वड़ोदरा में मुख्यमंत्री ने किया इमरजैंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग सेन्टर का उद्घाटन

पेट्रोलियम और केमिकल सेक्टर में आपदा प्रबंधन तंत्र को

आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा : मुख्यमंत्री

अहमदाबाद, रविवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वड़ोदरा के निकट नवागामा में आपदा प्रबंधन के अंतर्गत तत्काल राहत और बचाव सेवाओं का अत्याधुनिक प्रशिक्षण देने वाले इमरजैंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग सेन्टर का उद्घाटन किया। गुजरात में पेट्रोलियम और केमिकल सेक्टरों के विकास के साथ-साथ आपदा प्रबंधन तंत्र को भी आधुनिक और तकनीकी तौर पर लैस बनाने की मंशा जताते हुए श्री मोदी ने इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को प्रोत्साहित करने का संकल्प व्यक्त किया।

डिजास्टर मैनेजमेंट के क्षेत्र में कार्यरत निजी क्षेत्र की कंपनी चेकमेट सर्विसेज की इंस्टीट्युट ऑफ फायर सेफ्टी एंड डिजास्टर मैनेजमेंट स्टडी (आईएफएसडीएमएस) की ओर से वड़ोदरा से 20 किमी दूर वाघोडिय़ा तहसील के नवागामा में इमरजैंसी रिस्पॉन्स ट्रेनिंग सेन्टर शुरू किया गया है। अमेरिका की नेवाडा यूनिवर्सिटी की फायर साइंस एकेडमी के साथ सहभागीदारी कर आईएफएसडीएमएस द्वारा समग्र एशिया में पहली बार इस तरह का आधुनिकतम प्रशिक्षण गुजरात में शुरू किया गया है।

श्री मोदी ने कहा कि विकास के साथ संकट और उससे निपटने की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन आपदाओं से होने वाले नुकसान के असर को नियंत्रित करने के प्रयास भी गुणात्मक परिवर्तन से सफल हो सकते हैं।

गुजरात के महाभयानक भूकंप की आपत्ति को अवसर में पलट कर समग्र देश में पहला आपदा प्रबंधन कानून बनाने की भूमिका पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन और निवारण की की आदर्श व्यवस्था गुजरात ने विकसित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समग्र देश में एक मात्र गुजरात ने स्थानीय निकाय की संस्थाओं नगरपालिका और महानगरपालिकाओं को आधुनिक आपदा प्रबंधन संसाधनों से लैस बनाया है। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का मॉडल अपनाकर इस क्षेत्र में आम आदमी की जिंदगी की सुरक्षा करने का प्रशिक्षण देने और फायर सेफ्टी के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास के लिए नई तकनीक अपनाने पर उन्होंने आईएफएसडीएमएस को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने इंस्टीट्युट का निरीक्षण कर यहां की सुविधाओं और आधुनिक टेक्नोलॉजी के विनियोग की नवीन पद्घतियों को गौर से देखा।

इस अवसर पर उद्योग और व्यापार जगत के अग्रणियों सहित इंस्टीट्युट के पदाधिकारी और आमंत्रित उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मिले-जुले वार्षिकी आधार पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए सड़क निर्माण के संशोधित परिव्यय की मंजूरी दी
March 10, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज उत्तर प्रदेश और हरियाणा में हाइब्रिड वार्षिकी आधार पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए सड़क निर्माण के लिए 3630.77 करोड़ रुपये के संशोधित परिव्यय को स्वीकृति दे दी।

31.42 किलोमीटर लंबा यह गलियारा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधी और उच्च गति का संपर्क मार्ग होगा जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और प्रचालन दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।

यह गलियारा ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ेगा जिससे बहुआयामी परिवहन संभव होगा। यह उच्च गलियारा संरचनात्मक सुधार के साथ ही शहरी अवसंरचना परिवर्तन, क्षेत्रीय संपर्क और राष्ट्रीय परिचालन दक्षता का महत्वपूर्ण साधन होगा। जेवर हवाई अड्डे -दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कॉरिडोर की पूरी क्षमता के उपयोग और फरीदाबाद में सतत शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए इसका निर्माण अत्यंत आवश्यक है।

इस परियोजना का लगभग 11 किलोमीटर लंबा हिस्सा एलिवेटेड मार्ग के रूप में विकसित किया जाएगा जो डीएनडी-बल्लभगढ़ बाईपास और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच नए संपर्क मार्ग का महत्वपूर्ण खंड है और इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ता है। यह गलियारा फरीदाबाद मास्टर प्लान, 2031 के तहत घनी आबादी वाले शहरी विकास और भविष्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार के निर्धारित क्षेत्र से होकर गुजरेगा। प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की अतिरिक्त लागत 689.24 करोड़ रुपये है। हरियाणा सरकार ने इसमें 450 करोड़ रुपये वहन करने पर सहमति जताई है।

दिल्ली-मुंबई मार्ग के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना उपमार्ग से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नए संपर्क मार्ग की परियोजना का संरेखण मानचित्र