कृषि महोत्सव में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मुख्यमंत्री ने किया किसानों से वार्तालाप

67000 हेक्टेयर क्षेत्र में बन्नी घासचारा विकास प्रोजेक्ट : मुख्यमंत्री

अहमदाबाद, सोमवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए नियमित खेती, पशुपालन और वृक्ष की खेती के तीन समान हिस्से को प्रोत्साहित करने की मंशा जतायी है। कृषि महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए किसानों से सीधा वार्तालाप करते हुए श्री मोदी ने कहा कि कच्छ में बन्नी घासचारा विकास सुधार प्रोजेक्ट राज्य सरकार ने 67,000 हेक्टेयर क्षेत्र में शुरू किया है।

             मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती के माध्यम से भी अर्थव्यवस्था को रोजगारोन्मुखी और गतिशील बनाया जा सकता है, यह गुजरात ने कर दिखाया है। गुजरात की सहकारी डेयरियों का दूध प्रतिदिन देश के महानगरों में भेजने के लिए यदि भारत सरकार ज्यादा संख्या में रेलवे के टैंकर मुहैया कराए तो प्रति लीटर एक रुपया परिवहन खर्च की बचत के साथ कुल मिलाकर दूध परिवहन में करोड़ों रुपये की बचत होगी।

पसीने छुड़ाने वाली गर्मी में भी खेती और किसानों की समृद्घि की शीतलता का अनुभव कराते हुए कृषि महोत्सव के आगे बढऩे का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि खेती को आर्थिक तौर पर मजबूत बुनियाद पर ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महज किसान या बरसात के भरोसे खेती का विकास संभव नहीं है। खेती को आर्थिक प्रवृत्ति का आधार बनाने की दीर्घकालिक योजना के साथ गुजरात सरकार आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि, दुर्भाग्य यह है कि खेतीप्रधान देश और गांवों के विषय में चर्चा तो बहुत होती है लेकिन कृषि अर्थव्यवस्था के सुविचारित आयोजन को लेकर कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए जाते। ऐसे में गुजरात सरकार ने कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बुनियाद पर ले जाने के लिए त्रिस्तरीय आयोजन किया है। जिसमें नियमित खेती, पशुपालन और वृक्ष की खेती को बढ़ावा देना शामिल है।

खेती के साथ पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने दस वर्ष पूर्व के उन दुर्भाग्यपूर्ण दिनों को याद किया जब पशुपालकों को अपनी मवेशियों के साथ स्थानांतरण के लिए मजबूर होना पड़ता था, लेकिन इन दस वर्षों में गुजरात ने तस्वीर बदल दी है। इसी तरह वर्षों पूर्व सहकारी डेयरियों को घाटे का सौदा बताकर भूतकाल के शासकों ने इन डेयरियों को बंद कर दिया था। इस सरकार ने 185 करोड़ रुपये सहकारी डेयरियों को सुदृढ़ बनाने के लिए खर्च किये हैं।

डेयरी और पशुपालन विकास की दस वर्ष की विकासयात्रा की भूमिका पेश करते हुए श्री मोदी ने कहा कि दूध मंडलियों की संख्या 10 हजार से 16 हजार तक पहुंची है वहीं, पिछले 10 वर्षों में सहकारी दूध मंडलियों में सभासदों की संख्या 22 लाख से बढक़र 32 लाख तक पहुंच गई है। महिला दूध मंडली जो पहले 800 थी, आज 2250 हो गईं हैं। सहकारी डेयरियों में एकत्र होने वाला दूध 46 लाख लीटर से बढक़र 100 लाख लीटर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि गौचर जमीन को लेकर दुष्प्रचार करने वालों की कोई परवाह नहीं है। डेयरियों की दूध बिक्री का आंकड़ा 2400 करोड़ से बढक़र 12,250 करोड़ रुपये को पार कर गया है। पिछले दस वर्ष में दूध उत्पादन में 68 फीसदी का इजाफा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात की डेयरियों का 8 लाख लीटर दूध मुंबई, 20 लाख लीटर दिल्ली और 5 लाख लीटर दूध कोलकाता पहुंचता है। इसके साथ ही सेना में भी गुजरात की डेयरियों के दूध पावडर की आपूर्ति की जाती है। वनबंधु योजना में आदिवासी पशुपालक मातृशक्ति को संकलित डेयरी विकास कार्यक्रम में जोडक़र पांच लाख आदिवासियों की आय दुगुनी करने के लक्ष्य के मुकाबले छह लाख आदिवासी पशुपालकों की आय दुगुनी की है।

    उन्होंने कहा कि कच्छ-काठियावाड़ के 11 लाख पशुपालक सहकारी डेयरियों पर अपना गुजारा चलाते हैं, ऐसे में डेयरियों को अपग्रेड करने से उनमें नई प्राणशक्ति उत्पन्न हुई है। पशुओं के उत्तम आहार के रूप में घासचारे के उत्पादन को बढ़ाने के लिए गुजरात सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घासचारा का वैज्ञानिक मॉडल गांव-गांव में बने तो उत्तम पोषक आहार पशुओं के लिए उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि कृषि महोत्सव के दौरान एक लाख पशुपालकों को घासचारे के संशोधित बीज की किट्स नि:शुल्क प्रदान की गई है।

 

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