बागायती फसलों का उत्पादन 200 लाख टन पर पहुंचा: 15,000 करोड़ की आय

किसानों से वार्तालाप का श्री मोदी का सिलसिला विडियो कांफ्रेंस से जारी

 कृषि विकास की क्रांति और समृद्धि में खेती के साथ

 बागायती फसलों ने भी कमाल किया: मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में जारी कृषि महोत्सव अभियान के तहत आज एक लाख  जितने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि परम्परागत खेतीबाड़ी में ज्यादा आय हासिल करने में बड़ा परिवर्तन बागायती फसलों ने किया है। गुजरात में कृषि क्षेत्र में अनाज-धान की फसलों के साथ ही बागायती फसलों की बुवाई और उत्पादन में अनेक गुणा वृद्धि हुई है जो किसानों की सूझबूझ की वजह से सम्भव हुआ है।

श्री मोदी ने कहा कि कृषि महोत्सव और पशु स्वास्थ्य मेले का अभियान पूरी गति से आगे बढ़ रहा है। खेती नित्यनूतन बन रही है। वैज्ञानिक प्रयोग-संशोधन अपनाए जा रहे हैं और वैज्ञानिक रूप से जमीन,जल,खेती,खाद, बुवाई में गुणात्मक परिवर्तन आ रहा है। किसानों ने भी ज्यादा आय हासिल करने के लिए अनाज-धान की फसलों के साथ ही नकदी फसलों और बागायती फसलों पर ध्यान केन्द्रित किया है।

भारत सरकार ने हाल ही में इस वर्ष को बागायती खेती का वर्ष घोषित किया है। गुजरात के किसानों ने तो कृषि महोत्सव द्वारा अन्य फसलों की खेती के साथ बागायती फसलों की बुवाई और उत्पादन में अनेक गुणा वृद्धि की है। गेहुं का उत्पादन 10 लाख टन था जो दस वर्ष में पांच गुणा बढ़कर 50 लाख टन हो गया है। कपास का उत्पादन 23 लाख गांठों से बढ़कर एक करोड़ 23 लाख गांठ हो गया है।

बागायती खेती में छलांग पर श्री मोदी ने कहा कि पहले गुजरात में सिर्फ साढे तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फलों, फूलों और सब्जी की खेती होती थी और आज बागायती फसलों की बुवाई 14 लाख हेक्टेयर तक पहंच गई है। कच्छ के सूखे क्षेत्र में खारेक उगाकर किसान लाखों कमा रहे हैं। कम जमीन पर भी वैज्ञानिक पद्धति से खेती करके अनेक गुणा ज्यादा आय हासिल की जा सकती है। यह बागायती खेती करनेवाले प्रगतीशील किसानों ने साबित किया है।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में 61 लाख टन उत्पादन होता था जबकि आज 200 लाख टन बागायती फसलों का रिक़ोर्ड उत्पादन होता है और इसकी आय ही 15000 करोड़ जितनी हुई है। मसालों की खेती भी लोकप्रिय हुई है। आज तो आदिवासी किसान भी सुगन्धित वस्तुओं की खेती करते हैं। बागायती और अन्न खेती में गुणा जबकि मसाले की खेती में चार गुणा वृद्धि हुई है। बागायती खेती में ढांचागत सुविधाओं को देखते हुए 22 करोड़ जितनी रकम ग्रीनहाउस और नेटहाउस के लिए छोटे-सीमांत किसानों के लिए दी गई है। सिर्फ बागायती फसलों के लिए ही 155 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।

गुजरात में 900 जितने ग्रीनहाउस और 2494 जितने नेट हाउस  बने हैं। वाडी योजना के कारण आदिवासी किसान काजू की खेती करने लगा है। श्री मोदी ने कहा कि दक्षिण गुजरात में आदिवासी किसान मशरूम की खेती करके कई खाद्य वस्तुएं बनाता है। सब्जी उगानेवाले देवीपूजक समाज को 90 प्रतिशत सहायता पोली हाउस बनाने के लिए दी जाती है। 200 एपीएमसी में सब्जी और फल की लिए व्यवस्था की गई है।

 

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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निःस्वार्थ सेवा के गुण और दूसरों के कल्याण के लिए बिना किसी अपेक्षा के कार्य करने के महान आदर्श को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

"किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥"

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥