मुख्यमंत्री ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

कपास निर्यात पर से प्रतिबंध तत्काल हटाने की श्री मोदी की मांग

गुजरात के लाखों कपास उत्पादक किसानों के आर्थिक हितों के साथ खिलवाड़ बंद हो : मुख्यमंत्री

गांधीनगर, सोमवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कपास निर्यात पर भारत सरकार की ओर से एकाएक लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है।

मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर मांग की है कि कपास के निर्यात पर पाबंदी का यूपीए सरकार के प्रतिवर्ष किए जाने वाले ऐसे मनगढंत निर्णयों से सबसे ज्यादा नुकसान गुजरात के कपास किसानों को होता है और अरबों रुपये का आर्थिक घाटा सहन करना पड़ता है। इसलिए कपास पर से निर्यात का प्रतिबंध तत्काल खत्म किया जाना चाहिए। हर साल केंद्र की विकृत नीति का शिकार देश में सबसे ज्यादा गुजरात के कपास बनते हैं। गुजरात के शंकर कपास की उच्च गुणवत्ता की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। इसलिए इसके निर्यात पर लगे केंद्रीय प्रतिबंध में से स्थायी मुक्ति दी जानी चाहिए।

श्री मोदी ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है कि पिछले वर्ष भी कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय कर अचानक गुजरात के किसानों को 14 हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम आर्थिक घाटा करवाया गया और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भाव नीचे जाने के बाद कपास के निर्यात की छूट दी गई। इससे भी किसानों को आर्थिक घाटा हुआ।

कपास के निर्यात पर प्रतिबंध संबंधी अचानक किए जाने वाले निर्णय पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रालयों और उसके साथ स्थापित हित रखने वाली कई टैक्सटाइल मिलों और कॉटन यार्न उत्पादक के बीच सांठगाठ हो गई है, क्योंकि इन टैक्सटाइल मिलों-यार्न उत्पादकों  के पास 52 लाख कपास गांठों का स्टाक होना चाहिए। लेकिन अभी यह सिर्फ 27 लाख गांठे ही है, इससे साबित होता है कि जान-बूझकर ऐसी साजिश रची जाती है। भारत में कपास की कृत्रिम कमी का षड्यंत्र रचकर अब न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम भाव में किसानों का कपास खरीदा जाता है।

यह किसान विरोधी षड्यंत्र ही है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुजरात के शंकर कपास की उत्तम गुणवत्ता की वजह से भारी मांग है, ऐसे में कपास निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगा दिया गया है। कपास उत्पादक किसानों के पास इसका संग्रह करने की कोई व्यवस्था नहीं होती, इसलिए महंगे कपास को किसानों से निम्नतम भावों पर खरीद लेने की यह चाल है।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात के कपास किसान कपास के अधिकतम उत्पादन और निर्यात द्वारा देश की अर्थव्यवस्था में भारी योगदान देते हैं, ऐसे में विशाल किसान समाज के हितों की सरेआम उपेक्षा कर राज्य सरकार के साथ परामर्श किए बगैर ऐसा किसान विरोधी निर्णय किस प्रकार लिया जा सकता है? क्या राज्य के कृषि हितों की कोई परवाह नहीं की जाती?

श्री मोदी ने पत्र में लिखा है कि इस वर्ष भारत में 365 लाख कपास गांठों का उत्पादन हुआ है और गुजरात के किसानों ने पिछले वर्ष 98 लाख कपास गांठों का उत्पादन किया था। इसकी तुलना में इस वर्ष तो 116 लाख गांठ उत्पादन होने का अनुमान है। गुजरात के किसानों ने उत्तम क्वालिटी के शंकर की गुणवत्ता ऊपर लाने के लिए दस वर्ष से पसीना बहाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुजरात के शंकर कपास की मांग अधिकतम रही है और भाव भी ऊंचे आ रहे हैं। ऐसे में, निर्णयात्मक समय पर गुजरात के लाखों कपास उत्पादकों पर निर्यात पाबंदी का डंडा चलाकर उन्हें कंगाल बनाने की साजिश केंद्र की यूपीए सरकार कर रही है। पिछले वर्ष भी ऐसा ही षड्यंत्र किया गया था और किसानों का आक्रोश बढऩे पर निर्यात पर से प्रतिबंध हटाने का नाटक किया गया था। तब, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भाव घट गए थे और स्थानीय बाजारों में भाव नीचे चले गए थे। तब गुजरात के किसान को कपास बेचने के लिए मजबूर किया गया था, जिससे उन्हें 14 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

केंद्र सरकार ने रातोंरात कपास के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है और इसके साथ ही किसानों द्वारा लिए गए निर्यात के रजिस्ट्रेशन लाइसेंस को भी रद्द कर तानाशाही की सीमाएं लांघ दी गई है।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात के कपास की उत्तम गुणवत्ता की वजह से चीन इसका सबसे बड़ा खरीददार है। परन्तु गुजरात का उत्तम कपास ऊंचे भाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचकर चीन लाभ कमाता है। जबकि वास्तव में यह फायदा गुजरात के किसान को मिलना चाहिए। इसके बावजूद केंद्र में स्थापित हित रखने वाले टैक्सटाइल मिलों के मालिकों को लाभ करवाने के लिए गुजरात के लाखों किसानों का आर्थिक नुकसान किया जा रहा है। गुजरात का किसान अब इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

मुख्यमंत्री ने कपास के निर्यात पर लगा प्रतिबंध तत्काल हटा लेने और गुजरात के शंकर कपास के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को स्थायी रूप से हटाने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि गुजरात के कपास उत्पादक किसानों के  हितों के साथ अन्याय करने की हरकत केंद्र को भारी पड़ेगी। 

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”