प्रिय मित्रों,

कुछ सप्ताह पहले मैं अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव के शुभारम्भ पर गया था। अद्भुत साबरमती नदी के किनारे हमने सांस्कृतिक वैविध्यता का अनुभव किया और विभिन्न देशों के प्रतियोगियों को आमंत्रित किया था। हालांकि कुछ वर्ष पूर्व यह नजारा कुछ अलग ही था। रिवरफ्रंट के दौरे से मैं पुरानी यादों में खो गया। उस समय साबरमती नदी के तट में पानी के सिवाय सबकुछ था। यहां युवा क्रिकेट खेला करते थे और सर्कस लगते थे।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान साबरमती नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी बदलाव आया है। आज नदी पूरे साल पानी से भरी रहती है और इसके आसपास सृजित होने वाले मनोरंजक और जीवंत माहौल के कारण लोग इस क्षेत्र की ओर खिंचे चले आते हैं।

आज, रिवरफ्रंट के निर्माण की वजह से यहां जल का स्तर बढ़ा है और बरसात की वजह से होने वाले रोगों का प्रमाण उल्लेखनीय स्तर पर घटा है। जलस्तर में बढ़ोतरी की वजह से बिजली की खपत घटी है। रिवरफ्रंट के श्रेष्ठ कामकाज के लिए कई अंतराष्ट्रीय पर्यटकों ने गुजरात सरकार को शुभकामनाएं देते पत्र मुझे लिखे हैं। उल्लेखनीय है कि रिवरफ्रंट को सबसे नवीनतम प्रोजेक्ट्स में स्थान मिला है।

शहरों में वैश्विक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में अपना गुजरात

रिवरफ्रंट गुजरात के शहरों में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध करवाने की हमारी प्रतिबद्धता की एक पहचान है। हकीकत यह है कि बेहतर ढांचागत सुविधाओं के कारण शहरीकरण बढ़ा है और लोग यहां स्थायी हो रहे हैं। भारी संख्या में लोग अहमदाबाद की ओर आकर्षित हो रहे हैं। भारत में गुजरात सबसे ज्यादा अर्बनाइज्ड राज्य है। राज्य की 42 प्रतिशत जनता नगर और शहरों में बसती है और हमारी शहरी आबादी की एक दशक की वृद्धि दर 35.8 प्रतिशत रही है।

हमें पता है कि तीव्र शहरीकरण के साथ- साथ कई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं। ऐसा लग रहा है जैसे नगर और शहरों के ढांचों की भारी परीक्षा हो रही है। जनसंख्या और यातायात की समस्याओं सहित कई बड़ी चुनौतियां पैदा हो रही हैं। हालांकि अगर हम शहरीकरण को समस्या के रूप में देखेंगे तो हम कभी इन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकेंगे। हमें शहरीकरण की चुनौती का हल करना है, ना कि उसके खिलाफ लड़ना है। ऐसा करने से ही हम चुनौतियों का सामना कर सकेंगे।

गुजरात ने जो किया है यह विस्तारपूर्वक आपको बतलाते हुए मुझे खुशी हो रही है। शहरीकरण की समस्या का हल करने के लिए गुजरात के प्रयासों के बारे में मैं विश्वास और गर्व से कह सकूंगा कि सिर्फ थोड़े से लोगों को ही विकास का फल नहीं मिलेगा बल्कि प्रत्येक व्यक्ति तक विकास के फल पहुंचेंगे। नवीनीकरण और ढांचागत तथा संस्थागत प्रणालियां अपनाकर हमने शहरीकरण की विशाल चुनौतियों को लोगों के लिए अर्थपूर्ण अवसर में तब्दील कर दिया है। मुझे याद है कि जब मैने मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तब शहरी विकास के लिए सिर्फ 200 करोड़ से भी कम रकम खर्च की जाती थी।

आज बजट आयोजन में शहरी विकास के लिए 5670 करोड़ की व्यवस्था की गई है जो 25 गुना ज्यादा है। संकलित अभिगम के साथ राज्य सरकार ने वर्ष 2009 में स्वर्णिम जयंति मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना (SJMMSVY) पेश की थी। उल्लेखनीय है कि यह पहल गुजरात के 8 शहरों और 159 नगरपालिकाओं के विकास की आवश्यकताएं पूर्ण करती हैं और बड़े शहरों में उपलब्ध सेवाओं को उनके घर पर उपलब्ध करवाती हैं। राज्य सरकार द्वारा इस योजना के लिए सम्पूर्ण बजट उपलब्ध करवाया जाता है। प्रारम्भ में 7000 करोड़ के बजट के साथ प्रारम्भ की गई इस योजना के लिए धन की व्यवस्था उल्लेखनीय तौर पर बढ़ाकर 15,000 करोड़ की गई है।

परिवहन और शहरी गतिविधियों के तमाम पहलुओं का मजबूतीकरण

शहरी जीवन में हम रोजाना सड़क का उपयोग करते हैं। कई बार हमारे मन में शहर की पहली छवि उसकी सड़क की गुणवत्ता और यातायात जैसे परिबलों से उभर आती है। आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ही रोड काफी बेहतर गुणवत्तापूर्ण तैयार किए गए हैं। ट्राफिक जाम होने की समस्या के बारे में शिकायत करना बहुत ही आसान है परंतु इस समस्या का हल करने के बारे में हम में से कितने लोगों ने सोचा है ? आर्थिक विकास के लिए शहरी परिवहन काफी महत्वपूर्ण माध्यम है और सरकार ने शहरी आबादी में निरंतर बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए अच्छी सड़कों को प्राथमिकता दी है।

गुजरात में हमने कई फ्लाईओवर्स का निर्माण किया है, जिनके कारण हमारे शहरों के भीड़भरे क्षेत्रों में यातायात आसान हुआ है। सूरत ने फ्लाईओवर सिटी ऑफ गुजरात के तौर पर पहचान अंकित की है क्योंकि यहां की ट्राफिक समस्या वाले क्षेत्रों में फ्लाईओवर के निर्माण से समस्या का हल हुआ है। अहमदाबाद में कई फ्लाईओवर और अन्डरपास की वजह से ट्राफिक समस्या की स्थिति में हम काफी सुधार ला सके हैं।

उपरोक्त प्रयासों के साथ ही शहरी परिवहन ढांचे को मजबूत बनाने में हमने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। जब आप अहमदाबाद में सफर करेंगे तो काफी प्रशंसा हासिल करने वाले जनमार्ग- बीआरटीएस को आप अवश्य सराहेंगे।सूरत और राजकोट में वर्तमान में यह प्रोजेक्ट कार्यरत हैं। हमने मल्टी मॉडल अफोर्डेबल ट्रांसपोर्ट अथोरिटी (एमएटीए) का गठन किया है ताकि सुरक्षित, मितव्ययी, सुविधापूर्ण और विश्वसनीय शहरी परिवहन को प्रोत्साहन देने के लिए रोडमेप तैयार किया जा सके।

गुजरात के शहरों में नवीन रिक्षा सेवा !

बड़े शहरों में आपने रेडियो टेक्सी, कॉल अ केब के बारे में सुना होगा परंतु कभी आपने इसकी टाई रिक्षा सर्विस के बारे में सुना है ? गुजरात में एक फाउंडेशन की पहल पर रिक्षा ड्राइवर्स का एक समूह एक छत के नीचे आया है और जी- ऑटो का गठन किया गया है जो 24 घंटे विश्वसनीय रिक्षा सेवा उपलब्ध करवाता है।यह जी- ऑटो की सेवा काफी अद्भुत है। जब आप रिक्षा में बैठेंगे तब ड्राइवर आपको पानी की बोतल और समाचार पत्र ऑफर करेगा। वर्तमान में यह सेवा अहमदाबाद, वडोदरा और गांधीनगर में उपलब्ध है और आगामी वर्षों में इसे राज्य के अन्य हिस्सों में विस्तृत किया जाएगा। इस प्रकार की पहल सुविधायुक्त सेवाएं उपलब्ध करवाने के साथ ही मैत्रिपूर्ण परिवहन का विकल्प उपलब्ध करवाती है।

पर्याप्त शहरी आवास की चुनौतियों का मुकाबला करना

भारी संख्या में लोग शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं ऐसे में आवास की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवाना और एक चुनौती है। सरकार के तौर पर हमारा यह दायित्व है कि लोगों के सिर पर छ्त हो। घर सिर्फ दीवारों से नहीं बनता बल्कि यह ऐसा स्थल हो जहां रहा जा सके। राज्यभर में शहरी आवास की सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए हमने अनेक कदम उठाए हैं।

गुजरात को झोंपड़पट्टी मुक्त बनाने के लिए हमने 25 लाख जितने कच्चे मकानों को पक्का बनाने के लिए सर्वे पहले से ही पूर्ण कर लिया है। पूर्व की सरकारों ने 40 साल में 10 लाख मकानों का निर्माण किया था और उसकी तुलना में हमने सिर्फ एक ही दशक में 22 लाख मकानों का निर्माण किया है , गुजरात में गरीबों को इसका लाभ मिला है। आगामी वर्षों में हम शहरी आवास की चुनौतियों का सामना करने की प्रतिबद्धता तय करेंगे।

1+1 ट्वीन सिटी मॉडल को प्रोत्साहन देने के लिए गुजरात के प्रयास

हम अहमदाबाद को चमकता देखना चाहते हैं परंतु अहमदाबाद के साथ ही गांधीनगर भी चमके यह भी हमारी इच्छा है। एकदूजे के नजदीक स्थित दो शहरों को विकास का समान अवसर क्यों ना मिले ? इसलिए हमने ट्वीन सिटी मॉडल पेश किया है। गुजरात सक्रिय रूप से अहमदाबाद-गांधीनगर, सुरेन्द्रनगर- वढवाण, सूरत- नवसारी, वडोदरा- हालोल, भरूच- अंकलेश्वर और मोरबी-वांकानेर ट्वीन सिटी पर काम कर रहा है।श्रेष्ठ शहरों का निर्माण करने की दिशा में गुजरात की पहल को ट्वीन सिटी से अवश्य लाभ मिलेगा।

ट्वीन सिटी के साथ ही हम सेटेलाइट टाउन भी विकसित करने जा रहे हैं और वैश्विक स्तर के शहरों का निर्माण गुजरात को वाइब्रेंट भविष्य की ओर ले जाएगा। दिल्ली जैसे शहरों को विकास करने में काफी लम्बा समय लगा। मगर धोलेरा दिल्ली से दो गुना और शंघाई से 6 गुना बड़ा होगा और आधुनिक ढांचागत सुविधाओं के मामले में काफी आगे होगा। कांकरिया लेक डवलपमेंट प्रोजेक्ट और सूरत में साइंस सेंटर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स से शहरी जनता को लाभ मिलेगा।

आपको जानकर आनन्द होगा कि शहरी विकास के विभिन्न प्रयासों के चलते गुजरात ने पिछले कई वर्षों के दौरान 50 से ज्यादा अवार्ड जीते हैं। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार से प्राप्त जानकारियों के मुताबिक जवाहरलाल नेहरु नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन (JNURM) प्रोजेक्ट को पूर्ण करने में गुजरात प्रथम क्रम पर है।

रुर्बनाइजेशन- आत्मा गांव की, सुविधाएं शहर की

हमने शहरों पर ध्यान केन्द्रित किया है परंतु यहां रुकेंगे नहीं। छोटे नगरों और गांवों में बेहतर ढांचागत सुविधाएं और सेवाएं उपलब्ध करवाने की आवश्यकता खड़ी हुई है। रुर्बनाइजेशन के हमारे मंत्र से गांवों की अनोखी सांस्कृतिक पहचान बरकरार रहेगी।इसके साथ ही शहर जैसी सुविधाएं भी उन्हें उपलब्ध होंगी (आत्मा गांव की, सुविधा शहर की)। इस साल की वाइब्रेंट समिट में शहरीकरण केन्द्रस्थान पर रहा। समिट के दौरान मैं रुर्बनाइजेशन की चर्चा में मौजूद था।

समिट पूर्ण होने के बाद मैं प्रोफेसर पॉल रोमर से मिला जो युएसए में एनयु के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनस में शहरीकरण के प्रोजेक्ट में मार्गदर्शन देते हैं। प्रोफेसर रोमर ने शहरी विकासकी दिशा में गुजरात के कदमों की सराहना की थी। राजनैतिक इछाशक्ति, अधिकारियों की श्रेष्ठ टीम और लोगों के सहयोग से गुजरात सरकार अर्बन रिजनरेशन के लिए तैयार है, जो नये वैश्विक स्तर के शहरों का निर्माण करेगी और गांवों में श्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र भव्य और दिव्य गुजरात के हमारे प्रयासों में असरदार रूप से योगदान दे सकें।

नरेन्द्र मोदी

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)