इंडोनेशिया के राष्ट्रपति श्री प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 6 से 8 जुलाई, 2026 तक इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा पर रहे। भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की 23-26 जनवरी 2025 की यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री श्री मोदी की इंडोनेशिया की यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण और भारत-इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी प्रगाढ़ बनाने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाती है।

2. इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री श्री मोदी का जकार्ता में राष्ट्रपति भवन - इस्ताना मर्देका में समारोह पूर्वक स्वागत किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति प्रबोवो और प्रधानमंत्री श्री मोदी के बीच द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। राष्ट्रपति प्रबोवो ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के सम्मान में राजकीय भोज का भी आयोजन किया। इंडोनेशियाई संसद की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष डॉ. पुआन महारानी के निमंत्रण पर, प्रधानमंत्री ने इंडोनेशियाई संसद को संबोधित किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो ने योग्याकार्ता (जोग्जा) में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर में जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य का उद्घाटन किया। दोनों नेताओं ने इंडोनेशिया में भारतीय समुदाय द्वारा श्री मोदी के सम्मान में आयोजित एक स्वागत समारोह में भी भाग लिया।

राजनीतिक सहयोग

3. प्रधानमंत्री श्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो ने 7 जुलाई, 2026 को जकार्ता के इस्ताना मर्देका में द्विपक्षीय वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की। इसमें राजनीतिक जुड़ाव, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, समुद्री सहयोग, व्यापार एवं निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, औषधि, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, युवा आदान-प्रदान और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के साथ ही परस्पर हित के क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रम पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं की उपस्थिति में भारत-इंडोनेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए कई द्विपक्षीय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किये गये।

4. दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के रणनीतिक जुड़ाव बढ़ाने की इच्छा व्यक्त करते हुए उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के महत्व को स्वीकार किया और बहुपक्षीय आयोजनों सहित नियमित तौर पर शिखर बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई।

5. दोनों नेताओं ने मौजूदा संयुक्त कार्य समूह तंत्र को सुदृढ़ बनाने और संयुक्त आयोग की बैठक, विदेश मंत्रालयीय कार्यालय परामर्श तथा अन्य मंत्रिस्तरीय और वरिष्ठ अधिकारियों के संवाद तंत्र और आदान-प्रदान सहित नियमित द्विपक्षीय परामर्श जारी रखने के महत्व की पुष्टि की।

6. दोनों नेताओं ने अपने संसदों में भारत-इंडोनेशिया संसदीय मैत्री समूह स्थापित किये जाने का स्वागत किया और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नियमित दौरों से दोनों लोकतंत्रों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने की आवश्यकता की पुष्टि की।

7. दोनों नेताओं ने आपसी समझ गहन बनाने और दोनों देशों के बीच विचार समूहों-थिंक टैंकों, शैक्षणिक संस्थानों और नीति विशेषज्ञों के बीच जुड़ाव बढ़ाने का स्वागत किया, जिसमें 23 अप्रैल 2025 को जकार्ता में आयोजित तीसरा भारत-इंडोनेशिया नीति नियोजन संवाद, 15-16 सितंबर 2025 को जकार्ता में आयोजित दूसरा भारत-इंडोनेशिया ट्रैक 1.5 संवाद (अनौपचारिक और अर्ध-सरकारी चर्चा प्रक्रिया, जिसमें सरकारी अधिकारी और गैर-सरकारी विशेषज्ञ एक साथ मिलकर बातचीत करते हैं) और 5-6 अगस्त 2025 को जकार्ता में आयोजित जकार्ता फ्यूचर्स फोरम शामिल हैं।

रक्षा और समुद्री सहयोग

8. भारत और इंडोनेशिया को समुद्री पड़ोसी और मजबूत रक्षा रणनीतिक साझेदार मानते हुए और 2018 में हिंद-प्रशांत में समुद्री सहयोग पर भारत-इंडोनेशिया साझा दृष्टिकोण अपनाए जाना स्मरण करते हुए, दोनों नेताओं ने रक्षा और समुद्री साझेदारी को बढ़ाने और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

9. दोनों नेताओं ने 27 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रियों की तीसरी संवाद बैठक आयोजित होने का स्वागत किया और पारंपरिक और उभरते दोनों क्षेत्रों में रक्षा सहयोग मजबूत बनाने तथा सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इनमें नियमित रक्षा संवाद, संयुक्त अभ्यास, स्टाफ वार्ता, संयुक्त अनुसंधान और नई रक्षा प्रौद्योगिकियों का सह-उत्पादन, बंदरगाह भ्रमण, शांतिरक्षा गतिविधियां, सूचना साझाकरण, जलविज्ञान, क्षमता निर्माण, कैडेट प्रशिक्षण और आदान-प्रदान तथा रक्षा औद्योगिक सहयोग शामिल हैं। दोनों नेताओं ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल सहयोग समझौते सहित रक्षा सहयोग बढ़ाने का स्वागत किया।

10. दोनों नेताओं ने समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री संपर्क, तटीय निगरानी, ​​मानवीय सहायता और आपदा राहत, प्रदूषण नियंत्रण और खोज एवं बचाव सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर समुद्री सहयोग का स्वागत किया। दोनों देशों के आपसी हितों और प्राथमिकताओं पर आधारित यह सहयोग क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि लाने तथा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक स्थिरता सुनिश्चित करने में योगदान देता है। दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा और संरक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल - बाकामला आरआई तथा भारतीय तटरक्षक बल के बीच कार्यान्वयन व्यवस्था का भी स्वागत किया।

11. दोनों नेताओं ने संयुक्त अभ्यासों और रक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के रणनीतिक और परिचालन महत्व पर जोर दिया और मौजूदा नौसैनिक सहयोग और मजबूत बनाने के प्रयासों की सराहना की। दोनों नेताओं ने परस्पर हित से जुड़े समुद्री मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा जारी रखने पर भी बल दिया, जो संबंधित राष्ट्रीय कानूनों और विनियमों के साथ-साथ 1982 के संयुक्त राष्ट्र नौसेना समझौते सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप हैं।

12. दोनों नेताओं ने गुरुग्राम स्थित हिंद महासागर क्षेत्र - सूचना संलयन केंद्र में इंडोनेशिया के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारी की नियुक्ति का स्वागत किया। उन्होंने समुद्री सुरक्षा में पारस्परिक लाभकारी सहयोग क्षेत्रों की पहचान करने पर चर्चा जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की।

13. दोनों नेताओं ने रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी में सहयोग प्राथमिकता क्षेत्रों में से एक बताया और संयुक्त उपकरण उत्पादन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण, जहाज निर्माण में सहयोग सहित रक्षा उपकरणों की सोर्सिंग, समान रक्षा प्लेटफार्मों के लिए रखरखाव, मरम्मत और संचालन सुविधाओं की स्थापना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास की स्थापना की संभावनाओं का पता लगाने और रक्षा आपूर्ति श्रृंखला पारितंत्र मजबूत बनाने के लिए रक्षा उद्योगों के बीच पारस्परिक लाभकारी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने सैन्य दवाओं की आपूर्ति पर भारत और इंडोनेशिया के सशस्त्र बल चिकित्सा प्रतिष्ठानों के बीच फार्मास्युटिकल सहयोग में हुई प्रगति का स्वागत किया।

आतंकवाद निरोधक और सुरक्षा सहयोग

14. दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कठोर निंदा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार व्यापक और सतत उपायों से आतंकवाद से निपटने के लिए निर्णायक और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का आह्वान किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति में सूचीबद्ध संगठन सहित वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया।

15. दोनों नेताओं ने आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले हिंसक उग्रवाद की रोकथाम और इनका मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। इसमें आतंकवादी वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के प्रयास, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत धनशोधन निरोधक उपाय और आतंकवादी वित्तपोषण का मुकाबला करने हेतु मानकों को बढ़ावा देना, आतंकवादी मकसद में इस्तेमाल होने वाली नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकना और आतंकवादियों की ऑनलाइन भर्ती तथा डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से कट्टरता फैलाने से निपटने और हिंसक उग्रवाद की रोकथाम कार्यक्रमों पर सहयोग मजबूत बनाना शामिल है।

16. दोनों नेताओं ने आतंकवाद का मुकाबला करने में शून्य-सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने आतंकवादी वित्तपोषण माध्यमों को बाधित करने और संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग मजबूत बनाने के सक्रिय उपाय जारी रखने की दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की।

17. आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के बीच संबंधों को चिन्हित करते हुए, दोनों नेताओं ने अपने घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप, सूचनाओं और सर्वोत्तम प्रथाएं साझा करने सहित, सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने निकट भविष्य में हस्ताक्षरित होने वाले आतंकवाद निरोधक सहयोग पर समझौता ज्ञापन शीघ्र पूर्ण होने का भी स्वागत किया।

18. दोनों नेताओं ने सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर व्यापक चर्चा के लिए एक मंच के रूप में तीसरे भारत-इंडोनेशिया सुरक्षा संवाद के आयोजन का स्वागत किया। दोनों देशों ने संवाद के माध्यम से आतंकवाद, संगठित और अंतरराष्ट्रीय अपराध, उभरती प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा, तथा रक्षा उद्योग, समुद्री और अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

19. दोनों नेताओं ने नीतिगत संवाद, क्षमता निर्माण, सर्वोत्तम प्रथा साझा करने और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, वित्तीय प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल फोरेंसिक और कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी) सहयोग, महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा और डिजिटल कौशल पर क्षमता निर्माण सहित साइबर क्षेत्र में संभावित सहयोग पर चर्चा पर भी सहमति व्यक्त की।

आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग

20. दोनों नेताओं ने उल्लेख किया कि आर्थिक और व्यापारिक सहयोग भारत-इंडोनेशिया के गतिशील संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। उन्होंने विकसित भारत 2047 और इंडोनेशिया एमस 2045 के दृष्टिकोण के बीच व्यापक आर्थिक और विकासात्मक तालमेल को स्वीकार करते हुए अधिक आर्थिक अवसर खोलने के लिए दोनों देशों के बीच व्यापक और गहन आर्थिक एकीकरण की भूमिका स्वीकार की। इस दिशा में उन्होंने संतुलित, पारस्परिक लाभकारी और व्यापारिक सुगमता के लिए आसियान-भारत व्यापार समझौते की समीक्षा समय पर पूरी करने और उसके उपरांत द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए व्यापक और गहन द्विपक्षीय व्यापारिक जुड़ाव की इच्छा व्यक्त की।

21. दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश कार्य समूह की द्वितीय बैठक, व्यापार मंत्रियों के चौथे द्विवार्षिक मंच और संयुक्त आर्थिक और वित्तीय संवाद प्रथम बैठक सहित मौजूदा द्विपक्षीय आर्थिक तंत्रों के पूर्ण उपयोग और सुदृढ़ीकरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन तंत्रों को लंबित शुल्क और गैर-शुल्क मुद्दों के समाधान, बाजार पहुंच सुधार, व्यापार और निवेश सुगमता और वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, उद्योग और आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग आगे बढ़ाने के लिए ठोस और व्यापार-उन्मुख परिणाम प्राप्त करने की दिशा में काम करना चाहिए। साथ ही उन्हें एक-दूसरे के घरेलू नियमों और विकास प्राथमिकताओं का सम्मान करना चाहिए।

22. दोनों नेताओं ने घरेलू विनिर्माण उद्योगों के विकास के लिए विविधतापूर्ण और आवश्यकता अनुरूप आपूर्ति श्रृंखला निर्मित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ धातु क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया, ताकि कमजोरियों पर काबू पाया जा सके और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो। उन्होंने दुर्लभ धातु के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की और नॉन-फेरस मैटेरियल्स टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर, मिडवेस्ट लिमिटेड और पीटी. पेरूसहान मिनरल नेशनल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

23. दोनों नेताओं ने खनिज और इस्पात आपूर्ति श्रृंखला प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया। उन्होंने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और पीटी. क्राकाटाऊ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस स्टील स्लैब निर्माण सुविधा स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए रणनीतिक संयुक्त उद्यम पर भी संतोष व्यक्त किया।

24. दोनों नेताओं ने भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक इंडोनेशिया के बीच स्थानीय मुद्रा लेनदेन पर दिशानिर्देशों के संचालन प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच वित्तीय एकीकरण गहरा होगा।

स्वास्थ्य, फार्मा, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा

25. दोनों नेताओं ने इंडोनेशिया में संभावित प्रचालन वितरण मंच के रूप में रेड एंड व्हाइट कोऑपरेटिव नेटवर्क के महत्व पर जोर दिया, ताकि संबंधित घरेलू कानूनों और विनियमों के अनुसार, दोनों देशों से औषधि और चिकित्सा उत्पादों सहित अन्य वस्तुओं की आपूर्ति की जा सके।

26. दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और स्वास्थ्य पेशेवर कार्यबल विकास कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। यह समझौता पेशेवरों के लिए फेलोशिप कार्यक्रमों और कौशल संवर्धन कार्यक्रमों, विशेष चिकित्सा क्षेत्रों में व्यावहारिक नैदानिक ​​प्रशिक्षण, स्वास्थ्य पेशेवरों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और अन्य पारस्परिक सहमत सहयोगी गतिविधियों के माध्यम से सहयोग मजबूत बनाएगा। उन्होंने प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में नियामक सहयोग पर इंडोनेशियाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन और भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण के बीच समझौता ज्ञापन शीघ्र पूर्ण करने का आग्रह किया।

27. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की घरेलू नीतियों का सम्मान करते हुए खाद्य सुरक्षा और पोषण क्षेत्र में सहयोग और गहरा बनाने पर भी सहमति व्यक्त की। उन्होंने कृषि और खाद्य सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का स्वागत किया, जिसमें खाद्य और कृषि व्यापार, संयुक्त अध्ययन, नवाचार और ज्ञान साझाकरण शामिल है, ताकि पारस्परिक रूप से निर्धारित सतत और स्थिति अनुरूप खाद्य प्रणालियों को समर्थन मिले। उन्होंने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग पर समझौता ज्ञापन शीघ्र पूरा करने और समुद्री एवं मत्स्य उद्योग क्षेत्र में समझौता ज्ञापन के शीघ्र नवीनीकरण की आशा व्यक्त की।

28. दोनों नेताओं ने औषधि और चिकित्सा उत्पादों के क्षेत्र में अभी जारी सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने चिकित्सा उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और इंडोनेशिया की 'खाद्य और औषधि पर्यवेक्षण एजेंसी' बीपीओएम के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

29. दोनों नेताओं ने उर्वरक क्षेत्र में सहयोग मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की और बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप स्थिर, किफायती और विश्वसनीय उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

30. दोनों पक्षों ने आपसी सहमति के अनुसार, पारंपरिक, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सहित ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग, संयुक्त अध्ययन और क्षमता निर्माण मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस, हरित हाइड्रोजन, जैव ऊर्जा, सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने का स्वागत किया।

बुनियादी ढांचा और संपर्क

31. दोनों नेताओं ने एक-दुसरे के बीच समुद्री और हवाई संपर्क बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया और हवाई संपर्क और बंदरगाह-से-बंदरगाह संपर्क को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने 2026 के उत्तरार्ध में आयोजित होने वाली अंडमान-एचे संपर्क पर तीसरी संयुक्त कार्य बल बैठक और शीघ्र लागू होने वाली कार्य योजना के प्रति उत्सुकता व्यक्त की।

32. राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सबांग बंदरगाह के समेकित विकास साझेदारी में भारत की रुचि का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने माना कि इस तरह की साझेदारी—जिसमें क्रूज और समुद्री पर्यटन सुविधाएं, समुद्री उद्योग (जहाज मरम्मत और जहाज निर्माण) और अंडमान सागर में अपतटीय ऊर्जा गतिविधियों का समर्थन करने वाली तट-आधारित सेवाएं शामिल हैं—भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और सुमात्रा द्वीप के प्रांतों के बीच संस्थागत, भौतिक, डिजिटल और लोगों तथा वस्तुओं के आवागमन को बढ़ावा देगी। इससे निवेश, रोजगार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और साझा क्षेत्रीय समृद्धि होगी। दोनों नेताओं ने अपने संबंधित प्राधिकरण को प्रोत्साहित किया कि वे इंडोनेशिया की विकास योजनाओं और लागू नियमों के अनुरूप, समयबद्ध और पारस्परिक लाभकारी उपायों से परियोजना के दायरे, तौर-तरीकों और वित्तपोषण पर काम करें।

33. दोनों नेताओं ने भारत में डिजिटल व्यापार के लिए ओपन नेटवर्क आर्किटेक्चर पर आधारित इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क आरंभ किये जाने का स्वागत किया। इसका उद्देश्य डिजिटल नेटवर्क द्वारा डिजिटल अर्थव्यवस्था में इंडोनेशियाई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की भागीदारी बढ़ाना है।

34. दोनों नेताओं ने भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंक इंडोनेशिया के बीच हुए समझौते में भारत और इंडोनेशिया के बीच सीमा पार क्यूआर भुगतान संपर्क कार्यान्वयन में प्रगति का स्वागत किया। यह पहल इंडोनेशिया और भारत के बीच द्विपक्षीय भुगतान संपर्क मजबूत बनाने में काफी महत्वपूर्ण है। यह लेन-देन की दक्षता बढ़ाएगा, वित्तीय स्थिरता मजबूत करेगा और विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों, पर्यटन और छात्रों को सहायता प्रदान कर समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।

35. दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के बीच दूरसंचार प्रौद्योगिकी और सेवा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पूर्ण होने का स्वागत किया। यह समावेशी आर्थिक विकास और डिजिटल बदलाव के लिए दूरसंचार प्रौद्योगिकी और डिजिटल कनेक्टिविटी में सहयोग और मजबूत बनाएगा।

जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास

36. राष्ट्रपति प्रबोवो ने जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका स्वीकार की और प्रधानमंत्री श्री मोदी की अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की पहल की सराहना की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने संबंधित घरेलू प्रक्रिया के अनुसार इसमें शामिल होने के इंडोनेशिया की मंशा का स्वागत किया और इंडोनेशिया की पहल, विशेष रूप से विश्व मैंग्रोव केंद्र और अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय पीटभूमि केंद्र का उल्लेख किया, जो जैव विविधता, मैंग्रोव और पीटभूमि संरक्षण पर वैश्विक सहयोग मजबूत बनाने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाती हैं।

37. प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता व्यक्त करते हुए दोनों नेताओं ने आपदा प्रबंधन सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सूचना, अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के साथ ही आपदा प्रतिक्रिया, पुनर्स्थापना, शमन और तैयारी संबंधी क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण, प्रभावी आपदा शमन और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए डेटा अनुप्रयोग के माध्यम से सहयोग बढ़ाने के दोनों देशों के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण और लचीलेपन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन के महत्व का भी उल्लेख किया।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष तथा महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी सहयोग

38. दोनों नेताओं ने 12 अगस्त, 2025 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर प्रथम संयुक्त आयोग बैठक आयोजित किये जाने तथा भारत और इंडोनेशिया के बीच अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

39. दोनों नेताओं ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन – इसरो और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी के बीच चल रहे अंतरिक्ष सहयोग के साथ ही 24-25 जून 2026 को भारत के बेंगलुरु में आयोजित बाह्य अंतरिक्ष सहयोग पर छठी संयुक्त आयोग की बैठक पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने भारत और इंडोनेशिया के बीच शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाह्य अंतरिक्ष अन्वेषण और उपयोग में सहयोग पर फ्रेमवर्क समझौते के विस्तार पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया।

40. प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत के उपग्रह एवं प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों तथा भारत के गगनयान मिशन के समर्थन में इंडोनेशिया के निरंतर सहयोग के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो के प्रति आभार व्यक्त किया। यह सहयोग ब्रिन-आईएसआरओ और बियाक टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एवं कमांड (टीटीसी) सुविधाओं के बीच सहयोगात्मक व्यवस्थाओं के माध्यम से किया जा रहा है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने इंडोनेशियाई उपग्रहों के प्रक्षेपण तथा एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी शिक्षा केंद्र के माध्यम से इंडोनेशियाई अधिकारियों के प्रशिक्षण तथा आसियान-भारत अंतरिक्ष सहयोग के लिए भारत के समर्थन की सराहना की। उन्होंने इंडोनेशिया में अंतरिक्ष पत्तन परियोजना पर दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष पारितंत्र सहयोग का भी स्वागत किया।

41. दोनों नेताओं ने भारत और इंडोनेशिया के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग चर्चाओं को भी रेखांकित किया, जिससे अनुसंधान, क्षमता निर्माण और परमाणु सुरक्षा में सहयोग मजबूत होगा। उन्होंने नागरिक परमाणु ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का स्वागत किया, जिसमें उद्योग, परमाणु चिकित्सा, कृषि और जल प्रबंधन में संबंधित नियामक और तकनीकी प्रगति और अनुप्रयोग शामिल हैं।

संस्कृति, पर्यटन और लोगों के बीच आदान-प्रदान

42. दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा योग्याकार्ता में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए भारत समर्थित परियोजना आरंभ होने का स्वागत किया। इंडोनेशिया ने भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा लगभग 860 ईस्वी सन् की मूल नालंदा ताम्रपत्र की प्रतिकृति भेंट करने की भी सराहना की, जो देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण है। यह अब मुआरा जांबी के नए संग्रहालय में प्रदर्शित किया जा रहा है। दोनों नेताओं ने अगस्त 2023 में वाराणसी में आयोजित जी20 संस्कृति मंत्रियों की बैठक में अपनाए गए "काशी कल्चरल पाथवे" में निहित सिद्धांतों का स्मरण किया और दोनों सरकारों के बीच अपने कानूनों और प्रक्रियाओं के अनुसार और मैत्री और पारस्परिक सम्मान की भावना से सांस्कृतिक विरासत पर निरंतर परामर्श के महत्व पर बल दिया।

43. दोनों नेताओं ने रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया में शिक्षा और स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान देने वाले प्रणेता की हजार देवंतरा की अमिट बौद्धिक विरासत और साझा शैक्षिक दृष्टिकोण को मान्यता दी, जिनके आदान-प्रदान ने भारत और इंडोनेशिया के बीच साझा सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों की एक महत्वपूर्ण नींव रखने में मदद की। दोनों नेताओं ने 2026-2027 को "भारत-इंडोनेशिया सांस्कृतिक और शैक्षिक राजनय का टैगोर-देवंतरा वर्ष" के रूप में मनाने पर सहमति व्यक्त की। यह आयोजन दोनों देशों में संयुक्त सांस्कृतिक, शैक्षिक, अकादमिक और जन-जन पहलों के एक वर्षव्यापी कार्यक्रम द्वारा रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 में इंडोनेशिया यात्रा की शताब्दी को इंगित करेगा।

44. पर्यटन को दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों के प्रेरक के रूप में रेखांकित करते हुए, दोनों नेताओं ने पर्यटन सहयोग बढ़ाने और एक-दूसरे के यहां सैलानियों का आवागमन बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने दोनों पक्षों के लिए यात्रा सुगमता और वीजा प्रक्रिया बेहतर बनाने के उपायों पर आगे बातचीत पर सहमति जताई।

45. दोनों नेताओं ने शिक्षा के क्षेत्र में जारी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए विद्यार्थियों के आदान-प्रदान सहित अधिक शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग की दिशा में काम करने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन को शीघ्र संपन्न करने को भी प्रोत्साहित किया।

46. ​​दोनों नेताओं ने उच्च शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने अकादमिक गतिशीलता, संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, संस्थागत सहयोग और मानव संसाधन विकास को समर्थन देने वाली अन्य पहल द्वारा पारस्परिक लाभकारी साझेदारियों के विस्तार को प्रोत्साहित किया। उन्होंने उच्च शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन शीघ्र संपन्न होने की आशा व्यक्त की। राष्ट्रपति प्रबोवो ने इंडोनेशिया में प्रतिष्ठित भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की शाखा परिसर स्थापित करने की बढ़ती रुचि का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर द्वारा इंडोनेशिया में एक परिसर स्थापित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया।

47. दोनों नेताओं ने मानव संसाधन विकास, बेहतर प्रबंधन और चुनाव क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग की दिशा में भारत के चुनाव आयोग और इंडोनेशिया के आम चुनाव आयोग के बीच सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चुनाव प्रबंधन और प्रौद्योगिकी उपयोग के क्षेत्र में सहयोग पर भारतीय निर्वाचन आयोग और केपीयू के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

48. दोनों नेताओं ने आधिकारिक सांख्यिकी, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और इंडोनेशियाई सांख्यिकी विभाग – बीपीएस के बीच प्रस्तावित सहयोग का स्वागत किया।

क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग

49. दोनों नेताओं ने मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति, आर्थिक और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान तथा पारस्परिक चिंता के वैश्विक मुद्दों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र और उसकी विशेष एजेंसियों सहित बहुपक्षीय और क्षेत्रीय मंचों पर भारत और इंडोनेशिया के बीच अधिक रणनीतिक तथा घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता, सहयोग और समृद्धि पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय कानून पर केंद्रित अधिक संतुलित और प्रतिनिधित्व वाली विश्व व्यवस्था स्थापित हो। दोनों पक्षों ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति साझा सम्मान की पुष्टि करते हुए क्षेत्र और उससे परे शांति, स्थिरता और पारस्परिक लाभकारी सहयोग आधार सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता, बहुलवाद और विधि सम्मत शासन बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। दोनों नेताओं ने विकासशील देशों के बीच बढ़ती सहयोगी भूमिका को स्वीकार किया और वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

50. दोनों नेताओं ने समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने और वैश्विक दक्षिण (विकासशील देशों) की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सार्थक सुधारों की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार और विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की सदस्यता शामिल है। उन्होंने कहा कि यह सुधार समावेशी और सदस्य देशों द्वारा संचालित अंतर-सरकारी वार्ताओं, जिनमें लिखित वार्ताएं भी शामिल हैं, के माध्यम से होनी चाहिए। बहुपक्षीय मंचों पर आपसी सहयोग की प्रबल भावना दर्शाते हुए, दोनों नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय उम्मीदवारों के लिए आपसी समर्थन पर चर्चा की।

51. दोनों नेताओं ने वैश्विक वित्तीय संरचना में सुधारों की आवश्यकता के साथ ही गैर-बाजार प्रचलनों, आपूर्ति श्रृंखलाओं के केंद्रीकरण और अनिश्चित बाजार पहुंच की चुनौतियों का जवाब देने के लिए विश्व व्यापार संगठन को केंद्र में रखते हुए नियम-आधारित, निष्पक्ष, खुला और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के महत्व पर भी बल दिया।

52. इंडोनेशिया ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के प्रति पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। भारत ने ब्रिक्स सदस्य देश के रूप में इंडोनेशिया की भूमिका का समर्थन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने समान वैश्विक शासन और सतत विकास के लिए रचनात्मक योगदान हेतु ब्रिक्स, जी-20, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन सहित प्रमुख मंचों के माध्यम से जुड़ाव बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

53. दोनों नेताओं ने 2018 में घोषित हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-इंडोनेशिया समुद्री सहयोग के साझा दृष्टिकोण को याद करते हुए स्वतंत्र, खुले, पारदर्शी, नियम-आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

54. उन्होंने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) सहित अंतरराष्ट्रीय संधियों के पालन, नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने किसी प्रकार के बल प्रयोग के खतरे से परहेज जताते हुए संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।

55. राष्ट्रपति प्रबोवो ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए विकसित हो रही क्षेत्रीय संरचना में आसियान एकता और आसियान केंद्रीयता पर भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की। दोनों पक्षों ने आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी और मजबूत बनाने का समर्थन किया, जो संबंधित सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों की पूरक है। दोनों नेताओं ने 'क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक' और भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल सहित तालमेल गहरा बनाने के लिए देशों को प्रोत्साहित किया।

56. दोनों नेताओं ने भारत-इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया त्रिपक्षीय तंत्र के प्रभावी सहयोग का स्वागत किया और समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्री प्रदूषण, समुद्र जनित अर्थव्यवस्था सहित क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों का पता लगाने और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस), इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (आईपीओआई) और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (आईओआरए) के ढांचे के तहत सहयोग बढ़ाने का स्वागत किया।

57. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया/मध्य पूर्व की स्थिति और इसके वैश्विक प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने 17 जून, 2026 को हस्ताक्षरित शांति समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। उन्होंने तनाव कम करने के महत्व पर बल देते हुए दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। उन्होंने नौवहन स्वतंत्रता और वैश्विक व्यापार प्रवाह का सम्मान करने और होर्मुज जलडमरूमध्य से पारगमन मार्ग कार्यान्वयन पर भी समान रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ये संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते के प्रावधानों सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरुप होना चाहिए।

58. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यात्रा के दौरान स्वयं और प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से भरे स्वागत और उत्कृष्ट आतिथ्य सत्कार के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इंडोनेशिया की मित्रवत जनता की समृद्धि और प्रगति की कामना करते हुए, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को आपसी सहमति से सुविधाजनक समय पर भारत आने का हार्दिक निमंत्रण दिया।

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Text of PM’s address at the Economic Times World Leaders Forum 2026
August 21, 2026

World Leaders Forum का ये प्रतिष्ठित मंच, Business और Industry की दुनिया के सभी जाने माने दिग्गज, पॉलिसी मेकर्स, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !