परीक्षा पे चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल के युवा श्रेयान रॉय ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा, " क्या परीक्षा में असफलता वास्तव में हमारे जीवन में हमारे लिए विफलता है? श्रेयान के सवाल का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने कहा," अकेले मार्क्स कभी भी सफलता या विफलता का निर्धारण नहीं करते हैं। जीवन में हम जो करते हैं वह सबसे ज्यादा मायने रखता है।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "परीक्षा में आपके जो नंबर आए, वो आपकी योग्यता का पैमाना नहीं हो सकते। भारत ही नहीं, दुनिया में आप ऐसे बहुत से सफल लोगों को देखेंगे जो क्लास में नंबरों में भले अच्छे नहीं थे, लेकिन आज वो अपनी फील्ड में सर्वश्रेष्ठ हैं। परीक्षा सिर्फ़ एक पड़ाव है।“
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, " एक चीज है जिससे हमें बचना चाहिए, वह है डेस्टिनेशन फीवर। एक ये नई तरह की कुरीति समाज में आ रही है। मतलब, दूसरे अगर किसी एक डेस्टिनेशन पर हैं तो उन्हें देखकर अपना डायरेक्शन तय करना। आपका कोई रिश्तेदार कहीं जाकर सफल हुआ, आपको लगता है कि वहां जाकर आप भी सफल हो जाएंगे। कोई असफल हुआ तो आपको लगता है हम भी उसी फील्ड में गए तो असफल हो जाएंगे।"
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 21, 2026
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥ pic.twitter.com/wiaXL3jabi


