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प्रधानमंत्री मोदी ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुर्बांगुली बर्दिमुहम्मेदोव के साथ व्यापक वार्ता की
पीएम मोदी और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच संस्थागत संपर्क को  मजबूत बनाने की जरूरत पर बल दिया
भारत और तुर्कमेनिस्तान सीमा पार के खतरों, आतंकवाद एवं ड्रग्स की अवैध तस्करी के खिलाफ अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने पर सहमत
भारत और तुर्कमेनिस्तान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में तेजी लाने के लिए काम करेंगे

तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति महामहिम श्री गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव के निमंत्रण पर भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 10-11 जुलाई, 2015 को तुर्कमेनिस्‍तान का आधिकारिक दौरा किया।

इस यात्रा के दौरान, भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के अलावा आपसी हित के क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्दों पर तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति श्री गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव के साथ व्‍यापक चर्चा की। दोनों नेताओं ने गहरे सभ्‍यतागत, ऐतिहासिक एवं सांस्‍कृतिक सहलग्‍नाताओं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय एवं क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता में साझे हित पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों के सतत विकास पर संतोष व्‍यक्‍त किया।



राजनीतिक और राजनयिक भागीदारी

दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्‍च स्‍तरीय आदान - प्रदान में वृद्धि को संतोष के साथ नोट किया तथा दोनों देशों के बीच सहयोग की गति को सुदृढ़ करने में नियमित रूप से द्विपक्षीय बातचीत के महत्‍व को दोहराया। दोनों नेताओं ने सभी स्‍तरों पर आदान - प्रदान में सतत वृद्धि को प्रोत्‍साहित किया जिसमें नेताओं, मंत्रियों, संसद सदस्‍यों एवं वरिष्‍ठ अधिकारियों के बीच द्विपक्षीय रूप में आदान - प्रदान और बहुपक्षीय कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्‍त समय में आदान - प्रदान शामिल है।

दोनों नेताओं ने 8 अप्रैल, 2015 को अशगाबाट में आयोजित व्‍यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग पर भारत - तुर्कमेनिस्‍तान अंतर्सरकारी संयुक्‍त आयोग की 5वीं बैठक की सफल समाप्ति का स्‍वागत किया। उन्‍होंने नोट किया कि इस आयोग ने सहयोग के नए एवं संभावित क्षेत्रों की पहचान की है तथा उन्‍होंने इस बैठक में लिए गए निर्णयों को कारगर ढंग से कार्यान्वित करने का आह्वान किया। उन्‍होंने अन्‍य संस्‍थानिक सहलग्‍नताओं को सुदृढ़ करने की आवश्‍यकता पर जोर दिया तथा इस संबंध में अपने - अपने वरिष्‍ठ अधिकारियों को विद्यमान तंत्रों जैसे कि विदेश कार्यालय परामर्श, कांसुलर परामर्श, ऊर्जा पर संयुक्‍त कार्य समूह के माध्‍यम से और साथ ही परस्‍पर सहमत मुद्दों पर अतिरिक्‍त तंत्र स्‍थापित करके द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर नियमित रूप से वार्ता का आयोजन करने का निर्देश दिया।

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

दोनों नेताओं ने नोट किया कि हाल के वर्षों में अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद का स्‍वरूप एवं तेजी से इसका विस्‍तार आज सर्वाधिक गंभीर विश्‍व व्‍यापी खतरों में से एक है। दोनों नेताओं ने सुरक्षा से जुड़े विभिन्‍न खतरों से निपटने में चल रहे सहयोग को गहन करने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किया। वे सीमा पारीय खतरों जैसे कि आतंकवाद, संगठित अपराध तथा ड्रग्‍स की अवैध तस्‍करी के विरूद्ध प्रयासों में वृद्धि करने पर भी सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग करार पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया, जो उच्‍च एवं मध्‍यम स्‍तरीय यात्राओं के आदान - प्रदान, दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों और अन्‍य संगत संगठनों के बीच प्रशिक्षण एवं वार्ता के माध्‍यम से द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को गहन करने की रूपरेखा प्रदान करेगा। यह क्षमता निर्माण एवं तकनीकी सहयोग को भी संभव बनाएगा और इस प्रकार, रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी को एक नई गति प्रदान करेगा।

आर्थिक भागीदारी

दोनों नेताओं ने इस बात को स्‍वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय व्‍यापार में निरंतर वृद्धि के बावजूद दोनों देशों के बीच व्‍यापार की मात्रा संभावित रूप से दोनों देशों के परस्‍पर लाभ के लिए कई गुना अधिक हो सकती है।

इस प्रयोजन के लिए, दोनों नेता द्विपक्षीय व्‍यापार, निवेश एवं आर्थिक सहयोग के स्‍तरों में तेजी से वृद्धि करने की दिशा में सक्रियता से काम करने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने विभिन्‍न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्‍प किया तथा दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों के रूप में ऊर्जा, भेषज पदार्थ, परिवहन, संचार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, वस्‍त्र उद्योग, रसायन एवं फार्मास्‍यूटिकल उद्योग, निर्माण एवं कृषि प्रसंस्‍करण की पहचान की।

दोनों नेता दोनों देशों की निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने और अनुकूल स्थितियां सृजित करने पर भी सहमत हुए जिसमें दोनों देशों में अवसंरचना एवं निवेश की विभिन्‍न परियोजनाओं में संयुक्‍त उद्यमों का निर्माण शामिल है।

दोनों नेताओं ने भारत और तुर्कमेनिस्‍तान दोनों में राष्‍ट्रीय प्रदर्शनियों, व्‍यवसाय मंचों एवं अन्‍य कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अपनी - अपनी तत्‍परता की फिर से पुष्टि की जिसमें दोनों देशों के बीच कारोबारी बातचीत एवं सहलग्‍नता को सुगम बनाने के लिए दोनों देशों के कारोबारी समुदाय शामिल होंगे।

ऊर्जा एवं पेट्रो रसायन



दोनों नेताओं ने नोट किया कि ऊर्जा क्षेत्र, विशेष रूप से, तुर्कमेनिस्‍तान - अफगानिस्‍तान - पाकिस्‍तान - भारत (टी ए पी आई) पाइपलाइन परियोजना में सहयोग दोनों देशों के बीच आर्थिक भागीदारी का मुख्‍य स्‍तंभ है।

उन्‍होंने इस बात को स्‍वीकार किया कि टी ए पी आई परियोजना के कार्यान्‍वयन का दोनों देशों के बीच व्‍यापार पर परिवर्तनकारी प्रभाव होगा और उन्‍होंने इस महत्‍वपूर्ण क्षेत्रीय परियोजना को जल्‍दी से कार्यान्वित करने के लिए आवश्‍यक कदम उठाने का निर्णय लिया। उन्‍होंने नवंबर, 2014 में अशगाबाट एक विशेष प्रयोजन वाहन (एस पी वी) के रूप में तापी लिमिटेड की स्‍थापना का स्‍वागत किया तथा इस बात को स्‍वीकार किया कि यह इस सामरिक परियोजना के कार्यान्‍वयन में एक मील पत्‍थर है।

दोनों नेताओं ने चार देशों के लोगों के साझे लाभ के लिए इस सामरिक परियोजना के समय पर कार्यान्‍वयन की दिशा में अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की तथा इस बात को नोट किया कि इस परियोजना के लिए कंसोर्टियम लीडर का चयन, जिसे एक सितंबर, 2015 तक अंतिम रूप दिया जाएगा, इस परियोजना के जल्‍दी से कार्यान्‍वयन की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम होगा।

दोनों नेताओं ने रसायन एवं पेट्रो रसायन के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग में वृद्धि के साथ ही तुर्कमेनिस्‍तान में ओ एन जी सी विदेश लिमिटेड का एक प्रतिनिधि कार्यालय खोलने का स्‍वागत किया। दोनों नेताओं ने तुर्कमेनिस्‍तान से लंबी अवधि तक यूरिया की आपूर्ति के लिए एक रूपरेखा प्रदान करने के लिए राज्‍य प्रतिष्‍ठान तुर्कमेंहिमिया और भारतीय पी एस यू राष्‍ट्रीय केमिकल्‍स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर होने का भी स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं ने तुर्कमेनिस्‍तान की संस्‍थाओं के साथ मिलकर तुर्कमेनिस्‍तान में यूरिया उत्‍पादन की एक सुविधा स्‍थापित करने के लिए भारत के प्रस्‍ताव का भी स्‍वागत किया तथा नोट किया कि इस तरह के प्रस्‍ताव से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के दायरे का विस्‍तार होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सूचित किया कि तेल एवं गैस क्षेत्र में भारत की सार्वजनिक कंपनियों के पास प्रशिक्षण, डिजाइनिंग, निर्माण, अन्‍वेषण और उत्‍पादन में विविध विशेषज्ञता है और तुर्कमेनिस्‍तान की कंपनियों को इन भारतीय फर्मों के साथ दीर्घ अवधि के सहयोग में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव ने इस प्रस्‍ताव का स्‍वागत किया तथा इस बात को स्‍वीकार किया कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता तुर्कमेनिस्‍तान के हाइड्रो कार्बन एवं पेट्रो रसायन क्षेत्र का और विकास करने के लिए इसके प्रयासों में मदद करने के लिए मूल्‍यावान हो सकती है।

परिवहन एवं संपर्क

दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच संपर्क के अतिरिक्‍त विकल्‍पों के लिए परिवहन के वैकल्पिक कोरिडोर का पता लगाने में साथ मिलकर काम करने की अपनी मंशा की फिर से पुष्टि की। दोनों नेताओं ने जून, 2015 में दिल्‍ली में भारत और तुर्कमेनिस्‍तान के बीच संपर्क पर पहली विशेषज्ञ स्‍तरीय बैठक का स्‍वागत किया तथा वे भारत और तुर्कमेनिस्‍तान के बीच संकर्प के विभिन्‍न विकल्‍पों का पता लगाने के लिए संयुक्‍त कार्य समूह की रूपरेखा के तहत चर्चा एवं बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए। तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने अशगाबाट करार में शामिल होने के लिए भारत की मंशा का स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं ने मध्‍य एशिया के अन्‍य देशों तथा कैस्पियन क्षेत्र के लिए एक महत्‍वपूर्ण गेटवे के रूप में तुर्कमेनिस्‍तान के महत्‍व को स्‍वीकार किया तथा वे माल की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए परिवहन कोरिडोर एवं अवसंरचना की वृद्धि करने में एक - दूसरे की पहलों का समर्थन करने पर सहमत हुए। तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने तुर्कमेनिस्‍तान सहित मध्‍य एशिया और इससे इतर देशों और भारत के बीच माल के परिवहन के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय उत्‍तर - दक्षिण परिवहन कोरिडोर (आई एन एस टी सी) को बढ़ावा देने में भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की तथा सूचित किया कि ऊपर उल्लिखित कोरिडोर का पक्षकार बनने पर तुर्कमेनिस्‍तान विचार करेगा। भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नोट किया कि हाल ही में जिस कजाकिस्‍तान - तुर्कमेनिस्‍तान - ईरान रेल लाइन का उद्घाटन किया गया है वह भारत और तुर्कमेनिस्‍तान तथा इससे आगे के देशों के बीच माल एवं वस्‍तुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए आई एन एस टी सी का एक संबद्ध कोरिडोर हो सकती है।



दोनों नेताओं ने नोट किया कि दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क से कुछ हद तक दोनों देशों के बीच सीधे भूतल संपर्क के अभाव की इस प्राकृतिक बाधा दूर हो सकती है। इस संदर्भ में, उन्‍होंने दोनों देशों के बीच उड़ानों की बारंबारता बढ़ाने का आह्वान किया जिसमें व्‍यवहार्यता में वृद्धि के लिए उड़ान के पांच अधिकार प्रदान करना शामिल है। दोनों नेताओं ने महसूस किया कि दोनों देशों के बीच सीधे हवाई संपर्क की क्षमता का बेहतर उपयोग भारत से तुर्कमेनिस्‍तान को माल के निर्यात को प्रोत्‍साहित करने के लिए किया जा सकता है तथा वे अपनी - अपनी एयरलाइंस के माध्‍यम से कार्गो के परिवहन को प्रोत्‍साहित करने के लिए आवश्‍यक कदम उठाने पर सहमत हुए।

क्षमता निर्माण तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

दोनों नेताओं ने तुर्कमेनिस्‍तान के नागरिकों के क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास में तथा तुर्कमेनिस्‍तान की विकास कर रही अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्‍न क्षेत्रों में तुर्कमेनिस्‍तान में प्रतिभावान पेशेवरों के एक पूल का सृजन करने में भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आई टी ई सी) कार्यक्रम की भूमिका की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने तुर्कमेनिस्‍तान सरकार की इच्‍छा के अनुसार नए क्षेत्रों में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए भारत की तत्‍परता से अवगत कराया। तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने इस प्रस्‍ताव का स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं ने तुर्कमेनिस्‍तान के नागरिकों को लगातार उन्‍नत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भारत की सहायता से अशगाबाट में भारत - तुर्कमेनिस्‍तान औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र के सफल उन्‍नयन का स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग कार्यक्रम पर हस्‍ताक्षर होने का भी स्‍वागत किया, जो इस महत्‍वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग के लिए एक रूपरेखा को अधिक गति प्रदान करेगा।

सांस्‍कृतिक सहयोग

दोनों नेताओं ने इस बात को रेखांकित किया कि सांस्‍कृतिक आदान - प्रदान ने दोनों देशों के बीच व्‍यापक सहयोग के विकास में और दोनों देशों के लोगों के बीच मैत्री एवं परस्‍पर समझ के रिश्‍ते को गहन करने में महत्‍वपूर्ण एवं सकारात्‍मक योगदान दिया है। दोनों नेताओं ने नोट किया कि वर्ष 2014 में भारत में तुर्कमेनिस्‍तान सांस्‍कृतिक महोत्‍सव तथा भारतीय सांस्‍कृतिक संबद्ध परिषद (आई सी सी आर) का इस साल तुर्कमेनिस्‍तान के विभिन्‍न भागों में नमस्‍ते तुर्कमेनिस्‍तान महोत्‍सव का सफल आयोजन किया गया तथा भविष्‍य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच सांस्‍कृतिक सहयोग कार्यक्रम को जल्‍दी से अंतिम रूप देने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने लोकप्रिय स्‍तर पर मजबूत रिश्‍तों का निर्माण करने में तुर्कमेनिस्‍तान के छात्रों को भारतीय सांस्‍कृतिक संबद्ध परिषद (आई सी सी आर) द्वारा प्रदान की गई छात्रवृत्तियों के योगदान के महत्‍व को भी स्‍वीकार किया।

दोनों नेताओं ने अशगाबाट में एक परंपरागत औषधि एवं योग केंद्र के उद्घाटन के माध्‍यम से अपने सांस्‍कृतिक संबंधों में एक नए अध्‍याय की शुरूआत का आभार प्रकट किया। दोनों नेताओं ने योग के सार्वभौमिक महत्‍व तथा स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके सकारात्‍मक एवं समग्र प्रभाव को रेखांकित किया। दोनों नेताओं ने यह स्‍वीकार किया कि परंपरागत औषधि केंद्र भारत और तुर्कमेनिस्‍तानके परंपरागत चिकित्‍सा ज्ञान एवं प्रथा को संयोजित करने में मदद करेगा, जिससे लोगों को काफी लाभ होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस (आई डी वाई) के रूप में 21 जून को घोषित करने में उनके समर्थन के लिए और अशगाबाट में पहले अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के व्‍यापक समारोहों के लिए राष्‍ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव का धन्‍यवाद किया।

दोनों नेताओं ने अशगाबाट में महात्‍मा गांधी जी की एक आवक्ष प्रतिमा के अनावरण का स्‍वागत किया जो शांतिपूर्ण विश्‍व व्‍यवस्‍था की दिशा में साथ मिलकर काम करने के लिए दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

दोनों नेता 2017 में अशगाबाट में 5वें एशियाई इंडोर और मार्शल आर्ट गेम्‍स के सफल आयोजन के लिए काम करने पर सहमत हुए जिसमें इस यात्रा के दौरान हस्‍ताक्षरित खेल के क्षेत्र में करार के अंदर काम करना शामिल है।



अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग

दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए अपनी - अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया जिसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र तथा अन्‍य क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों में बातचीत में वृद्धि शामिल है, जिसके वे सदस्‍य हैं। उन्‍होंने वैश्विक मुद्दों को दूर करने और संपोषणीय विकास की सुरक्षा करने में एक सार्वभौमिक इंस्‍ट्रूमेंट के रूप में संयुक्‍त राष्‍ट्र तथा इसकी संस्‍थाओं की भूमिका में वृद्धि के महत्‍व को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में स्‍थाई तटस्‍थता के अंगीकरण की 20वीं वर्षगांठ पर तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव और तुर्कमेनिस्‍तान सरकार को बधाई दी तथा नोट किया कि इस नीति ने तुर्कमेनिस्‍तान में और इस संपूर्ण क्षेत्र में शांति, विकास और स्थिरता में योगदान दिया है।

दोनों नेताओं ने महत्‍वपूर्ण समकालीन चुनौतियों से निपटने में संयुक्‍त राष्‍ट्र की भूमिका को सुदृढ़ करने एवं विस्‍तारित करने के संदर्भ में संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करने के लिए तात्‍कालिक आवश्‍यकता को स्‍वीकार किया।

दोनों पक्ष संयुक्‍त राष्‍ट्र की रूपरेखा के अंदर बहुपक्षीय फार्मेट में अपने सहयोग को और सुदृढ़ करेंगे, दोनों देशों के विकास के लिए अनुकूल अंतर्राष्‍ट्रीय माहौल सृजित करने के लिए उद्देश्‍य से घनिष्‍ठ समन्‍वय एवं संपर्क स्‍थापित करेंगे।

आगे की राह

दोनों नेताओं ने उन मुद्दों पर निकटता से काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की जिन पर उनके बीच चर्चा हुई तथा वे अपनी आधिकारिक वार्ता के दौरान विद्यमान द्विपक्षीय तंत्रों एवं अन्‍य साधनों के माध्‍यम से आने वाले दिनों में घनिष्‍ठ द्विपक्षीय साझेदारी का निर्माण करने के लिए ठोस परिणामों का सुनिश्‍चय करने पर सहमत हुए।

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की यात्रा ने भारत और तुर्कमेनिस्‍तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सौहार्द्रपूर्ण संबंधों को सुदृढ़ एवं गहन करने में तथा दोनों देशों के बीच परस्‍पर लाभप्रद साझेदारी बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा को परिभाषित करने में मदद की है।

भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रदान किए गए गर्मजोशीपूर्ण स्‍वागत के लिए स्‍वागत के लिए तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति गुरबांगुली बर्डीमुहामेदेव और तुर्कमेनिस्‍तान के लोगों का आभार प्रकट किया। उन्‍होंने सुविधाजनक समय पर भारत गणराज्‍य का आधिकारिक दौरा करने के लिए तुर्कमेनिस्‍तान के राष्‍ट्रपति को आमंत्रित किया। इस निमंत्रण को सहर्ष स्‍वीकार कर लिया गया।

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January 23, 2022
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Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !