प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम खाल्तमागिन बटुल्गा ने संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंगोलिया के गंडान तेगचेन्लिंग मठ में भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों की प्रतिमा का अनावरण किया है।

प्रधानमंत्री ने 2015 में मंगोलिया यात्रा के दौरान गंडान तेगचेन्लिंग बौद्ध मठ में पूजा की थी और भारत तथा मंगोलिया में साझा बौद्धिक विरासत और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क के महत्व को ध्यान में रखते हुए बौद्ध मठ को भारत की ओर से भगवान बुद्ध की प्रतिमा उपहार स्वरूप देने की घोषणा की थी।

इस प्रतिमा में भगवान बुद्ध बैठी हुई मुद्रा में हैं और अपने शिष्यों को शांति, सहअस्तित्व और सद्भावना का उपदेश दे रहे हैं। यह प्रतिमा 6 से 7 सितंबर, 2019 तक मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर में दोनों देशों के बीच आयोजित द्विपक्षीय संवाद के तीसरे संस्करण के अवसर पर गंडान बौद्ध मठ में इस महीने के शुरू में स्थापित की गई थी। संवाद के माध्यम से दोनों देशों के बौद्ध धर्म के आध्यात्मिक नेताओं, विशेषज्ञों और विद्वानों को बौद्ध धर्म से जुड़े समकालीन विषयों पर चर्चा के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।

गंडान तेगचेन्लिंग बौद्ध मठ मंगोलिया में बौद्ध धर्म और इससे जुड़ी कई मूल्यवान धरोहरों का बड़ा केन्द्र है। शांति के लिए एशियाई बौद्ध सम्मेलन की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर यहां 11वीं महासभा का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में भारत, दक्षिण कोरिया, रूस, श्रीलंका, बंगलादेश, भूटान, नेपाल, उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और जापान सहित 14 देशों के डेढ़ सौ से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए थे।

प्रधानमंत्री और मंगोलिया के राष्ट्रपति द्वारा आज प्रतिमा का अनावरण भगवान बुद्ध के सार्वभौमिक संदेश के प्रति दोनों देशों के साझा सम्मान का प्रतीक है।

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प्रधानमंत्री ने इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप में विविधता की भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 15, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति के सोचने का तरीका अलग होता है तथा एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस प्रकार जल के प्रत्येक स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विविध विचारों और क्षमताओं के मिलन से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जो इस प्रकार है:

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”

यह सुभाषित यह संदेश देता है कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की सोचने की शैली अलग होती है तथा उसकी एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। जिस प्रकार एक स्रोत से दूसरे स्रोत के जल का स्वाद भिन्न होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। इन भिन्न विचारों और क्षमताओं के मेल से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”