भारत ने सेंचुरी बनाई है। देश में यूनिकॉर्न की संख्या 100 पहुंच गई है: पीएम मोदी
स्टार्ट-अप्स नये भारत की भावना को रिफ्लेक्ट कर रहे हैं: पीएम मोदी
भारत में ऐसे कई मेंटर्स हैं जिन्होंने स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए खुद को समर्पित कर दिया है: पीएम मोदी
हमारे देश की विविधता एक राष्ट्र के रूप में हमें अधिक सशक्त करती है और एकजुट रखती है: पीएम मोदी
पवित्र तीर्थ स्थलों पर गंदगी ठीक नहीं, स्वच्छता के संकल्प का पालन जरूरी है: पीएम मोदी
सभी से 'योग दिवस' को बड़े उत्साह के साथ मनाने का आग्रह करता हूं: पीएम मोदी
स्वयं से ऊपर उठकर समाज की सेवा करने का मंत्र हमारे संस्कारों का हिस्सा है: पीएम मोदी
हम कर्तव्य पथ पर चलकर ही समाज और देश को सशक्त बना सकते हैं: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज फिर एक बार ‘मन की बात’ के माध्यम से आप सभी कोटि-कोटि मेरे परिवारजनों से मिलने का अवसर मिला है | ‘मन की बात’ में आप सबका स्वागत है | कुछ दिन पहले देश ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जो, हम सभी को प्रेरणा देती है | भारत के सामर्थ्य के प्रति एक नया विश्वास जगाती है | आप लोग क्रिकेट के मैदान पर Team India के किसी batsman की century सुन कर खुश होते होंगे, लेकिन, भारत ने एक और मैदान में century लगाई है और वो बहुत विशेष है | इस महीने 5 तारीख को देश में Unicorn की संख्या 100 के आँकड़े तक पहुँच गई है और आपको तो पता ही है, एक Unicorn, यानी, कम-से-कम साढ़े सात हज़ार करोड़ रूपए का Start-Up | इन Unicorns का कुल valuation 330 billion dollar, यानी, 25 लाख करोड़ रुपयों से भी ज्यादा है | निश्चित रूप से, ये बात, हर भारतीय के लिए गर्व करने वाली बात है | आपको यह जानकर भी हैरानी होगी, कि, हमारे कुल Unicorn में से 44 forty four, पिछले साल बने थे | इतना ही नहीं, इस वर्ष के 3-4 महीने में ही 14 और नए Unicorn बन गए | इसका मतलब यह हुआ कि global pandemic के इस दौर में भी हमारे Start-Ups, wealth और value, create करते रहे हैं | Indian Unicorns का Average Annual Growth Rate, USA, UK और अन्य कई देशों से भी ज्यादा है | Analysts का तो ये भी कहना है कि आने वाले वर्षों में इस संख्या में तेज उछाल देखने को मिलेगी | एक अच्छी बात ये भी है, कि, हमारे Unicorns diversifying हैं | ये e-commerce, Fin-Tech, Ed-Tech, Bio-Tech जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं | एक और बात जिसे मैं ज्यादा अहम मानता हूँ वो ये है कि Start-Ups की दुनिया New India की spirit को reflect कर रही है | आज, भारत का Start-Up ecosystem सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है, छोटे-छोटे शहरों और कस्बों से भी entrepreneurs सामने आ रहे हैं | इससे पता चलता है कि भारत में जिसके पास innovative idea है, वो, wealth create कर सकता है |

साथियो, देश की इस सफलता के पीछे, देश की युवा-शक्ति, देश के talent और सरकार, सभी मिलकर के प्रयास कर रहे हैं, हर किसी का योगदान है, लेकिन, इसमें एक और बात महत्वपूर्ण है, वो है, Start-Up World में, right mentoring, यानी, सही मार्गदर्शन | एक अच्छा mentor Start-Up को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है | वह founders को right decision के लिए हर तरह से guide कर सकता है | मुझे, इस बात का गर्व है कि भारत में ऐसे बहुत से mentors हैं जिन्होंने Start-Ups को आगे बढ़ाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया है |
श्रीधर वेम्बू जी को हाल ही में पद्म सम्मान मिला है | वह खुद एक सफल entrepreneur हैं, लेकिन अब उन्होंने, दूसरे entrepreneur को groom करने का भी बीड़ा उठाया है | श्रीधर जी ने अपना काम ग्रामीण इलाके से शुरू किया है | वे, ग्रामीण युवाओं को गाँव में ही रहकर इस क्षेत्र में कुछ करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं | हमारे यहाँ मदन पडाकी जैसे लोग भी हैं जिन्होंने rural entrepreneurs को बढ़ावा देने के लिए 2014 में One-Bridge नाम का platform बनाया था | आज, One-Bridge दक्षिण और पूर्वी-भारत के 75 से अधिक जिलों में मौजूद है | इससे जुड़े 9000 से अधिक rural entrepreneurs ग्रामीण उपभोक्ताओं को अपनी सेवाएँ उपलब्ध करा रहे हैं | मीरा शेनॉय जी भी ऐसी ही एक मिसाल है | वो Rural, Tribal और disabled youth के लिए Market Linked Skills Training के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं | मैंने यहाँ तो कुछ ही नाम लिए हैं, लेकिन, आज हमारे बीच mentors की कमी नहीं है | हमारे लिए यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि Start-Up के लिए आज देश में एक पूरा support system तैयार हो रहा है | मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में हमें भारत के Start-Up World के प्रगति की नई उड़ान देखने को मिलेगी |

साथियो, कुछ दिनों पहले मुझे एक ऐसी interesting और attractive चीज़ मिली, जिसमें देशवासियों की creativity और उनके artistic talent का रंग भरा है | एक उपहार है, जिसे, तमिलनाडु के Thanjavur के एक Self-Help Group ने मुझे भेजा है | इस उपहार में भारतीयता की सुगंध है और मातृ-शक्ति के आशीर्वाद - मुझ पर उनके स्नेह की भी झलक है | यह एक special Thanjavur Doll है, जिसे GI Tag भी मिला हुआ है | मैं Thanjavur Self-Help Group को विशेष धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने मुझे स्थानीय संस्कृति में रचे-बसे इस उपहार को भेजा | वैसे साथियो, ये Thanjavur Doll जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही खूबसूरती से, ये, महिला सशक्तिकरण की नई गाथा भी लिख रही है | Thanjavur में महिलाओं के Self-Help Groups के store और kiosk भी खुल रहे हैं | इसकी वजह से कितने ही गरीब परिवारों की जिंदगी बदल गई है | ऐसे kiosk और stores की सहायता से महिलाएँ अब अपने product, ग्राहकों को सीधे बेच पा रही हैं | इस पहल को ‘थारगईगल कइविनई पोरुत्तकल विरप्पनई अंगाड़ी’ नाम दिया गया है | ख़ास बात ये है कि इस पहल से 22 Self-Help Group जुड़े हुए हैं | आपको ये भी जानकार अच्छा लगेगा कि महिला Self-Help Groups, महिला स्वयं सहायता समूह के ये store Thanjavur में बहुत ही prime location पर खुले हैं | इनकी देखरेख की पूरी जिम्मेदारी भी महिलाएँ ही उठा रही हैं | ये महिला Self Help Group Thanjaur Doll और Bronze Lamp जैसे GI Product के अलावा खिलौने, mat और Artificial Jewellery भी बनाते हैं | ऐसे स्टोर की वजह से, GI Product के साथ-साथ Handicraft के Products की बिक्री में काफी तेजी देखने को मिली है | इस मुहिम की वजह से न केवल कारीगरों को बढ़ावा मिला है, बल्कि, महिलाओं की आमदनी बढ़ने से उनका सशक्तिकरण भी हो रहा है | मेरा ‘मन की बात’ के श्रोताओं से भी एक आग्रह है | आप, अपने क्षेत्र में ये पता लगायें, कि, कौन से महिला Self Help Group काम कर रहे हैं | उनके Products के बारे में भी आप जानकारी जुटाएँ और ज्यादा-से-ज्यादा इन उत्पादों को उपयोग में लाएँ | ऐसा करके, आप, Self Help Group की आय बढ़ाने में तो मदद करेंगे ही, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को भी गति देंगे |

साथियो, हमारे देश में कई सारी भाषा, लिपियाँ और बोलियों का समृद्ध खजाना है | अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पहनावा, खानपान और संस्कृति, ये हमारी पहचान है | ये Diversity, ये विविधता, एक राष्ट्र के रूप में, हमें, अधिक सशक्त करती है, और एकजुट रखती है | इसी से जुड़ा एक बेहद प्रेरक उदाहरण है एक बेटी कल्पना का, जिसे, मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहता हूँ | उनका नाम कल्पना है, लेकिन उनका प्रयास, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना से भरा हुआ है | दरअसल, कल्पना ने हाल ही में कर्नाटका में अपनी 10वीं की परीक्षा पास की है, लेकिन, उनकी सफलता की बेहद खास बात ये है कि, कल्पना को कुछ समय पहले तक कन्नड़ा भाषा ही नहीं आती थी | उन्होंने, ना सिर्फ तीन महीने में कन्नड़ा भाषा सीखी, बल्कि, 92वे नम्बर भी लाकर के दिखाए | आपको यह जानकर हैरानी हो रही होगी, लेकिन ये सच है | उनके बारे में और भी कई बातें ऐसी हैं जो आपको हैरान भी करेगी और प्रेरणा भी देगी | कल्पना, मूल रूप से उत्तराखंड के जोशीमठ की रहने वाली हैं | वे पहले TB से पीड़ित रही थीं और जब वे तीसरी कक्षा में थीं तभी उनकी आँखों की रोशनी भी चली गई थी, लेकिन, कहते हैं न, ‘जहाँ चाह-वहाँ राह’ | कल्पना बाद में मैसूरू की रहने वाली प्रोफेसर तारामूर्ति के संपर्क में आई, जिन्होंने न सिर्फ उन्हें प्रोत्साहित किया, बल्कि हर तरह से उनकी मदद भी की | आज, वो अपनी मेहनत से हम सबके लिए एक उदाहरण बन गई हैं | मैं, कल्पना को उनके हौंसले के लिए बधाई देता हूँ | इसी तरह, हमारे देश में कई ऐसे लोग भी हैं जो देश की भाषाई विविधता को मजबूत करने का काम कर रहे हैं | ऐसे ही एक साथी हैं, पश्चिम बंगाल में पुरुलिया के श्रीपति टूडू जी | टूडू जी, पुरुलिया की सिद्धो-कानो-बिरसा यूनिवर्सिटी में संथाली भाषा के प्रोफेसर हैं | उन्होंने, संथाली समाज के लिए, उनकी अपनी ‘ओल चिकी’ लिपि में, देश के संविधान की कॉपी तैयार की है | श्रीपति टूडू जी कहते हैं कि हमारा संविधान हमारे देश के हर एक नागरिक को उनके अधिकार और कर्तव्य का बोध कराता है | इसलिए, प्रत्येक नागरिक को इससे परिचित होना जरुरी है | इसलिए, उन्होंने संथाली समाज के लिए उनकी अपनी लिपि में संविधान की कॉपी तैयार करके भेंट-सौगात के रूप में दी है | मैं, श्रीपति जी की इस सोच और उनके प्रयासों की सराहना करता हूँ | ये ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना का जीवन्त उदाहरण है | इस भावना को आगे बढ़ाने वाले ऐसे बहुत से प्रयासों के बारे में, आपको, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की web site पर भी जानकारी मिलेगी | यहाँ आपको खान-पान, कला, संस्कृति, पर्यटन समेत ऐसे कई विषयों पर activities के बारे में पता चलेगा | आप, इन activities में हिस्सा भी ले सकते हैं, इससे आपको, अपने देश के बारे में जानकारी भी मिलेगी, और आप, देश की विविधता को महसूस भी करेंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो, इस समय हमारे देश में उत्तराखण्ड के ‘चार-धाम’ की पवित्र यात्रा चल रही है | ‘चार-धाम’ और खासकर केदारनाथ में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु वहां पहुँच रहे हैं | लोग, अपनी ‘चार-धाम यात्रा’ के सुखद अनुभव share कर रहे हैं, लेकिन, मैंने, ये भी देखा कि, श्रद्धालु केदारनाथ में कुछ यात्रियों द्वारा फैलाई जा रही गन्दगी की वजह से बहुत दुखी भी हैं | Social media पर भी कई लोगों ने अपनी बात रखी है | हम, पवित्र यात्रा में जायें और वहां गन्दगी का ढ़ेर हो, ये ठीक नहीं | लेकिन साथियो, इन शिकायतों के बीच कई अच्छी तस्वीरें भी देखने को मिल रही हैं | जहां श्रद्धा है, वहाँ, सृजन और सकारात्मकता भी है | कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो बाबा केदार के धाम में दर्शन-पूजन के साथ-साथ स्वच्छता की साधना भी कर रहे हैं | कोई अपने ठहरने के स्थान के पास सफाई कर रहा है, तो कोई यात्रा मार्ग से कूड़ा-कचरा साफ कर रहा है | स्वच्छ भारत की अभियान टीम के साथ मिलकर कई संस्थाएँ और स्वयंसेवी संगठन भी वहां काम कर रहे हैं | साथियो, हमारे यहाँ जैसे तीर्थ-यात्रा का महत्व होता है, वैसे ही, तीर्थ-सेवा का भी महत्व बताया गया है, और मैं तो ये भी कहूँगा, तीर्थ-सेवा के बिना, तीर्थ-यात्रा भी अधूरी है | देवभूमि उत्तराखंड में से कितने ही लोग हैं जो स्वच्छता और सेवा की साधना में लगे हुए हैं I रूद्र प्रयाग के रहने वाले श्रीमान मनोज बैंजवाल जी से भी आपको बहुत प्रेरणा मिलेगी I मनोज जी ने पिछले पच्चीस वर्षों से पर्यावरण की देख-रेख का बीड़ा उठा रखा है I वो, स्वच्छता की मुहिम चलाने के साथ ही, पवित्र स्थलों को, प्लास्टिक मुक्त करने में भी जुटे रहते हैं I वहीँ गुप्तकाशी में रहने वाले - सुरेंद्र बगवाड़ी जी ने भी स्वच्छता को अपना जीवन मंत्र बना लिया है I वो, गुप्तकाशी में नियमित रूप से सफाई कार्यक्रम चलाते हैं, और, मुझे पता चला है कि इस अभियान का नाम भी उन्होंने ‘मन की बात’ रख लिया है I ऐसे ही, देवर गाँव की चम्पादेवी पिछले तीन साल से अपने गाँव की महिलाओं को कूड़ा प्रबंधन, यानी – waste management सिखा रही हैं I चंपा जी ने सैकड़ों पेड़ भी लगाये हैं और उन्होंने अपने परिश्रम से एक हरा भरा वन तैयार कर दिया है I साथियो, ऐसे ही लोगों के प्रयासों से देव भूमि और तीर्थों की वो दैवीय अनुभूति बनी हुई हैं, जिसे अनुभव करने के लिए हम वहाँ जाते हैं, इस देवत्व और आध्यात्मिकता को बनाए रखने की जिम्मेदारी हमारी भी तो है I अभी, हमारे देश में ‘चारधाम यात्रा’ के साथ-साथ आने वाले समय में ‘अमरनाथ यात्रा’, ‘पंढरपुर यात्रा’ और ‘जगन्नाथ यात्रा’ जैसे कई यात्राएं होंगी | सावन मास में तो शायद हर गांव में कोई-न-कोई मेला लगता है |

साथियो, हम जहाँ कही भी जाएँ, इन तीर्थ क्षेत्रों की गरिमा बनी रहे I सुचिता, साफ़-सफाई, एक पवित्र वातावरण हमें इसे कभी नहीं भूलना है, उसे ज़रूर बनाए रखें और इसीलिए ज़रूरी है, कि हम स्वच्छता के संकल्प को याद रखें | कुछ दिन बाद ही, 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाता है | पर्यावरण को लेकर हमें अपने आस-पास के सकारात्मक अभियान चलाने चाहिए और ये निरंतर करने वाला काम है | आप, इस बार सब को साथ जोड़ कर- स्वच्छता और वृक्षारोपण के लिए कुछ प्रयास ज़रूर करें | आप, खुद भी पेड़ लगाइये और दूसरों को भी प्रेरित करिए I
मेरे प्यारे देशवासियो, अगले महीने 21 जून को, हम 8वाँ ‘अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने वाले हैं | इस बार ‘योग दिवस’ की theme है – Yoga for humanity मैं आप सभी से ‘योग दिवस’ को बहुत ही उत्साह के साथ मनाने का आग्रह करूँगाI I हाँ! कोरोना से जुड़ी सावधानियां भी बरतें, वैसे, अब तो पूरी दुनिया में कोरोना को लेकर हालात पहले से कुछ बेहतर लग रहे हैं, अधिक-से-अधिक vaccination coverage की वजह से अब लोग पहले से कहीं ज्यादा बाहर भी निकल रहे हैं, इसलिए, पूरी दुनिया में ‘योग दिवस’ को लेकर काफी तैयारियाँ भी देखने को मिल रही हैं I कोरोना महामारी ने हम सभी को यह एहसास भी कराया है, कि हमारे जीवन में, स्वास्थ्य का, कितना अधिक महत्व है, और योग, इसमें कितना बड़ा माध्यम है, लोग यह महसूस कर रहे हैं कि योग से physical, Spiritual और intellectual well being को भी कितना बढ़ावा मिलता है | विश्व के top Business person से लेकर film और sports personalities तक, students से लेकर सामान्य मानवी तक, सभी, योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं I मुझे पूरा विश्वास है, कि दुनिया भर में योग की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आप सभी को बहुत अच्छा लगता होगा | साथियो, इस बार देश-विदेश में ‘योग दिवस’ पर होने वाले कुछ बेहद innovative उदाहरणों के बारे में मुझे जानकारी मिली है | इन्हीं में से एक है guardian Ring - एक बड़ा ही unique programme होगा | इसमें Movement of Sun को celebrate किया जाएगा, यानी, सूरज जैसे-जैसे यात्रा करेगा, धरती के अलग-अलग हिस्सों से, हम, योग के जरिये उसका स्वागत करेंगे | अलग-अलग देशों में Indian missions वहाँ के local time के मुताबिक सूर्योदय के समय योग कार्यक्रम आयोजित करेंगे | एक देश के बाद दूसरे देश से कार्यक्रम शुरू होगा | पूरब से पश्चिम तक निरंतर यात्रा चलती रहेगी, फिर ऐसे ही, ये, आगे बढ़ता रहेगा | इन कार्यक्रमों की streaming भी इसी तरह एक के बाद एक जुड़ती जायेगी, यानी, ये, एक तरह का Relay Yoga Streaming Event होगा | आप भी इसे जरूर देखिएगा |

साथियो, हमारे देश में इस बार ‘अमृत महोत्सव’ को ध्यान में रखते हुए देश के 75 प्रमुख स्थानों पर भी ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का आयोजन होगा | इस अवसर पर कई संगठन और देशवासी ने अपने-अपने स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र की खास जगहों पर कुछ न कुछ Innovative करने की तैयारी कर रहे हैं | मैं, आपसे भी ये आग्रह करूँगा, इस बार योग दिवस मनाने के लिए, आप, अपने शहर, कस्बे या गाँव के किसी ऐसी जगह चुनें, जो सबसे खास हो | ये जगह कोई प्राचीन मंदिर और पर्यटन केंद्र हो सकता है, या फिर, किसी प्रसिद्ध नदी, झील या तालाब का किनारा भी हो सकता है | इससे योग के साथ-साथ आपके क्षेत्र की पहचान भी बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा | इस समय ‘योग दिवस’ को लेकर 100 Day Countdown भी जारी है, या यूँ कहें कि निजी और सामाजिक प्रयासों से जुड़े कार्यक्रम, तीन महीने पहले ही शुरू हो चुके हैं | जैसा कि दिल्ली में 100वें दिन और 75वें दिन के countdown Programmes हुए हैं | वहीं, असम के शिवसागर में 50वें और हैदराबाद में 25वें Countdown Event आयोजित किये गए | मैं चाहूँगा कि आप भी अपने यहाँ अभी से ‘योग दिवस’ की तैयारियाँ शुरू कर दीजिये | ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलिए, हर किसी को ‘योग दिवस’ के कार्यक्रम में जुड़ने के लिए आग्रह कीजिये, प्रेरित कीजिये | मुझे पूरा भरोसा है कि आप सभी ‘योग दिवस’ में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लेंगे, साथ ही योग को अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएंगे |

साथियो, कुछ दिन पहले मैं जापान गया था | अपने कई कार्यक्रमों के बीच मुझे कुछ शानदार शख्सियतों से मिलने का मौका मिला | मैं, ‘मन की बात’ में, आपसे, उनके बारे में चर्चा करना चाहता हूँ | वे लोग हैं तो जापान के, लेकिन भारत के प्रति इनमें गज़ब का लगाव और प्रेम है | इनमें से एक हैं हिरोशि कोइके जी, जो एक जाने-माने Art Director हैं | आपको ये जानकार बहुत ही ख़ुशी होगी कि इन्होंने Mahabharat Project को Direct किया है | इस Project की शुरुआत Cambodia में हुई थी और पिछले 9 सालों से ये निरंतर जारी है ! हिरोशि कोइके जी हर काम बहुत ही अलग तरीके से करते हैं | वे, हर साल, एशिया के किसी देश की यात्रा करते हैं और वहां Local Artist और Musicians के साथ महाभारत के कुछ हिस्सों को Produce करते हैं | इस Project के माध्यम से उन्होंने India, Cambodia और Indonesia सहित नौ देशों में Production किये हैं और Stage Performance भी दी है | हिरोशि कोइके जी उन कलाकारों को एक साथ लाते हैं, जिनका Classical और Traditional Asian Performing Art में Diverse Background रहा है | इस वजह से उनके काम में विविध रंग देखने को मिलते हैं | Indonesia, Thailand, Malaysia और Japan के Performers जावा नृत्य, बाली नृत्य, थाई नृत्य के जरिए इसे और आकर्षक बना देते हैं | खास बात ये है कि इसमें प्रत्येक performer अपनी ही मातृ-भाषा में बोलता है और Choreography बहुत ही खूबसूरती से इस विविधता को प्रदर्शित करती है और Music की Diversity इस Production को और जीवंत बना देती है | उनका उद्देश्य इस बात को सामने लाना है कि हमारे समाज में Diversity और Co-existence का क्या महत्व है और शांति का रूप वास्तव में कैसा होना चाहिए | इनके अलावा, मैं, जापान में जिन अन्य दो लोगों से मिला, वे हैं, आत्सुशि मात्सुओ जी और केन्जी योशी जी | ये दोनों ही TEM Production Company से जुड़े हैं | इस company का संबंध रामायण की उस Japanese Animation Film से है, जो 1993 में Release हुई थी | यह Project जापान के बहुत ही मशहूर Film Director युगो साको जी से जुड़ा हुआ था | करीब 40 साल पहले, 1983 में, उन्हें, पहली बार रामायण के बारे में पता चला था | ‘रामायण’ उनके हृदय को छू गयी, जिसके बाद उन्होनें इस पर गहराई से research शुरू कर दी | इतना ही नहीं, उन्होंने, जापानी भाषा में रामायण के 10 versions पढ़ डाले, और वे इतने पर ही नहीं रुके, वे इसे, animation पर भी उतारना चाहते थे | इसमें Indian Animators ने भी उनकी काफी मदद की, उन्हें फिल्म में दिखाए गए भारतीय रीति-रिवाजों और परम्पराओं के बारे में guide किया गया | उन्हें बताया गया कि भारत में लोग धोती कैसे पहनते हैं, साड़ी कैसे पहनते हैं, बाल कैसे बनाते हैं | बच्चे परिवार के अंदर एक-दूसरे का मान-सम्मान कैसे करते हैं, आशीर्वाद की परंपरा क्या होती है | प्रात: उठ करके अपने घर के जो senior हैं उनको प्रणाम करना, उनके आशीर्वाद लेना - ये सारी बातें अब 30 सालों के बाद ये animation film फिर से 4K में re-master की जा रही है | इस project के जल्द ही पूरा होने की संभावना है | हमसे हज़ारों किलोमीटर दूर जापान में बैठे लोग जो न हमारी भाषा जानते हैं, जो न हमारी परम्पराओं के बारे में उतना जानते हैं, उनका हमारी संस्कृति के लिए समर्पण, ये श्रद्धा, ये आदर, बहुत ही प्रशंसनीय है - कौन हिन्दुस्तानी इस पर गर्व नही करेगा?

मेरे प्यारे देशवासियो, स्व से ऊपर उठकर समाज की सेवा का मंत्र, self for society का मंत्र, हमारे संस्कारों का हिस्सा है | हमारे देश में अनगिनत लोग इस मंत्र को अपना जीवन ध्येय बनाये हुए हैं | मुझे, आन्ध्र प्रदेश में, मर्कापुरम में रहने वाले एक साथी, राम भूपाल रेड्डी जी के बारे में जानकारी मिली | आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि रामभूपाल रेड्डी जी ने retirement के बाद मिलने वाली अपनी सारी कमाई बेटियों की शिक्षा के लिए दान कर दी है | उन्होंने, करीब – करीब 100 बेटियों के लिए ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ के तहत खाते खुलवाए, और उसमें अपने 25 लाख से ज्यादा रूपए जमा करवा दिये | ऐसे ही सेवा का एक और उदाहरण यू.पी. में आगरा के कचौरा गाँव का | काफी साल से इस गाँव में मीठे पानी की किल्लत थी | इस बीच, गाँव के एक किसान कुंवर सिंह को गाँव से 6-7 किलोमीटर दूर अपने खेत में मीठा पानी मिल गया | ये उनके लिए बहुत ख़ुशी की बात थी | उन्होंने सोचा क्यों न इस पानी से बाकी सभी गाँववासियों की भी सेवा की जाए | लेकिन, खेत से गाँव तक पानी ले जाने के लिए 30-32 लाख रूपए चाहिए थे | कुछ समय बाद कुंवर सिंह के छोटे भाई श्याम सिंह सेना से retire होकर गाँव आए, तो उन्हें ये बात पता चली | उन्होंने retirement पर मिली अपनी सारी धनराशि इस काम के लिए सौंप दी और खेत से गाँव तक pipeline बिछाकर गाँव वालों के लिए मीठा पानी पहुंचाया | अगर लगन हो, अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीरता हो, तो एक व्यक्ति भी, कैसे पूरे समाज का भविष्य बदल सकता है, ये प्रयास इसकी बड़ी प्रेरणा है | हम कर्त्तव्य पथ पर चलते हुए ही समाज को सशक्त कर सकते हैं, देश को सशक्त कर सकते हैं | आजादी के इस ‘अमृत महोत्सव’ में यही हमारा संकल्प होना चाहिए और यही हमारी साधना भी होनी चाहिए और जिसका एक ही मार्ग है - कर्तव्य, कर्तव्य और कर्तव्य |

मेरे प्यारे देशवासियों, आज ‘मन की बात’ में हमने समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की | आप सब, अलग अलग विषयों से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव मुझे भेजते हैं, और उन्हीं के आधार पर हमारी चर्चा आगे बढती है | ‘मन की बात’ के अगले संस्करण के लिए अपने सुझाव भेजना भी मत भूलिएगा | इस समय आज़ादी के अमृत महोत्सव से जुड़े जो कार्यक्रम चल रहे हैं, जिन आयोजन में आप शामिल हो रहे हैं, उनके बारे में भी मुझे जरूर बताइए | Namo app और MyGov पर मुझे आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा | अगली बार हम एक बार फिर मिलेंगे, फिर से देशवासियों से जुड़े ऐसे ही विषयों पर बातें करेंगे | आप, अपना ख्याल रखिए और अपने आसपास सभी जीव-जंतुओं का भी ख्याल रखिए | गर्मियों के इस मौसम में, आप, पशु-पक्षियों के लिए खाना-पानी देने का अपना मानवीय दायित्व भी निभाते रहें - ये जरुर याद रखिएगा, तब तक के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

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प्रधानमंत्री मोदी का 'संबाद' के साथ इंटरव्यू
May 22, 2024

ଲୋକସଭା ସହ ଓଡ଼ିଶାରେ ବିଧାନସଭା ନିର୍ବାଚନ। ନିର୍ବାଚନର ଏହି ଅବହାୱା ଭିତରେ ଘନ ଘନ ଓଡ଼ିଶା ଗସ୍ତରେ ଆସି ପ୍ରଚାରର ମଙ୍ଗ ଧରିଛନ୍ତି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ। ବିଭିନ୍ନ ନିର୍ବାଚନୀ ସଭାରେ ଯୋଗଦେଇ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ବିରୋଧରେ ସ୍ବରକୁ ଶାଣିତ କରିବା ସହ ବିଜେପି ସରକାର ଗଠନ କରିବ ବୋଲି ଦୃଢ଼ୋକ୍ତି କରିଛନ୍ତି। ନିକଟରେ ଓଡ଼ିଶା ଗସ୍ତରେ ଥିବା ଅବସରରେ ‘ସମ୍ବାଦ’ ସହ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ସାକ୍ଷାତକାରରେ ବିଜେଡି ସରକାରର ବିଫଳତା ସହ ଓଡ଼ିଶା ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ବିଜେପିର ସୁଚିନ୍ତିତ ଯୋଜନା ଏବଂ ଓଡ଼ିଶାର ବିକାଶ ପାଇଁ ଲକ୍ଷ୍ୟ ସମ୍ପର୍କରେ ସେ ଏକ ବିସ୍ତୃତ ଚିତ୍ର ଦେଇଛନ୍ତି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କୁ ଭେଟିଥିଲେ ‘ସମ୍ବାଦ’ର ସମ୍ପାଦକ ତନୟା ପଟ୍ଟନାୟକ ଓ ବାର୍ତ୍ତା ସମ୍ପାଦକ ଭବାନୀ ଶଙ୍କର ତ୍ରିପାଠୀ।

ସମ୍ବାଦ: କେନ୍ଦ୍ରରେ ‘ମୋଦୀ ବନାମ କିଏ?’ ବୋଲି ଚର୍ଚ୍ଚା ଚାଲିଥିବା ବେଳେ ଓଡ଼ିଶାରେ ମତଦାତାଙ୍କ ମନରେ ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରଶ୍ନ ହେଉଛି ‘ନବୀନ ବନାମ କିଏ?’ ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି କି ଏଠି ବିଜେପି ପାଇଁ ଜଣେ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଚେହେରା ଘୋଷଣା କରିବା ଅଧିକ ଲାଭଦାୟକ ହୋଇଥା’ନ୍ତା?

ମୋଦୀ: ଗତ ସପ୍ତାହରେ ମୁଁ ଓଡ଼ିଶାର ଅନେକ ସ୍ଥାନକୁ ଯାଇ ବିଶାଳ ସମାବେଶକୁ ସମ୍ବୋଧିତ କରିଥିଲି, ରୋଡ୍ ସୋ’ ମାଧ୍ୟମରେ ଲୋକଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦ ଲୋଡ଼ିଥିଲି, ଲୋକଙ୍କ ସମସ୍ୟା ଓ ଚିନ୍ତାକୁ ଅନୁଭବ କରିଥିଲି। ସେଥିରୁ ସ୍ପଷ୍ଟ ହୋଇଥିଲି ଯେ ବର୍ତ୍ତମାନ ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରମୁଖ ପ୍ରସଙ୍ଗ ହେଉଛି ଶାସନ ପରିବର୍ତ୍ତନ। ଜନସାଧାରଣ କ୍ରୋଧିତ ହେବାପଛରେ କାରଣ ହେଉଛି, ସେମାନେ ସମର୍ଥନ କରିବାକୁ ବାଧ୍ୟବୋଲି ନବୀନ ସରକାର ଧରିନେଇଛନ୍ତି। ସେମାନେ କ୍ଳାନ୍ତ ଏଇଥିପାଇଁ ଯେ ସ୍ଥିରତା, ଦୁର୍ନୀତି ଓ ପ୍ରଗତିର ଅଭାବ ସାଙ୍ଗକୁ ଉତ୍ତରଦାୟିତ୍ବର ଅଭାବ। ଯେଉଁଥିପାଇଁ ଜନସାଧାରଣ ଏକ ସ୍ପଷ୍ଟ ଓ ଦୃଢ଼ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଚାହାନ୍ତି, ଯାହାକି ଓଡ଼ିଶାର ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ଏକ ନୂତନ ଦିଗ ଓ ଗତି ଦେଇପାରିବ। ଗତ ୧୦ବ‌ର୍ଷ ଧରି କେନ୍ଦ୍ରରେ ଆମର ସରକାରର ଉତ୍ତମ ଶାସନ ଓ ବିକାଶକୁ ଓଡ଼ିଶାବାସୀ ହୃଦୟଙ୍ଗମ କରିସାରିଛନ୍ତି। ସେମାନେ ସ୍ଥିରନିଶ୍ଚିତ, ବିଜେପି ହେଉଛି ଏକମାତ୍ର ଦଳ ଯିଏକି ସେମାନଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ପୂରଣ କରିପାରିବ। ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଚେହେରା ବାବଦରେ ମୁଁ ସ୍ପଷ୍ଟଭାବେ କହିବାକୁ ଚାହେଁ ଯେ ବିଜେପିର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ନିଶ୍ଚିତ ଭାବେ ଓଡ଼ିଶା ମାଟିର ପୁଅ କିମ୍ବା ଝିଅ ।

ସମ୍ବାଦ: ବିଜେପି ଓଡ଼ିଆ ଅସ୍ମିତାକୁ ପ୍ରମୁଖ ନିର୍ବାଚନୀ ପ୍ରସଙ୍ଗ କରିବା ପଛରେ କ’ଣ କାରଣ ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଇତିହାସ, ସଂସ୍କୃତି, କଳା, ସ୍ଥାପତ୍ୟ ଓ ସାହିତ୍ୟ କଥା ଉଠିଲେ ଓଡ଼ିଶା ହେଉଛି ମହାପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦପ୍ରାପ୍ତ ଅନ୍ୟତମ ଜୀବନ୍ତ ରାଜ୍ୟ। ମୁଁ ସର୍ବଦା ଓଡ଼ିଆ ସଂସ୍କୃତିର ଜଣେ ପ୍ରଶଂସକ। ଯେତେବେଳେ ଜି-୨୦ ଶିଖର ସମ୍ମିଳନୀରେ ପ୍ରଦର୍ଶିତ କୋଣାର୍କ ଚକ୍ର ବିଶ୍ବସ୍ତରୀୟ ନେତାମ‌ାନେ ମେ‌ା‌େତ ପଚାରିଥିଲେ, ତାହା ମୋତେ ବେଶ୍‌ ଖୁସି ଦେଇଥିଲା। କିଛିବର୍ଷ ତଳେ ଲିଙ୍ଗରାଜ ମନ୍ଦିର ପରିଦର୍ଶନ କରିବାପରେ ମୁଁ ଏକ ଫଟୋ ପୋଷ୍ଟ୍‌ କରିଥିଲି, ଯାହାକି ସେହିବର୍ଷ କୌଣସି ରାଜନେତାଙ୍କର ସବୁଠାରୁ ଲୋକପ୍ରିୟ ଫଟୋ ଭାବେ ବିବେଚିତ ହୋଇଥିଲା। ପୁରୀର ଐଶ୍ବରୀୟତା ହେଉ କିମ୍ବା ପଟ୍ଟଚିତ୍ର ଭଳି ସୁନ୍ଦର କଳା କି ଓଡ଼ିଆ ପରି ମଧୁର ଭାଷା ହେଉ, ସବୁଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବତନ୍ତ୍ରତା ରହିଛି। ଓଡ଼ିଆମାନେ ମଧ୍ୟ ଖୁବ୍ ଦୟାଳୁ ଓ ହୃଦୟବାନ। ସର୍ବୋପରି ପ୍ରତିବର୍ଷ ମହାପ୍ରଭୁ ଜଗନ୍ନାଥଙ୍କ ରଥଯାତ୍ରା ଦେଖିବାକୁ ଆସୁଥିବା ଲକ୍ଷଲକ୍ଷ ଭକ୍ତଙ୍କୁ ସେମାନେ ଆତିଥ୍ୟ ପ୍ରଦାନ କରିଥା’ନ୍ତି। ସେହି ଓଡ଼ିଶାବାସୀ ମଧ୍ୟ ଭଲଭାବେ ଜାଣନ୍ତି ବିଜେପି ହିଁ ଓଡ଼ିଆ ସଂସ୍କୃତି ଓ ଭାବନାକୁ ସମ୍ମାନ ଦିଏ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ଯାହାକିଛି ଆକାଂକ୍ଷା ରହିଛି ଏହି ଦଳ ହିଁ ପୂରଣ କରିବ।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ କାହିଁକି ଭାବୁଛନ୍ତି ଯେ ବିଜେଡି ଶାସନର ଗତ ଦୁଇ ଦଶନ୍ଧି ଭିତରେ ଓଡ଼ିଶାର ଅଗ୍ରଗତି ହୋଇନାହିଁ?


ମୋଦୀ: ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ ଅବହେଳା ସ୍ପଷ୍ଟଭାବେ ଦିଶୁଛି। ରାଜ୍ୟର କୃଷକମାନଙ୍କ ଉଦାହରଣ ନିଆଯାଉ। ବିଭିନ୍ନ ଫସଲ ପାଇଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଏମ୍ଏସ୍‌ପି ସ୍ଥିର କରିଛନ୍ତି। ଅଥଚ ବିଜେଡି ସରକାର ତା’ଠାରୁ କମ୍ ମୂଲ୍ୟ ଦେଉଛନ୍ତି। ରାଜ୍ୟରେ ବିଜେପି ସରକାର ଚାଷୀଙ୍କୁ ଧାନ କ୍ବିଣ୍ଟାଲ ପିଛା ୩,୧୦୦ ଟଙ୍କା ଦେବା ନିଶ୍ଚିତ କରାଇବେ ଏବଂ ତୁରନ୍ତ ଏହି ଅର୍ଥ ସେମାନଙ୍କ ବ୍ୟାଙ୍କ ଜମାଖାତାକୁ ଚାଲିଯିବ। ଏଠାରେ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ଅନେକ ଜଳସେଚନ ପ୍ରକଳ୍ପ ବିଳମ୍ବିତ ହୋଇଚାଲିଛି। ଫଳରେ, ରାଜ୍ୟର ଚାଷୀମାନଙ୍କୁ ଫସଲ ଉତ୍ପାଦନରୁ ବଞ୍ଚିତ କରିଛି। ଆମେ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ଅଗ୍ରାଧିକାର ଭିତ୍ତିରେ ସାରିବୁ।

ଓଡ଼ିଶାରେ ଗରିବ ଲୋକଙ୍କ ଦୁଃଖ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମର୍ମସ୍ପର୍ଶୀ। ବିଶେଷକରି ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳ ଓ ଆଦିବାସୀ ଅଞ୍ଚଳର ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟସେବା ଭିତ୍ତିଭୂମି ଭୁଶୁଡ଼ି ପଡ଼ିଛି। ସେସବୁ ଅଞ୍ଚଳରେ ଲୋକେ ଏବେ ବି ମ୍ୟାଲେରିଆ, ଡାଇରିଆ ଓ ସାପକାମୁଡ଼ା ସହ ସଂଘର୍ଷ କରୁଛନ୍ତି। ଏପରି ସର୍ବନିମ୍ନ ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟସେବାର ଅଭାବ ଗରିବ ଓ ଆଦିବାସୀଙ୍କ ଜୀବନ ଉପରେ ନକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ପକାଉଛି। ଏହା ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତି ସୃଷ୍ଟିକରୁଛି ଯେକୌଣସି ଗୁରୁତର ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟଭିତ୍ତିକ ସମସ୍ୟା ସେମାନଙ୍କୁ ଆହୁରି ଗଭୀର ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ଭିତରକୁ ଟାଣିନେଉଛି। ସେହିପରି, ଦୀର୍ଘ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି କ୍ଷମତାରେ ରହିବାପରେ ବି ବିଜେଡି ସରକାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଓଡ଼ିଆଙ୍କ ମୁଣ୍ଡ ଉପରେ ଛାତଟିଏ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିପାରିନାହିଁ। ବରଂ, ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନାକୁ ମନ୍ଥର କରିବାସହ ସେଥିରୁ ଅର୍ଥ ଆତ୍ମସାତ୍ କରୁଥିବା ଅଭିଯୋଗ ହେଉଛି। ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କ ଅବସ୍ଥା ଦେଖନ୍ତୁ। ସେମାନେ ଦେଶର ଅନ୍ୟତମ ଉଜ୍ବଳ ଓ ଦକ୍ଷ ଯୁବବର୍ଗ। ମାତ୍ର, କାମ ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟକୁ ସେମାନେ ଯାଉଛନ୍ତି। ଏହାର କାରଣ ହେଲା; ପୁଞ୍ଜିନିବେଶ, ଶିଳ୍ପ ଓ ସୁଯୋଗକୁ ଆକର୍ଷିତ କରିବା ଲାଗି ବିଜେଡି ସରକାରର ଦୂରଦୃଷ୍ଟି ଅଭାବ ରହିଛି। ସେମାନେ ଶିକ୍ଷା କ୍ଷେତ୍ରକୁ ମଧ୍ୟ ଅଣଦେଖା କରିଛନ୍ତି। ବିଜେପି ନେତୃତ୍ବାଧୀନ ସରକାର ଅନେକ ସହରରେ ଆଇଟି ପାର୍କ ସ୍ଥାପନ କରିବ ଏବଂ ଉଚ୍ଚଶିକ୍ଷାର ଦକ୍ଷତା ବୃଦ୍ଧି କରାଇବ। ଶିଳ୍ପ ଆଣିବା ସହିତ ସେଥିରେ ଓଡ଼ିଆ ଯୁବକମାନଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତ ଉଜ୍ଜ୍ବଳ କରିବାର ସୁଯୋଗ ପହଞ୍ଚାଇବ।

ସମ୍ବାଦ: ବିଜେପି ଗତ କିଛିବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ବିଜେଡିକୁ କଡ଼ା ସମାଲୋଚନା କରିନାହିଁ। ମାତ୍ର, ଏଇ କିଛିବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ହଠାତ୍‌ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ତୀବ୍ର ସମାଲୋଚନା କରିବାକୁ ବୁଦ୍ଧିଜୀବୀମାନେ ଯଥେଷ୍ଟ ନୁହେଁ କିମ୍ବା ବିଳମ୍ବ ବୋଲି କହୁଛନ୍ତି। ଏ ସମ୍ପର୍କରେ ଆପଣ କ’ଣ କହିବେ?

ମୋଦୀ: ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ଓଡ଼ିଶାର ବିଜେପି ଦୃଢ଼ଭାବେ ଯେଉଁସବୁ ପ୍ରସଙ୍ଗ ଉଠାଇଛି, ସେସବୁ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବାର୍ଥ ସହିତ ଜଡ଼ିତ। ଆପଣ ନିଜ ମିଡିଆ ହାଉସ୍‌ର ରିପୋର୍ଟ ବା ଅନ୍ୟମାନଙ୍କ ରିପୋର୍ଟ ଦେଖିପାରିବେ। ଅନେକ ଦୁର୍ନୀତି ଘଟଣାରେ ଆମେ ଲଗାତାର ବିଜେଡି ସରକାରଙ୍କୁ ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ମଦ ମାଫିଆଙ୍କ ସହ ସେମାନଙ୍କ ସମ୍ପର୍କ ବାବଦରେ ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ବିଗିଡ଼ି ଯାଇଥିବା ଆଇନଶୃଙ୍ଖଳାକୁ ନେଇ ଆମେ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କୁ ସମାଲୋଚନା କରିଛୁ। କେନ୍ଦ୍ରୀୟ କଲ୍ୟାଣକାରୀ ଯୋଜନା କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ବିଫଳତା ଅଥବା ଦୁର୍ନୀତିକୁ ନେଇ ବି ପ୍ରଶ୍ନ କରିଛୁ। ତେଣୁ, ବିଜେଡି ସରକାରକୁ ବିଜେପି କଡ଼ା ସମ‌ାଲୋଚନା କରିନାହିଁ ବୋଲି କହିବା ଏକ ଭ୍ରାନ୍ତ ଧାରଣା। ଯେମିତି କେନ୍ଦ୍ରରେ କଂଗ୍ରେସ ଓ ତା’ର ସହଯୋଗୀମାନେ ସମାଲୋଚନାକୁ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ସ୍ତରକୁ ନେଇଯିବା ସହ ଏକ ତିକ୍ତତାପୂର୍ଣ୍ଣ ପରିବେଶ ସୃଷ୍ଟିକରିଛନ୍ତି, ଆମେ ସେମିତି କରିନାହୁଁ। ବରଂ, ଗଠନମୂଳକ ତଥା ପ୍ରସଙ୍ଗଭିତ୍ତିକ ସମାଲୋଚନାକୁ ଗୁରୁତ୍ବ ଦେଇଛୁ।

ସମ୍ବାଦ: ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ନବୀନ ପଟ୍ଟନାୟକ କହିଛନ୍ତି ଯେ ଓଡ଼ିଶାରେ ସରକାର ଗଠନ ପାଇଁ ବିଜେପି ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଏହା ଉପରେ ଆପଣଙ୍କର ପ୍ରତିକ୍ରିୟା କ’ଣ?

ମୋଦୀ: ବିଜେପି ଏକ ସମୃଦ୍ଧ ତଥା ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ ଓଡ଼ିଶାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ବିରୋଧୀ ଲଢ଼େଇରେ ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବ ଲୋକଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ସ୍ବୟଂ ସହାୟିକା ଗୋଷ୍ଠୀ ମାଧ୍ୟମରେ ରାଜ୍ୟରେ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ସୃଷ୍ଟି କରିବାକୁ ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଯୁବପିଢ଼ିକୁ ରୋଜଗାରକ୍ଷମ କରିବା ପାଇଁ ଓଡ଼ିଶାକୁ ପର୍ଯ୍ୟଟନସ୍ଥଳୀରେ ରୂପାନ୍ତର କରିବାର ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ମହିଳାଙ୍କୁ ଆର୍ଥିକ ସଶକ୍ତୀକରଣ କରିବାକୁ ସ୍ବପ୍ନ ଦେଖୁଛି। ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବ, କୃଷକ, ମହିଳା ଓ ଯୁବକଙ୍କ ଜୀବନକୁ ଉନ୍ନତ କରିବା ହେଉଛି ବିଜେପିର ସ୍ବପ୍ନ। ବିଜେପିର ସ୍ବପ୍ନ କେବେ କ୍ଷମତା ହାସଲ ପାଇଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ସର୍ବଦା ଲୋକଙ୍କ ସେବା କରିବା ପାଇଁ ଉଦ୍ଦିଷ୍ଟ।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ କହିଛନ୍ତି ବିଜେପି ସରକାର ଅଧୀନରେ ଓଡ଼ିଶା ଏକ ନମ୍ବର ରାଜ୍ୟ ହେବ। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଦୃଷ୍ଟିରେ ବର୍ତ୍ତମାନ ଓଡ଼ିଶା ବିକାଶର କେଉଁ କ୍ଷେତ୍ର ପାଇଁ ପ୍ରାଥମିକତା ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଓଡ଼ିଶାର ଜନସାଧାରଣ ଦୁଇ ଦଶନ୍ଧିରୁ ଅଧିକ ସମୟ ଧରି ଅବହେଳାର ଶିକାର ହୋଇଛନ୍ତି। ପଛୁଆବର୍ଗ ଓ ଆଦିବାସୀମାନଙ୍କ ବିକାଶ ଓ ସଶକ୍ତୀକରଣ ପାଇଁ ପ୍ରତିଶ୍ରୁତି ଦିଆଯାଇଛି, ମାତ୍ର ସେମାନଙ୍କ ସଂଘର୍ଷର ଅନ୍ତ ଘଟିନାହିଁ। ରାଜ୍ୟରେ ନୂତନ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗକୁ ବି ବନ୍ଦ କରିଦିଆଯାଇଛି। ବିଜେପିର ବିକାଶ ମଡେଲ ଏହିସବୁ ସମସ୍ୟାର ଅବସାନ ଘଟାଇବ। ସମାଜର ପ୍ରତ୍ୟେକବର୍ଗ ଏଥିରୁ ଉପକୃତ ହୋଇପାରିବେ। ବିଜେପିର ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାର ଅନେକ ରାଜ୍ୟରେ ଏହିଭଳି କାର୍ଯ୍ୟ କରିପାରିଛି। ଏହାର ବିକାଶ ମଡେଲ୍‌ ଦ୍ରୁତ ବିକାଶ ସହିତ ଦୁର୍ନୀତିମୁକ୍ତ ଶାସନ ପାଇଁ ଏକ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକେ ମଧ୍ୟ ରାଜ୍ୟରେ ସମାନ ମଡେଲ ଚାହୁଁଛନ୍ତି। ସେମାନେ ଜାଣିଛନ୍ତି ଯେ ‘ଇଜ୍‌ ଅଫ୍ ଡୁଇଂ’ ବା କାମକୁ ସହଜ କରିବା ପ୍ରକ୍ରିୟା କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିବାରେ ବିଜେଡି ସରକାର ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ମାତ୍ର, ଲୋକମାନଙ୍କ ସାମୂହିକ ସ୍ବାର୍ଥ ପ୍ରତି ବିଜେପି ଗୁରୁତ୍ବ ଦେବ। ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରତି ୫୦୦ ସ୍ବୟଂ ସହାୟିକା ଗୋଷ୍ଠୀ ପାଇଁ ଶିଳ୍ପ କ୍ଳଷ୍ଟର ନିର୍ମାଣ କରିବୁ। ଏହିଭଳି ଆମେ ଅନେକ ପଦକ୍ଷେପ ନେବୁ, ସେଥିରୁ ଲୋକମାନେ ଅନୁଭବ କରିବେ ଯେ କିପରି ବିକାଶଠାରୁ ସେମାନଙ୍କୁ ଦୂରେଇ ରଖାଯାଇଥିଲା।

ସମ୍ବାଦ: କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ନେତାଙ୍କ ଓଡ଼ିଶାଗସ୍ତକୁ ସମାଲୋଚନା କରିବା ସହିତ ଏହା କେବଳ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ବୋଲି ବିଜେଡି ମତ ଦେଇଛି। ଏହିଭଳି ମନ୍ତବ୍ୟକୁ ଆପଣ କିଭଳି ଖଣ୍ଡନ କରିବେ?

ମୋଦୀ: ସେମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଶ୍ନ ପଚରାଯିବା ଉଚିତ ହେବ କି, ଗତ ୨୫ ବର୍ଷ ଭିତରେ ଓଡ଼ିଶାବାସୀଙ୍କ ପାଇଁ ବିଜେଡି କ’ଣ କରିଛି? ରାଜ୍ୟବାସୀଙ୍କ ପ୍ରତିଭା ଓ ପରିଶ୍ରମ କାହିଁକି ଉପଯୁକ୍ତ ଫଳାଫଳ ପାଇପାରୁନାହିଁ? ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କୁ କାହିଁକି ସୁଯୋଗ ହାସଲ ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟ ଆଡ଼େ ଦୃଷ୍ଟିଦେବାକୁ ପଡୁଛି? ଆମେ ଗଲା ୧୦ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣଅନୁକୋଣରେ ବିକାଶ ପହଞ୍ଚାଇବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପରିଶ୍ରମ କରିଛୁ। ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକମାନେ ମଧ୍ୟ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଯୋଜନାରୁ ଉପକୃତ ହୋଇପାରିଛନ୍ତି। ଉଦାହରଣ ସ୍ବରୂପ, ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ୨୭ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଗୃହନିର୍ମାଣ କରାଯାଇଛି, ୫୫ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ମହିଳା ହିତାଧିକାରୀ ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ପାଇଛନ୍ତି, ୭୩ ପ୍ରତିଶତ ପରିବାରଙ୍କ ଘରେ ବିଶୁଦ୍ଧ ଜଳ ସଂଯୋଗ ଦିଆଯାଇଛି। ସେହିଭଳି କେନ୍ଦ୍ରୀୟ ପାଣ୍ଠିରୁ ୨୪ ହଜାର କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଟଙ୍କା ଡିବିଟି(ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ଲାଭ ହସ୍ତାନ୍ତର) ମାଧ୍ୟମରେ ଲୋକଙ୍କ ବ୍ୟାଙ୍କ ଜମାଖାତାରେ ସିଧାସଳଖ ପହଞ୍ଚିଛି। ତେବେ, ଏସବୁ ସତ୍ତ୍ବେ ରାଜ୍ୟର ପ୍ରକୃତ ଦକ୍ଷତା ବା ସମ୍ଭାବନା ଅନାଲୋଚିତ ହୋଇ ରହିଛି। ଗତ ୨୫ ବର୍ଷ ଧରି କ୍ଷମତାରେ ଥିବା ବିଜେଡି ସରକାର ବିକାଶ ପାଇଁ ଏକ ଅର୍ଦ୍ଧ-ହୃଦୟ ତଥା ଦୂର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଦେଖାଇଛି।

ସମ୍ବାଦ: ମଧ୍ୟପ୍ରଦେଶର ‘ଲାଡଲି ବେହନା ଯୋଜନା’ ପରି ଓଡ଼ିଶାର ‘ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା’ ଖେଳ ପରିବର୍ତ୍ତନକାରୀ ହେବ କି?

ମୋଦୀ: ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ମହିଳା ନେତୃତ୍ବାଧୀନ ବିକାଶକୁ ଆମେ ଗୁରୁତ୍ବ ଦେଇଆସିଛୁ। ଆମ ପାଇଁ ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା ଅର୍ଥ ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ସଶକ୍ତ କରିବା। କଥାରେ ଅଛି, ଜଣେ ମହିଳାଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା ମାନେ ସମଗ୍ର ପରିବାରକୁ ସଶକ୍ତ କରିବା। ଜାତୀୟ ସ୍ତରରେ ଆମର ନିଜସ୍ବ ପ୍ରମୁଖ ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକର ହିତାଧିକାରୀ ହେଉଛନ୍ତି ମହିଳା। ମୁଦ୍ରା ଋଣ ହେଉ କି, ସ୍ବନିଧି ଋଣ କି ଷ୍ଟାଣ୍ଡ୍ଅପ୍ ଋଣ, ବିଭିନ୍ନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ଅଧିକାଂଶ ସରକାରୀ ଋଣ ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଦାନ କରାଯାଇଛି। ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ଅଧିକାଂଶ ଘର ମହିଳାଙ୍କ ନାମରେ ରହିଛି କିମ୍ବା ସେମାନଙ୍କର ଯୁଗ୍ମ-ମାଲିକାନା ରହିଛି। ଓଡ଼ିଶାରେ ଆମ ଦଳ ‘ମେଧାବୀ ଝିଅ’ ଯୋଜନାରେ ଦାରିଦ୍ର୍ୟ ସୀମାରେଖା ତଳେ ଥିବା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛାତ୍ରୀଙ୍କୁ ୨ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କାର ଆଶ୍ବାସନା ପ୍ରମାଣପତ୍ର ନିଶ୍ଚିତ କରିଛି। ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ଅଧିକ ସଶକ୍ତ କରିବାକୁ ‘ସୁଭଦ୍ରା ଯୋଜନା’ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରଖିଛି। ଏହି ଯୋଜନା ସେମାନଙ୍କୁ ଦୁଇ ବର୍ଷ ଭିତରେ ସେମାନଙ୍କ ଆବଶ୍ୟକତା ପୂରଣ ପାଇଁ ୫୦ ହଜାର ଟଙ୍କା ବିନିଯୋଗ କରିବାର ସୁବିଧା ଯୋଗାଇବ। ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଆମର ଦୃଷ୍ଟିକୋଣ ସ୍ପଷ୍ଟ। ଆମେ ଏହାକୁ ଓଡ଼ିଶାରେ ବାସ୍ତବତାରେ ପରିଣତ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ।

ସମ୍ବାଦ: ଭାରତ ଭଳି ଗାଣତନ୍ତ୍ରିକ ଦେଶରେ ବିରୋଧୀ ଦଳର ଭୂମିକା ପ୍ରତି ମୋଦୀଙ୍କ କିଭଳି କଳ୍ପନା ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ଆମେ ୧୦ ବର୍ଷ ଧରି ସରକାର ଚଳାଉଛୁ। ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ବିରୋଧୀ ଏକ ସକ୍ରିୟ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବା ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସ୍ବର ହେବାର ସୁଯୋଗ ପାଇଛନ୍ତି। ଏକ ଗଠନମୂଳକ ଆଭିମୁଖ୍ୟ ସହିତ ସେମାନେ ଦେଶର ବିକାଶ ପରିପ୍ରେକ୍ଷୀରେ ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ପକାଇ ପାରିଥା’ନ୍ତେ। ମାତ୍ର ସେମାନେ ତାହା କରିବାରେ ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ବିରୋଧୀମାନେ ଏବେ ଏକ ଗୋଲକଧନ୍ଦାରେ ଛନ୍ଦି ହୋଇଛନ୍ତି। ମୁଁ ଯାହା କରୁଛି, ମୋ’ ସରକାର ଯାହା କରୁଛନ୍ତି, ସେମାନେ ସେସବୁକୁ ବିରୋଧ କରିବାକୁ ଚାହାନ୍ତି। ଏଭଳି ମାନସିକତାରେ ସେମାନେ ଦେଶ ବିରୋଧରେ ମଧ୍ୟ ଯିବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ। ତେଣୁ ବିରୋଧୀ ଦଳଗୁଡ଼ିକ ନିଜର ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିବାରେ ବିଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ଯଦି ଭାରତୀୟ ଅଭିବୃଦ୍ଧି କାହାଣୀରେ ବିରୋଧୀଦଳ ନିଜକୁ କେବଳ ଏକ ‘ନାହିଁ କହୁଥିବା ଦଳ’ରେ ବିବେଚିତ ହେବାକୁ ଚାହାନ୍ତି, ତା’ହେଲେ ଭୋଟର୍‌ମାନେ ରାଜ୍ୟ ବା ଜାତୀୟ ନିର୍ବାଚନରେ ସେମାନଙ୍କୁ ଅଣଦେଖା କରିବା ସ୍ବାଭାବିକ।

ସମ୍ବାଦ: ବିରୋଧୀଙ୍କ ଅଭିଯୋଗ ଯେ ଗଣତନ୍ତ୍ରର ସ୍ବରକୁ ଦମନ କରିବା ଲାଗି ଇଡି ଓ ସିବିଆଇର ଅପବ୍ୟବହାର କରି ମୋଦୀ ଦେଶରେ ଏକଛତ୍ରବାଦୀ ଶାସନ ଲାଗୁ କରିବାକୁ ଚାହାନ୍ତି। ଏ ସମ୍ପର୍କରେ ଆପଣ କ’ଣ କହିବେ? ?

ମୋଦୀ: ଯଦି ଇଡି ଓ ସିବିଆଇ ବ୍ୟବହାର କରି ଗଣତନ୍ତ୍ରକୁ ସହଜରେ ଦମନ କରାଯାଇପାରିବ, ତେବେ ଏହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ବର୍ଷ ବର୍ଷ ଧରି ବ୍ୟବହାର କରି ଆସୁଥିବା କଂଗ୍ରେସ ଦଳ ୨୦୧୪ ନିର୍ବାଚନକୁ ସହଜରେ ଜିତି ପାରିଥା’ନ୍ତା। ତା’ହେଲେ ସେମାନେ କାହିଁକି ହାରିଗଲେ? ବାସ୍ତବତା ହେଉଛି, ଭାରତ ପରି ବିସ୍ତୃତ ଓ ବିବିଧ ଦେଶରେ ଗଣତନ୍ତ୍ରକୁ ଏଭଳି ଉପାୟ ଦ୍ବାରା ଅଟକାଯାଇପାରିବ ନାହିଁ। ଭାରତୀୟମାନେ ସଜାଗ ଓ ସଚେତନ। ସେମାନଙ୍କର ସାମୂହିକ ଇଚ୍ଛା ଦ୍ବାରା ହିଁ ଦେଶର ଭାଗ୍ୟ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ହୋଇଥାଏ। ଆଜି ସୁଦ୍ଧା ଇଡି ଦ୍ବାରା ତଦନ୍ତ କରାଯାଇଥିବା ସମସ୍ତ ଦୁର୍ନୀତି ମାମଲାରେ କେବଳ ୩ ପ୍ରତିଶତ ହିଁ ରାଜନେତା ଜଡ଼ିତ ଅଛନ୍ତି। ବାକି ୯୭ ପ୍ରତିଶତଙ୍କ ଭିତରେ ବିଭିନ୍ନ ସରକାରୀ ଅଧିକାରୀ ଓ ଅପରାଧୀ ଅଛନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ବିରୋଧରେ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ମଧ୍ୟ ନିଆଯାଉଛି। ଏଥିରୁ ଏହା ପ୍ରମାଣିତ ଯେ ଆମର ଏହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ କେବଳ ରାଜନୈତିକ ପକ୍ଷପାତିତାରେ କାମ କରୁନାହାନ୍ତି। ଏଥିସହିତ ୨୦୧୪ ପୂର୍ବରୁ ଇଡି କେବଳ ୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ସମ୍ପତ୍ତି ଜବତ କରିଥିଲା ବେଳେ ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ଭିତରେ ସେହି ପରିମାଣ ଏକ ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାକୁ ଟପିଯାଇଛି। ଏହା ଦର୍ଶାଉଛି କି, ଆମ ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ସେମାନଙ୍କ କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ଠିକ୍‌ରେ ପାଳନ କରୁଛନ୍ତି। ତେଣୁ ସେହି ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ବିନା ହସ୍ତକ୍ଷେପରେ କାମ କରିବାକୁ ଦିଆଯିବା ଜରୁରୀ। ଇନ୍‌ଡି ଗଠବନ୍ଧନ ପ୍ରଥମଦିନରୁ ଦୁର୍ନୀତିଗ୍ରସ୍ତଙ୍କ ଏକ ମିଳିତ ମଞ୍ଚ ଥିଲା। ନିର୍ବାଚନରେ ହାରିଯିବେ ବୋଲି ଜାଣି ଏହିଭଳି ମନ୍ଦ ବାହାନାର ଆଶ୍ରୟ ନେଇଛନ୍ତି।

ସମ୍ବାଦ: ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି କି, ‘୪୦୦ ପାର୍’ ସ୍ଳୋଗାନ ଆତ୍ମସନ୍ତୋଷ ଓ ଅତ୍ୟଧିକ ଆତ୍ମବିଶ୍ବାସ ସୃଷ୍ଟି କରି ବିଜେପିକୁ ପଛକୁ ନେଇଯିବ?

ମୋଦୀ: ଦେଶ ଏକ ନିର୍ଣ୍ଣାୟକ ଓ ସ୍ଥିର ସରକାର ଚାହେଁ ବୋଲି ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇସାରିଛି। ଦେଶବାସୀ ହିଁ ଆମକୁ ‘ଏଇ ଥର, ୪୦୦ ପାର୍’ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ଦେଇଛନ୍ତି। ଏହାର କାରଣ ହେଲା, ବିଜେପିର କାର୍ଯ୍ୟକର୍ତ୍ତାମାନେ ସର୍ବଦା ନିମ୍ନସ୍ତରରୁ କାମ କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ଲୋକଙ୍କ ସହ ରହିଛନ୍ତି। ନିର୍ବାଚନ ଥାଉ କି ନଥାଉ, ସେମାନେ ଲୋକଙ୍କ ଇଚ୍ଛା ସହିତ ତାଳମେଳ ରଖିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ଆକାଂକ୍ଷା ପୂରଣ ପାଇଁ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ମୁଁ ଏକଥା ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହେଁ ଯେ ଆମ ଦଳର ମାର୍ଗଦର୍ଶିକାରେ ‘ଦେଶ ପ୍ରଥମ’ ବୋଲି ରହିଛି। ଏକ ରାଜନୈତିକ ଆନ୍ଦୋଳନ ଭାବେ ଆମେ ଉଭା ହୋଇଛୁ। ଲୋକସଭାରେ ମାତ୍ର ୨ ଜଣ ସାଂସଦ ରହିବାଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଦୁଇଥର ପୂୂର୍ଣ୍ଣ ସଂଖ୍ୟାଗରିଷ୍ଠ ସରକାର ଗଠନ କରିବା ଏବଂ ତୃତୀୟଥର ପାଇଁ ପୂର୍ଣ୍ଣ ସଂଖ୍ୟାଗରିଷ୍ଠତା ହାସଲ କରିବା ଯାଏ ଆମ କାର୍ଯ୍ୟକର୍ତ୍ତାମାନେ ଅହେତୁକ ଦୃଢ଼ତା, କଠିନ ପରିଶ୍ରମ ଓ ସାହସ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରି ଆସିଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ନିର୍ବାଚନରେ ଜିତିବା ଏକମାତ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ କି ଶେଷକଥା ନୁହେଁ। ତେଣୁ ଏଠି ଆତ୍ମସନ୍ତୋଷର ସ୍ଥାନ ନାହିଁ।

ସମ୍ବାଦ: ପୂର୍ବ ଭାରତରେ ବିଜେପିର ପ୍ରଦର୍ଶନ ଆଶାନୁରୂପ ନଥିଲା। ୨୦୨୪ ନିର୍ବାଚନ କ’ଣ ବିଜେପି ସପକ୍ଷରେ ଯିବ ବୋଲି ଆପଣ ଭାବୁଛନ୍ତି?

ମୋଦୀ: ୨୦୧୯ ଲୋକସଭା ନିର୍ବାଚନରେ ବିଜେପି ପୂର୍ବ ଭାରତର ଏକମାତ୍ର ବୃହତ୍ତମ ଦଳ ଭାବେ ଉଭା ହୋଇଥିଲା। ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡରେ ଏନ୍‌ଡିଏ ୧୪ ଆସନରୁ୧୨ଟି ଜିତିବା ସହ ୫୬ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ଭୋଟ ପାଇଥିଲା। ଓଡ଼ିଶାରେ ଆମେ ପୂର୍ବାପେକ୍ଷା ୭ଟି ଆସନ ଅଧିକ ପାଇ ୮ରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲୁ। ପଶ୍ଚିମବଙ୍ଗରେ ଆମେ ୪୨ ଆସନରୁ ୧୮ଟି ଜିତିଥିଲୁ ଏବଂ ଏକ ନଗଣ୍ୟ ଉପସ୍ଥିତିରୁ ମୁଖ୍ୟ ବିରୋଧୀ ଦଳ ହୋଇପାରିଥିଲୁ। ବିହାରରେ ଏନ୍‌ଡିଏ ୪୦ଟି ଆସନରୁ ୩୯ଟି ଜିତିଥିଲା। ତେଣୁ, ପୂର୍ବଭାରତରେ ଆମେ ଐତିହାସିକ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଥିଲୁ ବୋଲି କୁହାଯାଇପ‌ାରେ। ଏହି ସଫଳତା ହାସଲ ପଛରେ କାରଣ ହେଉଛି ଦୁର୍ନୀତିଗ୍ରସ୍ତ ଓ ବଂଶବାଦୀ ନେତାଙ୍କ ଶାସନରେ ଲୋକେ କ୍ଳାନ୍ତ ହୋଇପଡ଼ିଥିଲେ। ଯେମିତିକି ଟିଏମ୍‌ସି ନେତାମାନେ ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାର ଦୁର୍ନୀତି କରିବାରେ ରେକର୍ଡ କରିଛନ୍ତି। ନିକଟ ଅତୀତରେ ଓଡ଼ିଶାର ଏକ ମଦ କାରଖାନାରୁ ଜଣେ ଝାଡ଼ଖଣ୍ଡ ସାଂସଦଙ୍କ ପାହାଡ଼ତୁଲ୍ୟ ଟଙ୍କାଗଦା ଉଦ୍ଧାର ହୋଇଥିଲା। ଜବତ ଟଙ୍କାଗୁଡ଼ିକୁ ଗଣିବା ଲାଗି ଆମ ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକୁ ଦିନ ଦିନ ଲାଗିଗଲା। ଏହିସବୁ କାରଣ ପାଇଁ ପୂର୍ବଭାରତରେ ଆମେ ଦୃଢ଼ ଉପସ୍ଥିତି ରଖିପାରିଛୁ।

ସମ୍ବାଦ: ଭାରତୀୟ ଜନସଂଖ୍ୟାର ଏକ ଗୁରୁତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାଗ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ଶ୍ରେଣୀର, ଯେଉଁମାନେ ଇନ୍ଧନ ଗ୍ୟାସ ଓ ଖାଦ୍ୟ ଭଳି ଅତ୍ୟାବଶ୍ୟକ ସାମଗ୍ରୀର ଦରବୃଦ୍ଧି ଦ୍ବାରା ଭୀଷଣ ଭାବରେ ପ୍ରଭାବିତ। ଏ ବାବଦରେ ଆପଣଙ୍କ ମତାମତ କ’ଣ?

ମୋଦୀ: ଭାରତରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ଏକ ପ୍ରମୁଖ ପ୍ରସଙ୍ଗ ହୋଇ ରହି ଆସିଛି। କିନ୍ତୁ ଅତୀତର ଅନ୍ୟ କୌଣସି ସରକାର ଗତ ୧୦ ବର୍ଷ ପରି ଏହି ପ୍ରସଙ୍ଗକୁ ଗମ୍ଭୀର ଓ ବିସ୍ତୃତ ଭାବରେ କ୍ବଚିତ୍ ସମାଧାନ କରିଛନ୍ତି। ୧୯୭୪ ମସିହାରେ ଭାରତରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ହାର ସର୍ବାଧିକ ୩୦ ପ୍ରତିଶତ ରହିଥିଲା। ସେତେବେଳେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଇନ୍ଦିରା ଗାନ୍ଧୀ ଥିଲେ। ୧୯୮୦ ଦଶକର ଆରମ୍ଭରେ ଦେଶ ପୁଣି ଇନ୍ଦିରାଙ୍କ ଅଧୀନରେ ଥିଲା ବେଳେ ଏହା ୧୦ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ରହିଥିଲା। ୧୯୯୦ ଦଶକରେ ଏହା ମଧ୍ୟ ସମାନ ସ୍ତରରେ ରହିଲା। ୨୦୧୦ରେ ଜଣେ ଅର୍ଥନୀତିଜ୍ଞ ସରକାରଙ୍କ ନେତୃତ୍ବ ନେଉଥିବା ସତ୍ତ୍ବେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ପ୍ରାୟ ୧୨ ପ୍ରତିଶତ ରହିଥିଲା। ସେହି ତୁଳନାରେ ୨ବର୍ଷର ମହାମାରୀ, ବୈଶ୍ବିକ ଅନିଶ୍ଚିତତା ଏବଂ ଏହାର ପ୍ରଭାବ ଆମର ଇନ୍ଧନ, ସାର ଓ ଖାଦ୍ୟ ଉପରେ ପଡ଼ିବା ସତ୍ତ୍ବେ ଆମ ସରକାର ଉପଭୋକ୍ତା ଦର ସୂଚକାଙ୍କ(ସିପିଆଇ) ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିକୁ ୫ ପ୍ରତିଶତ ତଳେ ରଖିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଛି। ସ୍ବାଧୀନତା ପରବର୍ତ୍ତୀ ସମସ୍ତ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ଉପରେ ଆମର ଦକ୍ଷତା ସର୍ବୋତ୍ତମ ରହିଛି। ଅନେକ ବିକଶିତ ରାଷ୍ଟ୍ର ତୁଳନାରେ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତି ହାର କମ୍ ଥିବା ଦେଶମାନଙ୍କ ଭିତରେ ଭାରତ ଅନ୍ୟତମ। ଏହାର କାରଣ ହେଉଛି, ଆମ କୃଷକମାନେ ବିଶ୍ବ ଖାଦ୍ୟ ଚାହିଦା ପୂରଣ କରିବାରେ ସଫଳ ହୋଇଛନ୍ତି। ଭାରତରେ ଆଜି ବିଶ୍ବର ସବୁଠୁ ଶସ୍ତା ୟୁରିଆ ସାର ରହିଛି। ତେଣୁ ୟୁକେ, ଫ୍ରାନ୍ସ ଓ ଜର୍ମାନୀ ପରି ବୃହତ୍ତର ଅର୍ଥନୈତିକ ରାଷ୍ଟ୍ର ତୁଳନାରେ ଆମେ ଖାଦ୍ୟ ଓ ସାର ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିକୁ କମ୍ ରଖିପାରିବୁ। ଆଜି ବିଶ୍ବରେ ଦେଖାଦେଇଥିବା ବିବାଦର ମୁକାବିଲା ଯୋଗୁଁ ବିଶ୍ବସ୍ତରରେ ତୈଳଦରରେ ବୃଦ୍ଧି ଘଟିଛି। କିନ୍ତୁ ବିଶ୍ବସ୍ତରୀୟ ଚାପ ସତ୍ତ୍ବେ ଲୋକଙ୍କୁ ମହଙ୍ଗା ପେଟ୍ରୋଲ ଓ ଡିଜେଲ ଭାର ବହନ କରିବାକୁ ପଡ଼ିବନି ବୋଲି ଆମ ସରକାର ନିଶ୍ଚିତ କରିଛନ୍ତି। ଏହା ବ୍ୟତୀତ, ଆମେ ଗରିବ ଓ ମଧ୍ୟବିତ୍ତ ଶ୍ରେଣୀର ଲୋକଙ୍କୁ ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିର ପ୍ରତିକୂଳ ପ୍ରଭାବରୁ ରକ୍ଷା କରିଛୁ। ମୁଦ୍ରାସ୍ଫୀତିର ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ଆମେ ସେମାନଙ୍କୁ ସାମାଜିକ ଓ ଅର୍ଥନୈତିକ ଉପକରଣ ଯୋଗାଇ ସଶକ୍ତ କରିଛୁ। ସେହିପରି, ସ୍ବଳ୍ପମୂଲ୍ୟର ଏଲ୍ଇଡି ବଲ୍‌ବ ଯୋଗୁଁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର ପାଇଁ ହାରାହାରି ବିଦ୍ୟୁତ୍ ବିଲ ହ୍ରାସ ପାଇଛି। ଆଜି ୭ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ କୌଣସି ଆୟକର ନାହିଁ। ଅର୍ଥାତ୍ ଲୋକେ ହଜାରେ ଟଙ୍କା ସଞ୍ଚୟ କରିପାରୁଛନ୍ତି ଯାହା ଅନ୍ୟଥା ଆୟକର ଆଡ଼କୁ ଯାଇଥା’ନ୍ତା। ଆୟୁଷ୍ମାନ୍ ଭାରତ ଯୋଜନା ଅଧୀନରେ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସା ଯୋଗୁଁ ପରିବାର ଉପରେ ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ଯାଏ ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟ ବୋଝ ହ୍ରାସ ପାଇଛି। ଆଗରୁ ବଜାରରେ ମିଳୁଥିବା ୧୦୦ ଟଙ୍କାର ଔଷଧ ଏବେ ଜନ ଔଷଧି ଯୋଜନାରେ ମାତ୍ର ୧୦ ଟଙ୍କା କି ୨୦ ଟଙ୍କାରେ ଉପଲବ୍ଧ ହୋଇପାରୁଛି। କୋଭିଡ ବେଳରୁ ୮୦ କୋଟି ଲୋକ ମାଗଣା ଖାଦ୍ୟଶସ୍ୟ ଗ୍ରହଣ କରୁଛନ୍ତି ଯାହା ସେମାନଙ୍କ ଜୀବନକୁ ବହୁତ ସହଜ କରିଦେଇଛି। ନିକଟରେ ହୋଇଥିବା ଏକ ସର୍ବେକ୍ଷଣରୁ ଜଣାପଡ଼ିଛି କି, ଗ୍ରାମାଞ୍ଚଳର ପ୍ରଥମ ପରିବାରମାନେ ସେମାନଙ୍କ ମାସିକ ଖର୍ଚ୍ଚର ୫୦ ପ୍ରତିଶତରୁ କମ୍ ଅଣଖାଦ୍ୟ ବାବଦରେ ଖର୍ଚ୍ଚ କରୁଛନ୍ତି, ଯାହା ସେମାନଙ୍କ ସମୃଦ୍ଧିରେ ବୃଦ୍ଧିକୁ ଦର୍ଶାଉଛି। ଆଜି ଭାରତରେ ମାତ୍ର ୧୦ ଟଙ୍କାରେ ୧ ଜିବି ଡାଟା ପରି ବିଶ୍ବର ସବୁଠୁ ଶସ୍ତା ଇଣ୍ଟରନେଟ୍ ସେବା ଉପଲବ୍ଧ। ୨୦୧୪ରେ ଏହା ୩୦୦ ଟଙ୍କା ହୋଇଥିବ। ଏହି ସ୍ବଳ୍ପ ମୂଲ୍ୟ ଡିଜିଟାଲ ଓ ଆର୍ଥିକ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ ସଂସ୍କାରକୁ ବ୍ୟାପକ ପରିମାଣରେ ବଢ଼ାଇବାକୁ ସାହାଯ୍ୟ କରିଛି।

ସମ୍ବାଦ: ଓଡ଼ିଶାର ଲୋକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ମୋଦୀଙ୍କ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟିରେ କ’ଣ ରହିଛି?

ମୋଦୀ: ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ଓଡ଼ିଶାର ଗୌରବକୁ ପୁନର୍ଜୀବିତ କରୁଛି। କେବଳ ଭାରତରେ ନୁହେଁ, ବିଶ୍ବରେ ମଧ୍ୟ ଓଡ଼ିଶାର ସଂସ୍କୃତି ଓ ଭାଷାର ଗୌରବକୁ ପୁନଃସ୍ଥାପିତ କରୁଛି। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ମହିଳା ନେତୃତ୍ବ ବିକାଶ। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ଓଡ଼ିଶାର ଯୁବକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ଓ ସୁଯୋଗ ଆଣିବା। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ଓଡ଼ିଶାରେ ଅଧିକ ଶିଳ୍ପ, ପୁଞ୍ଜିନିବେଶ ଓ ଭିତ୍ତିଭୂମିକୁ ସ୍ବାଗତ କରୁଛି। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ହେଉଛି ଦୁର୍ନୀତିମୁକ୍ତ ଓଡ଼ିଶା ଏବଂ ଚିଟ୍ ଫଣ୍ଡ୍ ଯୋଜନାରେ ହଜିଯାଇଥିବା ଟଙ୍କା ଫେରାଇ ଆଣିବା। ମୋର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି ‘ପିଏମ୍ ସୂର୍ଯ୍ୟଘର, ମାଗଣା ବିଜୁଳି’ ଯୋଜନାରେ ଓଡ଼ିଶାବାସୀଙ୍କ ବିଦ୍ୟୁତ୍ ବିଲ୍‌କୁ ଶୂନକୁ ଆଣିବା। ୨୦୨୭ ସୁଦ୍ଧା ଓଡ଼ିଶାରେ ୨୫ ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷପତି ଦିଦି ସୃଷ୍ଟି କରିବା ହେଉଛି ମୋ’ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ବିକଶିତ ଭାରତ ପାଇଁ ଏକ ବିକଶିତ ଓଡ଼ିଶା ହେଉଛି ମୋ’ ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି। ଆମର ସଂକଳ୍ପପତ୍ର ଓଡ଼ିଶାର ଉଜ୍ବଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଏକ ରୋଡ୍-ମ୍ୟାପ୍ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛି। ଉଦାହରଣ ସ୍ବରୂପ, ଆମେ ଓଡ଼ିଶାର ଦୀର୍ଘ ଉପକୂଳର ସମ୍ଭାବନାକୁ ଖୋଜି ବାହାର କରିବାକୁ ଚାହୁଛୁ। ଆମର ଇସ୍ତାହାର ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀମାନଙ୍କୁ ଅତ୍ୟାଧୁନିକ ଜ୍ଞାନକୌଶଳ, ଆଧୁନିକ ପଦ୍ଧତି ଏବଂ ଗୁରୁତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ସୂଚନା ପ୍ରଦାନ କରିବାର ପ୍ରତିଶ୍ରୁତି ଦେଉଛି। ଆମ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣରେ ଉତ୍ପାଦନ କ୍ଳଷ୍ଟର ପ୍ରତିଷ୍ଠା, ବୈଷୟିକ ଜ୍ଞାନକୌଶଳ, ଶୈବାଳ ଓ ମୁକ୍ତା ଚାଷକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିବା ଆଦି ରହିଛି।

ଆମର ଅନ୍ନଦାତା ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ମୁଖ୍ୟ ପ୍ରାଥମିକତା ଏବଂ ଓଡ଼ିଶାର କୃଷକମାନେ ଦେଶର ଅନ୍ୟ କୃଷକମାନଙ୍କ ସହିତ ସମାନ ଭାବରେ ଏମ୍ଏସ୍‌ପି ଗ୍ରହଣ କରିବା ଆମେ ନିିଶ୍ଚିତ କରିବୁ। ଓଡ଼ିଶାରେ ଶୀତଳ ଭଣ୍ଡାର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଓ କୃଷି ପ୍ରକ୍ରିୟାକରଣ ୟୁନିଟ୍ ସ୍ଥାପନ ପାଇଁ ଆମେ ୩,୦୦୦ କୋଟିର ‘କୃଷି ସଂରକ୍ଷଣ କୋଷ’ ସ୍ଥାପନ କରିବୁ। ଆମ ସଂକଳ୍ପ ହେଉଛି ଓଡ଼ିଶାର ଗରିବମାନଙ୍କ ପାଇଁ ୧୫ ଲକ୍ଷ ଗୃହ ନିର୍ମାଣ କରିବା ଏବଂ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ୍ ସରକାରର ଶହେ ଦିନ ଭିତରେ ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନାକୁ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରି ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସା ସୁବିଧା ଯୋଗାଇବା। ଓଡ଼ିଶାର ପ୍ରଗତିରେ ସିଧାସଳଖ ସହଯୋଗ କରୁଥିବା ଛୋଟ ବ୍ୟବସାୟ ଓ ଏମ୍ଏସ୍ଏମ୍ଇଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ‘ଇଜ୍‌ ଅଫ୍ ଡୁଇଂ’ ନିଶ୍ଚିତ କରିବାକୁ ଆମେ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ। ଆମ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣରେ ଓଡ଼ିଶାକୁ ଏକ ଉଦ୍ୟୋଗ କେନ୍ଦ୍ରରେ ପରିଣତ ସହ ନିଜସ୍ବ ଜ୍ଞାନକୌଶଳରେ ୪ଟି ଆଇଟି ପାର୍କ ସ୍ଥାପନ କରିବା ମଧ୍ୟ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତ।

Following is the clipping of the interview:

 Source: Sambad