भारत माता की जय..!

भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, राष्‍ट्रीय महासचिव श्री जेपी नड्डा जी, जम्‍मू कश्‍मीर के प्रभारी सांसद श्री अविनाश जी, भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष श्रीमान जुगल किशोर जी, श्री अशोक खजुरिया जी, श्रीमान निर्मल सिंह जी, श्री शमशेर सिंह जी, श्री कविन्‍द्र गुप्‍ता जी, श्री बाली भगत जी, चौधरी सुखनंदन जी, चौधरी श्‍यामलाल जी, मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव और विशाल संख्‍या में पधारे हुए जम्‍मू-कश्‍मीर के प्‍यारे भाईयों और बहनों..!

मुझे आज बहुत पुरानी यादें ताजा हो रही हैं। जम्‍मू कश्‍मीर में वर्षो तक मुझे संगठन का कार्य करने का सौभाग्‍य मिला था, यहां के सभी जिलों और तहसीलों में जाने का सौभाग्‍य मुझे प्राप्‍त हुआ था। इस सभा में ऐसे सैकडों पुराने परिवार होगें जिनके घर में मुझे कभी चाय पीने का तो कभी भोजन करने का सौभाग्‍य मिला था। मेरा नाता जम्‍मू-कश्‍मीर से बड़ा निकट का रहा है। आज यहां एक सज्‍जन ने आकर मुझे मेरी 25 साल की तस्‍वीर दी और मेरी पुरानी यादों को ताजा कर दिया। आज मैं विशेष रूप से मेरे गुर्जर भाईयों-बहनों को याद करना चाहता हूं क्‍योंकि जब मैं यहां काम करता था, तो गुर्जर समाज के लोग कहते थे कि हम तो आप वाले हैं, हमारा गुजरात से नाता है इसीलिए हमें गुर्जर कहा जाता है। गुर्जर कहते थे कि हमारे पूर्वज गुजरात से जुड़े हुए थे और आज भी मैं देखता हूं कि गुजरात के कुछ इलाकों के लोगों का पहनावा, उनकी पगड़ी और कपड़े बिल्‍कुल आप गुर्जर भाईयों-बहनों जैसे हैं। मैं जिन गुर्जर परिवारों में भोजन के लिए जाता था, वहां भी मुझे गुजराती खाने का स्‍वाद यानि हल्‍का मीठा सा जायका मिलता था। भाईयों-बहनों, आज भी आप सभी भारी संख्‍या में यहां इक्‍ट्ठे हुए हैं यह देखकर, अपनों से मिलकर मुझे अच्‍छा लग रहा है..!

भाईयों-बहनों, मैनें इस राज्‍य में काफी काम किया है। चुनाव के समय आया, संगठन के कार्यो के लिए भी आता था, लेकिन आज तक जम्‍मू के भाग्‍य में किसी भी राजनीतिक दल या नेता को इतनी भारी संख्‍या में जनता के दर्शन करने को नहीं मिला। यह माता वैष्‍णों देवी की कृपा है कि आज मुझे इतने विशाल जनसागर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्‍त हुआ है..!

भाईयों-बहनों, आज मैं जम्‍मू-कश्‍मीर की धरती पर बैठकर महाराजा हरि सिंह जी को नमन करना चाहता हूं। अगर आजादी के बाद, महाराजा हरिसिंह जी जम्‍मू-कश्‍मीर के निर्णय प्रक्रिया की मुख्‍यधारा में होते तो आज जम्‍मू-कश्‍मीर की यह हालत न होती। हरिसिंह जी दिगदृष्‍टा वाले थे, उन्‍होने एक राजा से ज्‍यादा समाज सुधारक का काम किया था। कन्‍या शिक्षा के लिए उनके कानून बेहद कड़े थे, वह कन्‍या शिक्षा के लिए बेहद आग्रही थे। उससे भी ज्‍यादा बड़ी समस्‍या छुआछुत की थी, पूरे देश को छुआछुत ने तबाह कर दिया था, समाज में छुआछुत का कलंक था। उस समय महाराजा हरिसिंह जी ही ऐसे शख्‍स थे, जिन्‍होने जम्‍मू-कश्‍मीर के मंदिरों में दलितों के स्‍वागत का अभियान चलाया था, समाज की एकता का अभियान चलाया था, ऐसे नेक काम किए थे। लेकिन यह इतिहास की बातें, राजनीतिक स्‍वार्थ के कारण भुला दी जाती है..!

भाईयों-बहनों, जम्‍मू-कश्‍मीर की धरती पर आकर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम लेते ही हमारी रगों में चेतना आ जाती है। हमारी आंखों में सपने दिखने लग जाते हैं। आज मैं देश के विद्वानों, राजनीतिक पंडितों और समाजशास्‍त्रीयों को आह्वान करता हूं कि आजादी के इतने साल बीत चुके हैं, इस देश में निष्‍पक्षता से अभ्‍यास होने की जरूरत है, चर्चा होने की जरूरत है, शोध निबंध  लिखने की जरूरत है कि क्‍या जम्‍मू कश्‍मीर के बारे में पंडित नेहरूर की सोच सही थी या डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की सोच सही थी..! 60 साल के इतिहास को अगर हम कुरेद कर देखें तो यह साफ नजर आता है कि डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की जम्‍मू-कश्‍मीर के संदर्भ में जो सोच थी, आज इतिहास की कठोर सच्‍चाई बना है कि वह रास्‍ता सही था। लेकिन पंडित नेहरू ने डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की बात को नजरअंदाज किया..!

Full Text of Shri Modi's speech at Lalkaar Rally, Jammu

भाईयों-बहनों, जम्‍मू-कश्‍मीर की धरती पर आज भी प्रेरणा देने वाला नाम पंडित प्रेमनाथ डोगरा जी का है। पंडित प्रेमनाथ डोगरा जी प्रजापरिषद के माध्‍यम से जीवनभर जूझते रहे, संघर्ष करते रहे, तीन-तीन पीढि़यों तक हर पीढ़ी को प्रेरित करने का काम पंडित प्रेमनाथ डोगरा जी ने किया था..!

भाईयों-बहनों, हमारे देश का गौरव, परमवीर चक्र प्राप्‍त करने वाले बिग्रेडियर राजेन्‍द्र सिंह भी इसी धरती के है जिनका नाम लेते ही हमारा सीना गर्व से तन जाता है। इसी भूमि के दो महावीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और कर्नल रीम चंद, भारत माता के लिए लड़ने वाले लोग हैं जिनका स्‍मरण ही हमें प्रेरणा देता है। इसी प्रकार, देश की रक्षा के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने वाले मकबूल शेरवानी को कैसे भुलाया जा सकता है, अब्‍दुल अज़ीज को कैसे भुलाया जा सकता है..! भाईयों-बहनों, इस देश में आंतकवाद के खिलाफ लड़ते-लड़ते अनेक लोग शहीद हुए हैं, कई नागरिक मरे हैं, सुरक्षा बलों के जवान मरे हैं, बहुत माताओं ने अपने लाल खोएं हैं..! हम जब भी टीका लाल टपलू को याद करते हैं तो साथ में इन सभी लोगों को स्‍मरण होता है। मैं इस जनसागर के साथ, जम्‍मू-कश्‍मीर और देश की रक्षा करने के लिए जान हथेली पर रखकर खेलने वाले सभी सुरक्षा बलों का भी आदरपूर्वक सम्‍मान, गौरव और अभिनंदन करना चाहता हूं..!

भाईयों-बहनों, दिल्‍ली में हमारी सरकार सोई हुई है और मैं नहीं मानता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल की आग उन्‍हे जगा सकती है। वो ऐसी गहरी नींद में सोएं है कि लगता है 2014 में भी सोते ही रहेंगे, अब इनके जगने की संभावना नहीं बची है..!

भाईयों-बहनों, पाकिस्‍तान में दो घटनाएं घटी, जिनमें से एक घटना पर तो देश की मीडिया और लोगों का ध्‍यान गया, लेकिन दूसरी घटना को भूला दिया गया। पाकिस्‍तान की जेल में दो बेगुनाह नौजवान बंद थे, वह 20-25 साल से बंद थे। एक पंजाब के भाई सरबजीत सिंह और दूसरे जम्‍मू के भाई चमेल सिंह थे। पाकिस्‍तान में सरबजीत सिंह को जिस जेल में मारा गया था और जिस तरीके से मारा गया था, ठीक उसी तरह से, उसी जेल में एक हफ्ते पहले चमेल सिंह को मारा गया था। अगर एक हफ्ते पहले ही हिंदुस्‍तान की सरकार जागती, चमेल सिंह की हत्या के विषय में आवाज उठाती तो शायद सरबजीत के मरने की नौबत ही नहीं आती। भाईयों-बहनों, क्‍या किसी देश की सरकार ऐसी होती है कि उसके लाल मारे जाएं और सरकार सोती रहे, ये कैसे हो सकता है..?

भाईयों-बहनों, आदरणीय राजनाथ सिंह जी ने अनेक नीति विषयक बाबतों में आपके समक्ष सारे विषय रखे हैं। भाईयों-बहनों, ऐसा लगता है कि हमारे देश में अगर पापों, कुकर्मो, जिम्‍मेदारियों और जबावदेही से बचना है, तो कुछ लोगों ने ऐसी जड़ी-बूटी खोज ली है कि वो उसके सहारे बच जाते हैं, बचने का रास्‍ता खोज लेते हैं। और वो रास्‍ता है - सेक्‍युलरिज्‍म..! आप सिर्फ सेक्‍युलरिज्‍म पर बोलना शुरू कर दीजिए, आपके सारे पाप माफ हो जाते हैं..! जम्‍मू-कश्‍मीर में इसके साथ एक और तरीके का उपयोग होता है, वो है धारा-370 का..! भाईयों-बहनों, संविधान के तहत राजनीतिक पटल पर धारा-370 रहे या न रहे, उसकी चर्चा चलती है और चलती रहेगी। लेकिन अब समय की मांग है कि जनता जर्नादन के संदर्भ में, यहां के लोगों के हितों के संदर्भ में, जम्‍मू-कश्‍मीर के नागरिकों के अधिकार के संदर्भ में, कम से कम जम्‍मू-कश्‍मीर में और सारे देश में इस विषय पर चर्चा अवश्‍य की जाएं कि क्‍या धारा-370 से यहां के किसी सामान्य मानव का भला हुआ है..? कोई इसकी चर्चा करने को तैयार नहीं है..! अभी डॉ. मनमोहन सिंह जी चुनाव के दिनों में कहते थे कि भाजपा के नेता, बड़े-बड़े नेताओं के नाम लेते हैं, नाम लेने से कुछ नहीं होता, उन्‍होने जो कहा है वह करके दिखाना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री जी की बात को मानता हूं, स्‍वीकार करता हूं और उन्‍हे यह बात याद दिलाना चाहता हूं कि उस समय भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने धारा 370 को लेकर संसद में कहा था कि यह धारा समय रहते, घिसते-घिसते घिस जाएगी..! प्रधानमंत्री जी, आप ही कहते है कि महापुरूष जो कहते है उसे करना चाहिए, क्‍या आपकी सरकार वह करने को तैयार है जो पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था..? फिर औरों को आप क्‍यों उपदेश देते हैं..?

भाईयों-बहनों, धारा-370 को एक कवच बना लिया गया है और उसका उपयोग भी एक कवच की तरह होता है। उसको साम्‍प्रदायिकता के गहने पहना दिए गए है और इसी कारण, उसकी सही चर्चा नहीं हो रही है। मैं चाहता हूं कि देश के संविधान के जानकार लोग इस विषय पर चर्चा करें।  आप देखिए, जिन कानूनों को लेकर दिल्‍ली की सरकार इन चारों राज्‍यों में वोट मांग रही है, कि हमने ये कानून बनाया, हमने वो कानून बनाया..! जिन कानूनों को लेकर कांग्रेस पार्टी इतना गौरव महसूस कर रही है क्‍या वह सभी कानून जम्‍मू-कश्‍मीर में लागू हो रहे हैं..? अभी राजनाथ सिंह जी ने कहा कि धारा 370 और 374 का राजीव गांधी के समय में अमेन्ड्मेन्ट हुआ, कांग्रेस पार्टी उसको लेकर जयजयकार करती घूमती है। कांग्रेस पार्टी इस बात का जवाब तो दें कि जिन चीजों को आपने किया, उन्‍हे आप जम्‍मू-कश्‍मीर में क्‍यों नहीं लागू करवा पाते हो..? भाईयों-बहनों, आप ही बताइए, क्‍या पंचायतों को अधिकार मिलने चाहिए या नहीं..? जिन लोगों को श्रीनगर में अपने बंगले और ऑफिस की स्वायत्तता के सारे अधिकार के लिए लड़ना है, उनके स्‍वंय के लिए स्वायत्तता बहुत बड़ा मुद्दा है लेकिन उन्‍हे यहां की नगरपालिका को स्वायत्तता नहीं देनी है, यहां के गांवों को स्वायत्तता नहीं देनी है, उनको उनके अधिकार नहीं देने है और ना ही विकास के अवसर देना है..!

भाईयों-बहनों, ये दोगुली नीति कब तक चलेगी..! क्‍या जम्‍मू-कश्‍मीर के सामान्‍य मानवी को वह सभी अधिकार नहीं मिलने चाहिए, जो हिंदुस्तान के अन्‍य सारे नागरिकों को मिलते हैं..? हिंदुस्तान में एससी, एसटी और ओबीसी को जो विशेष अधिकार मिलते हैं, दलितों को जो अधिकार मिलते हैं, आदिवासियों को जो अधिकार मिलते हैं, सामाजिक और शौक्षिक रूप से पिछड़े लोगों को जो अधिकार शिक्षा, नौकरी और चुनाव के प्रतिनिधित्‍व में मिलते हैं, क्‍या वह सभी अधिकार जम्‍मू-कश्‍मीर के नागरिकों को मिलना चाहिए या नहीं..? आखिर उन्‍हे यह अधिकार मिलने से क्‍यों रोका जा रहा है..? इतना ही नहीं पूरे हिंदुस्तान में करप्‍शन की चर्चा चल रही है, पूरा देश करप्‍शन के लिए आक्रोश व्‍य‍क्‍त कर रहा है। जम्‍मू-कश्‍मीर में भरपूर करप्‍शन है कि नहीं..? क्‍या जम्‍मू-कश्‍मीर की सरकारें भष्‍ट्राचार में लिप्‍त हैं..? क्‍या राजनेता भष्‍ट्राचार में लिप्‍त हैं..? तो आप मुझे बताइए, करप्‍शन प्रीवेंशन का कानून जम्‍मू-कश्‍मीर में लागू होना चाहिए या नहीं..? लेकिन यहां उसे लागू नहीं किया जा रहा है। क्‍योंकि वह लोग न कोई जबाव देना चाहते हैं, न ही उनकी कोई जिम्‍मेदारी है और न ही उत्तरदायित्व..!

भाईयों, आप जरा ध्‍यान दीजिए, ये सेपरेटिस्ट, सेपरेट का गुण गाते घूम रहे है, इससे फायदा किसको हुआ है..? अभी तक कितने लोगों को फायदा हुआ है..? पिछले 60 साल का इतिहास देख लीजिए, गिनकर सिर्फ 50 परिवारों ने इसका फायदा उठाया है और पूरे जम्‍मू-कश्‍मीर को अंधेरे में रखा गया है। क्‍या आप सभी गुर्जर भाईयों को आदिवासियों के नाते सभी अधिकार मिलने चाहिए या नहीं..? उनको अपने हक का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं..? आखिर इन सभी लोगों को यह क्‍यों नहीं दिया जा रहा है..? मेरे कारगिल के शिया भाईयों के भलाई के लिए कोई काम होना चाहिए या नहीं होना चाहिए..? पूरे हिंदुस्‍तान में स्‍त्री और पुरूष को समान अधिकार प्राप्‍त है, जो हक पुरूष को प्राप्‍त है, वही हक महिला को मिलते हैं..! क्‍या जम्‍मू-कश्मीर में महिलाओं के साथ अन्याय होना चाहिए..? क्‍या यहां की महिलाओं को भी पुरूषों जितने अधिकार मिलने चाहिए..? क्‍या महिलाओं के साथ हो रहा अन्‍याय बंद होना चाहिए..? आज जम्‍मू-कश्‍मीर के कानून की स्थिति यह है कि यहां पर स्‍त्री और पुरूष के बीच भेद हो रहा है। मैं यहां हिंदु या मुसलमान की बात करने नहीं आया हूं, मैं सिर्फ अपने सवा करोड़ जम्‍मू वासियों की बात करता हूं..! ये अलगाव की राजनीति, ये बांटने की राजनीति, इसने देश को तबाह किया है। अगर विकास करना है जो जोड़ने की राजनीति काम आएगी और उसी से विकास संभव होगा..!

भाईयों-बहनों, एक गंभीर सवाल मैं उठा रहा हूं। कोई मुझे बताएं कि जो अधिकार यहां के मुख्‍यमंत्री श्रीमान उमर अब्‍दुल्‍ला को मिलें हैं, क्‍या वही अधिकार उनकी बहन सारा को भी मिले हैं..? नहीं मिले हैं..! इस राज्‍य में मुख्‍यमंत्री को जो अधिकार मिलें हैं वो उनकी बहन को भी नहीं मिले हैं, क्‍योंकि उसने कश्‍मीर के बाहर शादी की और उसके सारे अधिकार छीन लिए गए..! जो अधिकार उमर अब्‍दुल्‍ला को मिलते हैं, वह उनकी बहन सारा को भी मिलने चाहिए..! ये लड़ाई हिंदु-मुसलमान की नहीं है। माताओं-बहनों का सम्‍मान होना चाहिए। सारा विश्व जेंडर इक्‍वीलिटी की बात करता है। मैं मानवतावादी लोगों और मुझ पर शब्‍दों के बाण चलाने वाले लोगों से पूछना चाहता हूं कि आपके मुंह पर ताला क्‍यों लग गया है..? जम्‍मू-कश्‍मीर की बहनों को अधिकार मिले, इस सम्‍बंध में आप क्‍यों चूप हैं..?

भाईयों-बहनों, अब समय की मांग है कि हम गम्‍भीरता से सोचें कि 60 साल से सेपरेट स्‍टेट, सेपरेट स्‍टेट का गीत गुनगुनाया जा रहा है, हम सभी ने सुना और इससे क्‍या मिला..? किसी को कुछ मिला क्‍या, बर्बादी हुई कि नहीं..? ऊपर दिल्‍ली से जो खजाना आता है, उसे लूटने के बाद कोई हिसाब तक नहीं दिया जाता है, यही चल रहा है, भाईयों..! ये सेपरेट-सेपरेट के नाम पर सेपरेटिज्‍म को बढ़ावा दिया गया है, अलगाववाद को बढ़ावा दिया है, अलगाववादी ताकतों को बढ़ावा दिया गया है। भाईयों-बहनों, कितना अच्‍छा होता अगर सेपरेट स्‍टेट बनाने के बजाय सुपर स्‍टेट बनाने के सपने देखे होते..! आप लोग ही बताएं कि आपको सेपरेट स्‍टेट चाहिए या सुपर स्‍टेट चाहिए..? भाईयों-बहनों, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें सपना दिखाया है, एक रास्‍ता दिखाया है कि जम्‍मू-कश्‍मीर को सुपर स्‍टेट बनाना है..!

भाईयों-बहनों, यहां शासन में बैठे लोगों को दिल्‍ली जाकर कुछ न कुछ मांगने की आदत हो गई है, क्योंकि उन्‍हे लगता है यहां कुछ भी आएगा, उसका हिसाब लेने वाला तो कोई नहीं है..! यहां के ज्‍यादातर नेता तो विदेशों में रहते हैं, न ही उनको यहां की सर्दी पसंद है और न उनको यहां की गर्मी पसंद है। मौका मिलते ही वह विदेश चले जाते हैं..! भाईयों-बहनों, जम्‍मू-कश्‍मीर की ऐसी छवि बना दी गई है कि जम्‍मू-कश्‍मीर अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता है, जम्‍मू-कश्‍मीर को तो भीख का कटोरा लेकर दिल्‍ली के दरबार में जाना ही पड़ेगा। और दिल्‍ली दे तो गाली, न दे तो भी गाली, ये सारा राजनीतिक खेल चलता रहता है। ये लोग जम्‍मू-कश्‍मीर को बेगर बताते रहते हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर भिखारी राज्‍य नहीं है, यहां सम्‍मान से जीने वाले लोगों की जमात है, ये देश के लिए मर-मिटने वाले लोगों की जमात है..! भाईयो-बहनों, आप सभी को ये बेगर-बेगर का कलंक मिटाना है या नहीं मिटाना है..? इसीलिए मैं आज आपके पास आया हूं कि हमें इस जम्‍मू-कश्‍मीर को बेगर से बेटर जम्‍मू-कश्‍मीर बनाना है..! बेगर वाले दिन बहुत हो गए, अब बेटर वाले रास्‍ते पर चलना है और आगे बढ़ना है..!

भाईयों-बहनों, कारगिल जहां शिया समाज के भाई-बहन रहते हैं, मैं वहां भी कुछ समय रहा था और उनके दुख-दर्द को जानने की कोशिश की थी। जम्‍मू-कश्‍मीर में विकास हो, श्रीनगर वैली में विकास की बातें हो, लेकिन क्‍या कारण है कि कारगिल के शिया समाज को विकास की धारा से अछूता रखा जाता है और उसके साथ यह अन्‍याय क्‍यों किया जा रहा है..? गुर्जरों, बकरवाल और शिया समाज के साथ अन्‍याय... हर एक को अलग करते जाना, इन्‍हे पीछे करते जाना, ये कब तक चलता रहेगा..? इस जम्‍मू-कश्‍मीर में भेदभाव की जो राजनीति चलती रहती है, कभी लद्दाख के साथ अन्‍याय, कभी जम्‍मू क्षेत्र के साथ अन्‍याय, कभी शिया के साथ अन्‍याय, कभी बकरवाल से अन्‍याय, कभी गुर्जर से अन्‍याय... ये अन्‍याय कब तक करते रहोगे..? जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों, अगर आप सभी एक बनकर आवाज उठाओगे तो श्रीनगर या दिल्‍ली में बैठी सरकार में दम नहीं है कि आपके भविष्‍य को बदलने से रोक सके..!

भाईयों-बहनों, मैं आपको बताना चाहता हूं कि इन्‍हे विकास में कोई रूचि नहीं है। हम रामायण के काल से सुनते आ रहे हैं कि हिमालय में जड़ी-बूटियां होती है। हमने सुना है कि जब लक्ष्‍मण जी बेहोश हो गए थे तो हनुमान जी हिमालय से जड़ी-बूटी ले गए थे। हम सभी मानते हैं कि हिमालय की जड़ी-बूटियां औषधों के लिए बहुत उपयुक्‍त हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर जड़ी-बूटियों के खजाने से भरा पड़ा है..! हमारा पड़ोसी देश चीन, हर्बल मेडीसीन का एक्‍सपोर्ट पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा करता है। आज पूरे विश्‍व में हर्बल मेडीसीन का एक आकर्षण है। पूरा विश्‍व हर्बल मेडीसीन के रास्‍ते पर जा रहा है। होलिस्टिक हेल्‍थकेयर इस समाज के जीवन में परिवर्तन लाया है। आज जब सारी दुनिया में हर्बल मेडीसीन की मांग हो, अच्‍छे से अच्‍छी जड़ी-बूटीयां हिमालय में होती हो, और हिमालय मेरे जम्‍मू-कश्‍मीर में भरा पड़ा हो, तो क्‍या हमारे देश की सरकार, हमारे जम्‍मू-कश्‍मीर की सरकार, यहां की यूनीवर्सिटी हर्बल मेडीसीन पर रिसर्च करके, आर्युवेद संस्‍थानों का उपयोग करके हर्बल मेडीसीन का एक्‍सपोर्ट कर सकते हैं या नहीं..? ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां से बाहर गलीचे एक्‍सपोर्ट होते हैं। क्‍या हम हर्बल मेडीसीन एक्‍सपोर्ट करके हमारे जम्‍मू-कश्‍मीर के नौजवानों को रोजगार दे सकते है या नहीं..? जम्‍मू-कश्‍मीर के नौजवानों को रोजगार मिलना चाहिए या नहीं..?

भाईयों-बहनों, दिनों-दिन टूरिज्‍म खत्‍म होता जा रहा है। सारा टूरिज्‍म जम्‍मू-कश्‍मीर से शिफ्ट होकर हिमाचल की तरफ चला गया..! यह राज्‍य सौंदर्य और श्रद्धा, दोनों के लिए अच्‍छा टूरिस्‍ट स्‍थल है। यहां अमरनाथ व वैष्‍णों देवी की यात्रा और घूमने फिरने के लिए एक स्‍थान पर सभी कुछ मिलता है, टूरिज्‍म के लिए यहां से बड़ा कोई अवसर नहीं है..! लेकिन हमारा टूरिज्‍म खत्‍म हो गया, रोजगार चला गया, लोग मुसीबतों से गुजारा कर रहे हैं। क्‍या भारत सरकार टूरिज्‍म के विकास के लिए बल नहीं दे सकती है..?

अभी हमारे हिंदुस्‍तान की फिल्‍म इंडस्‍ट्री ने सौ साल मनाए। इस देश की कई फिल्‍में, जिनका फिल्‍मांकन प्राकृतिक सौंदर्य के बीच किया जाता था, उन सभी को जम्‍मू-कश्‍मीर में फिल्‍मांकित किया जाता था, शूटिंग के लिए कश्‍मीर को अच्‍छी से अच्‍छी जगहों में से एक माना जाता था। मुम्‍बई का पूरा फिल्‍म उद्योग यहां शूटिंग के लिए आया करता था।  यहां के छोटे-मोटे हर व्‍यक्ति को रोजगार मिलता था। लेकिन आज फिल्म इंडस्‍ट्री यहां आना बंद हो गई, क्‍योंकि सरकार ने इस ओर ध्‍यान नहीं दिया। जब पूरी फिल्‍म इंडस्‍ट्री 100 वीं सालगिरह मना रही थी तो भारत सरकार को जम्‍मू-कश्‍मीर और लेह-लद्दाख में एक कार्यक्रम का आयोजन करना चाहिए था ता‍कि वह यहां के लोगों को पुराने दिनों के बारे में बताकर उन्‍हे आगे बढ़ाने का रास्‍ता दिखाते..! आज हिंदुस्‍तान में फिल्‍म इंडस्‍ट्री एक बहुत बड़ा उद्योग है, अगर जम्‍मू-कश्‍मीर में एक फिल्‍म इंस्‍टीट्यूट खड़ा कर देते, टेक्‍नोलॉजिकल एडवासंमेंट की दिशा में जाते ताकि लोग यहां के प्राकृतिक दृश्‍यों के लिए आते और यहां के लोगों को रोजगार मिलता, कितनी तरक्‍की होती..! लेकिन भाईयों-बहनों, इन लोगों को तरक्‍की में विश्‍वास नहीं है। आप देखिए, लोगों के बीच कैलाश मानसरोवर की यात्रा का आकर्षण बढ़ रहा है, हजारों की तादाद में लोग जा रहे हैं, अब सभी नेपाल के रास्‍ते से जाते हैं और सारी इनकम नेपाल को हो रही है। अगर यही काम लेह से मानसरोवर जाने के रास्‍ते पर हो जाए तो यह पूरा इलाका अमीर हो जाएगा..! कौन कहता है रास्‍ते नहीं है, कौन कहता है विकास के लिए अवसर नहीं है, लेकिन कश्‍मीर के नौजवानों को तबाह कर दिया जा रहा है..!

अभी राजनाथ सिंह जी डेमचौक की घटनाएं सुना रहे थे। मैं उन डेमचौक के नागरिकों का अभिनंदन करता हूं कि चीन की दादागिरि और दिल्‍ली सरकार की उदासीनता के बावजूद भी उन्‍होने 15 अगस्‍त को तिरंगा फहराया और हिंदुस्तान की आन, बान और शान की रक्षा की। मैं डेमचौक के सभी भाईयों का पूरे भारतवासियों की तरफ से अंत:करण से अभिनन्‍दन करता हूं और विश्‍वास से कहता हूं कि दिल्‍ली के लाल किले से फहराए झंडे से ज्‍यादा प्रेरणा डेमचौक पर फहराएं झंडे से मिलेगी..!

भाईयों-बहनों, चीन हमारे देश के सरहदी गांवों के लोगों को मुफ्त में मोबाइल और सिमकार्ड दे रहा है और चाइना के नेटवर्क से उनको जोड़ देता है। धीरे-धीरे उनको अपने लपेटे में ले रहा है। ये भारत सरकार की टेलीकॉम मिनिस्‍टरी कर क्या रही है..? ये कैसे हो सकता है कि किसी देश का टेलीकॉम सिस्‍टम हमारे देश के लोगों को सिमकार्ड देकर आश्रित बना दें..? इससे देश की सुरक्षा को कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है, लेकिन इसकी चिंता इन लोगों को नहीं है..!

भाईयों-बहनों, आज भी जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों के दिलों में अटल बिहारी वाजपेयी जी के लिए एक श्रद्धा का भाव है। इस देश में 14 साल तक किसी प्रधानमंत्री ने जम्‍मू-कश्‍मीर की धरती पर पैर नहीं रखा था..! अटल बिहारी वाजपेयी पहले प्रधानमंत्री थे, जो 14 साल बाद, इतने संकटो के बीच भी जम्‍मू-कश्‍मीर में आए थे। अटल जी ने जो तीन मंत्र हम लोगों को दिए हैं, वह तीनों मंत्र हम सभी के लिए आगे के दिशादर्शक है। आदरणीय अटल जी ने कहा था कि कश्‍मीर को हम तीन मूल आधार पर रखते हैं। वह हर समस्‍या का समाधान उन तीन मूल आधारों पर करना चाहते थे। यह तीन मूल मंत्र थे : पहला - इंसानियत, दूसरा - जम्‍मूरियत और तीसरा - कश्‍मीरियत..! भाईयों-बहनों, ये तीनों चीजें, जिसमें उन्‍होने इंसानियत की बात कही, जम्‍मूरियत लोकतंत्र की बात कही और कश्‍मीरियत में यहां की सदियों पुरानी चली आ रही परम्‍परा और संस्‍कृति को जोड़कर बात कही और उसी रास्‍ते पर चलने को कहा..!

भाईयों-बहनों, हमारे मन में विचार आता है कि अगर हिमाचल और असम में आईआईटी और आईआईएम के प्रयास हो सकते हैं, तो क्‍या मेरे जम्‍मू में आईआईएम या आईआईटी नहीं होना चाहिए..? क्‍या यहां के नौजवान पढ़कर हिंदुस्‍तान में अपना नाम रोशन नहीं कर सकते..? लेकिन शैक्षिक संस्‍थान के विकास को करने में जम्‍मू-कश्‍मीर की सरकार को न भरोसा है और न ही दिल्‍ली सरकार को विश्‍वास..! अगर हम सभी को आगे बढ़ना है तो एक-दूसरे के साथ संघर्ष करके आगे नहीं बढ़ सकते। आज देश का लोकतंत्र उन लोगों के कब्‍जे में है जो या तो अहंकारवादी है या अवसरवादी, या तो विघटनवादी है या वंशवादी हैं, या फिर वह सुखवादी है जो सिवाय अपने सुख के कुछ भी नहीं देख सकते, ऐसे ही लोगों के कारण आज देश तबाह हो रहा है..!

हमारा देश वि‍विधता में एकता से भरा हुआ है, विविधता में एकता ही हमारे देश की विशेषता है। कश्‍मीर से कन्‍याकुमारी तक, अटक से कटक तक ये भारत माता एक है, उसी भाव को लेकर के, एकता के स्‍वर को लेकर के हमें आगे बढ़ना होगा। हमारी भाषाएं भले ही अनेक हों, लेकिन भाव एक है, राज्‍य अनेक हों, लेकिन राष्‍ट्र एक है, पंथ अनेक हो पर लक्ष्‍य एक है, बोली अनेक हों पर स्‍वर एक है, रंग अनेक हों लेकिन तिरंगा एक है, समाज अनेक हों पर भारत एक है, रिवाज अनेक हों पर संस्‍कार एक है, कार्य अनेक हों पर संकल्‍प एक है, राहें अनेक हों लेकिन मंजिल एक है, चेहरा अनेक हो लेकिन मुस्‍कान एक है, हमें इस मंत्र को लेकर चलना है..!

भाईयों-बहनों, जो लोग हमेशा वोट बैंक की राजनीति करते रहे हैं, जो लोग सत्ता सुख पाने के लिए समाज को बांटते रहे हैं, मैं आज इस ललकार रैली से उनको ललकारना चाहता हूं। और मेरी हर बात को सेक्‍युलरिज्‍म के तराजु पर तौलकर देखा जाए, अगर उनमें हिम्‍मत है तो मेरी ललकार को स्‍वीकार करें। भाईयों-बहनों, हमारी सोच क्‍या है..? हमारा मंत्र है कि सरकार का कोई धर्म नहीं होता, सरकार का सिर्फ एक ही धर्म होता है - इंडिया फर्स्‍ट, नेशन फर्स्‍ट, हिंदुस्‍तान सबसे पहले। सरकार का एक ही धर्म ग्रन्‍थ होता है - भारत का संविधान, सरकार की एक ही भक्ति होती है - भारत भक्ति, सरकार की एक ही शक्ति होती है - सवा सौ करोड़ देशवासियों की शक्ति, सरकार की एक ही पूजा होती है - सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्‍याण, सरकार की एक ही कार्यशैली होती है - सबका साथ, सबका विकास और इसी मंत्र को लेकर भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ रही है..!

मैं जम्‍मू-कश्‍मीर के कार्यकर्ताओं और जनता को अंत:करणपूर्वक बधाई देता हूं कि आज आप सभी ने रंग ला दिया है। ये घटना स्‍टेडियम की घटना नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्‍तान के नाज़ की घटना है, देश की एकता में विश्‍वास करने वालों को ताकत देने वाली घटना है, शांति, एकता और भाईचारे में विश्‍वास करने वाले लोगों के हौसले बुंलद करने वाली घटना है, इसलिए आप सभी को मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं..! मेरे साथ पूरी ताकत से दोनों हाथ ऊपर करके बोलिए,

भारत माता की जय..! भारत माता की जय..! भारत माता की जय..!

वंदे मातरम् ..!  वंदे मातरम्...!  वंदे मातरम्.....!

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झारखंड के रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता में चार अलग-अलग स्पर्धाओं में चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे: पीएम मोदी
मेरे प्यारे देशवासियो, इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच ऐसे मौसम में अपना विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी है: पीएम मोदी
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत बेहद शानदार पेय है। यह पेट भी भरता है और भरपूर ताकत भी देता है: पीएम मोदी
सेवा के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, इसके लिए अच्छी नीयत और लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है: पीएम मोदी
नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में चोलकालीन प्राचीन ताम्रपट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं: पीएम मोदी
हमारे देश में खगोल विज्ञान ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है। इसने एक्सप्लोरेशन के लिए प्रेरित किया है। आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई दे रहा है: पीएम मोदी
डॉल्फिन रेस्क्यू एम्बुलेंस को एक मोबाइल हॉस्पिटल की तरह डिजाइन किया गया है। इसमें डॉल्फिन को सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है: पीएम मोदी
साथियो, जब हम गंगा डॉल्फिन को बचाते हैं, तो हम सिर्फ एक प्रजाति को नहीं बचाते, बल्कि गंगा की बायोडायवर्सिटी को भी सुरक्षित करते हैं: पीएम मोदी
गिरिजा अम्मा जी की देशभक्ति की भावना हर भारतीय को प्रेरित करती है। 'मन की बात' से प्रेरित होकर उन्होंने देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान देने का संकल्प लिया: पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ में एक बार फिर आपसे जुड़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है | देश के अलग-अलग हिस्सों में हमारे देश के लोग देशहित में, समाजहित में, ऐसी अद्भुत चीजें कर रहे हैं और जब उनके विषय में सुनते हैं तो हमें एक नई प्रेरणा मिलती है | आज कार्यक्रम की शुरुआत, मैं athletics में देश की ऐसी ही उपलब्धि से करूंगा | कुछ दिन पहले ही झारखंड के रांची में National Senior Athletics Federation Competition हुआ | इसमें करीब 800 athletes ने हिस्सा लिया - देशभर से आए थे | इस दौरान चार अलग-अलग event में चार national record टूटे | गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार | इन साथियों ने अलग-अलग category में नए record बनाए | मैं सबसे पहले तो इन सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ |

साथियो, एक event जिसकी देशभर में बहुत चर्चा हो रही है, वह है – 100 meter Race, सौ meter की दौड़ | महज दो दिनों के भीतर Men’s 100 meter Race में national record तीन बार टूटा | जिन दो athletes ने ये कमाल दिखाया है वे हैं - गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर | मैंने सोचा इस बार ‘मन की बात’ में इन दोनों खिलाड़ियों से बात की जाए |

प्रधानमंत्री: अनिमेष जी नमस्कार | गुरिन्दर वीर आपको भी नमस्कार, सतश्री अकाल |

अनिमेष, गुरिन्दरवीर : नमस्कार सर, नमस्कार सर |

प्रधानमंत्री : अच्छा भैया आपने तो बहुत बड़ा achievement किया है | आपकी जोड़ी ने भी बड़ा कमाल किया है | हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में अब जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले | फिर तीसरी बार कर ले | बड़ा interesting विषय रहा है आपका | मैं चाहता हूँ कि ‘मन की बात’ के श्रोताओं को पता चले कि आप लोग के विषय में उनको जानकारी हो | आपने जो पराक्रम किया है उसका पता चले |

अनिमेष जी : नमस्ते सर, मेरा नाम अनिमेष कुजूर |मैं 200 मीटर और 400 मीटर का National record holder हूँ and मैं छत्तीसगढ़ से belong करता हूँ सर | And अभी मैं उड़ीसा से खेलता हूँ | मैं last year Asian Medal और World University Games Medal लेकर आया and मैं athletics 2021 से चालू किया जब मैं school से pass out हुआ | मैं सैनिक school अम्बिकापुर से pass out हूँ, and मैं पहले football खेला करता था, and मेरे parents covid के समय मुझे थोड़ी बहुत छूट देते थे कि तू जाके बाहर दौड़ ले या खेल ले तो जब covid खत्म होने लगा तो मेरे football के जो friends थे उन्होंने मुझे बोला कि state meet होने वाला है जाके तू participate कर and मैं participate किया and मुझे पता नहीं था कि वहाँ से National level का Selection है | मैं वहाँ से National में select हुआ and आज मैं India को represent कर रहा हूँ Internationally |

प्रधानमंत्री : और गुरिन्दरवीर जी क्या है ?

गुरिन्दरवीर: नमस्ते सर, मेरा नाम गुरिन्दरवीर है और मैं Indian Navy में Patty Officer हूँ और मैं India का सबसे तेज sprinter हूँ अभी मैंने 100 मीटर में 10.09 का national record बनाया है | और मैं पहला Indian हूँ जो 10.1 के barrier के नीचे भागा है, और मैं कोशिश कर रहा हूँ कि मैं track और वर्दी में भी अपने देश की सेवा करूँ | मेरे father और grandfather दोनों sports करते थे तो हमारे India का culture है जब भी कोई त्योहार होता है जैसे दिवाली, जैसे नया साल तो हम अपने घर की सफाई करते हैं | तो मैं अपने father की Trophies और Medals की सफाई करता था तो मेरे को वो बहुत अच्छा लगता था, मैं बहुत खुश होता था | तब जब मैं कोई trophy साफ करता था तो मैं पूछता था कि भई ये trophy कहाँ जीती, ये Medal कहाँ जीता, ये photo कब की है, तो फिर मेरे को वो अपनी कहानी सुनाते थे ,कि भई मैं यहां खेलने गया, मैंने ये National Medal जीता, मैंने अपनी team को इसमें जिताया | तो फिर मैं भी उनको बोलता था कि भई मैं भी कोई sports करनी है | वो running करने जाते थे morning में, तो मैं उनको बोलने लगा भई मेरे को भी लेकर जाया करो अपने साथ | तो मेरे को लेकर जाने लगे तो उन्होंने जो अपनी game sports में सीखा था तो मेरे को सिखाने लगे | तो मेरा interest बनने लगा | मैंने Usain Bolt का world record टूटता हुआ देखा | तो एक story है ऐसे funny | मैं अभी TV देख रहा था तो मम्मी ने मेरी TV बंद कर दिया कि अभी बेटा पढ़ने का time हो गया, आप पढ़ो | तो मैं कहा भई ठीक है आप मेरे को TV नहीं देखने देते, एक दिन ऐसा आएगा आप मेरे को TV में ढूँढोगे कि देखो वो गुरिन्दर दौड़ रहा है | तो मेरे को भी खुशी होती जब मेरी माँ मेरे को TV पे दौड़ता हुआ देखती है |

प्रधानमंत्री : वाह वाह वाह | बड़ी शानदार बात है भई आपकी तो |

गुरिन्दर वीर: हाँ जी | Middle Class Family है सर, फिर मेरे father वो भी volleyball खेलते थे | घर की problems की वजह से उन्होंने अपनी sports छोड़ दी | उनका जो सपना पूरा करने वाला रह गया | तो उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा भई मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे, मैं उनको बोलता था मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा | तो बोलते सपना पूरा ऐसे नहीं होता, उसके लिए बहुत hard work करना पड़ता है | मेहनत करनी पड़ती है | मिल्खा सिंह जी खून की उल्टियाँ करते थे, धूप में भागते थे | सारा-सारा दिन training करते थे तो वो चीजें मेरे को inspire करती थीं | मेरे father मेरे को inspire करते थे, कि मैं भागूँगा तो अपने देश के लिए, देश के लिए Medal लाऊँ, जीतूँ | और ये भी था कि भई जब मैंने event choose किया 100 मीटर तो सभी मेरे को बोलते थे कि भई 100 मत करो, 100 Indians का event नहीं है | Indians की body 100 मीटर के लिए बनी ही नहीं है | तो मैं और मेरे father हमेशा बोलते थे कि अभी गुरिन्दर हमने ये choose किया है, हम इससे पीछे नहीं हटेंगे | जो हमें बोलते हैं कि भई हम नहीं कर सकते हम उसको कर के दिखाएंगे | और तू करके दिखाएगा, मुझे तेरे पे भरोसा है | तो वो भरोसा जब मेरे को मेरे father ने मेरे पर किया तो मैं उस भरोसे को अपनी हिम्मत बनाके मैं चला और मैं आज हर Indian बोलता कि भई Indian Sprint कर |

प्रधानमंत्री : देखिए आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है, और सिर्फ दो दिनों के भीतर आप दोनों ने तीन बार National Record तोड़ा है | 100 मीटर race में दौड़ना, जैसा गुरिन्दरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं | इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूँगा, और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है ?

गुरिन्दरवीर: जी सर, मैं गुरिन्दर, मैं जब starting में सर बहुत struggle था, बहुत बार doubt भी आया कि मैं सही कर रहा हूँ, मैं सही choose किया क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हो | जब मैं हारता था, जब मैं सही performance नहीं आती थी, कोई injury आ जाती थी तो मेरे घरवाले मेरे को support करते थे कि भई कोई नहीं एक दिन बुरा चला गया, एक साल बुरा चला गया तो इससे जिंदगी खराब नहीं होती | सपने देखना नहीं छोड़ते | तो मेरे coach ने भी मेरे को ये सिखाया कि अगर तू नहीं करेगा तो कोई और नहीं कर पाएगा | तो ऐसे जब हमारी community हमारे आसपास लोग हमें उत्साहित करते हैं तो हमारा कभी वो motivation नहीं टूटता |

प्रधानमंत्री : अनिमेष जी…

अनिमेष : सर, मुझे तो सारे लोग बोलते थे कि जब मैं 2021 में चालू किया athletics तो मुझे बोलते थे कि देख ये नया field है, तू कर पाएगा की नहीं, तो मैं बोला कि अब मैं इस field में घुसा हूँ तो करूंगा ही | मेरे पापा भी हमेशा मुझे बोलते थे कि तू इस field में घुसा है तो कभी पीछे मुड़के देखना मत क्योंकि सोचते तो सभी है की ये करना है, वो करना है but करके बहुत कम ही दिखाते है | तू बस इस field में घुसा है तो इस पे अमल रहना, इस पे आगे बढ़ना है | तेरे को सारी facilities, सब चीज हम support करेंगे, family support, financial support, सब चीज हम लोग करेंगे बस तू मेहनत कर और India को दिखा कि Indians भी भाग सकते हैं क्योंकि ये मुझे भी लोग बोलते थे कि Indians के genes ऐसे नहीं है कि वो Sub 10 या Sub 10.1 के अंदर भाग सकते है या कोई वो sprint कर सकता है but अभी हम दोनों ने ऐसा prove कि Indians भी कर सकते हैं | ऐसा कोई hard नहीं है हमारे लिए, हम भी सब कुछ कर सकते हैं | तो सर ये सारी चीजें मुझे बहुत motivate करती हैं and जैसे-जैसे हम training कर रहे हैं हम और timing तोड़ रहे हैं अपना and बाकी Indians को भी ये चीज दिख रहा है कि Indians भी कर सकते हैं and हम और करेंगे सर अभी, and अभी हम दोनों का selection commonwealth games के लिए भी हुआ है तो वहाँ upcoming competition में हम और अच्छा परफॉर्म करेंगे।

प्रधानमंत्री: अच्छा देखिये मेरे मन में भी एक कोतूहल है | और लोगो को भी होगा मैंने सुना है कि आप दोनों अच्छे दोस्त भी है आप दोनों ने कुछ ठान रखा था क्या कि तुमने मेरा record तोड़ा तो मैं तेरा record तोड़ दूँ क्या पहले अनिमेष बता दे |

अनिमेष : सर जी पहले record 10.18 का था जो की मेरा ही था and then उसको गुरिंदरवीर भईया ने semi-final में तोड़ दिया 10.17 करके and मैंने फिर से उसको semi-final 2 में 10.15 करके तोड़ दिया तो उस समय जब मेरा semi-final हुआ तो हम दोनों ही खुश थे कि हां चलो ठीक है, आज record टूटा and चलो हम दोनों ने तोड़ा ऐसा, क्योंकि उस समय competition में rivalry रहती है but हम दोनों ठान के रखे थे पहले से ही उससे पहले हमलोग Saudi Arabia भी गए थे competition करने के लिए तो वहाँ भी हम दोनों roommates थे तो हम दोनों वहाँ भी बात करते थे कि India के sprinting को आगे लेकर जाना है and हमारे ही हाथों में है वो चीज हम जो करेंगे वही बाकियों को motivate करेगा ।

प्रधानमंत्री : गुरिंदरवीर क्या कहना चाहेंगे ?

गुरिंदरवीर : हम दोनों ने decide किया था हम दोनों अच्छा भागेंगे | तो कभी भी सर एक-दूसरे को जरूरत होती है तो एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं जैसे अभी record करने से पहले जब मैंने record किया फिर अनिमेश ने किया | तो जब हम warm-up कर रहे थे तो मैं अनिमेष को बता रहा था, अभी अनिमेष वो block सही है उस पे जाके बैठ वहाँ पे stride कर ले हम warm-up यहाँ पे करेंगे, यहाँ पर warm-up सही होगा तो एक दूसरे की help करते है, एक-दूसरे की help करते है तो दूसरा भी improve करता है, हम भी improve करते है | तो दोस्ती भी चाहिए but सर हम ground के बाहर है, competition के बाहर है तो हम दोस्त हैं, जब हम ground में चले जाते है तो एक-दूसरे के competitor हो जाते है | तो यह होता है कि मैं इससे fast भागूंगा, मैं इससे fast भागूंगा |

प्रधानमंत्री : देखिये आप लोगों ने जो स्पर्धा की है न वो देश का मान बढ़ाने के लिए की है, देश को भविष्य में इस जगह पर पहुँचाने के लिए की है और एक positive spirit से की है और मैं मानता हूँ कि आपका ये जो sportsman spirit है, खेलना भी है, एक-दूसरे को चुनौती भी देना है और फिर आगे निकलने के लिए प्रयास करना है और फिर आगे जाने के लिए एक-दूसरे की मदद करना है ये अद्भुत काम किया है आप लोगों ने मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनायें और आप देश का नाम भी रोशन करेंगे मुझे पूरा विश्वास है आप ऐसे ही मेहनत करते रहिये बहुत प्रगति होगी, बहुत-बहुत शुभकामनाएँ मेरी |

गुरिंदरवीर /अनिमेष : शुक्रिया सर, शुक्रिया आपका |

प्रधानमंत्री : बहुत बहुत धन्यवाद।

मेरे प्यारे देशवासियो, इस समय देश के ज्यादातर हिस्सों में बहुत गर्मी पड़ रही है | तेज धूप, गर्म हवाएँ, ऐसे मौसम में अपना ध्यान रखना बहुत जरूरी है | पानी पीते रहिए | धूप में अगर निकलना ही पड़े तो थोड़ा संभल कर निकलें | इस दिशा में सरकार की भिन्न-भिन्न departments ने जो guidelines जारी की है वो भी भूलियेगा नहीं |

साथियो, हमारे यहां गर्मी से लड़ने का तरीका कई बार रसोई में भी मिलता है | आपने भी देखा होगा जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे घर की रसोई का स्वाद बदल जाता है, रसोई का प्रकार बदल जाता है | कहीं मटके का पानी निकल आता है, कहीं दही जमने लगता है, तो कहीं कच्चे आम उबलने लगते हैं - और फिर शुरू होता है देसी पेय का दौर | देसी पेय से आप भी परिचित हैं, अगर आप उत्तर भारत में जाएँगे तो काफी जगह आपको मिलेगा आम पन्ना, कच्चे आम का स्वाद, और गर्मी से राहत भी | पंजाब-हरियाणा जाइए तो लस्सी मिल जाएगी, बड़े गिलास वाली लस्सी | राजस्थान और गुजरात में छाछ, जैसे हर खाने की साथी बन जाती है | और बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश में सत्तू का शरबत, उसकी तो बात ही क्या है - पेट भी भरे, ताकत भी दे | कोंकण और गोवा में कोकम शरबत, सोल कढ़ी | दक्षिण भारत में पानकम, नीर मोर, सम्बारम और ओडिशा में बेल पना, वो सिर्फ पेय नहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की परंपरा का हिस्सा है | और इसमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना की झलक भी मिलती है | और एक बात जरूर ध्यान रखियेगा, इनमें से ज्यादातर चीजें हमारी अपनी रसोई से निकली हैं, हमारे खेत खलिहान से निकली हैं | कोई बड़ी branding नहीं है| लेकिन पीढ़ियों का अनुभव उनमें समाया हुआ है | आप भी गर्मी के दौरान देसी पेजयलों का खूब आनंद लीजिए |

साथियो, गर्मी आते ही एक और चर्चा हर घर में शुरू हो जाती है और वो है आम | आम, आम चर्चा का विषय होता है, भारत में शायद ही कोई घर होगा जहाँ गर्मियों में आम की बात न होती हो | हर इलाके का अपना आम, अपना स्वाद, अपनी खुशबू | महाराष्ट्र और कोंकण का हापुस, alphonso, गुजरात का केसर, यह तो आमरस की जान है , उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा | वैसे, लंगड़ा आम की एक खास बात होती है - पकने के बाद भी उसका रंग कई बार हरा ही रहता है | बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए | चौसा, मालदा - हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं | दक्षिण भारत जाइए, तो बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, बंगाल का हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश का सुवर्णरेखा | यानी, जगह बदलती है, आम का रूप-रंग और उसका स्वाद भी बदल जाता है | और साथियो आम की ये यात्रा, अब गाँव से, global market तक भी पहुँच रही है | आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं आम की पैदावार से जुड़े अपने किसान भाई-बहनों की प्रशंसा करूंगा | आप देश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए आम किसान नहीं बहुत विशेष हैं | ऐसे ही छाए रहिए |

साथियो, गर्मी के इन दिनों में, ऐसे तो स्कूलों की छुट्टियां होती हैं, लेकिन, मैं एक ऐसी class की बात करूंगा, जिसमें आपका admission करने का मन कर जाएगा । साथियो, एक स्थिति की कल्पना कीजिए, एक ऐसा school जहाँ बच्चे भी आते हों, युवा भी और बुजुर्ग भी, जहाँ कोई fees ना हो, कोई बड़ी building ना हो, कोई classroom भी ना हो और सबसे रोचक बात, वहाँ class नदी में लगती हो ।

साथियो, ये कोई कहानी नहीं है। ये एक सच्चा प्रयास है। केरलम के आलुवा में, साजी वलाशेरिल जी ऐसा ही एक swimming club चला रहे हैं । अब तक 15 हजार से ज्यादा लोग यहाँ तैरना सीख चुके हैं । साजी जी ने दिव्यांग बच्चों को भी swimming सिखाई है । इस प्रयास के पीछे, एक पीड़ा भी छिपी है । कुछ वर्ष पहले, एक नौका हादसे में कई छात्रों की मृत्यु हो गई थी । उस घटना ने साजी जी को भीतर तक झकझोर दिया । उन्होंने सोचा, अगर बच्चों को तैरना आता होता, तो शायद कई जानें बच जातीं - बस यहीं से शुरू हुआ उनका ये अभियान।

साथियो, साजी वलाशेरिल जी का जीवन, हमें एक बहुत बड़ी सीख देता है। सेवा करने के लिए बहुत बड़े साधन जरूरी नहीं होते - जरूरी होता है, एक अच्छा इरादा और लगातार किया गया प्रयास। इन्हीं के दम पर, हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया जा सकता है ।

मेरे प्यारे देशवासियो, बीते दिनों मुझे Europe के Netherlands जाने का अवसर मिला | वहां मैं कई meeting में शामिल हुआ | इसी दौरान एक ऐसा क्षण आया जिसने हर भारतीय को गर्व से भर दिया | Netherlands में आयोजित एक विशेष समारोह में चोला काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई | उस कार्यक्रम में Netherlands के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे | इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर मुझे देश-विदेश से लगातार संदेश मिल रहे हैं | लोग खुशी जता रहे हैं, गर्व व्यक्त कर रहे हैं | दुनियाभर के तमिल समुदाय में भी इसे लेकर विशेष उत्साह है |

साथियो, इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा भी है | इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं | इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं | ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं | इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है | इन ताम्र पट्टिकाओं में चोला वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है | इनसे पता चलता है कि चोला साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी | दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है |

चोला साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर हम सभी को बहुत गर्व है | साथियो, हमारी सरकार भारत की ऐसी अमूल्य धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है | इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में भी एक महत्वपूर्ण खोज हुई है | यहां तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं | ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं | विशेषज्ञ मानते हैं कि ये inscriptions छठी-सातवीं सदी के हैं यानि चौदह-सौ, पंद्रह-सौ साल पुराने ये ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं | इनसे उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है |

साथियो, हम भारतीयों में खगोल विज्ञान यानी astronomy को लेकर हमेशा विशेष आकर्षण रहा है | हमारे देश में आज भी सदियों पुरानी observatories मौजूद हैं | यहां अद्भुत mathematical discoveries हुई हैं | Navigation हो, पंचांग हो, या हमारे पर्व-त्योहार, इन सबका संबंध आकाश और तारों से रहा है | हमारे यहां astronomy ने हर पीढ़ी में कौतूहल जगाया है | उसे exploration के लिए प्रेरित किया है और आज के युवाओं में भी इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई देता है | आजकल आप भी देखते होंगे, देशभर में astronomy Clubs तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं | बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक, स्कूलों से लेकर पार्कों तक इनकी गतिविधियां दिखाई देती हैं | मुझे Bangalore Astronomical Society के बारे में जानकारी मिली | यहां observational sessions आयोजित किए जाते हैं | इस संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में astronomy को लोकप्रिय बनाने का mission भी शुरू किया है | ‘खगोल मण्डल’ नाम की एक टीम ने 30 घंटे का एक बहुत innovative course शुरू किया है |

साथियो, रात में तारों को निहारना अपने आप में अद्भुत अनुभव होता है | Astro Kerala नाम की एक संस्था Night Observation Camps और workshops आयोजित करती है | यहां युवा साथी Telescope बनाना और star maps का इस्तेमाल करना सीखते हैं | राजकोट के Big Bang Astronomy Club ने गिर के जंगलों से लेकर कच्छ के रण तक अनेक astronomy events आयोजित किए हैं | ‘ज्योतिर्विद्या परिसंस्था’ भी astronomy के सबसे पुराने संस्थानों में से एक है | यहां observational facilities के साथ-साथ books, library और telescope library की सुविधा भी है | मैं ISAAC (आईसैक) का भी जिक्र करना चाहूंगा | यह एक student-led nationwide network है, जो, astronomy और astrophysics clubs को आपस में जोड़ता है |

साथियो, अपनी hobby के लिए समय निकालना और लगातार कुछ नया सीखते रहना बहुत जरूरी है | मैं युवाओं से आग्रह करूंगा कि वे किसी astronomy club से जरूर जुड़ें, और इन छुट्टियों में किसी planetarium को भी जरूर देखने जाएं |

साथियो, ‘मन की बात’ कार्यक्रम को जो लोग टीवी पर देख रहे हैं, मैं उनसे कहूँगा – एक video जरूर देखिएगा | ये video पिछले दिनों बहुत चर्चा में रहा | इसमें कुछ लोग बहुत धैर्य से, बहुत सावधानी से एक गंगा Dolphin को बचाने की कोशिश कर रहे हैं | आपको ये जानकर आश्चर्य होगा, इस पूरे प्रयास में करीब 13 घंटे लगे, और आखिरकार वो dolphin बच गई |

साथियो, इसमें बहुत बड़ी भूमिका रही – भारत की पहली गंगा dolphin rescue ambulance की | ये घटना उत्तर प्रदेश की है | वहाँ एक गंगा dolphin नहर में फंस गई थी | ऐसे समय में ‘नमामि गंगे अभियान’ के तहत बनी ये ambulance उसके लिए उम्मीद बनकर पहुंची | फिर बहुत सावधानी से उसे बाहर निकाला गया | उसकी जांच की गई, उसका इलाज किया गया और उसके बाद उसे सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया गया | एक तरह से कहें, तो एक जीवन, फिर अपने घर लौट गया |

साथियो, ये dolphin rescue ambulance बहुत खास है | इसे एक चलते–फिरते अस्पताल की तरह तैयार किया गया है | इसमें Dolphin को सुरक्षित रखने की व्यवस्था है | Oxygen की सुविधा है, विशेष stretcher हैं, बचाव के उपकरण हैं, यानि अगर कोई Dolphin, घायल हो जाए, नहर में फंस जाए या नदी से कट जाए, तो तुरंत उसकी मदद की जा सकती है |

साथियो, जब हम गंगा dolphin को बचाते हैं, तो हम सिर्फ एक प्रजाति को नहीं बचाते, हम गंगा की जैव विविधता को बचाते हैं | नदी के पूरे जीवन तंत्र को बचाते हैं और अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति की एक अमूल्य धरोहर भी बचाते हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, आप में से बहुत लोगों की नदी, तालाब या कुएं के पानी से जुड़ी यादें जरूर होंगी | किसी को तालाब में तैरना याद होगा, किसी को दोस्तों के साथ तालाब किनारे खेलना, किसी को उस मिट्टी की खुशबू याद होगी | बचपन की ऐसी यादें जीवन-भर मन में बसी रहती हैं |

साथियो, ऐसी ही यादों को बचाने की एक प्रेरक गाथा उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आई है | बस्ती के आकाश गुप्ता अपने गाँव की मनोरमा नदी को देखकर बहुत दुखी होते थे | क्योंकि जिस नदी को उन्होंने बचपन में साफ और जीवंत देखा था | समय के साथ उस नदी में प्लास्टिक जमा होने लगा था | गंदगी बढ़ती चली जा रही थी | श्रीमान आकाश ने तय किया कि शिकायत नहीं करेंगे, एक नई शुरुआत करेंगे | शिकायत नहीं, शुरुआत मंत्र बन गया | उन्होंने अपने दोस्तों को साथ लिया | सिर्फ जाल था, फावड़ा था, टोकरी थी और सबसे बड़ी ताकत थी, कुछ बदलने का संकल्प | ये युवा नदी में उतरते थे, जलकुंभी निकालते थे | प्लास्टिक और कचरा बाहर लाते थे | कई बार एक दिन में 50-60 किलो तक कचरा नदी से निकाला गया | धीरे- धीरे मनोरमा नदी का वह हिस्सा फिर से साफ दिखने लगा | आसपास के लोगों का ध्यान भी इस काम की तरफ गया | लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ी |

साथियो, ऐसी ही एक प्रेरक कहानी गोवा से भी सामने आई है | गोवा के बालकृष्ण अइया जी retired teacher हैं | लेकिन समाज के लिए काम करने का उनका उत्साह आज भी वैसा ही है | उन्हें मड्डी-तोलाप इलाके में पानी की समस्या बहुत परेशान करती थी | उन्होंने भी समाधान के लिए काम शुरू किया | बालकृष्ण जी ने pipeline बिछाने के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इससे कई घरों तक पानी पहुंचा | जिन परिवारों को पानी के लिए रोज संघर्ष करना पड़ता था, उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बनी |

साथियो, पिछले महीने मुझे एक बहुत अच्छा अनुभव हुआ | इसका संबंध ‘मन की बात’ से भी जुड़ा है | इसलिए आज मैं इसकी चर्चा आपसे करना चाहता हूँ | तमिलनाडु के नागरकोइल में मेरी मुलाकात एक टीचर से हुई | करीब तीन दशक पहले भी मैं उनसे मिला था | मैं बात कर रहा हूँ, गिरिजा अम्मा जी की | इस मुलाकात के दौरान कुछ युवा students भी उनके साथ थे |

साथियो, गिरिजा अम्मा जी करीब 15 स्कूल चलाती हैं | इनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय बहुत प्रमुख है | उनकी देशभक्ति की भावना हर भारतवासी को प्रेरित करने वाली है | उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया | इसके लिए उन्होंने अपने सभी स्कूलों के students को प्रेरित किया | उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें | यानी एक साल में हर student की ओर से 365 रुपये जमा हुए | इस छोटे-छोटे योगदान से करीब 40 लाख रुपये इकट्ठा हुए | गिरिजा अम्मा जी ने इस पूरी राशि का चेक मुझे सौंपा | उनसे बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि माँ भारती के प्रति उनका समर्पण कितना गहरा है | पिछले वर्ष ही चेन्नई के पहले हिन्दू विद्यालय ने अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं | देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस School network की भूमिका बहुत प्रशंसनीय है | मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ और उन students की भी विशेष सराहना करता हूँ, जिन्होंने, अपने वीर सैनिकों के लिए योगदान दिया |

साथियो, भारत के हर गाँव में, हर शहर में, कुछ-न-कुछ ऐसा हो रहा है जो हमें प्रेरणा देता है | कई बार, इन प्रयासों की ज्यादा चर्चा नहीं होती, लेकिन जब हम इन्हें जानते हैं, तो ये विश्वास और मजबूत होता है, कि देश, अपने लोगों की शक्ति से आगे बढ़ रहा है | मेरा आपसे आग्रह है, अपने आसपास ऐसे प्रयासों को जरूर देखिए | जो लोग समाज के लिए अच्छा काम कर रहें हैं, उन्हें पहचानिए, उनकी सराहना कीजिए, उनसे सीखिए, और हो सके तो खुद भी किसी अच्छे काम से जुड़िए | अगले महीने ‘मन की बात’ में कुछ और प्रेरक गाथाओं के साथ मैं फिर आपसे जुड़ूँगा | बहुत-बहुत धन्यवाद | नमस्कार |