गुजरात ने गरिमापूर्ण रूप से मनाया शिक्षक दिवस 2012 

 

राज्य के 22 श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान कर मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

 

डेढ़ करोड़ विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ सेटेलाइट टेक्नॉलॉजी के माध्यम से वार्तालाप

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी:
  •  11 सितम्बर से प्राथमिक शालाओं में 30 दिन का विवेकानन्द वांचन पर्व अभियान
  • गुजरात की उत्तम शिक्षकों के निर्माण की अनोखी पहल
  • प्रत्येक जिले में 2 मॉडल स्मार्ट स्कूल
  • एक ईको फ्रेंडली स्कूल
  • एक स्पोर्ट्स स्कूल स्थापित होगा
  • शिक्षा की गुणवत्ता ऊपर लाने के लिए गुणोत्सव का नेतृत्व शिक्षक और समाज करेंगे
  • गुटखा मुक्ति अभियान का प्रतिज्ञा पठन
 

शिक्षक दिवस और शिक्षक सम्मान अवसर को प्राणवान बनाया गया है: श्री मोदी .

 

 

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षक दिवस 2012 के गरिमामय अवसर पर राज्य के श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कृत करते हुए गुजरात में उत्तम शिक्षकों के निर्माण के साथ ही प्रत्येक जिले में दो स्मार्ट स्कूल, एक ग्रीन स्कूल और एक स्पोर्ट्स स्कूल मॉडल के रूप में स्थापित करने की आज घोषणा की। साथ ही यह भी कहा कि 11 सितम्बर से प्राथमिक शालाओं में 30 दिन का विवेकानन्द वांचन पर्व मनाया जाएगा।

श्री मोदी ने राज्यभर की शालाओं के करीब डेढ़ करोड़ जितने विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ सेटेलाइट टेक्नॉलॉजी के माध्यम से शैक्षणिक वार्तालाप किया। मुख्यमंत्री के साथ इस समारोह में मौजूद 15 विद्यार्थियों ने जीवन- विकास के सम्बन्ध में प्रश्नोत्तरी की।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 124 वें जन्मदिन पर आज गांधीनगर में शिक्षक सम्मान और शिक्षा का गौरव बरकरार रहे, इस दिशा में समाज को प्रेरित करने का यह शिक्षक दिवस सम्पन्न हुआ जिसका सीधा प्रसारण किया गया।

मुख्यमंत्री श्री मोदी ने इस मौके पर कहा कि शिक्षक दिवस के इस अवसर में नई जान फूंकने और समाज को शिक्षक के सम्मान की प्रेरणा देने की पहल इस सरकार ने की है। शिक्षकों के लिए मन में आदर की भावना जागे इसके लिए शिक्षकों को पुरस्कृत करने के इस समारोह का सीधा प्रसारण किया गया है ताकि समाज भी शिक्षक के सम्मान की प्रेरणा ले। उन्होंने कहा कि इस देश में गुजरात पहला राज्य है जिसने उत्तम शिक्षकों द्वारा शाला में ज्ञानगुरु की प्राण प्रतिष्ठा हो, इसके लिए इंडियन इंस्टीट्युट ऑफ टीचर्स एज्युकेशन शुरु कर शिक्षा के व्यवसाय और नई पीढ़ी को उत्तम शिक्षक के रूप में उत्तम कैरियर के निर्माण की सुविधा प्रदान की है।

जिनको उत्तम शिक्षक बनना है उनको इस टीचर्स युनिवर्सिटी में शामिल होने का आह्वान करते हुए श्री मोदी ने राज्य की तमाम पीटीसी और बीएड कॉलेजों के शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रमों में एकसूत्रता लाने की प्रतिबद्धता जताई। शिक्षक का ज्ञानदीप भीतर प्रकाशित रहे, ज्यादा तेजस्वी बने इसकी निरंतर प्रक्रिया का भागीदार बननए के लिए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को उत्तम योगदान देने का आह्वान किया।

गुणोत्सव के अभियान को भी गुणात्मक मोड़ देने का संकल्प जताते हुए श्री मोदी ने कहा कि उत्तम शिक्षक, पारितोषिक विजेता शिक्षक और समाज के शुभचिंतक इस गुणोत्सव अभियान का नेतृत्व लें। सिर्फ सरकारी मार्ग से ही नहीं बल्कि समाजशक्ति की ताकत से गुणोत्सव द्वारा प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने की हिमायत करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की आगामी वर्ष में 125 वीं जयंती को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शाला में शिक्षा में सर्वांगीण गुणात्मक परिवर्तन लाया जाना चाहिए।

गुणोत्सव के परिणामस्वरूप राज्य की प्राथमिक शालाओं के बालकों में पढ़ने में रूचि की कमजोर कड़ी खोजकर उपचारात्मक उपाय के रूप में 11 सितम्बर 2012 स्वामी विवेकानन्द दिग्विजय दिवस से 30 दिन तक प्राथमिक शालाओं के बालकों के लिए विवेकानन्द वांचन पर्व मनाए का नया अभियान शुरु करने की रूपरेखा श्री मोदी ने दी। उन्होंने गुटखा मुक्ति अभियान में सामाजिक- पारिवारिक संकल्प के लिए सामूहिक प्रतिज्ञा भी दिलवाई। आनेवाले कल के भव्य गुजरात के निर्माण का अडिग संकल्प जताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक, गुरुजनों के आशिर्वाद और नौजवान मित्रों के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर विवेकानन्द जन्म जयंती पर हमें भारतमाता को जगतगुरु बनाने में श्रेष्ठ योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रमणलाल वोरा ने अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर शिक्षा राज्य मंत्री जयसिंह चौहाण, वसुबेन त्रिवेदी, शिक्षा अग्र सचिव डॉ.हसमुख अढिया, श्रीमती संगीतासिंह, कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, उनके परिजन और विद्यार्थी मौजूद थे। प्राथमिक शिक्षा निदेशक श्रीरावल ने आगंतुकों का आभार जताया।

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प्रधानमंत्री ने उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से सफलता पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 30, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संस्कृत का एक सुभाषितम् साझा किया है, जिसका अर्थ है उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति को अपने कार्यों में लगातार सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अटूट उत्साह उन सभी प्रयासों को सफलता की ओर ले जाता है जिन्हें कोई व्यक्ति पूरा करने का संकल्प लेता है।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

"कर्मशील और ऊर्जावान देशवासी ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं, जिनके परिश्रम से विकास की नई राहें तय होती हैं। इनके प्रयासों से देश समृद्धि, आत्मनिर्भरता और उन्नति के शिखर को छूता है।

अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः।

करोति सफलं जन्तोः कर्म यच्च करोति सः॥"

उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति को अपने कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करती है। यही अटूट उत्साह उन सभी प्रयासों को सफलता की ओर ले जाता है जिन्हें पूरा करने का व्यक्ति संकल्प करता है।