मैं 23 से 26 जुलाई तक ब्रिटेन और मालदीव की यात्रा पर जा रहा हूँ।

भारत और UK, एक ‘कॉम्प्रिहेन्सिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ साझा करते हैं जिसमें हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हमारा सहयोग ट्रेड, इंवेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, डिफेंस, एजुकेशन, रिसर्च, सस्टेनेबिलिटी, हेल्थ और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। प्रधानमंत्री माननीय सर कीर स्टारमर के साथ मेरी मुलाकात के दौरान, हमें अपनी आर्थिक साझेदारी को और बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों में समृद्धि, ग्रोथ और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है। मैं इस यात्रा के दौरान महामहिम King Charles III से भी मिलने के लिए उत्सुक हूँ।

इसके बाद, मैं प्रेसिडेंट महामहिम डॉ. मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के समारोह में शामिल होने के लिए मालदीव की यात्रा करूँगा। इस वर्ष, हमारे दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ भी है। मैं प्रेसिडेंट मुइज्जू और अन्य राजनीतिक नेतृत्व के साथ अपनी बैठकों की प्रतीक्षा कर रहा हूँ ताकि एक ‘कॉम्प्रिहेन्सिव इकॉनॉमिक और मैरिटाइम सिक्योरिटी पार्टनरशिप’ के हमारे जॉइंट विजन को आगे बढ़ाया जा सके और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्टेबिलिटी के लिए हमारे सहयोग को मजबूत किया जा सके।

मुझे विश्वास है कि इस यात्रा से ठोस परिणाम प्राप्त होंगे, जिससे हमारे लोगों को लाभ होगा तथा हमारी ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ को बढ़ावा मिलेगा।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।