1. अगले दशक के लिए भारत-जापान संयुक्त दृष्टिकोण
• आर्थिक साझेदारी, आर्थिक सुरक्षा, गतिशीलता, टिकाऊ पारिस्थितिकी, प्रौद्योगिकी और नवाचार, स्वास्थ्य, लोगों के बीच आपसी संपर्क और दोनो देशों के बीच आपसी संपर्क जैसे आठ क्षेत्रों में आर्थिक और कार्यात्मक सहयोग के लिए 10-वर्षीय रणनीतिक प्राथमिकता।

2. सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा

• हमारी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के अनुरूप समकालीन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे रक्षा और सुरक्षा सहयोग को विकसित करने की दिशा में एक व्यापक ढाँचा तैयार करना।

3. भारत-जापान मानव संसाधन आदान-प्रदान हेतु कार्य योजना

• अगले पाँच वर्षों में भारत और जापान के बीच 5,00,000 लोगों, विशेष रूप से भारत से जापान के लिए 50,000 कुशल और अर्ध-कुशल कर्मियों के आपसी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य योजना तैयार करना।

4. संयुक्त ऋण व्यवस्था पर सहयोग ज्ञापन

• कार्बन-मुक्त प्रौद्योगिकियों, उत्पादों, प्रणालियों और बुनियादी ढाँचे के प्रसार को सुगम बनाने की दिशा में एक उपकरण, जिससे भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्यों में योगदान मिलेगा, भारत में जापानी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और भारत का सतत विकास होगा।

5. भारत-जापान डिजिटल साझेदारी 2.0 पर समझौता ज्ञापन

• डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे, डिजिटल प्रतिभा के विकास और आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और सेमीकंडक्टर जैसे भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास में द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने हेतु एक दस्तावेज़।

6. खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग ज्ञापन

• महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशाअ में एक साधन, जिसमें प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों का विकास, अन्वेषण और खनन के लिए संयुक्त निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों के भंडारण के प्रयास शामिल हैं।

7. संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन के संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था तैयार करना।

• चंद्रयान-5 मिशन पर भारत और जापान के बीच सहयोग के लिए नियम और शर्तें निर्धारित करने वाला एक दस्तावेज़, जिससे एक ऐतिहासिक सहयोग को व्यावहारिक रूप मिलेगा।

8. स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया पर संयुक्त कार्य प्रणाली की घोषणा

• हाइड्रोजन/अमोनिया पर परियोजनाओं के अनुसंधान, निवेश और कार्यान्वयन को प्रोत्साहन देने और विकासशील प्रौद्योगिकियों के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक दस्तावेज़।

9. सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर सहयोग ज्ञापन

• प्रदर्शनियों, संग्रहालय सहयोग और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से कला और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को प्रोत्साहन देने के लिए एक साधन।

10. विकेंद्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन पर समझौता ज्ञापन

• अपशिष्ट जल के प्रभावी पुन: उपयोग और विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल प्रबंधन में सहयोग को प्रोत्साहन देने हेतु एक दस्तावेज़, जो जन स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

11. पर्यावरण सहयोग के क्षेत्र में सहयोग ज्ञापन

• पर्यावरण संरक्षण से संबंधित क्षेत्रों जैसे प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता का सतत उपयोग और पर्यावरण प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए एक सक्षम ढाँचा।

12. सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और जापान के विदेश मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन।

• विदेश नीति के क्षेत्र में आपसी समझ को प्रोत्साहन देने के लिए राजनयिकों, शिक्षाविदों, अधिकारियों, विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक व्यवस्था तैयार करना।

13. भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और जापान के शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईएक्सटी) के बीच संयुक्त आशय पत्र की घोषणा।

• वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने, स्टार्ट-अप और उद्योगों की भागीदारी से दोनों देशों के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक घोषणा।

अन्य उल्लेखनीय परिणाम

1. अगले दशक के लिए जापान से भारत में 10 ट्रिलियन जापानी येन का निजी निवेश का लक्ष्य।

2. भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिजों के साथ-साथ नई और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन को प्रोत्साहन देने के लिए आर्थिक सुरक्षा पहल शुरू की।

• दोनो देशों ने इन क्षेत्रों में वास्तविक सहयोग की एक उदाहरणात्मक सूची के रूप में एक आर्थिक सुरक्षा तथ्य पत्रक भी जारी किया।

3. भारत-जापान एआई पहल का शुभारंभ

• एक विश्वसनीय एआई इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देने के लिए व्यवसायों और स्टार्ट-अप्स के लिए बड़े भाषा मॉडल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और समर्थन में सहयोग को आगे बढ़ाना।

4. नेक्स्ट-जनरल मोबिलिटी पार्टनरशिप का शुभारंभ

• बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स और मोबिलिटी क्षेत्रों, विशेष रूप से रेलवे, विमानन, सड़क, शिपिंग और बंदरगाहों में जी2जी और बी2बी साझेदारी को बढ़ावा देना, जिसमें मोबिलिटी उत्पादों और समाधानों के मेक-इन-इंडिया पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

5. भारतीय और जापानी एसएमई के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत-जापान लघु और मध्यम उद्यम मंच का शुभारंभ, जो हमारी संबंधित अर्थव्यवस्थाओं के इंजन हैं।

6. ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आजीविका को बढ़ावा देने और बायोगैस एवं जैव ईंधन जैसे टिकाऊ ईंधनों से संबंधित प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान एवं विकास को आगे बढ़ाने के लिए टिकाऊ ईंधन पहल का शुभारंभ।

7. दोनो देशों के बीच उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान, जिसमें विदेश कार्यालयों द्वारा प्रत्येक दिशा में तीन दौरे आयोजित किए जाएँगे।

8. व्यापार, लोगों के बीच आपसी संपर्क और सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए भारत और कंसाई तथा क्यूशू के दो क्षेत्रों के बीच व्यावसायिक मंचों की स्थापना।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.