प्रधानमंत्री ने विश्वबंधु के रूप में भारत की भूमिका पर चर्चा की और उदाहरण प्रस्तुत किये कि कैसे भारत जरूरतमंद देशों के लिए पहले सहायता प्रदाता के रूप में उभरा है
प्रधानमंत्री ने भविष्य के राजनयिकों के रूप में अधिकारी प्रशिक्षुओं की भूमिका के महत्व पर चर्चा की, क्योंकि देश 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है
प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी-संचालित दुनिया में संचार की भूमिका पर ज़ोर दिया
प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षुओं से प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद के जरिये विभिन्न देशों के युवाओं में भारत के प्रति जिज्ञासा पैदा करने का आग्रह किया
वैश्विक स्तर पर निजी क्षेत्र के लिए उभरते अवसरों पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के इस स्थान को भरने की क्षमता है

भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से उनके आवास, 7, लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की। 2024 बैच में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 33 आईएफएस अधिकारी प्रशिक्षु हैं।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व और विश्वबंधु के रूप में भारत की विशिष्ट भूमिका पर चर्चा की, जो सभी के साथ मैत्री सुनिश्चित करता है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि कैसे भारत जरूरतमंद देशों के लिए पहले सहायता प्रदाता के रूप में उभरा है।

उन्होंने वैश्विक दक्षिण की मदद के लिए भारत द्वारा किए गए क्षमता निर्माण प्रयासों और अन्य प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने विदेश नीति के उभरते क्षेत्र और वैश्विक मंच पर इसके महत्व पर चर्चा की। उन्होंने वैश्विक मंच पर विश्वबंधु के रूप में देश के विकास में राजनयिकों द्वारा निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने भविष्य के राजनयिकों के रूप में अधिकारी प्रशिक्षुओं की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया, क्योंकि देश 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने अधिकारी प्रशिक्षुओं के साथ विस्तृत बातचीत की और उनसे सरकारी सेवा में आने के बाद अब तक के अनुभवों के बारे में पूछा। अधिकारी प्रशिक्षुओं ने अपने प्रशिक्षण और शोध कार्यों के अनुभव साझा किए, जिनमें समुद्री कूटनीति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सेमीकंडक्टर, आयुर्वेद, सांस्कृतिक जुड़ाव, खाद्य और सॉफ्ट पावर जैसे विषय शामिल थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें "अपने भारत को जानें" प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद के माध्यम से विभिन्न देशों के युवाओं में भारत के प्रति जिज्ञासा पैदा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन प्रश्नोत्तरी के प्रश्नों को नियमित रूप से अद्यतन किया जाना चाहिए और इनमें भारत के समकालीन विषय जैसे महाकुंभ, गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने का उत्सव, आदि शामिल किये जाने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी-संचालित दुनिया में संचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से मिशनों की सभी वेबसाइटों को जानने और इस बात का पता लगाने का आग्रह किया कि प्रवासी भारतीयों के साथ प्रभावी संचार हेतु इन वेबसाइटों को बेहतर बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।

निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलने पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में आ रहे भारतीय स्टार्टअप्स के दायरे का विस्तार करने के लिए अन्य देशों में अवसर तलाशने पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र के इस स्थान को भरने की क्षमता है।

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