भारत का वॉटर विजन @2047

Published By : Admin | February 15, 2024 | 17:43 IST

जीवन का अभिन्न अंग और व्यापक विकास तथा प्रगति के लिए अपरिहार्य, पानी; देश के लिए 'विकसित भारत' के अपने समग्र विजन को प्राप्त करने के लिए भी बेहद अहम है। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वॉटर विजन @2047, जल को समावेशी विकास के एजेंडे के केंद्र में रखता है।

इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन जैसी उभरती चिंताओं के साथ-साथ जल संसाधनों के संरक्षण और सुधार सहित प्रमुख चुनौतियों का समाधान करके देश के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बातचीत, सहयोग और देखभाल की भावना से प्रेरित, यह सामूहिक दृष्टि लोगों की रचनात्मक भागीदारी और राज्यों के साथ सक्रिय सहयोग से समृद्ध है

इस भागीदारी को मोदी सरकार द्वारा भारत के वॉटर विजन @2047 पर वार्षिक सम्मेलनों और कार्यक्रमों के माध्यम से सुव्यवस्थित किया गया है, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाया गया है। इसका उद्देश्य, जल संसाधनों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आम रणनीति पर विचार-विमर्श करना है

जनवरी 2023 में वॉटर विजन @2047 पर विचार-विमर्श करने के लिए पहला अखिल भारतीय वार्षिक राज्य मंत्री सम्मेलन आयोजित किया गया था और इसमें 22 सिफारिशें दी गई थीं। एकजुट और व्यापक जल प्रबंधन योजना बनाने के अलावा, इन सिफारिशों में जल की मांग और पूर्ति दोनों को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध समाधान और रोकथाम रणनीति की मांग की गई है। माइक्रो इरीगेशन, पाइपलाइन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, वॉटर रिसोर्सेज की हेल्थ की मैपिंग, विभिन्न नदी घाटियों के बीच वॉटर ट्रांसफर, बाढ़ क्षेत्रों का निर्धारण और ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट और प्रबंधन पर भी इन सिफारिशों में विशेष बल दिया गया है। इसके अलावा, ये सिफारिशें अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कृषि और उद्योग में जल-उपयोग कुशलता से भी निपटती हैं। कृषि, विशेष रूप से, उपलब्ध पानी का 80% उपयोग करती है। इसलिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि कुशल कृषि प्रथाओं जैसे फसल पैटर्न और फसल किस्मों और विवेकपूर्ण ऑन-फार्म जल प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए

इन सिफारिशों के बाद जनवरी 2024 में जल स्थिरता पर अखिल भारतीय सचिवों का सम्मेलन आयोजित किया गया। जलवायु लचीलापन, वॉटर गवर्नेंस, जल उपयोग दक्षता, जलाशयों की भूमिका और लोगों की भागीदारी सहित पांच विषयों के आधार पर, सम्मेलन ने ऊपर उल्लिखित 22 सिफारिशों पर किए गए कार्यों का आकलन करने, हितधारकों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों को साझा करने और एक साझा वॉटर विजन विकसित करने की दिशा में काम किया

मोदी सरकार 2047 तक विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य को प्राप्त करने में जल क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति सचेत है। इसलिए, पीएम मोदी ने 5P मंत्र – Political will (राजनीतिक इच्छाशक्ति), Public financing (सार्वजनिक वित्तपोषण), Partnerships (साझेदारी), Public Participation (जन भागीदारी) और Persuasion for sustainability (स्थायी विकास के लिए प्रेरणा) दिया है, जो इस सतत यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करते हैं

इस मंत्र ने पिछले नौ वर्षों में पीएम मोदी की योजनाओं और प्रयासों को रेखांकित किया है। जल जीवन मिशन से शुरू करें, तो यह एक परिवर्तनकारी पहल है जिसका लक्ष्य सभी ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन प्रदान करना है। पिछले चार वर्षों में, 13.91 करोड़ घरों को नल कनेक्शन प्रदान किया गया है, जिससे ग्रामीण जीवन में काफी सुधार हुआ है

दूसरी ओर, ‘अमृत सरोवर’ का लक्ष्य देश भर के प्रत्येक जिले में 75 अमृत सरोवर (तालाबों) को विकसित करना है, जिससे कुल 50,000 तालाब बनेंगे। नवंबर 2023 तक, सरकार ने 80,000 से अधिक तालाबों पर काम शुरू कर दिया है, जिनमें से 68,000 से अधिक तालाब लोकार्पित किए जा चुके हैं।

'Per Drop More Crop' पहल ने कृषि में जल-उपयोग दक्षता में काफी सुधार किया है। छोटे और सीमांत किसानों को माइक्रो इरीगेशन अपनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, इस योजना ने 2015-16 और 2023-24 के बीच 83.06 लाख हेक्टेयर भूमि को माइक्रो इरीगेशन के तहत लाया है

सरकार कृषि गतिविधियों को यथासंभव टिकाऊ बनाने के लिए सक्रिय रूप से ऑर्गेनिक और नैचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है तथा क्रॉप डायवर्सिफिकेशन को प्रोत्साहित कर रही है

भूजल के संरक्षण और संवर्धन के लिए, मोदी सरकार ने 2019 में अटल भूजल योजना (ABY) और 2020 में भूजल के आर्टिफिशियल रिचार्ज के लिए मास्टर प्लान पेश किया। ABY जल-न्यूनता क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन सहित कुशल भूजल प्रबंधन पर केंद्रित है

चूंकि पानी की कमी, पानी की अधिकता और पहाड़ी क्षेत्र में जल सुरक्षा, समग्र दृष्टि के तहत विषयों में से एक है, मोदी सरकार ने समान स्वास्थ्य और जल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने (केन-बेतवा लिंक) और नदी कायाकल्प (नमामि गंगे मिशन) जैसी अद्वितीय पहल की है

जल शक्ति अभियान: ‘कैच द रेन’ जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की एक और अनूठी पहल है। इस अभियान में पांच मुख्य उपाय शामिल हैं, जिनमें बारिश का पानी इकट्ठा करना और जल स्रोतों की भौगोलिक स्थिति का डाटाबेस बनाना शामिल है

सरकार ने अपने वॉटर-शेड डेवलपमेंट अप्रोच में भी इनोवेशन दिखाया है, जिसमें स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और मनरेगा के तहत कार्यों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग शेड का पुनरुद्धार शामिल है। इसके अलावा, एक सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा, जल संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, क्योंकि यह वेस्ट वॉटर और सीवेज ट्रीटमेंट के व्यापक फ्रेमवर्क के भीतर वॉटर ट्रीटमेंट और रीसाइक्लिंग को इंटीग्रेट करती है

पानी, जीवन के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है। यह सभी जीवों, समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए ज़रूरी है। इसका महत्व केवल जीवन निर्वाह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी प्रभावित करता है। पानी के महत्व को समझते हुए और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए, मोदी सरकार ने भारत के सतत विकास और समग्र उन्नति के लिए अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दिखाया है। मोदी सरकार के नेतृत्व में, जल को एक महत्वपूर्ण संसाधन मानते हुए, पूरा देश राष्ट्र-निर्माण के सच्चे मूल सिद्धांतों के साथ प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।