। पीएम नरेन्द्र मोदी ने नेतृत्व और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति लोगों के मन में आशा, विश्वास और भरोसे को फिर से स्थापित किया। उन्होंने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को नई ऊर्जा दी, उद्यमिता और उद्योग जगत को प्रोत्साहित किया तथा नौकरशाही में भी नई कार्यसंस्कृति और उत्साह का संचार किया। स्वयं साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण पीएम मोदी को भारतीय समाज की गहरी समझ थी और आरएसएस प्रचारक के रूप में उन्होंने भारतीय संस्कृति तथा उसकी मूल चेतना को भी निकटता से समझा था।

भारत के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल, उनका प्रशासनिक और चुनावी रिकॉर्ड बेदाग रहा। पीएम मोदी अपने साथ "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" का मंत्र लेकर आए।

पीएम मोदी ने सरकारी सेवाओं के तेज डिजिटलीकरण के माध्यम से फाइनेंस में मौजूद जड़ता को कम किया और सरकार को आम नागरिकों की उंगलियों तक पहुंचा दिया। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने गजेटेड अधिकारियों से दस्तावेजों के सत्यापन की अनिवार्यता को समाप्त कर आम नागरिकों के लिए सेल्फ-अटेस्टेशन की व्यवस्था लागू की। यह आम नागरिकों की प्रगति में बाधा बनने वाली नौकरशाही अड़चनों के प्रति उनकी सूक्ष्म समझ को दर्शाता है। उनके द्वारा शुरू किए गए सुधारात्मक उपायों के कारण अंतरराष्ट्रीय बिजनेस इंडिकेटर्स में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ। पीएम मोदी ने एक दक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह सरकार के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। अब नियम और नीतियां बंद एसी कमरों में नहीं, बल्कि लोगों के बीच बनती हैं।

पीएम मोदी ने सत्ता संभालने के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए लगातार कार्य किया है। पीएम मोदी ने स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स (PLI) जैसी पहलों की शुरुआत की। सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए पीएम मोदी ने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और शिपिंग पोर्ट्स को मंजूरी दी, साथ ही ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और स्टेशनों के निर्माण को भी गति दी। पीएम मोदी ने नए IIT और IIM स्थापित कर भारत के हायर एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया। पीएम मोदी ने "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास" के मंत्र के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों का भारतीय सरकार के प्रति विश्वास फिर से मजबूत किया। उनकी संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पारंपरिक चूल्हों के धुएं से माताओं और बहनों को होने वाली परेशानी को समझते हुए उन्होंने पीएम उज्ज्वला योजना की शुरुआत की।

पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से स्वच्छता और सैनिटेशन को जनचर्चा का हिस्सा बनाया। इस योजना के तहत बनाए गए शौचालयों के जरिए पीएम मोदी ने हमारी माताओं और बहनों को गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने का प्रयास किया। पीएम नरेन्द्र मोदी के भागीरथ प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत की महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया।

राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत पीएम मोदी ने देश में एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का नेतृत्व किया। औपनिवेशिक विरासत के अवशेष रहे इंडियन पीनल कोड (IPC) और सीआरपीसी (Code of Criminal Procedure) को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता का मार्ग प्रशस्त किया गया। पीएम मोदी निरंतर हमारे पवित्र तीर्थस्थलों के पुनर्निर्माण और विकास में जुटे हुए हैं। उनके प्रयासों से अयोध्या और काशी जैसे हमारे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक केंद्रों को नई पहचान और भव्य स्वरूप मिला। पीएम मोदी ने ब्रांड एंबेसडर की तरह आयुर्वेद के स्वदेशी ज्ञान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया और आयुर्वेद को प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के लिए नीतियां तैयार कीं।

पीएम मोदी अपने उल्लेखनीय कार्यों, अटूट समर्पण और विकसित भारत के प्रति प्रतिबद्धता के माध्यम से हर भारतीय को 2047 तक विकसित भारत के अपने विजन में सहभागी बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

फिर भी, किसी नेता की वास्तविक पहचान केवल उसकी बनाई गई नीतियों या स्थापित संस्थाओं से नहीं होती, बल्कि उससे होती है कि वह अपने लोगों में कितना आत्मविश्वास पैदा करता है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया है—शासन-व्यवस्था में विश्वास, भारत की सभ्यतागत विरासत में विश्वास, सामान्य नागरिकों की क्षमताओं में विश्वास और राष्ट्र के भविष्य में विश्वास।

अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और गरीबों के सशक्तिकरण से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई देने तक, पीएम मोदी के नेतृत्व ने समकालीन भारत पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने गवर्नेंस को एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का स्वरूप दिया है, जिससे लाखों लोग देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए प्रेरित हुए हैं।

जैसे-जैसे भारत 2047 में अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है, विकसित भारत का विजन अब कोई दूर का सपना नहीं रह गया है; यह एक सामूहिक राष्ट्रीय मिशन बन चुका है। इतिहास उन नेताओं को याद रखता है जो तब आगे आते हैं जब उनके राष्ट्र को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है, ऐसे नेता जो केवल अपने समय का नेतृत्व ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की नियति को भी आकार देते हैं।

नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का साधारण पृष्ठभूमि से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक का सफर, अंततः उस व्यक्ति की कहानी है जिसने भारत का खुद पर, अपनी क्षमताओं पर और अपने भविष्य पर विश्वास फिर से जगाया। एक अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी और आकांक्षी भारत की नींव रखी जा चुकी है। अब राष्ट्र के सामने इस गति को आगे बढ़ाने और विकसित भारत के सपने को साकार करने का दायित्व है।

जब भारत और भी बड़ी संभावनाओं की दहलीज पर खड़ा है, तब रॉबर्ट फ्रॉस्ट के शब्द नए अर्थों और नई प्रासंगिकता के साथ गूंजते हैं,

"ये वन मनोहर हैं, गहरे हैं और रहस्यमय भी,

लेकिन मुझे अपने वादे निभाने हैं,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है,

और विश्राम से पहले मुझे अभी मीलों चलना है।"

भारत के लिए ये वादे उसके लोगों, उसकी सभ्यता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हैं। पिछले बारह वर्षों की उपलब्धियां उस यात्रा की मजबूत नींव हैं। यह यात्रा अभी जारी है और आगे का मार्ग अनिश्चितताओं से नहीं, बल्कि अवसरों, उद्देश्य और विकसित भारत के संकल्प से परिपूर्ण है।

(रेखा गुप्ता दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं।)