गुजरात राज्य आचार्य संघ के अधिवेशन का अंबाजी में उद्घाटन

गांधीनगर, शुक्रवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात राज्य आचार्य संघ के अधिवेशन का अंबाजी में शुभारंभ करते हुए शिक्षा क्षेत्र के कर्मयोगियों से टेक्नोसेवी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी द्वारा शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने में शिक्षक-आचार्य की भूमिका निर्णायक बनेगी।

गुजरात के विकास की दिशा, तेजी और व्यापक दायरे को ध्यान में रखते हुए शिक्षा में परिवर्तन की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री ने बल दिया है। श्री मोदी ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र पर भी टेक्नोलॉजी का सार्वत्रिक प्रभाव बढ़ता रहेगा। आचार्यों को टेक्नोलॉजी के माध्यम से शिक्षा के नये आयाम और माध्यमों की पद्घतियां अपनाने का अनुरोध करते हुए श्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान युग है। ज्ञान युगों में भारत विश्व गुरु बना है और 21वीं सदी में भारत ही विश्व पर सर्वोपरिता प्रस्थापित करे, इसके लिए हमारे युवाओं का सशक्तिकरण और ज्ञान का मार्ग ही उत्तम मार्ग है। स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयंति में युवाशक्ति को हुनर कौशल्य में पारंगत बनाकर सामथ्र्यवान बनाने का उन्होंने आह्वान किया।

विश्व का सबसे युवा देश हिन्दुस्तान है और 65 प्रतिशत युवा संपदा वाले भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नये मौलिक संशोधनों, नये प्रयोगों और नये विचारों को वास्तव में साकार करने की पहल गुजरात ने की है। इसकी भूमिका में मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार ने तेजस्वी बौद्घिकता वाले युवाओं के लिए टेक्नोक्रेट नारायणमूर्ति के मार्गदर्शन में आईक्रिएट वल्र्डक्लास इन्क्यूबेशन सेन्टर शुरू किया गया है। इसके साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में नवीनतम मौलिक प्रयोगों, संशोधनों को प्रोत्साहित करने के लिए गुजरात एजुकेशनल इनोवेशन कमीशन भी कार्यरत किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनों के लिए नीति निर्धारण हेतु नये चिन्तन और मंथन का गुजरात ने हमेशा स्वागत किया है।

ज्ञान-शिक्षा के विशाल दायरे को शामिल कर लेने वाला छत्तीस मेगाहट्र्ज का सैटेलाइट कम्यूनिकेशन ट्रान्सपोंडर गुजरात ने भारत सरकार से हासिल किया है और इसके द्वारा दूरदराज के क्षेत्रों में लॉन्ग डिस्टेंस एजुकेशन देने और शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं को गुणवत्तापूर्ण बनाने की पहल कर दी है। गुजरात सरकार ने उत्तम शिक्षकों की आज के ज्ञान युग के आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए आईआईटीई जैसी टीचर्स यूनिवर्सिटी और युवाओं को हुनर-कौशल्य में पारंगत बनाने के लिए 976 जितने सेवा क्षेत्रों के हुनर-कौशल्य संबंधी पाठ्यक्रमों का संशोधन कर उन्हें तैयार किया है।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में खेल महाकुंभ के माध्यम से नई पीढ़ी को मानसिक कौशल्य के सशक्तिकरण का अवसर दिया गया है। आचार्यों को सरस्वती के उपासक करार देते हुए भारत को विश्वशक्ति बनाने का मुख्यमंत्री ने आह्वान किया।

इस मौके पर शिक्षा राज्य मंत्री जयसिंहजी चौहान, आचार्य संघ के पदाधिकारी और योग संस्थान के मुरलीधर कृष्णा आदि मौजूद थे। आचार्य संघ के प्रमुख दिनेशभाई चौधरी ने स्वागत विधि की जबकि महामंत्री अरविंदभाई ने आभार जताया।

प्रारंभ में आचार्य संघ के प्रमुख दिनेशभाई चौधरी ने स्वागत भाषण में संघ की रचनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम में 1,11,111 का चेक मुख्यमंत्री की कन्या केळवणी निधि में आचार्य संघ ने अर्पित किया। इससे पूर्व, श्री मोदी ने आदिशक्ति पीठ अंबाजी धाम में मां जगदंबा के दर्शन कर प्रार्थना की। मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री का टेम्पल कमेटी अध्यक्ष और कलक्टर वोरा ने स्वागत किया।

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Prime Minister Extends Greetings to everyone on Makar Sankranti
January 14, 2026
PM shares a Sanskrit Subhashitam emphasising the sacred occasion of Makar Sankranti

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today conveyed his wishes to all citizens on the auspicious occasion of Makar Sankranti.

The Prime Minister emphasized that Makar Sankranti is a festival that reflects the richness of Indian culture and traditions, symbolizing harmony, prosperity, and the spirit of togetherness. He expressed hope that the sweetness of til and gur will bring joy and success into the lives of all, while invoking the blessings of Surya Dev for the welfare of the nation.
Shri Modi also shared a Sanskrit Subhashitam invoking the blessings of Lord Surya, highlighting the spiritual significance of the festival.

In separate posts on X, Shri Modi wrote:

“सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की असीम शुभकामनाएं। तिल और गुड़ की मिठास से भरा भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का यह दिव्य अवसर हर किसी के जीवन में प्रसन्नता, संपन्नता और सफलता लेकर आए। सूर्यदेव सबका कल्याण करें।”

“संक्रांति के इस पावन अवसर को देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। मैं सूर्यदेव से सबके सुख-सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

सूर्यो देवो दिवं गच्छेत् मकरस्थो रविः प्रभुः।

उत्तरायणे महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्॥”