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नरेंद्र मोदी का संयुक्त अरब अमीरात दौरा, 34 साल में यूएई का दौरा करने प्रथम प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक नई और व्यापक सामरिक भागीदारी की शुरुआत का संकेत
भारत और संयुक्त अरब अमीरात सामरिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाएंगे
भारत और यूएई पूरे क्षेत्र में सामूहिक रूप से उग्रवाद और आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सहमत
भारत और संयुक्त अरब अमीरात कानून प्रवर्तन, एंटी मनी लॉन्ड्रिंग एवं नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने में सहयोग को मजबूत करेंगे
दोनों देश आतंकवाद, कट्टरवाद और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए साइबर के उपयोग पर रोकथाम सहित साइबर सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देंगे
भारत और संयुक्त अरब अमीरात खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाएंगे

प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत, महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए।  

  1. महामहिम क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन जायेद बिन अल नाहयान के निमंत्रण पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 16 और 17 अगस्‍त, 2015 को संयुक्‍त अरब अमीरात का दौरा किया। 

  2. अनेक बदलावों तथा बदलते अवसरों एवं चुनौतियों से भारी इस दुनिया में 34 साल बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री की संयुक्‍त अरब अमीरात की यात्रा भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच एक नई एवं व्‍यापक सामरिक साझेदारी की शुरूआत है। 

  3. हाल के दशकों में, संयुक्‍त अरब अमीरात की आर्थिक प्रगति वैश्विक स्‍तर पर सफलता की गाथाओं में से एक है, जिससे यह देश अग्रणी क्षेत्र के रूप में उभरा है तथा अंतर्राष्‍ट्रीय केंद्र बनता जा रहा है जो पूरी दुनिया से लोगों और कारोबार को आकर्षित कर रहा है। भारत विश्‍व की प्रमुख शक्तियों में से एक के रूप में उभरा है तथा वैश्विक शांति एवं स्थिरता को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहा है। भारत के प्रतिभावान मानव संसाधनों तथा विशाल बाजारों के साथ भारत की तेजी से प्रगति एवं आधुनिकीकरण की वजह से यह वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था की धुरी बन गया है। दोनों देशों की गतिशीलता तेजी से बढ़ती आर्थिक साझेदारी में परिवर्तित हुई है जिसके फलस्वरूप भारत संयुक्‍त अरब अमीरात का दूसरा सबसे बड़ा व्‍यापार साझेदार बन गया है और संयुक्‍त अरब अमीरात न केवल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्‍यापार साझेदार है अपितु इस क्षेत्र के लिए तथा इससे आगे के क्षेत्र के लिए भारत का गेटवे भी बन गया है। 

  4. भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच वाणिज्‍य, संस्‍कृति और भाई-चारे के सदियों पुराने रिश्‍ते हैं। आज 2.5 मिलियन से अधिक भारतीय समुदाय संयुक्‍त अरब अमीरात के जीवंत समाज एवं आर्थिक सफलता का एक प्रमुख हिस्‍सा है। भारत में उनका महत्‍वपूर्ण आर्थिक योगदान है तथा दोनों देशों के बीच मैत्री के अमिट मानव संबंध में भी उनका योगदान है। 

  5. आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, संस्‍कृति, कांसुलर तथा लोगों के बीच आपसी संपर्क सहित करारों की व्‍यापक रूपरेखा हमारे संबंध के पूर्ण स्‍पेक्‍ट्रम में द्विपक्षीय सहयोग को ऊपर उठाने के लिए ठोस नींव का निर्माण करते हैं। 

  6. आज जब भारत ने अपने आर्थिक सुधारों की गति तेज कर दी है तथा निवेश एवं कारोबार के अपने माहौल में सुधार कर रहा है तथा संयुक्‍त अरब अमीरात उत्‍तरोत्‍तर उन्‍नत एवं विविधतापूर्ण अर्थव्‍यवस्‍था बन गया है, दोनों देशों में न केवल अपने दोनों देशों की स्‍थाई समृद्धि के लिए अपितु इस क्षेत्र में प्रगति को आगे बढ़ाने और एशियाई शताब्दी के विजन को साकार करने के लिए भी एक परिवर्तनकारी आर्थिक साझेदारी का निर्माण करने की क्षमता है। 

  7. इसके बावजूद समृद्धि एवं प्रगति के उनके साझे विजन के समक्ष इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता एवं सुरक्षा के लिए अनेक साझे खतरों की वजह से चुनौतियां मौजूद हैं। साझे आदर्शों एवं आपस में जुड़े हितों के आधार पर इन चुनौतियों से निपटने के लिए मिला-जुला प्रयास दोनों देशों तथा उनके क्षेत्र के भविष्‍य के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। 

  8. संयुक्‍त अरब अमीरात खाड़ी तथा पश्चिम एशिया क्षेत्र तथा इसके प्रमुख आर्थिक केंद्र के मर्म में स्थित है। खाड़ी क्षेत्र में सात मिलियन भारतीय नागरिकों की मौजूदगी की वजह से भारत के इस क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा, व्‍यापार और निवेश हित हैं। दोनों राष्‍ट्र खुलेपन, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्‍व तथा सामाजिक सामंजस्‍य के लिए भी प्रतिबद्ध हैं जो उनकी सांस्‍कृतिक परंपराओं, आध्‍यात्मिक मूल्‍यों तथा साझी विरासत पर आधारित हैं। संयुक्‍त अरब अमीरात बहु-सांस्‍कृतिक समाज का एक जीवंत उदाहरण है। भारत अद्वितीय विविधता, धार्मिक बहुलवाद और संयुक्‍त संस्‍कृति का देश है। 

  9. दोनों राष्‍ट्र अतिवाद तथा धर्म एवं आतंकवाद के बीच किसी संबंध को अस्‍वीकार करते हैं। वे दूसरे देशों के विरूद्ध आतंकवाद को उचित ठहराने, समर्थन करने और प्रायोजित करने के लिए राज्‍यों सहित धर्म के प्रयोग संबंधी प्रयासों की निंदा करते हैं। वे पश्चिम एवं दक्षिण एशिया सहित किसी भी क्षेत्र में राजनीतिक मुद्दों एवं विवादों को धार्मिक एवं अलगाववादी रंग देने के लिए देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी निंदा करते हैं तथा अपने उद्देश्‍यों की प्राप्ति के लिए आतंकवाद के प्रयोग की भर्त्‍सना करते हैं। 

  10. लोगों के बीच नजदीकी, इतिहास, सांस्‍कृतिक बंधुत्‍व, मजबूत संबंध, प्राकृतिक मेल-जोल, साझी आकांक्षाएं तथा साझी चुनौतियां भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच प्राकृतिक सामरिक साझेदारी की असीम संभावना का सृजन करती हैं। इसके बावजूद, अतीत में, दोनों देशों की सरकारों के बीच संबंध उनके लोगों के बीच संबंधों में घातांकी वृद्धि या इस साझेदारी के वायदों के अनुरूप नहीं रहे हैं। तथापि, भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच घनिष्‍ठ सामरिक साझेदारी की आवश्‍यकता इससे पहले कभी इतनी प्रबल या अधिक अत्‍यावश्‍यक नहीं रही है। 

  11. आज आबू धाबी में महामहिम क्राउन प्रिंस मोहम्‍मद बिन जायेद अल नाहयान तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक क्षण का लाभ उठाने के लिए सहमत हुए तथा 21वीं शताब्‍दी के लिए अपनी साझेदारी में एक नए पथ का निर्माण करने की जिम्‍मेदारी को साझा किया। दोनों नेता निम्‍नलिखित पर सहमत हुए : 

    1. भारत - संयुक्‍त अरब अमीरात साझेदारी को व्‍यापक सामरिक साझेदारी के रूप में स्‍तरोन्‍नत करना। 

    2. नफरत फैलाने, आतंकवाद फैलाने एवं उसे उचित ठहराने या राजनीतिक उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए समूहों एवं देशों द्वारा धर्म के दुरूपयोग तथा कट्टरवाद की खिलाफत करने वाले प्रयासों का समन्‍वय करना। दोनों पक्ष शांति, सहिष्‍णुता, समावेशीपन और कल्‍याण, जो सभी धर्मों में अंतर्निहित है, के मूल्‍यों को बढ़ावा देने के लिए धार्मिक विद्वानों एवं बुद्धिजीवियों के नियमित आदान – प्रदान को सुगम बनाएंगे तथा सम्‍मेलनों एवं सेमिनारों का आयोजन करेंगे। 

    3. सभी रूपों एवं अभिव्‍यक्तियों के आतंकवाद की निंदा करते हैं और विरोध करते हैं, जहां कहीं भी और जिस किसी द्वारा भी किया गया हो, सभी देशों से दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवाद के प्रयोग का त्‍याग करने एवं अस्‍वीकार करने का आह्वान करते हैं, आतंकवाद की अवसंरचनाओं को नष्‍ट करने का आह्वान करते हैं, जहां कहीं भी वे मौजूद हों, और आतंकवाद के दोषियों को दंडित करने का आह्वान करते हैं। 

    4. आतंकवाद की खिलाफत से जुड़ी कार्यवाहियों, आसूचना की हिस्‍सेदारी तथा क्षमता निर्माण में सहयोग में वृद्धि करना। 

    5. संयुक्‍त राष्‍ट्र में अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर भारत के प्रस्‍तावित व्‍यापक अभिसमय को अपनाने के लिए साथ मिलकर काम करना। 

    6. ऐसी निधियों के प्रवाह को नियंत्रित करने, विनियमित करने और सूचना को साझा करने के लिए साथ मिलकर काम करना जिनका संबंध कट्टरवाद की गतिविधियों से हो सकता है तथा अवैध प्रवाह को रोकने में सहयोग करना तथा संबंधित व्‍यक्तियों एवं संगठनों के विरूद्ध कार्रवाई करना। 

    7. कानून प्रवर्तन, धन शोधनरोधी प्रयासों, दवाओं की तस्‍करी तथा अन्‍य राष्‍ट्रपारीय अपराधों, जबरन वसूली की व्‍यवस्‍थाओं तथा पुलिस प्रशिक्षण में सहयोग को सुदृढ़ करना। 

    8. आतंकवाद, कट्टरवाद तथा सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए साइबर के उपयोग पर रोकथाम सहित साइबर सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देना। 

    9. अपने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाह‍कारों तथा राष्‍ट्रीय सुरक्षा परिषदों के बीच वार्ता स्‍थापित करना। दोनों देशों से सुरक्षा के लिए अन्‍य उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधियों के साथ मिलकर राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की हर छह महीने में बैठक होगी। दोनों पक्ष प्रचालन संबंधी सहयोग में और सुधार के लिए अपनी – अपनी सुरक्षा एजेंसियों के बीच संपर्क बिंदु भी स्‍थापित करेंगे। 

    10. खाड़ी तथा हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुदृढ़ करने के लिए सहयोग करना जो दोनों देशों की सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है। 

    11. प्राकृतिक आपदाओं तथा संघर्ष की स्थितियों में मानवीय सहायता तथा रिक्‍तीकरण के लिए सहयोग एवं परस्‍पर प्रचालनीयता को बढ़ावा देना। 

    12. नौसेना, वायु सेना, थल सेना एवं विशेष बलों के नियमित अभ्‍यास एवं प्रशिक्षण के माध्‍यम से रक्षा संबंधों एवं तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना। भारत ने फरवरी, 2016 में भारत में अंतर्राष्‍ट्रीय बेड़ा सुरक्षा में भाग लेने के लिए संयुक्‍त अरब अमीरात के निर्णय का गर्मजोशी के साथ स्‍वागत किया। 

    13. भारत में रक्षा उपकरणों के विनिर्माण में सहयोग करना। 

    14. वृहद दक्षिण एशिया, खाड़ी एवं पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति, सामंजस्‍य, स्थिरता, समावेशीपन तथा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करना। 

    15. संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयासों का समर्थन करना तथा राष्‍ट्रों के बीच संबंधों के संचालन तथा विवादों के समाधान में संप्रभुता तथा दखल न देने के सिद्धांतों का अनुपालन को बढ़ावा देना। 

    16. सभी देशों से हिंसा एवं आतंकवाद का सहारा लिए बगैर द्विपक्षीय एवं शांतिपूर्ण ढंग से विवादों का समाधान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह से सम्‍मान करने और निष्‍ठापूर्वक लागू करने का आह्वान करना। 

    17. दोनों देशों की सरकारों के बीच एक सामरिक सुरक्षा वार्ता स्‍थापित करना। 

    18. यह स्‍वीकार करते हुए कि भारत निवेश के अवसरों के नए फ्रंटीयर के रूप में उभर रहा है, विशेष रूप से व्‍यापार एवं निवेश को सुगम बनाने, भारत में अपना निवेश बढ़ाने के लिए संयुक्‍त अरब अमीरात की निवेश करने वाली संस्‍थाओं को प्रोत्‍साहित करने के लिए सरकार द्वारा नई पहलों देखते हुए, जिसमें भारत - संयुक्‍त अरब अमीरात अवसंरचना निवेश निधि के माध्‍यम से निवेश शामिल है, विशेष रूप से रेलवे, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डा, और औद्योगिक कोरिडोर एवं पार्कों में अगली पीढ़ी की अवसंरचना के तेजी से विस्‍तार के लिए भारत की योजनाओं में निवेश का समर्थन करने के लिए 75 बिलियन अमरीकी डालर के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से। 

    19. संयुक्‍त अरब अमीरात में अवसंरचना विकास में भारत की कंपनियों की भागीदारी को सुगम बनाना। 

    20. ऊर्जा क्षेत्र में सामरिक साझेदारी को बढ़ावा देना जिसमें सामरिक पेट्रालियम भंडार के विकास, अपस्‍ट्रीम एवं डाउनस्‍ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्रों में भारत में संयुक्‍त अरब अमीरात की भागीदारी तथा तीसरे देशों में साझेदारियां शामिल हैं। 

    21. दोनों देशों के बीच व्‍यापार को और बढ़ावा देना तथा इस क्षेत्र में तथा इससे परे व्‍यापार के विस्‍तार के लिए अपने – अपने स्‍थानों एवं अवसंरचना का प्रयोग करना और अगले पांच वर्षों में व्‍यापार में 60 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करना। 

    22. संयुक्‍त अरब अमीरात में एक जीवंत औद्योगिक आधार का सृजन करने के लिए मध्‍यम और छोटे उद्यमों में भारत की विशेषज्ञता का उपयोग करना, जिससे भारत के उद्यमियों को भी लाभ हो सकता है। 

    23. संयुक्‍त अरब अमीरात की उत्‍तरोत्‍तर परिष्‍कृत शैक्षिक संस्‍थाओं तथा भारत के विश्‍वविद्यालयों तथा उच्‍च अनुसंधान संस्‍थाओं के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना। नवीकरणीय ऊर्जा, संपोषणीय विकास, मरू‍स्‍थलीय कृषि, मरूस्‍थल पारिस्थितिकी तथा शहरी विकास तथा उन्‍नत स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख के क्षेत्रों सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना। 

    24. अंतरिक्ष में सहयोग को बढ़ावा देना जिसमें उपग्रहों का संयुक्‍त विकास एवं प्रक्षेपण, जमीनी अवसंरचना तथा अंतरिक्ष का अनुप्रयोग शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में मंगल मिशन शुरू करने के लिए अल बिन में पश्चिम एशिया के पहले अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र को स्‍थापित करने संबंधी संयुक्‍त अरब अमीरात की योजना का स्‍वागत किया। 

    25. परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोगों में सहयोग करना जिसमें सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, कृषि तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में परमाणु ऊर्जा का प्रयोग शामिल है। 

    26. संयुक्‍त राष्‍ट्र की 70वीं वर्षगांठ संयुक्‍त राष्‍ट्र के जल्‍दी सुधारों पर दबाव बनाने के लिए एक अच्‍छा अवसर है, और यह कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अंतर्सरकारी वार्ता को जल्‍दी से पूरा किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने संशोधित संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थाई सदस्‍यता के लिए भारत की उम्‍मीदवारी के लिए संयुक्‍त अरब अमीरात के समर्थन के लिए उनका धन्‍यवाद किया। 

    27. प्रमुख उद्देश्‍य के रूप में 2030 तक गरीबी उन्‍मूलन के साथ 2015 पश्‍चात विकास एजेंडा का अंतिम रूप दिया जाना एक स्‍वागत योग्‍य घटना है। 

    28. दिसंबर, 2015 में पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन से एक कारगर करार उत्‍पन्‍न होना चाहिए जिसमें स्‍वच्‍छ ऊर्जा में संक्रमण के लिए विकासशील देशों को साधनों एवं प्रौद्योगिकियों का प्रावधान शामिल हो। 

    29. अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के लिए वैश्विक स्‍तर पर अत्‍यधिक समर्थन विश्‍व के लिए शांतिपूर्ण, अधिक संतुलित, स्‍वस्‍थ और संपोषणीय भविष्‍य की तलाश में साथ मिलकर काम करने की वैश्विक समुदाय की सामर्थ्‍य का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल 21 जून को अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के लिए संयुक्‍त अरब अमीरात के प्रबल समर्थन के लिए उनका धन्‍यवाद किया। 

    30. भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात खुले एवं बहु-सांस्‍कृतिक समाजों के ज्‍वलंत उदाहरण हैं, जिनको शांतिपूर्ण एवं समावेशी वैश्विक समुदाय के लिए इन मूल्‍यों को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए। भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात एक दूसरे के देशों में सांस्‍कृतिक एवं खेल संबंधी आदान – प्रदान में भी वृद्धि करेंगे। 

    31. लोगों के बीच आपसी संपर्क भारत - संयुक्‍त अरब अमीरात संबंधों के केंद्र में है तथा दोनों देशों की सरकारें इन संबंधों को और मजबूत करने तथा एक–दूसरे के देश में अपने नागरिकों, विशेष रूप से मजदूरों का कल्‍याण सुनिश्चित करने के लिए काम करना जारी रखेंगी और मानव दुर्व्‍यापार को रोकने के लिए भी साथ मिलकर काम करेंगी। 

  12. प्रधानमंत्री मोदी ने आबू धाबी में मंदिर के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने के लिए महामहिम क्राउन प्रिंस के निर्णय के लिए उनका धन्‍यवाद किया। 

  13. महामहिम क्राउन प्रिंस तथा प्रधानमंत्री ने मजबूत व्‍यापक सामरिक साझेदारी के अपने विजन को साकार करने के लिए नियमित रूप से शिखर बैठकों का आयोजन करने, द्विपक्षीय तंत्रों उच्‍च स्‍तरीय एवं मंत्री स्‍तरीय वार्ता एवं बैठकों के लिए संकल्‍प व्‍यक्‍त किया। उनको पूरा यकीन है कि यह उनके लोगों के लिए स्‍थाई समृद्धि के भविष्‍य को सु‍रक्षित करने तथा उनके क्षेत्र के प‍थ को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी और शांतिपूर्ण, स्थिर, संपोषणीय एवं खुशहाल एशिया एवं विश्‍व में भी योगदान देगी।
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प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल विकास के लिए होना चाहिए, विनाश के लिए नहीं: प्रधानमंत्री मोदी
February 11, 2018
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अब टेक्नोलॉजी विचार की गति से बदल रही है, टेक्नोलॉजी वैश्विक परिवर्तन का प्रमुख साधन है: प्रधानमंत्री मोदी 
हमें 6 R का पालन करने की आवश्यकता है। रिड्यूस, रियूज, रिसाइकिल, रिकवर, रिडिजाइन, एण्ड रिमैन्यु्फैक्चरिंग को फॉलो करें, जो हमें ‘आनंद’ के द्वार तक पहुंचा सकता है: पीएम मोदी 
सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी का उपयोग विकास के लिए होना चाहिए, विनाश के लिए नहीं: प्रधानमंत्री 
टेक्नोलॉजी की सुलभता और उसके प्रसार ने आम आदमी का सशक्तिकरण किया है और इस सशक्तिकरण को ‘मिनिमम गवर्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ से बढ़ावा मिला है: प्रधानमंत्री मोदी 
भारत स्टार्ट-अप इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार की पारिस्थितिकी तैयार कर रहा है, जिससे भारत प्रमुख स्टार्टअप देश बन गया है: पीएम मोदी 
प्रधानमंत्री ने आधार योजना का जिक्र करते हुए कहा कि UID अपनी तरह का विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम है, इससे कई करोड़ की राशि का दुरुपयोग रुका

मेरे लिए बड़े सौभाग्‍य की बात है कि मुझे फिर एक बार आप सबके दर्शन करने का अवसर मिला है।

2016 में His Highness Crown Prince of Abu Dhabhi भारत आए थे। 2017 में हमारे अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण गणतंत्र पर्व के ये मुख्‍य मेहमान थे। शायद कई दशकों के बाद भारत का खाड़ी के देशों के साथ इतना गहरा, इतना व्‍यापक और इतना vibrant नाता बना है।

आज यही वो खाड़ी के अन्य देश , हमारा नाता सिर्फ buyer or seller का नहीं रहा एक partnership का बना है। भारत इस बात के लिए गर्व करता है कि खाड़ी के देशों में 30 लाख से भी अधिक भारतीय समुदाय के लोग यहां की विकास यात्रा में भागीदार हुए है। मैं खाड़ी के देशों का ह्दय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं, अभिनंदन करता हूं। उन्‍होंने हमारे देश के 30 लाख से अधिक लोगों को यहां भारत के बाहर जैसे उनका दूसरा घर हो उस प्रकार का उत्‍तम वातावरण दिया है।

भारतीय समुदाय ने भी इसे अपना ही घर मानकर के उसी प्रतिबद्धता के साथ उतने ही परिश्रम के साथ यहां के लोगों के सपनों को साकार करने के लिए अपने सपनों को भी यहां बोया है। और एक प्रकार से मानव समूह के partnership का एक ये उत्‍तम उदाहरण हम खाड़ी के देशों में अनुभव कर रहें हैं UAE में अनुभव कर रहे हैं। बहुत लोगों को जब आश्‍चर्य हुआ कि ये His Highness Crown Prince ने, जब मैं पिछली बार आया तब Abu Dhabhi में मंदिर बनाने की बात को आगे बढ़ाया। मैं ये इस His Highness Crown Prince का सभी सवा सौ करोड़ हिन्‍दुस्‍तानी की तरफ ह्दय से आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं। मंदिर का निर्माण और वो भी सद्भावना के सेतु के रूप में।

हम उस परंपरा में पले-बढ़े है। जहां मंदिर ये मानवता का एक माध्‍यम है। Holy place, Humanity का, Harmony का एक Catholic Agent है। और मुझे विश्‍वास है कि स्थापत्य की दृष्टि से, आधुनिक Technology की दृष्‍टि से, Messaging की दृष्‍टि से ये मंदिर अपने आप में एक अनोखा तो होगा ही होगा लेकिन यह विश्‍व समुदाय को वसुधैव -कुटम्‍बकम जिस मंत्र को हम जिए है उस मंत्र का अनुभव कराने का भी अवसर प्राप्‍त होगा। और इसके कारण भारत की एक अपनी पहचान भी बनाने का एक माध्‍यम बनेगा।

मैं मंदिर निर्माण से जुड़े हुए सबसे आग्रह करूंगा कि यहां के शासकों ने भारत के प्रति इतना सम्‍मान जताया है। भारत की सांस्‍कृतिक परंपराओं का इतना गौरव किया है ये हमारी जिम्‍मेदारी है कि हमसे कोई चूक न रह जाए, कोई गलती न हो जाए।

मानवता के उद्धांत आदर्शों और विचारों को कहीं कोई खरोंच न आ जाए इसकी जिम्‍मेवारी इस मंदिर निर्माण से जुड़े हुए और मंदिर से जुड़ने वाले भावी भक्‍तों के लिए भी ये बहुत बड़ी अनिवार्य रहेगी। ऐसी मेरी आप सबसे अपेक्षा है।

आज देश विकास की नई ऊंचाइयों को पार कर रहा है। ये भारत के लिए सम्‍मान का विषय है कि आज एक विश्‍व स्‍तर के Summit में भारत को विशेष सम्‍मान दिया गया है। मुझे वहां संबोधन करने के लिए निमंत्रण मिला है। यहां आप लोगों के लिए भारत की जानकारी पाना मुश्किल नहीं है। अगर मैं कोई दो चीज बोलूंगा तो आप दस चीज बताएगें इतनी आपको भारत की जानकारी है। और एक प्रकार से यहां पर लघु भारत बसता है। हिन्‍दुस्‍तान में कोई कोना ऐसा नहीं होगा कि जिसका प्रतिनिधित्‍व यहां नहीं होगा और इसलिए भारत किस तेजी से बदल रहा है। सवा सौ करोड़ भारतीय अपने सपनों को पूरा करने के लिए किस आत्‍मविश्‍वास से आगे बढ़ रहे हैं। ये आप भली-भांति अनुभव कर सकते हैं।

हमनें वो दिन भी देखे हैं जब चलो छोड़ो यार, कुछ होने वाला नहीं है। चलो यार बिस्‍तरा उठायो कहीं चले जाओ। निराशा, आशंका, दुविधा ये कालखंड से हम गुजरे हैं।

एक समय था जब देश में से एक आम आदमी सवाल पूछता था कि ये संभव है क्‍या? ये होगा क्‍या? कि हमारे यहाँ भी हो सकता है क्‍या? ऐसे ही सवालों में सामान्‍य मानवी उलझा था। और वहां से चलते-चलते चार साल के भीतर-भीतर देश यहां पहुंचा है कि आज देश ये नहीं पूछ रहा है, ये नहीं सोच रहा है कि होगा कि नहीं होगा। कि क्‍या संभव है या नहीं है। चलो यार दिमाग कौन खपाये उस मन:स्थिति से आज मन:स्थिति यहां पहुंची है। मोदी जी बताओ कब होगा, इस सवाल में शिकायत नहीं है इस सवाल में विश्‍वास है कि होगा तो अभी होगा।

2014 में वैश्विक स्‍तर पर ease of doing business हम 142 नंबर पर खड़े थे। यानि पीछे से गिने तो थोड़ा सरल हो जाएगा आगे से गिने तो बहुत देर लग जाएगी। दुनिया में कभी किसी देश ने इतने कम समय में Ease Of Doing Business में world bank के रिपोर्ट के अनुसार 42 का Jump लगाकर के 100 पर पहुंच जाएगा। लेकिन कोई ये न सोचे कि हम वहां रूकने के लिए आए हैं। हम और अधिक ऊपर जाना चाहते हैं और इसके लिए जहां नीतिगत परिवर्तन करना होगा। जहां रणनीति में परिवर्तन करना होगा। जहां implementation के role map में परिवर्तन करना होगा। जहां संसाधनों की प्रक्रियाओं में परिवर्तन करना होगा। जो भी आवश्‍यक होगा उन कदमों को उठाते-उठाते हुए भारत को जितना हो सके उतना जल्‍दी Global bench mark की बराबरी में लाना है।

Globalization वो चीज ऐसी नहीं है कि हम तो जहां है वहां बैठे और दुनिया से फायदा उठाते चले जाए जी नहीं। Globalization वो चीज है जिसमें इस ग्‍लोब के सभी लोगों ने अपना-अपना दायित्‍व निभाते हुए हर किसी के साथ जुड़ते हुए, हर किसी से सीखते हुए, हर किसी को साथ लेते हुए उन ऊंचाइयों को प्राप्‍त करना है जो दुनिया के आखिरी छोर पर बैठा हुआ देश हो या व्‍यक्ति हो उनके कल्‍याण के लिए भी काम आए और तभी जाकर के तो सच्‍चे अर्थ में वसुधैव कटुम्‍बकम ये हम जीतकर के दिखा सकते हैं।

भारत अपने वैश्चिक दायित्‍व को निभाने के लिए, नियति ने उसके लिए कुछ जिम्‍मेवारिया दी है आज दुनिया कह रही है कि 21वीं सदी एशिया की सदी है। तो ऐसा तो नहीं है कि वो ऐसे आए, टपक जाएगी और हम हाथ ऐसे करके रहेगें और आ जाएगी।

21वीं सदी एशिया की सदी बनाने के लिए परिश्रम करना पड़ेगा तत्‍कालीन लाभ हो या न हो। लेकिन लंबे अरसे की भलाई के लिए हमे कदम उठाने होंगे। महात्‍मा गांधी हमेशा श्रेय और प्रिय इसकी चर्चा किया करते थे। क्‍या वो काम करना कि जो प्रिय हो या वो काम करना जो श्रेय हो। हमारी कोशिश ये है कि श्रेयस्‍कर कामों की ओर कदम उठाते चले तत्‍कालीन शायद प्रिय लगे या न लगे लेकिन वो ऐसे श्रेयस्‍कर होंगे कि समय रहते वो प्रिय लगने वाले हैं।

कुछ सार्मथ्‍यवान लोग होते हैं, उनको कोई भी कदम तुरंत प्रिय लगता है। कुछ लोगों को कठिनाई होती है कि थोड़ा देर लगती है। अगर नोटबंदी करता हूं तो देश का गरीब तबका उसको तुरंत समझ आता है। सही दिशा का मजबूत कदम है। लेकिन जिसकी रात की नींद चली गई हो वो दो साल के बाद भी अभी भी रो रहा है।

7 साल से जीएसटी कानून होगा, नहीं होगा चल रहा था, हो गया। अब ये सही है कि हम भी एक मकान में रहते हैं सालों से और दूसरे मकान में जाएं। रात को बड़ी खुशी है आनंद है बढि़या मकान नया बनाया है लेकिन जब सुबह नींद से उठते हैं तो आदतन मजबूरन बायीं ओर बाथरूम समझ कर के वहीं चले जाते हैं और दीवार से टकरा जाते हैं। बाद में पता चलता है ये तो नया घर है यहां बाथरूम right side पर है। ये सबका अनुभव है कि नहीं है। अगर एक इंसान की जिंदगी में भी बदलाव से इतनी कठिनाई होती है तो 70 साल पुरानी व्‍यवस्‍था हो या सवा सौ करोड़ का देश हो आदतें जहन में हों, दो-दो, तीन-तीन पीढ़ी उसी में आदतों में जी हों। उसमें से जब बदलाव लाना है तो कठिनाईया होती है। लेकिन ये श्रेयस्‍कर है।

महात्‍मा गांधी ने जो रास्‍ता दिखाया था वो रास्‍ता है और आज इतने कम समय में जीएसटी की कई कठिनाईयों को दूर करते-करते आज एक व्‍यवस्‍था के तहत स्‍वीकृति पाकर के आगे बढ़ रहा है। देश बदल रहा है।

कल मैं Abu Dhabhi में था कई सारे agreement किए। Lower Zakum Concession agreement middle east upstream के अंदर भारतीय कंपनी का पहली बार निवेश होना ये partnership का एक उज्‍ज्‍वल पहलू शुरू हुआ है। मेरे कहने का तात्‍पर्य इतना ही है कि मैं आज अगले कार्यक्रम के लिए मुझे पहुंचना है। इसलिए लंबा समय आपका नहीं ले रहा हूं। लेकिन आप इतनी बड़ी संख्‍या में आए, इतना प्‍यार दिया, उधर तो मेरी नजर भी नहीं पहुँचती है। मैं आपका ह्दय से बहुत-बहुत आभारी हूं। ये मेरी टूर बड़ी जेट गति वाली टूर है। मैं करीब 70-80 घंटे में, मैं पांच देशों की यात्रा करके वापस लौटने वाला हूं । Jordan, Palestine, Abu-Dhabhi अभी Dubai और यहां कार्यक्रम करने के बाद मुझे Oman जाना है। वहां भी आज बहुत बड़ी मात्रा में भारतीय जन समुदाय का आज शाम मुझे उनके भी दर्शन करने का सौभाग्‍य मिल रहा है। उनको भी कुछ-न-कुछ बाते बतानी हैं। लेकिन मैं फिर एक बार आपका ह्दय से बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूं। और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं जो सपने आप देख रहे हैं। जो सपने आपके स्‍वजन भारत की इस धरती पर देख रहे हैं। हम सब मिलकर के समय-सीमा से पहले उन सपनों को पूरा करके रहेगें। ये विश्‍वास मैं आपको देता हूं फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद। नमस्‍कार।