अमर उजाला के साथ श्री नरेन्द्र मोदी के इंटरव्यू के कुछ अंश:

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में रेस से ही बाहर है।

अमर उजाला के आशुतोष चतुर्वेदी और संजय पांडेय को दिए ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि नीयत साफ हो तो कठिन से कठिन काम को भी अंजाम दिया जा सकता है। उनका मानना है कि देश के विकास के लिए हर राज्य के हिसाब से अलग-अलग विकास मॉडल बनाए जाने की जरूरत है। प‌ढ़िए नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू विस्तार से-

सवाल: आप प्रधानमंत्री बने तो आपकी प्राथमिकता क्या होगी? संभावित सरकार में आडवाणी जी, जोशी जी जैसे वरिष्ठ नेताओं की क्या भूमिका होगी

जवाब: सरकार बनने पर हमारा पहला काम सरकार तथा सरकारी व्यवस्था में लोगों का भरोसा लौटाना होगा। दूसरा अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए हम प्रभावी कदम उठाएंगे। महंगाई को काबू में करने के लिए भी तत्काल कदम उठाए जाएंगे। सरकारी व्यवस्था में जान फूंकना एवं निर्णय प्रक्रिया को कारगर बनाना होगा। इसके अलावा ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से निजात पाना भी हमारी प्राथमिकता होगी। वरिष्ठ नेताओं की भूमिका का सवाल सरकार बनने के बाद का है। समय आने पर इस पर भी फैसला ले लिया जाएगा।

सवालः चीन भारत के लिए समस्याएं पैदा करता है उसको लेकर आपकी क्या नीति होगी?

जवाबः अपनी सीमाओं की रक्षा करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध रहेगी। परंतु जहां भी सीमा विवाद हो, परिपक्व तरीके से पड़ोसी देशों के साथ बैठकर शांतिपूर्ण रूप से समस्याओं का हल निकालने में हमारा विश्वास है। हम न किसी को आंख दिखाना चाहते हैं और न ही चाहते हैं कि कोई हमें आंख दिखाए। हम चाहते हैं कि आंख से आंख मिलाकर बात करें।

सवालः आपके और अमेरिका के संबंध सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बनते रहे हैं। अमेरिका के साथ संबंध किस दिशा में जाएंगे

जवाबः जब दो देशों के संबंधों की बात की जाए तो व्यक्तिगत क्षति या व्यक्तिगत अनुभव गौण हो जाते हैं। इस बारे में मेरे विचार बहुत स्पष्ट हैं। अमेरिका हो या दुनिया का कोई अन्य देश एक परिपक्व राष्ट्र के रूप में भारत सभी के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने के लिए कटिबद्ध है। अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में एक नए दौर की शुरूआत वाजपेयी जी की सरकार में हुई थी। हम उसे और आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे।

सवालः माना जा रहा है कि आपने सभी क्षेत्रीय दलों से बैर मोल ले लिया है। चाहे वह जयललिता हों या ममता या मायावती अगर सहयोग की जरूरत पड़ी तो बात कैसे बनेगी

जवाबः देखिए, चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर तो चलेगा ही। और यही हमारे लोकतंत्र की विशेषता भी है। मुझे पूरा भरोसा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार केंद्र में बनने जा रही है। भाजपा और साथी दल केंद्र में सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या बल अवश्य हासिल कर लेंगे। हमारा 25 दलों का बड़ा और ताकतवर गठबंधन है और शायद यह भारत के चुनावी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्री पोल अलायंस है।

सवालः गांधी परिवार के बारे में आप क्या सोचते हैं। आप राहुल और सोनिया को तो निशाना बनाते हैं, लेकिन प्रियंका पर कुछ भी नहीं बोलते। जबकि वह आपके खिलाफ बोलने का कोई अवसर नहीं छोड़तीं। आपका क्या कहना है

जवाबः मैं पहले ही कह चुका हूं कि एक बेटी होने के नाते उन्हें अपनी मां और भाई के लिए प्रचार करने का पूरा अधिकार है। यह स्वाभाविक है कि एक बेटी अपनी माता का बचाव करेगी और एक बहन अपने भाई का बचाव करेगी। मुझे इससे कोई समस्या नहीं है।

सवालः राबर्ट वाड्रा आप सभी के निशाने पर हैं। उमा भारती कहती रही हैं कि एनडीए सरकार आई तो वाड्रा जेल में होंगे। वाड्रा के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कोई जांच बिठाएंगे

जवाबः देखिए, हमारा देश कानून के मुताबिक चलता है। यह उच्च पदों पर बैठे लोगों की पसंद या नापसंद के आधार पर नहीं चलता। कानून के ऊपर कोई नहीं है चाहे वह स्वयं नरेंद्र मोदी की क्यों न हों। लिहाजा यह कोई बहस का मुद्दा नहीं है।

सवालः अहमद पटेल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा है कि नरेंद्र मोदी किसी के दोस्त नहीं हो सकते। आप क्या कहना चाहेंगे?

जवाबः मेरा यह बिल्कुल स्पष्ट मत है कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा तो हो सकती है, परंतु दुश्मनी नहीं। शायद किसी राजनीतिक मजबूरी के चलते अहमद भाई को ऐसा बयान देने के लिए विवश होना पड़ा होगा। परंतु जो आप कह रहे हैं वैसा बयान उन्होंने यदि दिया है तो मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि मुझे मेरी दोस्ती मुबारक और उन्हें उनकी दुश्मनी मुबारक।

सवालः महंगाई ने आम आदमी को तबाह कर दिया है आपने अपने भाषणों में जिक्र किया कि महंगाई पर रोक लगाएंगे। आखिर कैसे लगाम लगेगी महंगाई पर

जवाबः महंगाई पर लगाम लगाने के लिए मांग और आपूर्ति के असंतुलन को दूर करने की जरूरत है। इसके लिए खाद्य कानून एवं अन्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। यह तभी संभव होगा जब कृषि पर जोर दिया जाए और सिंचाई सुविधाओं का विकास किया जाए। हमें एक नई सोच के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। हमारी पार्टी के घोषणापत्र में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उल्लेख किया गया है। आश्चर्य की बात है कि आज हमारे देश में कृषि क्षेत्र का कोई रियल टाइम डाटा उपलब्ध नहीं है। लिहाजा कृषि विकास के लिए योजनाएं बनाने का कोई सटीक आधार नहीं होता। हम कृषि क्षेत्र का रियल टाइम डाटा हासिल कर उसके मुताबिक नीतियां और कार्यक्रम बनाएंगे। खाद्यान्न की कीमतों को सुव्यवस्थित रखने के लिए विशेषज्ञ फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा हम गुजरात की श्वेत क्रांति का देश भर में प्रसार करना चाहेंगे।

सवालः एफडीआई के संबंध में आप क्या सोचते हैं। क्या यह भारत की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है। रिटेल में एफडीआई को लेकर आप का क्या मानना है?

जवाबः अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए तेज विकास की जरूरत है। और विकास के लिए निवेश की आवश्यकता है। हमारे यहां निवेश तभी आएगा जब वातावरण अनुकूल होगा। निवेश तभी आएगा जब निवेशकों का भरोसा हम व्यवस्था में लौटा पाएंगे। ऐसे में नीतियों का महत्व तो है ही, परंतु विश्वसनीयता और ट्रैक रिकार्ड भी मायने रखता है। रिटेल एफडीआई में हमारा रुख पार्टी के घोषणापत्र में स्पष्ट कर दिया गया है।

सवालः उत्तर प्रदेश और बिहार से इतनी बड़ी संख्या में इतने बड़े-बड़े नेता आए फिर भी ये राज्य पिछड़े हुए हैं। इन राज्यों की स्थिति कैसे सुधारी जा सकती है

जवाबः आम तौर पर हमारे देश के लोगों की समस्याएं समान हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता को पिछले कई सालों से जातिवाद का जहर फैलाने वाली पार्टियों का कुशासन झेलना पड़ा है। विकास की राजनीति के बजाय यह राज्य अगड़ों-पिछड़ों की राजनीति के चलते विकास की दौड़ से काफी पिछड़ गए हैं। यही वजह है कि देश को अनेक कद्दावर नेता देने वाले ये राज्य आज बेहाल स्थिति में हैं। हमारा मानाना है कि जब तक उत्तर प्रदेश और बिहार विकास की दौड़ में आगे न आएं तब तक भारत विकसित नहीं हो सकता है। उत्तर प्रदेश एवं बिहार के लोगों में और विशेषकर वहां के युवाओं में इस बार भाजपा को लेकर बहुत उत्साह है बहुत आशाएं भी हैं। यदि हम सत्ता में आए तो इन राज्यों के विकास के लिए खास रोडमैप तैयार किया जाएगा। अहम बात नीयत की है। यदि आपकी नीयत सही है तो इन राज्यों में भी विकास की अपार संभावनाएं हैं। भरपूर प्राकृतिक संसाधन से लैस ये राज्य भ्रष्टाचार और कुशासन के चलते ही विकास से महरूम हैं। दरअसल अब ये स्पष्ट हो रहा है कि बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोग भी विकास एवं सुशासन के लिए उतने तत्पर हैं, जितने अन्य राज्यों के लोग। सो हमारी कोशिश होगी कि हम जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पुरजोर प्रयास करें।

सवालः यूपी में भाजपा कितनी सीटें जीतेगी? यूपी में प्रमुख प्रतिद्वंद्वी आप किसे मानते हैं? जवाबः भाजपा उत्तर प्रदेश में भारी अंतर से जीत दर्ज करने जा रही है। कांग्रेस तो रेस में है ही नहीं। वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की अवसरवादी राजनीति को भी जनता अब पहचान चुकी है। देश के सबसे बड़े राज्य की जनता में अब विकास की भूख जाग उठी है। भाजपा की रैलियों में उमड़ रहा अपार जन सैलाब इस बात का सबूत है कि उत्तर प्रदेश में इस बार मुकाबला भाजपा के पक्ष में एकतरफा जाने वाला है। संप्रदाय और जाति की घिसी पिटी राजनीति से ऊब चुकी जनता इस बार भाजपा की विकास की राजनीति पर अपनी मुहर लगाने जा रही है। हम उत्तर प्रदेश में इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे। जैसा कि मैंने सार्वजनिक रूप में कहा है, ‘इस बार यूपी में ‘सबका’ सफाया होने वाला है। यानी सपा बसपा और कांग्रेस का।’

सवालः यदि आप वाराणसी और वडोदरा दोनों सीटें जीतते हैं तो कौन सी सीट छोड़ेंगे

जवाबः इस बात का निर्णय मेरी पार्टी करेगी कि किस सीट से मैं लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करूंगा। पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता होने के नाते मैं अपनी पार्टी के निर्णय का पूरी निष्ठा से पालन करने को प्रतिबद्ध हूं।

सवालः बनारस की गली-मुहल्लों में चर्चा है कि मोदी के आते ही बनारस का कायाकल्प हो जाएगा। लोगों के बीच आपने भारी अपेक्षाएं जगा दी हैं, कैसे होगा यह सब

जवाबः देश की इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी को उसका पुराना गौरव दिलाने के लिए हम विशेष योजना कार्यान्वित करेंगे। हम वाराणसी को वैश्विक धरोहर स्थल के रूप में देखते हैं। ज्ञान आध्यात्म चिंतन और संस्कृति की इस नगरी को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की हमारी मंशा है। गंगा बनारस की जीवन रेखा है। और इसे माता का दर्जा हासिल है। लेकिन सरकारों की उदासीनता के चलते गंगा आज सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में से एक मानी जा रही है। हालांकि इसके सफाई अभियान पर हजारों करोड़ खर्च करने का दावा किया जाता है। लेकिन हकीकत यह बताती है कि गंगा की सफाई के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार ही हुआ है सफाई नहीं। हमारी सरकार गंगा के शुद्धीकरण का कार्य पूरी ईमानदारी से करेगी और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे इसका ध्यान रखेगी। वाराणसी के बुनकर शहर के इतिहास का अभिन्न अंग हैं। बनारसी साड़ी न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर में विख्यात है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस विरासत को दिल्ली और लखनऊ की सरकारों की असंवेदनशीलता का खामियाजा भुगतना पड़ा। वाराणसी के हथकरघा उद्योग को आधुनिक बनाने तथा इसका वैल्यू एडीशन करने के लिए मैं प्रतिबद्ध हूं। इसके विकास के लिए जरूरी बेहतरीन कच्चे माल से लेकर उत्पाद की मार्केटिंग का काम हम सुनिश्चित करेंगे। ताकि बनारसी साड़ी के अतीत का वैभव फिर से स्थापित हो सके। दुनिया भर के ज्ञान केंद्र के रूप में प्रसिद्ध और देश-विदेश के पर्यटकों को लुभाने वाले बनारस में ढांचागत सुविधाएं अपनी बदहाली स्वयं बयां कर रही हैं। यह हमारी सरकारों की लापरवाही या फिर अज्ञानता ही है कि जिस ऐतिहासिक स्थल पर देश दुनिया के लोगों की आवाजाही है वह शहर मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। हम इस बात का पूरा ख्याल रखेंगे कि वाराणसी को ढांचागत सुविधाओं से लैस करें। सड़क बिजली पानी परिवहन और दुनिया भर के अतिथियों के सत्कार के लिए बेहतरीन होटलों की सर्वोत्तम सुविधाएं खड़ी करें। हम चाहते हैं कि पर्यटक जब यहां से वापस लौटे तो वह शहर की सुनहरी यादें अपनी स्मृति में लेकर जाए।

सवालः अपने नामांकन भरने के दौरान एक भावुक बयान दिया था, ‘ तो किसी ने मुझे भेजा है। और खुद आया हूं। मुझे मां गंगा ने बुलाया है।बनारस समेत समूचे यूपी में आप गंगा की स्थिति से भली भांति अवगत हैं कैसे करेंगे गंगा का उद्धार

जवाबः कोई भी काम आपके मनोबल से बड़ा नहीं होता। यदि मन में अटल विश्वास के साथ काम करने की नीयत हो तो हर काम को अंजाम दिया जा सकता है। जहां तक मां गंगा का सवाल है तो आज तक इस संबंध में सिर्फ कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाने के अलावा ठोस कुछ भी नहीं किया गया। केंद्र की सरकार ने गंगा सफाई के नाम पर हजारों करोड़ रुपये फूंक डाले परंतु गंगा आज भी मैली की मैली ही है। मैं यहां गुजरात का एक दृष्टांत पेश करना चाहता हूं। एक वक्त था जब अहमदाबाद में साबरमती नदी एक गंदे नाले के रूप में तब्दील हो गई थी। नदी जैसा कुछ बचा नहीं था। विशालकाय सूखा मैदान बन चुकी साबरमती नदी में शहर भर की गंदगी का अंबार लगा रहता था। हमने शहर के मध्य से गुजरने वाली इस नदी में सफाई अभियान चलाया। नदियों को जोड़ने की योजना के तहत इसे नर्मदा के पानी से छलकाकर वास्तव में इठलाती नदी की सूरत प्रदान की। आज साबरमती नदी शहरवासियों की सैर का मुख्य ठिकाना बन गई है। इससे शहर में खूबसूरती तो बढ़ी ही है, साथ ही बारहों महीने पानी से लबालब होने के कारण शहर का जलस्तर भी ऊंचा हो गया है। कहना सिर्फ इतना है कि एक राज्य के रूप में सीमित संसाधनों के बल पर हमने ऐसी नदी का कायापलट किया जो अपना वास्तविक स्वरूप खो चुकी थी। जाहिर है कि गंगा की सफाई का काम भी कुछ इसी तरह करना होगा। हां इसका दायरा जरूर विशाल होगा। लेकिन बात नीयत और जज्बे की है। करोड़ों देशवासियों की आस्था से जुड़ी मां गंगा के उद्धार के लिए हम ठोस योजना के साथ कार्य को अमली जामा पहनाएंगे।

सवालः चुनाव अभियान के दौरान आप देश भर में घूमे, साथ ही यूपी के लगभग प्रमुख शहरों में आपकी रैलियां हुईं। लोगों की अपेक्षाएं चरम पर हैं। समूचे यूपी का पुनरुद्धार कैसे करेंगे? जवाबः पिछले बरसों के दौरान राजनीति के गिरते स्तर ने सरकारों के प्रति लोगों के मन में तिरस्कार और निराशा की भावना पैदा कर दी है। लंबे अरसे के बाद चुनावी राजनीति में जनता की दिलचस्पी उभरकर सामने आ रही है। समूचे देश में आशा का संचार हो रहा है। मैं इस बात से बखूबी वाकिफ हूं कि जनता को भाजपा से बहुत उम्मीदें हैं। मैं समझता हूं कि हमारी जनता को भी सपने संजोने एवं आशाओं के दीप प्रज्वलित करने का अधिकार है। अपेक्षाओं का चरम पर होना कोई बुरी बात नहीं है। हमें इन बातों का पूरी तरह से ध्यान है और उसी के मुताबिक कड़ी मेहनत करने की मानसिक तैयारी भी हम कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश का विकास हमारी प्राथमिकता में है। इस राज्य के विकास के साथ पश्चिम और पूर्वी भारत के बीच विकास के असंतुलन को साधने में काफी मदद मिलेगी।

सवालः बगैर राज्य सरकार के सहयोग के केंद्र सरकार अकेले कैसे किसी राज्य का स्तर उठा सकती है? जवाबः यह सही है कि केंद्र और राज्य के सहयोग से प्रगति की राह आसान हो जाती है। नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में दोनों पक्षों की सहभागिता विकास को एक नई ऊंचाई प्रदान करती है। हमारा पुरजोर प्रयास होगा कि हम केंद्र और राज्यों के बीच सद्भावनापूर्ण संबंध स्थापित करें। विवादास्पद मुद्दों पर आम सहमति बनाने की कोशिश करें। देशहित का ध्यान रखते हुए हम एक श्रेष्ठ भारत के निर्माण की दिशा में कार्यरत रहेंगे।

सवालः उत्तराखंड में चुनाव प्रचार के दौरान आपने कहा कि उत्तराखंड की त्रासदी ने आपको झकझोर दिया था, लेकिन मुझे आंसू पोंछने की इजाजत नहीं मिली। अब उत्तराखंड के विकास का आपके पास क्या मॉडल है

जवाबः हम सभी पर्वतीय और दूरदराज स्थित राज्यों की विशेष जरूरतों और समस्याओं को समझते हैं। इन राज्यों की सरकारों की सलाह से राज्य आधारित विकास प्राथमिकता मॉडल तैयार किए जाएंगे ताकि लोगों की आकांक्षाएं पूरी हो सकें। भाजपा वैश्विक स्तर पर हिमालय के संरक्षण के लिए चेतना जगाने को प्रतिबद्ध है। इसके तहत कई कदम उठाएं जाएंगे जैसे विभिन्न प्रदेशों और क्षेत्रों को समन्वित कर अंतर-सरकारी साझेदारी के अंतर्गत एक अद्भुत और अभूतपूर्व कार्यक्रम ‘नेशनल मिशन ऑन हिमालय’ शुरू करना। हिमालय संरक्षण फंड की स्थापना करना। हिमालय प्रौद्योगिकी को समर्पित एक केंद्रीय प्रौद्योगिकी की स्थापना करना। हिमालय के ग्लेशियर (जहां से उत्तर भारत की ज्यादातर नदियां निकलती हैं) को पिघलने से बचाने के लिए विशेष कार्यक्रम को महत्व के हिसाब से क्रियान्वित करना। भाजपा उत्तराखंड की खास समस्याओं तथा चुनौतियों का अध्ययन कर विकास की दिशा में उचित कदम उठाएगी।

सवालः पर्यटन उद्योग पर आपका फोकस रहा है। हिमाचल में आपने पर्यटन की अपार संभावनाएं बताईं हैं। आपने खुद को हिमाचल के साथ भावनात्मक रूप में जोड़ा है। हिमाचल की दुर्गम पहाड़ियों के बीच आप विकास का रास्ता कैसे निकालेंगे

जवाबः निश्चित तौर पर पर्यटन आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में अहम रोल अदा कर रहा है। हमारे देश में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन अफसोस हम इसका फायदा नहीं उठा पाए। पहाड़ों की नैसर्गिक खूबसूरती के जरिए सैलानियों का मन मोह लेने वाले हिमाचल में पर्यटन उद्योग के लिए अनुकूल माहौल है। जरूरत है तो बस सरकार द्वारा इस दिशा में कार्य करने की। हम हिमाचल में पर्यटन विकास के लिए स्थानीय वस्तुस्थिति को ध्यान में रखते हुए योजना बनाएंगे। हमारे देश में आध्यात्म की बहुमूल्य विरासत है। हिमाचल में दुनिया भर के बौद्ध मतावलंबियों को आकर्षित करने का माद्दा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्यटन उद्योग के विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर एक पूर्व शर्त मानी जाती है। सड़क बिजली पानी और परिवहन जैसी प्राथमिक सुविधाएं सैलानियों की राह आसान करती है। हमारा प्रयास होगा कि हिमाचल में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर विशेष ध्यान दें।

सवालः कश्मीर देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, इसे कैसे संभालेंगे

जवाबः कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा है। मेरा मानना है कि वहां के लोगों की देश के संविधान में उतनी ही आस्था है, जितनी अन्य राज्यों के लोगों की। इसी तरह भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार उन्हें भी उतने ही हासिल हैं, जितने देश के अन्य नागरिकों को। कश्मीर समस्या दशकों से देश के लिए बड़ी चुनौती रही है। मौजूदा हालात में दो चीजों पर काम करने की जरूरत है, पहली बात कश्मीरी जनता का दिल जीतना। शुरू से ही भ्रामक स्थिति में जी रहे कश्मीरियों को भरोसा दिलाना होगा कि समूचा देश उनके साथ खड़ा है। कश्मीर की तरक्की और अमनचैन के लिए हम नेक नीयत के साथ प्रयास करेंगे। दूसरी बात अविश्वास की खाई को पाटना। कश्मीरी जनता के मन में जो भी अविश्वास है उसे दूर करने के लिए सार्थक प्रयास किए जाएंगे। इसके तहत कश्मीरियों को सुशासन की छांव में सुरक्षा के अहसास के साथ विकास का साझीदार बनाया जाएगा। राज्य में व्याप्त बेरोजगारी से निपटने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। इसके अलाव कश्मीर में व्यवसाय और पर्यटन को नई ऊंचाई पर ले जाने की भी हमारी पार्टी की मंशा है। कुल मिलाकर कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत की नीति पर चलते हुए राज्य को सचमुच ही इस पृथ्वी का स्वर्ग बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।

सवालः पाकिस्तान भारत को लगातार चुनौती देता है, लेकिन यह भी सच है कि आप पड़ोसी नहीं बदल सकते। पाकिस्तान को कैसे साधेंगे

जवाबः मैं अपने विचार इस बारे में पहले ही व्यक्त कर चुका हूं कि हम वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत में विश्वास करते हैं। दोनों देशों का संबंध आपसी सम्मान और सहअस्तित्व पर आधारित होना चाहिए। भारत-पाकिस्तान का एक साझा इतिहास रहा है। दोनों देशों की साझी विरासत है। गरीबी से दोनों जूझ रहे हैं। समाज का एक बड़ा तबका गरीबी की वजह से शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। मैं समझता हूं कि आपस में लड़ने के बजाय दोनों मुल्कों का गरीबी के खिलाफ लड़ना ज्यादा जरूरी है।

Courtesy: Amar Ujala

 

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"भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक होना चाहिए": पीएम मोदी ने तय किया 2047 का विजन
February 17, 2026

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, देश की राजधानी में शुरू हो चुका है। यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतने बड़े लेवल पर कोई ग्लोबल मीटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ANI की टेक्स्ट सर्विस को दिए एक खास इंटरव्यू में "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की थीम के तहत होने वाले इस समिट की गाइडिंग स्पिरिट पर जोर दिया। इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, मंत्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। वे इस बात पर चर्चा करेंगे कि AI का इस्तेमाल कैसे समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंटरव्यू में इस नए युग के लिए भारत के विजन पर जोर दिया और कहा कि AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज करना चाहिए। इंटरव्यू का पूरा विवरण इस प्रकार है:

ANI: भारत ग्लोबल साउथ में पहली बार AI इम्पैक्ट समिट 2026 होस्ट कर रहा है। समिट का मोटो है "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय"। इस समिट का विजन क्या है, और यह मोटो क्यों है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आज, AI एक सिविलाइज़ेशनल बदलाव के पॉइंट पर है। यह इंसानी काबिलियत को ऐसे तरीकों से बढ़ा सकता है जो पहले कभी नहीं हुए, लेकिन अगर इसे बिना गाइडेंस के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सोशल बुनियाद को भी टेस्ट कर सकता है। इसीलिए हमने जानबूझकर इस समिट को इम्पैक्ट के आस-पास बनाया है जो सिर्फ़ इनोवेशन ही नहीं, बल्कि सार्थक और बराबरी वाले नतीजे भी पक्का करता है। गाइड करने वाली भावना, "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय", भारत की सिविलाइज़ेशनल सोच को दिखाती है। टेक्नोलॉजी का आखिरी मकसद 'सबका भला, सबकी खुशी' होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, उसे बदलने के लिए नहीं। यह समिट लोगों, धरती और तरक्की के आस-पास बना है। AI सिस्टम दुनिया भर के समाजों में पैदा हुए ज्ञान और डेटा पर आधारित हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि AI के फायदे सभी तक पहुँचें, न कि सिर्फ़ शुरुआती अपनाने वाले ही इसे जमा करें। ग्लोबल साउथ में हो रहे पहले ग्लोबल AI समिट के तौर पर, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम रिप्रेजेंटेशन वाली आवाज़ों और डेवलपमेंट की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देता है। AI गवर्नेंस, इनक्लूसिव डेटासेट, क्लाइमेट एप्लीकेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी, पब्लिक हेल्थ और कई भाषाओं तक पहुँच हमारे लिए बाहरी मुद्दे नहीं हैं। वे सेंट्रल हैं। हमारा विज़न साफ़ है: AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज़ करना चाहिए।

ANI: आपने हमेशा एम्पावरमेंट और डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात की है। आप विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI, भारत के विकसिट भारत 2047 के सफ़र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मौका है। AI का विवेकपूर्ण, स्ट्रेटेजिक नज़रिए से इस्तेमाल करने से, पूरी तरह से नए आर्थिक मौके बनाने, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने, शहर-गांव के बीच की खाई को पाटने और मौकों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ विकास से जुड़ी गहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। हेल्थकेयर में, AI पहले से ही असर डाल रहा है। हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स पर ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं। एजुकेशन में, भारतीय भाषाओं में AI-पावर्ड पर्सनलाइज़्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, गांव और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को कस्टमाइज़्ड एकेडमिक सपोर्ट पाने में मदद कर रहे हैं। एक बहुत ही अनोखी पहल में, अमूल हज़ारों गांवों में 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, मवेशियों की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पर गुजराती में रियल-टाइम गाइडेंस दे रहा है, और ज़मीनी स्तर की महिला प्रोड्यूसर्स को मज़बूत बना रहा है। खेती में, भारत विस्तार पहल का मकसद AI को फसल सलाह, मिट्टी के एनालिटिक्स और मौसम की जानकारी में जोड़ना है, जिससे किसानों को बेहतर, लोकल फैसले लेने में मदद मिलेगी। विरासत को बचाने में भी, AI पुरानी किताबों के डिजिटाइज़ेशन और मतलब को मुमकिन बना रहा है, जिससे भारत के सभ्यता से जुड़े ज्ञान के सिस्टम खुल रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया AI से बढ़ती दूरियों को लेकर परेशान है, भारत इसका इस्तेमाल दूरियों को मिटाने के लिए कर रहा है। हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक को हेल्थकेयर, शिक्षा और आर्थिक मौके देने के लिए एक अच्छा टूल बना रहे हैं।

ANI: पेरिस में AI एक्शन समिट 2025 में अपनी स्पीच में, आपने AI के बायस और लिमिटेशन पर ज़ोर दिया था। अब से, क्या सिनेरियो बदला है? आप भारत को इस मुद्दे को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI में बायस और लिमिटेशन को लेकर चिंताएं बहुत ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे AI को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। AI सिस्टम अनजाने में जेंडर, भाषा और सोशियो-इकोनॉमिक बैकग्राउंड से जुड़े बायस को बढ़ावा दे सकते हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ ला रहा है और AI के बायस और लिमिटेशन जैसे मामलों पर ग्लोबल अवेयरनेस पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए ग्लोबल कोऑपरेशन की ज़रूरत है। खास तौर पर भारत के लिए, हम यूनिक चैलेंज और मौकों का सामना कर रहे हैं। हमारी डायवर्सिटी - लिंग्विस्टिक, कल्चरल, रीजनल - का मतलब है कि AI बायस ऐसे तरीकों से दिख सकता है जो वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में साफ़ न हों। एक AI सिस्टम जो मुख्य रूप से इंग्लिश डेटा या शहरी कॉन्टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है, वह रूरल यूज़र्स या रीजनल भाषाएं बोलने वालों के लिए खराब परफॉर्म कर सकता है। पॉजिटिव डेवलपमेंट यह है कि भारत इसे ज़्यादा सिस्टमैटिक तरीके से एड्रेस करना शुरू कर रहा है। हम ऐसे डायवर्स डेटासेट बनाने पर ज़्यादा फोकस देख रहे हैं जो भारत की प्लूरलिटी को दिखाते हैं, रीजनल भाषाओं में AI डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है, और इंडियन एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और टेक कंपनियों में फेयरनेस और बायस पर रिसर्च बढ़ रही है।

ANI: आधार और UPI जैसे कम लागत वाले डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में भारत की सफलता शानदार है। DPI और AI का मेल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को काफी बेहतर बना सकता है। इस बारे में भारत क्या सीख रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ को मदद मिल सके?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यात्रा ग्लोबल साउथ के लिए ज़रूरी और प्रैक्टिकल सबक देती है। DPI और AI का मिलना इनक्लूसिव डेवलपमेंट का अगला फ्रंटियर है। आधार, UPI और दूसरी डिजिटल पब्लिक चीज़ों के साथ हमारी सफलता अचानक नहीं हुई। यह कुछ ऐसे सिद्धांतों से आई जिन्हें दोहराया जा सकता है। सबसे पहले, हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक गुड के तौर पर बनाया, न कि किसी प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म के तौर पर। इस ओपन और इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर ने इनोवेशन को एक कॉमन बेस लेयर के ऊपर फलने-फूलने दिया। दूसरा, हमने पहले दिन से ही स्केल और इनक्लूजन के लिए डिज़ाइन किया। हमारे सिस्टम 1.4 बिलियन लोगों के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी सोशियो-इकोनॉमिक स्थिति, लिटरेसी लेवल, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो। जब AI को इस फाउंडेशन पर लेयर किया जाता है, तो गवर्नेंस कहीं ज़्यादा रिस्पॉन्सिव और एफिशिएंट बन सकता है। AI वेलफेयर टारगेटिंग को बेहतर बना सकता है, फ्रॉड का पता लगाने को मज़बूत कर सकता है, इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को इनेबल कर सकता है, अर्बन प्लानिंग को सपोर्ट कर सकता है, और पब्लिक सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ा सकता है। साथ ही, हम पूरे समाज में मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत डेटा प्राइवेसी प्रोटेक्शन, सोच-समझकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और AI लिटरेसी के महत्व को समझते हैं। ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के अपने अनुभव के साथ, भारत यह पक्का करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है कि AI के फायदे आखिरी छोर तक, गांवों में किसानों, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर्स, इनफॉर्मल वर्कर्स और ग्रामीण और शहरी भारत के युवाओं तक पहुंचें, और यह सिर्फ शहरी अमीर लोगों तक ही सीमित न रहे। टेक्नोलॉजी को हर नागरिक की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी इलाके, जेंडर या इनकम का हो। मकसद सिर्फ अपने फायदे के लिए AI को अपनाना नहीं है। यह AI ही है जो सच में नागरिकों को मजबूत बनाता है और 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनने की राह में तेजी लाता है, और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।

ANI: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है। हम दुनिया को एक बड़ी टेक वर्कफोर्स देते हैं। AI के दौर में हम इसे और कैसे बढ़ा सकते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत में AI पावरहाउस बनने के लिए टैलेंट और एंटरप्रेन्योर एनर्जी है, सिर्फ़ एक कंज्यूमर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक क्रिएटर के तौर पर भी। हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI सॉल्यूशन बना सकते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, गवर्नेंस को बेहतर बनाएंगे और नई नौकरियां पैदा करेंगे। मुझे भरोसा है कि हमारे युवा भारतीय हकीकत के लिए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हम अपने टैलेंटेड युवाओं की हर कोशिश को मज़बूत करने के लिए कमिटेड हैं ताकि AI इनोवेशन और इनक्लूजन के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर बन सके। यूनियन बजट 2026-27 इस विज़न को और मज़बूत करता है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट बढ़ाता है, जिससे घरेलू कंप्यूट कैपेसिटी मज़बूत होती है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्स तक एक्सेस के साथ सपोर्ट दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग के लिए लगातार कोशिश हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मज़बूत करती है। शॉर्ट में, हम सिर्फ़ टैलेंट को ही नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर उसे आकार देने तक के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस बना रहे हैं।

ANI: भारत में एक वाइब्रेंट IT सेक्टर है जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट में अहम योगदान दे रहा है। आप AI को हमारे IT सेक्टर पर कैसे असर डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत का IT सेक्टर हमारे सर्विस एक्सपोर्ट की रीढ़ और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक मुख्य ड्राइवर रहा है। AI इस सेक्टर के लिए एक ज़बरदस्त मौका और चुनौती दोनों पेश करता है। AI मार्केट के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक $400 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो AI-इनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन-स्पेसिफिक ऑटोमेशन की नई लहरों से प्रेरित है। बुनियादी बदलाव यह है कि AI IT सेक्टर की जगह नहीं ले रहा है। यह इसे बदल रहा है। जबकि जनरल-पर्पस AI टूल्स आम हो गए हैं, एंटरप्राइज़-ग्रेड AI को अपनाना अभी भी खास सेक्टर्स में ही केंद्रित है, और मौजूदा IT फर्म मुश्किल बिज़नेस समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक मज़बूत भारतीय AI इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, सरकार ने IndiaAI मिशन पर केंद्रित एक व्यापक रणनीति के साथ जवाब दिया है। हम पहले ही GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर चुके हैं और हम स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए वर्ल्ड-क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक सस्ती पहुँच प्रदान करने के लिए और अधिक करने के लिए कमिटेड हैं। हमने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और सस्टेनेबल शहरों में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और स्किलिंग के लिए पाँच नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं ताकि हमारे कर्मचारियों को इंडस्ट्री-संबंधित AI विशेषज्ञता से लैस किया जा सके। हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न सिर्फ़ सर्विस डिलीवरी में, बल्कि भारत और दुनिया के लिए काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफ़ॉर्म और सॉल्यूशन बनाने में भी लीड करे।

ANI: हमने AI के गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण देखे हैं। हम AI टेक्नोलॉजी के संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: टेक्नोलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह इंसानी इरादे के लिए सिर्फ़ एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर है। यह पक्का करना हम पर है कि यह अच्छे के लिए एक फ़ोर्स बने। AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन फ़ैसले लेने की आखिरी ज़िम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए। दुनिया भर में, समाज इस बात पर बहस कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल और उसे कैसे कंट्रोल किया जाना चाहिए। भारत यह दिखाकर इस बातचीत को आकार देने में मदद कर रहा है कि मज़बूत सेफ़गार्ड लगातार इनोवेशन के साथ-साथ रह सकते हैं। इसके लिए, हमें AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट की ज़रूरत है, जो कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर बना हो। इनमें असरदार इंसानी निगरानी, ​​सेफ़्टी-बाय-डिज़ाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफ़ेक, क्राइम और आतंकवादी गतिविधियों के लिए AI के इस्तेमाल पर सख़्त रोक शामिल होनी चाहिए। भारत AI रेगुलेशन में ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अप्रोच की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इंडियाAI सेफ़्टी इंस्टीट्यूट के लॉन्च के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड मैकेनिज़्म बनाया। जैसे-जैसे AI और एडवांस्ड होता जाएगा, हमारी ज़िम्मेदारी की भावना और मज़बूत होनी चाहिए। भारत के अप्रोच को जो बात खास बनाती है, वह है लोकल रिस्क और सामाजिक असलियत पर इसका फ़ोकस। नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं के साथ-साथ कमज़ोर ग्रुप्स को होने वाले नुकसान पर भी विचार करता है, जिसमें महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा के जोखिम और बुज़ुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल हैं। डीपफेक वीडियो में बढ़ोतरी के कारण इन सुरक्षा उपायों की ज़रूरत सभी को साफ़ हो रही है। इसके जवाब में, भारत ने AI से बने कंटेंट की वॉटरमार्किंग और नुकसानदायक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम नोटिफ़ाई किए। कंटेंट सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूज़र अधिकारों को मज़बूत करता है। भारत का कमिटमेंट ग्लोबल लेवल पर भी है। जैसे एविएशन और शिपिंग में बॉर्डर पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नियम हैं, वैसे ही दुनिया को AI में भी आम सिद्धांतों और स्टैंडर्ड्स की दिशा में काम करना चाहिए। चाहे 2023 GPAI डिक्लेरेशन में अपनी भूमिका के ज़रिए, पेरिस AI चर्चाओं में, या मौजूदा समिट में, भारत ने हमेशा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले #AIForAll के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हुए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के संतुलित रास्ते की वकालत की है।

ANI: युवाओं के कुछ हिस्से में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना मुश्किल होगा। भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: मैं जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों को लेकर हमारे युवाओं की चिंता समझता हूँ। तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे अभी की ज़रूरत मान रहे हैं। मैं AI को एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर के तौर पर देखता हूँ जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो हमने मुमकिन समझी थीं। यह डॉक्टरों, टीचरों और वकीलों को ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में मदद करेगा। इतिहास ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी की वजह से काम गायब नहीं होता। इसका नेचर बदलता है और नई तरह की नौकरियाँ बनती हैं। जहाँ कुछ नौकरियाँ फिर से तय हो सकती हैं, वहीं डिजिटल बदलाव भारत की इकोनॉमी में नई टेक नौकरियाँ भी जोड़ेगा। सदियों से, यह डर रहा है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल क्रांतियाँ नौकरियाँ खत्म कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी इनोवेशन होता है, नए मौके सामने आते हैं। AI के ज़माने में भी यही सच होगा। भारत इस बदलाव के हिसाब से ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में, भारत तीसरे नंबर पर रहा, जो AI R&D, टैलेंट और इकोनॉमी में मज़बूत ग्रोथ को दिखाता है। इनोवेशन को इनक्लूजन के साथ मिलाकर, हमें भरोसा है कि AI भारत के वर्कफोर्स को मज़बूत करेगा। सही स्किल्स और तैयारी के साथ, हमारे युवा काम के भविष्य को लीड करेंगे।

ANI: आपके नेतृत्व में, भारत ने 4G और 5G जैसी स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। आत्मनिर्भर भारत के लिए AI पर आपका क्या विजन है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा सफ़र एक बुनियादी उसूल पर बना है: भारत को सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे बनाना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत में AI के लिए मेरा विज़न तीन पिलर पर टिका है: सॉवरेनिटी, इनक्लूसिविटी और इनोवेशन। मेरा विज़न है कि भारत दुनिया भर में टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक हो, सिर्फ़ AI के इस्तेमाल में ही नहीं, बल्कि बनाने में भी। हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाएँगे, जो अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सर्विस देंगे। हमारे AI स्टार्टअप की वैल्यू सैकड़ों अरबों में होगी, जिससे लाखों हाई-क्वालिटी जॉब्स बनेंगी। हमारी AI-पावर्ड पब्लिक सर्विसेज़ की दुनिया भर में कुशल, बराबर गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क के तौर पर स्टडी की जाएगी। और सबसे ज़रूरी बात, हर भारतीय AI को मौके देने वाला, काबिलियत बढ़ाने वाला और इंसानी गरिमा का सेवक समझेगा, न कि अपनी आजीविका के लिए खतरा या कंट्रोल का ज़रिया। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना कोड खुद लिखे, और IndiaAI मिशन के ज़रिए, हम यह पक्का कर रहे हैं कि वह कोड हमारी वैल्यूज को दिखाए, हमारे लोगों की सेवा करे, और भारत को दुनिया के लिए एक रेसपॉन्सिबल AI लीडर बनाए।

स्रोत: ANI News