पीएम मित्र माननीय प्रधानमंत्री के 5 एफ विजन-फॉर्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन- से प्रेरित है
विश्व स्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को आकर्षित करेगा और इस क्षेत्र में एफडीआई और स्थानीय निवेश को बढ़ावा देगा
पीएम मित्र एक ही स्थल पर कताई, बुनाई, प्रसंस्करण/रंगाई और छपाई से लेकर परिधान निर्माण तक एक एकीकृत वस्त्र मूल्य श्रृंखला बनानेका अवसर प्रदान करेगा
एक स्थल पर एकीकृत वस्त्र मूल्य श्रृंखला से उद्योग की रसदलागत में कमी लाएगी
प्रति पार्क 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगारसृजन करने की मंशा
तमिलनाडु, पंजाब, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, असम, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे कई राज्यों ने रुचि दिखाई
पीएम मित्र के लिए स्थलों का चयन निष्पक्ष मानदंड के आधार पर एक चुनौती प्रक्रिया के द्वारा किया जाएगा

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भारत को वैश्विक वस्त्र मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, सरकार ने 2021-22 के केंद्रीय बजट में की गई  घोषणा के अनुरूप 7 पीएम मित्र पार्कों की स्थापना को स्वीकृति दे दी है।

पीएम मित्र माननीय प्रधानमंत्री के 5एफ विजन से प्रेरित है। '5एफ' फॉर्मूला में- फार्म टू फाइबर; फाइबर टू फैक्ट्री; फैक्ट्री टू फैशन; फैशन टू फॉरेन शामिल हैं। यह एकीकृत दृष्टिकोण अर्थव्यवस्था में वस्त्र क्षेत्र के विकास को और आगे बढ़ाने में सहायता प्रदान करेगा। किसी अन्य प्रतिस्पर्धी देश में हमारे जैसा संपूर्ण टेक्सटाइल इकोसिस्टम नहीं है। भारत सभी पांचों एफ के मामले में मजबूत है।

व्यापक एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्कों को विभिन्न इच्छुक राज्यों में स्थित ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड स्थलों पर स्थापित किया जाएगा। अन्य कपड़ा संबंधी सुविधाओं और इकोसिस्टम के साथ-साथ 1,000+ एकड़ के निकटवर्ती और बाधा-मुक्त भूमि खंडों की उपलब्धता वाले राज्य सरकारों के प्रस्तावों का स्वागत है।

समान बुनियादी ढांचे (परियोजना लागत का 30 फीसदी) के विकास के लिए सभी ग्रीनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम विकास पूंजी सहायता (डीसीएस) 500 करोड़ रूपए और ब्राउनफील्ड पीएम मित्र को अधिकतम 200 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा पीएम मित्र में कपड़ा निर्माण इकाइयों की शीघ्र स्थापना के लिए प्रत्येक पीएम मित्र पार्क को प्रतिस्पर्धात्मकता प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) के रूप में 300 करोड़ रूपए भी प्रदान किए जाएंगे। राज्य सरकार की ओर से समर्थन के तौर पर विश्व स्तरीय औद्योगिक संपदा के विकास के लिए 1,000 एकड़ भूमि का प्रावधान शामिल होगा।

एक ग्रीनफील्ड पीएम मित्र पार्क के लिए भारत सरकार की ओर से विकास पूंजीगत सहायता कुल परियोजना लागत की 30 फीसदी होगी। इसकी अधिकतम सीमा 500 करोड़ रुपये तक की होगी। मूल्यांकन के बाद ब्राउनफील्ड स्थलों को लेकर बाकी अवसंरचना और दूसरे सहायक सुविधाओं को विकसित करने के लिए विकास पूंजीगत सहायता कुल परियोजना की 30 फीसदी होगी। इसे 200 करोड़ रुपये तक सीमित किया गया है। यह निजी क्षेत्र की भागीदारी को लेकर परियोजना को आकर्षक बनाने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्त पोषण के रूप में है।

इन पीएम मित्र पार्कों में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:

मूल अवसंरचना : ऊष्मायन केंद्र और प्लग व प्ले सुविधा, विकसित फैक्ट्री स्थल, सड़कें, विद्युत, जल व अवशिष्ट जल प्रणाली, साझा प्रोसेसिंग हाउस व सीईटीपी और अन्य संबंधित सुविधाएं जैसे कि डिजाइन सेंटर, परीक्षण केंद्र आदि। 

सहायक अवसंरचना : कामगारों के लिए हॉस्टल व हाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग, मेडिकल, प्रशिक्षण व कौशल विकास सुविधाएं

पीएम मित्र शुद्ध विनिर्माण गतिविधि के लिए 50 फीसदी क्षेत्र, उपयोगिताओं के लिए 20 फीसदी क्षेत्र और वाणिज्यिक विकास के लिए 10 फीसदी क्षेत्र विकसित करेगा। पीएम मित्र का एक ढांचागत प्रतिनिधित्व नीचे दिया गया है।

 

इस उद्देश्य के लिए मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्रों और वस्त्र पार्कों के प्रमुख घटक- * 5 फीसदी क्षेत्र और # 10 फीसदी क्षेत्र का संकेत करता है।

पीएम मित्र पार्क को एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के जरिए विकसित किया जाएगा, जिसका स्वामित्व सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में राज्य सरकार और भारत सरकार के पास होगा। मास्टर डेवलपर न केवल औद्योगिक पार्क का विकास करेगा बल्कि, छूट की अवधि के दौरान इसका रखरखाव भी करेगा। इस मास्टर डेवलपर का चयन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा  संयुक्त रूप से विकसित वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

एसपीवी जिसमें राज्य सरकार का अधिकांश स्वामित्व है, विकसित औद्योगिक स्थलों से पट्टे के किराये का हिस्सा प्राप्त करने का हकदार होगा। इसके अलावा श्रमिकों के लिए कौशल विकास पहल और अन्य कल्याणकारी उपायों को प्रदान करके पीएम मित्र पार्क का विस्तार कर क्षेत्र में वस्त्र उद्योग के और अधिक विस्तार के लिए इसका उपयोग करने में सक्षम होगा।

भारत सरकार निर्माण इकाइयों को स्थापित करने को लेकर प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक पीएम मित्र पार्क के लिए 300 करोड़ रुपये की निधि भी प्रदान करेगी। इसे प्रतिस्पर्धात्मकता प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) के रूप में जाना जाएगा और पीएम मित्र पार्क में एक नई स्थापित इकाई के कारोबार के 3 फीसदी तक का भुगतान किया जाएगा।

एक नई परियोजना की स्थापना के लिए इस तरह की सहायता महत्वपूर्ण है और उत्पादन बढ़ाने और अपनी व्यवहार्यता स्थापित करने में सक्षम होने तक जब तक इसकी जरूरत है, इसे बंद नहीं किया जाएगा।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के साथ सम्मिलन उन योजनाओं के दिशानिर्देशों के तहत उनकी पात्रता के अनुसार उपलब्ध है। यह वस्त्र उद्योग में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा, सस्ती अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करने में सहयता करेगा और लाखों लोगों के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा। कम लागत वाली अर्थव्यवस्था का लाभ उठाते हुए यह योजना भारतीय कंपनियों को वैश्विक विजेता के रूप में उभरने में सहायता करेगी।

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आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है: G7 समिट में पीएम मोदी
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।