परम पूज्य बाबा रामदेव जी, पूज्य आचार्य जी, आदरणीय राजनाथ सिंह जी, आदरणीय वैदिक जी, श्रीमान हरिओम जी, देश के कोने-कोने से आए हुए भारत स्वाभिमान के सभी सिपाही, और मुझे बताया गया कि देश में 500 से अधिक स्थानों पर बड़ा स्क्रीन लगाकर इस भारत स्वाभिमान आंदोलन से जुड़े हुए सभी लोग बैठे हैं और इस कार्यक्रम में दूर दूर से भी शरीक हुए हैं, मैं उन सबको भी नमन करता हूं..!

आजादी के बाद ये पहला चुनाव ऐसा आ रहा है कि जिसने पुरानी सारी परम्पराओं को नष्ट कर दिया है..! आम तौर पर चुनाव राजनीतिक दल लड़ते रहे हैं, उम्मिदवार लड़ते रहे हैं, लेकिन ये पहला चुनाव ऐसा है जो चुनाव अपने आप में एक जन-आंदोलन बन गया है..! चुनाव को जन-आंदोलन बनाने में पूज्य रामदेव जी की अखंड एकनिष्ठ तपश्चर्या भी है..! हरिओम जी सच कह रहे थे, उनको क्या कमी थी..! सारे मुख्यमंत्री उनके दरवाजे पर दस्तक देते थे..! लेकिन वो सब कुछ छोड़कर एक मिशन को लेकर निकल पडे..! अपने लिए नहीं, भारत के स्वाभिमान के लिए..! कभी-कभी पीड़ा भी होती है कि आजादी के इतने सालों के बाद हमें ही हमारे ही देश के स्वाभिमान के लिए लड़ाई लड़नी पड़े..? ये अजूबा है..! ये तो सहज प्राप्य होना चाहिए, स्वाभाविक प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन न जाने क्या-क्या रूकावटें रहीं, कि आज स्वाभिमान के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है..

भाईयों-बहनों, आज जब हम भारत के स्वाभिमान की लड़ाई लड़ने वाले सिपाहियों के बीच खड़े हैं तब, अपने इस कार्यक्रम के दरमियान ही इसरो के भारतीय वैज्ञानिकों ने, भारत के इंजीनियरों ने सफलतापूर्वक जीएसएलवी डी-5 को लांच करने में सफलता पाई है। मैं भारत के सभी वैज्ञानिकों को, इंजीनियरों को इस सफलता दिलाने के लिए इस पवित्र मंच से बहुत बहुत बधाई देता हूं, उनको शुभकामनाएं देता हूं..! ऐसी अनेक घटनाएं हैं जिसे पता चलता है कि इस देश में बहुत सामर्थ्य है..!

भाईयों-बहनों, मैं निराशावादी इंसान नहीं हूं, मेरी डिक्शनरी में निराशा शब्द ही नहीं है..! और उसका कारण ये नहीं कि मुझे डिक्शनरी का ज्ञान है, इसका कारण यह है कि मैंने जिंदगी को ऐसा जिया है..! जब आजकल लोग अनाप-शनाप इलजाम लगाते हैं तो मैं भी कभी मुडकर खुद के जीवन की ओर देखता हूं, और मैं सोचता हूं कि ये देश कितना महान है, यहां के लोग कितने महान है कि जिन्होंने रेल के डिब्बे में चाय बेचने वाले बच्‍चे को अपने कंधे पर उठा लिया..! मित्रों, मैं निराशावादी नहीं हूं इसके पीछे एक कारण है, क्‍योंकि मैनें अपनी मां को अड़ोस-पड़ोस के घरों में बर्तन साफ करते, पानी भरते देखा है, उन्‍होने बिना निराश हुए अपने बच्‍चों को पालने का, संस्कारित करने का काम किया..! मैं अभी बाबा रामदेव जी से एक सवाल पूछ रहा था क्‍योंकि एक हिन्‍दी शब्‍द मुझे मालूम नहीं था। हमारे यहां गुजरात में कॉटन की खेती होती है, और जब खेत में कपास तैयार होता है तो वो गरीब परिवार उसे अपने घर ले जाते हैं और उसका छिलका उतारकर उसके अंदर से कॉटन निकालते हैं। गुजराती में उसे ‘काला फोलवा...’ कहते हैं, मुझे नहीं मालूम कि हिन्‍दी में उसे क्‍या कहते हैं। हां, मुझे शब्द मिल गया, ‘भिंडोला’, हमारे यहां उसे ‘काला’ बोलते हैं..! उसका छिलका काफी धारदार होता है, कई बार उससे खून भी निकल आता है। जब वो सीजन आता था, तो पूरे दिन में पचासों प्रकार की मेहनत करने के बाद हमारा पूरा परिवार बैठता था और छिलके हटाकर कॉटन बाहर निकालते थे, दूसरे दिन सुबह जाकर जमा करवाते थे, और इससे कुछ मजबूरी मिल जाती थी..! जिसने इस जीवन को जिया है, उसके जीवन में निराशा का नामोनिशान नहीं हो सकता है। जो इस पीड़ा और दर्द में पला है उसे औरों की पीड़ा व दर्द समझने के लिए यात्राएं नहीं करनी पड़ती, और वही पीड़ा, वही दर्द, वही संवेदना हमें कार्य करने की प्रेरणा देती है। हर पल मन में रहता है कि ईश्‍वर ने जो शरीर दिया है, जो समय दिया है, जो अवसर दिया है, उसका उपयोग भारत माता के कोटि-कोटि जनों के लिए ही होना चाहिए। दुखी, पीडित, दरिद्र, दलित, शोषित, वंचित उनके लिए होना चाहिए और जब जीवन में ऐसी प्रेरणा होती है तो ईश्‍वर रास्‍ते भी अपने आप सुझाता है..!

मित्रों, पहले चुनाव होते थे, जोड़-तोड़ के चुनाव होते थे, परिवार को संभालने के लिए चुनाव होते थे, जाति-बिरादरी के समीकरणों को संभालने के लिए चुनाव होते थे, वोट बैंक की छाया में चुनाव होते थे..! मित्रों, ये खुशी की बात नहीं है कि आज देश में विकास के एजेंडा की चर्चा हो रही है और विकास के एजेंडा पर चुनाव लड़ने के लिए देश के राजनीतिक दलों को मजबूर किया जा रहा है और बाबा रामदेव जी का ये प्रयास उसी दिशा में एक नक्‍कर, मक्‍कम, मजबूत कदम है, यह एक शुभ संकेत है..! ठीक है भाई, आप सरकार बनाना चाहते हो, तो क्यों बनाना चाहते हो, किसके लिए बनाना चाहते हो, बनाकर क्‍या करना चाहते हो, जरा दुनिया को बताओ तो सही..! मैं चाहूंगा कि ये प्रयास 2014 के चुनावों तक निरंतर चलता रहना चाहिए, दबाव बढ़ाना चाहिए, सिर्फ बीजेपी पर ही नहीं बल्कि सभी दलों पर बढ़ाना चाहिए कि बहुत हुआ, 60 साल बर्बाद किए हैं अब कुछ कर दिखाओ..!

भाइयों-बहनों, इसके साथ-साथ बाबा रामदेव अब राजनेताओं को भली-भांति जान गए हैं..! ये जान गए हैं कि दिन में कैसे एयरपोर्ट पर लेने आना और रात में कैसे जुल्म करना, ये भली-भांति जान गए हैं..! इसलिए, कोई कहने को तो कह दें, लेकिन उस पर भरोसा मत करना, ट्रैक रिकॉर्ड बराबर देख लेना, अगर वो ट्रैक रिकॉर्ड पर सही उतरते हैं तो भरपूर आर्शीवाद दे देना, लेकिन अगर ट्रैक रिकॉर्ड ठीक नहीं है और सिर्फ टेप रिकॉर्ड चल रहा है तो उस पर भरोसा मत करना..!

भाइयों-बहनों, आप कल्‍पना कर सकते हैं कि जिस देश में 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, जो विश्‍व का सबसे नौजवान देश हो और परमात्मा ने हर नौजवान को भुजा दी हो, बुद्धि और सामर्थ्‍य दिया हो, कुछ कर दिखाने की ललक दी हो, उसके बावजूद भी जो डेमोग्राफिक डिविडेंड एक बहुत बड़ा एसेट बन सकता था, लेकिन देश के नेतृत्‍व ने उस डेमोग्राफिक डिविडेंड को डेमोग्राफिक डिजास्‍टर में कन्‍वर्ट कर दिया, इससे बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता है..!

नौजवान को अवसर चाहिये। आज चाइना के बारे में स्‍वामी जी एक बात बता रहे थे कि चाइना ने एक काम पर बहुत बल दिया है, और वो बल स्किल डेवलेपमेंट पर दिया गया है। नौजवानों को हुनर सिखाओ, अगर नौजवान के अंदर हुनर होगा तो वह अपने सामर्थ्‍य से जीवन जीने का रास्‍ता खोज लेगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत सरकार ने बार-बार भांति-भांति प्रकार के स्किल डेवलेपमेंट के मिशन बनाए, प्रधानमंत्री तक उसके चेयरमेन बने, हर तीन महीने में लिखित रूप से उसका मूल्‍यांकन करना तय हुआ था, लेकिन तीन साल तक एक मीटिंग तक नहीं हुई..! क्‍या इसके लिए कोई एक्सट्राऑर्डिनरी विजन की जरूरत है..? काम नहीं बन सकता है क्‍या..?

मैं ट्रैक रिकॉर्ड की बात इसलिए बताता हूं क्‍योंकि गुजरात ने उस दिशा में करके दिखाया है..! हम जानते हैं कि अगर देश की जीडीपी को बढ़ाना है तो हमें हमारी उत्‍पादन क्षमता का भरपूर उपयोग करना होगा, हमारी उत्‍पादन क्षमता को बढ़ाना होगा, और मित्रों, ऐसा नहीं है कि ऐसा नहीं हो सकता है..! हमारा देश कृषि प्रधान देश है। बाबा ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन मुद्दों को अरूण जी ने और राजनाथ जी ने बहुत पॉजिटिवली बता दिया है लेकिन मैं और तरीके से उस चीज को बता रहा हूं। हमारा कृषि प्रधान देश है, हमारे यहां कृषि के साथ पशुपालन अंगभूत व्‍यवस्‍था है और मैं मानता हूं कि अगर हमें कृषि को सामर्थ्‍यवान बनाना है तो उसे तीन हिस्‍सों में बांटना होगा। एक तिहाई - रेगुलर खेती, एक तिहाई - वृक्षों की खेती, पेड़ों की खेती, और एक तिहाई - पशुपालन..! हमारे यहां दो खेतों के बीच कितनी जमीन बेकार होती है..? सभी को यह बात मालूम है, उस खेत वाला हमारे खेत में न घुस जाएं, हम उसके खेत में न जाएं, इसके लिए बीच में हम जो बाड़ बना देते हैं, तो कितनी जमीन बर्बाद करते हैं..! अगर उस किनारे पर उस किसान को पेड़ उगाने का अधिकार दिया जाए और उसे पेड़ बेचने का अधिकार दिया जाए तो इस देश को टिम्‍बर इम्‍पोर्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आज इस कृषि प्रधान देश को टिम्‍बर इम्‍पोर्ट करना पड़ता है और फिर करंट एकांउट डेफिसिट के लिए गोल्‍ड पर हमला बोल देते हैं, यानि करने जैसे काम नहीं करना और न करने जैसे पहले करना..!

मित्रों, 60-70 के दशक में हिंदुस्‍तान में गोल्‍ड स्‍मगलिंग के लिए एक बहुत बड़ा सुनहरा अवसर था, चारों ओर सोने की तस्‍करी, इस देश का बहुत बड़ा पेशा बन गया था, और उसी गोल्‍ड स्‍मगलिंग में से हिंदुस्‍तान में अंडरवर्ल्‍ड का नेटवर्क पैदा हुआ। आज भी अंडरवर्ल्‍ड के जो बड़े-बड़े माफिया हैं वो गोल्‍ड स्‍मगलिंग के उस काल में पैदा हुए थे। दिल्‍ली में ऐसी सरकार बैठी है कि फिर से उसने गोल्‍ड स्‍मगलिंग का उदय कर दिया है..! अभी मैं पिछले दिनों टीवी में देख रहा था, कि दक्षिण के एक राज्‍य में सौ किलो से ज्‍यादा स्‍मगलिंग का सोना पकड़ा गया, कितना पकड़ा गया वो तो हमें मालूम है, कितना नहीं पकड़ा गया वह नहीं मालूम है..! मित्रों, ये कुनीतियों का परिणाम है..!

मैं आप सभी के साथ गुजरात का एक अनुभव शेयर करना चाहता हूं। हमारे राज्‍य में हम पशु आरोग्‍य मेले लगाते हैं और हजारों की तादात में लगाते हैं। आज भी अगर हमारे देश में मनुष्‍य को भी कैटरेक्ट का ऑपरेशन करवाना हो तो किसी चैरिटेबल ट्रस्‍ट के कार्यक्रम में जाना पड़ता है, ये स्थिति है। गुजरात में हम पशु का भी कैटरेक ऑपरेशन करते हैं, उसके नेत्रमणि का ऑपरेशन करते हैं, उसका डेंटल ट्रीटमेंट करते हैं..! मैने अभी कुछ डॉक्‍टर्स को अमेरिका भेजा था कि वह लेजर टेक्‍नीक से पशुओं की आंखों का ऑपरेशन करना सीखकर आएं, ताकि पशु का रक्‍त न बहे, उसे पीड़ा न हो..! इसका परिणाम यह हुआ कि हमारे यहां मिल्‍क प्रोडक्‍शन में 86 प्रतिशत की वृद्धि हुई..! अब आप ही बताइए, इससे मेरा किसान सामर्थ्‍यवान हुआ या नहीं..? फर्क देखिए, उन्‍होने क्‍या किया, उन्‍होने सपना देखा-पिंक रिवोल्यूशन का। इस देश में हमने ग्रीन रिवोल्यूशन सुना है, व्‍हाइट रिवोल्यूशन सुना है, लेकिन दिल्‍ली में जो सरकार बैठी है उसने पिंक रिवोल्यूशन का कार्यक्रम शुरू किया। पिंक रिवोल्यूशन का मतबल क्‍या है..? कत्‍लखाने खोलो, पशुओं का कत्‍ल करो और मटन जिसका रंग पिंक होता है, उसको एक्‍सपोर्ट करो..! भाइयों-बहनों, आप मुझे बताइए कि देश के किसानों का भला पशु करेगा कि मटन करेगा..? मित्रों, फर्क यही है कि भारत जैसे गांवों में बसे देश के लिए उनकी प्राथमिकताएं क्‍या हैं..? इसका परिणाम यह हुआ है कि कमाई करने के इरादे से पशुओं की चोरी शुरू हो गई, उनकी स्‍मगलिंग शुरू हो गई। बाबा का कहना कि देश में किसान की मिनिमम इनकम का तो प्रबंध करो, उसे भरोसा दो..! लेकिन अगर आप कत्‍लखाना बनाते है तो भारत सरकार कोई टैक्‍स नहीं लगाती है, आपको बैंक से मिनिमम दर से पैसे मिलते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपका कत्‍लखाना मेरठ में है और आपको मुम्‍बई तक मटन भेजना है तो ट्रांसपोर्टेशन सब्सिडी भी भारत सरकार देती है..!

मित्रों, मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि अगर हम चाहें तो स्थितियां बदल सकते हैं। जब अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार थी, हमारे राजनाथ सिंह जी कृषि मंत्री थे तो उन्‍होने एक योजना शुरू की थी - ‘वाड़ी प्रोजक्‍ट‘। उस वाड़ी प्रोजेक्ट के तहत ट्राईबल बेल्‍ट के लोगों को जिनके पास मुश्किल से एक या दो एकड़ भूमि है, जिनकी आय मात्र 10 से 12 हजार रूपए होती थी, ऐसे में वो घर कैसे चलाएगा..! उस वाड़ी प्रोजेक्‍ट के तहत हमने गुजरात में प्रयास शुरू किया, हमारे आदिवासी किसानों को आधुनिक खेती की तरफ ले गए, पानी प्रबंधन की तरफ ले गए, सीड्स में बदवाल लाने की दिशा में ले गए, क्रॉप पैटर्न बदल दिया, इससे परिणाम यह आया कि जो किसान 12 से 15 हजार रूपया कमाता था, वह अब डेढ़ से दो लाख रूपया कमाने लगा। लेकिन अटल जी की सरकार गई, और इस सरकार ने वो प्रोजेक्‍ट बंद कर दिया..! इनको समझ नहीं है कि किसके लिए क्‍या काम करना है..! इसलिए मैं कहता हूं कि देश को आगे बढाने के लिए कोई मंगल ग्रह से मनुष्‍यों को लाने की जरूरत नहीं है, यहां जो लोग हैं वही इस देश को बहुत आगे तक ले जा सकते हैं..!

मित्रों, ये बात सही है कि अगर हमारे नौजवान को रोजगार न मिले, ग्रामीण विकास के लिए हम खेती पर बल न दें, तो आगे नहीं बढ़ सकता है। और ये बात भी सही है कि मैनुफेक्‍चरिंग सेक्‍टर में हमें अपनी ताकत दिखानी होगी। हमारे जो भी मिनरल्स हैं, जो रॉ मैटेरियल हैं, उसमें वैल्‍यू एडीशन करना चाहिए, इसमें कोई काम्‍प्रोमाइज नहीं होना चाहिए। आप आयर्न ओर बाहर भेजने के बदले स्‍टील बनाकर भेजेगें तो इससे देश की आय बढ़ेगी, नौजवान को रोजगार मिलेगा, लेकिन अगर आप आयर्न ओर बाहर भेजेगें और स्‍टील बाहर से लेंगे तो देश को बर्बाद करके रखेगें..! लेकिन अगर आयर्न ओर से स्‍टील बनाना है तो बिजली चाहिए, और बिजली के कारखाने बंद पड़े हैं क्‍योंकि कोयला नहीं मिल रहा है, कोयला नहीं मिल रहा है क्योंकि दिल्‍ली सरकार की कोयला पॉलिसी को पैरालिसिस हो गया है, इस प्रकार ये एक के साथ दूसरा जुड़ा हुआ है..!

मित्रों, हमारे देश में भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, भ्रष्‍टाचार के कुछ क्षेत्र हैं जिनमें से एक है, मिनरल्स..! हमारे देश का सिस्‍टम ऐसा है कि फर्स्‍ट कम फर्स्‍ट सर्व, हमारे देश में जो पहले एप्‍लाई करेगा, उसको हक मिलेगा, उसे पहले अलॉटमेंट होगा..! हमने गुजरात में तय किया कि हम ऐसा नहीं करेगें, हम ऑक्‍शन यानि नीलामी करेगें, जो ज्‍यादा बोली बोलेगा, सरकार के खजाने में पैसा आएगा और गरीबों का भला होगा..! आप लोग बताएं, ऑक्‍शन का रास्‍ता सही है या नहीं..? ट्रासपेरेंट तरीका है या नहीं..? हमने निर्णय लिया और भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया, कि कानूनन आप ऑक्‍शन नहीं कर सकते हैं..! एक सरकार है जो हिम्‍मत करके, ऑक्‍शन करके अपनी भूसम्‍पदा को वैल्‍यू एडीशन के लिए देना चाहती है और दूसरी उसे रोकना..! आज मेरे यहां इतने सीमेंट के कारखाने लगने की संभावना है लेकिन मैं लाइम स्‍टोन नहीं दे पा रहा हूं कयोंकि भारत सरकार मुझे ऑक्‍शन करने का अधिकार नहीं देती है और मैं ऑक्‍शन के बिना देने को तैयार नहीं हूं..!

मित्रों, कहने का तात्‍पर्य यह है कि जो हमारी भूसम्‍पदा है, उस भूसम्‍पदा का उपयोग भी हम राष्‍ट्र के विकास की धरोहर के रूप में कर सकते हैं। हमारे पास सब कुछ है पर हम ध्‍यान नहीं देते हैं..! आपको जानकर हैरानी होगी कि आज हमारे देश से बालू की भी स्‍मगलिंग होने लगी है, जहाज भर-भर के बालू की स्‍मगलिंग होना शुरू हो गया है। लेकिन अगर आपकी नीतियां स्‍पष्‍ट नहीं रही, तो ये संभावनाएं बढ़ती जाती हैं। और इसलिए, भ्रष्‍टाचार से लड़ाई लड़ने की पहली शर्त होती है, स्‍टेट प्रोग्रेसिव पॉलिसी ड्रिवन होना चाहिए, नई नीतियां लगातार बनती चली जानी चाहिए, नीतियों के आधार पर निर्णय होने चाहिए, और निर्णयों को पारदर्शी तरीके से लागू करना चाहिए, इस प्रकार भ्रष्‍टाचार से मुक्ति मिल सकती है। ये कोई ऐसी चीज नहीं है कि हो नहीं सकती..!

मित्रों, टैक्सेशन..! मैं इन विचारों से कई वर्षो से अच्‍छी तरह परिचित हूं जो आर्थिक स्‍वराज को लेकर उठाएं जाते हैं। हमारे देश के कई राज्‍य हैं जो ऑक्‍ट्रोई बंद करने की हिम्‍मत नहीं दिखा पा रहे हैं। हमने कर दिया और हमारी गाड़ी चल रही है, हमारे राज्‍य में ऑक्‍ट्रोई वगैरह सब बंद हो गया..! कुल मिलाकर कहने का तात्‍पर्य यह है कि अगर इरादा हो, तो सब कुछ किया जा सकता है और इसलिए मैं बार-बार कहता हूं कि देश को वादे नहीं इरादे चाहिए..! भाईयों, इसलिए ये टैक्सेशन सिस्‍टम सामान्‍य मानवी के जीवन पर बोझ बनी हुई है, अफसरशाही की लगाम बढ़ती चली जाती है, समय की मांग है कि उसमें नए तरीके से देखकर रिफॉर्म लाया जाए और भारतीय जनता पार्टी गंभीरता पूर्वक इस विषय पर काम कर रही है..! अभी मेरी पार्टी के सभी नेता इस विषय के जानकार लोगों के साथ तीन-तीन घंटे तक बैठे थे। उन लोगों की हर बात को बारीकी से समझा, ठीक है हमें पहली नजर में कुछ समस्‍याएं नजर आती है, लेकिन अगर इरादा है तो आखिरकार इन समस्‍याओं का समाधान भी होगा और रास्‍ते भी खोजे जाएंगे और नई व्‍यवस्‍थाएं भी लाई जाएंगी..!

भाइयों-बहनों, अगर यहीं व्‍यवस्‍थाएं चलानी हैं तो मुझे यहां आने की क्‍या जरूरत है, बहुत लोग हैं जो चलाएंगे..! दोस्तों, अगर हम कुछ कर नहीं पाते हैं तो जिन्‍दगी में पद के लिए पैदा नहीं हुए हैं, अगर कुछ कर सकते हैं तो जिन्‍दगी में कुछ करना है..! लेकिन व्‍यवस्‍थाएं ऐसी होनी चाहिए जो जिंदगी में सरलीकरण लाएं। एक छोटा सा उदाहरण देता हूं, ये जो अफसरशाही और लाइसेंस राज की दुनिया है, आप सभी को मालूम होगा कि हमारे देश में जो कारखाने होते हैं उनमें बॉयलर होते हैं। सरकार में बॉयलर इंस्‍पेक्‍शन की व्‍यवस्‍था होती है और जो व्‍यक्ति बॉयलर इंस्‍पेक्‍शन करने वाला होता है, वह शंहशाहों का शंहशाह होता है क्‍योंकि ये बहुत कम लोग होते हैं और वो कारखाने के मालिक परेशान होते हैं क्योंकि उन्‍हे एक नियत तारीख तक जांच का सर्टिफिकेट चाहिए, और वो कहता है कि समय नहीं है, पहले से क्‍यों नहीं बोला..? फिर उन दोनों के बीच जो कुछ भी होना चाहिए वह होता होगा, इसके बाद इंस्‍पेक्‍शन करने वाला उस कारखाने को सर्टिफिकेट दे देता है कि मैने बॉयलर का इंस्‍पेक्‍शन किया और यह कार्य करने योग्‍य है..! ऐसे ही पूरा कारोबार चलता था। कोई मुझे बताएं कि आप कार खरीदते हैं, आपकी कार ठीक है या नहीं, ब्रेक बराबर है या नहीं, इसका इंस्‍पेक्‍शन क्‍या सरकार करती है..? इसकी जांच तो आप खुद ही करते हैं कि नहीं..? आपको आपकी जिदंगी की चिंता है या नहीं..? तो बॉयलर की चिंता भी वो करेगा या नहीं करेगा..? अगर बॉयलर फटेगा तो वो मरेगा कि नहीं..? मैनें कहा कि अब सरकार इंस्‍पेक्‍शन नहीं करेगी, आप खुद इंस्‍पेक्‍शन करके सर्टिफिकेट दे दो, हम उसको स्‍वीकार कर लेंगे..! अफसरशाही गई के नहीं..? इसके लिए क्‍या करना पड़ा..? हमने कहा कि स्किल डेवलेपमेंट का कोर्स आईटीआई में चालू करो, प्राईवेट इंस्‍टीटयूट खोलकर बॉयलर इंस्‍पेक्‍शन का काम करें, और इस तरह हजारों लड़के बॉयलर इंस्‍पेक्‍टर बन गए, वो देखते हैं और मालिक को भी चिंता रहती है क्योंकि बिना ब्रेक की गाड़ी कोई चलाएगा क्‍या..? तो क्‍या फटने वाला बॉयलर कोई कारखाने में चलाएगा..? मित्रों, ये बहुत छोटी-छोटी बातें होती हैं..!

भाइयों-बहनों, आप सभी ने देखा होगा कि पहले हमारे यहां बड़े-बड़े मकानों में लिफ्ट बहुत कम थी, और लिफ्ट के सरकारी इंस्‍पेक्‍टर रहते थे और अब करीब-करीब हर घर में लिफ्ट आ गई। अब मुझे बताइए, इतने इंस्‍पेक्‍टर कहां से लाओगे..? मैनें अपने यहां नियम किया, कि जो लोग रहते हैं, वो हर 6 महीने में अपने यहां की लिफ्टों की जांच करवा कर हमें रिपोर्ट दे दें कि हमारी लिफ्ट ठीक है, उपयोग करने योग्‍य है और उसका उपयोग करते चलो। मित्रों, हम व्‍यवस्‍थाओं को बदल सकते हैं, छोटी-छोटी चीजों के माध्‍यम से भी स्थितियों को बदला जा सकता है, और अगर परिवर्तन लाना है तो लाया जा सकता है..! हमारे देश में एक कानूनी व्‍यवस्‍था है कि हर तीस साल में एक बार देश की जमीन का हिसाब-किताब, लेखा-जोखा होना चाहिए। जमीन की लम्‍बाई कितनी है, चौडा़ई कितनी है, उसका मालिक कौन है, इस प्रकार के पूरे विवरण को हर तीस साल में करने का नियम है। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले सौ साल से हमारे देश में ये काम नहीं हुआ है..! कई नदियों ने अपना रास्‍ता बदल दिया, सरकारी कागजों में जो जमीन और खेत हैं उन पर नदी बहने लगी है, कहीं खेतों में पर्वत ढ़हकर नीचे आ गए हैं और खेत बचे ही नहीं है, लेकिन सरकारी कागजों पर आज भी वही जमीन है..! सौ साल से इस काम को हमारे देश में नहीं किया गया, आखिर किसान कहां जाएगा..? मैने गुजरात में बीड़ा उठाया, इन दिनों मैं ये काम कर रहा हूं और करके रहूंगा..!

मित्रों, कहने का तात्पर्य ये है कि ऐसा नहीं है कि समस्‍याओं के समाधान नहीं हैं, लेकिन ज्‍यादातर सरकारें आती हैं, दिन-रात अगला चुनाव जीतने में लगी रहती हैं। सरकारों का काम है पांच साल के समय में देश की भलाई के लिए लोगों को विश्वास में लेकर के कदम उठाना। भाईयों-बहनों, मैं गुजरात एक्‍सपीरियंस से कहता हूं कि सब कुछ संभव है..! बाबा रामदेव जी ने, स्‍वाभिमान आंदोलन के साथ जुड़े हुए सिपाहियों ने, भारतीय जनता पार्टी से जो अपेक्षाएं रखी हैं और नरेन्‍द्र मोदी से व्‍यक्तिगत रूप से जो अपेक्षाएं रखी हैं, उसको हम जी-जान से पूरा करने की कोशिश करने वाले हैं..!

भाइयों-बहनों, मैं मानता हूं कि हर समस्‍या का समस्‍या का समाधान हो सकता है, रास्‍ते खोजे जा सकते हैं और परिणाम लाया जा सकता है..! भारत बहुरत्ना वसुंधरा है, सामर्थ्‍यवान देश है। मित्रों, भाषा के विषय में, भारतीय भाषाओं का गौरव होना बहुत स्‍वाभावाविक बात है, और अगर हमें अपने आप पर गौरव नहीं होगा तो दुनिया की पराई चीजों से क्‍या गौरव कर सकते हैं..? लेकिन हम आधुनिकता के भी पक्ष में हैं, टेक्‍नोलॉजी के पक्ष में हैं, हम विज्ञान को प्राथमिकता देने के पक्ष में हैं, क्‍योंकि हमें विश्‍व के सामने उस सामर्थ्‍य के साथ खड़ा रहना है, और दुनिया जो भाषा समझें, उस भाषा में मेरे देश का बच्‍चा आंख से आंख मिलाकर बात करें, उसमें इतनी ताकत होनी चाहिए..! मुंडी नीचे करने का अवसर हमारे देश के बच्चों का नहीं होना चाहिए..! लेकिन अगर हमें अपनी ही भाषाओं पर गर्व नहीं होगा, स्‍वाभिमान नहीं होगा, तो आप दुनिया में कभी भी आंख से आंख मिलाकर बात नहीं कर सकते हैं। इसलिए, सबसे पहले अपने पर भरोसा होना चाहिए, अपने पर स्‍वाभिमान होना चाहिए, अपनी परम्‍पराओं पर गर्व होना चाहिए, हमारी संस्‍कृति, खान-पान, पहनावे, बोल-चाल हर बात का हमें गर्व होना चाहिए..! मित्रों, अगर हमें गर्व है तो रास्‍ते अपने आप मिल जाते हैं..!

भाइयों-बहनों, मैं फिर एक बार बाबा रामदेव जी का अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होने सही दिशा में, देश में सच्‍चे अर्थ में परिवर्तन क्या हो, नींव कैसी हो, पिलर कैसे हो, इमारत कैसी हो, इसके लिए मंथन शुरू किया है..! अगर संतो के द्वारा मंथन होता है तो अमृत निकलना निश्चित होता है, अगर निस्‍वार्थ भाव से मंथन होता है तो अमृत सुनिश्चित होता है..!

भाइयों-बहनों, हमें दो विषयों पर बल देकर आगे बढ़ना होगा। 5 साल बाद महात्‍मा गांधी की 150 वीं जयंती आएगी। उस युग पुरूष को हम कैसा हिंदुस्‍तान देना चाहते हैं, उन सपनों को तय करना होगा..! वहीं 8-9 साल बाद, भारत की आजादी के 75 साल हो जाएंगे, अमृत पर्व आएगा, देश के दीवानों ने 1200 साल तक लड़ाई लड़ी और देश को आजादी मिली, उस आजादी का अमृत पर्व आने पर उन दीवानों का नाम हमारा देश कैसे लें, देश कैसे सुपुर्द करे, इसके लिए सपने सजोने होगें और एक दिव्‍य व भव्‍य भारत बनाना होगा..! हम सिर्फ भव्‍यता से जुड़े हुए लोग नहीं है, भारत भव्‍य भी हो और भारत दिव्‍य हो..! ये दिव्‍य-भव्‍य भारत का निर्माण करने के सपनों को लेकर हम आगे बढ़ें, इसी एक अपेक्षा के साथ, ईश्‍वर हमें शक्ति दें, जनता-जनार्दन हमें आर्शीवाद दें, ताकि बाबा रामदेव जैसे निस्पृही लोगों की तपस्‍या रंग लाए और 60 साल की कठिनाईयों से गुजरा हुआ देश संतोष, विश्वास और समृद्धि के शिखरों को पार करने वाला बनें, इसी एक कामना के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद..!

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होकोलुके नमोस्कार जोनाइशु….

की खोबोर आपुनलुकोर?…

भाले आसे?…

जॉय आई अहोम..

जॉय आई अहोम…

जॉय आई अहोम !

मैं असम भारतीय जनता पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिवादन करता हूं अभिनंदन करता हूं। बड़ी-बड़ी आमसभाएं करने का तो बहुत अवसर मिलता है, जनता-जनार्दन का दर्शन करना उन्हें संबोधित करना, ये लगातार चलता रहता है। लेकिन असम के बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं का दर्शन करना, ये मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। आज भारतीय जनता पार्टी जहां पहुंची है उसका श्रेय उसकी क्रेडिट अगर किसी को मिलती है तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को मिलती है। हमारा विश्वास संगठन में है। हम राष्ट्र जीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं और इसलिए इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं का दर्शन करना ये अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है। साथियों हमलोग एक ही मंत्र लेकर जीए हैं। हमलोग एक मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं। और वो मंत्र है भारत माता की जय.. दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से मेरे साथ बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... वंदे...वंदे ... वंदे...

यहां इस विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में आए हुए भाजपा के हरेक कार्यकर्ता का हृदय से मैं स्वागत करता हूं अभिनंदन करता हूं। भाजपा में रहते हुए आपने मां भारती की सेवा को...जनता की सेवा को अपना धर्म बनाया है। आप सभी भाजपा कार्यकर्ता ही भाजपा की प्राणवायु है ऑक्सीजन है। भाजपा का कार्यकर्ता...परिश्रम की पराकाष्ठा करता है, और उसके कारण भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ती है। साथियों मैं गर्व से कहता हूं अगर मेरा सबसे बड़ा क्वालिफिकेशन है, मेरी सबसे बड़ी गौरवपूर्ण जीवन की बात है वो यही है कि नरेंद्र मोदी भाजपा का कार्यकर्ता है। और एक भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर...मैं असम के अपने सभी कार्यकर्ता और भाइयों और बहनों को और संगठन की शक्ति को सर झुकाकर का नमन करता हूं।

साथियों,

मैं मां आदिशक्ति मां कामाख्या को भी कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं। मां कामाख्या की असम पर, असम वासियों पर बहुत कृपा रही है। उनके आशीर्वाद से असम ने, राष्ट्ररक्षा और देश की स्वतंत्रता, देश की संस्कृति को आगे बढ़ाने वाली अनेक संतानें दी हैं। ऐसी ही एक महान संतान, कविन्द्र पुरकायस्थ जी को मैं आज प्रणाम करता हूं। उन्होंने अपना पूरा जीवन असम और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। इसी योगदान को नमन करते हुए...बीजेपी-NDA सरकार को उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने का सौभाग्य मिला है। वर्ष 2014 के बाद, नॉर्थ ईस्ट के सवा सौ से अधिक महान व्यक्तित्वों को पदम् पुरस्कार मिले हैं। सवा सौ से अधिक... ये दिखाता है कि असम की धरती का, नॉर्थ ईस्ट की धरती का सामर्थ्य कितना बड़ा है। नॉर्थ ईस्ट का यही सामर्थ्य अब विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही, देश का बजट आया है। बजट के बाद, असम का, नॉर्थ ईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है। जिस नॉर्थ ईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया...हम उस नॉर्थ ईस्ट की भक्ति भाव से सेवा कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्टलक्ष्मी है। इस वर्ष का बजट... अष्टलक्ष्मी के लिए बीजेपी-NDA के विजन को और मजबूती देने वाला है। बजट में बहुत अधिक फोकस... नॉर्थ ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। इस साल असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में... लगभग पचास हज़ार करोड़ रुपए मिलने वाले हैं।

साथियों,

कांग्रेस सरकार के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था... वो भी आपको याद रखना है। कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपए मिलते थे। अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपए मिल रहे हैं। अगर मैं पिछले 11 वर्ष की बात करूं..तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए....केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। ये आंकड़ा आपको याद रहेगा… मैं जो आंकड़ा बोल रहा हूं वो आपको याद रहेगा आपको… केंद्र सरकार से साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से अधिक मिले हैं। कितने… कितने.. पीछे से आवाज आनी चाहिए कितने… आप मुझे बताइए...जो कांग्रेस, असम के विकास के लिए पैसे देने से भी बचती हो...वो कांग्रेस क्या असम का विकास कर सकती है? असम का विकास कर सकती है, असम का विकास कर सकती है। आपका भला कर सकती है। … यहां के युवाओं का भला कर सकती है… यहां के किसानों का भला कर सकती है? यहां के गांवों का भला कर सकती है?

साथियों,

इस साल के बजट में...नॉर्थ ईस्ट की कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूती देने का काम किया गया है। कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। इसलिए असम में हाइवे और अन्य रोड प्रोजेक्ट्स के लिए...करीब हज़ारों करोड़ रुपए देना तय हुआ है। बजट में जो घोषणा हुई है, उससे असम में टूरिज्म का भी विस्तार होगा। अभी आपने देखा होगा...परीक्षा पे चर्चा का कार्यक्रम गुवाहाटी में हुआ था। हमने ब्रह्मपुत्र नदी में क्रूज पर विद्यार्थियों से चर्चा की थी। आने वाले समय में ब्रह्मपुत्र पर ऐसे ही रिवर टूरिज्म को और बढ़ाया जाएगा। मैं ऐसे ही वहां नहीं गया था। मैं देश को बताना चाहता था कि टूरिज्म के लिए इससे बेहतर जगह नहीं है। आओ ये मेरा आसाम है, ये मेरी ब्रह्मपुत्र है, आइए.. इस बार के बजट में, इसके लिए भी व्यवस्था की गई है।

साथियों,

आज के दिन देश की नज़रें असम पर हैं... सबने देखा कि असम का, नॉर्थ ईस्ट का सामर्थ्य क्या है। थोड़ी देर पहले जब मैं वायुसेना के विमान से मोरान के हाईवे पर उतरा... रनवे पर नहीं, हाईवे पर विमान से उतरा, तो एक नया इतिहास बन गया। कभी नॉर्थ ईस्ट का नाम आते ही लोग सोचते थे… अरे यार छोड़ो.. टूटी फूटी सड़कें, कोई ठिकाना नहीं, निकलें तो पता नहीं कब पहुंचेंगे वो भी एक वक्त था, ये भी एक वक्त है। और आज यहां ऐसे हाईवे बनकर तैयार हो रहे हैं.. जहां सिर्फ गाड़ियां ही नहीं चलतीं… बल्कि हवाई जहाज भी लैंड करते हैं।

साथियों,

आप मुझे बता दीजिए आपके हाईवे पर विमान लैंड हो, ये आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व हुआ कि नहीं हुआ… तो अब अपना मोबाइल निकालिए और अपना फ्लैश लाइट ऑन कीजिए आपको गर्व हुआ है ना....? मोबाइल फोन निकालिए और फ्लैश लाइट ऑन कीजिए सबके सब दूर-दूर तक ये गर्व का पल है ये असम का बदलता हुआ मिजाज है हाथ बढ़ाकर ऊपर कर के दिखाइए। आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ… गर्व से मन भर गया कि नहीं भर गया बोलिए भारत माता की…

साथियों,

असम का इतना विकास इसलिए हो रहा है... क्योंकि यहां आप सभी की मेहनत से बीजेपी सरकार बनी है... यहां के नागरिकों ने भाजपा पर भरोसा किया है। आपने मेरा बूथ-सबसे मजबूत … मेरा बूथ- सबसे मजबूत, मेरा बूथ- सबसे मजबूत, की भावना से बूथ बूथ जाकर, एक-एक परिवार को मिलकर, एक-एक मतदाता को मिलकर बीजेपी के हर समर्थक को अपने साथ जोड़ा उन्हें उनके वोट की ताकत का परिचय करवाया । और इस प्रयास से ही, असम में बीजेपी की सरकार बनी। असम के इसी आशीर्वाद के कारण, असम के नागरिकों के वोट के कारण.. यहां लाखों गरीबों के घर बने लाखों परिवारों में शौचालय की व्यवस्था हुई। पीने का साफ पानी उनके घर तक पहुंचा। आप मुझे बताइए… गरीबों को घर मिलता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। गरीब के घर टॉयलेट बनता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है… गरीब के घर में पीने का पानी पहुंचता है तो पुण्य मिलता है कि नहीं मिलता है। इस पुण्य का हकदार कौन है…इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का हकदार कौन है… इस पुण्य का अधिकार भारतीय जनता पार्टी के बूथ का कार्यकर्ता है। गरीबों को आय़ुष्मान योजना का लाभ मिला, उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास मिला... इसलिए... इस बार भी आपको ऐसे ही अपने बूथ पर एक-एक वोट पर ध्यान रखना है...रखोगे… अब और कुछ मत करो बस पूरी ताकत बूथ पर लगा दो.. आपका बूथ विजयी होगा...तो बीजेपी विजयी होगी कि नहीं होगी। आपको विजय पाना है तो कहां पाना है, बूथ में विजय पाना है।

साथियों,

आज देश को सिर्फ एक और इमरजेंसी लैंडिंग स्ट्रिप नहीं मिली है... ये इस बात का भी प्रमाण है कि नया भारत, अपनी सुरक्षा के लिए हर तरह से तैयार हो रहा है। आज का भारत ना सिर्फ अपनी सीमाओं को सशक्त कर रहा है, बल्कि देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर जवाब भी देता है। साथियों, आज ही पुलवामा हमले की बरसी है। मैं इस हमले में जान गंवाने वाले मां भारती के वीर सपूतों को नमन करता हूं। इस आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह आतंकियों को सजा दी, वो पूरी दुनिया ने देखा है। और कुछ लोग तो आज भी कांप रहे हैं। अभी आपने भारत की ये शक्ति ऑपरेशन सिंदूर में भी देखी है। लेकिन साथियों, मैं आपसे जानना चाहता हूं... क्या कभी कांग्रेस से हम देशहित के लिए इतनी हिम्मत के साथ फैसले करने की ताकत थी क्या ? वो कर सकते थे क्या। वो ज्यादा से ज्यादा बयान दे सकते हैं। कुछ नहीं कर सकते। जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो... जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती। इसलिए कांग्रेस ने कभी देश की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी। कांग्रेस की सरकारों के इसी नकारेपन से.... पूरा नॉर्थ ईस्ट, डर और असुरक्षा में जीता था। कांग्रेस ने हमेशा देश को खतरे में डा के रखा। कांग्रेस के समय में जब भी सेना के लिए हथियार खरीदे गए... उसका मतलब होता था- हजारों करोड़ का घोटाला।

साथियों,

आज देश अपनी सेनाओं को मजबूत कर रहा है... भारत अपनी सीमाओं पर शानदार हाईवे, शानदार टनल्स, ऊंचे-ऊंचे ब्रिज, आधुनिक एयरफील्ड्स... ये सब बना रहा है... देश की सुरक्षा बढ़ा रहा है... और इसलिए कांग्रेस बौखलाई हुई है। उनको यही हो रहा है कि मोदी सब कैसे कर लेता है उन बेचारों को नींद नहीं आती… नींद नहीं आती । और जब नींद नहीं आती दो दिन में कुछ भी बोलते रहते हैं। साथियों, आज की कांग्रेस हर उस विचार.. हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है... जो देश का बुरा सोचता है। जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं... जो लोग, नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं... वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं। आजादी के समय मुस्लिम लीग ने देश का बंटवारा कराया... अब आज की कांग्रेस... मुस्लिम लीगी माओवादी कांग्रेस बनकर फिर देश बांटने में जुट गई है। ये एमएमसी है- माओवादी मुस्लिमलीगी कांग्रेस इसलिए आपको कांग्रेस से सावधान रहना है... और असम की जनता को भी सावधान करना है।

साथियों,

यहां जो नौजवान हैं, जो अभी 20-25 वर्ष के हैं... उन्हें कांग्रेस का कुशासन शायद पता नहीं होगा… याद नहीं होगा... कांग्रेस की सरकारें चाहे असम में रही हों या फिर दिल्ली में... उन्होंने असम को अपने हाल पर छोड़ दिया था। आज जब मैं यहाँ ब्रह्मपुत्र के तट पर खड़ा हूं... तो इस महान नदी का ही उदाहरण देता हूं। असम के विकास में... असम के लोगों के जीवन को आसान बनाने में... ब्रह्मपुत्र की बहुत बड़ी भूमिका है। लेकिन कांग्रेस के सत्तर साल के शासन में ब्रह्मपुत्र को पार करना हमेशा बड़ी चुनौती रहा। आज़ादी के बाद से लेकर 2014 तक… और उनके तो प्रधानमंत्री यहां से चुनकर गए थे यानी लगभग सात दशक में कांग्रेस सरकारों ने ब्रह्मपुत्र पर सिर्फ़ तीन पुल बनवाए थे। इतने दशकों में कितने पुल… कितने… आप कल्पना कर सकते हैं कि इतनी विशाल नदी पर, असम की इतनी बड़ी जनसंख्या को जीवन देने वाली नदी पर, सिर्फ तीन पुल बने थे। क्या ऐसी हालत में असम का तेज विकास संभव था ?

मेरे कार्यकर्ता साथियों,

2014 में आपकी मेहनत का परिणाम था कि मुझे भारत सरकार में देश की सेवा का अवसर मिला। उसके 2-3 साल बाद, आप सभी भाजपा कार्यकर्ताओं ने यहां डबल इंजन सरकार बनाई। और इसका नतीजा क्या हुआ? बीते 10-11 वर्षों में... बीजेपी-NDA सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी पर 5 बड़े पुल पूरे कर लिए हैं। ये आंकड़े याद रहेंगे ना? कांग्रेस की 70 साल की सत्ता में, सिर्फ तीन पुल बने थे... लेकिन हमने सिर्फ 10 वर्षों में 5 पुल बनाए हैं... यानि कांग्रेस ने असम को सिर्फ समस्याएं दीं... जबकि बीजेपी ने असम को समाधान दिए हैं।

साथियों,

आज गुवाहाटी के दो हिस्सों को जोड़ने वाले शानदार पुल का भी लोकार्पण हो गया है। इस सेतु का नाम, प्राचीन कामरूप के महाप्रतापी सम्राट... कुमार भास्कर वर्मन जी के नाम पर रखा गया है। ये लोग होते तो अपने परिवार के नाम पर ही चढ़ा देते। यानि ये भास्कर सेतु, असम के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और असम के समृद्ध इतिहास का संगम है। ये इस बात का प्रमाण है... कि बीजेपी तेज़ विकास करती है, और विरासत को भी आगे बढ़ाती है।

साथियों,

इस नए सेतु के बनने से... गुवाहाटी देश का एक बड़ा ग्रोथ सेंटर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा... सिक्स लेन के इस ब्रिज से... नौजवान हो या बुजुर्ग... किसान हो या उद्यमी... सबको फायदा होगा। और मैं आपको एक और बात बता दूं... यहां अभी ऐसे कई सारे पुलों पर काम चल रहा है। जब ये सभी तैयार हो जाएंगे, तो असम और नॉर्थ ईस्ट के विकास को बहुत तेज गति मिलने वाली है।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस के दशकों के कुशासन की सबसे बड़ी वजह रही है- कांग्रेस की तुष्टिकरण की राजनीति...वोट बैंक पॉलिटिक्स। कांग्रेस ने असम को हमेशा वोट के चश्मे से ही देखा... कांग्रेस ने हर वो काम किया, जिससे तुष्टिकरण को बढ़ावा मिले… और हर वो काम रोका, जिससे असम का विकास हो। कांग्रेस के समय..केंद्र सरकार की योजनाओं को असम तक पहुंचने में भी बरसों लग जाते थे। लेकिन साथियों, बीजेपी ने असम के विकास को, नॉर्थ ईस्ट के विकास को...हमेशा प्राथमिकता दी है। बीते 11 वर्षों में देखिए... जब भी कोई नई शुरुआत देश में हुई, तो तुरंत उसका लाभ नॉर्थ ईस्ट को भी मिला। कोई भी विलंब के बिना मिला। देश में सेमी-हाईस्पीड वंदेभारत ट्रेनें लॉन्च हुई... तो असम और नॉर्थ ईस्ट भी इससे शुरुआत में ही कनेक्ट हो गया। अभी कुछ समय पहले देश की पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन असम से ही शुरू हुई है। जब देश ने तय किया... कि अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से काम करना है। और असम इस सेक्टर में भी ग्रोथ इंजन बन रहा है... और वो दिन दूर नहीं जब असम की चाय की तरह ही... असम की चाय की तरह ही...असम में बनी चिप्स की भी पूरी दुनिया में चर्चा होगी। चाय से लेकर के चिप्स तक असम की विकास यात्रा दिखाई देती है।

साथियों,

असम का ये प्यार मैं कैसे भूल सकता हूं। लेकिन मैं असम से वादा करता हूं कि आपने जो मुझे प्यार दिया है, उसे ब्याज समेत लौटाउंगा और विकास करके लौटाउंगा। मैं आपको डिजिटल कनेक्टिविटी का भी उदाहरण दूंगा। आप देखिए... कांग्रेस के समय में 3G और 4G टेक्नोलॉजी आई.. .ये टूजी के घोटाले भी आए लेकिन नॉर्थ ईस्ट तक, असम तक उसे तेजी से पहुंचाने के लिए कांग्रेस ने मेहनत ही नहीं की... और जब भाजपा सरकार में 5G टेक्नॉलॉजी आई तो हमने क्या किया? हमने इस टेक्नॉलजी को पूरे असम में, पूरे नॉर्थ ईस्ट में... गांव गांव तक पहुंचाने के लिए काम किया। इस सैचुरेशन अप्रोच के कारण, आज गुवाहाटी के युवाओं को हाई-स्पीड इंटरनेट का लाभ मिल रहा है। और अब असम में NIC डेटा सेंटर की भी शुरुआत हुई है, ये डेटा सेंटर, यहां के नौजवानों को बहुत बड़ा लाभ देने वाला है।

साथियों,

एक और उदाहरण स्वास्थ्य सेवाओं का भी है। कांग्रेस ने दशकों तक AIIMS के विस्तार पर ध्यान नहीं दिया। जब अटल जी की सरकार बनी तो एम्स की संख्या बढ़ाई गई। इसके बावजूद हालत ये थी कि 2014 में देश में सिर्फ 6 एम्स थे। आपने 2014 में मोदी को देश की सेवा का अवसर दिया... और आज देश में एम्स की संख्या बढ़कर 20 से ज्यादा हो चुकी है। बीजेपी सरकार ने एम्स गुवाहाटी का भी निर्माण किया है। इसके अलावा असम में कई मेडिकल कॉलेज और कैंसर हॉस्पिटल भी खोले गए हैं। और कल ही, हमने पीएम राहत स्कीम को भी मंजूरी दी है... देश के किसी भी हिस्से में, अगर कोई भी व्यक्ति किसी दुर्घटना में घायल होता है... तो केंद्र की सरकार की ओर से, उसका डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में कराया जाएगा। एक्सीडेंट के बाद तुरंत मदद मिलने से जान बच जाती है।

साथियों,

यहां आए भाजपा कार्यकर्ताओं में बड़ी संख्या में मेरे युवा बेटे-बेटियों की है...आप याद रखिए...देश में जब मैनेजमेंट और उच्च शिक्षा की बात होती थी...तो असम और नॉर्थ ईस्ट के युवाओं के पास सिर्फ पलायन का ही विकल्प होता था। लेकिन आज देखिए...IIM पालसबारी का नया कैंपस शुरू हो चुका है। IIT गुवाहाटी का भी आधुनिकीकरण हो रहा है। इसके अलावा असम में IARI की भी स्थापना की गई है। ये संस्थान, असम में नए टेक्नॉलजी लीडर्स को तैयार करेगी।

साथियों,

आज केंद्र की बीजेपी-NDA सरकार...देश के छोटे-छोटे शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का जाल बिछा रही है। आज ही, मुझे गुवाहाटी में हंड्रेड, सौ इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाने का अवसर मिला है। इस वर्ष के बजट में भी पूर्वोदय स्कीम के तहत चार हज़ार इलेक्ट्रिक बसों की घोषणा की गई है। इससे आने वाले समय में बहुत बड़ी संख्या में असम को भी इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं।

साथियों,

कांग्रेस ने असम के साथ एक और बहुत बड़ा अन्याय किया है। कांग्रेस ने असम को अशांत रखा...हिंसा और अलगाव में रखा। आज़ादी के बाद से ही असम, बम-बंदूक, बंद-ब्लॉकेड और कर्फ्यू की चपेट में रहा। और इसकी गुनहगार कांग्रेस ही थी। मुझे याद है जब मैं यहां संगठन का काम करता था तो मैं वापस जाने का भी कार्यक्रम बना के आता था। लेकिन यहा मैं कार्यक्रम नहीं कर पाता था क्यों, क्योंकि कहीं ब्लॉकेड है, कहीं जा नहीं सकते, रास्ते बंद हैं। तो मुझे तो कभी -कभी तो तीन दिन के लिए आया था सात दिन तक वापस नहीं जा पाता था। काम ही नहीं कर पाता था, ये हालत करके रखी थी। लेकिन साथियों भाजपा-एनडीए सरकार, असम में शांति बहाली और तेज विकास का संकल्प लेकर चल रही है। इसलिए जो असम कभी बम धमाकों से गूंजता था...उसी असम में अब शांति की स्थापना हो रही है। जिस असम में हर साल औसतन एक हज़ार से ज़्यादा लोग हिंसा में मारे जाते थे...आज वहां हिंसा की घटनाएं बंद हो रही हैं। पहली बार असम में बोडो, कार्बी, आदिवासी, DNLA, उल्फा ऐसे हर सगंठन से जुड़े साथियों ने बंदूक छोड़कर...देश के संविधान का रास्ता चुना है...शांति और विकास की राह पकड़ी है। लेकिन मेरे कार्यकर्ता साथियों, आपको भूलना नहीं है...10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है। उनके टॉप लीडर से नीचे तक उनकी जुबान से जहर ही निकलता है। कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है। कांग्रेस...असम को घुसपैठियों के हवाले करना चाहती है। आप इनके दिल्ली के नेताओं को देखिए...यहां जो इनके नेता हैं, उनको देखिए...ये सब घुसपैठियों को बचाने में ही लगे हुए हैं। कांग्रेस, असम की असल पहचान को मिटाना चाहती है।

साथियों,

आने वाले पांच साल असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान ऐसे अनेक प्रोजेक्ट पूरे होने वाले हैं...जो असम की ग्रोथ को नए पंख लगाएंगे...इसलिए यहां डबल इंजन की बीजेपी सरकार बहुत जरूरी है। इसलिए बीजेपी के हर कार्यकर्ता को याद रखना है... असम के तेज विकास के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार। असम के युवाओं को रोजगार के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की बेटियों को नए अवसरों के लिए... आको एबार,बीजेपी सोरकार। असम की पहचान बचाने के लिए... आको एबार, बीजेपी सोरकार।

साथियों,

आज यहां आप सब का ये जोश देखकर, असम की महाविजय का मेरा विश्वास और मजबूत हो गया है। मुझे पूरा भरोसा है, कि इस बार और बड़े बहुमत से…असम में हमारी सरकार की वापसी होने वाली है। लेकिन साथियों, याद रखिएगा... हमें सिर्फ चुनाव ही नहीं जीतना है, हमें निरंतर असम के लोगों का मन भी जीतना है...उनका दिल भी जीतना है। और इसके लिए असम के एक-एक भाजपा कार्यकर्ता को... एक एक पदाधिकारी को, सभी पदाधिकारी को पूरे परिश्रम से काम करना है। जब तक असम में वोटिंग का काम नहीं होता है। जब तक काउंटिंग नहीं होता है, जब तक भाजपा की नई सरकार की शपथ नहीं होती है तब तक, हमें हर दिन अपने क्षेत्र के हर घर में जाना है।.हर घर में, लोगों को मिलकर उनकी आकांक्षा अपेक्षा सुननी है। लोगों को अपने काम बताने हैं, उनके काम आना है। एक एक पन्ना प्रमुख, एक एक बूथ वर्कर को अगले 2 महीने खूब मेहनत करनी है। अगले 2 महीने एक एक घर में, एक-एक असमिया भाई बहन तक...अपनी सरकार के विजन को पहुंचाना है...

साथियों,

असम में तीसरी बार बीजेपी-एनडीए सरकार...असम के तीन गुना विकास का रास्ता बनाएगी। इसलिए हर एक कार्यकर्ता का एक ही मंत्र होना चाहिए- मेरा बूथ...मेरा बूथ... मेरा बूथ.. सबसे मजबूत...मोर बूथ.. मोर बूथ... मोर बूथ

साथियों,

आप मेरा एक और काम करेंगे...? पक्का करेंगे ?... ये सारी बातें याद रखेंगे? पूरी तरह लागू करेंगे ? एक-एक मतदाता तक पहुंचेंगे? उनको बताना मोदी जी आपके लिए ही जी रहे हैं... बताएंगे? बताएंगे? बोलिए भारत माता की... भारत माता की...भारत माता की... बहुत-बहुत धन्यवाद...