"Narendra Modi speaks at start of National Conference on Skill Development"
"In the last century we were very proud of IITs. It is a very good thing no doubt but in this century we need to think about ITIs and give it the same importance: Narendra Modi"
"CM calls for setting up of Human Resource Development Clusters like industrial clusters that will give people jobs closer to their homes"
"There would be development where there will be skilled manpower. The time for the reverse to happen has long gone: Narendra Modi"
"Narendra Modi pays rich tributes to Pandit Deen Dayal Upadhyaya"
"We have youth, we have skill, we have everything we only need to join it. Through this conference we seek to integrate these strengths: CM"
"Narendra Modi talks about Gujarat’s initiatives towards strengthening skill development in the last decade"

 

महात्मा मंदिर में कौशल विकास की राष्ट्रीय परिषद का शानदार शुभारंभ

देश के २८ राज्यों और ४ केन्द्रशासित प्रदेशों से ५००० डेलीगेट्स और विशेषज्ञ रहे मौजूद

देश में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर का चिन्तन करने की पहल मुख्यमंत्री ने गुजरात में की

भारत की युवा शक्ति को कौशलवान बनाएं- श्री मोदी

गुजरात के स्किल डेवलपमेंट मॉडल को भारत सरकार ने स्वीकारा

स्किल डेवलपमेंट के लिए २००८ से अनिर्णायक स्थिति में है केन्द्र सरकार

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गांधीनगर में कौशल विकास की राष्ट्रीय परिषद (नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन स्किल डेवलपमेंट) का उद्घाटन करते हुए भारत की युवा शक्ति को कौशलवान बनाने का प्रेरक आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को शक्तिशाली बनाने के लिए युवा भारत अपना सामर्थ्य बताने को तत्पर है और उसे इसका अवसर मिलना चाहिए। गुजरात ने इस दिशा में पहल की है।

एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस पर भारत में कौशल विकास को केन्द्र में रखकर राष्ट्रीय स्तर का चिन्तन करने की पहल गुजरात ने की है। आज महात्मा मंदिर में गुजरात सरकार के श्रम एवं रोजगार विभाग के तत्वावधान में कौशल विकास की राष्ट्रीय परिषद का शानदार शुभारंभ हुआ। परिषद में देश के २८ राज्यों और ४ केन्द्रशासित प्रदेशों से ५००० डेलीगेट्स एवं विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं, जिसमें विदेशी महानुभाव और केन्द्र सरकार तथा केन्द्रीय एजेन्सियों के विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

महात्मा मंदिर में युवा भारत का साक्षात्कार करते हुए श्री मोदी ने कहा कि विराट भारत के विकास के सपने को साकार करने के लिए यह युवा पीढ़ी तत्पर है। टेक्नोलॉजी ने व्यवस्था और विकास के परिमाण बदल दिये हैं, ऐसे में उन्होंने वैश्विक परिवर्तनों की आवश्यकता के अनुकूल भारत की युवा संपदा के कौशल-सामर्थ्य को उजागर करने की जरूरत पर बल दिया।

There would be development where there will be skilled manpower. The time for the reverse to happen has long gone: Narendra Modi

मुख्यमंत्री ने श्रम की महिमा उजागर करते हुए कहा कि हुनर-कौशल गरीब श्रमजीवी की अमानत है। वह स्वयं किसी झुग्गी या सेवाबस्ती में रहता है लेकिन अपनी कौशल कारीगरी के जरिए ऊंचे महल तैयार करने का सामर्थ्य रखता है। देश का निर्माण इन्हीं कुशल कारीगरों के हुनर-हाथों के कमाल और परिश्रम के पसीने से होता है। श्रमिक का गौरव और श्रम की महिमा ही भारत के विकास में जनशक्ति के विराट सामर्थ्य को सहभागी बनाएगी।

श्री मोदी ने कहा कि हमारे देश में युवा शक्ति, बौद्धिक संपदा, हुनर-कौशल की क्षमता और विकास के लिए कुशल मानवबल की मांग- यह सभी कुछ है, लेकिन उसे एक कड़ी में पिरोकर प्रगति में भागीदार बनाने को लेकर उदासीनता व्याप्त है। विश्व में भारत सबसे युवा देश है जहां ७५ फीसदी युवा ३५ वर्ष से कम आयु के हैं। यदि इस युवा शक्ति को राष्ट्रीय संपत्ति के तौर पर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने की दिशा आजादी के बाद के शासकों ने पकड़ी होती तो हिन्दुस्तान दुनिया का शक्तिशाली राष्ट्र बन गया होता। परन्तु किसी ने इस दिशा में कुछ नहीं किया इसलिए हम कर रहे हैं। गुजरात ने युवा शक्ति को हुनर-कौशल के जरिए विकसित करने की पहल की है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जिसने युवाओं के कौशल विकास पर ध्यान केन्द्रित नहीं किया है। विकास का आधार ही कुशल युवा शक्ति है और गुजरात ने स्किल डेवलपमेंट पर फोकस कर सही दिशा में कदम बढ़ाया है।

श्री मोदी ने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री देश में कौशल विकास के ५०० पाठ्यक्रमों की चर्चा करते हैं, जबकि चीन ने तो अपने युवाओं के कौशलवर्द्धन के लिए हजारों पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं। कब तक हम भारत के युवाओं के अरमानों को इंतजार करवाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि निपुणता के जरिए बेरोजगारी की समस्या को हल किया जा सकता है।

There would be development where there will be skilled manpower. The time for the reverse to happen has long gone: Narendra Modi

युवाओं के स्किल डेवलपमेंट को लेकर वर्तमान केन्द्र सरकार की अनिर्णायक मानसिकता की मिसाल पेश करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने वर्ष २००८ में नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउंसिल का गठन किया था। वर्ष २००९ में स्किल डेवलपमेंट की नेशनल पॉलिसी बनाई, उसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में स्किल डेवलपमेंट के एडवाइजर का कार्यालय खोला और फिर नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का गठन किया, लेकिन कुल मिलाकर अमलीकरण के नाम पर कोई प्रगति नहीं हुई। और आखिर में जुलाई-२०१३ में इन सभी एजेंसियों को मिलाकर एक नई एजेंसी का गठन किया है, परन्तु स्किल डेवलपमेंट का मॉडल अब तक खड़ा नहीं कर सके हैं। जबकि गुजरात ने कौशलवर्द्धन केन्द्रों का नेटवर्क खड़ा कर भारत सरकार को प्रेरणा दी है।

गुजरात के कौशलवर्द्धन केन्द्रों को तो स्वयं प्रधानमंत्री का बेस्ट स्किल डेवलपमेंट का नेशनल अवार्ड हासिल हुआ है और इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृती मिली है। गुजरात ने आईटीआई जैसे बुनियादी स्तर के टेक्निकल एजुकेशन का नेटवर्क सक्षम बनाया है और प्रत्येक तहसील में आईटीआई शक्तिशाली टेक्निकल कौशल प्रशिक्षण का माध्यम बन गई है, जिसका समाज में गौरव प्रस्थापित हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के जो राज्य युवाओं के कौशल विकास के लिए निर्णायक अमलीकरण कर रहे हैं, उन्हें बेरोजगारी घटाने में सफलता मिली है। कुशल मानव संसाधन विकास के लिए विश्व की मांग की पूर्ति करने को भारत समर्थ है। जरूरत है तो बस युवा शक्ति को हुनर-कौशल विकास के महत्तम अवसर प्रदान करने की। ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, मलेशिया जैसे अनेक देशों का उदाहरण पेश कर उन्होंने कौशल विकास की महिमा को उजागर किया।

भारत में एप्रेंटिसशिप एक्ट के अमल को लेकर भारत सरकार के उपेक्षित रवैये की आलोचना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि एप्रेंटिस को स्टाइपेंड देने के वर्तमान १४९० रुपये के मासिक स्तर में गुजरात ने पहल करते हुए १५०० रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहक एप्रेंटिस स्टाइपेंड जोड़ा है और इसकी वजह से एप्रेंटिस की संख्या में १०,००० की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

There would be development where there will be skilled manpower. The time for the reverse to happen has long gone: Narendra Modi

मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस पर उनका श्रद्धा-स्मरण करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल जी ने कौशल-स्किल के लिए “सेवन-एम फॉर स्किल” का मंत्र दिया था। जिसमें मैन, मनी, मशीन, मोटिव पॉवर, मैनेजमेंट, मटीरियल और मार्केट का समावेश होता है। इन सभी का समन्वय कर युवाओं को कौशलवान बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जितना गुणगान हमनें आईआईटी और आईआईएम की उच्च शिक्षा का किया है उतना ही स्किल डेवलपमेंट के लिए आईटीआई का करने की जरूरत है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का निर्णायक योगदान है और जीरो डिफेक्ट प्रोडक्शन तथा लो-कॉस्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए विश्व के बाजारों पर छा जाने के लिए भी स्किल डेवलपमेंट सेक्टर को सामर्थ्यवान बनाने की आवश्यकता है।

प्रारंभ में श्रम एवं रोजगार मंत्री सौरभभाई पटेल ने स्वागत भाषण में इस राष्ट्रीय परिषद के उद्देश्य की भूमिका पेश की।

श्री पटेल ने श्रम और कौशल निर्माण की महिमा उजागर करते हुए कहा कि गुजरात मंद आईटीआई के परंपरागत पाठ्यक्रमों में समयानुकूल बदलाव लाकर मुख्यमंत्री ने युवा शक्ति की भुजाओं में कौशलसंवर्द्धन के जरिए स्वाभिमान के साथ स्वरोजगार का नया प्रेरणाबल भरा है।

विश्व बैंक के सोशल प्रमोशन यूनिट के वरिष्ठ अर्थशास्त्री जॉन डेविड ब्लोमक्विस्ट ने विश्व में श्रम शक्ति और बाजार तथा उत्पादन व्यवस्था की मांग के अनुरूप कौशलवर्द्धक मानव संसाधन की आवश्यकता के सन्दर्भ में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अब विश्व बैंक स्वयं विकसित और विकासशील देशों में औद्योगिक एवं बाजार व्यवस्था की उभरती हुई संभावनाओं को जोड़कर मानव संसाधन निर्माण के आयाम शुरू करने जा रहा है। ब्लोमक्विस्ट ने विश्वास जताया कि भारत में युवा शक्ति के कौशलवर्द्धन द्वारा सशक्तिकरण की जरूरत के सन्दर्भ में गुजरात का यह राष्ट्रीय परिसंवाद उद्दीपक बनेगा।

इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के ट्रेड कमिश्नर टॉम क्लेडर सहित राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, विविध राज्यों के वरिष्ठ सचिव, ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के अध्यक्ष मंथा तथा योजना आयोग की सलाहकार श्रीमती सुनीता सांघी एवं उद्योगगृहों, स्वैच्छिक औद्योगिक तालीम संस्थाओं के पदाधिकारी के अलावा कौशल निर्माण क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ भी मौजूद थे।

श्रम रोजगार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पी.पनीरवेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

दिन के दौरान इस परिषद में १० विभिन्न विषयों पर ३० चर्चा एवं तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ।

There would be development where there will be skilled manpower. The time for the reverse to happen has long gone: Narendra Modi

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।