मित्रों,
नवरात्रि और विजयादशमी के पावन पर्व के साथ ही दिवाली के आगमन की प्रतीक्षा में हर कोई शामिल हो जाता है।
माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी कल 11 अक्टूबर से जनचेतना यात्रा शुरू कर रहे हैं।
समग्र देश भ्रष्टाचार के मामले में बहुत ही खिन्न है। जनमानस में भारी आक्रोश है।
भ्रष्टाचार के मामले में भूतकाल में भी कांग्रेसी सरकारों के खिलाफ जनआक्रोश फैला हो, ऐसी अनेक घटनाएं हैं। लेकिन देश के इतिहास की दिशा बदल डाली हो ऐसी तीन महत्वपूर्ण घटनाएं जनमानस पर अब भी छाई हुई हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ जब-जब शंखनाद होता रहेगा, तब वह याद आती रहेंगी।
१९७४: देश में आजादी के बाद पहली बार भ्रष्टाचार के विरुद्घ संगठित रूप से जनआक्रोश फैल गया था वह था गुजरात में १९७४ में... कांग्रेस सरकार के लचर प्रशासन और भ्रष्टाचारी रीति-रिवाजों के खिलाफ जबर्दस्त नवनिर्माण आंदोलन हुआ और उस आग में कांग्रेसी सरकार खाक हो गई। इसके बाद जनादेश के मुताबिक गुजरात में पहली बार गैर कांग्रेसी दलों का मोर्चा सत्ता में आया।
१९७७: गुजरात की राह पर चलते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू हुआ। इस लोकजागृति की आवाज को दबा देने के लिए इंदिरा गांधी की कांग्रेस (आई) सरकार ने देशभर में आपातकाल लागू कर दिया। अनेक जुल्म हुए लेकिन लोगों का मिजाज बदला नहीं और आपातकाल के बाद 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी की कांग्रेस का लोगों ने देश भर में सफाया कर पहली बार केन्द्र में गैर कांग्रेसी सरकार को सत्ता सौंपी।
१९९८: राजनीतिक समीकरण बदलने पर देश भर में अभूतपूर्व बहुमत के साथ फिर सत्ता में आई कांग्रेस (आई) सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूब गई और बोफोर्स के महाकांड ने राजीव गांधी की कांग्रेसी सरकार का खात्मा कर दिया।
- और आज फिर एक बार केन्द्र की कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच घिर गई है।
जन-जन में फैली भ्रष्टाचार विरोधी भावनाओं के चलते योग गुरु श्री बाबा रामदेव ने भारत भ्रमण और अथक परिश्रम कर काले धन के विरुद्घ वातावरण तैयार किया है, तो दूसरी ओर वयोवृद्घ समाज सुधारक श्री अण्णाजी ने उपवास के माध्यम से उसका सामूहिक प्रगटीकरण किया।
बाबा रामदेव काले धन के मामले में ज्यादा आक्रमक रहे तो श्री अण्णाजी ने जन लोकपाल कानून बनाने के मामले में जीवन खतरे में डाला।
इस पृष्ठभूमि में आडवाणीजी की जनचेतना यात्रा का विशेष महत्व है। क्योंकि उसका मकसद भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई है, काला धन विदेशी बैंकों में वापस लाने की मांग और साथ ही लोक शिक्षण और लोक संपर्क का अद्भुत संयोजन है। मुझे विश्वास है कि यह जनचेतना यात्रा भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जनशक्ति का नया अविष्कार बनेगी।
यात्रा, जयप्रकाश नारायणजी की जन्म जयंति पर उनके जन्म स्थल से निकले यह सुसंगत है।
कभी-कभी सुखद घटनाएं भी आकार लेती है। एक बार बिहार राज्य के मुख्यमंत्री ने आडवाणीजी की यात्रा को रोक दिया था, आज उसी बिहार के मुख्यमंत्री यात्रा को प्रस्थान करवाते हैं, यह घटना खास आनंद की बात है।
माननीय श्री आडवाणीजी के साथ बहुत ही निकट से कार्य करने का मुझे सौभाग्य मिला है।
कुछ स्वार्थी तत्व उनके विषय में जो गप्पें चला रहे हैं, वह अत्यन्त दु:खद और निंदनीय है।
आडवाणीजी ने देशसेवा के लिए अपनी जवानी खपा दी, ६० वर्ष देश की निरंतर सेवा की और उसमें भी जीवन का ९० प्रतिशत हिस्सा तो विरोधी दल में रहकर देश की सेवा में लगाया। वर्ष १९५२ से आज तक कदम-कदम पर जनता के सुख-दुख के गवाह रहे आडवाणीजी किसी पद प्राप्ति के लिए यात्रा करते हैं, ऐसी हास्यास्पद बातें फैलाने वालों की मानसिकता पर दया आती है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ यह जनचेतना यात्रा भारत का भाग्य बदलेगी, ऐसा मुझे विश्वास है।
उम्र के इस पड़ाव में आडवाणीजी का यह परिश्रम देश कभी व्यर्थ नहीं जाने देगा, ऐसा मुझे पूर्ण विश्वास है।


