प्रथम समूह के सचिवों ने ऊर्जा संरक्षण और दक्षता पर प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे
सचिवों ने शासन के विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के लिए प्रधानमंत्री के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे

प्रशासन के विभिन्‍न क्षेत्रों में अमूल- चूल परिवर्तन लाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा सचिवों को विचार प्रस्‍तुत करने के लिए प्रोत्‍साहित किये जाने की निरंतरता में सचिवों के प्रथम समूह (8 समूहों में से) ने ऊर्जा संरक्षण और दक्षता के संदर्भ में प्रधानमंत्री के समक्ष विचार और सुझाव प्रस्‍तुत किए।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और केन्‍द्रीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह, श्री अरूण जेटली, श्रीमती सुषमा स्‍वराज, नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष श्री अरविंद पनगडि़या के अलावा भारत सरकार के सभी सचिव उपस्थित थे। प्रस्‍तुतीकरण के दौरान और उसके बाद प्रधानमंत्री सहित श्रोताओं में से कई सदस्‍यों ने प्रस्‍तुतीकरण के विषय के बारे में कई प्रश्‍न पूछे और अपने सुझाव दिए।

प्रधानमंत्री ने प्रस्‍तुतीकरण की सराहना की और कहा कि सचिवों ने अपना कार्य काफी हद तक उनकी परिकल्‍पना के अनुरूप ही पूरा किया है। उन्‍होंने हस्‍तक्षेपों और सुझावों की सराहना की तथा प्रस्‍तुतीकरण में शामिल सभी लोगों का अभिनंदन किया।

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पीएम मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और दृढ़ता के महत्व को रेखांकित करने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीने के महत्व पर जोर डालते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि सच्ची वीरता और ताकत किसी भी परिस्थिति में समझौता किए बिना अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर दृढ़ रहने में निहित है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया- 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” 

इस सुभाषितम् का यह संदेश है कि व्यक्ति को सदैव आत्म-सम्मान, साहस और सम्मान के साथ जीना चाहिए। सच्ची वीरता और ताकत इसमें है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता किए बिना सत्य, धैर्य और आत्म-गौरव के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा; 

“उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्।

अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥”