मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के सभी नागरिकों को दीपावली पर्व एवं नूतन वर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की है।

विक्रम संवत के नूतन वर्ष में स्वर्णिम गुजरात के निर्माण के लिए नई ऊर्ञ्जा के साथ विकासयात्रा की गति को और भी तेज बनाने की हार्दिक अभिलाषा मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गुजरात शांति एवं सुरक्षा की बुनियाद पर तेज गति से आगे बढ़ता ही रहा है। २१वी सदी के प्रथम पूरे दशक में राजनैतिक स्थिरता और प्रगति के लिए प्रतिबद्घता के साथ सुशासन का आदर्श स्थापित करने का नेतृत्व किया है, जिसकी नींव में गुजरात की जनता की संकल्पशक्ति एवं समाजशक्ति की विकास में भागीदारी है।

मुख्यमंत्री का शुभकामना संदेश अक्षरशः इस प्रकार है :

गुजरात सदाकाल से उत्सव प्रेमी रहा है।

गुजराती समाज संस्कृति एवं प्रकृति का चाहक है।

उत्सव की संस्कृति के साथ प्रकृति को जोड़कर गुजरात, उत्सव में जीवन की ऊर्ञ्जा की अनुभूति कराता है, शांति और सौहार्द से जन-जन को एक सूत्र में पिरोता है।

उत्सव चाहे कोई भी हो - धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक या राष्ट्रीय पर्व...

गुजराती उसे इतने ओतप्रोत होकर मनाते हैं, जिसके सद्भाव का कोई सानी नहीं।

नवरात्रि के शक्ति उपासना के पर्व में गरबा की गुजराती संस्कृति ने समग्र विश्व को आकर्षित किया है। पतंगोत्सव ने कोमनवेल्थ गेम्स में अपनी उपस्थिति के जरिए अनोखा रंग बिखेरा।

कच्छ के रण में चांदनी रात को शीतल-श्वेत रेत के अलौकिक सौन्दर्य की अनुभूति कराने वाला ‘रणोत्सव’ अब पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा है।

२१वी सदी के पहले दशक में तो गुजरात ने राष्ट्रीय पर्वों की रौनक को नया रूप दिया है।

गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गुजरात गौरव दिवस - विकास के जनउत्सव के रूप मं। जनशक्तिकी भागीदारी का दर्शन कराते हैं, तो लोकइतंत्र के उत्सव के तौर पर चुनाव पर्व मनाकर गुजरात की जनता जनार्दन ने लोकतंत्र के मूल्यों का जतन करने की साख-प्रतिष्ठा बरकरार रखी है तथा गुजरात सिर्फ और सिर्फ विकास के मंत्रके साथ है और रहेगा ऐसी पथप्रदर्शक राह समग्र देश को दिखाई है।

सोने में सुहागा यह कि, गुजरात की स्थापना के प्रथम वर्ष की यशस्वी विकासयात्रा की स्वर्णिम जयंति का पावन अवसर भी हम शानदार तरीके से मना रहे हैं।

साढ़े पांच करोड़ गुजराती विश्वभर में डंके की चोट पर संकल्पशक्तिके साथ, आने वाले कल के स्वर्णिम गुजरात के निर्माण के लिए विकास का स्वर्णिम उत्सव मनाने में ओतप्रोत हैं।

पंचामृत शक्तिके सहारे आधुनिक विकास की परिभाषा को गुजरात ने अर्थपूर्ण बनाया है। जल, ऊर्ञ्जा, ज्ञान, रक्षा एवं जनशक्तिको प्रगति का पंचामृत बनाकर गुजरात के आधुनिक विकास का डंका बजाया है। जल-थल-नभ सहित तीनों क्षेत्रों में गुजरात नई ऊंञ्चाईयों पर परचम फहरा रहा है।

गुजरात के समुद्रतट भारत के विश्व-व्यापार का प्रवेशद्वार बन चुके हैं। उत्तर से दक्षिण एवं पूर्व से पश्चिम की अक्षांश-रेखा के भूभाग का व्यूहात्मक विकास-व्यूह अपनाकर गुजरात ने विकास से वंचित समाज एवं इलाकों के लिए विकास के नवोदय की चेतना प्रज्जावलित की है।

गुजरात के विकास में सर्वजन सुखाय सर्वजन हितायकी कल्याणकारी संस्कृति धड़क रही है। गरीबी के खिलाफ लड़ाई के लिए गरीब कल्याण मेलों द्वारा लाखों गरीबों का सशक्तिकरण किया गया। गरीब-वंचित जनसमुदाय में बरसों से व्याप्त कुपोषण की समस्या के विरूञ्द्घ सीधे जंग छेड़ी गई। समाज में जनसंख्या का ५० फिसदी हिस्सा रखने वाले नारीसमाज का सशक्तिकरण किया एवं निर्णय में भागीदारी की क्षमता के विशेष अधिकार प्रदान किए गए। समग्र देश में युवाशक्तिके व्यावसायिक कौशल भविष्य निर्माण के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा के विशाल अवसर प्रदान कर, गुजरात रोजगार के क्षेत्र में सात-सात वर्षों से बाजी मार रहा है। मानव विकास सूचकांक के पैरामीटर्स में गुजरात विकसित राष्ट्रों की पंक्तिमें बराबरी करने को तत्पर बना है।

औद्योगिक एवं आधुनिक बुनियादी विकास सुविधाओं से देश एवं दुनिया को चकाचौंध कर देने वाले गुजरात ने जलशक्तिएवं ऊर्ञ्जाशक्तिकी क्रांतिकारी उपलब्धियों के साथ, कृषि विकास में दस फिसदी की वृद्घि दर लगातार सात वर्षों से हासिल कर, कृषिप्रधान भारत के योजना विशेषज्ञों एवं नीति निर्धारकों को कृषि क्षेत्र में भी गुजरात की समृद्घ स्थिति के अध्ययन के लिए प्रेरित किया है।

२१वी सदी का गुजरात ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’ के संकल्प के साथ स्वराज के बाद सुराज की दिशा में अविरत विकासयात्रा का वाहक चालक बल बना है। जिसकी सफलता की बुनियाद में गुजरात की जनता की संकल्पशक्ति एवं विकास में समाजशक्ति की भागीदारी है।

२१वी सदी के पूरे प्रथम दशक के दौरान राजनैतिक स्थिरता एवं प्रगति के लिए प्रतिबद्घता के साथ गुजरात ने सुशासन का आदर्श स्थापित करने का नेतृत्व किया है।

अन्याय एवं आततायीयों के खिलाफ जुझारू बनकर गुजरात ने, महात्मा गांधीजी एवं लौह पुरुष सरदार पटेल के वारिस के रूप में अपने नाम व साख को बरकरार रखा है।

आतंकवाद के अंतर्गत अमानुषिक हिंसा करने वाले देश के दुशमनों के षड्यंत्रों को विफल करने वाले हमारे पुलिस एवं रक्षाकर्मियों की जांबाज जवांमर्दी ने आंतरिक सुरक्षा की साख को बढ़ाया है।

कुप्रचार की आंधी के खिलाफ गुजरात की जनता जनार्दन की विकास के लिए प्रतिबद्घता, नीरक्षिर विवेक-समझदारी का मिजाज मजबूती से बना हुआ है।

इसीलिए, गुजरात शांति एवं सुरक्षा की बुनियाद पर विकास की तेज रफ्तार से आगे बढ़ता ही रहा है।

बावजूद इसके, गुजरात की विकासयात्रा की सफलता को हजम नहीं कर सकने वाली, गुजरात-विरोधियों की पूरी जमात, गुजरात को परेशान करने के लिए किसी भी षड्यंत्र का सहारा ले सकती है। इस सांप्रत सत्य को हमें जागृत जनता के रूप में स्वीकार करना पड़ेगा-यही वक्त का तकाजा है।

मुझे पूरा विश्वास है कि गुजरात का मिजाज देखते हुए, हमारे सत्य की ही जीत होनी है।

विक्रम संवत के नूतन वर्ष पर स्वर्णिम गुजरात के निर्माण के लिए, नई ऊर्ञ्जा के साथ विकासयात्रा को और भी अधिक देदिप्यमान बनाएं।

दीपोत्सव पर्व की सभी को अंतःकरण से शुभकामनाएं।

 

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प्रधानमंत्री ने गुजरात के पोरबंदर में माधवपुर मेले के अवसर पर शुभकामनाएँ दीं
March 29, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह जीवंत उत्सव हमारी गौरवशाली संस्कृति को प्रदर्शित करता है और साथ ही गुजरात तथा पूर्वोत्तर के बीच कालातीत सांस्कृतिक संबंध को सुदृढ़ करता है। श्री मोदी ने कहा, “यह उत्सव विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को प्रतिबिम्बित करता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आह्वान करता हूँ!”

प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2022 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में उसके महत्व के बारे में बात की।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:


गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।


यह जीवंत उत्सव हमारी गौरवशाली संस्कृति को प्रदर्शित करता है और साथ ही गुजरात तथा पूर्वोत्तर के बीच कालातीत सांस्कृतिक संबंध को सुदृढ़ करता है।

“यह उत्सव विविध परंपराओं को एक साथ लेकर आता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को प्रतिबिम्बित करता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आह्वान करता हूँ!”

“अप्रैल 2022 के #मन_की_बात कार्यक्रम में मैंने माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में उसके महत्‍त्‍व के बारे में बात की थी। अवश्य सुनें…”