The poor have the first right on resources: Narendra Modi

Published By : Admin | April 19, 2014 | 16:43 IST

Excerpts of Shri Narendra Modi’s interview to CNBC Awaaz

आइये देखते हैं कि CNBC आवाज़ संपादक संजय पुगलिया के सवालों का जवाब नरेंद्र मोदी ने किस तरह दिया है।

संजय पुगलियाः आपने देश की जनता से कहा है कि जो काम 60 साल में नहीं हुआ वो आप 60 महीनों में कर सकते हैं, क्या आप को नहीं लगता है कि आपने बहुत बड़े-बड़े कमिटमेंट कर दिए हैं और इन कामों को करने के लिए आपके सामने बहुत बड़ी चुनौती होगी?

नरेंद्र मोदी: देश की जनता की अपेक्षाएं बहुत हैं, मैं इससे सहमत हूं। अपेक्षाओं का मूल कारण ये है कि देश के सामान्य नागरिकों के सपने चूर चूर हो गए हैं। इन दिनों मैं सारे देश में भ्रमण करता हूं और मैं पहले भी करता था। शायद हिंदुस्तान के इतिहास में मैं अकेला राजनीतिज्ञ हूं जिसे देश के 400 जिलों में जाने और बातचीत करने का सौभाग्य मिला है। हालांकि पिछले 12-15 सालों में मैं गुजरात की राजनीति में उलझा हुआ था। अब जब मैं दोबारा उन जिलों में गया हूं तो कोई ऐसा जिला नहीं है जिसने मुझे पीने के पानी की समस्या को लेकर शिकायत नहीं की हो। इस बात से मैं काफी परेशान हुआ कि क्या आजादी के बाद हम लोगों को पीने का पानी नहीं दे पाए हैं। ये बातें हैं जिसने लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ा दीं हैं और मैं मानता हूं कि जनता का दबाव बना रहना चाहिए। देश में अच्छा करने, अच्छा पाने के लिए जनता का दबाव बना रहना चाहिए। इसी के बाद बाकी सब नेता और सरकारें जनता की भलाई करने का कदम उठाएंगे।

संजय पुगलियाः देश की स्थिति इस वक्त बहुत खराब है आपको लगातार काम करना होगा, आपकी टीम या कैबिनेट बनाने का आधार क्या होगा, खासकर आर्थिक मोर्चे पर काफी काम करना होगा, वहीं गठबंधन की राजनीति में कुछ काम दबाव के चलते नहीं हो पाते हैं तो आपकी सरकार का आधार क्या होगा और देश की आर्थिक स्थिति के लिए आपकी क्या योजना है?

नरेंद्र मोदी: संजय बारू की किताब मैनें पूरी नहीं पढ़ी है लेकिन जितनी भी पढ़ी है उसके आधार पर यही लगता है कि प्रधानमंत्री को छोटे-छोटे दलों की बजाए एक परिवार का दबाव बहुत था। दूसरी बात है कि गठबंधन की सरकार हो या ना हो, या पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो, सरकार को क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझना ही होगा। देश की सरकार को एक जगह से चलाने की जो प्रवृति है उसे बदलना होगा। प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो एक समय में कांग्रेस की केंद्र और राज्यों दोनों जगह सरकारें होती थी। लेकिन बाद में समय बदला और राज्यों में अलग पार्टियों की सरकारें आईं जिसे कांग्रेस ने ठीक नहीं समझा। इसके कारण राज्यों में माहौल बिगड़ गया। केंद्र में बैठने वाली सरकार की सोच होनी चाहिए-टीम इंडिया। पहली बार देश की राजनीति के केंद्र में ऐसा व्यक्ति आया है जिसे राज्य चलाने का लंबा अनुभव है और केंद्र से उसे क्या दिक्कतें होती हैं, राज्यों की क्या समस्याएं हैं उसे वो समझता है। टीम इंडिया का मतलब है राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री। इस टीम के काम करने के बाद आप देखिए देश कितनी जल्दी बदलना शुरू हो जाएगा।

संजय पुगलियाः ये एक बहुत नया सुझाव है और बहुत इस पर चर्चा कर रहे हैं कि ये कैसे होगा? क्या आप एक पॉलिटिकल बॉडी बनाएंगे जो इस टीम इंडिया का हिस्सा होगी? क्या इसके फैसले केंद्रीय मंत्रिमंडल लागू करेगा? क्या आप इसको एक राजनीतिक परामर्श दल बनाएंगे?

नरेंद्र मोदी: आजकल देश में संवाद और संचार ही नहीं हो रहा है, शासन में चिट्ठी-पत्री के जरिए काम हो रहा है। जो टीम इंडिया का मॉडल हम सोच रहे हैं ये एक पारिवारिक माहौल होगा जिसमें सब मिलकर अपने अपने सुझाव रखेंगे। सभी राज्य और केंद्र मिलकर हम एक परिवार हैं। केंद्र कोई आदेश दे दे और राज्य इसे मानें, सत्ता का केवल एक केंद्र बन जाए, इस तरह की संस्कृति अब नहीं चलेगी।

संजय पुगलियाः क्या आप गठबंधन की राजनीति के दबाव में आकर महत्वपूर्ण मंत्रालय जैसे आर्थिक मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय के ऊपर कोई समझौता करेंगे?

नरेंद्र मोदीः कौन सा मंत्रालय किस पार्टी के पास जाएगा, इस के विषय में अभी चर्चा करना बहुत जल्दबाजी होगी। अभी मंत्रालयों पर चर्चा करना ठीक नहीं। भाजपा के मेनिफेस्टो के मुताबिक क्या सोचा गया है, इसे जानना चाहिए। भारत के विकास में रेलवे विभाग बहुत महत्वपूर्ण पहलू है, हमने रेलवे को केवल पैसेंजर सेवा का माध्यम मान लिया है। हमें रेलवे को देश का ग्रोथ इंजन बनाना होगा। रेलवे की ऐसी व्यवस्था है जो राज्य और केंद्र के विकास को जोड़ने का बड़ा माध्यम बन सकता है। इस विभाग पर कई पार्टियों के दबाव रहते हैं। रेलवे में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। रेलवे को टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। अगर हम सुपर कंप्यूटर की मदद से रेलवे के नेटवर्क का इस्तेमाल कर पाएं तो हम विश्व को बहुत बड़ी ताकत दे सकते हैं।

संजय पुगलियाः इसी पर लोगों को संदेह है कि क्या बीजेपी के पास इस तरह के काम करने के लिए पर्याप्त अनुभवी लोगों की टीम है, बीजेपी को इस तरह के काम करने के लिए बाहर से भी लोग लेने होंगें?

नरेंद्र मोदीः भाजपा की जहां भी सरकार हैं वहां सर्वश्रेष्ठ काम किया गया है, एनडीए की सरकार ने शानदार काम किया है। वास्तव में काम करने का कमिटमेंट होना चाहिए, लोगों में काम करने की इच्छा होनी चाहिए, नया काम सीखना मुश्किल नहीं है।

संजय पुगलियाः  तो क्या आप प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए नए विभाग बनाएंगे और नए लोगों को सरकार में लाएंगे? नए मंत्रियों और नए विभाग की जरूरत पड़ेगी?

नरेंद्र मोदीः सरकार को वनडे की तर्ज पर काम करना होगा, गुजरात में हमने सिंगल विंडो क्लियरेंस के आधार पर काम किया है। गुजरात में वनडे गवर्नेंस मॉडल का प्रयोग किया है, टेक्नोलॉजी से तैयार 225 सेंटर बनाए गए हैं जहां कोई भी व्यक्ति सुबह अपना काम लेकर आता है और शाम को उसका काम हो जाता है।

संजय पुगलियाः तुरंत सरकार बनने के बाद आप रुके हुए प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देंगे, क्या बैंकों के एनपीए सुधारने का काम करेंगे, क्या नाकाबिल प्रमोटरों को बाहर करेंगे, फ्यूल लिंकेज के लिए कोल इंडिया के काम करने का तरीक बदल पाएंगे? क्या इस लिटमस टेस्ट को आपकी सरकार पास कर पाएगी?

नरेंद्र मोदीः देश के लिए जो काम करना होगा, उसमें कोई राजनीतिक दबाव बीच में नहीं आएगा और यही मेरी पहचान है। कोल इंडिया को क्या हम प्रोफेशनलाइज नहीं कर सकते हैं? आराम से कर सकते हैं। जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री बनकर आया तो गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड भारी घाटे में चल रहा था, लेकिन मैंनें इस तरह का प्रोफेशनल मैनेजमेंट बनाया और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन किया कि आज वो मुनाफे में है और 24 घंटे बिजली देता है। कंपनी की एफिशिएंसी भी बढ़ गई है। कोल इंडिया के मामले में भी ऐसा हो सकता है और मुझे इन मामलों का अच्छा अनुभव है।

संजय पुगलियाः भारत की राजनीति में क्रोनिलिज्म का शब्द सुनते हैं, यही सबसे बड़ा क्रोनिलिज्म पीएसयू कंपनियों के मामले में सुनते हैं, तो क्या आप कुछ बड़े संस्थानों का प्राइवेटाइजेशन करेंगे या नहीं?

नरेंद्र मोदीः इस तरह के फैसले भी राजनीतिक नहीं होने चाहिए बल्कि प्रोफेशनल होने चाहिए। इसके लिए प्रोफेशनल राय लेनी चाहिए। आज भी जो डूबे हुए पीएसयू हैं, अगर उनके कर्मचारियों को विश्वास में लेकर उन्हें ताकत दी जाए तो वो प्राइवेट संस्थानों से बेहतर काम करके दिखा सकते हैं। पीएसयू के कर्मचारियों की योग्यता पर संदेह नहीं करना चाहिए और उन पर भरोसा करना चाहिए।

संजय पुगलियाः आपके मेनिफेस्टो में एफडीआई रिटेल पर दोबारा विचार करने की बात करना और जीएसटी के लिए कोई तय तारीख नहीं देना सवाल पैदा करता है। इसके लिए भाजपा में विरोध रहा है इस बारे में आप क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः भाजपा हमेसा जीएसटी के पक्ष में रही है। जब प्रणव मुखर्जी वित्त मंत्री थे तो जीएसटी पर मेरी उनसे चर्चा हुई है।  जीएसटी की सफलता का आधार, संसद में इसपर क्या कानून लाते हैं इस पर निर्भर नहीं है। जीएसटी की सफलता आईटी नेटवर्क को मजबूत बनाने पर निर्भर करती है। जब तक आईटी नेटवर्क को सुदृढ़ नहीं बनाया जाएगा, जीएसटी कारगर नहीं होगा। भारत सरकार अब तक ऐसा नहीं कर पाई है। इसके अलावा भारत सरकार को जीएसटी के मुददे पर राज्यों को विश्वास में लेना होगा जो अभी तक नहीं हुआ है। राज्यों को जीएसटी से नुकसान नहीं होना चाहिए। राज्यों को नुकसान पहुंचाकर कोई भी कानून लाना फायदा नहीं करेगा। जीएसटी की जरूरत है हम ये मानते हैं लेकिन इसकी प्रकिया के बारे में चर्चा होनी चाहिए।

संजय पुगलियाः आपकी सरकार का पहले 100 दिन का एजेंडा क्या होगा?

नरेंद्र मोदीः ये शॉर्टकट वाली राजनीति का हिस्सा है और मीडिया ट्रेडर इस तरह की बात करते हैं। सरकार चलाना एक गंभीर काम है और इसी गंभारता से करना चाहिए। सरकार को मीडिया पब्लिसिटी वाले फैसले नहीं लेने चाहिए। सरकार की काम की समीक्षा 5 साल में होनी चाहिए। 100 दिन, 1 महीना, 1 साल के आधार पर सरकार के काम का हिसाब किताब नहीं करना चाहिए। ये बहुत बड़ा देश है और यहां काम करने में वक्त लगता है।

संजय पुगलियाः क्या पीएमओ का स्वरूप बदलेगा और इसे और मजबूत बनाया जाएगा या कैबिनेट की स्थित और मजबूत होगी?

नरेंद्र मोदीः भारत जैसे देश में केवल एक ऑफिस के बल पर काम नहीं किए जा सकते हैं। काम करने के लिए सत्ता का केवल एक केंद्र नहीं होना चाहिए और सबको मिलजुलकर काम करना चाहिए। जिम्मेदारियां बांटने से ही काम की गति बढ़ेगी। मेरे 14 साल के गुजरात के शासनकाल में मुझे कभी सेक्रेटरी को फोन करने की जरूरत नहीं पड़ी है। राज्य में सिस्टम है, विभाग हैं, मंत्री है और अधिकारी हैं जो अपना काम अपने आप कर लेते हैं।

संजय पुगलियाः पार्टी में बुजुर्ग लोग मार्गदर्शन करें ये तो ठीक हैं लेकिन सरकार में काम करने के लिए बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं की जरूरत है, आप क्या सोचते हैं?

नरेंद्र मोदीः देश के बुजर्ग लोग बेकार नहीं हैं और देश को चलाने के लिए अनुभव और ऊर्जा दोनों की जरूरत होती है। इन बातों को इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। देश समाज की सबकी शक्तियों के जरिए चलता है। कहीं अनुभव लगता है और कहीं शक्ति लगती है।

संजय पुगलियाः क्या हम ये माने कि आप ज्यादा से ज्यादा पैसे राज्यों के हाथ में देंगे और राज्यों को ज्यादा मजबूत बनाएंगे?

नरेंद्र मोदीः सरकार राज्यों को विश्वास में लेगी तभी अच्छी तरह काम होगा, देश में अभी भी 4 फीसदी से ज्यादा कृषि ग्रोथ नहीं है, तो क्या भारत सरकार कृषि करने जा सकती है। जो राज्य जिस क्षेत्र में अच्छे हैं उन्हें उस क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। राज्यों को पैसे देने में लचीलापन जरूरी है, राज्य के पास अगर सड़क अच्छी है और उसको पानी के लिए पूंजी चाहिए तो ये प्रावधान होना चाहिए कि उन्हें एक मद का पैसा दूसरे के लिए दिया जा सके। राज्य की खूबी देखकर उन्हें मदद मिलनी चाहिए।

संजय पुगलियाः अमेरिका के साथ भारत के संबंध अच्छे नहीं हैं, आप इसको किस तरह सुधार पाएंगें?

नरेंद्र मोदीः ग्लोबलाइजेशन के बाद विश्व के हालात बदल चुके हैं, कूटनीति के मायने बदल चुके हैं। आज मुख्य रूप से व्यापार, वाणिज्य और तकनीकी सपोर्ट के आसपास वैश्विक संबंध ज्यादातर बन रहे हैं। भारत के विषय में भी जो सबसे अच्छा होगा उसके लिए विश्व के अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित किए जाएंगे।

संजय पुगलियाः सब्सिडी को जारी रखने का मुद्दा चुनाव जीतने के लिए तो ठीक है, आपने भी फूड सिक्योरिटी की बात कही है, गरीबों के नाम पर भारी-भरकम खर्च करना ठीक है लेकिन क्या इस पैसे को देश के विकास में नहीं लगाना चाहिए?

नरेंद्र मोदीः देश के संसाधनों पर पहला हक गरीबों का है, हिंदुस्तान की तिजोरी पर गरीबों का हक है और हमेशा रहेगा। भाजपा की सोच ये है कि गरीबों और देश को गरीबी से बाहर निकाला जाए। सरकार की एप्रोच गरीब को गरीब रखने पर नहीं बल्कि सशक्त बनाने पर होगी। सरकार की नीतियां प्रो-पीपुल रहेंगी।

संजय पुगलियाः आपने मु्स्लिमों को अपनी तरफ रखने के लिए कई बयान दिए हैं, क्या आप चुनावों के इस दौर में मुस्लिमों को अपने साथ में रखने में कामयाब हो पाएंगे?

नरेंद्र मोदीः मैनें कभी जात-पात, धर्म-पंथ की राजनीति नहीं की है और आगे भी कभी नहीं करूंगा। पहले भी मैनें गुजरात में 6 करोड़ गुजराती के एक ही मंत्र पर काम किया है और अब 125 करोड़ भारतीयों के लिए मंत्र है। देश हिंदू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई के नाम पर राजनीति से तंग आ चुका है। अब देश में ऐसा नहीं चलेगा। अब युवा, किसान, गरीब, नौजवान, आरोग्य, शिक्षा, गरीब, गांव, शहर इसी तरह की बातों पर देश चलना चाहिए।

संजय पुगलियाः सोनिया गांधी अगर बुखारी से मिलती है तो उसे आपकी पार्टी राजनीति कहती है लेकिन राजनाथ सिंह कल्बे जव्वाद से मिले तो उसे सही ठहराती है, इस पर क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः हमने कभी किसी के मिलने पर आपत्ति नहीं उठाई। लेकिन उन्होंने कहा कि किसी खास धर्म को मिलकर किसी एक पार्टी के खिलाफ वोट करनी चाहिए इस पर भाजपा को आपत्ति है। लोकतंत्र में मिलना-जुलना जिम्मेवारी का हिस्सा है, इस पर कोई आपत्ति नहीं है। आप किस तरह का संदेश दे रहे हैं, ये महत्वपूर्ण है।

संजय पुगलियाः आप बनारस के मुस्लिम मतदाताओं से क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः मैं कभी भी किसी एक धर्म के नाम पर राजनीति करने का पाप नहीं करूंगा। मैं तोड़ने वाली राजनीति का शिकार नहीं होना चाहता, मुझे हार मंजूर है लेकिन वोट बैंक की राजनीति करना नहीं। मैं किसी भी जाति विशेष के लिए कुछ नहीं कहूंगा, जो कहूंगा देश के 125 करोड़ भारतीयों से कहूंगा। मुझे गुजरात में इसी आधार पर सफलता मिली है और भरोसा है कि देश में भी सफलता मिलेगी। मैं, हम सब एक हैं का मंत्र लेकर चलूंगा। हम सब देशवासी एक हैं और मैं कभी सेक्युलरिज्म की राजनीति नहीं करूंगा। सिर्फ अच्छा काम करने में मन लगा रहना चाहिए।

संजय पुगलियाः पहली बार मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए तैयार बैठा है, ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में इस तरह की सोच नहीं होनी चाहिए लेकिन इस सच्चाई पर आपका क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः जो लोग इस तरह की राजनीति करते हैं वो करते रहें, मैं जिस लाइन पर काम करता हूं उस पर करता रहूंगा।

संजय पुगलियाः इस वक्त बीजेपी की शीर्ष लीडरशिप में आप, राजनाथ सिंह और मोहन भागवत केंद्र में हैं, इस वक्तव्य पर आपका क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः जब जब कांग्रेस के बुरे दिन आते हैं वो इस तरह की बयानबाजी करती है और आरएसएस को गाली देने के लिए मैदान में उतर आती है। आरएसएस एक सांस्कृतिक, देश के लिए समर्पित संगठन है। विदेशी प्रभाव में रहने वाली न्यूज ट्रेडर्स ने आरएसएस के खिलाफ दुष्प्रचार किया है और आरएसएस का बहुत नुकसान किया है। आरएसएस देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाला संगठन है। आरएसएस के लोग अपना घरबार छोड़कर देश के उत्तरी-पूर्वी, दक्षिणी राज्यों में जाकर काम करते हैं। इस संगठन को सम्मान देना चाहिए। आरएसएस एक गैर सरकारी संगठन है जो देश के लिए अच्छा काम कर रहा है।

संजय पुगलियाः आपके बारे में कहा जा सकता है कि आप बीजेपी को आरएसएस के पास ले गए हैं, हाल ही में मैनें आरएसएस के एक नेता का इंटरव्यू किया जिन्होंने कहा कि 1977 के बाद आरएसएस पहली बार चुनावों में अभूतपूर्व ढंग से सक्रिय है। इस पर आप क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः आरएसएस के साथ चुनावों को लेकर कभी चर्चा नहीं हुई है। चुनाव को लेकर संघ से कभी कोई निर्देश नहीं आते हैं। हालांकि मैं आरएसएस से जुड़ा रहा हूं। मेरे जीवन पर आरआसएस का बहुत प्रभाव है। जीवन में संस्कार, स्वभाव, अनुशासन मेहनत करने की सीख आरएसएस से मिली है।

संजय पुगलियाः मीडिया को आप न्यूज ट्रेडर कहते हैं, इससे आपका क्या मतलब है और इसको आप कैसे समझाएंगे?

नरेंद्र मोदीः मैनें मीडिया पर कभी भी किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है। जिस तरह से कोर्ट के संबंध में कुछ भी बोलो तो कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट होता है लेकिन मीडिया में किसी नेता को कुछ भी गलत कहा जाता है और अगर उसके खिलाफ कुछ कहा जाए तो बहुत बड़ा बवाल हो जाता है। ये एक तरह का आतंकवाद चल रहा है जिसपर रोकथाम होनी चाहिए। हम राजनीति में है जिसे इसे भुगतना पड़ता है।

संजय पुगलियाः जितनी मीडिया स्क्रूटनी आपकी हुई है उतनी किसी भी नेता की नहीं हुई है और इसीलिए आपने एक ऐसी व्यवस्था बना ली है जिससे आपको मीडिया की जरूरत नहीं है। इस पर आपको क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः मैं मानता हूं कि मीडिया लोकतत्रं की बहुत बड़ी ताकत है और मीडिया की ताकत बढ़नी चाहिए। राजनीति ने मीडिया की इस धरोहर को बहुत नुकसान पहुंचाई है। जिस तरह राजनीति को सुधारने का काम राजनीतिज्ञों का है उसी तरह मीडिया को सुधारने का काम भी मीडिया वाले लोग ही कर सकते हैं। मीडिया की क्रेडिबिलिटी कैसे बढ़े, मीडिया को खुद इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

Courtesy: CNBC Awaaz

 

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"भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक होना चाहिए": पीएम मोदी ने तय किया 2047 का विजन
February 17, 2026

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, देश की राजधानी में शुरू हो चुका है। यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतने बड़े लेवल पर कोई ग्लोबल मीटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ANI की टेक्स्ट सर्विस को दिए एक खास इंटरव्यू में "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की थीम के तहत होने वाले इस समिट की गाइडिंग स्पिरिट पर जोर दिया। इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, मंत्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। वे इस बात पर चर्चा करेंगे कि AI का इस्तेमाल कैसे समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंटरव्यू में इस नए युग के लिए भारत के विजन पर जोर दिया और कहा कि AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज करना चाहिए। इंटरव्यू का पूरा विवरण इस प्रकार है:

ANI: भारत ग्लोबल साउथ में पहली बार AI इम्पैक्ट समिट 2026 होस्ट कर रहा है। समिट का मोटो है "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय"। इस समिट का विजन क्या है, और यह मोटो क्यों है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आज, AI एक सिविलाइज़ेशनल बदलाव के पॉइंट पर है। यह इंसानी काबिलियत को ऐसे तरीकों से बढ़ा सकता है जो पहले कभी नहीं हुए, लेकिन अगर इसे बिना गाइडेंस के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सोशल बुनियाद को भी टेस्ट कर सकता है। इसीलिए हमने जानबूझकर इस समिट को इम्पैक्ट के आस-पास बनाया है जो सिर्फ़ इनोवेशन ही नहीं, बल्कि सार्थक और बराबरी वाले नतीजे भी पक्का करता है। गाइड करने वाली भावना, "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय", भारत की सिविलाइज़ेशनल सोच को दिखाती है। टेक्नोलॉजी का आखिरी मकसद 'सबका भला, सबकी खुशी' होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, उसे बदलने के लिए नहीं। यह समिट लोगों, धरती और तरक्की के आस-पास बना है। AI सिस्टम दुनिया भर के समाजों में पैदा हुए ज्ञान और डेटा पर आधारित हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि AI के फायदे सभी तक पहुँचें, न कि सिर्फ़ शुरुआती अपनाने वाले ही इसे जमा करें। ग्लोबल साउथ में हो रहे पहले ग्लोबल AI समिट के तौर पर, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम रिप्रेजेंटेशन वाली आवाज़ों और डेवलपमेंट की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देता है। AI गवर्नेंस, इनक्लूसिव डेटासेट, क्लाइमेट एप्लीकेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी, पब्लिक हेल्थ और कई भाषाओं तक पहुँच हमारे लिए बाहरी मुद्दे नहीं हैं। वे सेंट्रल हैं। हमारा विज़न साफ़ है: AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज़ करना चाहिए।

ANI: आपने हमेशा एम्पावरमेंट और डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात की है। आप विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI, भारत के विकसिट भारत 2047 के सफ़र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मौका है। AI का विवेकपूर्ण, स्ट्रेटेजिक नज़रिए से इस्तेमाल करने से, पूरी तरह से नए आर्थिक मौके बनाने, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने, शहर-गांव के बीच की खाई को पाटने और मौकों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ विकास से जुड़ी गहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। हेल्थकेयर में, AI पहले से ही असर डाल रहा है। हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स पर ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं। एजुकेशन में, भारतीय भाषाओं में AI-पावर्ड पर्सनलाइज़्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, गांव और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को कस्टमाइज़्ड एकेडमिक सपोर्ट पाने में मदद कर रहे हैं। एक बहुत ही अनोखी पहल में, अमूल हज़ारों गांवों में 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, मवेशियों की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पर गुजराती में रियल-टाइम गाइडेंस दे रहा है, और ज़मीनी स्तर की महिला प्रोड्यूसर्स को मज़बूत बना रहा है। खेती में, भारत विस्तार पहल का मकसद AI को फसल सलाह, मिट्टी के एनालिटिक्स और मौसम की जानकारी में जोड़ना है, जिससे किसानों को बेहतर, लोकल फैसले लेने में मदद मिलेगी। विरासत को बचाने में भी, AI पुरानी किताबों के डिजिटाइज़ेशन और मतलब को मुमकिन बना रहा है, जिससे भारत के सभ्यता से जुड़े ज्ञान के सिस्टम खुल रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया AI से बढ़ती दूरियों को लेकर परेशान है, भारत इसका इस्तेमाल दूरियों को मिटाने के लिए कर रहा है। हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक को हेल्थकेयर, शिक्षा और आर्थिक मौके देने के लिए एक अच्छा टूल बना रहे हैं।

ANI: पेरिस में AI एक्शन समिट 2025 में अपनी स्पीच में, आपने AI के बायस और लिमिटेशन पर ज़ोर दिया था। अब से, क्या सिनेरियो बदला है? आप भारत को इस मुद्दे को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI में बायस और लिमिटेशन को लेकर चिंताएं बहुत ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे AI को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। AI सिस्टम अनजाने में जेंडर, भाषा और सोशियो-इकोनॉमिक बैकग्राउंड से जुड़े बायस को बढ़ावा दे सकते हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ ला रहा है और AI के बायस और लिमिटेशन जैसे मामलों पर ग्लोबल अवेयरनेस पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए ग्लोबल कोऑपरेशन की ज़रूरत है। खास तौर पर भारत के लिए, हम यूनिक चैलेंज और मौकों का सामना कर रहे हैं। हमारी डायवर्सिटी - लिंग्विस्टिक, कल्चरल, रीजनल - का मतलब है कि AI बायस ऐसे तरीकों से दिख सकता है जो वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में साफ़ न हों। एक AI सिस्टम जो मुख्य रूप से इंग्लिश डेटा या शहरी कॉन्टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है, वह रूरल यूज़र्स या रीजनल भाषाएं बोलने वालों के लिए खराब परफॉर्म कर सकता है। पॉजिटिव डेवलपमेंट यह है कि भारत इसे ज़्यादा सिस्टमैटिक तरीके से एड्रेस करना शुरू कर रहा है। हम ऐसे डायवर्स डेटासेट बनाने पर ज़्यादा फोकस देख रहे हैं जो भारत की प्लूरलिटी को दिखाते हैं, रीजनल भाषाओं में AI डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है, और इंडियन एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और टेक कंपनियों में फेयरनेस और बायस पर रिसर्च बढ़ रही है।

ANI: आधार और UPI जैसे कम लागत वाले डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में भारत की सफलता शानदार है। DPI और AI का मेल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को काफी बेहतर बना सकता है। इस बारे में भारत क्या सीख रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ को मदद मिल सके?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यात्रा ग्लोबल साउथ के लिए ज़रूरी और प्रैक्टिकल सबक देती है। DPI और AI का मिलना इनक्लूसिव डेवलपमेंट का अगला फ्रंटियर है। आधार, UPI और दूसरी डिजिटल पब्लिक चीज़ों के साथ हमारी सफलता अचानक नहीं हुई। यह कुछ ऐसे सिद्धांतों से आई जिन्हें दोहराया जा सकता है। सबसे पहले, हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक गुड के तौर पर बनाया, न कि किसी प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म के तौर पर। इस ओपन और इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर ने इनोवेशन को एक कॉमन बेस लेयर के ऊपर फलने-फूलने दिया। दूसरा, हमने पहले दिन से ही स्केल और इनक्लूजन के लिए डिज़ाइन किया। हमारे सिस्टम 1.4 बिलियन लोगों के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी सोशियो-इकोनॉमिक स्थिति, लिटरेसी लेवल, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो। जब AI को इस फाउंडेशन पर लेयर किया जाता है, तो गवर्नेंस कहीं ज़्यादा रिस्पॉन्सिव और एफिशिएंट बन सकता है। AI वेलफेयर टारगेटिंग को बेहतर बना सकता है, फ्रॉड का पता लगाने को मज़बूत कर सकता है, इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को इनेबल कर सकता है, अर्बन प्लानिंग को सपोर्ट कर सकता है, और पब्लिक सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ा सकता है। साथ ही, हम पूरे समाज में मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत डेटा प्राइवेसी प्रोटेक्शन, सोच-समझकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और AI लिटरेसी के महत्व को समझते हैं। ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के अपने अनुभव के साथ, भारत यह पक्का करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है कि AI के फायदे आखिरी छोर तक, गांवों में किसानों, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर्स, इनफॉर्मल वर्कर्स और ग्रामीण और शहरी भारत के युवाओं तक पहुंचें, और यह सिर्फ शहरी अमीर लोगों तक ही सीमित न रहे। टेक्नोलॉजी को हर नागरिक की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी इलाके, जेंडर या इनकम का हो। मकसद सिर्फ अपने फायदे के लिए AI को अपनाना नहीं है। यह AI ही है जो सच में नागरिकों को मजबूत बनाता है और 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनने की राह में तेजी लाता है, और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।

ANI: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है। हम दुनिया को एक बड़ी टेक वर्कफोर्स देते हैं। AI के दौर में हम इसे और कैसे बढ़ा सकते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत में AI पावरहाउस बनने के लिए टैलेंट और एंटरप्रेन्योर एनर्जी है, सिर्फ़ एक कंज्यूमर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक क्रिएटर के तौर पर भी। हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI सॉल्यूशन बना सकते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, गवर्नेंस को बेहतर बनाएंगे और नई नौकरियां पैदा करेंगे। मुझे भरोसा है कि हमारे युवा भारतीय हकीकत के लिए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हम अपने टैलेंटेड युवाओं की हर कोशिश को मज़बूत करने के लिए कमिटेड हैं ताकि AI इनोवेशन और इनक्लूजन के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर बन सके। यूनियन बजट 2026-27 इस विज़न को और मज़बूत करता है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट बढ़ाता है, जिससे घरेलू कंप्यूट कैपेसिटी मज़बूत होती है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्स तक एक्सेस के साथ सपोर्ट दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग के लिए लगातार कोशिश हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मज़बूत करती है। शॉर्ट में, हम सिर्फ़ टैलेंट को ही नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर उसे आकार देने तक के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस बना रहे हैं।

ANI: भारत में एक वाइब्रेंट IT सेक्टर है जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट में अहम योगदान दे रहा है। आप AI को हमारे IT सेक्टर पर कैसे असर डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत का IT सेक्टर हमारे सर्विस एक्सपोर्ट की रीढ़ और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक मुख्य ड्राइवर रहा है। AI इस सेक्टर के लिए एक ज़बरदस्त मौका और चुनौती दोनों पेश करता है। AI मार्केट के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक $400 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो AI-इनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन-स्पेसिफिक ऑटोमेशन की नई लहरों से प्रेरित है। बुनियादी बदलाव यह है कि AI IT सेक्टर की जगह नहीं ले रहा है। यह इसे बदल रहा है। जबकि जनरल-पर्पस AI टूल्स आम हो गए हैं, एंटरप्राइज़-ग्रेड AI को अपनाना अभी भी खास सेक्टर्स में ही केंद्रित है, और मौजूदा IT फर्म मुश्किल बिज़नेस समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक मज़बूत भारतीय AI इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, सरकार ने IndiaAI मिशन पर केंद्रित एक व्यापक रणनीति के साथ जवाब दिया है। हम पहले ही GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर चुके हैं और हम स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए वर्ल्ड-क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक सस्ती पहुँच प्रदान करने के लिए और अधिक करने के लिए कमिटेड हैं। हमने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और सस्टेनेबल शहरों में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और स्किलिंग के लिए पाँच नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं ताकि हमारे कर्मचारियों को इंडस्ट्री-संबंधित AI विशेषज्ञता से लैस किया जा सके। हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न सिर्फ़ सर्विस डिलीवरी में, बल्कि भारत और दुनिया के लिए काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफ़ॉर्म और सॉल्यूशन बनाने में भी लीड करे।

ANI: हमने AI के गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण देखे हैं। हम AI टेक्नोलॉजी के संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: टेक्नोलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह इंसानी इरादे के लिए सिर्फ़ एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर है। यह पक्का करना हम पर है कि यह अच्छे के लिए एक फ़ोर्स बने। AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन फ़ैसले लेने की आखिरी ज़िम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए। दुनिया भर में, समाज इस बात पर बहस कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल और उसे कैसे कंट्रोल किया जाना चाहिए। भारत यह दिखाकर इस बातचीत को आकार देने में मदद कर रहा है कि मज़बूत सेफ़गार्ड लगातार इनोवेशन के साथ-साथ रह सकते हैं। इसके लिए, हमें AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट की ज़रूरत है, जो कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर बना हो। इनमें असरदार इंसानी निगरानी, ​​सेफ़्टी-बाय-डिज़ाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफ़ेक, क्राइम और आतंकवादी गतिविधियों के लिए AI के इस्तेमाल पर सख़्त रोक शामिल होनी चाहिए। भारत AI रेगुलेशन में ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अप्रोच की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इंडियाAI सेफ़्टी इंस्टीट्यूट के लॉन्च के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड मैकेनिज़्म बनाया। जैसे-जैसे AI और एडवांस्ड होता जाएगा, हमारी ज़िम्मेदारी की भावना और मज़बूत होनी चाहिए। भारत के अप्रोच को जो बात खास बनाती है, वह है लोकल रिस्क और सामाजिक असलियत पर इसका फ़ोकस। नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं के साथ-साथ कमज़ोर ग्रुप्स को होने वाले नुकसान पर भी विचार करता है, जिसमें महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा के जोखिम और बुज़ुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल हैं। डीपफेक वीडियो में बढ़ोतरी के कारण इन सुरक्षा उपायों की ज़रूरत सभी को साफ़ हो रही है। इसके जवाब में, भारत ने AI से बने कंटेंट की वॉटरमार्किंग और नुकसानदायक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम नोटिफ़ाई किए। कंटेंट सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूज़र अधिकारों को मज़बूत करता है। भारत का कमिटमेंट ग्लोबल लेवल पर भी है। जैसे एविएशन और शिपिंग में बॉर्डर पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नियम हैं, वैसे ही दुनिया को AI में भी आम सिद्धांतों और स्टैंडर्ड्स की दिशा में काम करना चाहिए। चाहे 2023 GPAI डिक्लेरेशन में अपनी भूमिका के ज़रिए, पेरिस AI चर्चाओं में, या मौजूदा समिट में, भारत ने हमेशा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले #AIForAll के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हुए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के संतुलित रास्ते की वकालत की है।

ANI: युवाओं के कुछ हिस्से में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना मुश्किल होगा। भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: मैं जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों को लेकर हमारे युवाओं की चिंता समझता हूँ। तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे अभी की ज़रूरत मान रहे हैं। मैं AI को एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर के तौर पर देखता हूँ जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो हमने मुमकिन समझी थीं। यह डॉक्टरों, टीचरों और वकीलों को ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में मदद करेगा। इतिहास ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी की वजह से काम गायब नहीं होता। इसका नेचर बदलता है और नई तरह की नौकरियाँ बनती हैं। जहाँ कुछ नौकरियाँ फिर से तय हो सकती हैं, वहीं डिजिटल बदलाव भारत की इकोनॉमी में नई टेक नौकरियाँ भी जोड़ेगा। सदियों से, यह डर रहा है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल क्रांतियाँ नौकरियाँ खत्म कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी इनोवेशन होता है, नए मौके सामने आते हैं। AI के ज़माने में भी यही सच होगा। भारत इस बदलाव के हिसाब से ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में, भारत तीसरे नंबर पर रहा, जो AI R&D, टैलेंट और इकोनॉमी में मज़बूत ग्रोथ को दिखाता है। इनोवेशन को इनक्लूजन के साथ मिलाकर, हमें भरोसा है कि AI भारत के वर्कफोर्स को मज़बूत करेगा। सही स्किल्स और तैयारी के साथ, हमारे युवा काम के भविष्य को लीड करेंगे।

ANI: आपके नेतृत्व में, भारत ने 4G और 5G जैसी स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। आत्मनिर्भर भारत के लिए AI पर आपका क्या विजन है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा सफ़र एक बुनियादी उसूल पर बना है: भारत को सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे बनाना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत में AI के लिए मेरा विज़न तीन पिलर पर टिका है: सॉवरेनिटी, इनक्लूसिविटी और इनोवेशन। मेरा विज़न है कि भारत दुनिया भर में टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक हो, सिर्फ़ AI के इस्तेमाल में ही नहीं, बल्कि बनाने में भी। हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाएँगे, जो अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सर्विस देंगे। हमारे AI स्टार्टअप की वैल्यू सैकड़ों अरबों में होगी, जिससे लाखों हाई-क्वालिटी जॉब्स बनेंगी। हमारी AI-पावर्ड पब्लिक सर्विसेज़ की दुनिया भर में कुशल, बराबर गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क के तौर पर स्टडी की जाएगी। और सबसे ज़रूरी बात, हर भारतीय AI को मौके देने वाला, काबिलियत बढ़ाने वाला और इंसानी गरिमा का सेवक समझेगा, न कि अपनी आजीविका के लिए खतरा या कंट्रोल का ज़रिया। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना कोड खुद लिखे, और IndiaAI मिशन के ज़रिए, हम यह पक्का कर रहे हैं कि वह कोड हमारी वैल्यूज को दिखाए, हमारे लोगों की सेवा करे, और भारत को दुनिया के लिए एक रेसपॉन्सिबल AI लीडर बनाए।

स्रोत: ANI News