The poor have the first right on resources: Narendra Modi

Published By : Admin | April 19, 2014 | 16:43 IST
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Excerpts of Shri Narendra Modi’s interview to CNBC Awaaz

आइये देखते हैं कि CNBC आवाज़ संपादक संजय पुगलिया के सवालों का जवाब नरेंद्र मोदी ने किस तरह दिया है।

संजय पुगलियाः आपने देश की जनता से कहा है कि जो काम 60 साल में नहीं हुआ वो आप 60 महीनों में कर सकते हैं, क्या आप को नहीं लगता है कि आपने बहुत बड़े-बड़े कमिटमेंट कर दिए हैं और इन कामों को करने के लिए आपके सामने बहुत बड़ी चुनौती होगी?

नरेंद्र मोदी: देश की जनता की अपेक्षाएं बहुत हैं, मैं इससे सहमत हूं। अपेक्षाओं का मूल कारण ये है कि देश के सामान्य नागरिकों के सपने चूर चूर हो गए हैं। इन दिनों मैं सारे देश में भ्रमण करता हूं और मैं पहले भी करता था। शायद हिंदुस्तान के इतिहास में मैं अकेला राजनीतिज्ञ हूं जिसे देश के 400 जिलों में जाने और बातचीत करने का सौभाग्य मिला है। हालांकि पिछले 12-15 सालों में मैं गुजरात की राजनीति में उलझा हुआ था। अब जब मैं दोबारा उन जिलों में गया हूं तो कोई ऐसा जिला नहीं है जिसने मुझे पीने के पानी की समस्या को लेकर शिकायत नहीं की हो। इस बात से मैं काफी परेशान हुआ कि क्या आजादी के बाद हम लोगों को पीने का पानी नहीं दे पाए हैं। ये बातें हैं जिसने लोगों की अपेक्षाएं काफी बढ़ा दीं हैं और मैं मानता हूं कि जनता का दबाव बना रहना चाहिए। देश में अच्छा करने, अच्छा पाने के लिए जनता का दबाव बना रहना चाहिए। इसी के बाद बाकी सब नेता और सरकारें जनता की भलाई करने का कदम उठाएंगे।

संजय पुगलियाः देश की स्थिति इस वक्त बहुत खराब है आपको लगातार काम करना होगा, आपकी टीम या कैबिनेट बनाने का आधार क्या होगा, खासकर आर्थिक मोर्चे पर काफी काम करना होगा, वहीं गठबंधन की राजनीति में कुछ काम दबाव के चलते नहीं हो पाते हैं तो आपकी सरकार का आधार क्या होगा और देश की आर्थिक स्थिति के लिए आपकी क्या योजना है?

नरेंद्र मोदी: संजय बारू की किताब मैनें पूरी नहीं पढ़ी है लेकिन जितनी भी पढ़ी है उसके आधार पर यही लगता है कि प्रधानमंत्री को छोटे-छोटे दलों की बजाए एक परिवार का दबाव बहुत था। दूसरी बात है कि गठबंधन की सरकार हो या ना हो, या पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो, सरकार को क्षेत्रीय परिस्थितियों को समझना ही होगा। देश की सरकार को एक जगह से चलाने की जो प्रवृति है उसे बदलना होगा। प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो एक समय में कांग्रेस की केंद्र और राज्यों दोनों जगह सरकारें होती थी। लेकिन बाद में समय बदला और राज्यों में अलग पार्टियों की सरकारें आईं जिसे कांग्रेस ने ठीक नहीं समझा। इसके कारण राज्यों में माहौल बिगड़ गया। केंद्र में बैठने वाली सरकार की सोच होनी चाहिए-टीम इंडिया। पहली बार देश की राजनीति के केंद्र में ऐसा व्यक्ति आया है जिसे राज्य चलाने का लंबा अनुभव है और केंद्र से उसे क्या दिक्कतें होती हैं, राज्यों की क्या समस्याएं हैं उसे वो समझता है। टीम इंडिया का मतलब है राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री। इस टीम के काम करने के बाद आप देखिए देश कितनी जल्दी बदलना शुरू हो जाएगा।

संजय पुगलियाः ये एक बहुत नया सुझाव है और बहुत इस पर चर्चा कर रहे हैं कि ये कैसे होगा? क्या आप एक पॉलिटिकल बॉडी बनाएंगे जो इस टीम इंडिया का हिस्सा होगी? क्या इसके फैसले केंद्रीय मंत्रिमंडल लागू करेगा? क्या आप इसको एक राजनीतिक परामर्श दल बनाएंगे?

नरेंद्र मोदी: आजकल देश में संवाद और संचार ही नहीं हो रहा है, शासन में चिट्ठी-पत्री के जरिए काम हो रहा है। जो टीम इंडिया का मॉडल हम सोच रहे हैं ये एक पारिवारिक माहौल होगा जिसमें सब मिलकर अपने अपने सुझाव रखेंगे। सभी राज्य और केंद्र मिलकर हम एक परिवार हैं। केंद्र कोई आदेश दे दे और राज्य इसे मानें, सत्ता का केवल एक केंद्र बन जाए, इस तरह की संस्कृति अब नहीं चलेगी।

संजय पुगलियाः क्या आप गठबंधन की राजनीति के दबाव में आकर महत्वपूर्ण मंत्रालय जैसे आर्थिक मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय के ऊपर कोई समझौता करेंगे?

नरेंद्र मोदीः कौन सा मंत्रालय किस पार्टी के पास जाएगा, इस के विषय में अभी चर्चा करना बहुत जल्दबाजी होगी। अभी मंत्रालयों पर चर्चा करना ठीक नहीं। भाजपा के मेनिफेस्टो के मुताबिक क्या सोचा गया है, इसे जानना चाहिए। भारत के विकास में रेलवे विभाग बहुत महत्वपूर्ण पहलू है, हमने रेलवे को केवल पैसेंजर सेवा का माध्यम मान लिया है। हमें रेलवे को देश का ग्रोथ इंजन बनाना होगा। रेलवे की ऐसी व्यवस्था है जो राज्य और केंद्र के विकास को जोड़ने का बड़ा माध्यम बन सकता है। इस विभाग पर कई पार्टियों के दबाव रहते हैं। रेलवे में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है। रेलवे को टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन की आवश्यकता है। अगर हम सुपर कंप्यूटर की मदद से रेलवे के नेटवर्क का इस्तेमाल कर पाएं तो हम विश्व को बहुत बड़ी ताकत दे सकते हैं।

संजय पुगलियाः इसी पर लोगों को संदेह है कि क्या बीजेपी के पास इस तरह के काम करने के लिए पर्याप्त अनुभवी लोगों की टीम है, बीजेपी को इस तरह के काम करने के लिए बाहर से भी लोग लेने होंगें?

नरेंद्र मोदीः भाजपा की जहां भी सरकार हैं वहां सर्वश्रेष्ठ काम किया गया है, एनडीए की सरकार ने शानदार काम किया है। वास्तव में काम करने का कमिटमेंट होना चाहिए, लोगों में काम करने की इच्छा होनी चाहिए, नया काम सीखना मुश्किल नहीं है।

संजय पुगलियाः  तो क्या आप प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए नए विभाग बनाएंगे और नए लोगों को सरकार में लाएंगे? नए मंत्रियों और नए विभाग की जरूरत पड़ेगी?

नरेंद्र मोदीः सरकार को वनडे की तर्ज पर काम करना होगा, गुजरात में हमने सिंगल विंडो क्लियरेंस के आधार पर काम किया है। गुजरात में वनडे गवर्नेंस मॉडल का प्रयोग किया है, टेक्नोलॉजी से तैयार 225 सेंटर बनाए गए हैं जहां कोई भी व्यक्ति सुबह अपना काम लेकर आता है और शाम को उसका काम हो जाता है।

संजय पुगलियाः तुरंत सरकार बनने के बाद आप रुके हुए प्रोजेक्ट को जल्द मंजूरी देंगे, क्या बैंकों के एनपीए सुधारने का काम करेंगे, क्या नाकाबिल प्रमोटरों को बाहर करेंगे, फ्यूल लिंकेज के लिए कोल इंडिया के काम करने का तरीक बदल पाएंगे? क्या इस लिटमस टेस्ट को आपकी सरकार पास कर पाएगी?

नरेंद्र मोदीः देश के लिए जो काम करना होगा, उसमें कोई राजनीतिक दबाव बीच में नहीं आएगा और यही मेरी पहचान है। कोल इंडिया को क्या हम प्रोफेशनलाइज नहीं कर सकते हैं? आराम से कर सकते हैं। जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री बनकर आया तो गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड भारी घाटे में चल रहा था, लेकिन मैंनें इस तरह का प्रोफेशनल मैनेजमेंट बनाया और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन किया कि आज वो मुनाफे में है और 24 घंटे बिजली देता है। कंपनी की एफिशिएंसी भी बढ़ गई है। कोल इंडिया के मामले में भी ऐसा हो सकता है और मुझे इन मामलों का अच्छा अनुभव है।

संजय पुगलियाः भारत की राजनीति में क्रोनिलिज्म का शब्द सुनते हैं, यही सबसे बड़ा क्रोनिलिज्म पीएसयू कंपनियों के मामले में सुनते हैं, तो क्या आप कुछ बड़े संस्थानों का प्राइवेटाइजेशन करेंगे या नहीं?

नरेंद्र मोदीः इस तरह के फैसले भी राजनीतिक नहीं होने चाहिए बल्कि प्रोफेशनल होने चाहिए। इसके लिए प्रोफेशनल राय लेनी चाहिए। आज भी जो डूबे हुए पीएसयू हैं, अगर उनके कर्मचारियों को विश्वास में लेकर उन्हें ताकत दी जाए तो वो प्राइवेट संस्थानों से बेहतर काम करके दिखा सकते हैं। पीएसयू के कर्मचारियों की योग्यता पर संदेह नहीं करना चाहिए और उन पर भरोसा करना चाहिए।

संजय पुगलियाः आपके मेनिफेस्टो में एफडीआई रिटेल पर दोबारा विचार करने की बात करना और जीएसटी के लिए कोई तय तारीख नहीं देना सवाल पैदा करता है। इसके लिए भाजपा में विरोध रहा है इस बारे में आप क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः भाजपा हमेसा जीएसटी के पक्ष में रही है। जब प्रणव मुखर्जी वित्त मंत्री थे तो जीएसटी पर मेरी उनसे चर्चा हुई है।  जीएसटी की सफलता का आधार, संसद में इसपर क्या कानून लाते हैं इस पर निर्भर नहीं है। जीएसटी की सफलता आईटी नेटवर्क को मजबूत बनाने पर निर्भर करती है। जब तक आईटी नेटवर्क को सुदृढ़ नहीं बनाया जाएगा, जीएसटी कारगर नहीं होगा। भारत सरकार अब तक ऐसा नहीं कर पाई है। इसके अलावा भारत सरकार को जीएसटी के मुददे पर राज्यों को विश्वास में लेना होगा जो अभी तक नहीं हुआ है। राज्यों को जीएसटी से नुकसान नहीं होना चाहिए। राज्यों को नुकसान पहुंचाकर कोई भी कानून लाना फायदा नहीं करेगा। जीएसटी की जरूरत है हम ये मानते हैं लेकिन इसकी प्रकिया के बारे में चर्चा होनी चाहिए।

संजय पुगलियाः आपकी सरकार का पहले 100 दिन का एजेंडा क्या होगा?

नरेंद्र मोदीः ये शॉर्टकट वाली राजनीति का हिस्सा है और मीडिया ट्रेडर इस तरह की बात करते हैं। सरकार चलाना एक गंभीर काम है और इसी गंभारता से करना चाहिए। सरकार को मीडिया पब्लिसिटी वाले फैसले नहीं लेने चाहिए। सरकार की काम की समीक्षा 5 साल में होनी चाहिए। 100 दिन, 1 महीना, 1 साल के आधार पर सरकार के काम का हिसाब किताब नहीं करना चाहिए। ये बहुत बड़ा देश है और यहां काम करने में वक्त लगता है।

संजय पुगलियाः क्या पीएमओ का स्वरूप बदलेगा और इसे और मजबूत बनाया जाएगा या कैबिनेट की स्थित और मजबूत होगी?

नरेंद्र मोदीः भारत जैसे देश में केवल एक ऑफिस के बल पर काम नहीं किए जा सकते हैं। काम करने के लिए सत्ता का केवल एक केंद्र नहीं होना चाहिए और सबको मिलजुलकर काम करना चाहिए। जिम्मेदारियां बांटने से ही काम की गति बढ़ेगी। मेरे 14 साल के गुजरात के शासनकाल में मुझे कभी सेक्रेटरी को फोन करने की जरूरत नहीं पड़ी है। राज्य में सिस्टम है, विभाग हैं, मंत्री है और अधिकारी हैं जो अपना काम अपने आप कर लेते हैं।

संजय पुगलियाः पार्टी में बुजुर्ग लोग मार्गदर्शन करें ये तो ठीक हैं लेकिन सरकार में काम करने के लिए बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं की जरूरत है, आप क्या सोचते हैं?

नरेंद्र मोदीः देश के बुजर्ग लोग बेकार नहीं हैं और देश को चलाने के लिए अनुभव और ऊर्जा दोनों की जरूरत होती है। इन बातों को इस आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। देश समाज की सबकी शक्तियों के जरिए चलता है। कहीं अनुभव लगता है और कहीं शक्ति लगती है।

संजय पुगलियाः क्या हम ये माने कि आप ज्यादा से ज्यादा पैसे राज्यों के हाथ में देंगे और राज्यों को ज्यादा मजबूत बनाएंगे?

नरेंद्र मोदीः सरकार राज्यों को विश्वास में लेगी तभी अच्छी तरह काम होगा, देश में अभी भी 4 फीसदी से ज्यादा कृषि ग्रोथ नहीं है, तो क्या भारत सरकार कृषि करने जा सकती है। जो राज्य जिस क्षेत्र में अच्छे हैं उन्हें उस क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। राज्यों को पैसे देने में लचीलापन जरूरी है, राज्य के पास अगर सड़क अच्छी है और उसको पानी के लिए पूंजी चाहिए तो ये प्रावधान होना चाहिए कि उन्हें एक मद का पैसा दूसरे के लिए दिया जा सके। राज्य की खूबी देखकर उन्हें मदद मिलनी चाहिए।

संजय पुगलियाः अमेरिका के साथ भारत के संबंध अच्छे नहीं हैं, आप इसको किस तरह सुधार पाएंगें?

नरेंद्र मोदीः ग्लोबलाइजेशन के बाद विश्व के हालात बदल चुके हैं, कूटनीति के मायने बदल चुके हैं। आज मुख्य रूप से व्यापार, वाणिज्य और तकनीकी सपोर्ट के आसपास वैश्विक संबंध ज्यादातर बन रहे हैं। भारत के विषय में भी जो सबसे अच्छा होगा उसके लिए विश्व के अन्य देशों के साथ संबंध स्थापित किए जाएंगे।

संजय पुगलियाः सब्सिडी को जारी रखने का मुद्दा चुनाव जीतने के लिए तो ठीक है, आपने भी फूड सिक्योरिटी की बात कही है, गरीबों के नाम पर भारी-भरकम खर्च करना ठीक है लेकिन क्या इस पैसे को देश के विकास में नहीं लगाना चाहिए?

नरेंद्र मोदीः देश के संसाधनों पर पहला हक गरीबों का है, हिंदुस्तान की तिजोरी पर गरीबों का हक है और हमेशा रहेगा। भाजपा की सोच ये है कि गरीबों और देश को गरीबी से बाहर निकाला जाए। सरकार की एप्रोच गरीब को गरीब रखने पर नहीं बल्कि सशक्त बनाने पर होगी। सरकार की नीतियां प्रो-पीपुल रहेंगी।

संजय पुगलियाः आपने मु्स्लिमों को अपनी तरफ रखने के लिए कई बयान दिए हैं, क्या आप चुनावों के इस दौर में मुस्लिमों को अपने साथ में रखने में कामयाब हो पाएंगे?

नरेंद्र मोदीः मैनें कभी जात-पात, धर्म-पंथ की राजनीति नहीं की है और आगे भी कभी नहीं करूंगा। पहले भी मैनें गुजरात में 6 करोड़ गुजराती के एक ही मंत्र पर काम किया है और अब 125 करोड़ भारतीयों के लिए मंत्र है। देश हिंदू, मुसलमान, सिक्ख, ईसाई के नाम पर राजनीति से तंग आ चुका है। अब देश में ऐसा नहीं चलेगा। अब युवा, किसान, गरीब, नौजवान, आरोग्य, शिक्षा, गरीब, गांव, शहर इसी तरह की बातों पर देश चलना चाहिए।

संजय पुगलियाः सोनिया गांधी अगर बुखारी से मिलती है तो उसे आपकी पार्टी राजनीति कहती है लेकिन राजनाथ सिंह कल्बे जव्वाद से मिले तो उसे सही ठहराती है, इस पर क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः हमने कभी किसी के मिलने पर आपत्ति नहीं उठाई। लेकिन उन्होंने कहा कि किसी खास धर्म को मिलकर किसी एक पार्टी के खिलाफ वोट करनी चाहिए इस पर भाजपा को आपत्ति है। लोकतंत्र में मिलना-जुलना जिम्मेवारी का हिस्सा है, इस पर कोई आपत्ति नहीं है। आप किस तरह का संदेश दे रहे हैं, ये महत्वपूर्ण है।

संजय पुगलियाः आप बनारस के मुस्लिम मतदाताओं से क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः मैं कभी भी किसी एक धर्म के नाम पर राजनीति करने का पाप नहीं करूंगा। मैं तोड़ने वाली राजनीति का शिकार नहीं होना चाहता, मुझे हार मंजूर है लेकिन वोट बैंक की राजनीति करना नहीं। मैं किसी भी जाति विशेष के लिए कुछ नहीं कहूंगा, जो कहूंगा देश के 125 करोड़ भारतीयों से कहूंगा। मुझे गुजरात में इसी आधार पर सफलता मिली है और भरोसा है कि देश में भी सफलता मिलेगी। मैं, हम सब एक हैं का मंत्र लेकर चलूंगा। हम सब देशवासी एक हैं और मैं कभी सेक्युलरिज्म की राजनीति नहीं करूंगा। सिर्फ अच्छा काम करने में मन लगा रहना चाहिए।

संजय पुगलियाः पहली बार मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए तैयार बैठा है, ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में इस तरह की सोच नहीं होनी चाहिए लेकिन इस सच्चाई पर आपका क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः जो लोग इस तरह की राजनीति करते हैं वो करते रहें, मैं जिस लाइन पर काम करता हूं उस पर करता रहूंगा।

संजय पुगलियाः इस वक्त बीजेपी की शीर्ष लीडरशिप में आप, राजनाथ सिंह और मोहन भागवत केंद्र में हैं, इस वक्तव्य पर आपका क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः जब जब कांग्रेस के बुरे दिन आते हैं वो इस तरह की बयानबाजी करती है और आरएसएस को गाली देने के लिए मैदान में उतर आती है। आरएसएस एक सांस्कृतिक, देश के लिए समर्पित संगठन है। विदेशी प्रभाव में रहने वाली न्यूज ट्रेडर्स ने आरएसएस के खिलाफ दुष्प्रचार किया है और आरएसएस का बहुत नुकसान किया है। आरएसएस देश के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने वाला संगठन है। आरएसएस के लोग अपना घरबार छोड़कर देश के उत्तरी-पूर्वी, दक्षिणी राज्यों में जाकर काम करते हैं। इस संगठन को सम्मान देना चाहिए। आरएसएस एक गैर सरकारी संगठन है जो देश के लिए अच्छा काम कर रहा है।

संजय पुगलियाः आपके बारे में कहा जा सकता है कि आप बीजेपी को आरएसएस के पास ले गए हैं, हाल ही में मैनें आरएसएस के एक नेता का इंटरव्यू किया जिन्होंने कहा कि 1977 के बाद आरएसएस पहली बार चुनावों में अभूतपूर्व ढंग से सक्रिय है। इस पर आप क्या कहेंगे?

नरेंद्र मोदीः आरएसएस के साथ चुनावों को लेकर कभी चर्चा नहीं हुई है। चुनाव को लेकर संघ से कभी कोई निर्देश नहीं आते हैं। हालांकि मैं आरएसएस से जुड़ा रहा हूं। मेरे जीवन पर आरआसएस का बहुत प्रभाव है। जीवन में संस्कार, स्वभाव, अनुशासन मेहनत करने की सीख आरएसएस से मिली है।

संजय पुगलियाः मीडिया को आप न्यूज ट्रेडर कहते हैं, इससे आपका क्या मतलब है और इसको आप कैसे समझाएंगे?

नरेंद्र मोदीः मैनें मीडिया पर कभी भी किसी तरह की टिप्पणी नहीं की है। जिस तरह से कोर्ट के संबंध में कुछ भी बोलो तो कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट होता है लेकिन मीडिया में किसी नेता को कुछ भी गलत कहा जाता है और अगर उसके खिलाफ कुछ कहा जाए तो बहुत बड़ा बवाल हो जाता है। ये एक तरह का आतंकवाद चल रहा है जिसपर रोकथाम होनी चाहिए। हम राजनीति में है जिसे इसे भुगतना पड़ता है।

संजय पुगलियाः जितनी मीडिया स्क्रूटनी आपकी हुई है उतनी किसी भी नेता की नहीं हुई है और इसीलिए आपने एक ऐसी व्यवस्था बना ली है जिससे आपको मीडिया की जरूरत नहीं है। इस पर आपको क्या कहना है?

नरेंद्र मोदीः मैं मानता हूं कि मीडिया लोकतत्रं की बहुत बड़ी ताकत है और मीडिया की ताकत बढ़नी चाहिए। राजनीति ने मीडिया की इस धरोहर को बहुत नुकसान पहुंचाई है। जिस तरह राजनीति को सुधारने का काम राजनीतिज्ञों का है उसी तरह मीडिया को सुधारने का काम भी मीडिया वाले लोग ही कर सकते हैं। मीडिया की क्रेडिबिलिटी कैसे बढ़े, मीडिया को खुद इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

Courtesy: CNBC Awaaz

 

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अमर उजाला से विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले : सरकारी योजनाओं के लाभार्थी सियासत का हिस्सा नहीं... वे विकास योद्धा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमर उजाला से खास बातचीत में यूपी-पंजाब सहित पांच प्रदेशों में चुनाव के साथ देश में शिक्षा की हालत, चिकित्सा शिक्षा के विकास, रोजगार वृद्धि और यूक्रेन में युद्ध से पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में जीत के साथ पहली बार 2024 के भावी लोकसभा चुनाव में भी विकास को मुद्दा बताते हुए जीत का दावा किया। डॉ. इंदुशेखर पंचोली से बातचीत में प्रमुख मुद्दों, प्रश्नों और विषयों पर जानिये प्रधानमंत्री की राय...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का वर्ग चुनावी सियासत या लाभ-हानि का हिस्सा नहीं है। ये समूह दरअसल विकास योद्धा हैं, जो अपनी बुनियादी जरूरतों से आगे बढ़कर देश के विकास में दमखम दिखाने को तैयार हैं। इससे देश को जो लाभ मिलने वाला है, वह कल्पना से परे है। यह सत्ता में दशकों तक बैठे लोगों को आईना भी दिखाने वाला है। पीएम ने कहा, लोग चौथी बार जातिवाद-परिवारवाद से ऊपर उठकर अब विकासवाद व राष्ट्रवाद के नाम पर वोट कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव में सकारात्मक नतीजों के प्रति आशान्वित पीएम मोदी ने आखिरी चरण के मतदान से पहले ‘अमर उजाला’ से शनिवार को खास बातचीत की। प्रधानमंत्री यूपी चुनाव को अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी और समीकरणों के तौर पर नहीं देखते। मोदी ने कहा, चुनाव रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का विजन सामने रखने का माध्यम होता है। जन कल्याण के लिए काम करने वालों के लिए अगले चुनाव की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वे पिछला चुनाव जीतते हैं।

पीएम ने कहा, चुनाव गुणा-भाग नहीं, बल्कि जनता के बीच आपकी केमिस्ट्री से चलते हैं। ऐसी केमिस्ट्री जहां लोग प्रगति के लिए उत्सुक हैं और सरकार उनकी सेवा करने के लिए। ऐसी केमिस्ट्री जो लोगों को एक बेहतर कल के लिए एकसाथ लाती है। उन्होंने कहा, यूपी या पंजाब नहीं, सभी राज्य एक ही धागे से जुड़े हैं। सबकी आंखों में सपने हैं। इसलिए वे एक सकारात्मक राजनीति की ओर देख रहे हैं, जो प्रगति और विजन पर केंद्रित हो, परिवारवाद या विभाजन पर नहीं।

पहले डीबीटी का मतलब था डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली, अब सीधा जनता तक लाभ पहुंच रहा है। आकांक्षा की राजनीति की ओर यह रुझान 2014 से पूरे देश में देखा गया है। ये 2019 के बाद और भी मजबूत हो गया है। लोगों ने देखा कि संकट के समय में विकास-केंद्रित सरकार कितनी महत्वपूर्ण होती है। यही रुझान अब आपको हर चुनाव में दिखाई दे रहा है और आगे भी दिखाई देगा।

70 वर्षों में जितने डॉक्टर तैयार हुए उतने अब अगले 10 वर्षों में ही बनेंगे
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 2014 तक देश में लगभग 385 मेडिकल कॉलेज थे। अब इनकी संख्या 600 से ज्यादा है। पहली बार निजी से ज्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेज हो गए। आजादी के बाद के 70 वर्षों में जितने डॉक्टर देश में तैयार हुए, उतने डॉक्टर अब अगले 10 वर्षों में बनेंगे।

ऑपरेशन गंगा : कई देशों की सरकारों से तालमेल
मोदी बोले, ऑपरेशन गंगा के तहत भारत सरकार कई देशों की सरकारों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रही है। मैंने भी कई राष्ट्राध्यक्षों से बात की है और उन्हें कहा कि भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

युवाओं के लिए भविष्य में और अधिक होंगे अवसर
पीएम मोदी ने कहा कि काम मांगने वाले हों या काम देने वाले, दोनों के लिए ही भारत की अर्थव्यवस्था ढेरों अवसर पैदा कर रही है। हम सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। निकट भविष्य में युवाओं के लिए अवसर और ज्यादा बनने वाले हैं।

सभी लोग चाहते हैं कि उनके राज्य का हो विकास
सभी लोग चाहते हैं कि उनके राज्य का विकास हो। वे सभी अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की कामना कर रहे हैं। इसलिए जाति, धर्म, वंशवाद की राजनीति करने वाले दलों को जनता लगातार कमजोर कर रही है। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

जातिवाद-परिवारवाद पर भारी विकास की रफ्तार... इसी से बनेगी निर्णायक सरकार

हमारे ईमानदार प्रयासों से यूपी के लोगों में एक नया विश्वास जगा
डबल इंजन की सरकार का फायदा लोग समझने लगे हैं। डबल इंजन की सरकार की तेज गति के आगे घोर परिवारवादियों की सरकारों की सुस्त चाल कहीं टिक नहीं सकती।

आपने यूपी में प्रत्येक चरण के चुनाव में रैलियां की हैं, अब इस रण के आखिरी चरण पर पहुंच कर क्या तस्वीर देख रहे हैं?
मैं सबसे पहले यूपी के लोगों का, हमारी माताओं-बहनों-बेटियों और नौजवानों-किसानों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। छह चरणों में ही उन्होंने भाजपा और सहयोगी दलों की प्रचंड बहुमत वाली सरकार सुनिश्चित कर दी है। अपना भाई, बेटा, साथी मानकर उन्होंने हमें खूब आशीर्वाद दिया है। भाजपा पहले जैसी मजबूत और निर्णायक सरकार बनाएगी। लोग चौथी बार लगातार जातिवाद-परिवारवाद से ऊपर उठकर विकासवाद और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में योगी जी के नेतृत्व में कानून का राज स्थापित हुआ है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार का फायदा लोग समझने लगे हैं। चाहे गरीबों को घर, गैस कनेक्शन, बिजली, नल से जल देना हो या नई सड़कों व नए हाईवे का निर्माण, डबल इंजन की सरकार की तेज गति के आगे, घोर परिवारवादियों की सरकारों की सुस्त चाल कहीं टिक नहीं सकती। वैश्विक महामारी के इस दौर में पिछले 2 साल से यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

इतनी बड़ी आबादी वाले प्रदेश में हमने अभूतपूर्व तेजी से टीकाकरण किया। टीके के सुरक्षा कवच की वजह से स्कूल-कॉलेज खुले हैं और व्यापार-कारोबार में भी तेजी आई है। भाजपा सरकार के ईमानदार प्रयासों की वजह से यूपी के लोगों में एक नया विश्वास पैदा हुआ है। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक हर क्षेत्र में विकास के हमारे कार्यों की जनता सराहना कर रही है। 10 मार्च के बाद भाजपा सरकार, इन कार्यों को और तेजी से आगे बढ़ाएगी। पहले डीबीटी का मतलब होता था डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लोग हमें दोबारा अवसर देना चाहते हैं। पंजाब के मेरे भाई-बहन वहां की भ्रष्ट, परिवारवादी और नाकाम सरकारों से त्रस्त हो चुके हैं।

पंजाब, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में भी आपने रैलियां की हैं, आपका क्या आकलन है ?

देखिए, भाजपा की सरकार, चाहे किसी राज्य में हो, लोगों की सेवा की भावना से काम करती है। गरीबों व मध्य वर्ग का जीवन आसान बने, व्यापार-कारोबार और निवेश के लिए उचित वातावरण रहे, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर के भी लोग पहले की सरकारों के रवैये और हमारी सरकार की कार्यसंस्कृति के फर्क को साफ महसूस करते हैं। भाजपा की सरकारों ने आगे बढ़कर गरीबों को समस्त विकास योजनाओं का फायदा पहुंचाया है। पहले की सरकारों के लिए डीबीटी का मतलब होता था, डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली।

हमारी सरकार ने डीबीटी को डायरेक्ट बेनिफिट टु पीपल बनाया। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, सरकार की योजनाओं का लाभ, बिना लीकेज सीधे लोगों के बैंक खातों में जा रहा है। वे लोग टेक्नोलॉजी को तोड़-मरोड़ कर, अनेकों फर्जी कंपनियां तैयार कर, अनेकों कागजी लोग बनाकर, जनता का पैसा लूटते थे। हमारी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करके लोगों को उनका वाजिब हक मिले। यह एक बड़ी वजह है कि लोगों में जातिवादी और परिवारवादी नेताओं पर आश्रित रहने की भावना खत्म होने लगी है।

अब हर जगह विकास, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के मुद्दे को जगह मिलने लगी है। उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लोगों ने हमारे इन सब कार्यों को देखा है, इसलिए वे सब हमें सेवा का दोबारा अवसर देना चाहते हैं। पंजाब के मेरे भाई-बहन अब वहां की भ्रष्ट, परिवारवादी और नाकाम सरकारों से त्रस्त हो चुके हैं। उनमें बदलाव की गहरी इच्छा दिखी है। वे भाजपा को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

यूपी का हर व्यक्ति इस बात का गर्व करता है कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश के विकास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है

आप बार-बार कह रहे हैं, जीतेंगे तो योगी ही, आपने कहा, यूपी प्लस योगी यानी उपयोगी। क्या सीएम योगी के चेहरे पर ही भाजपा चुनाव लड़ रही है?

योगी जी ने यूपी की माताओं-बहनों-बेटियों, नौजवानों के हृदय में जगह बनाई है। यूपी में माफिया और अपराधियों पर लगाम कसी जा सकती है, पहले की सरकारों में इसकी उम्मीद तक यूपी के लोग छोड़ चुके थे। योगी जी ने एक तरफ ऐसे अराजक तत्वों पर सख्ती की, तो दूसरी तरफ गरीबों के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम किया। भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी गर्व है कि भाजपा की सरकार ने इस सेवा भाव से काम किया है। इसलिए योगी जी यूपी की माताओं-बहनों-बेटियों, किसानों-नौजवानों सभी के प्रतिनिधि हैं।

पहले की सरकारों ने यूपी को बड़ी-बड़ी घोषणाओं और झूठे वादों के सिवाय कुछ नहीं दिया। आज लोग देख रहे हैं कि योगी जी किस तरह स्थितियों को बदलने के लिए, यूपी के विकास के लिए निरंतर परिश्रम कर रहे हैं। इसीलिए यूपी की जनता कह रही है-यूपी+योगी, बहुत उपयोगी। मैं एक और पंक्ति जोड़ देता हूं-जीतेंगे तो योगी ही और उनकी जीत से जीतेगा सबका विकास, जीतेगा सबका विश्वास, जीतेगा सबका प्रयास।

योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को कायम करने में कहां तक सफलता हासिल की है?

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधर भी सकती है, लोग कभी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आप लोगों ने भी 2017 से पहले गुंडे-बदमाशों, अपराधी तत्वों और माफिया की करतूतों को विस्तार से रिपोर्ट किया है। कुशासन की वो यादें न तो अखबारों के आर्काइव से मिटी हैं और न ही हमारी बहन-बेटियां के मस्तिष्क से मिट पाएंगी। जिन दलित, पिछड़े परिवारों के घर जलाए गए, घरों-जमीनों पर अवैध कब्जे हुए और थाने में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती थी, उनको वो अंधेरगर्दी आज भी याद है।

आज अगर राज्य की कानून-व्यवस्था आपको पटरी पर नजर आ रही है, तो यह योगी सरकार के दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम का ही परिणाम है। यूपी में यह कानून का राज ही है, जिसके चलते राज्य में होने वाले दंगे इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। बीते पांच साल में हर जाति-धर्म के त्याेहार सौहार्द भरे माहौल में संपन्न हुए हैं।

बीते पांच साल में यूपी के विकास को आप किस दृष्टि से देखते हैं?

विकास की योजनाओं को लेकर पहले की सरकारों का ढीला-ढाला कामकाज और भाजपा सरकार की तेज गति आज आंकड़ों में भी साफ नजर आती है। आज यूपी में एक्सप्रेस-वे डबल हो रहे हैं, हवाईअड्डों की संख्या भी डबल हो रही है। यूपी देश का एकमात्र राज्य है, जहां 5 शहरों में मेट्रो रेल हैं और 5 पर काम चल रहा है। पिछली सरकार के समय तक जहां 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, आज यह संख्या 35 से ज्यादा हो चुकी है। हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं।

साल 2017 तक जहां यूपी में मेडिकल की सिर्फ 1900 सीटें थीं, वहीं बीते 5 साल में 2100 नई सीटें जोड़ी गईं। शिक्षा क्षेत्र में देखें, अनेक नई यूनिवर्सिटी पांच साल में तैयार हुई। पिछली सरकार अपने कार्यकाल में जहां गरीबों के लिए कुछ हजार ही घर बनवा पाई थी, योगी जी की सरकार ने अपने पांच साल में 34 लाख से ज्यादा घर गरीबों को बनाकर दिए। पिछली सरकार में विकास का मतलब एक ही परिवार का विकास था। इन परिवारवादियों के राज में विकास इनसे शुरू होकर, इन पर ही खत्म होता था।

जबकि भाजपा सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के मंत्र पर काम कर रही है। इस मंत्र पर चलते हुए गरीबों, दलितों, वंचितों, पिछड़ों, छोटे किसानों, महिलाओं, युवाओं और मध्य वर्ग समेत सभी लोगों की भलाई के लिए योजनाएं बनाई गईं और बिना किसी जातिगत और धार्मिक भेदभाव के लागू भी किया। आज यूपी का हर व्यक्ति इस बात का गर्व करता है कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश के विकास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।

डबल इंजन की सरकार ने हर परिस्थिति में, हर जरूरतमंद की, कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक की सेवा के संकल्प को पूरा करने का प्रयास किया है

सूबे में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का नया वर्ग खड़ा हो गया है। इससे भाजपा को कितना लाभ मिलने की संभावना है?

आप जिसे लाभार्थियों का नया वर्ग कह रहे हैं, मैं उन्हें विकास का नया योद्धा मानता हूं। ये वैसे लोग हैं, जो अब अपनी जरूरतों से आगे बढ़कर देश के विकास में दमखम दिखाने को तैयार हैं। आप ये पूछ रहे हैं कि इससे भाजपा को क्या लाभ मिलने वाला है, लेकिन इससे देश को जो लाभ मिलने वाला है, उसकी तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। यही नहीं, आपका सवाल अगर जनता-जनार्दन की दुखती रग पर हाथ रखने जैसा है, तो सत्ता में दशकों तक बैठे लोगों को आईना भी दिखाने वाला है।

आज उत्तर प्रदेश के लोगों को अगर मकान, बिजली-पानी कनेक्शन, शौचालय, गैस कनेक्शन मिल रहे हैं, तो यह हमारी उपलब्धियों के साथ-साथ पुरानी सरकारों के कुशासन का भी प्रतिबिंब हैं। इतने दशकों तक इतनी मूल सुविधाओं से सामान्य जन को वंचित रखने का पाप इन्होंने किया है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने हर परिस्थिति में, हर जरूरतमंद की, कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक की सेवा के संकल्प को पूरा करने का प्रयास किया है।

भाजपा के अधिकतर नेताओं का चुनाव अभियान नकारात्मक हो गया है, विकास और किसानों, युवाओं के मुद्दे गायब हैं?

देखिए मैं अमर उजाला की संपादकीय टीम को एक टास्क देता हूं। आप लोग हमारे संबोधनों का एक वर्ड क्लाउड बनाइए और खुद देखिए। जो शब्द प्रमुखता से बोले गए हैं, वो होंगे घर, राशन, वैक्सीन, कानून व्यवस्था, किसान, इथेनॉल ब्लेंडिंग, हाईवे-एक्सप्रेसवे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर, यूपी का इन्फ्रास्ट्रक्चर। वर्ड क्लाउड में 90 प्रतिशत शब्द आपको यही मिलेंगे। हां, 10 प्रतिशत ऐसा भी हो सकता है कि जहां हम विरोधियों की झूठी घोषणाओं और झूठे आरोपों का जवाब दे रहे होंगे।

मैंने हमेशा अपने संबोधनों में महिला हितों, नौजवानों-किसानों के हितों, रोजगार के अवसरों की बात की है। शुरू से ही सकारात्मकता, सर्वांगीण और समावेशी विकास की सोच को अपनाया है। भाजपा का पूरा चुनाव प्रचार अभियान केंद्र सरकार और राज्य सरकार यानी डबल इंजन की सरकारों द्वारा किए गए चौतरफा विकास के इर्द-गिर्द ही रहा है।

खेती में सुधार के तीन कानून वापस ले लिए गए। अब खेती और खेतिहर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए क्या रणनीति होगी?

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पिछले 7 वर्षों में हम एक केंद्रित और व्यापक रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। पहले सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता था, हमने उत्पादन के साथ-साथ किसानों के लाभ पर भी फोकस किया। हमने बीज से बाजार तक किसानों के लिए नई व्यवस्था बनाने का प्रयास किया, उनमें सुधार का प्रयास किया। छोटे किसानों की छोटी-छोटी जरूरतों को समझा और उसके लिए कार्य किया। पीएम किसान सम्मान निधि हो, करोड़ों किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड हो, फसल बीमा योजना का विस्तार हो, दशकों से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाएं पूरी हों, किसानों को आसानी से कम ब्याज दरों पर ऋण मिले, हमने इन सबका ध्यान रखा। हमने पशुपालकों और मछुआरों को भी किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा से जोड़ा।

ये हमारी ही सरकार है जो एमएसपी पर सरकारी खरीद पर इतना जोर दे रही है। मैं अमर उजाला के पाठकों को कुछ आंकड़े भी दूंगा। 2007 से 2014 के बीच किसानों से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का धान खरीदा गया था। हमारी सरकार के दौरान सात साल में लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये का धान किसानों से एमएसपी पर खरीदा गया है। इसी तरह दलहन के लिए एमएसपी भुगतान लगभग 75 गुना बढ़ा है। एक और अहम बात यह भी है कि एमएसपी का यह पैसा डीबीटी के जरिये सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमारी सरकार कृषि निर्यात को भी बढ़ावा दे रही है। हम खेती को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ रहे हैं। आप देख ही रहे हैं कि किसानों में ड्रोन को लेकर कितना उत्साह है। ड्रोन किसानों की फसलों की देखभाल से लेकर उपज को बाजारों तक पहुंचाने तक, अनेक प्रकार से किसानों की मदद करेंगे। किसानों के लिए हमारे प्रयास एकाध कदम पर आधारित नहीं रहे हैं। यह एक संपूर्ण और व्यापक योजना है, जिस पर हम काम कर रहे हैं और यह फलदायी भी हो रहा है।

यूपी से 2024 के समीकरण साधने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है?

समीकरण उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो चुनावी राजनीति को गणित के खेल के रूप में देखते हैं। इसको जोड़ो, उसे तोड़ो तो चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन चुनाव अब गुणा-भाग नहीं, बल्कि जनता के बीच आपकी केमिस्ट्री से चलते हैं। ऐसी केमिस्ट्री, जहां लोग प्रगति के लिए उत्सुक हैं और सरकार उनकी सेवा करने के लिए। ऐसी केमिस्ट्री जो लोगों को एक बेहतर कल के लिए एक साथ लाती है। चुनाव आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन इन चुनावों के बीच आपका काम लोगों के लिए मायने रखता है। जन कल्याण के लिए काम करने वालों के लिए अगले चुनाव की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वो पिछला चुनाव जीतते हैं। क्योंकि वे पहले दिन से ही काम कर रहे हैं।

पंजाब में आप लंबे अरसे बाद अकाली दल के बिना चुनाव लड़े हैं, नए सहयोगियों के साथ कैसा रिस्पांस मिला?

पंजाब बॉर्डर स्टेट है, मेहनतकश और राष्ट्रभक्ति से भरे हुए लोगों का प्रदेश। स्वाभाविक है कि पंजाब के लोग भाजपा को अपना आशीर्वाद देंगे। जो भारत की सुरक्षा के प्रति ही गंभीर नहीं, जो भारत को एक राष्ट्र ही नहीं मानते, देश की अखंडता व पंजाब की सुरक्षा उनके हवाले नहीं की जा सकती, यह लोग जानते हैं। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने पंजाब की सुरक्षा और विकास का जो संकल्प सामने रखा है, उसको पंजाब की जनता ने भरपूर आशीर्वाद दिया है। पंजाब के लोग भी डबल इंजन की सरकार की ताकत को समझते हैं।

ड्रग्स, सीमा पार से तस्करी की कोशिशें, किसानों की स्थिति, रोजगार के अवसर, अहम मुद्दे हैं। आज आप देखिए, इतनी संभावनाओं से भरा पूरा पंजाब, लेकिन इंडस्ट्री? वो तो पंजाब को छोड़कर जा रही हैं। कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण पंजाब में निवेश को लेकर उत्साह बहुत कम रहा है। इन स्थितियों को डबल इंजन की सरकार ही बदल सकती है। हमने अपने घोषणा-पत्र में अनेक संकल्प लिए हैं। पंजाब में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, पारदर्शी सरकार होगी तो न उद्योगों को पलायन करना पड़ेगा, न नौजवानों को!

काशी में आखिरी दो दिन प्रवास के मायने?

देखिए, काशी में बिताया हर पल मेरे लिए अनमोल होता है। मुझे लगता है कि काशी के लोगों ने मुझे इतना स्नेह दिया है, इतना आशीर्वाद दिया है कि मैं काशी के लिए जितना करूं, वो कम ही है। मैं यहां आता हूं तो अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों से मिलता हूं, बनारस की सड़कों पर टहलता हूं, कभी ठंडई, कभी चाय पीता हूं, मां गंगा को स्पर्श कर आने वाली हवा मुझे अभिभूत कर देती है।

इस पुरातन शहर में जो ऊर्जा हर गली, हर घाट, हर क्षेत्र में हजारों वर्षों से व्याप्त है, उसे मैं भीतर तक महसूस करता हूं। ये अनुभव ही कुछ और होता है। मेरे लिए तो पूरा बनारस ही एक मंदिर की तरह है। यहां का हर जन, मेरे लिए देवी-देवता है। उनकी सेवा करने के लिए, साथ समय बिताने के लिए कई बार तो मुझे दो दिन भी कम लगते हैं।
समाज को आपस में लड़ाकर आगे बढ़ने वालों की राजनीति में संभावनाएं अब हो रहीं खत्म

Source : Amar Ujala