1. महामहिम प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोरिया राज्‍य के राष्‍ट्रपति महामहिम एममे पार्क गियुन हाई के आमंत्रण पर 18-19 मई, 2015 को कोरिया राज्‍य की राजकीय यात्रा की इस भाग के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के राष्‍ट्रपति पार्क के साथ शिखर बैठक की।
  2. प्रधानमंत्री मोदी और राष्‍ट्रपति पार्क ने परस्‍पर हित के क्षेत्रों में सार्थक बातचीत की।  दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में तेजी से विस्‍तार और विविधता का स्‍वागत किया। दोनों पक्षों ने यह माना कि राष्‍ट्रपति पार्क की जनवरी,2014 में भारत यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों के विकास में व्‍यापक गति मिली। दोनों नेताओं ने ''विशेष रणनीतिक साझेदारी'' के स्‍तर पर द्विपक्षीय संबंध को ले जाने पर सहमति व्‍यक्‍त की।
  3. दोनों देशों की जनता के बीच एतिहासिक एवं सांस्‍कृतिक संबंधों को याद करते हुए दोनों पक्षों ने माना कि लोकतंत्र के मूल्‍य, मुक्‍त समाज तथा उदार अंतर्राष्‍ट्रीय आर्थिक व्‍यवस्‍था से कोरिया गणराज्‍य –भारत विशेष रणनीतिक साझेदारी के आधार को और मजबूती मिली है। दोनों नेताओं ने विदेशी मामलें, रक्षा और व्‍यापार और  निवेश, विज्ञान एवं टेक्‍नोलॉजी, संस्‍कृति तथा दोनों देशों की जनता के बीच आदान-प्रदान सहित अनेक विषयों में साझेदारी की गति को तेज करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की।

राजनीति तथा सुरक्षा संबंध

  1. भारत ''एक्‍ट ईस्‍ट'' रणनीति में कोरिया गणराज्‍य को अभिन्‍न सहयोगी मानता है। कोरिया गणराज्‍य और भारत द्विपक्षीय साझेदारी के महत्‍व तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सुरक्षा में योगदान को मानते हैं। राष्‍ट्रपति पार्क ने कोरिया गणराज्‍य के उत्‍तर-पूर्व एशिया शांति तथा सहयोग प्रयास (एनएपीसीआई) के बारे में प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग और सुरक्षा बढ़ाने की कोरिया गणराज्‍य की इच्‍छा का स्‍वागत किया। दोनों नेता साझा लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए एनएपीसीआई तथा एक्‍ट ईस्‍ट नीति के बीच का पूरक मार्ग तलाशने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
  2. दोनों पक्ष द्विपक्षीय उच्‍च स्‍तरीय आदान-प्रदान में तेजी लाने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों की राय में द्विपक्षीय रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग में विकास की अपार क्षमता है।
  3. मई, 2015 में कोरिया की राष्‍ट्रीय असेम्‍बली की स्‍पीकर की भारत यात्रा का स्‍वागत करते हुए दोनों पक्षों ने भारत-कोरिया संसदीय शिष्‍टमंडलों के आदान-प्रदान में वृद्धि की आशा व्‍यक्‍त की। दोनों पक्ष सहमत हैं कि भारत-कोरिया संसदीय शिष्‍टमंडलों के एक-दूसरे के यहां जाने से दोनों संसदों के बीच संवाद और साझेदारी बढ़ेगी।
  4. विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों ने निम्‍नलिखित बातों पर सहमति व्‍यक्‍त की :-

क.   एक-दूसरे देश में वार्षिक शिखर बैठक आयोजित करना या बहुपक्षीय आयोजनों के बीच शिखर बैठक का आयोजन।

ख.   दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के नेतृत्‍व में वार्षिक रूप से संयुक्‍त आयोगों की बैठक।

ग.    अपने-अपने क्षेत्रों में लोकतांत्रित संस्‍थानों को मजबूत बनाने के लिए संसदीय शिष्‍टमंडलों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना।

घ.    एक-दूसरे देशों में सैन्‍य अधिकारियों को भेजकर नेशनल डिफेंस कॉलेज ऑफ इंडिया तथा नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी ऑफ कोरिया सहित भारत तथा कोरिया की रक्षा शिक्षा में साझेदारी को मजबूत बनाना।

ङ.     सुरक्षा, रक्षा तथा साईबर संबंधी विषयों पर दोनों देशों की सुरक्षा परिषदों के बीच नियमित विचार विमर्श को और सुदृढ़ बनाना।

च.    ''2+2'' रूप में रक्षा तथा विदेशी मामलों पर संयुक्‍त उपमंत्री स्‍तरीय बातचीत।

छ.   रक्षा आवश्‍यकताओं के लिए एक दूसरे देश के पोतों के बीच बेहतर सहयोग।

ज.   दोनों देशों की जल सेना के बीच अधिकारी स्‍तरीय बातचीत तथा दोनों देशों की सशस्‍त्र सेनाओं के अधिकारियों की नियमित यात्राओं से रक्षा सहयोग को और प्रगाढ़ बनाना।

झ.   पारदेशीय साईबर खतरों से निपटने में तैयारी के लिए साईबर सुरक्षा सहयोग के उपाय तलाशना।

ञ.    संयुक्‍त राष्‍ट्र शांति अभियान के क्षेत्र में उचित सहयोग तथा

ट.     कोरिया गणराज्‍य के विदेशी मामलों तथा राष्‍ट्रीय सुरक्षा संस्‍थान और इंडिया काउंसिल ऑफ वर्ल्‍ड अफेयर्स (आईसीडब्‍ल्‍यूए) के बीच वार्षिक रूप से ट्रैक 1.5 वार्ता आयोजित करना।

व्‍यापार और निवेश

  1. राष्‍ट्रपति पार्क ने भारत के ''मेक इन इंडिया'' पहल का स्‍वागत किया, क्‍योंकि इससे द्विपक्षीय संबंधों को ठोस बनाने के नये रास्‍ते मिलते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने ''मेक इन इंडिया'' में विशेष साझेदार बनने के लिए कोरिया गणराज्‍य को आमंत्रित किया। इस पर राष्‍ट्रपति पार्क ने सहमति व्‍यक्‍त की। दोनों नेताओं ने स्‍वीकार किया कि आगे विकास के लिए दोनों देशों के बीच व्‍यापार और निवेश की अपार संभावनायें हैं। दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को कोरिया गणराज्‍य तथा भारत गणराज्‍य के बीच व्‍यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) से लाभ उठाने तथा सीईपीए के अंतर्गत संयुक्‍त समिति जैसी विचार-विमर्श व्‍यवस्‍था का पूरा उपयोग करने के लिए व्‍यापक विचार-विमर्श करने को कहा।
  2. द्विपक्षीय साझेदारी में व्‍यापार और निवेश के महत्‍व को स्‍वीकार करते हुए दोनों नेताओं ने भारत तथा कोरिया के व्‍यावसायिक समुदाय से पारस्‍परिक समृद्धि के लिए दोनों देशों की अर्थव्‍यवस्‍थाओं के बीच अधिक तालमेल का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने निम्‍नलिखित समझौतों का स्‍वागत किया :-

क.   दोहरे कराधान से बचने संबंधी समझौते पर हस्‍ताक्षर।

ख.   कोरिया के वित्‍त मंत्रालय तथा कोरियाई निर्यात आयात बैंक ने अवसंरचना क्षेत्र में परस्‍पर सहयोग के लिए 10 बिलियन डॉलर की सहायता की पेशकश की। इसमें आर्थिक विकास सहयोग निधि (1 बिलियन डॉलर) तथा स्‍मार्ट सिटी, रेलवे, बिजली उत्‍पादन और सम्‍प्रेषण तथा अन्‍य क्षेत्रों सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्यात ऋण (9 बिलियन डॉलर) शामिल है। दोनों देशों की सरकारें तथा दोनों देशों के एक्सिम बैंक प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए वित्‍तीय सहयोग की रूपरेखा तैयार करने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।

ग.    सहमत रूपरेखा के माध्‍यम से मात्रा और गुण की दृष्टि से व्‍यापार बढ़ाने का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए जून, 2016 तक भारत-कोरिया सीईपीए में संशोधन पर बातचीत प्रारम्‍भ करना।

घ.    आवासीय माहौल की गुणवत्ता सुधारने तथा सतत आर्थिक विकास पर स्मार्ट शहरों के प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए स्मार्ट सिटी बनाने के लिए स्मार्ट ग्रिड सहित उन्नत टेक्नोलॉजी सम्पन्न शहरों में परस्पर सहयोग की संभावना तलाशना।

ङ.     दोनों देशों के इस्पात उद्योग को पारस्परिक लाभ की परियोजनाएं विकसित करने में प्रोत्साहन देकर इस्पात क्षेत्र में सहयोग।

च.    एलएनजी वाहकों जैसे भारतीय जहाज निर्माण सहित पोत बनाने के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों में दिलचस्पी। भारत सरकार ने भारतीय पोत निर्माण उद्योग को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से कोरिया के साथ साझेदारी पर विचार-विमर्श की आशा व्यक्त की। दोनों देशों की सरकारों ने इस क्षेत्र में निजी सहयोग को समर्थन देने का निर्णय लिया। पोत निर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए सरकारी तथा निजी क्षेत्र को मिलाकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाया जाएगा।  

छ.   समुद्री परिवहन, शिपिंग और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में संयुक्त व्यावसायिक परियोजनाओं की संभावना तथा दोनों देशों की नाविकों के रोजगार संवर्द्धन के लिए सहयोग।

ज.   ताजा फलों तथा बागवानी उत्पादों के पारस्परिक निर्यात के लिए आवश्यक प्रक्रिया में तेजी पर सहयोग।

झ.   राजस्थान में कोरियाई औद्योगिक पार्क बनाने का कार्य प्रगति पर। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि औद्योगिक पार्क से कोरिया के छोटे तथा मझौले उद्यमियों को 'मेक इन इंडिया' पहल से लाभ उठाने में मदद मिलेगी। दोनो देशों ने व्यापार, निवेश तथा औद्योगिक सहयोग के लिए कोटरा सहित दोनों देशों की व्यापार एजेंसियों के और कार्यालय स्थापित करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

ञ.    19 मई, 2015 को सोल में कोरिया-भारत सीईओ फोरम की पहली बैठक होगी। सीईओ फोरम दोनों देशों की कंपनियों के बीच आदान-प्रदान और संवाद में तेजी लाने, परस्पर निवेश बढ़ाने और भविष्य में द्विपक्षीय व्यावसायिक सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  1. दोनों देशों की साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में भारत और कोरिया के लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण संपर्क के महत्व को दोहराते हुए दोनों नेताओं ने हवाई संपर्क बढ़ाने तथा अधिक शहरों में विमान सेवा के लिए द्विपक्षीय वायु सेवा समझौते में संशोधन के लिए नागर विमानन सहयोग सम्मेलन सहित अन्य जारी प्रयासों का स्वागत किया और प्रोत्साहन दिया।

टेक्नोलॉजी ऊर्जा तथा पर्यावरण

  1. राष्ट्रपति पार्क ने भारत परिवर्तन के प्रयास के रूप में प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की प्रसंशा की। 1970 के दशक में कोरिया के सफल ग्रामीण विकास कार्यक्रम साइमॉल उनदोंग (एसएमयू) के स्वच्छ भारत अभियान में योगदान को मानते हुए दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्ष एक-दूसरे देशों के विकास अनुभवों को मिलाकर सहयोग बढ़ाएंगे।
  2. आर्थिक विकास, पर्यावरण एवं स्वच्छ ऊर्जा संरक्षण के बीच अभिन्न संपर्क को स्वीकार करते हुए भारत और कोरिया अपने मंत्रालयों तथा एजेंसियों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमत हुए।
  3. कोरिया की हरित अर्थव्यवस्था प्रयास की सराहना करते हुए भारत ने शहरी जल तथा वायु गुणवत्ता में सुधार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए नवाचारी नीतियों तथा तकनीक लागू करने में पारस्परिक लाभ साझेदारी के लिए कोरिया के साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की।
  4. दोनों नेताओं ने विज्ञान और टेक्नोलॉजी में जारी सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा, मेटेरियल साइंस, रोबटिक एवं इंजीनियरिंग विज्ञान तथा स्वास्थ्य विज्ञान जैसे फोकस वाले क्षेत्रों में लागू की जा रही है। दोनों नेताओं ने स्वच्छ टेक्नोलॉजी रोबोटेक्स तथा ऑटोमेशन और इलेक्टॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्यूफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में आकादमी-उद्योग संपर्क कार्यक्रमों को विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
  5. दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। दोनों पक्षों ने चन्द्रमा की खोज, सेटेलाइट नैविगेशन और अंतरिक्ष विज्ञान तथा निम्मलिखित एप्लिकेशन को जारी रखने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र (इसरो) तथा कोरिया एरोस्पेस अनुसंधान संस्थान (केएआरआई) के बीच समझौते का स्वागत कियाः

क.    गहन अंतरिक्ष कॉर्स ट्रैकिंग तथा कोरिया तथा भारत के गहन अंतरिक्ष मिशनों के लिए संचार समर्थन।

ख.   चन्द्रमा की सतह का डाटा तथा चन्द्रायन-1 द्वारा एकत्रित रैडिएशन डाटा साझा करना।

ग.    गगन-कास (केएएसएस) इंटरोपैराबिलिटी तथा गगन (जीपीएस सहायता युक्त जियोऑगोमेंटेड नैविगेशन प्रणाली) तथा केएएसएस (कोरिया ऑगोमेंटेशन सेटेलाइट सिस्टम) में अनुभवों को साझा करना।

घ.    अंतरिक्ष विज्ञान तथा एप्लिकेशन, सेटेलाइट लांच तथा अन्य सहमत क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग।

ङ.     उपरोक्त क्षेत्रों में सहयोग के तरीकों को मजबूत बनाने के लिए इसरो तथा केएआरआई के बीच नियमित कार्य स्तरीय संवाद करना।

संस्कृति, शिक्षा और जनसंपर्क आदान-प्रदान

  1. भारत तथा कोरिया के लोगों के बीच पुराने ऐतिहासिक संपर्क को देखते हुए राष्ट्रपति पार्क ने 2015 शरद ऋतु में कोरिया में भारत उत्सव के लिए प्रधानमंत्री मोदी के निर्णय का स्वागत किया। भारत ने भी 2016 में भारत में कोरिया उत्सव के आयोजन के अवसर का स्वागत किया। इस संदर्भ में दोनों नेताओं ने अयोध्या से कोरियाई लोगों के संपर्कों को बढ़ाकर और अयोध्या में रानी सूरी रत्न/हूर ह्वांग-पोक की स्मारक को उन्नत बनाकर ऐतिहासिक संपर्कों को मजबूत बनाने के लिए किये जा रहे प्रयासों का भी स्वागत किया। राष्ट्रपति पार्क ने पवित्र बोधि वृक्ष का पौध उपहार देने के लिए कोरिया के लोगों की ओर से आभार व्यक्त किया।
  2. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के युवाओं के बीच समझदारी और सहयोग बढ़ाने के लिए युवा शिष्टमंडलों में तेजी लाने का आह्वान किया। भारतीय पक्ष ने तकनीक संस्थानों तथा भाषा शिक्षण संस्थानों सहित दोनों देशों के शैक्षिक संस्थानों में सहयोग बढ़ाने की दिलचस्पी व्यक्त की।
  3. दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान मजबूत बनाने के लिए दोनों नेता ट्विन सिटी तथा ट्विन प्रांत/राज्य बनाने में प्रोत्साहन देने पर सहमति व्यक्त की।
  4. कोरिया ने भारत को कोरिया के राष्ट्रीय संग्रहालय की 10वीं वर्षगाठ पर आयोजित 'मास्टरपीसेज ऑफ अर्ली बुद्धिस्ट स्कल्प्चर, 100 बीसीई-700 सीई' शीर्षक से आयोजित प्रदर्शनी में भाग लेने का आमंत्रण दिया। भारत ने आमंत्रण का स्वागत किया और प्रदर्शनी के लिए सक्रिय सहयोग पर सहमति दी। दोनों नेताओं ने आशा व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक समझदारी बढ़ेगी और सांस्कृतिक संबंध व्यापक होंगे। इसके अतिरिक्त दोनों नेता दोनों देशों की सांस्कृतिक विरासतों के क्षेत्र में संरक्षण, पुनःस्थापन तथा संयुक्त अनुसंधान पर सहयोग की संभावना तलाशने पर सहमति हुए।
  5. भारत ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली के सहयोग से भारत-कोरिया संबंधों में नये अध्याय के रूप में साझी विरासत तथा अयोध्या की राज कुमारियों के गौरव को इतिहासबद्ध करने के बारे में आयोजित दो दिन की गोष्ठी में कोरिया को भाग लेने का आमंत्रण दिया। कोरिया ने आमंत्रण का स्वागत किया।

क्षेत्रीय तथा बहुपक्षीय सहयोग

  1. दोनों नेताओं ने कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित किया। इस संबंध में दोनों नेताओं ने डीपीआरके द्वारा विकसित किये जा रहे परमाणु हथियार और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन मानते हुए इस पर चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने डीपीआरके से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव सहित अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का पूरी तरह से पालन करने और 2005 के 6 दलीय वार्ता के अंतर्गत प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरियाई प्रायद्वीप में विश्वास का माहौल बनाने तथा कोरियाई प्रायद्वीप का शांतिपूर्ण पुनर्एकीकरण का आधार तैयार करने के प्रयासों के लिए राष्ट्रपति पार्क को समर्थन व्यक्त किया।
  2. विश्व शांति तथा स्थिरता के लिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद को खतरा मानते हुए दोनों नेताओं ने सभी प्रकार और रूपों में आतंकवाद की समाप्ति के लिए प्रतिबद्धता दोहराई और इस चुनौती से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से घनिष्ठता के साथ काम करने का आह्वान किया। दोनों नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौता संबंधी बातचीत पर शीघ्र समाप्त करने को कहा। दोनों नेताओं ने प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र परिषद प्रस्तावों को लागू करके तथा चरमपंथी हिंसा का मुकाबल कर आतंकियों के सुरक्षित पनाहों, संरचना, उनके नेटवर्क, उनके वित्तपोषण स्रोत तथा आंतकवादियों के सीमा पार करने जैसी कार्रवाई को समाप्त करने की आवश्यकता को स्वीकार किया। दोनों नेताओं ने सभी देशों से इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए गंभीरता से काम करने का आग्रह किया।
  3. राष्ट्रपति पार्क ने अपने यूरेसिया प्रयास तथा उत्तर-पूर्व एशिया शांति और सहयोग प्रयास (एनएपीसीआई) पर प्रकाश डाला तथा क्षेत्र की समान समृद्धि के लिए भारत की ऐक्ट ईस्ट तथा मध्य एशिया संपर्क नीति के साथ कार्य करने की संभावना तलाशने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने भी क्षेत्र की समान समृद्धि के लिए एनएपीसीआई तथा यूरेसिया प्रयास में कार्य करने की संभावना तलाशने की इच्छा व्यक्त की।
  4. भारत तथा कोरिया गणराज्य ने वैश्विक अ-प्रसार उद्देश्यों को मजबूत बनाने में समान दिलचस्पी व्यक्त की। कोरिया गणराज्य ने अंतर्राष्ट्रीय निर्यात व्यवस्था में शामिल होने में भारत की इच्छा पर ध्यान दिया तथा इस बात पर सहमति व्यक्त की कि भारत के प्रवेश से वैश्विक अ-प्रसार व्यवस्था मजबूत बनाने में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। कोरिया गणराज्य ने 4 बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं- परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह, मिसाइल टेक्नोलॉजी व्यवस्था, ऑस्ट्रेलियाई समूह तथा वासेनार व्यवस्था में भारत की प्रारंभिक सदस्यता के लिए समर्थन व्यक्त किया।
  5. संयुक्त राष्ट्र को और अधिक प्रतिनिधिमूलक, उत्तरदायित तथा कारगर बनाने के लिए व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधार की आवश्यकता स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों ने समकालीन वास्तविकताओं तथा प्रमुख विकासशील देशों की सोच संपन्न संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।
  6. प्रधानमंत्री मोदी ने आतिथ्य सत्कार के लिए राष्ट्रपति पार्क तथा कोरिया गणराज्य की सरकार और जनता को धन्यवाद दिया। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि इस शिखर बैठक से साझेदारी अगले स्तर पर पहुंची है। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पार्क को एक बार फिर शीघ्र भारत आने का आमंत्रण दिया ताकि साझेदारी की गति बनाई रखा जा सके। राष्ट्रपति पार्क ने प्रधानमंत्री मोदी का आमंत्रण स्वीकार कर लिया।
  7. दोनों नेताओं की मौजूदगी में निम्मलिखित समझौते और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किये गयेः

क.   दोहरे कराधान से बचने तथा आयकर संबंधी वित्तीय चोरी रोकने के लिए भारत गणराज्य की सरकार तथा कोरिया गणराज्य सरकार के बीच समझौता।

ख.   ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन के क्षेत्र में सहयोग पर भारत गणराज्य की सरकार तथा कोरिया गणराज्य सरकार के बीच समझौता।

ग.    भारत गणराज्य के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय तथा कोरिया गणराज्य के राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यालय के बीच सहयोग के लिए सहमति पत्र।

घ.    बिजली ऊर्जा विकास तथा नवीन ऊर्जा उद्योग क्षेत्रम में भारत गणराज्य के बिजली मंत्रालय तथा कोरिया गणराज्य के व्यापार उद्योग तथा ऊर्जा मंत्रालय के बीच सहमति पत्र।

ङ.     युवा मामलों में सहयोग के लिए भारत गणराज्य के युवा मामले मंत्रालय तथा कोरिया गणराज्य के लैंगिक समानता तथा परिवार मंत्रालय के बीच सहमति पत्र।

च.    सड़क परिवहन तथा राजमार्ग में सहयोग के लिए भारत गणराज्य के सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्रालय तथा कोरिया गणराज्य के भूमि संरचना तथा परिवहन मंत्रालय के बीच सहयोग ढांचा।

छ.   भारत गणराज्य के शिपिंग मंत्रालय और कोरिया गणराज्य के समुद्र तथा मछली पालन मंत्रालय के बीच समुद्री परिवहन तथा लॉजिस्टिक क्षेत्र में सहयोग पर सहमति पत्र।

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June 20, 2026
I extend my heartfelt birthday greetings to President Smt. Droupadi Murmu Ji, I wish her long life and excellent health: PM
Pahadpur village will now be rapidly developed as a solar village, that is, solar power will be ensured in every home here: PM
The vision of the Central Government is the development of India through the development of Eastern India: PM
To uplift tribal society, we are connecting tribal youth with opportunities for education and employment: PM
These children should get better facilities for studies; for this, around 500 Eklavya Model Schools have been opened across the country: PM

जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।