प्रिय मित्रों,

आज हम अपने ६५ वें गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहे हैं. आज से ६४ वर्ष पूर्व अपने संविधान को अंगीकृत कर हम औपचारिक रूप से एक गणतंत्र बने थे. आज का दिन राष्ट्रीय शौर्य और आत्म-विश्वास के प्रदर्शन का है.

गणतंत्र दिवस हम सभी को कई भावनाओं और ज़ज्बों से सराबोर करता है. सारी दुनिया के समक्ष अपने पूर्ण वैभव के साथ संचलन करती भारतीय सैन्य शक्ति के प्रदर्शन की छवियों को यह हमारे मस्तिष्क में उकेरता है. यह हमें एक बार फिर अपने वर्दीधारी महिलाओं और पुरुषों की निस्वार्थ देशभक्ति को सलाम करने की प्रेरणा देता है. साथ ही यह हमें वीरता पुरस्कार प्राप्त जाँबाज सैनिकों के साहसिक कृत्य और पराक्रम की गाथाओं से प्रेरित करता है.

आज का दिन पीछे मुड़कर देखने और अपने गौरवशाली अतीत को स्मरण करने और उसे संजोने का भी है! आज के दिन उन महान क्रांतिकारियों- महिलाओं और पुरुषों, को याद कीजिये जिन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में अपने जीवन को उत्सर्ग कर दिया. संविधान सभा के उन सम्मानित सदस्यों को याद कीजिए जिन्होंने हमें अपने संविधान के जरिये एक ऐसा बुनियादी बल प्रदान किया, जिस पर हमें बहुत गर्व कर सकते हैं. आज का दिन इस पवित्र दस्तावेज़ के प्रति अपने विश्वास और प्रतिबद्धता को दोहराने का भी दिन है जिसने आज के भारत का निर्माण किया है. हम आदरणीय बाबासाहब अम्बेडकर को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं जिनकी (संविधान निर्माण में) महती भूमिका को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है.

महत्वपूर्ण रूप से आज का दिन आत्मनिरीक्षण का दिन भी है. भारतीय गणतंत्र का अर्थ क्या है? हमारे लिए इसके मायने क्या हैं? पिछले सात दशक के दौरान यह किस दिशा में आगे बढ़ा है? और आने वाले वर्षों में एक गणतंत्र के रूप में हमें क्या करने की आवश्यकता है?

एक वाक्यांश जिसने हाल में पर्याप्त ध्यान खींचा है वो है ‘आईडिया ऑफ़ इंडिया’ यानि ‘भारत की अवधारणा’. इस पर जारी सार्वजनिक और अकादमिक संभाषण को कुछ चुनिंदा लोगों ने हथिया लिया है और इस अवधारणा पर अपना एकाकी आधिपत्य कायम करने के लिए वो इसे एक औज़ार के तौर पर इस्तेमाल कर रहें है. कई लोग मुझसे लंबे संपादकीय विचारों और सोशल मीडिया पर पूछते रहते हैं, "मोदी जी बाकी तो सब ठीक है लेकिन भारत को लेकर आपकी अवधारणा क्या है?” कुछ लोग जो हम पर कम मेहरबान हैं, वो इस ‘भारत की अवधारणा’ के बजाय इस के लिए मेरी पार्टी की योग्यता और उपयुक्तता पर बहस करना ज्यादा पसंद करते हैं.

हालांकि, सभी को यह समझना चाहिए कि कोई भी एक व्यक्ति या संस्था ‘भारत की अवधारणा’ पर अपना एकाधिकार स्थापित नहीं कर सकती है. पिछले सप्ताह हुई भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुझे मेरी 'भारत की अवधारणा' के लेकर कुछ संक्षिप्त विचारों को साझा करने का अवसर मिला.

'भारत की अवधारणा' को लेकर मेरी समझ की पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बुनियादी रूप से भारत की अवधारणा की वैचारिक परिकल्पना पर आधिपत्य को खारिज करती है. ऋग्वेद हमें शिक्षा देता है: 'आ नो भद्राः कृतवो यन्तु विश्वतः’. इसका अर्थ है 'हमारी तरफ सब ओर से शुभ विचार आयें’! यह महज एक मंत्र नहीं है बल्कि हमारे संविधान का केन्द्रीय सिद्धान्त भी है. हमारा रास्ता सहिष्णुता का और विविधता के उत्सव का है जहां प्रत्येक भारतीय महज कल्पना ही नहीं करता है, बल्कि अपने सपनों के भारत के निर्माण की दिशा में काम करता है.

मेरी ‘भारत की अवधारणा’ न केवल सहिष्णुता पर आधारित है बल्कि यह विचारों की विविधता का प्रसन्नता पूर्वक समावेश करती है. मेरे ‘भारत के अवधारणा’ में प्रत्येक व्यक्ति की संवेदना का सम्मान किया जाता है.

‘भारत की अवधारणा’ के केन्द्रीय सिद्धान्त का सृजन सत्य, शांति और अहिंसा से होता है! हमारे शास्त्र 'सत्यमेवजयते' की शिक्षा देते हैं, जिसका अर्थ है कि विजय सत्य की ही होती है. मैं एक ऐसे भारत के लिए प्रतिबद्ध हूं जहां न्याय का चक्र वर्ग, जाति या पंथ से प्रभावित हुए बिना भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए तेजी से और समान रूप से घूमता हो. एक ऐसा भारत जहां अन्याय के लिए किसी भी तरह की कानूनी या नैतिक वैधता न हो.

अहिंसा एक ऐसा अन्य गुण है, जो हमारे देश में अति प्राचीन काल से प्रतिष्ठित रहा है और जिसने हमें सदैव दिशा दिखाई है. यह गौतम बुद्ध, महावीर, गुरू नानक और महात्मा गांधी की धरती हैं. हमारे शास्त्रों में लिखा है "अहिंसा परमो धर्म:"- अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है- यह विचार हमारे शास्त्रों में गहनता से समाहित है. इसीलिए 'भारत की अवधारणा' में किसी भी तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है.

वास्तव में 'भारत की अवधारणा' 'वसुधैव कुटुम्बकम्' - या संपूर्ण संसार एक परिवार है- के सिद्धान्त को ग्रहण कर बंधुत्व और मित्रता की इस लोकनीति को भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं करती है. २१वीं सदी एक बार फिर दुनिया के मार्गदर्शन में भारत की भूमिका के लिए उसका आह्वान कर रही है. 'भारत की अवधारणा' स्वामी विवेकानंद के 'जगदगुरु भारत' के सपने को साकार करने की मांग करती है, एक ऐसे आत्मविश्वासपूर्ण और आश्वस्त भारत की जो अपनी शर्तों और सिद्धान्तों के आधार पर वैश्विक समुदाय के साथ संबद्ध हो.

'भारत की अवधारणा' में जो भारत है वो अवसरों और आकांक्षाओं का भारत है. एक ऐसा भारत जहां : ‘सर्वेभवन्तुसुखिन:,सर्वेसन्तुनिरामया:'- अर्थात् जहाँ सभी समृद्ध और खुशहाल हों, सभी रोगों से मुक्त हों. दुर्भाग्यवश, दशकों से चुनिंदा लोगों के वोट बैंक को बढ़ाने के लिए जानबूझ कर गरीबी और निराशा को बनाए रखा गया है. हमारे लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को दब्बूपन और लाचारी में बदल दिया गया. इस मकसद के तहत भारत के एक गरीब राष्ट्र होने की अविश्वसनीय कहानी गढ़ी गई है.

पर अब इस झूठ की कलई खोलने की आवश्यकता है. भारत एक गरीब देश नहीं है, इसे गरीब बनाया गया है! भारत को अकूत प्राकृतिक सम्पदा और अकल्पनीय मानवीय शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त है. कुछ और नहीं बल्कि यह भारत की अथाह, अकल्पनीय समृद्धि ही थी जो हर औपनिवेशिक शक्ति को भारत की ओर खिंची लाई. इस अवचेतन उर्जा को फिर से सजीव किया जा सकता है, आवश्यकता है तो सिर्फ अपने दृष्टिकोण को बदलने की. साथ ही आवश्यकता है की हम पर-निर्भरता छोड़ अपने सपनों का दोहन करें, उन्हें पूरा करने का प्रयास करें. हम भारतीयों में आत्म-गौरव और आत्म-सम्मान का प्रगाढ़ भाव है. हम अपनी दम पर बने हुए (सेल्फ-मेड/ खुदमुख्तार) लोग हैं. हम सिर्फ न्यायोचित और बराबरी का अवसर चाहते हैं. इसीलिये ‘भारत की अवधारणा’ है की हर भारतीय को गरीबी के चंगुल से निकलने और सफलता और समृद्धि की कहानी लिखने का उचित और माकूल अवसर दिया जाए.

अब समय आ गया है की हम अपने देशवासियों को ऊंचे उठने का अवसर दें. उनको सपने देखने की शक्ति और प्रेरणा दें और साथ ही उन सपनों को पूरा करने का सामर्थ्य दें. हमारी युवा-शक्ति उर्जावान है और न केवल इस देश को बल्कि सारी दुनिया को बदलने को तैयार है. यह हमारा उत्तरदायित्व है की हम उनकी कार्य-कुशलता बढ़ाएं और उन्हें रोज़गार के उचित अवसर प्रदान करें. यह भी आवश्यक है की हम अच्छी शिक्षा, उद्यमिता, नव-प्रवर्तन (इनोवेशन), शोध एवं तकनीकि की सहायता से अनवरत उनकी प्रतिभा का संवर्धन करें.

जब जब ज्ञान की प्रधानता हुयी है, भारत ने विश्व को रास्ता दिखाया है. आज जब २१ वीं सदी सूचना और ज्ञान की सदी में तब्दील हो रही है, सम्पूर्ण विश्व एक बार फिर भारत की ओर देख रहा है.

आने वाली सदी की सरंचना मिसाइलों की ताकत से नहीं बल्कि मानव की कुशाग्र बुद्धि से तय होगी. इसीलिए शिक्षा मेरी ‘भारत की अवधारणा’ के मूल में है. शिक्षा, जो हमें अज्ञान के अन्धकार से निकाल कर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाएगी. ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ की अवधारणा भी यही है. मैं ऐसे भारत की कल्पना करता हूँ जहाँ ज्ञान की रौशनी हर घर में फैली हो. मैं ऐसे भारत की कल्पना करता हूँ जहाँ हर बच्चे को सर्वांगीण शिक्षा उपलब्ध हो जो उसके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण कर सके.

किसी भी समाज का विकास महिला-सशक्तिकरण के बिना अधूरा है. पर महिला-सशक्तिकरण का स्वप्न तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक हम एक समाज के तौर पर महिला की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित नहीं करते हैं. महिलाओं पर अत्याचार करने से अधिक शर्मनाक शायद ही कुछ हो. अगर हम अपने देश को भारत माँ या ‘माँ भारती’ का दर्ज़ा देते हैं, अगर हमारे पूर्वज सदियों से नारी के ‘देवी’ रूप की पूजा करते रहे हैं तो हम महिलाओं के प्रति होने वाले किसी भी अपराध को क्यों सहन करते हैं? आइये हम सब मिलकर उन सभी के खिलाफ आवाज़ उठायें जो हमारी मातृशक्ति का अपमान करते हैं.

अभी तक महिला को सिर्फ गृहिणी समझा जाता रहा है पर अब आज यह आवश्यक है कि हम महिलाओं को राष्ट्र-निर्मात्री के तौर पर देखें जो हमारे भविष्य को मूलभूत रूप से परिभाषित कर सकती हैं.

भारत का विकास एक मज़बूत संघराज्य के बिना संभव नहीं है. हमारे संविधान निर्माताओं ने एक मज़बूत संघीय ढाँचे का सपना देखा था जहाँ सभी राज्य और केंद्र विकास की यात्रा में बराबर के सहभागी हों. जहाँ कोई बड़ा न हो, कोई छोटा न हो. हमें उस मनःस्थिति को बदलना होगा जहाँ राज्यों का अस्तित्व दिल्ली की दया पर निर्भर हो. हमें यह मानना होगा कि हमारे देश के खजाने में संचित धन पर देश के सभी नागरिकों का अधिकार है.

हम ऐसे भारत का सपना देखते हैं जहाँ देश का विकास सभी मुख्य-मंत्रियों, प्रधान-मंत्री, केंद्रीय मंत्रियों के साँझा प्रयास की परिणिति हो और जिसमे स्थानीय निकायों के अधिकारियों तक का योगदान सम्मिलित हो और यह सभी एक मजबूत, एकीकृत और संयुक्त ‘टीम इंडिया’ के तौर पर काम करें.

मित्रों, हम पर प्रभु की असीम अनुकम्पा है. हमारे पास अकल्पनीय प्राकृतिक और मानवीय सम्पदा है. हमारे पास सदियों से पूर्वजों द्वारा विकसित की गयी गौरवशाली परंपरा और संस्कृति की महान विरासत है. हमारी इकलौती सभ्यता है जो हमेशा समय की कसौटी पर खरी उतरी है. अन्य सभ्यताएं आयीं और गयीं, समाज-समुदाय पनपे और बिखर गए पर हमने हर चुनौती को पार किया और हम हर बार पहले से भी मजबूत हो कर उभरे हैं.

हाँ, यह सच है की विगत वर्षों में बहुत सी बाधाएँ आयीं हैं और हमें कई बड़ी और गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. यह भी सच है की हमें बहुत कुछ हासिल करना बाकी है. फिर भी ‘भारत की अवधारणा’ अक्षुण्ण है और संदेह से परे है. मुझे भारत की अन्तर्निहित शक्तियों और सामर्थ्य में पूरा विश्वास है. मेरा आपसे अनुरोध है की आप भी यह विश्वास रखें.

आइये हम अपने देश और देशवासियों में आस्था रखें और अपने महान नेताओं के निःस्वार्थ त्याग और बलिदान का समुचित सम्मान करते हुए उनके द्वारा दिखाए पथ पर आगे बढ़ें.

आइये हम अपने आप को राष्ट्र निर्माण के कार्य में ‘भारत सर्वोपरि’ के मन्त्र के साथ समर्पित करें और मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण करें जो फिर से मानवता की परिभाषा को सकारात्मक स्वरुप दे.

विकास की यात्रा में सदैव आपके साथ,

नरेन्द्र मोदी

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s semiconductor market to cross $100 billion by 2030, projects PM Modi; unveils Rs 3,300 cr Kaynes plant in Gujarat

Media Coverage

India’s semiconductor market to cross $100 billion by 2030, projects PM Modi; unveils Rs 3,300 cr Kaynes plant in Gujarat
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: AI के लिए मानव-केंद्रित भविष्य का निर्माण
February 22, 2026

मानव इतिहास के एक निर्णायक दौर में, दुनिया नई दिल्ली में आयोजित ‘AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में एक साथ जुटी। भारत के लिए यह बेहद गर्व और खुशी का अवसर था, जब हमने दुनिया भर से आए राष्ट्राध्यक्षों, सरकारों के प्रमुखों, प्रतिनिधियों और इनोवेशन से जुड़े लोगों का स्वागत किया।

भारत जो भी करता है, उसे बड़े पैमाने और पूरे उत्साह के साथ करता है, और यह समिट भी इससे अलग नहीं थी। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। इनोवेटर्स ने अत्याधुनिक एआई उत्पाद और सेवाएं पेश कीं। प्रदर्शनी हॉल में हजारों युवा नजर आए, जो सवाल पूछ रहे थे और नई संभावनाओं की कल्पना कर रहे थे। उनकी जिज्ञासा ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लोकतांत्रिक AI समिट बना दिया। मैं इसे भारत की विकास यात्रा का अहम पड़ाव मानता हूं, क्योंकि AI इनोवेशन और उसके इस्तेमाल को लेकर जन आंदोलन सच में शुरू हो चुका है।

मानव इतिहास में कई ऐसी तकनीकी क्रांतियां हुई हैं, जिन्होंने सभ्यता की दिशा बदल दी। आर्टिफिशियल-इंटेलिजेंस भी आग, लेखन, बिजली और इंटरनेट जैसी ही बड़ी खोजों की श्रेणी में आती है। लेकिन AI के साथ फर्क यह है कि जो बदलाव पहले दशकों में होते थे, वे अब कुछ ही हफ्तों में हो सकते हैं और पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

AI मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन यह मानव की सोच और इरादों को कई गुना ताकत देने वाला साधन भी है। इसलिए AI को मशीन केंद्रित नहीं, बल्कि मानव केंद्रित बनाना बेहद जरूरी है। इस समिट में हमने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत के साथ ग्लोबल AI चर्चा के केंद्र में मानव कल्याण को रखा।

मैं हमेशा मानता रहा हूं कि तकनीक लोगों की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि लोग तकनीक के लिए। चाहे बात UPI के जरिए डिजिटल भुगतान की हो या कोविड टीकाकरण की, हमने यह सुनिश्चित किया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर हर व्यक्ति तक पहुंचे और कोई पीछे न छूटे। समिट में भी यही भावना साफ दिखी। कृषि, सुरक्षा, दिव्यांगजनों की सहायता और बहुभाषी समाज के लिए उपकरण जैसे क्षेत्रों में हमारे इनोवेटर्स के काम में यह सोच नजर आई।

भारत में AI की ताकत लोगों को सशक्त बनाने के कई उदाहरण पहले से मौजूद हैं। हाल ही में भारतीय डेयरी सहकारी संस्था AMUL द्वारा शुरू की गई AI आधारित डिजिटल सहायक ‘Sarlaben’ 36 लाख डेयरी किसानों, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, को उनकी अपनी भाषा में पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन से जुड़ी रियल टाइम जानकारी दे रही है। इसी तरह ‘Bharat VISTAAR’ नाम का AI आधारित प्लेटफॉर्म किसानों को बहुभाषी जानकारी देता है। मौसम से लेकर बाजार भाव तक की जानकारी देकर यह उन्हें सशक्त बना रहा है।

इंसानों को डेटा पॉइंट, मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए

इंसानों को कभी भी सिर्फ डेटा पॉइंट या मशीनों के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए। इसके बजाय, AI को दुनिया की भलाई के लिए एक टूल बनना चाहिए, जो ग्लोबल साउथ के लिए तरक्की के नए दरवाजे खोले। इस सोच को अमल में लाने के लिए, भारत ने मानव-केंद्रित AI गवर्नेंस के लिए MANAV फ्रेमवर्क पेश किया।

M – नैतिक और एथिकल सिस्टम: AI को एथिकल गाइडलाइंस पर आधारित होना चाहिए।
A – जवाबदेह गवर्नेंस: पारदर्शी नियम और मजबूत निगरानी।
N – राष्ट्रीय संप्रभुता: डेटा पर राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान।
A – सुलभ और समावेशी: AI पर मोनोपॉली नहीं होनी चाहिए।
V – वैध और प्रामाणिक: AI को कानूनों का पालन करना चाहिए और वेरिफाई किया जा सकने वाला होना चाहिए।

MANAV, जिसका मतलब है “इंसान”, ऐसे सिद्धांत बताता है जो 21वीं सदी में AI को इंसानी मूल्यों से जोड़ते हैं।

भरोसा ही वह नींव है जिस पर AI का भविष्य टिका है। जैसे-जैसे जेनरेटिव सिस्टम दुनिया को कंटेंट से भर रहे हैं, डेमोक्रेटिक समाजों को डीपफेक और गलत जानकारी से खतरा है। जैसे खाने की चीज़ों पर न्यूट्रिशन लेबल होते हैं, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर ऑथेंटिसिटी लेबल होने चाहिए। मैं दुनिया भर के लोगों से वॉटरमार्किंग और सोर्स वेरिफिकेशन के लिए शेयर्ड स्टैंडर्ड बनाने के लिए एक साथ आने की अपील करता हूं। भारत ने पहले ही इस दिशा में एक कदम उठाया है, जिसमें सिंथेटिक तरीके से बनाए गए कंटेंट की साफ लेबलिंग को कानूनी तौर पर ज़रूरी कर दिया गया है।

हमारे बच्चों की भलाई हमारे दिल के बहुत करीब है। AI सिस्टम को ऐसे सेफगार्ड के साथ बनाया जाना चाहिए जो जिम्मेदार, फ़ैमिली-गाइडेड एंगेजमेंट को बढ़ावा दें, और वैसी ही केयर दिखाएं जैसी हम दुनिया भर के एजुकेशन सिस्टम में करते हैं।

टेक्नोलॉजी का सबसे ज़्यादा फ़ायदा तब होता है जब उसे शेयर किया जाता है, न कि उसे एक स्ट्रेटेजिक एसेट की तरह बचाकर रखा जाता है। ओपन प्लेटफ़ॉर्म लाखों युवाओं को टेक्नोलॉजी को ज़्यादा सुरक्षित और ज़्यादा ह्यूमन-सेंट्रिक बनाने में मदद कर सकते हैं। यह कलेक्टिव इंटेलिजेंस ही इंसानियत की सबसे बड़ी ताकत है। AI को एक ग्लोबल कॉमन गुड के तौर पर विकसित होना चाहिए।

हम एक ऐसे दौर में जा रहे हैं जहाँ इंसान और इंटेलिजेंट सिस्टम मिलकर बनाएंगे, मिलकर काम करेंगे और मिलकर आगे बढ़ेंगे। पूरी तरह से नए प्रोफेशन सामने आएंगे। जब इंटरनेट शुरू हुआ, तो कोई भी इसकी संभावनाओं के बारे में सोच भी नहीं सकता था। इसने बहुत सारे नए मौके पैदा किए, और AI भी ऐसा ही करेगा।

मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे मज़बूत युवा AI युग के असली ड्राइवर होंगे। हम दुनिया के कुछ सबसे बड़े और सबसे अलग-अलग तरह के स्किलिंग प्रोग्राम चलाकर स्किलिंग, रीस्किलिंग और लाइफलॉन्ग लर्निंग को बढ़ावा दे रहे हैं।

भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी और टेक्नोलॉजी टैलेंट का घर है। हमारी एनर्जी कैपेसिटी और पॉलिसी क्लैरिटी के साथ, हम AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए खास स्थिति में हैं। इस समिट में, मुझे भारतीय कंपनियों को स्वदेशी AI मॉडल और एप्लिकेशन लॉन्च करते देखकर गर्व हुआ, जो हमारी युवा इनोवेशन कम्युनिटी की टेक्नोलॉजिकल गहराई को दिखाते हैं।

हमारे AI इकोसिस्टम की ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए, हम एक मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर फाउंडेशन बना रहे हैं। इंडिया AI मिशन के तहत, हमने हज़ारों ग्राफ़िक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाए हैं और जल्द ही और लगाने वाले हैं। बहुत सस्ते रेट पर वर्ल्ड-क्लास कंप्यूटिंग पावर एक्सेस करके, सबसे छोटे स्टार्ट-अप भी ग्लोबल प्लेयर बन सकते हैं। इसके अलावा, हमने एक नेशनल AI रिपॉजिटरी बनाई है, जिससे डेटासेट और AI मॉडल तक एक्सेस सबको मिलता है। सेमीकंडक्टर और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर वाइब्रेंट स्टार्ट-अप और एप्लाइड रिसर्च तक, हम पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहे हैं।

भारत की विविधता, लोकतंत्र और डेमोग्राफिक गतिशीलता सबको साथ लेकर चलने वाले इनोवेशन के लिए सही माहौल देते हैं। भारत में सफल होने वाले समाधान हर जगह मानवता की सेवा कर सकते हैं। इसीलिए दुनिया से हमारा आह्वान है: भारत में डिजाइन और डेवलप करें। दुनिया तक पहुंचाएं। मानवता की सेवा में पहुंचाएं।

स्रोत: The Jerusalem Post

(लेखक भारत के प्रधानमंत्री हैं)