पीएम ने प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ खुली और अनौपचारिक चर्चा की

भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के 2021 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने 7, लोक कल्याण मार्ग पर आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।

खुली और अनौपचारिक बातचीत में प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को सेवा में शामिल होने पर बधाई दी और कहा कि उन्हें अब वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। पीएम ने उनसे सेवा में शामिल होने के कारणों पर भी चर्चा की।

साल 2023 को अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष मनाने की बात करते हुए उन्होंने विस्तार से इस बात की चर्चा की कि वे बाजरा-ज्वार को लोकप्रिय बनाने में कैसे योगदान कर सकते हैं, जिससे भारतीय किसानों को लाभ हो सके। उन्होंने बताया कि बाजरा कैसे पर्यावरण के अनुकूल है और इसके स्वास्थ्य लाभ भी हैं। उन्होंने एलआईएफई (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) मुहिम के बारे में बात की और इस पर भी चर्चा की कि पर्यावरण के हित में अपनी जीवनशैली में छोटा सा बदलाव कैसे ला सकते हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में उनके द्वारा बताए गए पंच-प्रण पर चर्चा की और इस बारे में जानकारी भी दी कि कैसे आईएफएस अधिकारी इसमें योगदान कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अगले 25 वर्षों की लंबी अवधि के लिए सोचने और योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित किया कि वे इस दौरान खुद को कैसे विकसित कर सकते हैं और देश के विकास के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

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प्रधानमंत्री ने सत्य और दृढ़ता के महत्व को उजागर करते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि अथक परिश्रम और सत्य के मार्ग पर चलकर हासिल की गई सफलता स्थायी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी सफलता न केवल आत्मविश्वास पैदा करती है बल्कि मन में संतुष्टि की गहरी भावना भी लाती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-

“न तथा बलवीर्याभ्यां जयन्ति विजिगीषवः।

यथा सत्यानृशंस्याभ्यां धर्मेणैवोद्यमेन च॥”

इसका अर्थ है कि जो लोग विजय की आकांक्षा रखते हैं वे केवल बल और पराक्रम से नहीं, बल्कि सत्य, दया, कर्तव्य और निरंतर प्रयत्न से सफल होते हैं।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:

“अथक परिश्रम और सत्य के मार्ग पर चलकर प्राप्त की गई सफलता स्थायी होती है। इससे जहां आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं मन को अद्भुत संतोष भी मिलता है।

न तथा बलवीर्याभ्यां जयन्ति विजिगीषवः।

यथा सत्यानृशंस्याभ्यां धर्मेणैवोद्यमेन च।।”