नई सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक अनिश्चितताओं की दुनिया में ब्रिक्स शांति, क्षमता और भरोसे के रूप में खड़ा है: प्रधानमंत्री
हमें 2020 तक अंतर-ब्रिक्स व्यापार को दोगुना करके 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए: नरेंद्र मोदी
हमारे विकास और समृद्धि पर आतंकवादी की लम्बी छाया है: प्रधानमंत्री

महामहिम राष्ट्रपति शी जिनपिंग,

महामहिम राष्ट्रपति जैकब जुमा,

महामहिम राष्ट्रपति मिशेल टेमर,

महामहिम राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन,

विशिष्ट प्रतिनिधिगण,

गोवा में आठवें (8वें) ब्रिक्स सम्मेलन के लिए मैं 1.25 अरब भारतीयों के साथ एक बार फिर आप सभी का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं।

मुझे ब्रिक्स नेताओं पूर्ण अधिवेशन की अध्यक्षता करने का सम्मान मिला है। इससे पहले दिनभर हुई हमारी बातचीत काफी उत्पादक रही।

इस सत्र में ब्रिक्स के लिए एक सक्रिय एजेंडा तैयार होना चाहिए।

समय के साथ-साथ ब्रिक्स देशों के बीच तालमेल बढ़ा है जिसमें आर्थिक गतिविधियों का एक व्यापक क्षेत्र भी शामिल है।

हमारी साझेदारी का दायरा आज कृषि से लेकर उद्योग एवं नवाचार, व्यापार से लेकर पर्यटन, पर्यावरण से लेकर ऊर्जा, फिल्म से लेकर फुटबाॅल, कौशल विकास से लेकर स्मार्ट सिटी और भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग एवं धन शोधन से लेकर समाजों की सुरक्षा तक विस्तृत हो चुका है।

इस साल हम ब्रिक्स को अपने शहरों और प्रांतों तक ले गए और उसे सीधे तौर पर अपने लोगों के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जोड़ा।

महानुभावों,

हम ब्रिक्स के तहत हमारी साझेदारी के 10 साल को मना रहे हैं। एक दशक की साझेदारी से हमें सहयोग का जबरदस्त फायदा हुआ है। हम अपने प्रयासों और उपलब्धियों पर गर्व करने के हकदार हैं।

न्यू डेवलपमेंट बैंक और कंटिंजेंसी रिजर्व अरेंजमेंट की स्थापना वास्तव में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। एक ऐसे विश्व में जहां हम सुरक्षा संबंधी नई चुनौतियों और लगातार आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं, ब्रिक्स हरसंभव शांति और उम्मीद की मशाल के रूप में खड़ा है।

हमारा काम विकासशील दुनिया के लिए काफी मायने रखता है।

पिछले साल ब्रिक्स ने बदलाव और विकास के वैश्विक एजेंडे को आकार देने में काफी अहम भूमिका निभाई थी।

एजेंडा 2030, पेरिस जलवायु समझौते और विकास के लिए वित्तपोषण पर एडीस अबाबा ऐक्शन एजेंडे के साथ हमारा सहयोग उद्देश्यपूर्ण और उत्पादक रहा है। और, हम वैश्विक शासन ढांचे में बदलाव को बढ़ावा देने में हमेशा अग्रणी रहेंगे।

महानुभावों,

हालांकि हमारी उपलब्धियां संतोषजनक रही हैं, लेकिन हमें अंतर-ब्रिक्स सहयोग के लिए सकारात्मक दिशा और मजबूत गति बरकरार रखने की जरूरत है।

हमें इसमें और सामग्रियों को जोड़ने की भी आवश्यकता है। अब हम आपके सामने अपने कुछ विचार रख रहे हैं।

पहला, ब्रिक्स के तहत संस्था निर्माण की प्रक्रिया पर लगातार ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। हम जिन संस्थाओं की स्थापना कर रहे हैं उन्हें निश्चित तौर पर हमारे देशों और क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्हें कहीं अधिक लचीला और स्वतंत्र होना चाहिए। साथ ही उन्हें हमारी विकास प्राथमिकताओं के लिए व्यापक विकल्प पेश करने चाहिए।

हमें ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के विचार को वास्तविकता में बदले जाने का इंतजार है। हमें ब्रिक्स कृषि अनुसंधान केंद्र, ब्रिक्स रेलवे अनुसंधान नेटवर्क और ब्रिक्स खेल परिषद की स्थापना के लिए कार्यों को गति देने की जरूरत है।

काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई, कर चोरी पर लगाम के लिए एकजुट होने और स्पष्ट दिशानिर्देश और ढांचा तैयार करने की भी जरूरत है। हमारी एजेंसियों को कर अपराधियों और धन शोधन करने वालोें को न्याय के दायरे में लाने के लिए एक ढांचा तैयार करने की भी जरूरत है।

ब्रिक्स को वैश्विक शासन संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए बढ़ावा देना चाहिए ताकि उसमें आज की वास्तविकताएं प्रतिबिंबित हो सके।

दूसरा, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार एवं निवेश लिंकेज की मात्रा और गुणवत्ता में बदलाव। 2015 में अंतर-ब्रिक्स व्यापार करीब 250 अरब अमेरिकी डॉलर था। हमें 2020 तक इसे दोगुना बढ़ाकर 500 अरब अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

इसके लिए सभी पांच देशों में व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देने की जरूरत है। और सरकारों को इसके लिए प्रक्रिया आसान बनाने की अवश्यकता है। कर एवं सीमा शुल्क सहयोग ढांचे पर हमारा समझौता एक अच्छी शुरुआत है।

हाल में नई दिल्ली में संपन्न ब्रिक्स व्यापार मेला एवं प्रदर्शनी को व्यापार विनिमय के लिए नियमित मंच बनाया जाना चाहिए। और, ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक को इन उद्देश्यों को पूरा करने में एक अहम भूमिका निभाना चाहिए।

यह हमारे एसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ने में भी मदद कर सकता है। हमें दोहा दौर की बैठक और डब्ल्यूटीओ में अपनी क्रेंद्रीय भूमिका सुनिश्चित करने के लिए भी करीबी सहयोग करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा हम जी20 और अन्य मंचों पर भी अपना सहयोग और भागीदारी बढ़ाना चाहिए। भारत ने डब्ल्यूटीओ में सेवाओं के लिए व्यापार सुविधा समझौते का एक मसौदा तैयार किया है।

सेवाओं में उदारीकरण और व्यापार का अधिकतम लाभ विकासशील देशों को दिलाने की जरूरत है। इस प्रस्ताव को ब्रिक्स का जबरदस्त समर्थन हमारे साझा आर्थिक हित में होगा।

तीसरा, हमारे अर्थिक बदलाव पर प्रमुखता से ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। शहरीकरण, बुनियादी ढांचा और नवाचार ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के लिए प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।

भारत की अध्यक्षता में हमने डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्मार्ट सिटी, शहरीकरण और हमारे शहरों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। अगले एक अरब इंटरनेट उपयोगकर्ता उभरते बाजारों से आएंगे।

हमारी अर्थव्यवस्थाओं के बुनियादी संरचना में बदलाव के लिए हमें साथ मिलकर इस अवसर को भुनाने की आवश्यकता है।

चैथा, हमारे समाजों की सुरक्षा। आज हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, वहां यदि हमें हमारे नागरिकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना है तो आतंकवाद से मुकाबले के लिए हमें आपसी सहयोग की बेहद आवश्यकता है।

हमारे विकास और आर्थिक समृद्धि पर आतंकवाद की एक लंबी छाया है। उसकी पहुंच अब वैश्विक हो गई है। प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से वह अब कहीं अधिक निपुण और घातक हो रहा है। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी प्रतिक्रिया व्यापक होनी चाहिए। और हमें व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों स्तरों पर काम करने की आवश्यकता है।

आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ चयनात्मक दृष्टिकोण न केवल व्यर्थ होगा बल्कि वह उत्पादक भी नहीं रहेगा। इसलिए इसमें कृ़ित्रम अथवा स्वार्थों के आधार पर भेदभाव नहीं की जानी चाहिए।

आतंकवादी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों और संगठनों के लिए दंडात्मक कार्रवाई के लिए अपराध एकमात्र आधार होना चाहिए। आतंकवादियों के वित्तपोषण, हथियारों की आपूर्ति और राजनैतिक समर्थन को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने की आवश्यकता है।

इस संदर्भ में हमें अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन के मसौदे को जल्द से जल्द लागू करने से हमें इस जंग में मदद मिल सकती है।

पांचवां, लोगों के बीच संपन्नता ही ब्रिक्स की जीवनी शक्ति है। इससे हमारे साझेदारों के बीच जीवंतता और समृद्धि आएगी। इसलिए इस साल हमने इसे उजागर करने का निर्णय लिया है।

ब्रिक्स फिल्म महोत्सव, व्यापार मेला, आतंकवाद के खिलाफ सम्मेलन, खेल परिषद, फुटबॉल टूर्नामेंट और अन्य संबंधित गतिविधियों के जरिये हजारों युवा हितधारकों को तैयार करने में मदद मिलेगी जो अंततः हमारी साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे।

महानुभावों,

मैं एक मजबूत, गहरा और जीवंत ब्रिक्स समुदाय के लिए अपने साथी ब्रिक्स नेताओं से उनके विचार सुनने के लिए उत्सुक हूं।

ध्यान से सुनने के लिए आपका धन्यवाद।

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Prime Minister condoles the demise of former Suriname President
March 31, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, condoled the sudden demise of former President of Suriname, Mr Chandrikapersad Santokhi ji. The Prime Minister stated that this is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora. Recalling his many meetings with the late leader, Shri Modi noted that Santokhi Ji’s tireless service for Suriname and his efforts in strengthening India-Suriname relations were clearly reflected in their interactions. He also highlighted Santokhi Ji’s special fondness for Indian culture, noting that he won several hearts when he took oath in Sanskrit.

The Prime Minister posted on X:

“Deeply shocked and saddened by the sudden demise of my friend and the former President of Suriname, Mr. Chandrikapersad Santokhi Ji. This is not only an irreparable loss to Suriname but also to the global Indian diaspora.

I fondly recall my many meetings with him. His tireless service for Suriname and his efforts in strengthening India-Suriname relations were clearly reflected in our interactions. He had a special fondness for Indian culture. He won several hearts when he took oath in Sanskrit.

I extend my heartfelt condolences to his family and the people of Suriname in this hour of grief. Om Shanti.

Sharing some glimpses from our various interactions…”